एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया- प्रियंका गाँधी 

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‎‎बेगूसराय। एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया। 20 साल से प्रदेश की सत्ता में बैठी पार्टी ने आपके लिए कुछ नहीं किया। आपको सिर्फ गरीबी, बेरोजगारी और पलायन दिया है। आज वे आपको बरगलाने में लगे हैं। भविष्य और अतीत की बातों में आपको उलझाते हैं लेकिन आपके संघर्षशील वर्तमान की बातें नहीं करते। सोच समझकर अपने भविष्य का फैसला ​कीजिए और ऐसी सरकार चुनिए जो आपके वर्तमान के लिए काम करे। यह बात शनिवार को बिहार के बेगूसराय जिले के बछवाड़ा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कही। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती ने आजादी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने हमें हमारा संविधान और वोट का अधिकार दिया। आज नरेंद्र मोदी और एनडीए की सरकार इसी अधिकार को छीन रही है। बिहार में एसआईआर के तहत लाखों वोट काट दिए गए। 20 साल से चल रही एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया है और अब जनता का वोट चोरी करके सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है। बिहार की जागरूक जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। 

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मेटा को झेलना पड़ सकता है करोड़ों का जुर्माना!

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Meta: सिंगापुर सरकार ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को रेड अलर्ट जारी किया है। सरकार का संदेश साफ है – फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन स्कैम रोकने के लिए मेटा को इस महीने के अंत तक फेस रिकग्निशन जैसी हाई-टेक तकनीक लागू करनी होगी, नहीं तो भारी जुर्माना झेलना होगा।

जुर्माना धमाका

अगर मेटा ने समय पर कदम नहीं उठाया, तो कंपनी पर करीब 6.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
और इससे भी बड़ा खतरा – हर दिन 1 लाख डॉलर (लगभग 77 लाख रुपये) का अतिरिक्त जुर्माना बढ़ता रहेगा।
यह चेतावनी सिंगापुर के गृह मंत्रालय ने बुधवार को जारी की।

मेटा का बचाव

मेटा का कहना है:

“फेसबुक पर किसी भी मशहूर शख्स की फोटो या नाम का गलत इस्तेमाल हमारी पॉलिसी के खिलाफ है। ऐसे फेक अकाउंट और विज्ञापन तुरंत हटाए जाते हैं।”

कंपनी ने कहा कि उनके पास स्पेशल सिस्टम हैं जो नकली अकाउंट पकड़ते हैं और पुलिस के साथ मिलकर स्कैमर्स पर कार्रवाई करते हैं।

ऑनलाइन धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा

जून 2024 से जून 2025 तक फेसबुक पर फर्जी अकाउंट और विज्ञापन तेजी से बढ़े।
स्कैमर्स सरकारी अधिकारियों की फोटो और वीडियो का इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे हैं।
सरकार का कहना है कि मेटा ने कदम उठाए हैं, लेकिन स्कैम की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

Meta: नए कानून के तहत सख्ती

यह आदेश फरवरी 2024 से लागू ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट के तहत दिया गया है।
मेटा के लिए यह पहला बड़ा केस है।
सिंगापुर ने साफ कर दिया है: सोशल मीडिया कंपनियों पर अब कोई ढीलाई नहीं – वरना करोड़ों का भारी जुर्माना भुगतना पड़ेगा।

स्कूल डांस पार्टी में हुई पहली मुलाकात, शाहरुख-गौरी की लव स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं

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मुंबई: आज 2 नवंबर को शाहरुख खान अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉलीवुड में शाहरुख खान और गौरी की लव स्टोरी सबसे खास है। उन्हें सबसे सुंदर कपल कहा जाता है। इस खास अवसर पर जानिए शाहरुख और गौरी खान की दिलचस्प प्रेम कहानी।

पहली मुलाकात कैसे हुई
शाहरुख और गौरी की पहली मुलाकात 1984 में दिल्ली में एक दोस्त की पार्टी में हुई थी। शाहरुख उस समय 18 साल के थे और गौरी 13 साल की। शाहरुख को गौरी पहली नजर में पसंद आ गईं। पार्टी में गौरी किसी और लड़के के साथ डांस कर रही थीं। शाहरुख ने हिम्मत करके गौरी को डांस के लिए कहा, लेकिन गौरी ने मना कर दिया। फिर भी शाहरुख ने बात शुरू की और दोनों दोस्त बन गए।

शाहरुख का प्यार और पजेसिवनेस
शाहरुख गौरी से बेहत प्यार करते थे। शाहरुख, गौरी के लिए काफी पजेसिव भी थे। उन्हें पसंद नहीं था कि गौरी बाल खुला रखें या अकेले किसी लड़के से बात करें। यहां तक की वह गौरी को व्हाइट शर्ट भी नहीं पहनने देते थे। इससे गौरी को लगा कि रिश्ते में ब्रेक लेना चाहिए। लेकिन शाहरुख नहीं माने।

परिवार की नाराजगी
गौरी हिंदू ब्राह्मण परिवार से थीं और शाहरुख मुस्लिम। दोनों के घरवाले शादी से राजी नहीं थे। गौरी के माता-पिता को शाहरुख पसंद नहीं थे क्योंकि वे एक्टर बनना चाहते थे। गौरी के पापा शुद्ध शाकाहारी थे। शाहरुख उस समय फिल्मों में स्ट्रगल कर रहे थे। एक बार गौरी मुंबई चली गईं तो शाहरुख दिल्ली से उन्हें ढूंढने पहुंच गए।
 
शादी कैसे हुई
शाहरुख और गौरी की शादी में सबसे बड़ी समस्या धर्म की थी। शाहरुख ने गौरी के परिवार को मनाने में बहुत मेहनत की और आखिर सफल हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 अगस्त 1991 को दोनों ने कोर्ट में शादी कर ली। फिर निकाह हुआ, जिसमें गौरी का नाम आयशा रखा गया। 25 अक्टूबर 1991 को हिंदू रीति से शादी हुई। शादी दोनों धर्मों के रिवाज से हुई। गौरी ने शाहरुख के लिए अपना नाम गौरी खान रखा।
 
शादी के बाद की कहानी
शादी के बाद शाहरुख सुपरस्टार बने और गौरी उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं। अब उनके तीन बच्चे हैं – आर्यन खान, सुहाना खान और अबराम खान। उनकी जोड़ी 30 साल से ज्यादा मजबूत है। शाहरुख खान जल्द ही फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे। इस फिल्म में शाहरुख के साथ उनकी बेटी सुहाना खान भी नजर आएंगी।

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ये दो आम आदतें बढ़ा रही हैं दिल की बीमारियों का खतरा, हार्ट अटैक से बचने के लिए तुरंत सुधार करें

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नई दिल्ली। इन दिनों दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पहले जहां बुजुर्गों में इसके मामले सामने आते थे, वहीं अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आने लगे हैं। खासकर भारत में युवाओं में दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। साथ ही इसकी वजहों के बारे में जानना भी जरूरी है। दरअसल, युवाओं की 2 आदतें दिल से जुड़ी समस्याओं का कारण बन रही है। यह आदतें खानपान से जुड़ी हुई है, जिसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं कौन-सी दो आदतें कर रही हैं युवाओं के दिल को बीमार-

दिल को बीमार कर रही दो आदतें
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो खानपान से जुड़ी ये दो आदतें हार्ट डिजीज का प्रमुख कारण बन रही है। हैरानी की बात यह है कि ये आदतें उन लोगों के दिल को भी बीमार बना रही है, जिनकी हार्ट डिजीज का कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं रही है। इन दो आदतों में नाश्ता स्किप करना और देर रात डिनर करना शामिल हैं। अक्सर सुबह की भागदौड़ और रात को काम से लेट फ्री होने की वजह से अक्सर कई युवा जाने-अनजाने में इस आदत को अपनी रूटीन में शामिल कर चुके हैं, जो अब उनके लिए हानिकारक साबित हो रही है। आइए जानते हैं कैसे दिल के लिए खतरनाक हैं ये दो आदतें

नाश्ता स्किप करना
सुबह की भागदौड़ के बीच अक्सर नाश्ता स्किप करना एक आसान और सुविधाजनक फैसला लगता है, लेकिन इसकी वजह से आपके दिल को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। नाश्ता करने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और प्लाक जमा होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ब्रेकफास्ट स्किप करने वाले युवाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने और असामान्य मेटाबॉलिज्म रिएक्शन का खतरा ज्यादा होता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ावा देते हैं और आर्टरीज में प्लाक जमने का कारण बनते हैं। साथ ही सुबह का खाना न खाने से शरीर को लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है, जिससे कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं और हार्ट के लिए रिस्क फैक्टर बढ़ जाते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिकत बार-बार नाश्ता स्किप करने से दिल का दौरा और हार्ट डिजीज से जुड़ी मौत का खतरा 27-35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

देर रात डिनर करना
इन दिनों लोगों का लाइफस्टाइल काफी ज्यादा बदल चुका है। इसकी वजह से अक्सर रात में खाना खाते-खाते लेट हो जाता है। ऐसे में देर रात डिनर करने के बाद तुरंत सो जाना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे शरीर में सूजन आ जाती है। सोने से दो घंटे से कम समय पहले भोजन करने से शरीर की इंटरनल मेटाबॉलिज्म प्रोसेस बिगड़ जाती है, ग्लूकोज मैनेजमेंट बाधित होता है और ज्यादा सूजन होती है, जो सभी मायोकार्डियल डैमेज के लिए के खतरे बढ़ाते हैं। अब, अगर आप नियमित रूप से इन आदतों को फॉलो करते हैं, तो आप खुद ही अपने दिल को बीमार बना रहे हैं और जाने-अनजाने हार्ट अटैक को बुलावा दे रहे हैं। इसलिए हेल्दी रहने के लिए आज ही इन आदतों में बदलाव कर लें।

इंडिगो की फ्लाइट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप

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नई दिल्ली: हैदराबाद (Hyderabad) के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Rajiv Gandhi International Airport) के अधिकारियों के मुताबिक,शनिवार सुबह उन्हें एक बम की धमकी वाला ईमेल मिला. इस ईमेल में किसी “लिट्टे-आईएसआईएस के सदस्य” द्वारा इंडिगो के विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. इसके बाद इंडिगो के विमान को डायवर्ट कर दिया गया.

बताय गया कि ईमेल में 1984 में चेन्नई हवाई अड्डे पर हुए बम विस्फोट जैसे हमले की चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद हवाई अड्डे के अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया. RGI हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार 1 नवंबर, 2025 को सुबह लगभग 5:25 बजे हवाई अड्डा परिचालन नियंत्रण केंद्र को धमकी भरे मेल की जानकारी मिली.

इंडिगो के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि हैदराबाद जाने वाली उड़ान संख्या 6ई 68 को 1 नवंबर को सुरक्षा संबंधी धमकी मिली थी, जिसके कारण विमान को डायवर्ट कर दिया गया. प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “1 नवंबर को जेद्दा से हैदराबाद जा रही इंडिगो की उड़ान 6E 68 के लिए सुरक्षा संबंधी खतरा पाया गया और विमान को मुंबई की ओर मोड़ दिया गया. प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हमने संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया और विमान को आगे के संचालन के लिए मंजूरी देने से पहले आवश्यक सुरक्षा जांच में उनका पूरा सहयोग किया.”

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देश के लिए नहीं खेल पाए, कोच बनकर भारतीय टीम को फाइनल में पहुँचाया—अमोल मजूमदार की कहानी

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नई दिल्ली: अमोल मजूमदार की कहानी सिर्फ एक कोच की नहीं है, यह उस खिलाड़ी की गाथा है जिसने कभी भारतीय टीम की जर्सी नहीं पहनी, पर उसने वह कर दिखाया जो शायद भारत के लिए खेलने वाले भी नहीं कर पाए। उन्होंने खुद मैदान पर मौका नहीं पाया, लेकिन दूसरों को वह मौका दिलाया और उसी से भारत को विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया। भारत की महिला क्रिकेट टीम 2005 और 2017 के बाद सिर्फ तीसरी बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची है और इस बार उसके चैंपियन बनने की संभावना पहले से कहीं ज्यादा प्रबल है।

फाइनल दो नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में है। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में एक ऐसी ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराया जिसे हराना मुश्किल माना जाता है। हालांकि, अमोल मजूमदार के लिए ऐसा करना आसान नहीं था। उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, न सिर्फ बतौर कोच, बल्कि अपने खेलने के दिनों में भी। आइए उनकी कहानी जानते हैं…

बचपन और इंतजार की शुरुआत
मजूमदार का जीवन एक इंतजार से शुरू हुआ। 1988 में वह 13 साल के थे, जब स्कूल क्रिकेट के टूर्नामेंट हैरिस शील्ड के दौरान नेट्स में अपनी बल्लेबाजी की बारी आने का इंतजार कर रहे थे। उसी दिन अमोल की टीम से ही खेल रहे सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की। दिन खत्म हो गया, पारी घोषित कर दी गई, लेकिन अमोल को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। यह घटना उनके जीवन का प्रतीक बन गई। बैटिंग की बारी हमेशा उनसे कुछ दूर ही रही।

1993 में जब उन्होंने बॉम्बे (अब मुंबई) के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तो पहले ही मैच में 260 रनों की ऐतिहासिक पारी खेल डाली। यह तब विश्व में किसी भी खिलाड़ी की डेब्यू पारी में सबसे बड़ा स्कोर था। लोग कहने लगे- यह अगला सचिन तेंदुलकर बनेगा। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दो दशक से भी अधिक लंबे करियर में उन्होंने 11,000 से ज्यादा रन बनाए, 30 शतक जड़े, लेकिन कभी भी भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेल सके। वो एक सुनहरे युग के खिलाड़ी थे, जब टीम में तेंदुलकर, द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण जैसे सितारे थे। मजूमदार उनके साए में खो गए।

हार नहीं मानी: पिता की एक बात ने सब बदल दिया
2002 तक आते-आते उन्होंने लगभग हार मान ली थी। चयनकर्ता बार-बार नजरअंदाज करते रहे। वो खुद कहते हैं, ‘मैं एक खोल में चला गया था, समझ नहीं आ रहा था अगली पारी कहां से निकलेगी।’ तभी उनके पिता अनिल मजूमदार ने कहा, ‘खेल छोड़ना नहीं, तेरे अंदर अभी क्रिकेट बाकी है।’ यह एक वाक्य उनकी जिंदगी बदल गया। उन्होंने वापसी की और 2006 में मुंबई को रणजी ट्रॉफी जिताई। इसी दौरान उन्होंने एक युवा खिलाड़ी रोहित शर्मा को पहली बार फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में मौका दिया। फिर भी, दो दशकों में 171 मैच, 11,167 प्रथम श्रेणी रन, 30 शतक के बावजूद उन्होंने भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला।

कोच बनने की नई राह
सचिन तेंदुलकर ने 2014 में अमोल के संन्यास के वक्त कहा था, ‘मजूमदार सच्चे अर्थों में खेल के सेवक हैं।’ पर अमोल के मन में एक खालीपन रह गया और वह बताते हैं, ‘मैंने भारत के लिए कभी नहीं खेला, यही एक कमी रह गई।’ 2014 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उन्होंने कोचिंग का रास्ता चुना। उन्होंने नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों के साथ काम किया। उनकी पहचान एक ऐसे कोच की बनी जो कम बोलता है, लेकिन बहुत गहराई से हर चीज को समझता है। अक्तूबर 2023 में जब उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया, तो कई लोगों ने सवाल उठाए कि जिसने भारत के लिए कभी नहीं खेला, वो कोच कैसे बनेगा? लेकिन दो साल बाद, वही लोग उनके सामने सिर झुका रहे हैं।

कबीर खान की तरह टीम को बदला
2025 महिला विश्व कप के ग्रुप स्टेज में भारत का प्रदर्शन खराब रहा। इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से टीम को हार मिली। सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे थे, आलोचना चरम पर थी। तभी मजूमदार ने टीम के सामने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। हरमनप्रीत कौर बाद में बोलीं, ‘मैंने इंग्लैंड मैच के बाद एक शब्द नहीं बोला। सर ने कहा- आप लोगों को यह मैच आसानी से खत्म करना चाहिए था। हम सबने उसे सही भावना में लिया क्योंकि अमोल सर जो भी कहते हैं, दिल से कहते हैं।’ मजूमदार ने उस समय कहा, ‘वह बात भावना से आई थी, लेकिन मकसद टीम को आगे बढ़ाना था।’ यह वही पल था जिसने पूरी टीम की सोच बदल दी। उस एक बातचीत ने आपको उस आदमी के बारे में सब कुछ बता दिया, जिसने चक दे! इंडिया में शाहरुख खान के कबीर खान की तरह व्यक्तिगत अस्वीकृति को सामूहिक जीत में बदल दिया।

सेमीफाइनल: बस एक रन ज्यादा चाहिए
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले, उन्होंने ड्रेसिंग रूम की व्हाइटबोर्ड पर सिर्फ एक लाइन लिखी, ‘हमें फाइनल में पहुंचने के लिए बस उनसे एक रन ज्यादा चाहिए, बस इतना।’ साधारण वाक्य, लेकिन गहरी सोच। फिर चमत्कार हुआ। जेमिमा रॉड्रिग्स ने नंबर तीन पर बल्लेबाजी की, जैसा कि मजूमदार ने तय किया था। उन्होंने 127 रनों की नाबाद पारी खेली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 89 रन बनाए। भारत ने 339 रनों का पीछा कर ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया। महिलाओं के वनडे इतिहास का सबसे बड़ा सफल चेज किया। टीम उछल पड़ी, लेकिन अमोल मजूमदार खामोश खड़े रहे। उनकी आंखों में नमी थी और चेहरा शांत था। उन्होंने कोई जश्न नहीं मनाया। उनके लिए यह जीत नहीं, एक अधूरी कहानी का अंत थी। कहानी यह कि- जिसने कभी भारत की जर्सी नहीं पहनी, उसने कोच बनकर भारतीय टीम को विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया।

असल जिंदगी का ‘कबीर खान’
समानताएं खुद-ब-खुद लिखी जाती हैं। चक-दे इंडिया के कबीर खान की तरह ही अमोल मजूमदार ने भी अनदेखे और गलत समझे जाने के जख्म अपने भीतर सहे। कबीर की तरह उन्होंने भी एक ऐसी टीम को संभाला, जिसे अक्सर अस्थिर और असंगत कहकर आलोचना की जाती थी। लेकिन अमोल ने उन खिलाड़ियों को स्पष्टता दी, दिशा दी और विश्वास दिलाया। लेकिन फर्क इतना है कि मजूमदार की कहानी किसी पटकथा लेखक की नहीं, जिंदगी की अपनी कलम से लिखी गई है। उनके सबक किसी किताब से नहीं आए, वे आए हैं वर्षों के इंतजार, खामोशी से जद्दोजहद करने और उस संवेदना से जो केवल वही महसूस कर सकता है, जिसने खुद कभी भुलाए जाने का दर्द झेला हो। ऑलराउंडर स्नेह राणा ने कहा, ‘वो सबसे मिलनसार कोच हैं जो हमारे साथ रहे। वो कभी चिल्लाते नहीं, बस सुनते हैं। और जब बोलते हैं, तो आप बेहतर करना चाहते हैं।’ मजूमदार ने टीम को सिर्फ तकनीक नहीं सिखाई, उन्होंने विश्वास करना सिखाया। उन्होंने खिलाड़ियों को यह महसूस कराया कि वो किसी भी मंच पर खड़ी होकर जीत सकती हैं।

अमोल मजूमदार: एक प्रतीक बन चुके हैं
अब चाहे भारत फाइनल जीते या हार जाए, लेकिन अमोल मजूमदार की कहानी पूरी हो चुकी है। जिस बच्चे को 13 साल की उम्र में बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था, आज वही कोच बनकर पूरी टीम को चैंपियन बनने का मौका दे रहा है। कभी जो इंतजार उनका सबसे बड़ा दर्द था, वही अब उनकी पहचान बन गया है। उन्होंने दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेलने वालों का खेल नहीं, बल्कि उन लोगों का भी है जो दिल से खेलते हैं। कभी-कभी खेल उन्हें याद नहीं रखता जिन्होंने खेला, बल्कि उन्हें याद रखता है जिन्होंने उसे बदल दिया, और अमोल मजूमदार ने सचमुच उसे बदल दिया है। जिसे बैटिंग की बारी कभी नहीं मिली, उसने पूरी टीम को जीत की बारी दे दी।

हजार से ज्यादा अप्रेंटिस पद खाली, मौका न गंवाएं!

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RRC ECR Apprentice: युवाओं के लिए सपनों का मौका! पूर्व मध्य रेलवे ने 1149 अप्रेंटिस पदों के लिए अधिसूचना जारी की है। अगर आप 10वीं पास हैं और ITI में हैं, तो यह मौका फटाफट आवेदन करने का है – सीधे करियर की पटरी पर रफ्तार पकड़ सकते हैं!

आवेदन की डेडलाइन:

  • शुरू: आज से
  • आखिरी मौका: 25 अक्टूबर 2025

RRC ECR Apprentice: पात्रता की हॉट टिप्स:

  • न्यूनतम 50% अंक के साथ 10वीं पास
  • ITI सर्टिफिकेट अनिवार्य
  • आयु: 15-24 साल (आरक्षित वर्ग को छूट)

आवेदन शुल्क:

  • सामान्य/ओबीसी: ₹100
  • एससी/एसटी, महिला, PWD: बिल्कुल फ्री!

चयन का मसाला:

  • 10वीं + ITI अंकों का औसत तय करेगा मेरिट
  • समान अंक होने पर उम्र और 10वीं पासिंग डेट तय करेगी प्राथमिकता

आवेदन का आसान फॉर्मूला:

  1. रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  2. नए यूजर के लिए रजिस्ट्रेशन करें
  3. ऑनलाइन फॉर्म भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें
  4. शुल्क का भुगतान करें (यदि लागू हो)
  5. सबमिट करें और प्रिंट आउट निकालें

स्पेशल एडवाइस:
यह भर्ती सिर्फ मेहनती और टैलेंटेड युवाओं के लिए है। मेरिट लिस्ट में नाम दर्ज होना = करियर में सुपर बूस्ट! ऐसे मौके बार-बार नहीं आते – जल्दी करें, देर न करें और सपनों की ट्रेन पकड़ें!

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Shreya Pandey

NDA का संकल्प पत्र बनाम INDIA गठबंधन का प्रण पत्र, जनता के लिए हुई वादों की बरसात

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पटना । बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए इंडिया गठबंधन(महागठबंधन) ने तेजस्वी प्रण नाम से अपना मेनिफेस्टो (Manifesto) जारी किया है तो एनडीए (NDA) ने आर्थिक समृद्धि और औद्योगिक क्रांति के जरिये बिहार को विकसित बनाने का संकल्प लिया है। जनता का वोट बटोरने के लिए दोनों गठबंधनों ने चुनावी वादों की बरसात कर दी है।

एनडीए के संकल्प पत्र में राज्य में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश की बात कही गई है। हर जिले में फैक्ट्रियां लगेंगी। दस नये औद्योगिक पार्क का निर्माण होगा। एक सौ एमएसएमई पार्क और 50 हजार से अधिक कुटीर उद्योग लगेंगे। हर परिवार को रोजी-रोजगार मिलेगा। एक करोड़ सरकारी नौकरियां और रोजगार मिलेंगे।

एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने और मिशन करोड़पति से चिह्नित महिला उद्यमियों को करोड़पति बनाने का वादा किया गया है। बिहार को पांच सालों में बाढ़ से मुक्त कराया जएगा। एनडीए ने विकसित बिहार के लिए शुक्रवार को संकल्प पत्र 2025 जारी किया। इसमें ऐसे 25 प्रमुख संकल्प शामिल हैं।

सत्तारूढ़ गठबंधन ने संकल्प पत्र के जरिये अगले पांच सालों के लिए अपनी कार्ययोजना जनता के समक्ष रखी है। इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं और अतिपिछड़ा वर्ग के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए के पांचों दलों के शीर्ष नेताओं ने सरदार पटेल की 150 वीं जयंती पर संकल्प पत्र का लोकार्पण किया। बाद में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी विस्तृत जानकारी दी। संकल्प पत्र में अतिपिछड़ा वर्ग के विभिन्न व्यावसायिक समूहों को दस लाख की सहायता देने, हर जिले में मेगा स्किल सेंटर खोलने की बात है। अतिपिछड़ा वर्ग को आर्थिक और सामाजिक बल देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित होगी।

‘किसान सम्मान निधि’ की राशि छह हजार को बढ़ाकर नौ हजार किया जाएगा। बढ़ी हुई तीन हजार की राशि राज्य सरकार अपने कोष से देगी, जिसके लिए कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि की शुरुआत होगी। साथ ही किसानों को सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी होगी। वहीं, मत्स्य पालकों को 9,000 रुपये देने की घोषणा की गई है।

गरीब परिवारों के लिए केजी से पीजी तक शिक्षा मुफ्त होगी
गरीब परिवारों के छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। महिला रोजगार योजना से दो लाख तक की सहायता दी जाएगी।

चार शहरों में नए अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, चार में मेट्रो बनेंगे
पटना, दरभंगा, पूर्णिया व भागलपुर में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, चार नये शहरों में मेट्रो का निर्माण किया जाएगा।

एनडीए का संकल्प
1. एक करोड़ जीविका सदस्यों को लखपति दीदी बनाएंगे।

2. हर घर में 125 यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी।

3. हर घर में नौकरी और रोजगार देंगे।

4. हर व्यक्ति को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज।

5. अतिपिछड़ों के व्यावसायिक समूहों को दस लाख की मदद

‘इंडिया’ का प्रण
1. जीविका कैडर दीदियों को दो हजार रुपये भत्ता देंगे।

2. हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे।

3. हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे।

4. हर व्यक्ति को 25 लाख तक मुफ्त स्वास्थ्य बीमा।

5. अतिपिछड़ा वर्ग को पांच लाख की ब्याज रहित राशि मिलेगी।

क्या बोले पीएम?
एनडीए का संकल्प पत्र आत्मनिर्भर और विकसित बिहार के हमारे विजन को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। इसमें राज्य के किसान, युवा साथियों और माता-बहनों के साथ-साथ सभी परिवारजनों के जीवन को आसान बनाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता दिखाई देती है। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

मसाले में जहरीला लेड पाया गया, 11 ब्रांड्स का माल तुरंत हटाने को कहा, स्वास्थ्य और याददाश्त पर पड़ सकता है गंभीर असर

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मसालों का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद होता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और इंफेक्शन से राहत मिलती है। लेकिन अमेरिका में एफडीए ने कुछ ब्रांड के दालचीनी पाउडर के अंदर ज्यादा लेड पाया। जो कि सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

कौन सा मसाला निकला मिलावटी?
भारत को मसालों का देश कहा जाता है। क्योंकि अधिकतर मसालों की शुरुआत यहीं पर हुई। यहां के लोगों ने विदेशी मसालों को भी खूब इस्तेमाल किया। जिस वजह से आज सारे मसाले भारतीय लगते हैं, जो सेहत को फायदा भी देते हैं। लेकिन अमेरिका में दालचीनी पाउडर में इस बार लेड की अधिक मात्रा मिली है, जो जहरीली साबित होती है।

FDA ने 11 कंपनियों को दी चेतावनी
​टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 11 मसालों के ब्रांड को लेड की अधिक मात्रा की वजह से माल हटाने के लिए कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें लेड की मात्रा 2.03 से 7.68 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) निकली। एफडीए ने सभी कंपनी को खुद से ऐसे स्टॉक को हटाने के लिए कहा है।

ग्राहकों को सलाह
एफडीए ने ग्राहकों को दालचीनी के ऐसे पाउडर को फेंकने के लिए कहा है। ऐसे प्रोडक्ट्स की शेल्फ लाइफ ज्यादा होती है, इसलिए उसके पैकेट पर देखें कि उसमें लेड की मात्रा ज्यादा तो नहीं है।

लेड कैसे है जहरीला
लेड एक मेटल है, जिसे मसालों के रंग और वजन को बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है। अगर यह एक मात्रा से ज्यादा होता है तो शरीर के लिए जहरीला साबित हो सकता है। इससे खतरनाक असर दिख सकते हैं।

खून में बढ़ता है लेड
FDA ने बताया कि ऐसे मसालों का सेवन खून में लेड बढ़ाता है। जिसके नुकसान उपयोगकर्ता की उम्र, संपर्क की अवधि, मात्रा पर निर्भर करती है। इसकी वजह से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।

लेड टॉक्सिसिटी के नुकसान
​सीडीसी के मुताबिक कम समय तक लेड एक्सपोजर से मेटालिक टेस्ट, पेट दर्द, उल्टी, डायरिया या कब्ज, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, भूख की कमी, याददाश्त खोना और हाथ-पैर में सुन्नपन हो सकता है।

ज्यादा गंभीर नुकसान
डिप्रेशन, भूलने की बीमारी, दांत-हड्डी की कमजोरी, लंग फंक्शन में कमी और महिला-पुरुष में फर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।

‘पेद्दी’ में जान्हवी कपूर का दमदार अवतार, राम चरण संग शेयर की पहली झलक

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मुंबई: राम चरण अभिनीत आगामी फिल्म ‘पेद्दी’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह बना हुआ है। आज शनिवार को फिल्म निर्माताओं ने बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर का फर्स्ट लुक जारी कर दिया है, जो फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस फिल्म में एक्ट्रेस अचियम्मा के रोल में नजर आएंगी। 

जान्हवी कपूर के स्वैग अंदाज ने खींचा ध्यान
फिल्म ‘पेद्दी’ के निर्माताओं ने आज 01 नवंबर के दिन फिल्म का नया पोस्ट रिलीज किया है। इसमें उन्होंने अभिनेत्री जान्हवी कपूर का पहला लुक और उनके किरदार के बारे में खुलासा किया है। फिल्म का दो पोस्टर जारी हुआ है। एक में एक्ट्रेस माइक पर कुछ बोलती दिख रही हैं, जिसमें उन्होंने अपने ब्लाउज में गॉगल फंसा रखा है। यह उनके स्वैग अंदाज को दिखा रहा है। इसके अलावा एक और पोस्टर में अभिनेत्री खुली जीप में जनता का अभिवादन स्वीकार करती दिख रही हैं। वहीं इसमें भी वह शानदार और हॉट लुक में नजर आ रही हैं।
 
कब रिलीज होगी फिल्म?
यह फिल्म 27 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को सभी भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। ‘पेद्दी’ में राम चरण और जान्हवी कपूर के अलावा दिव्येंदु शर्मा, शिव राजकुमार और जगपति बाबू भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।

फिल्म के बारे में 
फिल्म ‘पेद्दी’ का निर्देशन बुचि बाबू सना द्वारा किया जा रहा है। इस फिल्म का निर्माण सुकुमार राइटिंग्स, मैत्री मूवी मेकर्स और टी-सीरीज द्वारा हो रहा है। वहीं इसे वृद्धि सिनेमाज के बैनर तले संयुक्त रूप से तैयार किया जा रहा है। फिल्म में ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान संगीत तैयार कर रहे हैं, रत्नवेलु छायांकन, कोल्ला अविनाश कला निर्देशन और नवीन नूली संपादन का काम संभाल रहे हैं।

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News Desk