प्रियंका चतुर्वेदी को टिकट क्यों नहीं मिला? संजय राउत ने खोला नंबरों के गणित का पूरा राज

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

महाराष्ट्र। में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। राज्य की सात सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसके लिए उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) गुट ने प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। पार्टी नेता संजय राउत ने गुरुवार को इसकी वजह बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक समीकरणों का साथ न देना और शरद पवार की उम्मीदवारी के कारण पार्टी प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा मैदान में नहीं उतार सकी। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि पार्टी में यह इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी फिर से राज्यसभा जाएं। लेकिन हमारे पास जरूरी संख्या नहीं थी। इसके अलावा, शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता के मैदान में आने से यह सीट लड़ना मुश्किल हो गया था। इन्हीं वजहों से हमें यह फैसला लेना पड़ा।

पवार नहीं लड़ते तो चतुर्वेदी को मिलता मौका

संजय राउत ने आगे कहा कि अगर राजनीतिक गणित हमारे पक्ष में होता और पवार साहब चुनाव नहीं लड़ते, तो शिवसेना (यूबीटी) 100 प्रतिशत यह सीट लड़ती। तब प्रियंका चतुर्वेदी को दूसरा मौका जरूर दिया जाता। बता दें कि महाराष्ट्र से राज्यसभा की सात सीटें अगले महीने खाली हो रही हैं।

MVA ने पवार को दिया समर्थन

बुधवार को कांग्रेस ने महाराष्ट्र से राज्यसभा की एक सीट के लिए विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले ने महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। इस सीट पर कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) तीनों ही दल दावा कर रहे थे।

भाजपा के उम्मीदवारों को लेकर क्या बोले राउत?

सत्तारूढ़ भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इनमें पार्टी के महासचिव विनोद तावडे और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले शामिल हैं। भाजपा की सूची पर टिप्पणी करते हुए राउत ने कहा कि आठवले को फिर से उम्मीदवार बनाना अपेक्षित था, जबकि तावडे की उम्मीदवारी गौर करने लायक है। राउत ने कहा कि तावडे को उम्मीदवार बनाना उनके संगठनात्मक कार्यों का सम्मान हो सकता है। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित होने के बाद उन्होंने पिछले छह-सात वर्षों में पार्टी के लिए काफी काम किया है। राज्यसभा के लिए उनका नामांकन उन्हीं प्रयासों का इनाम लगता है।

ऐसा है विधानसभा का गणित

288 सदस्यीय विधानसभा में 230 से अधिक विधायकों के साथ, भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन अपने सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में है। इस गठबंधन में एनसीपी और शिवसेना भी शामिल हैं। वहीं, विपक्षी एमवीए के पास केवल एक उम्मीदवार को जिताने लायक संख्या है। इस गणित से महायुति सात में से छह सीटें जीत सकती है।

महाराष्ट्र से जिन राज्यसभा सदस्यों का छह साल का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, उनमें शरद पवार, रामदास आठवले, फौजिया खान (एनसीपी-एसपी), रजनी पाटिल (कांग्रेस), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-यूबीटी) और धनंजय पाटिल व भागवत कराड (दोनों भाजपा से) शामिल हैं। इन सीटों के लिए 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।

दक्षिण एशिया में टकराव बढ़ा, बमबारी का तेल-गैस आपूर्ति पर क्या असर?

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच उर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति फिलहाल काफी मजबूत है। देश के पास उर्जा का मौजूदा भंडार पर्याप्त है और इसे हर दिन लगातार भरा भी जा रहा है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 

‘वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी कर रहा भारत’

सूत्रों ने कहा कि देश में एलपीजी या एलएनजी की कोई कमी नहीं है। दुनिया में कच्चे तेल की भी कमी नहीं है और भारत अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के साथ भी लगातार संपर्क में है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी भारत को गैस बेचने की पेशकश की है। भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी कर रहा है। हाल ही में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका के साथ नए उर्जा समझौते भी किए हैं। उन्होंने बताया कि भारत करीब 195 एमएमएससीएमडी (प्रति दिन दस लाख मानक घन मीटर) गैस आयात करता है। इसमें से लगभग 60 एमएमएससीएमडी गैस कतर से आती है। भारत अब गैस खरीदने के लिए अन्य बाजारों की भी तलाश कर रहा है।

तेल उत्पादक देशों के साथ भी बातचीत कर रही सरकार

सरकार प्रमुख तेल उत्पादक देशों और व्यापारियों के साथ भी बातचीत कर रही है, ताकि कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। सूत्रों ने बताया कि भारत ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी और ओपेक के साथ भी बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, भारत जहाजों के बीमा को लेकर अमेरिका के साथ भी चर्चा कर रहा है। सरकार ऊर्जा स्थिति की दिन में दो बार समीक्षा कर रही है, ताकि आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर कोई समस्या न आए।

जस्टिस Surya Kant ने भूटानी न्यायपालिका में तकनीकी सुधार की दी सलाह

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

भूटानी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को भूटान की न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच तकनीकी प्रगति के अधिक उपयोग पर से निर्भर करती है। उन्होंने थिम्पू में भूटान के रॉयल विश्वविद्यालय में ’21वीं सदी में न्याय तक पहुंच: प्रौद्योगिकी, कानूनी सहायता और जनकेंद्रित न्यायालय’ विषय पर भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से कहा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर, भूटानी छात्रों को इंटर्नशिप करने का मौके देंगे, तो अधिक खुशी होगी।  

प्रौद्योगिकी इस युग में केवल एक आधुनिक माध्यम- न्यायाधीश सूर्यकांत

उन्होंने कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि प्रौद्योगिकी इस युग में केवल एक आधुनिक माध्यम है। हमारा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां 21वीं सदी के कुछ चीजें जटिल हो गई हैं। वहीं, कुछ चीजें आम लोगों की भाषा की तरह ही सरल और सुलभ बने रहें। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें यह बात पूरी दृढ़ता से समझनी चाहिए कि न्याय कोई एकांत सद्गुण नहीं है, जो अदालत के भारी लकड़ी के दरवाजों के पीछे बंद हो, बल्कि, यह एक जीवंत उपस्थिति है जिसे दुनिया में, ऊंची घाटियों और हलचल भरे बाजारों में, और लोगों के घरों तक पहुंचने की अनुमति दी जानी चाहिए।”  उन्होंने कहा, “अदालत की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है।” मुख्य न्यायाधीश कांत ने जोर देते हुए कहा, “यदि हम अपनी विरासत के प्रति सच्चे रहना चाहते हैं, तो हमारे तकनीकी सुधारों को न केवल यथास्थिति का डिजिटलीकरण करना चाहिए, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के मूल सार का लोकतंत्रीकरण भी करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायिक प्रणाली में मूल रूप से हस्तलिखित दलीलों, मौखिक गवाहों के बयानों, मौखिक प्रस्तुतियों, शायद ही कभी दस्तावेजी साक्ष्यों और केवल एक लिखित निर्णय वाली पारंपरिक फाइलें शामिल थीं। “ये फाइलें भारी-भरकम थीं, जिसके कारण रिकॉर्ड रखने के लिए जगह की कमी हो जाती थी, अक्सर अपर्याप्त अदालत कक्षों में जहां न्यायिक अधिकारी, पीठासीन न्यायाधीश, अक्सर फाइलों के पीछे छिपे हुए पाए जाते थे।”

21वीं सदी में कानूनी क्षेत्र में एक खास बदलाव

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ बदलाव शुरू हुए, जैसे कि अधिक अदालतों की स्थापना, अतिरिक्त कर्मचारी और रिकॉर्ड कक्षों की स्थापना।” उन्होंने आगे कहा कि महत्वपूर्ण बदलाव केवल 21वीं सदी में आया, जब विश्व स्तर पर कानूनी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी कानूनी कार्यों को करने के तरीके, कानूनी पेशेवरों और
न्यायाधीशों द्वारा सूचनाओं के साथ जुड़ने के तरीके और सबसे महत्वपूर्ण बात, नागरिकों द्वारा न्याय तक पहुंचने के तरीके को फिर से परिभाषित कर रही है।

प्रौद्योगिकी को सोच-समझकर अपनाया है

उन्होंने कहा, “हमने प्रौद्योगिकी को सोच-समझकर अपनाया है, इसके फायदों का लाभ उठाते हुए हमने निष्पक्षता, उचित प्रक्रिया, पारदर्शिता, मानवीय गरिमा और जवाबदेही जैसे अपने मूल मूल्यों की रक्षा की है।” मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, “शुरुआत में कागजी कार्रवाई के मामूली डिजिटलीकरण से शुरू हुआ। यह प्रयास कानूनी कार्य को तैयार करने, निष्पादित करने और प्रस्तुत करने के तरीके की पुनर्कल्पना में तब्दील हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय न्यायपालिका और न्यायालय प्रशासन के लिए, प्रौद्योगिकी एक शक्ति गुणक बन गई है क्योंकि न्यायालयों ने आभासी सुनवाई, ई-फाइलिंग और ऑनलाइन विवाद समाधान की शुरुआत की है, जिसने न्याय की पहुंच को पारंपरिक सीमाओं से कहीं आगे तक विस्तारित किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि न्यायालयों तक पहुंच अब भूगोल या परिस्थितियों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “न्यायिक अधिकारी अब एक नजर में केस हिस्ट्री, मिसालें और सुनवाई की प्रतिलेख देख सकते हैं, जिससे वे तेजी से और अधिक जानकारीपूर्ण निर्णय ले सकेंगे।” उन्होंने कहा, “न्यायालय को समुदाय तक लाकर, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि न्याय चाहने वाले के लिए भौगोलिक दूरी अब कोई बाधा न रहे।” उन्होंने आगे कहा कि दूसरा कदम ‘प्रक्रियात्मक सरलता’ होना चाहिए, जिसके द्वारा एक साधारण भूमि विवाद या छोटे-मोटे दावों से संबंधित मामले को एक ऐसे मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से शुरू किया जा सके जो बैंकिंग ऐप की तरह ही उपयोगकर्ता के अनुकूल हो। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कदम टेलीसेवाओं के माध्यम से कानूनी सहायता को मजबूत करना है, जिसके तहत समर्पित पैरालीगल को सरल डिजिटल माध्यमों से गरीब वादियों से जोड़ा जा सकता है, और किसी शिकायत के लंबे समय तक चलने वाले विवाद में बदलने से पहले प्रारंभिक चरण की कानूनी सलाह दी जा सकती है।

न्यायाधीश किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच न करें

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट जज बीवी नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने फैसले पर अड़े रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। वह केरल हाईकोर्ट में आयोजित दूसरे टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में बोल रहीं थीं। इससे पहले उन्होंने मीडिया को लेकर भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह की बाधा, भय या प्रभाव में मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जजों को सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। फिर चाहे इसकी वजह से उनकी उन्नति ही क्यों न रुक जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज हो जाएं। उन्होंने कहा कि एक जज को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकी या पॉपुलर डिमांड से मुक्त ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि प्रेस पर कब्जा करने के हालिया प्रयासों के पीछे न केवल आर्थिक आधार हैं बल्कि राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं। 
खास बात है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना ने साफ तौर पर कहा कि मीडिया अपना काम ठीक से तभी कर सकता है जब वह किसी भी तरह के डर या दबाव से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस की आजादी को सबसे बड़ा खतरा सीधे तौर पर लगने वाली पाबंदियों से नहीं है। बल्कि, असली खतरा आर्थिक नीतियों, लाइसेंस देने के कड़े नियमों और मीडिया कंपनियों के मालिकाना हक से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि एक मीडिया प्रतिष्ठान कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, फिर भी आर्थिक रूप से इस तरह से मजबूर हो सकता है कि ऐसी आलोचना महंगी पड़ जाए।
उन्होंने कहा कि यह अधिकार भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी पेशे से जुड़ने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को चलाने की स्वतंत्रता के बीच परस्पर क्रिया से उभरता है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि भारत में प्रेस की आज़ादी को संविधान दो अलग-अलग तरीकों से सुरक्षा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया कितना जरूरी है।

Previous articleनगरपालिका परिषद का शताब्दी वर्ष शुजालपुर के हर नागरिक के सम्मान का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Next articleउद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन 06 मार्च को करेंगे 3.08 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
News Desk

Nitish Kumar ने फेसबुक पोस्ट कर दी जानकारी, राज्यसभा जाने का किया ऐलान

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा में जा रहे है। वहीं इस बात की जानकारी सीएम नीतीश ने फेसबुक पर कर दी। नीतीश ने लिखा कि पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, और उसके बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, मीडिया के एक वर्ग में आई खबरों में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मजबूत दावेदार बताया गया है। सरकार और संगठन का लंबा अनुभव रखने वाले विजय सिन्हा और मंगल पांडे के नामों पर भी विचार किया जा सकता है।  

Previous articleजल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Next articleबिहान योजना से खिला रत्ना का भविष्य- फूलों की खेती से बनीं सफल उद्यमी
News Desk

हर साल 14,000 नई भर्तियों से दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा और मजबूत

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत वर्ष केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की अधिकृत अधिकतम संख्या को 02 लाख से बढ़ाकर 2.2 लाख कर्मियों तक करने की मंजूरी दी है। अगस्त 2025 में स्वीकृत यह 10 प्रतिशत की वृद्धि हवाई अड्डों, बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। अगले पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 14000 कर्मियों की भर्ती की जाएगी। सीआईएसएफ द्वारा दिल्ली मेट्रो के 70 लाख यात्रियों सहित रोजाना एक करोड़ लोगों की सुरक्षा की जा रही है। इस संख्या में हवाई अड्डे पर 15 लाख यात्री और तैनाती की अन्य इकाइयों में 15 लाख लोग भी शामिल हैं। 

सीआईएसएफ का 57वें रेजिंग डे, जो बल के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, मुंडली कटक में छह मार्च को आयोजित किया जा रहा है, से पहले गुरुवार को डीजी सीआईएसएफ प्रवीर रंजन ने यह जानकारी दी है। सीआईएसएफ रेजिंग डे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, परेड की सलामी लेंगे। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान, सीआईएसएफ को 10 इकाइयों में शामिल किया गया है। 

• कर्तव्य भवन (सीसीएस-1, 2 और 3), नई दिल्ली
• सेवा तीर्थ (कैबिनेट सचिवालय और एनएसए बिल्डिंग), नई दिल्ली
• क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस), नई दिल्ली
• नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नोएडा (यूपी)
• नवी मुंबई हवाई अड्डा, (महाराष्ट्र)
• लेंगपुई हवाई अड्डा, (मिजोरम)
• जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, एटा (यूपी)
• भाखड़ा बांध परियोजना, नंगल (पंजाब)
• एनटीपीसी तलाईपल्ली कोयला खनन परियोजना, (छत्तीसगढ़)
• एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड, पचपदरा (राजस्थान)

361 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा …  

पिछले 57 वर्षों में, सीआईएसएफ की क्षमता और सामर्थ्य में कई गुना वृद्धि हुई है। मौजूदा समय में दो लाख कर्मियों की संख्या के साथ, सीआईएसएफ 25 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 361 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करती है। इनमें 71 हवाई अड्डे, दिल्ली मेट्रो रेल, 10 रसायन एवं उर्वरक संयंत्र, 105 विद्युत संयंत्र, 18 परमाणु प्रतिष्ठान, अंतरिक्ष विभाग के 16 प्रतिष्ठान, भारत सरकार के प्रमुख मंत्रालयों वाले 47 सरकारी भवन, 15 बंदरगाह, 6 रक्षा इकाइयाँ, 36 तेल एवं प्राकृतिक गैस इकाइयाँ, 17 इस्पात संयंत्र और 10 कोयला खदानें, 9 निजी क्षेत्र आदि शामिल हैं। सीआईएसएफ का विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) 156 से अधिक संरक्षित व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है। सीआईएसएफ का विशेष अग्निशमन दल, जिसमें लगभग 9700 कर्मी हैं, देश के 23 राज्यों में फैली 114 इकाइयों को अग्निशमन सेवाएं प्रदान करता है।

सभी रैंकों की भर्ती में महिलाओं का प्रतिशत 12.75 … 
 
2025 में सभी रैंकों में भर्ती किए गए कर्मियों में से 12.75 प्रतिशत महिलाएं थीं। 2026 में महिलाओं की संख्या कुल भर्ती का लगभग 8-9 फीसदी रहने का प्रस्ताव है। मुख्य रूप से बल की तैनाती की प्रकृति के कारण पदोन्नति में ठहराव से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए, सीआईएसएफ ने कांस्टेबल और सहायक सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए क्रमशः वरिष्ठ कांस्टेबल और स्थानीय रैंक की प्रणाली शुरू की है। इसके चलते 32545 कांस्टेबलों को वरिष्ठ कांस्टेबल के रूप में नामित किया गया है। 1050 सहायक सब-इंस्पेक्टरों को सब-इंस्पेक्टर का स्थानीय रैंक प्रदान किया गया है। इस पहल से बल के मनोबल में उल्लेखनीय वृद्धि और कर्मियों के बीच प्रेरणा में वृद्धि होने की उम्मीद है। सभी केंद्रीय बलों में सीआईएसएफ में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। वर्तमान में बल में महिलाओं की संख्या इसकी कुल संख्या का 8 प्रतिशत से अधिक है।

रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन की स्थापना को मंजूरी … 

हवाई सुरक्षा, जिसे उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है, के मद्देनजर सीआईएसएफ ने एमपीआरटीसी बहरोर में ड्रोन प्रशिक्षण और ड्रोन-रोधी क्षमता प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ड्रोन संचालन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के प्रशिक्षण के लिए रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन (आरपीटीओ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। सीआईएसएफ को महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हवाई खतरे के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। विमानन सुरक्षा के तहत उन्नत फुल बॉडी स्कैनर, वीडियो विश्लेषण, साइबर सुरक्षा के लिए साइबर कमांडो, आदि मुहैया कराए जा रहे हैं। सीसीटीवी वीडियो विश्लेषण और एआई/एमएल का उपयोग करके डेटा विश्लेषण के साथ एकीकृत उन्नत कमांड सेंटर विकसित किया गया है। एआई/एमएल का उपयोग करके उन्नत बायोमेट्रिक्स एक्सेस कंट्रोल सिस्टम तैयार किया जा रहा है।

पीएम मोदी बहुत अलग हैं, 25 साल में एक बार भी छुट्टी नहीं ली: Justin Trudeau

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। कभी कनाडा और भारत के बीच तनातनी चल रही थी। अब दोनों देश एक दूसरे की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। हाल ही में भारत की यात्रा पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि ये प्रधानमंत्रीजी बहुत अलग हैं उन्होंने बीते 25 सालों में कभी एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। वे सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रसेवा को महत्व देते हैं। 
कार्नी ने एक कार्यक्रम में अपने हालिया भारत दौरे और पीएम मोदी से मुलाकात को याद करते हुए कहा कि मोदी की कार्यशैली और काम के प्रति उनका समर्पण बेहद अलग है। उन्होंने कहा- ‘यह व्यक्ति अलग तरह का है। 
गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन छुट्टी नहीं ली है।कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी हर हफ्ते के अंत में चुनाव प्रचार में निकल जाते हैं और उनकी रैलियों में लाखों लोग पहुंचते हैं। कार्नी ने कहा कि कई बार एक रैली में करीब ढाई लाख लोग तक मौजूद रहते हैं, जो उनकी लोकप्रियता को दिखाता है। कार्नी ने पीएम मोदी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि वह खास तौर पर ग्रामीण आबादी के लिए काम करने पर ध्यान देते हैं। दरअसल कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हाल ही में भारत दौरे पर आए थे। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे। कार्नी की यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई समझौतों पर दस्तखत किए। अपने संबोधन में कार्नी ने कहा कि भारत और कनाडा के रिश्ते अब नई साझेदारी के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसी दिशा में कनाडा की कंपनी कैमेको ने भारत को लंबे समय तक यूरेनियम सप्लाई करने का समझौता भी किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कार्नी के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत और कनाडा के रिश्तों के लिए एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल जी 7 बैठक के दौरान कार्नी ने कनाडा में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था और अब भारत में उन्हें उसी गर्मजोशी से स्वागत करने का मौका मिला है। कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा में करीब 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होते हैं। 

Previous articleगेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को ना हो कोई परेशानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Next articleमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की खिलाड़ी बिटिया की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए किए प्रयास
News Desk

नहीं चली Aaditya Thackeray की, राज्यसभा जाएंगे Sharad Pawar

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

संजय राउत ने पोस्ट में लिखा- महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे 

मुंबई। महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को सिर्फ एक सीट मिल सकती है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 साल के शरद पवार के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं हुआ। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दिया था कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे।
इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा- कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइनल कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे। यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग कह रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हुई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल खत्म होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।

Previous articleAhmedabad में नमकीन सेव बनाने वाली फैक्ट्री में आग, गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं
News Desk

जियोपॉलिटिक्स के महाकुंभ का उद्घाटन करेंगे Narendra Modi, चीफ गेस्ट होंगे Alexander Stubb

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

वैश्विक स्तर पर होगा सीधा प्रसारण, लाखों लोग इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे 

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी गुरुवार को नई दिल्ली में रायसीना संवाद 2026 के 11वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे, जो भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत के प्रमुख सम्मेलन की शुरुआत का प्रतीक है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाएगा। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि होंगे और भाषण देंगे। विश्व भर की सरकारों, विचारकों और रणनीतिक समुदायों की भागीदारी से आयोजित इस संवाद में 110 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, संसद सदस्य, सैन्य कमांडर, व्यापारिक नेता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पत्रकार और विद्वान शामिल हैं। इस साल के आयोजन का विषय है संस्कार-अभिकथन, सामंजस्य, उन्नति।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में छह मुख्य विषयों पर चर्चा होगी। विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीकरण और परिधि; साझा संसाधनों का पुनर्निर्माण: नए समूह, नए संरक्षक, नए रास्ते; श्वेत व्हेल: एजेंडा 2030 की प्राप्ति; अंतिम क्षण: जलवायु, संघर्ष और विलंब की कीमत; भविष्य की दुनिया: एक तकनीकी-लोक की ओर; और टैरिफ के दौर में व्यापार: पुनर्प्राप्ति, लचीलापन और पुनर्निर्माण। करीब 2,700 प्रतिभागियों संवाद में शामिल होने हो सकते हैं, जबकि कार्यवाही का वैश्विक स्तर पर सीधा प्रसारण किया जाएगा और लाखों लोग इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखेंगे। 
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन 5 से 7 मार्च तक चलेगा और इसमें इस बात का विश्लेषण किया जाएगा कि तकनीकी व्यवधान, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक सुरक्षा किस प्रकार वैश्विक राजनीति को नया आकार दे रहे हैं। इस संवाद में शामिल होने वाले कई गणमान्य व्यक्तियों में माल्टा के डिप्टी पीएम और विदेश मामलों एवं पर्यटन मंत्री इयान बोर्ग, भूटान के विदेश मामलों एवं बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डी एन धुंग्येल, मॉरीशस के विदेश मामलों, क्षेत्रीय एकीकरण एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री धनंजय रामफुल और सेशेल्स के विदेश मामलों एवं प्रवासी मामलों के मंत्री बैरी फॉरे शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस सम्मेलन में शामिल होने वाले एक अन्य गणमान्य व्यक्ति श्रीलंका के विदेश मामलों, विदेशी रोजगार और पर्यटन मंत्री विजिथा हेरथ हैं। इस साल की चर्चा पारंपरिक गठबंधनों और विश्लेषकों द्वारा वर्णित तकनीकी-ध्रुवीय दुनिया के बीच तनाव पर केंद्रित है, जहां प्रभाव तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण द्वारा तय किया जा रहा है। संवाद का समापन भारत के दीर्घकालिक विकास रोडमैप पर चर्चा के साथ होगा, जिसमें विकसित भारत 2047 की परिकल्पना भी शामिल है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता शताब्दी तक देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था में बदलना है।

Mallikarjun Kharge का बड़ा आरोप

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का हवाला देते हुए गुरुवार को आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने राजनीतिक और नैतिक रूप से आत्मसर्मण कर दिया है। खड़गे ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- मोदी सरकार का भारत के सामरिक और राष्ट्रीय हितों के प्रति लापरवाही भरा परित्याग सबके सामने है। एक ईरानी जहाज भारत का मेहमान था, हमारे द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 से निहत्थे लौट रहा था, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उस पर हमला कर उसे डुबो दिया गया। चिंता या शोक का कोई बयान नहीं आया। पीएम मोदी मौन साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 1100 नाविकों के साथ 38 भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज फंस गए हैं। कैप्टन समेत दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। कोई समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? खड़गे ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद मांगने के लिए हताशा भरा वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि भारत सरकार उनकी भलाई कैसे सुरक्षित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से निकासी की कोई योजना है? खड़गे ने दावा किया कि पीएम मोदी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। उन्होंने कहा कि यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों को कमतर दिखाता है और सालों से लगातार पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और कड़ी मेहनत से बनाई और अपनाई गई हमारी विदेश नीति को नष्ट करने वाला है।

Previous articleराजेश राजौरा को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार, अनुराग जैन 5 दिन की छुट्टी पर
Next articleAhmedabad में नमकीन सेव बनाने वाली फैक्ट्री में आग, गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं
News Desk