कपाट बंद होने के बाद जानिये कहां होंगे मां गंगा के दर्शन, जानिये क्यों खास है ये स्थान

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देहरादून: आज से चारधाम कपाट बंद होने की शुरुआत होने वाली है. इस कड़ी में आज सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट बंद होगे. गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व के मौके पर बंद किये जाते हैं. आज सुबह 11.26 मनट पर गंगोत्री धाम के कपाट बंद होंगे. जिसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं.

गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की विग्रह डोली भोगमूर्ति, आर्मी बैंड और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए रवाना होगी. 22 अक्टूबर की रात को डोली मुखबा गांव से करीब दो किमी पहले मौजूद मार्कडेंय मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी. उसके बाद अगले दिन 23 अक्टूबर की दोपहर मां गंगा की विग्रह डोली मुखबा गांव पहुंचेगी. मुखबा गांव में मां गंगा की भोगमूर्ति को मंदिर में विधिविधान से शीतकाल 6 माह के लिए स्थापित किया जाएगा. इसके बाद 6 माह शीतकाल के लिए मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव में ही होंगे.

 

 

मुखबा की धार्मिक मान्यताएं: मुखबा की बड़ी धार्मिक मान्यता है. मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल के बारे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गंगा माता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. मान्यता है कि इस मंदिर में आकर श्रद्धा से प्रार्थना करने वालों को पारिवारिक सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. सदियों से ये परंपरा चली आ रही है कि गंगोत्री के कपाट बंद होने के बाद मुखबा आकर गंगा आरती और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

कहां है मुखबा: मुखबा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है. यह भागीरथी नदी के किनारे स्थित है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 8000 फीट है. उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से मुखबा की दूरी करीब 80 किलोमीटर है. चारों ओर से बर्फ की पहाड़ियों से घिरे मुखबा का सौंदर्य देखते ही बनता है. ये स्थल धार्मिक पर्यटन के लिए तो प्रसिद्ध है ही, यहां प्राकृतिक पर्यटन की भी अपार संभावना हैं.

ऐसे पहुंचें मुखबा मंदिर: मुखबा पहुंचने के लिए उत्तराखंड पहुंचना होता है. उत्तराखंड आने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग हैं. हवाई मार्ग से आप ऋषिकेश के पास जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक पहुंचते हैं. रेल से हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून तक पहुंचा जा सकता है. ऋषिकेष से उत्तरकाशी, हर्षिल होते हुए मुखवा पहुंचा जा सकता है. दिल्ली से मुखबा की दूरी करीब 480 किमी है.

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम को लेकर श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह: इन सब बाधाओं को बावजूद 21 अक्टूबर 2025 तक यमुनोत्री धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 6,44,366 पहुंच गई. अकेले अक्टूबर महीने के 21 दिनों में ही 40,227 श्रद्धालु यमुनोत्री धाम पहुंचे. गंगोत्री धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या भी 7,57,762 हो गई. अक्टूबर महीने के 21 दिनों में 53,949 श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचे हैं.

राष्ट्रपति मुर्मू का चार दिवसीय केरल दौरा, सबरीमला मंदिर में आज दर्शन कर रचेंगी इतिहास

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तिरुवनंतपुरम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज पवित्र सबरीमला श्री धर्म संस्था मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बनकर इतिहास रचने वाली हैं. केरल के उनके चार दिवसीय दौरे के तहत इस ऐतिहासिक यात्रा को प्राचीन परंपराओं के प्रति श्रद्धा और महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक समानता के एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

भगवान अयप्पा के पवित्र पहाड़ी मंदिर की राष्ट्रपति की तीर्थयात्रा की योजना सुरक्षा प्रोटोकॉल और मंदिर की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक बनाई गई है. उनका सुबह 9:35 बजे तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान करने और निलक्कल स्थित आधार शिविर पर उतरने का कार्यक्रम है.

निलक्कल से राष्ट्रपति सड़क मार्ग से पंबा जाएँगी. परंपरा के अनुसार वह पम्पा गणपति मंदिर में पवित्र ‘इरुमुदी केट्टू’ (प्रसाद की पोटली) भरेंगी. सामान्य पैदल यात्रा पथ से हटकर राष्ट्रपति मुर्मू को स्वामी अय्यप्पन मार्ग से एक विशेष गोरखा जीप में सवार होकर, पारंपरिक वाहनों के काफिले से बचते हुए, सन्निधानम (गर्भगृह) ले जाया जाएगा. उनका लगभग 11:50 बजे दर्शन करने की उम्मीद है.

दर्शन और थोड़े विश्राम के बाद देवस्वोम गेस्ट हाउस में दोपहर के भोजन के बाद राष्ट्रपति अपनी वापसी यात्रा शुरू करेंगी. इस बीच लगभग 3:00 बजे पंबा के लिए प्रस्थान करेंगी. इसके बाद वह सड़क मार्ग से निलक्कल वापस जाएँगी और फिर शाम 4:20 बजे हेलीकॉप्टर से तिरुवनंतपुरम वापस जाएँगी.

राष्ट्रपति की यात्रा के लिए सबरीमाला और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है. विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) केरल पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है. सुरक्षा के लिए भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

वहीं मंदिर अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होगा. त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अधिकारी मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी) के साथ मंदिर की रीति-रिवाजों के अनुसार राष्ट्रपति की अगवानी के लिए मौजूद रहेंगे.

चार दिवसीय केरल यात्रा कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

राष्ट्रपति मुर्मू का केरल दौरा सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व के कार्यक्रमों से भरपूर है. सबरीमाला से लौटने पर वह तिरुवनंतपुरम स्थित राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा आयोजित एक विशेष रात्रिभोज में शामिल होंगी.

23 अक्टूबर को राष्ट्रपति सुबह 10:30 बजे राजभवन में पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन – केरल के पहले राष्ट्रपति – की प्रतिमा का अनावरण करेंगी. इस कार्यक्रम में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों के प्रमुख नेता शामिल होंगे. इसके बाद वह दोपहर 12:50 बजे मुख्य अतिथि के रूप में शिवगिरी में श्री नारायण गुरु महासमाधि शताब्दी समारोह में भाग लेने के लिए वर्कला जाएँगी.

इस दिन का समापन शाम 4:15 बजे सेंट थॉमस कॉलेज, पाला के प्लेटिनम जुबली समारोह के उद्घाटन के साथ होगा, जिसके बाद वह कुमारकोम के एक रिसॉर्ट में रात्रि विश्राम करेंगी. यह दौरा 24 अक्टूबर को समाप्त होगा. राष्ट्रपति मुर्मू कोच्चि स्थित सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि होंगी.

बोलगट्टी पैलेस में दोपहर के भोजन के बाद वह कोच्चि नौसेना बेस से नेदुम्बस्सेरी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए प्रस्थान करेंगी और शाम 4:05 बजे नई दिल्ली वापस लौट जाएँगी. इस प्रकार उनकी चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा संपन्न होगी.

दिवाली के बाद मेले में एक दूसरे पर पत्थरबाजी करते हैं लोग, क्यों काली को चढ़ाया जाता है घायल का खून

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शिमला: हिमाचल देवभूमि के साथ साथ मेले, त्योहारों का प्रदेश है. प्रदेश की वादियों में जितनी मोहक सुंदरता बसती है, उतनी ही गहराई यहां की लोक परंपराओं में भी झलकती है. ऐसे ही शिमला जिले से 30 किलोमीटर दूर धामी क्षेत्र में मनाया जाने वाला अनोखा पत्थर मेला, जो हर साल दीपावली के अगले दिन आयोजित होता है. ये मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि वो परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है. ये आस्था और साहस का प्रतीक मानी जाती है. ऐसा मेला शायद ही कहीं और मनाया जाता हो.

इस मेले में एक दूसरे पर खूब पत्थर बरसाए जाते हैं. मेले में दो गुटों के बीच होने वाली पत्थरबाजी तब तक चलती है, जब तक किसी का खून जमीन पर न गिर जाए, जैसे ही किसी के रक्त की पहली बूंद जमीन पर गिरती है, मेले में पत्थरबाजी रुक जाती है. ये दृश्य जितना रोमांचक होता है, उतना ही आस्था से भरा भी.

इस मेले में पत्थर बरसाने की शुरुआत कब हुई इसकी सही तारीख तो किसी को नहीं मालूम, लेकिन इसकी शुरुआत कैसे हुई इसके बारे में साहित्यकार एस आर हरनोट बताते हैं कि ‘सैकड़ों साल पहले धामी रियासत में स्थित मां भीमाकाली के मंदिर में इलाके की सुख-शांति और राज परिवार के सुनहरे भविष्य के लिए मानव बलि दी जाती थी. धामी रियासत के राजा राणा की रानी इस मानव बलि के खिलाफ थी. राजा की मौत के बाद जब सती होने का फैसला लिया, तो उन्होंने नरबलि पर प्रतिबंध लगवा दिया था. इसके बाद यहां पशुबलि शुरू की गई. मान्यता है कि माता ने पशु बलि स्वीकार ना करने पर इस पत्थर के खेल की शुरुआत हुई जो आज भी चला आ रहा है.’

 

इस परंपरा को निभाने के लिए जिस जगह पर पत्थरों के खेल को खेला जाता है, उसे चौरा कहते हैं. यहीं पर बलि रुकवाने वाली रानी का (शारड़ा चौराहा) स्मारक भी बना है. इस मेले में पत्थर मारने वालों को खुंद कहते हैं. मेले वाले दिन सबसे पहले राज परिवार के सदस्य और राज पुरोहित भगवान श्री नरसिंह मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं. उसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ हजारों लोग चौरा पर पहुंचते हैं. राज परिवार के साथ कटैड़ू और तुनड़ु, दगोई, जगोठी के खुंद कुल के होते हैं, जबकि दूसरी टोली में जमोगी खुंद के लोग शामिल होते हैं. दोनों टोलियां पूजा अर्चना करती हैं. राजपरिवार का सदस्य पत्थर फेंक कर खेल की शुरुआत करता है, उसके बाद दोनों टोलियों के बीच पत्‍थर का खेल शुरू होता हैं.

देश में गूंजी ‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज, दिवाली पर 6 लाख करोड़ की बिक्री दर्ज

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नई दिल्ली: अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक दिवाली (Diwali) पर रिकॉर्ड तोड़ सेल हुई है. लोगों ने जमकर भारतीय चीजों की खरीदारी की है. 5.40 लाख करोड़ रुपये की चीजें बिकीं हैं, जबकि सेवाओं में 65,000 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है. दिवाली पर यह बंपर सेल भारत की आर्थिक मजबूती और स्वदेशी भावना को दर्शाता है.

अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) की दिवाली त्यौहारी बिक्री 2025 पर रिसर्च रिपोर्ट राज्यों की राजधानियों और टियर 2 व 3 शहरों समेत 60 प्रमुख वितरण केंद्रों पर किए गए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी सर्वे पर बेस्‍ड है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल दिवाली पर कुल बिक्री रिकॉर्ड ₹6.05 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जिसमें वस्तुओं में ₹5.40 लाख करोड़ और सेवाओं में ₹65,000 करोड़ शामिल है. यह भारत के व्‍यापारिक इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा फेस्टिवल कारोबार है. दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद और CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने और स्वदेशी अपनाने के एक ‘मजबूत ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में उभरे हैं, जिससे व्यापारिक समुदाय और ग्राहक दोनों ही प्रेरित हुए हैं.

खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘स्वदेशी दिवाली’ नारों ने लोगों को बहुत प्रभावित किया है. 87% कंज्‍यूमर्स ने विदेशी सामानों की तुलना में भारतीय निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता दी यानी 100 में से 87 लोगों ने भारतीय सामान खरीदें, जिस कारण चीनी वस्तुओं की मांग में भारी गिरावट आई. व्यापारियों ने पिछले साल की तुलना में भारतीय निर्मित उत्पादों की बिक्री में 25% की वृद्धि दर्ज की है. खंडेलवाल ने कहा कि दिवाली 2025 के व्यापार के आंकड़े पिछले साल के ₹4.25 लाख करोड़ की बिक्री की तुलना में 25% की ग्रोथ दिखाता है. नॉन-कॉर्पोरेट और पारंपरिक बाजारों ने कुल व्यापार में 85% का योगदान दिया.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया ने प्रमुख त्यौहारी वस्तुओं की बिक्री के बारे में जानकारी दी. उनके मुताबिक, किराना और एफएमसीजी 12%, सोना और आभूषण, 10%, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स, 8%, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं 7%, रेडीमेड वस्त्र 7%, गिफ्ट प्रोडक्‍ट्स 7%, गृह सज्जा, 5% फर्निशिंग और फर्नीचर, 5% मिठाई और नमकीन 5%, कपड़ा और फैब्रिक 4%, पूजा सामग्री 3%, फल और सूखे मेवे 3%, बेकरी और कन्फेक्शनरी 3%, जूते 2%, अन्य वस्तुएं, 19% कुल व्यापार का हिस्सा हैं.

उन्होंने आगे कहा कि सेवा क्षेत्र के विस्तार से ₹65,000 करोड़ का लाभ हुआ है. खुदरा व्यापार के साथ-साथ पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, कैब सर्विस, यात्रा, कार्यक्रम प्रबंधन, टेंट और सजावट, जनशक्ति और डिलीवरी जैसी सेवाओं से अनुमानित ₹65,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जो विभिन्न क्षेत्रों में त्योहारी अर्थव्यवस्था के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है.

“एक फौजी से सफल उद्यमी तक” — विकास गुलिया की प्रेरणादायक कहानी 🍕

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देश की सेवा करने वाले विकास गुलिया ने फौज की अनुशासन और जज़्बे को बिज़नेस में बदला। आज उनका ब्रांड Crazy About Pizza मेहनत और सपनों का प्रतीक बन चुका है।

मिलिए विकास गुलिया से, एक भारतीय फौजी जिनकी कहानी सिर्फ प्रेरणादायक नहीं, बल्कि मेहनत और जुनून की मिसाल है।

साल 2005 में विकास ने भारतीय सशस्त्र बलों में कदम रखा और देश की सेवा को ही अपना धर्म माना।
लेकिन वर्दी के पीछे एक और सपना पल रहा था — कुछ अपना बनाने का, जो लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाए और समाज में एक नई पहचान बनाए।

“Crazy About Pizza” की शुरुआत 🍕

साल 2015 में, चंडीगढ़ पोस्टिंग के दौरान, विकास ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर दिल्ली में एक छोटा-सा पिज्ज़ा आउटलेट शुरू किया —
👉 “Crazy About Pizza”

 

ना बड़ा बजट था, ना कोई भव्य सेटअप — बस जुनून, मेहनत और हौसला था।
वहीं से शुरू हुआ वह सफर, जो आज Meerut, Ghaziabad, Mohali, Panchkula और Delhi में फैले 5 सफल आउटलेट्स तक पहुँच चुका है।

लॉकडाउन का दौर — हिम्मत की असली परीक्षा

जब लॉकडाउन आया तो हालात कठिन हो गए।
किचन बंद, बिक्री रुकी, लेकिन हौसला नहीं टूटा।
एक सच्चे फौजी की तरह विकास ने अपनी टीम से कहा —

“जंग लंबी होगी, पर हार नहीं माननी है।”

और सच में, वह हारे नहीं।
आज Crazy About Pizza सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है —
कि अगर नीयत सच्ची हो और मेहनत लगातार, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।

🚀 मेरी उद्यमिता की दूसरी पारी

देश की सेवा के साथ-साथ, विकास ने अपने विज़न को और आगे बढ़ाया और तीन और स्टार्टअप शुरू किए —
जो आज अपने-अपने क्षेत्र में मजबूती से खड़े हैं 👇

🥬 TheKunj — Supply Chain (Chandigarh)
“Farm se Ghar Tak”
अपने परम मित्र राहुल के साथ मिलकर उन्होंने एक ऐसा मॉडल बनाया जो ताज़े फल और सब्ज़ियाँ सीधे किसानों से ग्राहकों तक पहुंचाता है।
यह सिर्फ बिज़नेस नहीं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच भरोसे का पुल है —
100% फ्रेशनेस और वाजिब दामों के साथ।

🌿 Sufi Dawakhana & Pansari+ (Mohali)
“प्रकृति से उपचार”
यहां हर बीमारी का इलाज 100% जड़ी-बूटियों और देसी नुस्खों से किया जाता है।
विकास का मानना है — “केमिकल्स से नहीं, प्रकृति से जुड़कर ही सच्चा स्वास्थ्य पाया जा सकता है।”

💻 Downtoup Webtech Solutions
“डिजिटल दुनिया का हर समाधान”
यहां टीम डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से बिज़नेस को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में मदद करती है —
Website Development, Mobile Apps, SEO, Social Media Handling — सब कुछ एक ही छत के नीचे।

🍕 विकास का मिशन साफ है —

“हमारा लक्ष्य सिर्फ खुद बढ़ना नहीं, बल्कि दूसरों को भी ऊपर उठाना है।”

मदद और सफलता की राह पर

विकास ने न सिर्फ अपने बिज़नेस को बढ़ाया, बल्कि कई नए रेस्टोरेंट्स को Zero से Profit तक पहुँचाने में भी मदद की है।
उनका मानना है —

“सफलता तब असली होती है, जब आप किसी और का हाथ पकड़कर उसे भी ऊपर उठाते हैं।”

आप भी इस कहानी का हिस्सा बन सकते हैं 🍕

अगर आप भी इस जुनून का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो
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तो भी ऊपर दिए गए नंबर पर संपर्क करें —
हम आपकी मदद ज़रूर करेंगे उसे मुनाफ़े में बदलने में।

 

 

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आरजी कर कांड से जुड़ा नया मोड़: दोषी की भतीजी ने की आत्महत्या

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के कोलकाता (Kolkata) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां आरजी कर रेप (RG Kar Rape) और हत्या मामले में दोषी संजय रॉय (Sanjoy Roy) की भतीजी (Niece) का लटकता हुआ शव बरामद किया गया है। भतीजी की उम्र महज 11 साल थी।

रविवार रात अलीपुर के विद्यासागर कॉलोनी में 11 साल की बच्ची का लटकता हुआ शव बरामद हुआ। शव एक अलमारी में मिला। मृत बच्ची आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी संजय रॉय की भतीजी है। वह संजय की बड़ी बहन की बेटी है।

पता चला है कि संजय की बड़ी बहन की मौत के बाद उसकी छोटी बहन बच्ची की देखभाल करती थी। बाद में बच्ची के पिता ने उनसे शादी कर ली। परिवार का दावा है कि रविवार रात से बच्ची नहीं मिल सकी। कुछ देर बाद घर का दरवाजा बंद देखकर उन्हें शक हुआ।

खटखटाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिलने पर परिवार के सदस्यों ने दरवाजा तोड़ दिया। अंदर जाने पर उन्होंने देखा कि बच्ची का शव अलमारी के फ्रेम से लटक रहा है और उसके गले में रस्सी बंधी है। उसे एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस बार दिल्ली ने ली राहत की सांस…. पिछले साल की मुकाबले आधा रहा AQI लेवल

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नई दिल्ली। दिवाली (Diwali) की रात दिल्ली (Delhi) की हवा की गुणवत्ता (Air Quality) खराब स्थिति में बनी रही. लेकिन, राहत की बात यह रही कि पिछली दिवाली की रात यानी 31 अक्तूबर 2024 की तुलना में इस बार राजधानी की हवा उतनी नहीं जहरीली हुई. मंगलवार की सुबह करीब 5 बजे दिल्ली (Delhi) में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई लेवल (Air Quality Index – AQI Level) 300 से 350 के बीच दर्ज किया गया, जो बीती दिवाली की रात से करीब-करीब आधा है. द्वारका सेक्टर में 338, बुराड़ी 387, आईजीआई एयरपोर्ट 299, पड़पड़गंज 343, मुंडका 350, आनंद विहार 341, चांदनी चौक 341, मंदिर मार्ग में 328 और आईटीओ में 347 दर्ज किया गया. लोधी रोड में 315 प्वाइंट और पुसा में 351 प्वाइंट एक्यूआई लेवल था.

6 बजे AQI लेवल
बवाना में 418, वजीरपुर में 408, जहांगीरपुरी में 404, बुराड़ी क्रॉसिंग 393, शादीपुर में 393, द्वारका में 389 और आनंद विहार में 352 दर्ज किया गया. सीपीसीबी के मुताबिक दिल्ली का ओवरऑल AQI 346 रहा. मेजर ध्यान चंद स्टेडियम में 358, आया नगर में 349 और चांदनी चौक 347 एक्यूआई दर्ज किया गया.

बीते साल 31 अक्तूबर की रात दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई लेवल 900 प्वाइंट को भी पार कर गया था. एनसीआर के वैशाली में यह 911 प्वाइंट था. जबकि दिल्ली के कड़कड़डूमा में यह 806 रिकॉर्ड किया गया. बीते साल राजधानी के करीब-करीब सभी इलाकों में एक्यूआई लेवल 600 के आसपास बना रहा।

हालांकि, इस बार दिल्ली वाले इस बार अपेक्षाकृत राहत की सांस ले सकते हैं. दिवाली के दिन सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब रही और 38 निगरानी स्टेशन में से 34 पर प्रदूषण का स्तर ‘रेड जोन’ में दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ वायु गुणवता दर्शाता है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शाम चार बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 345 था जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि रविवार को यह 326 दर्ज किया गया था.

सोमवार को 400 के पार गया था एएक्यूआई
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, चार निगरानी स्टेशन ने पहले से ही वायु गुणवत्ता को ‘गंभीर’ श्रेणी में बताया, जिसमें एक्यूआई का स्तर 400 से ऊपर था. इसमें द्वारका में एक्यूआई 417, अशोक विहार में 404, वजीरपुर में 423 और आनंद विहार में 404 में दर्ज किया गया.

दिल्ली में करीब 30 निगरानी स्टेशन ने एक्यूआई को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बताया जिसमें इसका स्तर 300 से ऊपर था. आंकड़ों के अनुसार, दोपहर में 38 निगरानी स्टेशन में से 31 पर वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि तीन स्टेशन में यह ‘गंभीर’ श्रेणी में थी. दिल्ली में मंगलवार और बुधवार को वायु गुणवत्ता के ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाने की आशंका है. शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है.

निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) के आंकड़ों से पता लगा है कि दिल्ली में सोमवार को वायु प्रदूषण में परिवहन उत्सर्जन का योगदान 15.6 प्रतिशत रहा, जबकि उद्योगों सहित अन्य कारकों का योगदान 23.3 प्रतिशत था. इससे पहले, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए.

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को कुछ शर्तों के साथ दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी. इसके तहत दिवाली से एक दिन पहले और त्योहार के दिन सुबह छह बजे से शाम सात बजे के बीच और फिर रात आठ बजे से 10 बजे तक हरित पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई थी।

डॉ. मुकेश पंचोली — शिक्षा, समर्पण और समाजसेवा का प्रेरक प्रतीक

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कहा जाता है — “एक सच्चा शिक्षक वही होता है जो केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की दिशा देता है।”
ऐसे ही व्यक्तित्व हैं डॉ. मुकेश पंचोली, जो आज शिक्षा और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में एक उज्जवल नाम हैं।
राजस्थान से निकलकर उन्होंने पूरे देश में शिक्षा को नई दिशा दी है और यह साबित किया है कि अगर नीयत सच्ची हो, तो शिक्षा समाज में बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

डॉ. पंचोली का मानना है कि शिक्षा किसी वर्ग या स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए — “हर विद्यार्थी, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो, उसे अच्छी शिक्षा पाने का अवसर मिलना चाहिए।”
इसी सोच के साथ उन्होंने दो महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं —

Test Ranker with Mukesh Sir App
यह ऐप राजस्थान की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे — RPSC, REET, Patwari, LDC, Junior Accountant, 1st Grade, 2nd Grade आदि — के लिए एक संपूर्ण तैयारी प्लेटफ़ॉर्म है।
इस ऐप में विद्यार्थियों को मात्र ₹99 में मिलते हैं —
Full Length Tests
Mock Tests
Topic-wise Tests
और इसके साथ बहुत सारा फ्री कंटेंट, जिससे विद्यार्थियों को सर्वोत्तम तैयारी का मौका मिलता है।
यह पहल उन छात्रों के लिए वरदान साबित हुई है जो आर्थिक तंगी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते थे।

Dr. Mukesh Pancholi Official App
डॉ. पंचोली ने शिक्षा को और भी व्यापक रूप देने के लिए Dr. Mukesh Pancholi Official App लॉन्च किया है।
इस ऐप के माध्यम से वे विद्यार्थियों को केवल ₹99 में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उच्चस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करवा रहे हैं।
यह ऐप सिर्फ कोर्सेस तक सीमित नहीं है — इसमें शामिल हैं वीडियो लेक्चर्स, स्टडी मटेरियल, प्रैक्टिस पेपर्स और गाइडेंस सेशन, ताकि विद्यार्थी कहीं से भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
इस ऐप के ज़रिए डॉ. पंचोली ने यह साबित किया है कि डिजिटल शिक्षा अब महंगी नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी की पहुँच में हो सकती है।

समाजसेवा में अग्रणी कदम
डॉ. मुकेश पंचोली केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी हैं।
उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर Drishna Health and Charitable Foundation की स्थापना की है। इस संस्था के माध्यम से वे अनेक सामाजिक कार्य करते हैं —

हर वर्ष तीन बेटियों की शादी अपने खर्चे पर करवाते हैं।
अपनी आय का 2% हिस्सा CSR (Corporate Social Responsibility) के अंतर्गत समाज कल्याण में लगाते हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद, शिक्षा सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक उत्थान के अनेक कार्यों में सक्रिय रहते हैं।

🩸 जन्मदिवस पर रक्तदान शिविर और विशेष आयोजन

डॉ. पंचोली का हर कार्य समाज के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
अपने जन्मदिवस के अवसर पर उन्होंने हाल ही में एक रक्तदान शिविर (Blood Donation Camp) आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

इसके साथ ही उन्होंने विकलांग व्यक्तियों के लिए डांडिया कार्यक्रम भी करवाया, जिससे उन्हें खुशी और आत्मसम्मान का अनुभव हो सके।
यह केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि “हर व्यक्ति, चाहे उसकी शारीरिक स्थिति कैसी भी हो, समाज का समान हिस्सा है।”

डॉ. मुकेश पंचोली का जीवन शिक्षा और सेवा दोनों का सुंदर संगम है।
वे विद्यार्थियों को केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में सकारात्मक सोच, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाते हैं।

उनकी कक्षाओं में केवल विषय का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
उनके द्वारा तैयार किए गए कोर्स, ऐप्स और फाउंडेशन हजारों विद्यार्थियों और परिवारों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं।

डॉ. मुकेश पंचोली का नाम आज शिक्षा और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने यह साबित किया है कि सच्ची शिक्षा वही है जो सबके लिए सुलभ हो और सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी स्वार्थ के की जाए।

> “अगर सोच सकारात्मक हो, तो एक शिक्षक भी समाज में क्रांति ला सकता है।”

डॉ. मुकेश पंचोली सचमुच उस शिक्षा दीपक की तरह हैं, जो ज्ञान, करुणा और सेवा की रोशनी से समाज को निरंतर आलोकित कर रहे हैं।

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दिल्ली के नरेला में दिवाली पर दो फैक्ट्रियों में लगी आग, गुरुग्राम में गोदाम जला

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नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) के नरेला इंडस्ट्रियल इलाके (Narela Industrial Area) में सोमवार को दिवाली (Diwali) के दिन आग लगने की भीषण घटनाएं हुईं। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार शाम को एक जूता फैक्ट्री (Shoe factory) में भयावह आग लगने की सूचना मिली। बाद में इस फैक्ट्री के बगल की एक अन्य फैक्टरी भी आग से धू-धू कर जलने लगी। घटना नरेला डीएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में हुई। आग बुझाने के लिए दमकल की 16 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। वहीं गुरुग्राम में भी शाम को एक गोदाम जलकर खाक हो गया।

 

कार्डबोर्ड की फैक्ट्री भी हुई थी खाक
दमकल विभाग के अनुसार, सूचना मिलने के तुरंत बाद आग बुझाने का काम शुरू कर दिया गया। हाल ही में दिल्ली के नरेला के भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के फेज 2 में एक कार्डबोर्ड बनाने वाली फैक्ट्री भी आग से खाक हो गई थी।

गुरुग्राम में धू-धू कर जला गोदाम
गुरुग्राम के राठीवास गांव में सोमवार शाम एक गोदाम में भीषण आग लग गई। लगभग 6 दमकल गाड़ियां मौके पर आग बुझाने पहुंची।

बढ़ जाती हैं आग लगने की घटनाएं
दिवाली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में अक्सर आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं इसे देखते हुए दमकल विभाग हाई अलर्ट पर है। दमकल विभाग ने राजधानी के सभी 66 फायर स्टेशनों पर करीब 321 गाड़ियां तैनात की हैं। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में दिवाली के दिन दमकल विभाग की टीमें 24 घंटे पेट्रोलिंग करेंगी।

यहां तैनात रहीं दमकल गाड़ियां
भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़ी दमकल गाड़ियां खड़ी रहेंगी। राष्ट्रीय राजधानी के साउथ एक्सटेंशन, लाजपत नगर, तिलक नगर, लाल कुंआ, लाहौरी गेट, मंगोलपुरी, महिपालपुर चौक, संगम विहार, मुंडका, जयपुर गोल्डन अस्पताल, न्यू अशोक नगर, यमुना विहार और राधा स्वामी सत्संग (भाटी माइन) जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में दमकल वाहन खड़े रहेंगे।

संकरी गलियों की सुरक्षा क्यूआरवी के हवाले
संकरी गलियों की सुरक्षा के लिए QRV तैनात रहेंगी। क्यूआरवी तुरंत गली के भीतर पहुंच सकती हैं। नजफगढ़ रोड, विकासपुरी, मैदानगढ़ी, बादली औद्योगिक क्षेत्र, बुराड़ी, आदर्श नगर, खारी बावली, रानी बाग, पहाड़गंज, अलीपुर, सदर बाजार, नांगलोई और पालम गोलचक्कर जैसे तंग इलाकों में छोटी क्विक रिस्पॉन्स यूनिट तैनात रहेगी, जो किसी भी गली तक तुरंत पहुंच सकती है।

राष्ट्रपति भवन के पास लगी आग, दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौजूद

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नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) में राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) के गेट नंबर 31 के पास एक इमारत में मंगलवार दोपहर को आग (Fire) लग गई। वहीं आग लगने की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मौके पर दमकल (Fire Brigade) की पांच गाड़ियां भेजी गईं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी।

डीएफएस के एक अधिकारी ने बताया कि दो मंजिला इमारत के भूतल पर घरेलू सामान में आग लग गई। इस घटना की सूचना दोपहर 1:51 बजे मिली। उन्होंने बताया कि आग पर 20 मिनट में काबू पा लिया गया। डीएफएस अधिकारी ने कहा, “हमने पांच दमकल गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा। दोपहर 2:15 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।”