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Sunday, October 11, 2026
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लोकसभा में सभापति ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

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नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसदों ने वोट किया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी।  प्रस्ताव पर लोकसभा में 10 घंटे तक चर्चा होना संभावित है। 
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने यह अविश्वास प्रस्ताव लाया है। चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार और नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर और बुजदिल साबित हो रहा है। गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्पीकर अनुपस्थित हों तो डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल किस अधिकार से सदन की कार्यवाही चला रहे हैं। 
दरअसल, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। परंपरा के अनुसार यह पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता रहा है। 16वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान सहयोगी दल अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। हालांकि 17वीं और 18वीं लोकसभा में अब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। 
सदन की कार्यवाही के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर स्वयं कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और चेयर पर बैठे सदस्य भी स्पीकर की अनुमति से ही आए हैं, इसलिए उन्हें इस प्रस्ताव पर कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने मांग की कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। 
इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की तरह कार्यवाही संचालित करने की शक्ति रखता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस तर्क का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति जरूरी है। अंत में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना चाहते हैं, उन्हें बाद में बोलने का अवसर दिया जाएगा।  

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News Desk

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