केरल में हिजाब विवाद पर पिता ने मानी स्कूल की बात, ड्रेस पहनकर ही जाएगी छात्रा

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hijab bainनई दिल्‍ली। केरल (Kerala) के एर्नाकुलम जिले में एक छात्रा को हिजाब (Hijab) पहनने की अनुमति न दिए जाने से उपजा विवाद मंगलवार को सुलझ गया। छात्रा के पिता ने सुलह वार्ता के बाद स्कूल के ड्रेस कोड (Dress code) का पालन करने पर सहमति जताई। वहीं, शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट ने छात्रा को धार्मिक स्वतंत्रता के तहत हिजाब पहनने की अनुमति देने की सिफारिश की है।

मामला कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित सेंट रीटा पब्लिक स्कूल पल्लुरुथी का है, जहां कक्षा 8 की छात्रा के पिता पीएम अनस ने अपनी बेटी को कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग की थी। स्कूल प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नीति का उल्लंघन बताते हुए अस्वीकार कर दिया था। सोमवार और मंगलवार को स्कूल में तनाव के बाद कक्षाएं निलंबित करनी पड़ी थीं।

 

मंगलवार को कांग्रेस सांसद हिबी ईडन की मध्यस्थता में छात्रा के माता-पिता और स्कूल प्रबंधन के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद अनस ने कहा, “मैं और मेरी बेटी स्कूल प्रबंधन के निर्देशों का पालन करेंगे। मैं नहीं चाहता कि यह मामला सांप्रदायिक रंग ले। हमें समाज में भाईचारा बनाए रखना है।”

 

हिबी ईडन ने कहा कि कुछ तत्व इस विवाद के बहाने सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, “छात्रा के पिता का यह फैसला केरल की धर्मनिरपेक्ष परंपरा को मजबूत करने वाला संदेश है।” इस बीच राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने बताया कि जांच में स्कूल की ओर से गंभीर चूक पाई गई है।

उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “छात्रा को हिजाब पहनने के कारण कक्षा से बाहर करना संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। यह गंभीर अनुशासनहीनता है।”

जांच रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि छात्रा को हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए और स्कूल चाहें तो उसके रंग और डिजाइन को निर्धारित कर सकता है। मंत्री ने कहा, “केरल की धर्मनिरपेक्ष पहचान के विपरीत कोई शैक्षणिक संस्था कार्य नहीं कर सकती। ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए।”

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया था। स्कूल अधिकारियों के अनुसार, छात्रा को दाखिले के समय से ही ड्रेस कोड (शर्ट और पैंट) के बारे में बताया गया था, जिसे वह अक्टूबर तक पालन कर रही थी। 7 अक्टूबर को उसने हिजाब पहनकर आने के बाद यह विवाद उत्पन्न हुआ था।

बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कर लौट रहे थे बुजुर्ग, गेट नंबर 4 के पास गिरे; मौत

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वृंदावन: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वृंदावन (Vrindavan) में प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर (Thakur Shri Banke Bihari Temple) है. यहां बुधवार शाम दर्शन करने आए एक श्रद्धालु (Devotees) की मौत हो गई. मृतक की पहचान मेरठ जिले के मवाना तहसील के गांव निलोहा निवासी 55 वर्षीय कृपाल सिंह पुत्र शेर सिंह के रूप में हुई है. वह अपने परिजन के साथ ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचे थे.

कृपाल सिंह शाम के समय मंदिर में दर्शन करने पहुंचे. मंदिर में दर्शन करने के बाद जब वे गेट नंबर चार से बाहर निकल रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे वहीं गिर पड़े. मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने तुरंत उन्हें संभाला और मंदिर प्रशासन को सूचना दी. सूचना पर मंदिर प्रशासन और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे.

घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे डॉक्टरों ने जांच की और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की सलाह दी. कृपाल सिंह को एम्बुलेंस के जरिए जिला संयुक्त अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

58 करोड़ रुपये का नुकसान, कारोबारी को किया डिजिटल अरेस्ट… हैरान कर देने वाला मामला

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मुंबई: मुंबई (Mumbai) में रहने वाले 72 साल के एक नामी बिजनेसमैन (Businessman) के साथ जो हुआ, वो वाकई हैरान कर देने वाला मामला है. इस शख्स (Person) को ऑनलाइन ठगों (Online Fraudsters) ने ऐसी चाल में फंसाया कि वह दो महीने तक डर और धोखे की जाल में फंसा रहा. खुद को ईडी (Enforcement Directorate) और सीबीआई (CBI) अधिकारी बताने वाले ठगों ने उसे डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) में रखकर 58 करोड़ रुपये ठग लिए.

यह मामला अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच का है. एक दिन बिजनेसमैन को एक वीडियो कॉल आई. कॉल करने वालों ने कहा कि वे ईडी और सीबीआई से बोल रहे हैं और उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ है. अगर वे जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है. बिजनेसमैन और उनकी पत्नी घबरा गए. कॉल पर बैठे ठगों ने कहा कि उन्हें फिलहाल डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है. यानी उन्हें फोन पर लगातार नजर रखी जाएगी, और वे किसी से संपर्क नहीं कर सकते.

कॉल करने वालों ने पूरी चालाकी से भरोसा दिलाया कि अगर वे निर्दोष हैं तो कुछ रकम ‘जांच’ के लिए जमा कर दें, ताकि एजेंसियां उनका नाम क्लियर कर सकें. डर और भ्रम में आए इस बुज़ुर्ग बिजनेसमैन ने अपने खाते से RTGS के जरिए 58 करोड़ रुपये अलग-अलग 18 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए, वो भी लगभग दो महीनों के भीतर. हर बार ठग यह कहते रहे कि जांच पूरी होने पर पैसे वापस कर दिए जाएंगे. लेकिन अक्टूबर की शुरुआत में जब कॉल्स अचानक बंद हो गईं, तब जाकर बिजनेसमैन को समझ आया कि वह एक बड़ी ठगी का शिकार हो चुका है.

शिकायत मिलते ही महाराष्ट्र साइबर विभाग ने जांच शुरू की. बैंक खातों की डिटेल ट्रेस की गई और तुरंत कई खातों में फ्रीज करने की कार्रवाई की गई. जांच में पता चला कि ठगी में शामिल तीन आरोपी मुंबई के ही हैं. अब्दुल खुल्ली (47), अर्जुन कदवसरा (55) और जेतराम (35). अब तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

बसों की ओवरलोडिंग पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, CJI गवई ने कहा- हर मुद्दे को लेकर….

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नई दिल्ली: बसों (Bus) की ओवरलोडिंग (Overloading) के खिलाफ याचिका (Petition) सुनने से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मना कर दिया है. चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को सरकार को ज्ञापन देना चाहिए. हर विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आना जरूरी नहीं है. याचिका में ओवरलोडिंग से यात्रियों के जीवन को खतरे और माल ढुलाई से सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान का हवाला दिया गया था. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि कोर्ट सरकार को बसों का वजन जांचने की व्यवस्था बनाने को कहे. बसों के ऊपर कैरियर लगा कर माल ढोने पर रोक लगाई जाए.

वकील संगम लाल पांडे की याचिका में कहा गया था कि वह मोटर वेहिकल्स एक्ट, 1988 और सेंट्रल मोटर वेहिकल्स रूल्स, 1989 के पालन की मांग कर रहे हैं. पूरे देश में बेरोकटोक यात्री बसों में अधिक वजन ढोया जा रहा है. बसों में यात्रियों का सामान रखने के लिए तय नियमों के परे जाकर व्यापारिक सामान भी रखा जा रहा है. इसके लिए छतों पर कैरियर लगाए जाते हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा था कि निजी बसों में 16 से 18 टन वजन की अनुमति होती है, लेकिन ज्यादा यात्री और सामान को रख कर लगातार 40 से 45 टन तक वजन ढोया जा रहा है. छत पर सामान रखने से बस की ऊंचाई भी बढ़ जाती है. अधिक वजन और ऊंचाई के चलते बस असंतुलित रहती है. ओवरलोडिंग कई बड़ी दुर्घटनाओं की वजह बनता रहा है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) बताता है कि हर साल हजारों लोगों की जान बस की ओवरलोडिंग के चलते जाती है.

याचिका में कहा गया था कि बसों में ढोया जाने वाला ज्यादातर व्यापारिक सामान बिना उचित जीएसटी बिल के होता है. 2024 की CAG की रिपोर्ट बताती है कि इससे सरकार को होने वाला राजस्व का नुकसान लगभग 500 करोड़ रुपए हो सकता है. याचिकाकर्ता ने अधिक वजन वाली बसों से होने वाले प्रदूषण का भी उल्लेख किया था. कहा था कि IIT दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार ओवरलोड बसें प्रति किलोमीटर ईंधन की 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक खपत करती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर का अधिक उत्सर्जन करती हैं.

दीवाली से पहले बढ़ा वायु प्रदूषण, दिल्ली एनसीआर में ग्रैप-1 लागू

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दिवाली से करीब एक सप्ताह पहले ही दिल्ली एनसीआर से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां वायु प्रदूषण बढ़ने के चलते ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण आज मंगलवार से लागू कर दिया गया है। ग्रैप का पहला चरण तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली का एक्यूआई लेवल 201 और 300 के बीच दर्ज होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 211 दर्ज किया गया है। ऐसे में ग्रैप 1 लागू किया गया है। इसके लागू होने से होटलों और रेस्तरां में कोयले और लकड़ी के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा पेट्रोल के पुराने और डीजल वाहनों यानी बीएस III पेट्रोल और बीएस IV डीजल वाहनों के संचालन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। निर्माण और विध्वंस गतिविधियों के लिए धूल शमन उपायों और कचरे के ठोस प्रबंधन के उचित उपाय करने होंगे।

ऐसी परियोजनाओं पर रहेगी रोक
दिल्ली एनसीआर में 500 वर्ग मीटर के बराबर या उससे अधिक भूखंड आकार वाली परियोजनाओं पर सीएंडडी गतिविधियों की अनुमति नहीं है। इसके अलावा कचरे को अवैध तरीके से खुले में फेंकने पर प्रतिबंध रहेगा।

 

उठाए जाएंगे ये कदम
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई अहम कार्य उठाए जाएंगे। इस कड़ी में सड़कों पर समय समय पर मशीन से सफाई और पानी का छिड़काव किया जाएगा। सीएंडडी सामग्री और उपशिष्ट को परिसर में उचित रूप से कवर किया जाएगा। वाहनों के लिए पीयूसी मानदंडों की कड़ी निगरानी होगी। इसके अलावा, डीजल से चलने वाले जनरेटर सेट पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
 

‘1945 की मानसिकता से नहीं चलेगा काम’, UN सुधार की वकालत करते नजर आए जयशंकर

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नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूएन 2025 की नहीं बल्कि 1945 की दुनिया की वास्तविकताओं को दर्शाता है। इस वैश्विक निकाय में सुधार की आवश्यकता अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सुधार की प्रक्रिया का उपयोग एजेंडे को पटरी से उतारने के लिए किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिक अन्याय जारी है। उन्होंने आगाह किया कि जो संस्थान बदलती वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो पाते वे अप्रासंगिक हो जाते हैं।

भारत की शांति स्थापना का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पर आधारित- जयशंकर
जयशंकर ने नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदान देशों के प्रमुखों के सम्मेलन (यूएनटीसीसी 2025) को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की शांति स्थापना का दृष्टिकोण उसकी सभ्यता के मूल्यों में निहित है और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘यह सैन्य योगदान देशों के इस प्रतिष्ठित समूह को संबोधित करने का एक विशेषाधिकार है, जो शांति के रक्षक और संदेशवाहक हैं। आप एक ऐसे संस्थान की ताकत को दर्शाते हैं, जो लगभग आठ दशकों से संघर्षग्रस्त दुनिया में आशा की किरण के रूप में खड़ा है- संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना।”

भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता- जयशंकर
उन्होंने बताया, ‘भारत ने सभी समाजों और लोगों के लिए न्याय, गरिमा, अवसर और समृद्धि की लगातार वकालत की है। यही कारण है कि हम बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में विश्वास रखते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में दुनिया में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है।

आधुनिक दौर की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक संकट – महामारी, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन – सहयोगात्मक प्रतिक्रियाओं की मांग करते हैं न कि प्रतिस्पर्धात्मक। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी हालिया यात्रा पर अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र अभी भी 1945 की वास्तविकताओं को दर्शाता है।’

डॉ. दिनेश राजपूत – भारत के नंबर 1 माइंड ट्रेनर, सेल्स ट्रेनर और होलिस्टिक ट्रांसफॉर्मेशन कोच

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स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
पेशा: माइंड ट्रेनर | सेल्स ट्रेनर | हिप्नोसिस एक्सपर्ट | NLP मास्टर | टैरो रीडर | न्यूमेरोलॉजिस्ट | रेकी ग्रैंड मास्टर | मेमोरी ट्रेनर | पेरेंटिंग कोच | सर्टिफाइड सेक्सोलॉजिस्ट | लेखक | मोटिवेशनल स्पीकर

🧠 डॉ. दिनेश राजपूत के बारे में

डॉ. दिनेश राजपूत भारत के प्रमुख माइंड ट्रेनर और सेल्स ट्रेनर हैं, जिन्हें लोगों के जीवन को माइंड मास्टरी, एनर्जी हीलिंग और होलिस्टिक पर्सनल डेवलपमेंट तकनीकों के माध्यम से बदलने के लिए जाना जाता है।

भोपाल में आधारित, उन्होंने हजारों व्यक्तियों और प्रोफेशनल्स को भावनात्मक चुनौतियों से निपटने, प्रदर्शन बढ़ाने और सफलता प्राप्त करने में मार्गदर्शन किया है।

🎓 सर्टिफिकेशन और ट्रेनिंग

✅ Certified Mind Trainer

✅ Certified NLP Expert

✅ Certified Reiki Grand Master

✅ Certified Sales Trainer

✅ Certified Memory Trainer

✅ Certified Parenting Coach

✅ Certified Sexologist

✅ Completed 6 Train the Trainer Programs from reputed mentors and institutions

🏆 अवार्ड्स और मान्यता

डॉ. राजपूत को 10+ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:

🏅 भारत गौरव रतन अवार्ड

🎖️ हिप्नोसिस में डॉक्टरेट

🏆 महात्मा गांधी राष्ट्रीय सेवा पुरस्कार

🌟 राष्ट्रीय उत्कृष्टता अवार्ड – माइंड और सेल्स ट्रेनिंग

🌐 Global Leader Award

✨ Best Author Award

✨ कई अन्य सम्मान जो उनके पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन, मोटिवेशन और होलिस्टिक हीलिंग में योगदान को मान्यता देते हैं

 

📚 11+ ट्रांसफॉर्मेशनल किताबों के लेखक

Breakup to Power (Breakup Se Shakti Tak) – दिल टूटने को अंदरूनी शक्ति और सफलता में बदलना

Well Done – व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने की रणनीतियाँ

Who Am I – अपना असली स्वरूप खोजें और छिपी हुई क्षमता को उजागर करें

We Your Own Brand – व्यक्तिगत ब्रांड बनाएं और पेशेवर सफलता हासिल करें

Networking Ka Champion – नेटवर्किंग और पेशेवर संबंधों में महारत हासिल करें

Yudh Geeta – आधुनिक जीवन की चुनौतियों में युद्धभूमि से सीखी गई जीवन शिक्षाएँ

(अन्य किताबें जो माइंड मास्टरी, रेकी, NLP, मेमोरी सुधार और होलिस्टिक व्यक्तिगत विकास पर आधारित हैं)

 

💼 वर्कशॉप और प्रोग्राम्स

🌀 माइंड पावर और हिप्नोसिस ट्रेनिंग

💫 NLP फॉर कम्युनिकेशन और सफलता

🔮 टैरो रीडिंग और न्यूमेरोलॉजी ट्रेनिंग

⚡ रेकी हीलिंग और एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन

💼 सेल्स ट्रेनिंग और प्रोफेशनल माइंडसेट वर्कशॉप

🧠 मेमोरी सुधार और कॉग्निटिव स्किल्स वर्कशॉप

👨‍👩‍👧 पेरेंटिंग कोचिंग और चाइल्ड माइंड डेवलपमेंट

💔 ब्रेकअप रिकवरी और इमोशनल हीलिंग सेशंस

💖 सेक्सोलॉजी और इंटिमेसी कोचिंग

 

🎯 मिशन और विज़न

> “मैं एक मिलियन लोगों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता हूँ, ताकि वे अपने अंदर की मानसिक शक्ति को उजागर करें, भावनात्मक रूप से स्वस्थ हों, और वास्तविक सफलता प्राप्त करें। दिमाग सबसे शक्तिशाली उपकरण है – इसे मास्टर करें और अपनी किस्मत को मास्टर करें।”

 

🌐 डॉ. दिनेश राजपूत से संपर्क करें

📍 भोपाल, मध्य प्रदेश
📩 ईमेल: dineshrajut811@gmail.com
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📖 किताबें: “Breakup Se Shakti Tak” + 10+ अन्य ट्रांसफॉर्मेशनल किताबें

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर कांग्रेस का कड़ा रुख, मोदी पर साधा कटाक्ष

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए नया दावा किया है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से “भयभीत” हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी नेता को यह “निर्णय लेने और घोषणा करने” की अनुमति दी कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा और “बार-बार की गई अनदेखी के बावजूद बधाई संदेश भेजते रहते हैं”।

दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी का यह बयान उस वक्त आया है, जब ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस कदम को उन्होंने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर उस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

ट्रंप को दी घोषणा करने की अनुमति
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप से भयभीत हैं। उन्होंने ट्रंप को यह निर्णय लेने और घोषणा करने की अनुमति दी कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा। बार-बार की गई अनदेखी के बावजूद बधाई संदेश भेजते रहते हैं। वित्त मंत्री की अमेरिका यात्रा रद कर दी। शर्म अल-शेख में शामिल नहीं हुए। ऑपरेशन सिंदूर पर उनका विरोध नहीं करते।”

कांग्रेस महासचिव ने क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, भारतीय समयानुसार 10 मई 2025 की शाम 5:37 बजे, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सबसे पहले यह घोषणा की कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाँच अलग-अलग देशों में 51 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने टैरिफ और व्यापार को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर हस्तक्षेप किया और भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने पर मजबूर किया। फिर भी हमारे प्रधानमंत्री मौन रहे।

अब राष्ट्रपति ट्रंप ने कल कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल का आयात नहीं करेगा। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कई अहम फ़ैसले अमेरिका को सौंप दिए हैं। 56 इंच का सीना अब सिमटकर सिकुड़ गया है।

ट्रंप ने क्या किया था दावा?
गौरतलब है कि बुधवार को अपने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस बात से खुश नहीं है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, और तर्क दिया कि इस तरह की खरीदारी से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध के वित्तपोषण में मदद मिलती है। ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में कहा, “वह (मोदी) मेरे दोस्त हैं, हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं… हम उनके रूस से तेल खरीदने से खुश नहीं थे क्योंकि इससे रूस को यह बेतुका युद्ध जारी रखने का मौका मिल गया, जिसमें उन्होंने डेढ़ लाख लोगों को खो दिया है।”

गूगल के AI हब को लेकर आंध्र-कर्नाटक में जुबानी जंग, मंत्री बोले- पड़ोसियों को जलन है

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नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ तीखी नोकझोंक में तंज कसा है। बेंगलुरु की खराब सड़कों और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाते हुए लोकेश ने कर्नाटक को आड़े हाथों लिया, खासकर तब जब गूगल ने कर्नाटक के बजाय आंध्र में 15 अरब डॉलर का डेटा और एआई हब स्थापित करने का फैसला किया।

लोकेश ने गुरुवार को एक्स पर चुटकी लेते हुए कहा, “आंध्र का खाना मसालेदार है और लगता है हमारे निवेश भी। कुछ पड़ोसियों को जलन होने लगी है।”

कई बार कर चुके हैं बयानबाजी
लोकेश और कर्नाटक के कांग्रेस नेता जैसे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और आईटी मंत्री प्रियंक खड़गे सितंबर से ही आपस ऑनलाइन तंज कस रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बेंगलुरु के बेलंदूर इलाके में एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के सह-संस्थापक राजेश याबाजी ने लंबे कम्यूट समय और खराब सड़कों की शिकायत की।

लोकेश ने तुरंत मौके का फायदा उठाया और विशाखापट्टनम को निवेश के लिए बेहतर विकल्प बताया। जैसे-जैसे बेंगलुरु के और कारोबारी और निवासी शहर की समस्याओं पर शिकायत करते गए लोकेश ने आंध्र को निवेश का आकर्षक गंतव्य बताना शुरू कर दिया।

गूगल की पसंद ने बढ़ाई तल्खी
गूगल के आंध्र में 15 अरब डॉलर के निवेश के फैसले ने इस स्पर्धा में नया रंग दे दिया। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि आंध्र ने गूगल को लुभाने के लिए 22,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी और टैक्स में छूट जैसे लालच दिए।

जवाब में लोकेश ने कहा, “अगर कर्नाटक सरकार अक्षम है, तो मैं क्या कर सकता हूं? उनके ही उद्योगपति कहते हैं कि वहां बुनियादी ढांचा खराब है, बिजली कटौती होती है। उन्हें पहले अपनी समस्याएं ठीक करनी चाहिए।”

RBI गवर्नर ने कहा, भारत का आर्थिक ढांचा मजबूत, वैश्विक दबावों का असर सीमित

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नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 8 प्रतिशत से अधिक की शानदार वृद्धि दर हासिल की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक बैठक में यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था है और अमेरिकी टैरिफ विवाद का इसकी वृद्धि पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।

मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक व्यापार में व्यवधान और अन्य अर्थव्यवस्थाओं की सुस्ती के बावजूद भारत ने कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों से उबरकर मजबूत स्थिति हासिल की है। भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि यह वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

भारत में मजबूत आर्थिक नींव और नियंत्रित मुद्रास्फीति
RBI गवर्नर ने बताया कि भारत ने मुद्रास्फीति को 8 प्रतिशत से घटाकर 1.5 प्रतिशत तक लाने में सफलता पाई है। ये पिछले 8 वर्षों में सबसे निचला स्तर है। तेल की कीमतों में कमी ने भी इसमें मदद की है।

इसके साथ ही, भारत का राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है और केंद्र सरकार का घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत का कुल कर्ज वैश्विक स्तर पर सबसे कम में से एक है। सरकार और वित्तीय समिति के बीच अच्छे समन्वय ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पूंजी बाजार की मजबूती
मल्होत्रा ने कहा कि जहां अमेरिकी डॉलर में 10 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं भारतीय रुपये में उतनी कमी नहीं देखी गई। इसका कारण टैरिफ और पूंजी प्रवाह में व्यवधान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि रुपये की व्यवस्थित गतिशीलता भारत की प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के पूंजी बाजार गहरे और मजबूत हैं, जो अर्थव्यवस्था को और स्थिरता प्रदान करते हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक प्रगति और नीतिगत स्थिरता इसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनाए हुए है।