कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बड़ा बयान, RSS पर प्रतिबंध की मांग की

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध की मांग की है. सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्होंने कहा, आज देश में जो गड़बड़ियां हो रही हैं और कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो रही है यह सब बीजेपी और आरएसएस की वजह से है. संघ पर फिर से प्रतिबंध लगाना चाहिए. इसके पहले उनके मंत्री बेटे की मांग पर कर्नाटक में संघ की गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध को हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया. संघ को लेकर कांग्रेस के भीतर अजीब डर दिखाई पड़ता है. यह डर कांग्रेस के पतन और आरएसएस के राजनीतिक चेहरे के उत्थान के कारण है. कांग्रेस के सुर, लय, ताल तुष्टिकरण सॉन्ग रचने और गाने में लगे हुए हैं. प्रतिबंध का राग उसी का नया संगीत है. कांग्रेस के लिए संघ ही अब राजनीतिक एजेंडा बचा है. संघ के विरोध से ही उनकी राजनीतिक ताकत बची है. कांग्रेस इसे वैचारिक लड़ाई बताती है, लेकिन यह उसकी सियासी लड़ाई का सबसे मजबूत अस्त्र बचा है. 140 साल की कांग्रेस और 100 साल के आरएसएस के वर्तमान में कांग्रेस का डर छुपा हुआ है. गांधी परिवार की विरासत बाबर की मजार पर तो जाती रही है, लेकिन आज तक इस परिवार का कोई भी व्यक्ति अयोध्या में राम मंदिर नहीं जा सका है. संघ परिवार के लिए राम मंदिर राष्ट्र के धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जिसे कांग्रेस जाने योग्य स्थल भी नहीं मानती. संघ जिन विचारों के साथ पहले दिन खड़ा था, उन्हीं पर आज भी खड़ा है. यह एक सांस्कृतिक संगठन है. उसके राजनीतिक फेस बीजेपी का उत्थान कांग्रेस के पतन से जुड़ा हुआ है. जो कांग्रेस कभी देश की राजनीतिक सत्ता के हिमालय पर खड़ी थी, उसे आज कुछ राज्यों की तलहटी में संतोष करना पड़ रहा है. आरएसएस पर कांग्रेस ने प्रतिबंध पहले भी लगाए हैं. इस प्रतिबंध ने ही संघ की सेवा विस्तार करने में भूमिका निभाई. जिस समय प्रतिबंध लगा था उस समय कांग्रेस की सरकार में गृहमंत्री सरदार भाई पटेल वल्लभभाई पटेल थे. संघ और बीजेपी सरदार वल्लभभाई पटेल को अपना आदर्श मानती है. गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी ने विशाल प्रतिमा स्थापित कर पटेल की गौरव गाथा को पूरी दुनिया में स्थापित किया है. आधुनिक भारत में पटेल की विरासत को संभालने में कांग्रेस असफल हो गई है. इस विरासत का स्वाभाविक दायित्व निभाते हुए संघ और बीजेपी ने अपना वैचारिक विस्तार करने में सफलता हासिल की है.संघ का एजेंडा ओपन है. कुछ भी सीक्रेट नहीं है. हिंदू आस्था और गौरव का संरक्षण और विस्तार उनका लक्ष्य है. चरित्र निर्माण मार्ग है. सेवा भावना, मंत्र है. सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता उद्देश्य है. राष्ट्र की मजबूती और समाज की एकता उनका घोषित लक्ष्य है.  इसके विपरीत कांग्रेस का एजेंडा राजनीतिक सत्ता हासिल करना है. इसके लिए विभाजन को बढ़ाना उनका मार्ग है. संघ का हिंदुत्व सफल न हो इसके लिए कांग्रेस देश को जातियों में बांटने का काम करती है. मुस्लिम समाज में जातिवाद पर कांग्रेस चुप रहती है, लेकिन हिंदुओं को जातियों में बांटकर सत्ता हथियाने की कोशिश की जाती है. यहां तक की कांग्रेस सामाजिक न्याय की जड़ी बूटी आरक्षण की व्यवस्था का भी राजनीतिक उपयोग कर समाज में विभाजन को बढ़ाने का प्रयास करती है. यह तो अनुभव की बात है, कि जो दूसरों के लिए गड्ढा होता है वह उसी में खुद गिरता है. कांग्रेस तुष्टिकरण और बैंक के लिए पार्टी की आधारशिला जिस नींव पर खड़ी की है. आज वही उसको सबसे ज्यादा दुख दे रही है.आरएसएस तो सामाजिक समरसता का अभियान चलाती है. संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मस्जिदों में जाकर भी मौलवियों से मिलकर उन्हें अपना दृष्टिकोण समझाने से परहेज नहीं करते. यह भी समरसता का ही प्रयास है. संघ का मुस्लिम मंच इस दिशा में निरंतर काम करता दिखाई पड़ता है. कांग्रेस संघ का वैचारिक मुकाबला नहीं कर पा रही है. इसीलिए प्रतिबंध का राग अलाप रही है. कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन का अंदाजा लगाया जा सकता है, कि संघ को प्रतिबंधित करने की मांग जिस सरकार से की जा रही है, वही सरकार संघ को अपना आदर्श मानती है. सरकारी स्तर पर संघ की गतिविधियों की प्रधानमंत्री सराहना कर चुके हैं.शताब्दी वर्ष में संघ पर डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया है. कांग्रेस की आंखें इस बात से खुल जाना चाहिए, कि सौ साल में संघ की सेवा और चरित्र निर्माण का सुफल है कि उसका प्रचारक देश का प्रधानमंत्री है और उसने भारतीय मुद्रा पर संघ की स्मृति को संजोने का ऐतिहासिक काम करके दिखाया है. जो कांग्रेस संघ पर प्रतिबंध का सोच रखती है, जो किसी को प्रतिबंधित कर अपनी प्रगति सोचती है, उसका तो चिंतन ही दूषित दिखाई पड़ता है. कोई भी व्यक्ति, संगठन किसी को मिटाकर नहीं बल्कि जीत कर आगे बढ़ सकता है. संघ पर प्रतिबंध लगाने की तो कांग्रेस की राजनीतिक  हैसियत बची नहीं है. लेकिन ऐसी बातें करके ही संघ के विस्तार में कांग्रेस नकारात्मक भूमिका निभा रही है ऐसा लगता है.संघ को लेकर कांग्रेस का डर सिर पर चढ़ गया लगता है. कांग्रेस प्रतिबंध के राग से तुष्टिकरण का सॉन्ग गाने की कितनी भी कोशिश करें, उसका वैचारिक धरातल खोखला हो चुका है. पहले इसको भरना होगा, फिर संघ का मुकाबला करने के लिए खड़े होने की ताकत बनेगी.

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पीरियड्स खत्म होने के बाद जरूर करवाएं यह आसान टेस्ट, समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा

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नई दिल्ली। आज के समय में महिलाओं की सेहत को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है सर्वाइकल कैंसर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों महिलाएं इसकी चपेट में आती हैं। डॉक्टर तरंग कृष्णा का कहना है कि दुर्भाग्य की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी होती है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि एक बेहद आसान और सिर्फ 5 मिनट का टेस्ट इस खतरे को काफी हद तक टाल सकता है। इस टेस्ट का नाम है- पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test)।

क्या है पैप स्मीयर टेस्ट?
पैप स्मीयर एक साधारण-सी जांच है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से कुछ कोशिकाएं लेकर माइक्रोस्कोप से देखी जाती हैं। इसका मकसद यह पता लगाना होता है कि कहीं कोशिकाओं में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं हो रहा। यही बदलाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं।

कब और कैसे कराना चाहिए यह टेस्ट?
डॉक्टर तरंग कृष्णा के मुताबिक, पैप स्मीयर टेस्ट कराने का सबसे सही समय पीरियड खत्म होने के तुरंत बाद माना जाता है। यह प्रक्रिया न तो दर्दनाक होती है और न ही ज्यादा समय लेती है। जी हां, यह बस कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।

क्यों है यह टेस्ट जरूरी?
अगर सर्वाइकल कैंसर को शुरुआती स्टेज पर पकड़ लिया जाए, तो उसका इलाज बहुत आसान और सफल हो सकता है।
यह टेस्ट महिलाओं को शुरुआती चेतावनी देता है। यानी बीमारी की शुरुआत से पहले ही अलर्ट कर देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर हर महिला समय-समय पर पैप स्मीयर टेस्ट कराए, तो सर्वाइकल कैंसर के मामलों को आधा किया जा सकता है।

छोटी-सी सतर्कता, बड़ी सुरक्षा
कई बार हम सोचते हैं कि गंभीर बीमारियों से बचने के लिए बहुत महंगे इलाज या बड़ी प्रक्रियाओं की जरूरत होती है, लेकिन पैप स्मीयर टेस्ट इस सोच को बदल देता है। यह छोटा-सा कदम, जो केवल पांच मिनट लेता है, लाखों महिलाओं की जिंदगी बचा सकता है। इसलिए, हर महिला को चाहिए कि वह नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर टेस्ट कराए और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाए। आखिरकार, समय पर किया गया एक छोटा-सा कदम, जीवनभर की बड़ी परेशानी से बचा सकता है।

पेट की चर्बी से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी, रिसर्च में सामने आया विसरल फैट घटाने का आसान और कारगर उपाय

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विसरल फैट पेट के अंदर इंटरनल ऑर्गन्स जैसे लिवर, आंत और हार्ट के आसपास जमा होने वाली एक प्रकार की चर्बी होती है। विसरल फैट के कारण इंफ्लेमेशन और हानिकारक केमिकल पैदा होता है जो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर के साथ अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स सके अनुसार ज्यादा चीनी के सेवन से बॉडी में इंसुलिन का लेवल बढ़ता है जिससे विसरल फैट जमने लगता है। ऐसे में इस खतरनाक फैट को कम करने का सही तरीके फास्टिंग यानी उपवास होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले (Ref) से डॉक्टर्स के अनुसार फास्टिंग से इंसुलिन को कम करने के अलावा बॉडी को और एनर्जी के लिए फैट बर्न करने में मदद मिलती है। इससे पेट की चर्बी कम होती है और यह मेटाबॉलिज्म में भी सुधार करता है। उपवास से सूजन कम होती है साथ ही हार्ट और मेटाबॉलिज्म हेल्थ बेहतर होती है। (Photo credit):iStock

क्या है विसरल फैट?
दरअसल विसरल फैट हर किसी की बॉडी में होता है। यह आपके कई इंटरनल ऑर्गन्स के चारों ओर एक मुलायम और सॉफ्ट सुरक्षा परत होती है। यह बॉडी में एनर्जी को स्टोर और उसके इस्तेमाल में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए तो अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। विसरल फैट एक प्रकार चर्बी है जो बॉडी के अंदर गहराई में इकट्ठा होती है।

हाई इंसुलिन और विसरल फैट
लगातार ग्लूकोस से भरपूर चीजों का सेवन करने से पेनक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है। लंबे समय तक ग्लूकोज का सेवन करने से इंसुलिन का स्टार हाई रहता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है। इस स्थिति में बॉडी को ब्लड शुगर मैनेज करने के लिए और भी अधिक इंसुलिन की जरूरत पड़ती है जिससे फैट स्टोर होने लगता है।

हाई इंसुलिन के नुकसान
लगातार हाई इंसुलिन के कारण लिवर ग्लूकोज को फैट के रूप में इक्कठा करने लगता है जिससे फैटी लिवर की समस्या हो जाती है। इसके साथ ही बॉडी के इंटरनल ऑर्गन्स के आसपास नए फैट का उत्पादन करने लगती है। दूसरे फैट की तरह विसरल फैट भी बेहद हानिकारक होता है। इससे बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ता है, साथ ही कार्डियोमेटाबॉलिक डिजीज का खतरा बढ़ता है।

विसरल फैट और बीमारियां 
विसरल फैट गई गंभीर बीमारियों की वजह बनता है जिसमें हार्ट डिजीज टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर फैटी लिवर, स्लीप एपनिया और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी शामिल है।

कैसे कम करें विसरल फैट? 
एक्सपर्ट्स के अनुसार फास्टिंग विसरल फैट को कम करने का सबसे अच्छा तरीका होता है। खासतौर पर इंटरमिटेंट फास्टिंग से इससे छुटकारा पाया जा सकता है। इस तरीके का इस्तेमाल करते हुए आप हफ्ते में कुछ दिन सामान्य रूप से खाते हैं और बस कुछ दिन अपनी कैलोरी की मात्रा को कम कर देते हैं। इस डाइट को फॉलो करने वाले लोग को वेट लॉस में मदद मिलती है, साथ ही पेट की चर्बी और इन्फ्लेमेशन के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

फास्टिंग के मेटाबॉलिक फायदे 
फास्टिंग के मेटाबॉलिक फायदों में मेटाबॉलिक लचीलेपन में सुधार, इन्सुलिन सेंसटिविटी में बढ़ोतरी, फैट बर्न करने की क्षमता में वृद्धि और इंफ्लेमेशन को कम करना शामिल है। यह फायदे बॉडी को एनर्जी के लिए ग्लूकोज और फैट के बीच बेहतर तरीके से स्विच करने में मदद करते हैं जिससे पूरे दिन एनर्जी का लेवल स्थिर रहता है। इससे टाइप टू डायबिटीज और दूसरे क्रोनिक डिजीज का खतरा कम होता है।

घर में मौजूद इन चीजों से पाएं तुरंत राहत

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बदलता मौसम अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम लेकर आता है. सर्दियों का मौसम बस शुरु ही होने वाला है और उससे पहले ही ठंडी हवाएं चलनी शुरु हो गई हैं. इस मौसम में सुबह-शाम ठंड का एहसास होता है तो दोपहर में गर्मी सताती है. ऐसे में सर्दी-गर्मी मिलकर खांसी और जुकाम का कारण बनती है. बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम और खांसी होना जैसे आम हो जाता है. क्लीनिक पर मरीजों की लाइनें लगी होती है. हालांकि, कई बार दवाई लेने से भी आराम नहीं मिल पाता है.

खांसी-जुकाम से राहत पाने के लिए घरेलू नुस्खे काम आ सकते हैं. जिनका इस्तेमाल पुराने जमाने से हमारे बड़े-बुजुर्ग करते आ रहे हैं. इस बदलते मौसम में अगर आप भी सर्दी, खांसी या जुकाम से परेशान हैं तो हमारे बताए कुछ आसान और असदार नुस्खें अपना सकते हैं.

सर्दी-जुकाम और एलर्जी के लक्षण
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और एलर्जी होना आम बात है. ऐसा होने पर नाक बंद होना, नाक बहना, लगातार छींक आना, आंखों में पानी आना या जलन होना, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी होने से लक्षण दिखाई देते हैं. इसका कारण के बात करें तो चैंजिंग वेदर में हवा में मौजूद सूक्ष्म कण ( PM2.5, PM10) सांस के साथ शरीर के अंदर चले जाते हैं. ये Respiratory System की सफाई करने वाले छोटे-छोटे रोएं को कमजोर कर देते हैं, जिससे बलगम, खांसी, जुकाम और एलर्जी का समस्या बढ़ सकती है.

सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय
अगर आपको बहुत ज्यादा खांसी आ रही हैं तो तुलसी-अदरक का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं. तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं तो खांसी से राहत दिलाने का काम करते हैं. वहीं, अदरक में जिंजरोल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में हेल्पफुल है.

अगर जुकाम की वजह से आपकी नाक बंद हो गई है तो भाप लेना फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर 5 मिनट भाप लें. अजवाइन में फाइबर, विटामिन ए, सी, के और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. ये गले को साफ करता है और खांसी, बंद नाक से राहत दिलाने में मददगार है.

ये चीजें भी दिलाएंगी राहत
नींबू और शहद भी खांसी-जुकाम से राहत दिलाने में मददगार है. ये दोनों ही इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करने का काम करते हैं. वहीं, लहसुन शरीर से कफ और संक्रमण को रोकता है. आयुर्वेद के मुताबिक, रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पानी भी खांसी से राहत दिलाता है. हल्दी में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण को रोकने का काम करते हैं.

‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन में शहनाज का खुलासा– शादी से दूर रहना चाहती हैं एक्ट्रेस

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मुंबई: अभिनेत्री शहनाज गिल इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘इक कुड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से सबको चौंका दिया है। ‘बिग बॉस’ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाने वाली शहनाज का कहना है कि आज के दौर में शादी कोई जरूरी नहीं रह गया है। लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि जिंदगी में कभी भी कुछ भी हो सकता है, इसलिए नेवर से नेवर कहना ठीक नहीं।

‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन के दौरान बोलीं शहनाज
हाल ही में अपनी नई फिल्म ‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन के दौरान शहनाज ने शादी को लेकर अपनी सोच साझा की। उन्होंने साफ कहा, ‘अगर जरूरत न हो तो शादी करना कोई मजबूरी नहीं है। कई लोग शादी करते हैं, ये उनकी पसंद है, लेकिन मैं अभी उस रास्ते पर नहीं जाना चाहती। हां, भविष्य में क्या होगा, ये कौन जानता है।’

‘इक कुड़ी’ फिल्म में शहनाज सिर्फ अभिनय ही नहीं कर रहीं, बल्कि इस बार उन्होंने प्रोड्यूसर के रूप में भी कदम रखा है। फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी है जो सही जीवनसाथी की तलाश में संघर्ष करती है- कुछ-कुछ शहनाज की असली जिदगी जैसी। फिल्म के लेखक-निर्देशक अमरजीत सिंह सारों हैं और यह 31 अक्टूबर को रिलीज हुई।

शादी को लेकर शहनाज ने कही ये बात
शहनाज ने शादी को लेकर कहा, ‘शादी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं होता, बल्कि यह जिंदगी का बहुत बड़ा फैसला है। उनके शब्दों में, ‘जब एक लड़की अपने माता-पिता का घर छोड़कर किसी लड़के के साथ पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करती है, तो वो बहुत बड़ी बात होती है। आपको नहीं पता कि सामने वाला इंसान कैसा होगा, इसलिए सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।’

सिद्धार्थ शुक्ला के साथ कैमिस्ट्री 
‘बिग बॉस 13’ से सुर्खियों में आईं शहनाज ने अपने मासूम स्वभाव और फनी अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लिया था। खासकर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी केमिस्ट्री आज भी फैंस के जेहन में ताज़ा है। सिद्धार्थ के निधन के बाद शहनाज ने खुद को संभालने में जो हिम्मत दिखाई, उसने उन्हें और मजबूत बना दिया। शायद इसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि जिंदगी में खुद से प्यार करना सबसे जरूरी है।

शहनाज गिल का करियर वर्कफ्रंट
अपने करियर की बात करें तो शहनाज ने पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से शुरुआत की थी। 2015 में उन्होंने म्यूज़िक वीडियो ‘शिव दी किताब’ से मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 2017 में वो फिल्म ‘सत श्री अकाल इंग्लैंड’ में नजर आईं। पंजाबी फिल्मों ‘काला शाह काला’, ‘दाका’ और ‘हौंसला रख’ के बाद उन्होंने सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ और ‘थैंक यू फॉर कमिंग’ में काम किया। हाल ही में वो राजकुमार राव और तृप्ति डिमरी के साथ गाने ‘सजना वे सजना’ में भी दिखीं।

हैदराबाद एयरपोर्ट पर बम का खतरा, सुरक्षा कड़ी

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हैदराबाद में राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आरजीआईए) को शनिवार सुबह बम की धमकी वाला ईमेल मिला, जिसके बाद अधिकारियों ने इंडिगो की फ्लाइट को पास के एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया।

राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक अधिकारी के अनुसार, “01.11.2025 को APOC से एक मैसेज मिला कि कस्टमर सपोर्ट RGIA को एक ईमेल मिला है। Customersupport@gmrgroup.in पर ईमेल आईडी पपीता राजन से 05.25 बजे ये मेल भेजा गया जिसका सब्जेक्ट था: इंडिगो 68 की हैदराबाद जाने वाली लैंडिंग रोकें।”

धमकी भरे मेल में क्या लिखा?
ईमेल में लिखा था, “LTTE-ISI के गुर्गों ने 1984 के मद्रास एयरपोर्ट कार्यप्रणाली शैली में एक बड़ा धमाका करने की योजना बनाई है। यह धमाका RGIA पोर्ट के फ्यूजलेज और माइक्रोबॉट्स से फिक्स किए गए फ्यूल टैंक पर किया जाएगा। आईईडी में ताकतवर नर्व गैस होगी। फ्रैंकफर्ट ऑपरेशन उपायों का अध्ययन के लिए एक टेस्ट है। आईईडी की लोकेशन की जानकारी के लिए कृपया नीचे दिया गया स्टेग्नोग्राफिक डॉक्यूमेंट पढ़ें, लाइनों के बीच में पढ़ें।”

फ्लाइट को किया गया डायवर्ट
धमकी मिलने के बाद बम खतरा आकलन समिति (बीटीएसी) ने एक वर्चुअवली मीटिंग की और इसे एक खास खतरा बताया। समिति ने फैसला लिया कि फ्लाइट को सबसे पास वाले एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जाएगा और फ्लाइट के कैप्टन को एटीसी के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। कैप्टन लैंडिंग की जानकारी एयरपोर्ट को देगा। साथ ही जीएमआर सिक्योरिटी पुलिस में शिकायत दर्ज करेगी।

Previous articleडायना पुंडोले: पहली भारतीय महिला जो फेऱारी रेसिंग वर्ल्ड में मचाएंगी धमाल
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पहली भारतीय महिला जो फेऱारी रेसिंग वर्ल्ड में मचाएंगी धमाल

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भारत की महिला फेरारी कार रेसर और नेशनल चैम्पियन डायना पुंडोले इतिहास रचने की तैयारी में हैं. 32 साल की डायना पहली भारतीय महिला कार रेसर होंगी, जो इंटरनेशनल लेवल पर फेरारी कार रेसिंग में भारत को रिप्रेजेंट करेंगी. वे फेरारी क्लब चैलेंज मीडिल ईस्ट के तहत नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक होने वाली मोटरस्पोर्ट रेंसिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लेंगी.

फेरारी की सबसे एडवांस कार दौड़ाएंगी
चैम्पियनशिप के तहत डायना इंटरनेशनल F1 ट्रैक्स पर फेरारी 296 चैलेंज कार, जो फेरारी कंपनी की सबसे एडवांस कारों में से एक हैं और अपनी रफ्तार के लिए मशहूर है. दुबई, अबू धाबी, बहरीन, कतर और सऊदी अरब में मिडिल ईस्ट के बड़े फॉर्मूला वन सर्किट्स हैं, जहां डायना अपने हुनर क प्रदर्शन करेंगी और रेस को जीतकर भारत का नाम इंटरनेशनल लेवल पर चमकाने का प्रयास करेंगी.

कौन हैं फेरारी कार रेसर डायना पुंडोले?
भारतीय महिला कार रेसर डायना पुंडोले महाराष्ट्र के पुणे शहर में 15 अगस्त 1993 को जन्मी थीं और 2 बच्चों की मां हैं. वे पेशे से टीचर थीं और उनके पिता को रेसिंग का शौक था, जो ऐसे ही सड़कों पर दोस्तों के साथ रेस लगाया करते थे. इसी शौक के चलते वे फेरारी कार रेसिंग देखते थे. उन्होंने ही डायना को कार रेसिंग के लिए प्रेरित किया. डायना की पहली कोच मां रही हैं, जिन्होंने उन्हें ड्राइविंग के गुर सिखाए.

यूरोपीय देशों में ली कार रेसिंग की ट्रेनिंग
डायना बताती हैं कि पिता ने उन्हें रेसिंग के गुर सिखाए थे, लेकिन कार रेसिंग में आगे बढ़ने का उनका सफर वे देख नहीं पाए और छोड़कर चले गए. डायना यूरोपीय देश इटली के मुगेलो, मॉन्जा और दुबई ऑटोड्रोम जैसे इंटरनेशनल सर्किट्स पर कार रेसिंग की ट्रेनिंग ले चुकी हैं. डायना ने साल 2018 में जेके टायर वूमन इन मोटरस्पोर्ट कार्यक्रम में हिस्सा लेकर कार रेसिंग वर्ल्ड में एंट्री की और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

ये हैं डायना पुंडोले की खास उपलब्धियां
साल 2018 में जेके टायर वूमन इन मोटरस्पोर्ट प्रोग्राम के लिए 200 महिला रेसर्स में से सेलेक्ट हुईं और टॉप-6 में रहीं. साल 2024 में डायना ने नेशनल चैम्पियनशिप जीती. अगस्त 2024 में चेन्नई के मद्रास इंटरनेशनल सर्किट पर MRF इंडियन नेशनल कार रेसिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया और जीतकर कार रेसिंग वर्ल्ड में पुरुषों के बराबर महिलाओं का वर्चस्व कायम किया और अब इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में हिस्सा लेंगी.

फेरारी क्बल चैलेंज की मेंबरशिप डायना पुंडोले पोर्श 911 GT3 कप, फेरारी 488 चैलेंज, BMW M2 कंपीटिशन और रेनॉल्ट Clio कप जैसी हाई-प्रोफाइल रेसिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं.

पूर्वोत्तर सीमा पर वायुसेना का मेगा अभ्यास घोषित

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भारतीय वायुसेना ने अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर एयर एक्सरसाइज (वायु अभ्यास) की घोषणा की है. यह अभ्यास भारत की चीन, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश से सटी सीमाओं पर किया जाएगा. इस संबंध में सरकार ने NOTAM (Notice to Airmen) जारी कर दिया है.

सूत्रों के मुताबिक, यह वायु अभ्यास छह अलग-अलग तारीखों पर आयोजित किया जाएगा-

6 नवंबर 2025 (14:0018:29 UTC), 20 नवंबर 2025 (14:0018:29 UTC), 04 दिसंबर 2025 (14:0018:29 UTC), 18 दिसंबर 2025 (14:0018:29 UTC), 01 जनवरी 2026 (14:0018:29 UTC), 15 जनवरी 2026 (14:0018:29 UTC)

सूत्रों के अनुसार, यह अभ्यास सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में किया जाएगा. इसमें वायुसेना के फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ड्रोन शामिल रहेंगे. यह अभ्यास रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है, क्योंकि यह क्षेत्र सिक्किम (2020) और तवांग (2022) जैसी भारत-चीन सीमा झड़पों का गवाह रह चुका है. वहीं डोकलाम क्षेत्र जो भारत, चीन और भूटान की सीमा पर स्थित है, तीनों देशों के बीच तनाव का केंद्र बना रहा है.

रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य सीमा पर हवाई निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और बहु-डोमेन संचालन की तैयारी को परखना है. यह अभ्यास सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे भारत का चिकन नेक कहा जाता है, उससे लेकर अरुणाचल प्रदेश के न्यिंगची सेक्टर तक फैले हवाई क्षेत्र में होगा. यह कदम भारत का एक स्पष्ट संदेश है कि देश की पूर्वी सीमाओं पर किसी भी आपात स्थिति या आक्रामक गतिविधि का जवाब देने के लिए वायुसेना पूरी तरह तैयार है.

भारत का साफ संदेश.. तैयारी और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन
भारत यह दिखाना चाहता है कि उसकी वायुसेना किसी भी दिशा से आने वाले खतरे के लिए तैयार है चाहे वह चीन की सीमा से हो, पाकिस्तान की ओर से, या फिर पूर्व में बांग्लादेश-म्यांमार के पार समुद्री इलाके से. इस युद्धाभ्यास के ज़रिए भारत यह संदेश देता है कि हमारा पूर्वोत्तर इलाका न सिर्फ़ संवेदनशील है, बल्कि हमारी ताकत का भी केंद्र है.

चीन के लिए संदेश.. सीमा पर हवाई प्रभुत्व कायम
* यह अभ्यास उन इलाकों के पास हो रहा है जहां भारत-चीन टकराव (जैसे तवांग और सिक्किम) पहले हो चुके हैं. * चीन लगातार तिब्बत और न्यिंगची क्षेत्र में मिसाइल व एयरबेस तैनात कर रहा है. * भारत यह बताना चाहता है कि अगर कभी जरूरत पड़ी, तो IAF कुछ ही मिनटों में प्रतिक्रिया दे सकती है. यह चीन के लिए एक संतुलित लेकिन सख्त संदेश है भारत अब केवल रक्षा नहीं, बल्कि डिटरेंस (रोकथाम की शक्ति) पर ध्यान दे रहा है.

पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश .. दो मोर्चों पर तैयार सेना
हालांकि यह अभ्यास पूर्वी क्षेत्र में है पर पाकिस्तान के लिए अप्रत्यक्ष संदेश साफ़ है कि भारत दो फ्रंट (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ कार्रवाई करने की क्षमता रखता है. यानी अगर पश्चिम में कोई तनाव बढ़ता है, तो भी भारत की पूर्वी कमांड पूरी तरह सक्रिय और मजबूत है.

बांग्लादेश और म्यांमार के लिए संदेश..सहयोग और सुरक्षा
भारत का मकसद इन दोनों पड़ोसी देशों को धमकाना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि हमारा उद्देश्य स्थिरता और साझा सुरक्षा है भारत यह भी चाहता है कि ISI या चीन के प्रभाव में आकर पूर्वोत्तर में कोई अस्थिरता न फैले.

कुल मिलाकर रणनीतिक संकेत:
भारत पूर्वी सीमा पर पूर्ण हवाई नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहता है. यह अभ्यास तीन देशों (चीन-भूटान-म्यांमार) से सटे क्षेत्रों में सामरिक संतुलन बनाने की दिशा में कदम है. साथ ही, यह दिखाता है कि भारत की वायुसेना अब रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव रणनीति पर काम कर रही है.

55 साल बाद सतना स्कूल में गूंजा जनरल द्विवेदी का संदेश- ‘भारत को चाहिए एकजुट नागरिक’

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नई दिल्ली। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को अपने बचपन के विद्यालय सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल, सतना पहुंचे। पूरे 55 वर्ष बाद अपने पुराने स्कूल लौटे जनरल द्विवेदी का छात्रों, शिक्षकों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

मंच पर पहुंचते ही वे भावुक हो उठे और कहा कि “यही वह स्थान है, जहां से मैंने जीवन में निर्णय लेने की क्षमता सीखी, जिसने आगे चलकर मुझे सेना में कई निर्णायक सफलताएं दिलाईं, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर सबसे महत्वपूर्ण रहा।” जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि, “इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल दुश्मन पर विजय प्राप्त करना नहीं था, बल्कि देश की अखंडता, संप्रभुता और शांति की पुनः स्थापना करना था।

इस अभियान ने पूरे समाज को एक सूत्र में बांध दिया। जिस तरह ‘मां, बहन और बेटी’ जब भी अपने माथे पर सिंदूर लगाती हैं तो एक सैनिक को याद करती हैं, उसी भावना ने इस अभियान का नाम ‘सिंदूर’ रखा। यह अभियान हर भारतीय के मन में राष्ट्रभक्ति का सिंदूर बन गया।”

धर्म युद्ध था “आपरेशन सिंदूर”
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक धर्म युद्ध था एक ऐसा युद्ध, जिसमें नैतिकता, सिद्धांत और तकनीक का समन्वय था। “हमने किसी भी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया, न ही नमाज या प्रार्थना के समय हमला किया। यह हमारे भारतीय संस्कारों का प्रतीक है”।

एकजुटता से ही 2047 में भारत होगी विकसित
थल सेना प्रमुख ने कहा कि जब देश के नागरिक एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे, तब ही 2047 का विकसित भारत का सपना साकार होगा। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और समाजसेवियों की भारी उपस्थिति रही। जनरल द्विवेदी का सम्मान विद्यालय परिवार की ओर से किया गया। उनका सतना आगमन पूरे शहर के लिए गौरव का क्षण बन गया, जिसने न केवल उनके बचपन के विद्यालय को, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया।

55 वर्षो बाद ताजा हुई यादें
जनरल द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 1971-72 में चौथी कक्षा में वे इसी विद्यालय में पढ़े थे। इतने वर्षों बाद लौटकर उन्होंने विद्यालय के परिसर में कदम रखते ही बचपन की यादें ताजा कर लीं। उन्होंने विद्यालय परिवार और शिक्षकों का आभार जताया, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र सेवा के संकल्प को आकार दिया।

विद्यार्थी जीवन मे रखी सफलता की नींव
छात्रों को प्रेरित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि सफलता की नींव विद्यार्थी जीवन में ही रखी जाती है। “जो विद्यार्थी आज परिश्रम करता है, वही कल राष्ट्र निर्माण का आधार बनता है। आप चाहे वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में, लेकिन राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र सेवा का भाव कभी कम नहीं होना चाहिए।

जनरल द्विवेदी ने सफलता का एक नया मंत्र “थी ए (THE A)” बताया —
Attitude (एटीट्यूड) से सकारात्मक दृष्टिकोण और ऊर्जा मिलती है,
Adaptability (एडॉप्टिबिलिटी) से व्यक्ति समय के साथ खुद को ढालना सीखता है,
Ability (एबिलिटी) से हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

टोल प्लाजा कर्मियों के बच्चों को मिलेगा ‘विशेष छात्रवृत्ति’ का तोहफा, अब पढ़ाई में नहीं लगेगी रोक

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नई दिल्ली।  देश के विभिन्न राज्यों के सड़क मार्ग पर तैनात टोल प्लाजा सभी कर्मचारियों , सुपरवाइजर , गार्ड, के लिए यह अच्छी खबर है। इन कर्मचारियों के बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता मिलेगी। यह आर्थिक सहायता ” आरोहण स्कालरशिप प्रोग्राम 2025 ” के अन्तर्गत दी जाएगी। इसके लिए में निर्धारित फार्म भरना होगा।आरोहण स्कालरशिप प्रोग्राम 2025 पूरे भारत के किसी भी टोल प्लाज़ा पर कार्यरत कर्मचारियों के आश्रित बच्चों के लिए है। इस योजना के अंतर्गत 11वीं–12वीं एवं उच्च शिक्षा (UG/PG) के विद्यार्थियों को ₹12,000 से ₹50,000 तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। साथ ही छात्रों को कैरियर मार्गदर्शन और मेंटरशिप सहायता भी दी जाएगी। इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम में TC, सुपरवाइज़र या अन्य कोई भी कर्मचारी जो टोल प्लाज़ा पर कार्यरत हैं, वे आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के माता/पिता/पोषक में से किसी एक का टोल प्लाज़ा पर कार्यरत होना आवश्यक है, तथा परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। आरोहण स्कालरशिप प्रोग्राम में आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवम्बर 2025 है।

इस दिनांक तक टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चे बेहतर शिक्षा में सहयोग के लिए आवेदन कर सकते हैं

देवास भोपाल टोल प्लाजा के मेनेजर अजय मिश्रा ने देश , प्रदेश के टोल प्लाजा पर काम करने वाले सुपरवाइजर , गार्ड एवं अन्य कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएँ और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक कदम बढ़ाएं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए उमाशंकर पांडेय से 8770136937 से संपर्क किया जा सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। इस पहल के शुभारंभ पर बोलते हुए, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट आरोहण टोल प्लाज़ा कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

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उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य छात्रों की प्रतिभा को निखारना है, जो देश के विकास को गति प्रदान करेंगे। इस परियोजना का लक्ष्य कक्षा 11 से स्नातक के अंतिम वर्ष तक के पाँच सौ छात्रों को शामिल करना है। प्रत्येक छात्र को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 12 हज़ार रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, स्नातकोत्तर और उच्च शिक्षा के इच्छुक पचास मेधावी छात्रों को 50-50 हज़ार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आयोजित की जाएगी, जिसके लिए छात्रों को शैक्षणिक रिकॉर्ड, आय प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र, पहचान पत्र जैसे प्रासंगिक दस्तावेज़ जमा करने होंगे।