पुतिन के आदेश पर शुरू हुई परमाणु परीक्षण की तैयारी

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 मॉस्को/वॉशिंगटन: रूस और अमेरिका के बीच तनाव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर देश ने परमाणु परीक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका अब न्यूक्लियर टेस्ट फिर से शुरू करेगा क्योंकि रूस, चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया “गुपचुप तरीके” से ऐसा कर रहे हैं।

ट्रंप के बयान से भड़का रूस

ट्रंप का यह बयान रूस के लिए उकसाने वाला साबित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस और अमेरिका दोनों अपने परमाणु कार्यक्रमों को फिर से सक्रिय करते हैं, तो दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की दौड़ में फंस सकती है। यह स्थिति वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

बढ़ता तनाव और प्रतिबंधों की राजनीति

बीते कुछ महीनों से अमेरिका और रूस के बीच राजनयिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और दोनों देशों के बीच होने वाला शिखर सम्मेलन भी रद्द कर दिया गया। वहीं, रूस का कहना है कि अमेरिका की आक्रामक नीति से दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है।

1991 के बाद पहली बार रूस करेगा परीक्षण?

रूस ने 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है, जबकि अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में न्यूक्लियर टेस्ट किया था। दोनों देशों ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद परीक्षण पर रोक लगी थी।

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चंद्रयान-3 से भी महंगा बिका ‘सरकारी कबाड़’, हुई 800 करोड़ की कमाई

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डेस्क: भारत सरकार (Indian Goverment) ने सिर्फ एक महीने के भीतर में ही कबाड़ (Junkl) बेचकर बंपर कमाई की है. सरकार की ओर से पिछले महीने बड़े स्तर पर चलाए गए सफाई अभियान (Cleanliness Drive) के दौरान कबाड़ बेचकर 800 करोड़ रुपये कमाए. यह चंद्रयान-3 के बजट से भी ज्यादा है, जिसकी लागत 615 करोड़ रुपये थी.

इस साल के आंकड़ों को देखें तो 2021 में वार्षिक अभियान शुरू होने के बाद से कबाड़ बेचकर सरकार की कुल कमाई लगभग 4,100 करोड़ रुपये हो गई है. इस साल 2 से 31 अक्टूबर के बीच चलाए गए अभियान में अब तक की सबसे ज्यादा 232 लाख वर्ग फुट ऑफिस जगह खाली कराई गई और 29 लाख कागजी फाइलें हटाई गईं. यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान था, जिसमें करीब 11.58 लाख ऑफिसों ने हिस्सा लिया.

प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग की देखरेख में, विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावासों सहित 84 मंत्रालयों और विभागों के बीच अच्छा तालमेल बनाया गया. तीन केंद्रीय मंत्रियों मनसुख मंडाविया, के. राम मोहन नायडू और डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी. 2021 से 2025 के बीच केंद्र सरकार ने पांच बड़े सफाई अभियान चलाए हैं, जिनसे सफाई को एक व्यवस्था के रूप में बढ़ावा मिला और सरकारी कामकाज में लंबित मामलों को कम करने में मदद मिली. इन पांच अभियानों में कुल 23.62 लाख ऑफिसों को शामिल किया गया, 928.84 लाख वर्ग फुट जगह खाली कराई गई, 166.95 लाख फाइलों को छांटा या बंद किया गया और कबाड़ बेचकर 4,097.24 करोड़ रुपये जुटाए गए.

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21वीं किस्त से पहले करें जरूरी अपडेट, वरना रुक सकती है 6,000 की सहायता राशि

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 PM Kisan e-KYC: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना देशभर के किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत योजना मानी जाती है। इसके तहत किसानों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। अगर आप भी इस योजना के लाभार्थी हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है — 21वीं किस्त से पहले e-KYC (ई-केवाईसी) कराना अनिवार्य है।

PM Kisan e-KYC नहीं कराने पर आपकी अगली किस्त रुक सकती है। योजना के तहत लाभ प्राप्त करते रहने के लिए लाभार्थियों को अपने बैंक खाते को आधार से लिंक करना और अपनी पहचान को सत्यापित करना जरूरी है। इसके लिए किसानों को अपने आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पता प्रमाण तैयार रखना होगा। यह प्रक्रिया आप घर बैठे या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर पूरी कर सकते हैं।

यदि आप घर बैठे e-KYC करना चाहते हैं, तो प्रक्रिया बेहद आसान है। सबसे पहले pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं और e-KYC विकल्प चुनें। यहां अपना आधार नंबर और कैप्चा कोड भरें, फिर आधार से लिंक मोबाइल नंबर डालकर OTP दर्ज करें। प्रक्रिया पूरी होते ही आपको सफलता का संदेश SMS या ईमेल के माध्यम से मिल जाएगा।

सरकार ने साफ किया है कि जिन किसानों की e-KYC अपडेट नहीं होगी, उन्हें आगामी किस्त का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए अगर आपने अभी तक यह काम नहीं किया है, तो PM Kisan e-KYC तुरंत पूरी करें और अपनी ₹6,000 की सहायता राशि सुनिश्चित करें।

हामिद ने ‘कश्यप’ बनकर तबाह कर दी नाबालिग की जिंदगी, मां और बुआ की मदद से खेला घिनौना खेल

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सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले (Satna District) में सोशल मीडिया पर पहचान छिपाकर नाबालिग लड़कियों (Minor Girls) को फंसाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र के रहने वाले हामिद खान (Hamid Khan) नाम के आरोपी ने सोशल मीडिया एप पर अपनी पहचान ‘कश्यप’ (Kashyap) नाम से छिपाकर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की। आरोप है कि उसने झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म (Rape) किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया।

आरोपी हामिद खान पर नाबालिग को भगाकर ले जाने की कोशिश का भी आरोप है। बुधवार की रात नाबालिग अपने घर से निकलकर सतना बस स्टैंड पहुंची। हामिद उसे यहां से रेलवे स्टेशन ले गया, लेकिन तभी परिजनों को इसकी भनक लग गई और वे तुरंत स्टेशन पहुंच गए। परिजनों ने लड़की और आरोपी दोनों को पकड़ लिया। हामिद तो किसी तरह भाग निकला, लेकिन उसका मोबाइल फोन परिजनों के हाथ लग गया। इस फोन में नाबालिग के अश्लील वीडियो और फोटो पाए गए।

मामले पर परिजनों द्वारा जीआरपी और कोलगवां थाने के चक्कर लगाने के बाद भी जब देर रात रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो गुरुवार को बजरंग दल कार्यकर्ता सक्रिय हुए। बजरंग दल के पदाधिकारी सचिन शुक्ला ने बताया कि आरोपी हामिद ने मामले को रफा-दफा करने के लिए रामपुर बघेलान के कार्यकर्ता से संपर्क किया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने योजना बनाकर हामिद को सतना बुलाया और जैसे ही वह कोलगवां थाना के सामने पहुंचा उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

बजरंग दल कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस पूरे षड्यंत्र में आरोपी हामिद खान की मां और बुआ भी शामिल थीं। उन्होंने पीड़िता की पहचान छिपाने के लिए उसका नाम बदलकर रोजी खान रख दिया था। सीएसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अपनी पहचान छुपाकर नाबालिग बच्ची से दोस्ती कर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। गुरुवार शाम को कोलगवां पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर आरोपी हामिद खान के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो एक्ट का प्रकरण पंजीबद्ध किया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। केस डायरी को विस्तृत जांच के लिए रामपुर बघेलान थाना स्थानांतरित किया गया है।

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सोने से बनीं छिपकलियां मंदिर से हो गईं चोरी? मचा भारी हंगामा, पुजारियों का क्या जवाब

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नई दिल्‍ली । चेन्नई(Chennai) से सटे कांचीपुरम स्थित प्राचीन श्री वरदराज पेरुमल मंदिर(Sri Varadaraja Perumal Temple) में चोरी का मामला गरमाया हुआ है। हालांकि, मंदिर के प्रबंधन ने शुक्रवार को इस बात से इनकार किया कि छत पर अंदर उकेरी गई सोने और चांदी से बनीं छिपकलियां गायब हो गई हैं। चेन्नई से लगभग 79 किलोमीटर दूर स्थित यह प्रसिद्ध वैष्णव मंदिर हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर की यात्रा सोने और चांदी की छिपकलियों को छुए बिना अधूरी मानी जाती हैं।

मंदिर के एक कार्यकर्ता ने यह आरोप लगाया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान सोने और चांदी से बनी छिपकलियों को हटा दिया गया था। उनकी जगह कथित तौर पर नई छिपकलियां उकेरी गई थीं। हालांकि, मंदिर प्रबंधन ने कहा कि छिपकलियां अपने-अपने स्थान पर हैं। मंदिर के कार्यकारी अधिकारी ने कहा, ‘छत पर उकेरी गईं छिपकलियों को न तो हटाया गया है और न ही बदला गया है। एक कार्यकर्ता ने झूठा और बेबुनियाद आरोप लगाया है। मंदिर प्रशासन उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।’

छिपकलियों को लेकर क्या है मान्यता

मंदिर के एक सूत्र के अनुसार ये 2 छिपकलियां ऋषि गौतम के दो शिष्यों की प्रतीक हैं, जिन्हें अपने दोषों के कारण छिपकली बनने का श्राप मिला था। भगवान विष्णु ने उन्हें श्राप से मुक्ति दिलाई थी। सूत्र ने बताया, ‘मंदिर में आने वाले श्रद्धालु छिपकलियों को छूकर भगवान से सौभाग्य और दोषमुक्त जीवन के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।’ इसी मंदिर में अंजीर की लकड़ी से बनी भगवान विष्णु की दस फुट लंबी मूर्ति ‘अथि वरधर’ मंदिर के कुंड के अंदर स्थापित है। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए इन मूर्तियों को 40 वर्षों में एक बार जल से बाहर निकाला जाता है। आखिरी बार इस मूर्ति को 2019 में जल से बाहर निकाला गया था।

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मुसलमान वंदे मातरम नहीं बोल सकते, मुझसे बुलवाकर दिखाओ…सपा विधायक ने दिया विवादित बयान

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम (National Song Vande Mataram) को बने 150 साल हो गए हैं। देशभर में इसके लिए कई कार्यक्रम भी हुए। पीएम मोदी (PM Modi) ने इस उपलक्ष्य पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। लेकिन मुंबई में वंदे मातरम को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। सपा विधायक अबू आजमी (SP MLA Abu Azmi) ने वंदे मातरम को लेकर विवादित बयान दिया है। आजमी ने कहा कि कोई मुझसे कोई वंदे मातरम नहीं बुलवा सकता है। किसी मुसलमान से वंदे मातरम नहीं बुलवाया जा सकता है। इस्लाम में जमीन-सूरज की पूजा नहीं, अल्लाह के सिवाय किसी की वंदना नहीं होती है। कहा कि जैसे आप नमाज नहीं पढ़ सकते, वैसे ही कोई मुसलमान वंदे मातरम नहीं बोल सकता।

बता दें कि मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने सपा विधायक अबू आसिम आजमी को उनके आवास के पास शुक्रवार सुबह होने वाले राष्ट्रीय गीत ‘‘वंदे मातरम्’’ के गायन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। साटम ने एक्स हैंडल से निमंत्रण की एक प्रति शेयरक की थी। इसमें आजमी को टैग किया गया था। बस यही से विवाद शुरू हो गया।

अबू आजमी ने साटम को कानूनी भाषा में जवाब देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है कि किसी को जबरन राष्ट्रगीत गाने के लिए बाध्य करना, व्यक्ति के धर्म और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसके अलावा कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी दर्जा और संरक्षण देने की मांग की गई थी।

आजमी के जवाब के बाद बीजेपी ने हंगामा शुरू कर दिया। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अजित साटम और विधानसभा अध्यक्ष राहिल नार्वेकर ने शुक्रवार को अबू आसिम आजमी के घर के सामने मंच पर वंदे मातरम का पाठ किया। इस मंच से कुछ विवादित नारे भी लगने की बात कही जा रही है।

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इस्कॉन मंदिर पर क्या है मुंबई और बेंगलुरु वाला विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

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नई दिल्‍ली । बेंगलुरु (Bengaluru)इस्कॉन मंदिर मामले(ISKCON temple case) में सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) की बेंच में मतभेद (differences)देखने को मिला है। दरअसल, इस्कॉन के मुंबई और बेंगलुरु गुटों के बीच मंदिर के नियंत्रण को लेकर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है। एससी ने एक साल से अधिक समय तक इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन, मई में पीठासीन न्यायाधीश जस्टिस एएस ओका के रिटायरमेंट से ठीक पहले बेंगलुरु शाखा के पक्ष में फैसला सुनाया गया। जस्टिस ओका और एजी मसीह की पीठ ने मई 2011 में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें बेंगलुरु मंदिर का नियंत्रण मुंबई शाखा को दिया गया था। एचसी ने अप्रैल 2009 के ट्रायल कोर्ट के उस डिक्री को रद्द कर दिया था जो बेंगलुरु गुट के पक्ष में था।

हाई कोर्ट के फैसले के 14 साल बाद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 6 महीने बाद अब दोनों पक्ष लगभग शुरुआती स्थिति में वापस आ गए हैं। क्योंकि जस्टिस जेके माहेश्वरी और एजी मसीह की पीठ ने 16 मई के फैसले की समीक्षा के लिए मुंबई शाखा की याचिका पर विभाजित फैसला दिया है। जस्टिस माहेश्वरी ने पाया कि मुंबई ब्रांच ने फैसले की समीक्षा के लिए मामला बनाया है। अपने आदेश में उन्होंने कहा, ‘समीक्षा याचिकाओं को खुली अदालत में सूचीबद्ध करने के आवेदनों को मंजूरी दी जाती है। पक्षकारों को नोटिस जारी किया जाए।’

दोनों जजों की अलग-अलग राय

जस्टिस माहेश्वरी मानते हैं कि मुंबई शाखा को खुली अदालत में अपना पक्ष रखने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिसमें फैसले में चूक की ओर इशारा है। दूसरी ओर, जस्टिस मसीह ने कहा, ‘समीक्षा याचिकाओं, समीक्षा के अधीन फैसले और उसके साथ संलग्न सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच हुई है। मैं संतुष्ट हूं कि रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है या समीक्षा याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है, जो आरोपित फैसले पर फिर से विचार करने की गारंटी दे। इसलिए समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’ पीठ ने कहा कि मतभेदों के चलते समीक्षा याचिकाओं को सीजेआई के समक्ष निर्देशों के लिए रखा जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

 

MP की विधायक निर्मला सप्रे पर सस्पेंस, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले–उनसे ही पूछा जाए वे किस दल में हैं

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भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति में बीना विधायक निर्मला सप्रे (MLA Nirmala Sapre) का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। कांग्रेस के टिकट पर 2023 में पहली बार विधानसभा पहुंचीं सप्रे अब भाजपा के मंचों पर दिखाई देती रही, लेकिन औपचारिक रूप से उन्होंने भाजपा की सदस्यता अब तक नहीं ली। उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने को लेकर कांग्रेस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे यह मामला और उलझ गया है। अब भाजपा भी उनसे किनारा करते दिख रही हैं।

इस पूरे विवाद पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक हेमंत खंडेलवाल ने निर्मला सप्रे किस दल में है सवाल के जवाब में कहा कि निर्मला सप्रे भाजपा के 164 विधायकों की सूची में शामिल नहीं हैं। वे किस दल में हैं, यह सवाल उन्हीं से पूछा जाना चाहिए। खंडेलवाल ने आगे कहा कि भाजपा में संगठनात्मक अनुशासन सर्वोपरि है। पार्टी की सदस्यता लिए बिना कोई व्यक्ति आधिकारिक रूप से भाजपा से नहीं जुड़ सकता।

निर्मला सप्रे ने 2023 में सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सप्रे सीएम डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ राहतगढ़ में मंच पर नजर आईं। वहां मंच से यह घोषणा की गई कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है, और उन्हें भाजपा का गमछा पहनाया गया। सप्रे ने भी कहा कि वे “बीना के विकास के लिए भाजपा के साथ आई हैं। हालांकि, इस सार्वजनिक घोषणा के बावजूद उन्होंने भाजपा की औपचारिक सदस्यता नहीं ली। बावजूद इसके, वे भाजपा उम्मीदवार लता वानखेड़े के लिए प्रचार करती रहीं और कांग्रेस से पूरी तरह दूरी बना ली।

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पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी से की मुलाकात, कहा- ‘उन्होंने भारत के लोकतंत्र पर छोड़ी अमिट छाप’

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 PM Modi meets L. K. Advani: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके निवास पर मुलाकात की और उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी। 8 नवंबर को आडवाणी ने अपना 98वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आडवाणी जी का पूरा जीवन देश और लोकतंत्र के उत्थान के लिए समर्पित रहा है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी शुभकामनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा, “लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। एक महान दूरदर्शिता और बुद्धिमत्ता से संपन्न राजनेता के रूप में उन्होंने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनका योगदान भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ गया है। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।”

लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और वे पार्टी के सबसे लंबे समय तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर पार्टी को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। राम मंदिर आंदोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही और उन्होंने 10,000 किलोमीटर लंबी रथयात्रा निकालकर इतिहास रचा। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

आडवाणी के जन्मदिन पर देशभर से बधाइयों का तांता लगा रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अमित शाह ने कहा कि आडवाणी जी ने दिखाया कि कैसे निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा की जा सकती है—चाहे संगठन में हों या सरकार में, उनके लिए हमेशा राष्ट्र प्रथम रहा।

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ये लोग झूठे वादे करके…प्रियंका गांधी ने की जनसभा, NDA पर जमकर साधा निशाना

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नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के पहले चरण के मतदान पूरे हो चुके हैं, अब दूसरे चरण के चुनावों से पहले सभी पार्टियां पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में हैं. इस कड़ी में शनिवार को दूसरे चरण के प्रचार के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने भागलपुर में एक जनसभा को संबोधित किया.

रैली के दौरान प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी सोचते हैं कि वे झूठे वादे करके और आपको 10,000 रुपये देकर आपका वोट हासिल कर सकते हैं… पिछले 20 सालों से बिहार में उन्हीं की सरकार है, और उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया. वे सुरक्षा भी नहीं दे पाए. प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध पहले से तीन गुना बढ़ गए हैं… वे आपको 10,000 रुपये की रिश्वत देने की कोशिश कर रहे हैं… पैसे ले लो, लेकिन उन्हें अपना वोट मत देना.’

वहीं, प्रियंका गांधी का कटिहार से एक और बयान सामने आया है. ज़्यादा वोटर टर्नआउट पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘लोग बदलाव चाहते हैं. मैं सभी मीटिंग्स में यह देख रही हूं और मैं कम बोल रही हूं जनता ज्यादा बोल रही है. लोग बदलाव चाहते हैं; वे थक गए हैं और परेशान हो गए हैं. ध्यान भटकाने की कोई भी चीज काम नहीं कर रही है. लोग सभी पार्टियों से अपने भविष्य और तरक्की के बारे में बात करने के लिए कह रहे हैं.’

बता दें कि आज भागलपुर से पहले प्रियंका गांधी ने कटिहार के कदवा में भी एक चुनावी रैली की थी. जिसमें उन्होंने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी वोट चोर हैं और उनके साथ तीन और लोग हैं; ज्ञानेश कुमार, विवेक जोशी और एस.एस. संधू. ये सभी चुनाव आयोग के ऊंचे अधिकारी हैं, जो देश के संविधान और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. प्रियंका गांधी ने जनता से अपील की कि इन नामों को याद रखें; जो लोग संविधान और लोकतंत्र के साथ विश्वासघात कर रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री होकर मोदी कट्टा, गोली, फिरौती, रंगदारी जैसी बातें करते हैं. उनका स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि वे अपने पद की गरिमा भी नहीं रख पा रहे. उन्होंने कहा कि मोदी अब जनता के बीच अपना भरोसा खो चुके हैं. देश उनकी झूठ और नफरत की राजनीति को पहचान चुका है.