पति ने तलाक मांगने की हैरान करने वाली वजह बताई, कहा- पत्नी घर में कुत्ते ले आई

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अहमदाबाद: देश में आज के समय में तलाक (Divorce) का मामला बिल्कुल आम सा हो गया है. हालांकि कुछ तलाक के मामले देशभर में चर्चा का विषय बने रहते हैं. इन दिनों गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) का एक मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां एक पति (Husband) ने पत्नी (Wife) पर क्रूरता का आरोप (Alleging Cruelty) लगाते हुए तलाक मांगा है. पति का कहना है कि पत्नी घर में आवारा कुत्ते (Dog) लाती थी और उसे अपमानित करने के लिए एक शरारती कॉल करती थी. इसी का हवाला देते हुए उसने कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई है.

फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पति ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की है. मामला आवारा कुत्तों, सार्वजनिक अपमान और पति के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ा है. यही वजह है कि इसकी चर्चा हो रही है. पति ने तलाक लेने के पीछे एक और वजह बताई है, उसने कहा कि तनाव से मेरी शारीरिक क्षमताएं कमजोर पड़ गईं .

पति की अपील के अनुसार, इस जोड़े की शादी 2006 में हुई थी और उसकी मुसीबतें तब शुरू हुई जब उसकी पत्नी एक ऐसे सोसाइटी में रहते हुए अपने फ्लैट में एक आवारा कुत्ता ले आई. जहां कुत्तों को पालतू जानवर के रूप में रखना प्रतिबंधित था. फिर वह और भी आवारा कुत्ते ले आई, उससे खाना बनाने, सफाई करने और उनकी देखभाल करने को कहा गया. उसने कहा कि एक कुत्ते ने उसे काट लिया जब उसने उनके बिस्तर पर सोने की ज़िद की.

पति के मुताबिक, कुत्तों की बढ़ती संख्या से पड़ोसी उनके खिलाफ हो गए, जिसके बाद 2008 में पुलिस शिकायत दर्ज हुई. उसने यह भी कहा कि पत्नी के एनिमल राइट्स ग्रुप से जुड़ने के बाद, उसने बार-बार दूसरों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की. पति पर थाने आने के लिए दबाव बनाया और मना करने पर गाली-गलौज कर उसका अपमान किया.

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कतर में सलमान खान का धमाकेदार जलवा, दबंग टूर में फैंस ने किया ग्रैंड वेलकम

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मुंबई: सलमान खान की फैन फॉलोइंग देश ही नहीं विदेशों में भी अच्छी-खासी है। वह जहां जाते हैं, फैंस की भीड़ उन्हें देखने के लिए जमा हो जाती है। हाल ही में सलमान खान कतर पहुंचे। वह अपने दबंग टूर के लिए कतर गए हैं। कतर पहुंचने पर फैंस ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। साथ ही भाईजान ने भी अपने फैंस को निराश नहीं किया, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके अलग अंदाज ने सबका दिल जीत लिया। 

हाथों में भारत का झड़ा और फूल लिए नजर आए फैंस
वायरल वीडियो में सलमान खान जब फैंस के बीच पहुंचे तो उनका शानदार स्वागत हुआ। कई फैंस के साथ हाथ में भारत का झड़ा था। साथ ही कई लोगों ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता भी दिया। सलमान खान भी इस स्वागत से काफी खुश नजर आए। इस पूरे इवेंट में उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं दिखी। हर पल  बॉडीगार्ड शेरा साथ में नजर आया। 

सलमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाया गाना 
बाद में दबंग टूर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें सिंगर स्टेबिन बेन ने गाया गया। उन्होंने सलमान की एक फिल्म का गाना ‘ओ जाने जाना’ गाया। सलमान भी सिंगर के साथ गाना गाते नजर आए। वह बहुत मगन होकर गाना गा रहे थे। सोशल मीडिया यूजर्स को भाईजान का यह अंदाज काफी पसंद आया। 
 
तैयारियों की फोटो भी शेयर की
सलमान खान ने दबंग टूर की तैयारियों से जुड़ी एक तस्वीर भी शेयर की। वह स्ट्रेचिंग करते हुए नजर आए। स्टेज परफाॅर्मेंस की तैयारी वह कर रहे हैं। सलमान खान के करियर फ्रंट की बात करें तो वह एक फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवां’ कर रहे हैं। इसमें आर्मी ऑफिसर का रोल करेंगे। 

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सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों पर नतीजों का ऐलान आज 

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नई दिल्ली। देश के सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों पर मंगलवार (11 नवंबर) को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। अब 14 नवंबर (शुक्रवार) को इन चुनावों के नतीजे घोषित होने है। जिन सीटों पर मतदान हुआ उसमें जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नगरोटा, झारखंड की घाटशिला, पंजाब की तरनतारन, राजस्थान की अंता, तेलंगाना की जुबली हिल्स, मिजोरम की डम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा विधानसभा सीट शामिल हैं। 
सीएम अब्दुल्ला ने बडगाम और गांदेरबल दो सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने बडगाम सीट से इस्तीफा दे दिया, इसके बाद सीट पर अब उपचुनाव कराया गया है। वहीं, नगरोटा सीट बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के कारण खाली हुई थी। 
राजस्थान की अंता सीट पर उपचुनाव इसलिए हुए हैं, क्योंकि बीजेपी नेता कंवर लाल मीणा को 2005 के एक पुराने मामले में दोषी ठहराने के बाद अयोग्य घोषित किया था। वहीं झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव हुआ था। सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएएम) के उम्मीदवार सोमेश सोरेन, जो पूर्व विधायक सोरेन के बेटे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के बीच सीधी टक्कर है। हैदराबाद की जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर कांग्रेस, बीआरएस और बीजेपी के बीच महामुकाबला है। 

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी को झटका, AIU ने रद्द की सदस्यता, दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा है लिंक

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नई दिल्ली: दिल्ली में सोमवार शाम लाल किले के पास कार में धमाका हुआ था. इस घटना में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया है. अब खबर है कि इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी गई है. एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी है. इसके पीछे का कारण यूनिवर्सिटी की स्थिति अच्छी नहीं होना बताया गया है.

एआईयू ने बयान जारी कर कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संज्ञान में आया है कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थिति सही नहीं है. ऐसे में अल-फलाह यूनिवर्सिटी को दी गई एआईयू की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती है. यह सूचित किया जाता है कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब किसी भी गतिविधि में एआईयू का नाम और लोगो का इस्तेमाल नहीं कर सकता. एआईयू का लोगो भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट से हटाना होगा.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के धौज ग्राम में 70 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है. यह एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. इसकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा यह यूनिवर्सिटी संचालित होता है. इसकी वीसी का डॉ. भूपिंदर कौर आनंद हैं, जो एक एमबीबीएस डॉक्टर हैं. वहीं अल-फलाह यूनिवर्सिटी के रजिस्टार प्रो. मो. परवेज हैं.

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माधवन ने अजय को दिया कड़ी टक्कर, लेकिन कहानी बीच में लड़खड़ाई; रकुल बनीं कमजोर पक्ष

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मुंबई: अजय देवगन दो नंबर के हीरो बन गए हैं। दरअसल, ऐसा उनकी फिल्मोग्राफी देखकर कहना पड़ रहा है। ‘रेड 2’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ के बाद अब अजय देवगन ‘दे दे प्यार दे 2’ लेकर आए हैं। ये साल 2019 में आई ‘दे दे प्यार दे’ का सीक्वल है। अब छह साल बाद आए सीक्वल में कुछ नए कलाकारों को जोड़ा गया है और फिल्म को पहली फिल्म से थोड़े बड़े स्तर पर बनाने का प्रयास किया गया है। लेकिन क्या इस प्रयास में मेकर्स सफल हुए हैं और क्या ‘दे दे प्यार दे 2’ अपनी पहली फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ से बेहतर है या नहीं? कैसी है यह फिल्म, जानने के लिए पढ़िए यह रिव्यू…

कहानी
फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर ‘दे दे प्यार दे’ खत्म हुई थी। आयशा (रकुल प्रीत सिंह) आशीष (अजय देवगन) के परिवार से मिल चुकी है। अब बारी है आशीष के आयशा के परिवार से मिलने की। आयशा की फैमिली चंडीगढ़ में रहती है। आयशा के परिवार में उसके पिता (आर माधवन), मां (गौतमी कपूर), भाभी (इशिता दत्ता) और भाई (तरुन गहलोत) हैं। आयशा की भाभी प्रेग्नेंट हैं और घर में इसको लेकर सब उत्साहित हैं। इस बीच आयशा अपनी फैमिली से आशीष को मिलवाना चाहती है। अब 28 साल की आयशा 52 साल के अपने बॉयफ्रेंड आशीष से कैसे अपने परिवार को मिलाती है? आशीष की उम्र और उसके बारे में जानने के बाद उसकी फैमिली क्या रिएक्शन देती है? क्या वो आशीष को स्वीकार करते हैं या फिर नहीं? यही फिल्म की कहानी है, जो आपको 2 घंटा 26 मिनट की फिल्म देखने पर पता चलेगी।

कैसी है फिल्म
फिल्म की कहानी कहीं न कहीं काफी प्रेडेक्टिबल है। क्योंकि सबको ही पता है कि अंत में कहानी में क्या होना है। फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहतर है। ये आपको पूरे टाइम हंसाता रहेगा और एक अच्छी रोमांटिक-कॉमेडी होने का भरोसा देगा। लेकिन जैसी ही फर्स्ट हाफ खत्म होता और सेकंड हाफ आगे बढ़ता है। आपका भरोसा टूटने लगता है। मेकर्स सेकंड हाफ में जबरन इमोशन घुसेड़ने के चक्कर में असल कहानी से भटक गए। जो कहानी आपको हंसाने से शुरू होती है, वो दूसरे हाफ में आपको थोड़ा उबाने लगती है। आप स्क्रीन से इतर इधर-उधर देखने लगते हैं और सोचते हैं कि अब फिल्म खत्म हो। फिल्म थोड़ी खिंची-खिंची सी लगती है। लेकिन आर माधवन की एक्टिंग आपको फिल्म से बांधे रखती है और लास्ट के 15 मिनट एक बार फिर आपको हंसाते हुए थिएटर से विदा करते हैं। हां, अगर मुकाबला ‘दे दे प्यार दे’ से किया जाए, तो वो इस दूसरे पार्ट से बेहतर है।

एक्टिंग
एक्टिंग के पहलू को देखने के बाद ये कहने में कोई दोराय नहीं कि आर माधवन अजय देवगन समेत फिल्म की पूरी कास्ट पर भारी पड़े हैं। कॉमेडी से लेकर सख्त पिता और इमोशनल सीन तक में आप उनसे जुड़ पाते हैं और हर इमोशन को फील कर पाते हैं। माधवन ने दिखाया है कि रोल चाहें जैसा भी हो वो अपनी एक्टिंग से उसे जानदार बना देते हैं। यहां पेपर सॉल्ट लुक में वो काफी कूल भी लगे हैं।

अजय देवगन जो फिल्म के लीड एक्टर हैं और कहने को ये उनकी ही फिल्म है। लेकिन पूरी फिल्म में अजय देवगन ने काफी कम डायलॉग्स बोले हैं। वो भी सबसे ज्यादा लास्ट के 15 मिनट में। बाकी पूरी फिल्म में वो सिर्फ एक्सप्रेशन देते नजर आए हैं, जो वो पिछले 34 साल से दे रहे हैं। हां, रोल के हिसाब से अजय देवगन फिल्म में फिट हैं।

फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं रकुल प्रीत सिंह। 2019 में जब ‘दे दे प्यार दे’ आई थी, तब रकुल की खूबसूरती के काफी चर्चे हुए थे और अपने रोल में वो फिट बैठी थीं। लेकिन इस बार जहां रकुल फीमेल लीड में अकेली ही थीं, उन्होंने पूरी तरह निराश किया है। हल्के-फुल्के सीन और मॉडर्न लड़की के रोल में तो वो जंचती हैं। लेकिन जहां बात इमोशनल सीन्स और भारी डायलॉग्स की आती है, वहां रकुल कमजोर पड़ जाती हैं। इमोशनल सीन में वो ओवर एक्टिंग करती दिखती हैं और उनको देखकर आपको हंसी आ जाएगी। कई दमदार डायलॉग्स उनकी फ्लैट डायलॉग डिलीवरी की वजह से फीके पड़ जाते हैं।

अपने डांस स्टेप से सुर्खियां बटोरने वाले मीजान जाफरी की एंट्री ही सेकंड हाफ की शुरुआत में होती है। फिल्म में उन्हें सिर्फ हीरोइन को इंप्रेस करके दिखाना था, वो उन्होंने बखूबी किया है। गिटार बजाना, अपनी बॉडी दिखाना, घुड़सवारी करना, सिर्फ टॉवेल पहनकर नहाना.. मीजान ने सबकुछ किया है। रकुल के साथ उनकी जोड़ी भी जची है और अंत में कॉमेडी सीन में भी उनके एक्सप्रेशन ठीक ही हैं। कुल मिलाकर उन्हें जैसा काम मिला था, उसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

इसके अलावा जावेद जाफरी, गौतमी कपूर और इशिता दत्ता ने अपने-अपने हिस्से का काम ईमानदारी से किया है।

निर्देशन
फिल्म का निर्देशन अंशुल शर्मा ने किया है, एक नए निर्देशक के तौर पर उनका काम ठीक-ठाक ही है। हां, कई मौकों पर आपको ऐसा लगेगा कि सबकुछ काफी जल्दी में करने का प्रयास हुआ। जबकि सेकंड हाफ में एडिटिंग की कैची और चल सकती थी। निर्देशक ने फिल्म में चंडीगढ़ और लंदन की दूरी ही खत्म कर दी है। एक सीन में इंसान लंदन में है और अगले ही पल वो चंडीगढ़ पहुंच जाता है। ऐसा एख नहीं कई मौकों पर होता है। वहीं कुछ एक सीन ऐसे हैं, जहां आपको कनेक्शन उतना बेहतर नही लगता। बाकी निर्देशन का काम ठीक है।

संगीत
‘दे दे प्यार दे’ का संगीत पसंद किया गया था। फिल्म के सैड सॉन्ग ‘चले आना’ से लेकर पार्टी सॉन्ग तक लोगों को याद रहे थे। यहां पर फिल्म के दो गाने एक ‘3 शौक’ और दूसरा ‘झूम बराबर’ ही ऐसे हैं, जो चर्चाओं में भी हैं और पार्टी में बजते भी सुनाई देंगे। हां, इस बार का सैड सॉन्ग आपको याद नहीं रहेगा। जबकि पिता और बेटी के रिश्ते को दिखाता गीत भी कुछ खास प्रभावित नहीं करता।

खूबियां
फिल्म की शुरुआत शानदार है। पहला पार्ट खूब हंसाता है और फनी लगता है। क्लाइमैक्स में एक ट्विस्ट है, जब वो आता है तो बेशक एक बार को आप भी हैरान रह जाते हो। अंत भी बेहतर ढंग से हुआ है। रकुल प्रीत को छोड़कर, बाकी सभी का काम भी अच्छा है।

कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी रकुल प्रीत की एक्टिंग है, जिससे उन्होंने इमोशनल सीन और कई अहम मौकों को बर्बाद किया है। सेकंड हाफ खिंचा-खिंचा सा लगता है, जो कई मौकों पर आपको बोर करता है। एडिटिंग टेबल पर काम हो सकता था।

देखें या न देखें
‘दे दे प्यार दे 2’ की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। ये एक फैमिली एंटरटेनर है। अगर वीकेंड पर आप खाली हैं, तो फिल्म को एंजॉय कर सकते हैं।

The Go Lead Digital Story: Building a Top Indian SEO Agency

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In 2018, the Indian digital marketing landscape was a crowded and fiercely competitive space. Launching a new agency required more than just expertise; it demanded a clear vision and a powerful differentiator. For Roshan Samuel Ambler, the decision to start Go Lead Digital was not an impulse but the natural result of years spent in the trenches of SEO. Having transitioned from a successful sales career and honed his skills on over 200 digital marketing projects, Roshan saw a gap in the market—a need for an SEO agency built on transparency, sustainable results, and a deep-seated commitment to client success.

The founding of Go Lead Digital is a founder’s story that doubles as a business case study. It’s about translating hands-on experience, hard-won lessons, and a community-built reputation into a thriving enterprise. Roshan leveraged his unique background, combining the persuasive instincts of a salesman with the analytical rigor of a top-tier SEO strategist. He didn’t just set out to build another agency; he aimed to create a new model for what a client-agency partnership could be, rooted in ethics, education, and undeniable performance.

Defining the Value Proposition: An Agency Built on a Founder’s Ethos

Before the first client was signed, Roshan defined the core values that would set Go Lead Digital apart. These weren’t marketing buzzwords but principles forged from his own professional journey. He knew that trust was the most valuable currency in the SEO industry, an industry often plagued by opaque practices and overblown promises.

His value proposition was clear and compelling:

  1. Transparency and Education: Unlike agencies that hide their methods behind jargon, Go Lead Digital would operate with total transparency. Clients would not only see what was being done but also understand why it was being done. The goal was to empower clients, turning them into informed partners in their own success.
  1. Sustainable, Ethical SEO: Roshan had seen the damage caused by black-hat tactics and the pursuit of short-term gains. His agency would focus exclusively on sustainable, ethical SEO practices that build long-term brand equity and withstand the volatility of algorithm updates.
  1. Results-Driven, Not Report-Driven: The measure of success would not be fluffy vanity metrics but tangible business outcomes. Go Lead Digital would focus on KPIs that mattered to the client’s bottom line—leads, sales, and revenue growth.
  1. A Human-Centric Approach: Drawing from his sales background, Roshan knew that at the heart of every search query is a person trying to solve a problem. The agency’s strategy would be built around understanding and serving user intent, creating content and experiences that genuinely help people.

This clear positioning resonated in a market tired of quick fixes. It attracted clients who were looking for a true partner, not just a service provider.

Early Traction and Building a Culture of Excellence

Starting an agency from scratch is a formidable challenge. Roshan’s initial days were filled with balancing business development, client management, and hands-on project execution. He leveraged the strong reputation and network he had built within India’s digital marketing communities. His first clients were often people who already knew of his work, his integrity, and his commitment to quality.

One early client, a struggling e-commerce startup, became a pivotal case study. The company had beautiful products but was invisible online, buried deep in search results. They had been burned by a previous agency that had delivered a flurry of low-quality links and little else. Roshan’s team started with a deep diagnostic audit, identifying critical technical issues and a major misalignment between the site’s content and what their target customers were actually searching for.

“Roshan infused the operation with his trademark values: relentless quality, trust in the basics, and a refusal to chase shiny shortcuts.”

Instead of promising overnight rankings, the Go Lead Digital team laid out a methodical, six-month roadmap. It involved a complete technical overhaul, a strategic content refresh focused on real user questions, and a patient, authority-first approach to link building. Within four months, the site’s organic traffic began to climb. By the end of the engagement, not only had traffic tripled, but organic revenue had increased by over 150%. The client’s grateful testimonials became a powerful tool for acquiring new business.

This early win was crucial. It validated the agency’s methodology and helped build a culture of excellence. Roshan hired team members who shared his values, prioritizing critical thinking and a passion for problem-solving over a long list of credentials. The office became a collaborative environment where every team member was encouraged to experiment, learn, and contribute to the agency’s growing knowledge base.

Scaling with Integrity: From Bootstrapped Startup to Award-Winning Agency

As Go Lead Digital grew, Roshan was careful to scale responsibly. He resisted the temptation to take on every client that came his way, choosing instead to partner with businesses where he felt his team could make a genuine impact. This selective approach ensured that the quality of work never suffered and that the agency could maintain its high standards.

The agency’s growth wasn’t just about luck; it was a direct result of the founder’s vision. By refusing to compromise on his core principles, Roshan built a brand that people trusted. The track record of over two hundred successfully managed projects, from bootstrapped startups to established corporate accounts, speaks for itself. This performance eventually attracted industry recognition, with Go Lead Digital and Roshan himself earning awards for Best SEO Campaign, Agency Leadership, and more.

The story of Go Lead Digital’s genesis is a powerful lesson for any entrepreneur. It shows that a successful business can be built on a foundation of integrity, transparency, and a relentless focus on delivering real value. Roshan Samuel Ambler didn’t just launch an SEO agency; he created a platform to prove that doing things the right way is not only ethical but also the most effective path to lasting success.

बिहार में काउंटिंग से एक दिन पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने  महागठबंधन नेताओं की हाई लेवल बैठक बुलाई 

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पटना। बिहार में काउंटिंग से एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार शाम को अचानक से राबड़ी आवास पर महागठबंधन के नेताओं की हाई लेवल बैठक बुला ली। इस बैठक में शामिल होने के लिए भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, विकासशील इंसान पार्टी के चीफ मुकेश सहनी और राजद के कई सीनियर नेता पहुंचे हैं। 
काउंटिंग से ठीक एक दिन पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को दिन में महागठबंधन के प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक में उन्होंने चुनावी गड़बड़ी  पर नजर बनाए रखने का आदेश दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं को आदेश दिया कि किसी भी काउंटर पर गिनती के दौरान उन्हें लगता है कि गड़बड़ी हो रही है तो वह तुरंत पार्टी हाईकमान को इसकी जानकारी दें। 
महागठबंधन के उम्मीदवारों के साथ बैठक के दौरान तेजस्वी ने कहा कि “काउंटिंग वाले दिन किसी भी परिस्थिति में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हमारे पोलिंग एजेंट हर टेबल पर मौजूद रहें और फॉर्म 17C से लेकर ईवीएम की सील तक हर चीज की बारीकी से जांच करें।” उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना की गति को प्रभावित करने या किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिशें हो सकती हैं, इसलिए सबको अलर्ट रहना होगा।

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आतंकवादी नबी का कश्मीर स्थित घर सुरक्षाबलों ने उड़ाया

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दिल्ली ब्लास्ट केस में गुरुवार रात सुरक्षा बलों ने पुलवामा में आतंकी डॉ. उमर नबी के घर को IED ब्लास्ट से उड़ा दिया। गुरुवार को ही DNA मैचिंग के बाद इस बात की पुष्टि हुई थी कि ब्लास्ट वाली कार डॉ. उमर ही चला रहा था।

गुरुवार को ही खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है अब तक गिरफ्तार 8 आतंकियों ने बताया है कि वे 6 दिसंबर यानी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी के दिन दिल्ली समेत देशभर में कई जगह धमाके करना चाहते थे।

इसके लिए उन्होंने 32 कारों का इंतजाम किया था। इनमें बम और विस्फोटक भरकर धमाके किए जाने थे। i20, इको स्पोर्ट, ब्रेजा कार उसी साजिश का हिस्सा हैं।

10 नवंबर को हुए दिल्ली ब्लास्ट में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग घायल हैं, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।

 

BJP को मिल गया एकनाथ शिंदे का तोड़? कौन हैं गणेश नायक

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ganishमुंबई। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में सबकुछ ठीक नहीं है। इसके संकेत हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (Mumbai Metropolitan Region) में की चुनाव प्रभारी की नियुक्ति से मिलते हैं। दरअशल, भाजपा (BJP) ने राज्य सरकार में वन मंत्री गणेश नाइक (Ganesh Naik) को 7 जिलों का प्रभारी बनाया है, जिनमें ठाणे भी शामिल है। खास बात है कि नाइक को उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) का प्रतिद्वंद्वी भी माना जाता है।

कौन हैं गणेश नाइक
रिपोर्ट के अनुसार, नाइक को बड़े नेताओं को चुनौती देने और मुश्किल राजनीतिक हालात में खड़े रहने वाला माना जाता है। खास बात है कि वह अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से अलग हो गए थे और इसके बाद भी ठाणे में अपनी पार्टी के लिए खड़े रहे। इस सीट पर शिंदे के गुरु माने जाने वाले आनंद दीघे का दबदबा था।

कहा जाता है कि उनका मजबूत जनाधार युवाओं और मजदूरों के बीच है। उनके समर्थन से ही नाइक वाशी, नेरुल, एरोली, तुर्भे, घंसोली और TTC बेल्ट यानी ट्रांस ठाणे क्रीक में शिवसेना के चेहरे बन गए थे। 1980 के दशक में वह नवी मुंबई में बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे शिवसेना का विस्तार हो रहा था, तो नाइक का क्षेत्र दीघे से ज्यादा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ठाकरे को हस्तक्षेप करना पड़ा और नवी मुंबई को नाइक का क्षेत्र घोषित किया गया।

 

NDA के घटक दलों के कितनी सीटें मिलने का अनुमान
सर्वे में कहा गया है कि भाजपा दूसरे से तीसरे नंबर की पार्टी के रूप में खिसक सकती है और उसे 50 से 56 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। NDA के अन्य घटक दलों में चिराग पासवान की LJPR को 11 से 16 सीटें, जीतनराम मांझी की हम को 2-3 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को 2-4 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं।

महागठबंधन में किसी कितनी सीटें?
विपक्षी महागठबंधन के अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस को 17-21, लेफ्ट को 10 से 14, VIP को 3-5, IIP को 0-1 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा प्रशांत किशोर की जनसुराज को 0-2 सीटें, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को 0-2 सीटें और अन्य को 0-5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

NDA को कुल 43 फीसदी वोट शेयर
वोट शेयर के मामले में भी राजद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के आसार जताए गए हैं। एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के मुताबिक, राजद को 24% वोट शेयर मिल सकता है, जबकि भाजपा और जेडीयू दोनों को 18-18% वोट शेयर मिलने के आसार जताए गए हैं। कांग्रेस को 10 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। NDA को कुल 43 फीसदी और महागठबंधन को 41 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि जनसुराज को 4%, AIMIM को 1% और अन्य को 11% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।

पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर कंटेनर और बस आपस में टकराए, 8 की जिंदा जलकर मौत

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पुणे: महाराष्ट्र में पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर गुरुवार शाम एक बड़ा सड़क हादसा हुआ. यह भीषण दुर्घटना नवले ब्रिज के पास हुई, जहां दो कंटेनर, एक मिनी बस और कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं. हादसे के बाद वाहनों में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई. प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.

हादसे की जानकारी मिलते ही पुणे दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए. हादसा शाम के व्यस्त समय में हुआ, जिसके कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया. पुलिस और बचाव दल राहत-बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है.