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Saturday, October 10, 2026
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मराठी अस्मिता की लड़ाई जारी रहेगी

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मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अलग-अलग बयानों में साफ कर दिया है कि चुनावी हार के बावजूद मराठी पहचान, अधिकार और सम्मान की राजनीतिक लड़ाई थमी नहीं है।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव परिणामों के बाद जारी अपने संदेश में मराठी समाज, मराठी भाषा और महाराष्ट्र के विकास के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने का अर्थ यह नहीं कि पार्टी या कार्यकर्ता हिम्मत हार जाएं। राज ठाकरे ने कहा कि यह चुनाव पैसों और सत्ता की ताकत के खिलाफ शिवशक्ति की लड़ाई थी, जिसमें मनसे कार्यकर्ताओं ने पूरी मजबूती से मुकाबला किया।
उन्होंने मनसे और शिवसेना के सभी निर्वाचित पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा। राज ठाकरे ने माना कि संगठन से कुछ कमियां भी रहीं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन्हीं अनुभवों से सीख लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राज ठाकरे ने अपने बयान में दो टूक कहा कि उनका संघर्ष मराठी लोगों, मराठी भाषा, मराठी पहचान और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है। उन्होंने निर्वाचित पार्षदों से अपील की कि वे नगर निकायों में मराठी समाज के हितों की मजबूती से रक्षा करें और यदि मराठी लोगों के खिलाफ कोई अन्याय होता है तो उसका जवाब पूरी ताकत से दें। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सत्ता में बैठे लोग और उनके समर्थक बार-बार मराठी समाज को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट रहना जरूरी है। उन्होंने संगठन को फिर से खड़ा करने और जमीनी स्तर पर काम तेज करने का आह्वान किया।
अपने संदेश के अंत में राज ठाकरे ने भावुक अपील करते हुए कहा कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन उनकी राजनीति और जीवन का हर पल मराठी के लिए समर्पित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब निराश होने के बजाय फिर से जुटकर पार्टी को नई दिशा देनी होगी और मराठी समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाना होगा।
– लड़ाई अभी खत्म नहीं
उधर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भी बीएमसी चुनावों में हार के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मराठी समाज को उसका हक, अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता। पार्टी के बयान में संकेत दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) मराठी अस्मिता, स्थानीय अधिकारों और मुंबई-महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठाएगी।

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News Desk

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