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Tuesday, August 11, 2026
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करांची बंदरगाह के पास गरजेंगे सुखोई- 30एमकेआई और जगुआर लड़ाकू विमान

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नई दिल्ली। भारत बुधवार को पाकिस्तान के करांची बंदरगाह से करीब अपने सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स सुखोई-30 एमकेआई और जगुवार को उतारने जा रहा है। ये विमान फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर अरब सागर के ऊपर एक बड़े पैमाने पर त्रिपक्षीय वायु युद्धाभ्यास की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना और हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में सैन्य अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में अपने सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की तैनाती करेगी। इसमें सुखोई-30एमकेआई और जगुआर लड़ाकू विमान शामिल होंगे। इनके साथ आईएल-78 मिड-एयर रिफ्यूलर विमान और एईडब्ल्यूएंडसी विमान भी तैनात किए जाएंगे। ये सभी विमान गुजरात के जामनगर और नलिया एयरबेस से उड़ान भरेंगे। अभ्यास के दौरान गहन युद्ध कुशलता और कॉम्बैट मैन्यूवर्स का प्रदर्शन होगा। फ्रांस और यूएई की ओर से राफेल और मिराज लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अन्य विमान हिस्सा लेंगे, जो अल धाफरा एयरबेस से आएंगे। भारत ने इस अभ्यास क्षेत्र के लिए नोटम जारी किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभ्यास क्षेत्र पाकिस्तान के करांची तट से करीब 200 नॉटिकल मील दूर स्थित है और यह 10-11 दिसंबर तक चलेगा। तीनों देशों ने इससे पहले भी दिसंबर 2024 में डेजर्ट नाइट नाम से ऐसा ही वायु युद्धाभ्यास किया था। अब यह दूसरा मौका है जब भारत, फ्रांस और यूएई एक साथ हवाई युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेगा। भारत लगातार क्षेत्रीय देशों, खासकर फारस की खाड़ी के देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। इसमें फ्रांस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी अहम भागीदार हैं। 
रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास रीयल परिचालन वातावरण में लड़ाकू कौशल, रणनीति और प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने में मदद करते हैं। बता दें भारत, फ्रांस और यूएई की नौसेनाओं ने जून 2023 में पहली बार त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास किया था। उस अभ्यास में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए समुद्र में कई प्रकार के ऑपरेशंस पर जोर दिया गया था। यह त्रिपक्षीय सहयोग 2022 में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा शुरू की गई पहल का हिस्सा है। इसके तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और पर्यावरण समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

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