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बावुमा की भारत से बड़ी सीरीज की मांग, कहा– एशेज जैसी प्रतिद्वंद्विता हम भी डिजर्व करते हैं

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नई दिल्ली : भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चल रही दो-टेस्ट की छोटी सीरीज ने प्रोटियाज कप्तान टेम्बा बावुमा की नाराजगी को खुलकर उजागर कर दिया है। WTC चैंपियन बनने के बावजूद साउथ अफ्रीका को भारत जैसे दिग्गज के खिलाफ सिर्फ दो टेस्ट खेलने पड़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इंग्लैंड–ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें एशेज़ में पाँच मैचों की लंबी भिड़ंत का आनंद ले रही हैं। बावुमा का मानना है कि दो सबसे मजबूत रेड-बॉल टीमों के बीच इतनी छोटी सीरीज़ न तो खिलाड़ियों के साथ न्याय है, न फैंस के साथ। यह मुद्दा फिर से क्रिकेट शेड्यूलिंग और कमर्शियल प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

एशेज देखकर बढ़ी ‘जलन’ : बावुमा की साफ टिप्पणी
गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान बावुमा ने बताया कि उन्होंने सुबह ऑस्ट्रेलिया में चल रहा एशेज़ टेस्ट देखा और इस दौरान “थोड़ी जलन” महसूस की। उन्होंने कहा, “आज सुबह उठकर एशेज देखा। पाँच टेस्ट खेलते देख थोड़ा जलन हुई। वे एक-दूसरे पर हावी होंगे, और हमें सिर्फ दो मैच मिले हैं।” यह बयान साफ दिखाता है कि कप्तान इस छोटी सीरीज से खुश नहीं हैं, खासकर तब जब उनकी टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन है।

“हम इंडिया के खिलाफ बड़ी सीरीज डिजर्व करते हैं” 
बावुमा ने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में साउथ अफ्रीका को भारत के खिलाफ चार या 5 टेस्ट की सीरीज मिलेगी। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि जल्द ही हम इंडिया के खिलाफ चार टेस्ट खेलने के लिए लौटेंगे।” बावुमा के अनुसार, मजबूत टीमों के बीच लंबी सीरीज ही फैन्स को असली रोमांच देती है और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका भी।

शेड्यूल खिलाड़ियों के हाथ में नहीं 
प्रोटियाज कप्तान ने स्पष्ट किया कि टेस्ट सीरीज़ के मैचों की संख्या खिलाड़ी तय नहीं करते। यह पूरा मामला बोर्ड्स की कमर्शियल प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। एशेज, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (भारत–ऑस्ट्रेलिया), एंडरसन–तेंदुलकर ट्रॉफी (भारत–इंग्लैंड) इन सीरीज को 5 टेस्ट इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे आर्थिक दृष्टि से सबसे ‘लाभकारी’ मानी जाती हैं। इसके विपरीत भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेस्ट इंडीज या बांग्लादेश अधिकतर सीरीज केवल दो टेस्ट की होती हैं।

दो-टेस्ट सीरीज क्यों “अधूरी” लगती है?
बावुमा ने तर्क दिया कि दो मैचों की सीरीज में अक्सर परिणाम अधूरा रह जाता है, ड्रॉ सीरीज होने के चांस बढ़ते हैं और एक टीम को जीतने का वास्तविक मौका कम मिलता है। उन्होंने कहा, “चाहे सीरीज 1-1 रहे, 2-0 या 0-2, तीन टेस्ट की सीरीज हमेशा बेहतर होती है। एक टीम हावी होती है, दूसरी वापसी करती है—फैंस को असली टेस्ट क्रिकेट मिलता है।”

“हम मैदान पर अच्छा खेलेंगे, तभी चीज़ें बदलेंगी”
बावुमा ने कहा कि साउथ अफ्रीका अपनी नाराज़गी दर्शा सकता है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब वे मैदान पर शीर्ष टीमों को लगातार चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “हम बस अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं। यही दूसरे देशों को हमारे साथ ज्यादा टेस्ट खेलने के लिए आकर्षित करेगा।”

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