जसप्रीत बुमराह ने किया टेंबा बावुमा पर गंदा कमेंट, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

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नई दिल्ली: साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में जसप्रीत बुमराह का गेंद से असरदार प्रदर्शन दिखा है. लेकिन, इस दमदार प्रदर्शन के बीच उनका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें साउथ अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा को लेकर गंदे कमेंट करते देखा जा सकता है. बुमराह ने जो कहा वो दरअसल बॉडी शेमिंग के अंतर्गत आता है. उन्होंने वैसा बोलकर टेंबा बावुमा के कद का मजाक उड़ाया है.

बुमराह ने बावुमा को ये क्या कह दिया?
अब सवाल है कि बुमराह ने बावुमा को कहा क्या? ऋषभ पंत के साथ उनका जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वो उन्हें बौना कहते दिख रहे हैं. अब बुमराह ने ऐसा जान-बूझकर कहा या जाने-अनजाने में उस बारे में दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता.

मैच के दौरान कब घटी ये घटना?
ये मामला कोलकाता टेस्ट में पहले दिन के खेल के साउथ अफ्रीका की इनिंग के 13वें ओवर का है. इस ओवर की आखिरी गेंद पर बुमराह ने बावुमा को चौंका दिया. गेंद बावुमा के पैड की ऊपर की साइड लगी थी. LBW की जोरदार अपील हुई, जिसे अंपायर ने नकार दिया. अंपायर के इस फैसले को चुनौती देने यानी DRS लेने को लेकर भारतीय खिलाड़ी जब आपस में विचार-विमर्श कर रहे थे, उसी दौरान बुमराह से बावुमा को बौना कहने की गलती हो गई.

ऋषभ पंत ने कहा कि गेंद में हाईट है. उसी के रिप्लाई में बुमराह नो बोला कि बौना भी तो है ये. फिर पंत ने कहा कि वो ठीक है, लेकिन गेंद पैड के ऊपर भी तो लगी है. आखिर में DRS लेने का ख्याल टाल दिया गया. बॉल ट्रैकिंग में भी बाद में देखा गया तो यही पता चला कि गेंद लेग स्टंप के ऊपर से जा रही थी.

पहले सेशन में बुमराह की घातक गेंदबाजी
कोलकाता टेस्ट के पहले सेशन में जसप्रीत बुमराह का घातक रुप देखने को मिला. उन्होंने अपनी गेंदबाजी के पहले स्पेल में 7 ओवर में 4 मेडन के साथ 9 रन देकर 2 विकेट लिए. ये दोनों विकेट साउथ अफ्रीकी ओपनर्स के रहे.

सर्दियों में इन 5 सब्जियों को बनाएं डाइट का हिस्सा, सुपरफूड जैसी जबरदस्त ताकत देती हैं

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ठंड की कड़कती हवाएं, दिन का छोटा होता समय और शरीर में एक अजीब-सी सुस्ती… सर्दी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आता है। लेकिन इस मौसम में कुछ ऐसी सब्जियां भी आती हैं, जो इन मुसीबतों से लड़ने में हमारी मदद कर सकती हैं। 

ये सब्जियां न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती हैं, बल्कि इनमें वो सारे पोषक तत्व भरे होते हैं जो हमें ठंड से लड़ने, इम्युनिटी बढ़ाने और सेहतमंद रहने की ताकत देते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 सब्जियों के बारे में जो सर्दियों में किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं।

पालक
सर्दियों में बाजार में दिखने वाली मुलायम और ताजी पालक स्वास्थ्य के लिए वरदान है। यह आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन-ए, सी और के जैसे जरूरी विटामिन्स से भरपूर होती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाव करते हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है। 

गाजर
ठंड के मौसम की सबसे चमकदार और मीठी सब्जी गाजर बेहद गुणकारी है। गाजर का नारंगी रंग उसमें बीटा-कैरोटीन की मौजूदगी की वजह से होता है, जो शरीर में जाकर विटामिन-ए में बदल जाता है। यह आंखों की रोशनी के लिए अमृत माना जाता है और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। गाजर में फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में सहायक है। 

मेथी
मेथी देखने में भले ही साधारण लगती है, लेकिन उसके गुण असाधारण हैं। स्वाद में थोड़ी कड़वी मेथी डाइजेस्टिव एंजाइम्स को एक्टिव करके पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। इसमें आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

चुकंदर
चुकंदर आयरन का एक शानदार सोर्स है और एनीमिया से लड़ने में बेहद कारगर है। इसके अलावा, चुकंदर में नाइट्रेट्स पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की इम्युनिटी बूस्ट करते हैं। 

शलजम
शलजम को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो सर्दी-खांसी से लड़ने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है। शलजम में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो कब्ज की समस्या को दूर करती है और पाचन को बेहतर बनाती है। 

क्रिकेट की दुनिया में बुमराह का कमाल, 7 साल बाद किसी ने नहीं तोड़ा यह रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: जसप्रीत बुमराह ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में अपनी गेंदबाजी की शुरुआत जोरदार की है. उसी दमदार प्रदर्शन का नतीजा है कि पहले दिन, पहले सेशन का खेल खत्म होते ही उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. और, उसी के साथ उन्होंने वो कर दिखाया जो पिछले 7 साल में कोई और गेंदबाज नहीं कर सका. बुमराह ने ये रिकॉर्ड विरोधी ओपनर्स को गुमराह कर बनाया है.

बुमराह ने तोड़ा रिकॉर्ड
सीधे शब्दों में कहें तो पिछले 7 सालों में जसप्रीत बुमराह दुनिया भर के ओपनर्स के लिए टेस्ट क्रिकेट में काल बनकर उभरे हैं. साल 2018 से अब तक उन्होंने इस फॉर्मेट में अब तक सबसे ज्यादा बार विरोधी ओपनर्स को आउट किया है. इस दौरान पहले ये रिकॉर्ड इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के नाम था, जिन्होंने 12 बार ओपनर्स को चलता किया था.

लेकिन, साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट के पहले दिन, पहली पारी के अपने पहले स्पेल में ही ना सिर्फ बुमराह ने दोनों विरोधी ओपनर्स के पांव क्रीज से उखाड़े बल्कि स्टुअर्ट ब्रॉड का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. टेस्ट में ये 13वीं बार था, जब बुमराह ने ओपनर को आउट किया था.

ऐसे किया दोनों ओपनर को शिकार
जसप्रीत बुमराह ने पहले रियान रिकल्टन को क्लीन बोल्ड किया. फिर एडन मार्करम को विकेट के पीछे लपकवाया. पहले विकेट के दौरान उनकी उस शानदार गेंद का जौहर देखने को मिला, जिसकी रफ्तार 140 किलोमीटर प्रतिघंटे से ज्यादा थी. तो दूसरे विकेट में ऋषभ पंत का इंजरी से वापसी करने के बाद पहला जबरदस्त कैच देखने को मिला. बुमराह ने साउथ अफ्रीकी ओपनर्स का शिकार अपने पहले स्पेल में 7 ओवर में 9 रन देकर किया. इस दौरान उन्होंने 4 ओवर मेडन फेंके.

बुमराह ने अश्विन को छोड़ा पीछे
रियान रिकल्टन को क्लीन बोल़्ड कर जसप्रीत बुमराह ने अश्विन को भी पीछे छोड़ दिया है. वो अब बोल्ड कर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे भारतीय बन गए हैं. ये 152वीं बार था, जब बुमराह ने बल्लेबाज को बोल्ड मारा था. इस मामले में उन्होंने अश्विन को पीछे छोड़ा है, जिन्होंने 151 बोल्ड भारत में मारे हैं. वहीं कुंबले ने 186 बार जबकि कपिल देव के नाम 167 क्लीन बोल्ड दर्ज है.

चुनावी मंच पर गूंजा मैथिली ठाकुर का सुर, कैसे बनी लोक गायिका से लोकप्रिय चेहरा

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मुंबई: प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर, जिनकी आवाज में एक अलग ही जादू है। अब वह राजनीति की दुनिया में कदम रख चुकी हैं। बिहार चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुईं। अलीनगर सीट से चुनाव लड़ा। आज चुनाव परिणाम आने पर उनके राजनीति सफर का भाग्य तय होगा। इससे पहले जानिए, मैथिली ठाकुर के जीवन और संगीत के सफर के बारे में। 

कौन हैं मैथिली ठाकुर?
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर और माता भारती ठाकुर दिल्ली में रहते हैं, जो शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। गायिक का बचपन से ही संगीत के प्रति रुझान था, उन्होंने चार साल की उम्र से ही अपने दादा से संगीत सीखना शुरू किया और दस साल की उम्र तक जागरणों और स्थानीय संगीत समारोहों में कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने लगीं। 

साल 2011 में हुआ संगीत का सफर 
मैथिली की संगीत यात्रा 2011 में शुरू हुई, जब वह जी टीवी में प्रसारित होने वाले लिटिल चैंप्स नामक एक रियलिटी शो में दिखाई दी थीं। इसके बाद साल 2017 में गायिका ने ‘राइजिंग स्टार’ के सीजन 1 में ‘ओम नम: शिवाय’ गाया, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने ‘होली रे रसिया’, ‘हरि नाम नहीं तो जीना क्या’, ‘महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम’ से लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गईं। आज गायिका अपने छोटे भाइयों ऋषभ और अयाची के साथ मिलकर भक्ति गानों के साथ बिहार की लोक संस्कृति को भी गानों के जरिए बयां करती हैं। 

कब से उठी राजनीति में शामिल होने की चर्चा?
संगीत जगत में नाम कमाने के बाद मैथिली ठाकुर ने राजनीति में आने का सोचा। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। कुछ वक्त बाद वह बिहार चुनाव में खड़ी हो गईं। इस वक्त भी जब वोटों की गिनती चल रही है तो वह अपनी सीट से आगे चल रही हैं। 

बावुमा का विकेट कुलदीप यादव के लिए बड़ा मोड़, जानें क्या है पीछे की खास वजह

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नई दिल्ली: कुलदीप यादव के लिए ना सिर्फ कोलकाता टेस्ट बल्कि उसकी पहली पारी में लिया साउथ अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा का विकेट भी खास बन गया है. और, इसी के साथ रेड बॉल क्रिकेट में कुलदीप यादव एक बार फिर से छाते हुए नजर आए. कुलदीप यादव के लिए कोलकाता टेस्ट के खास होने की वजह सिर्फ इतनी है कि ये उनका ईडन गार्डन्स पर पहला टेस्ट मैच है. इससे पहले करियर में उन्होंने जो भी 15 टेस्ट खेले, उसमें से कोई भी ईडन गार्डन्स पर नहीं खेले.

कुलदीप यादव के लिए बावुमा का विकेट खास क्यों?
अब सवाल है कि कुलदीप यादव के लिए टेंबा बावुमा का विकेट कैसे खास बन गया? साउथ अफ्रीका के कप्तान का विकेट लेकर भारत के चाइनामैन गेंदबाज ने दरअसल एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. ऐसा कर उन्होंने भारतीय सरजमीं पर अपने 150 विकेट पूरे कर लिए. मतलब, टेंबा बावुमा भारत में लिए इंटरेनशनल विकेटों में उनके 150वें शिकार रहे.

कुलदीप ने कैसे उखाड़े बावुमा के पांव?
कुलदीप यादव ने टेंबा बावुमा को लेग स्लिप पर खड़े ध्रुव जुरेल के हाथों कैच कराकर पवेलियन का रास्ता दिखाया. कप्तान बावुमा 11 गेंदों का सामना कर सिर्फ 3 रन ही बना सके.

भारत में ऐसा करने वाले कुलदीप 9वें गेंदबाज
कुलदीप यादव भारत में 150 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले 9वें गेंदबाज हैं. ये कारनामा उन्होंने 87 पारियों में कर दिखाया है. कुलदीप से पहले जिन 8 गेंदबाजों 150 या उससे ज्यादा विकेट झटके हैं, उनमें सबसे ऊपर 476 विकेटों के साथ अनिल कुंबले का नाम है. उनके बाद 193 पारियों में 475 विकेट लेकर अश्विन हैं. हरभजन ने 201 पारियों में 380 विकेट चटकाए हैं. रवींद्र जडेजा के भी फिलहाल 377 इंटरनेशनल विकेट भारत में हैं. कपिलदेव ने 202 पारियों में 319 विकेट लिए हैं. जबकि श्रीनाथ के 211, जहीर के 201 और मोहम्मद शमी के 168 विकेट हैं.

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बड़ी फिल्मों की वजह से ‘आगरा’ के शो घटे, टीम ने जताया विरोध, मनोज बाजपेयी भी आए साथ

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मुंबई: हर शुक्रवार की तरह इस बार भी कई फिल्में रिलीज हुई हैं। इन फिल्मों में एक नाम कनु बहल की फिल्म ‘आगरा’ का भी शामिल है। साल 2023 में कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई इस फिल्म को काफी सराहना भी मिली थी। अब 14 नवंबर को यह फिल्म भारत में रिलीज हुई है। यह एक स्वतंत्र फिल्ममेकर की फिल्म है, नतीजा फिल्म का उतना शोर-शराबा नहीं है। लेकिन अब फिल्म के निर्देशक कनु बहल ने ‘आगरा’ को पर्याप्त स्क्रीन न मिलने की बात कहते हुए बड़ी मल्टीप्लेक्स सिनेमा चेन्स पर तंज कसा है। इसके पीछे उन्होंने कथित बड़ी फिल्मों को कारण बताया है। अब दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कनु की इन बातों का समर्थन किया है।

कनु बहल ने ट्वीट कर जताई नाराजगी
निर्माता कनु बहल ने फिल्म ‘आगरा’ की रिलीज को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में कनु ने ‘आगरा’ पर अपडेट देते हुए लिखा, ‘हमें तथाकथित ‘बड़ी ब्लॉकबस्टर’ फिल्मों और छोटी फिल्मों के मल्टीप्लेक्स चेन प्रोग्रामिंग में फिट न होने के कारण शो देने से मना किया जा रहा है। अब यह आप दर्शकों पर निर्भर है। बोलिए और चेन को टैग कीजिए। कहिए कि आप फिल्म देखना चाहते हैं।’ अपने इस ट्वीट में कनु ने किसी फिल्म का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उनका इशारा उन कथित बड़े स्टार्स और बड़े बजट वाली कमर्शियल फिल्मों की ओर ही है। इस हफ्ते भी रिलीज हुई फिल्मों में अजय देवगन और आर माधवन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ इसी तरह की बड़े बजट और बड़ी स्टार वाली फिल्म है।

मनोज बाजपेयी ने किया समर्थन
कनु बहल की इन बातों का मनोज बाजपेयी ने समर्थ किया है। मनोज बाजपेयी ने कनु बहल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए एक्स पर लिखा, ‘इस लड़ाई को लड़ते हुए बहुत समय हो गया है। इंडी निर्माताओं और उनकी कला को अक्सर व्यापक सिनेमा जगत में नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगे रहो, कानू तुम्हारा प्रयास सचमुच मायने रखता है। सभी को आगे आकर छोटे और सार्थक सिनेमा का समर्थन करना चाहिए और अपने सिनेमाघरों से इन फिल्मों को उचित मौका देने का अनुरोध करना चाहिए।’

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कार्डी बी के घर गूंजी किलकारियां, स्टीफन डिग्स के साथ मनाया खुशियों का पल

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मुंबई: कार्डी बी ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया है, जिसमें संगीत, प्यार और अब परिवार में एक नन्हा मेहमान भी शामिल हो गया है। 33 साल की रैपर कार्डी बी चार बच्चों की मां बन गई हैं। उन्होंने अपने चौथे बच्चे, एक बेटे, को जन्म दिया है, जिसकी पुष्टि उनके प्रतिनिधि ने की। प्रतिनिधि ने बताया कि कार्डी स्वस्थ और खुश हैं। यह बच्चा उनके प्रेमी, एनएफएल स्टार स्टीफन डिग्स के साथ उनका पहला बच्चा है।

कार्डी बी ने शेयर किया वीडियो
कार्डी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर इस खुशखबरी की घोषणा की, जिसमें वह अपने नए एल्बम ‘एम आई द ड्रामा?’ के गाने ‘हैलो’ पर लिप-सिंक कर रही थीं। उन्होंने कैप्शन में लिखा कि यह नया दौर उनके लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन बहुत खास रहा। इसने उन्हें नया संगीत, नया एल्बम और अब एक नया बच्चा। कार्डी ने कहा कि यह सब उन्हें अपने बच्चों के लिए बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि अब वह खुद को और मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही हैं। वह टूर की तैयारी कर रही हैं, अपने शरीर और दिमाग को संतुलित कर रही हैं और पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। कार्डी ने कहा, ‘मैंने सीखा है, मैं ठीक हूं, और मैं उस महिला से प्यार करती हूं, जो मैं बन गई हूं।’

चार बच्चों की मां बन चुकी हैं कार्डी बी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्डी और डिग्स ने 2024 के आखिर में डेटिंग की अफवाहों को हवा दी और मई 2025 में सेल्टिक्स बनाम निक्स गेम में पहली बार एक साथ नजर आए। कार्डी ने गर्भावस्था को निजी रखा, क्योंकि वह इसे अपने समय पर साझा करना चाहती थीं। आखिर में, कार्डी ने कहा, ‘अब आप सब जान गए हैं, तो जाइए मेरे एल्बम को सपोर्ट करो। मैं अब चार बच्चों की मां हूं।’

कौन हैं कार्डी बी
कार्डी बी एक अमेरिकी रैपर, गीतकार और टेलीविजन व्यक्तित्व हैं, जिनका असली नाम बेल्कलिस मार्लेनिस अल्मांजर है। वे न्यूयॉर्क शहर में पैदा हुई और वहीं पली-बढ़ी हैं। वह अपनी बेबाक सार्वजनिक छवि, संगीत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए जानी जाती हैं। वह शुरुआत में वाइन (Vine) और इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट्स के कारण एक इंटरनेट सेलिब्रिटी बनीं। इसके बाद उन्होंने संगीत की दुनिया में पहचान बनाई।

हटा देंगे साले को…. CM मोहन यादव ने किसके लिए कही ये बात? कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिल गया मुद्दा

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भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में सरपंच महासम्मेलन (Sarpanch General Conference) का आयोजन हुआ, जिसे संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने ऐसा कुछ कह दिया कि जो ना केवल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि उसने विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) को भी बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। अपने संबोधन के दौरान सीएम ने सचिव और सहायक सचिवों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘कोई सचिव अगर काम नहीं करके दे रहा तो हटा देंगे साले को, चिंता क्यों कर रहे हो। जहां कोई तकलीफ देगा तो हटा देंगे। सचिव है, सहायक सचिव है, इनकी क्या औकात।’

मुख्यमंत्री ने आगे बोलते हुए कहा, ‘देखो अगर लगता है कि सरपंच के मामले में कोई दिक्कत आ रही, सरकार ने निर्णय लिया है, तो उसको ठीक करने का काम हमारा है। ये कोई चिंता की बात थोड़ी है। ताली-वाली बजाकर बताओ, अगर मैं आपके हित की बात कर रहा हूं तो।’

कांग्रेस ने लगाया पद की गरिमा गिराने का आरोप
सीएम यादव की इस भाषाशैली की आलोचना करते हुए प्रदेश कांग्रेस ने अपने एक्स अकाउंट पर इसका वीडियो भी शेयर किया और इसके साथ उसने लिखा, ‘हां, मोहन बाबू आपके राज में माफियाओं के अलावा और किसी की #औकात भी क्या है! गिरती भाषा और हल्के शब्दों का प्रयोग कर अपने पद की गरिमा को और कितना गिराएंगे मुख्यमंत्री जी!’

सरपंच करा सकेंगे 25 लाख रुपए तक का काम
सरपंच महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रुपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। साथ ही इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय‍ निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा।’

सीएम बोले- पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता
सीएम यादव ने सरपंचों की महत्ता बताते हुए कहा कि जो काम सरपंच कर सकता है, वो कोई नहीं कर सकता। जमीन पर काम सरपंच करता है, इसलिए पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘प्रदेश सरकार हर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के साथ शांति धाम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। पंचायतों के माध्यम से रोजगार आधारित उद्योगों की स्थापना कर ग्राम स्वावलंबन को भी सशक्त बनाया जा रहा है।’

मुख्यमंत्री बोले- सरपंचों की मदद से ग्राम विकास का कारवां चल रहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है।’

मध्य प्रदेश में लंपी वायरस का अटैक, मवेशियों के लिए कितना खतरनाक है ये वायरस

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शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल में इन दिनों लंपी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. जगह-जगह आपको ऐसे मवेशी देखने को मिल जाएंगे, जो लंपी वायरस से प्रभावित हैं. लंपी वायरस इतना खतरनाक है कि ये मवेशियों को परेशान कर देता है, या यूं कहें की अगर ये अपने पूरे शबाब पर आ जाए, तो मवेशी दर्द से तड़पते हैं, क्योंकि ये पूरे शरीर में गांठे बना देता है. वो गांठ आगे चलकर घाव का रूप ले लेती है. मवेशी खाना छोड़ देते हैं. अब आप समझ सकते हैं कि जिन भी मवेशियों में ये वायरस होता है, उनके लिए कितना खतरनाक होता होगा.

लंपी वायरस का अटैक

शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर खम्हरिया कला ग्राम पंचायत के रहने वाले राजेंद्र गौतम अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से एक हैं, किसान और पशुपालक भी हैं. वो बताते हैं कि “पिछले कुछ दिनों से उनके पशुओं में लंपी वायरस का अटैक हुआ है. जिसमें उनकी एक छोटी बछिया काल के गाल में समा भी गई है. शुरुआत में तो वो इस वायरस के बारे में नहीं समझ पाए, लेकिन फिर जब उनके तीन और गौवंश में इस वायरस का अटैक हुआ था, तो उन्होंने तुरंत ही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया. अपने मवेशियों का इलाज कराया, तो वो जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो गई.

इसके अलावा उन्होंने अपने मवेशियों को लंपी वायरस की वैक्सीन भी लगवाई है. राजेंद्र गौतम बताते हैं कि इस क्षेत्र के अधिकतर गांव के घरों के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. 3 साल पहले भी इस गांव में गौवंश में लंपी वायरस का अटैक हुआ था. ये इतना खतरनाक है कि अगर एक-दो मवेशियों में वायरस हुआ, तो धीरे-धीरे कई मवेशियों में ये फैल जाता है. राजेंद्र ने बताया कि इस वायरस के अटैक के बाद मवेशी चारा खाना छोड़ देता है. उसको बुखार हो जाता है, शरीर में फफोले टाइप में पड़ने लगते हैं.

गठानें बनने लगती है, जिसे फोड़ा भी कह सकते हैं. उसके अंदर मवाद भर जाता है. अगर उसका सही समय पर इलाज नहीं हुआ, तो वो फूटता भी है. शरीर में एक दो फोड़े हो तो बात अलग है, पूरे शरीर में अनगिनत फोड़े पड़ जाते हैं. तब आप समझ सकते हैं कि मवेशी को कितना कष्ट होता होगा. शहडोल के ऐसे कई गांवों और शहरी मुख्यालय के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. कई मवेशी इस वायरस से उबर भी चुके हैं और वे स्वस्थ हैं, लेकिन शरीर में जो गठान बने, फिर घाव बना, उसके निशान अब भी उनके शरीर पर दिखते हैं.

लंपी वायरस का शहडोल में कितना असर

मध्य प्रदेश के अंतिम छोर में बसा शहडोल संभाग, यह छत्तीसगढ़ से लगा हुआ इलाका है. इन दिनों शहडोल संभाग में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. शहडोल पशुपालन विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह बताते हैं की “लम्पी वायरस शहडोल में सितंबर और अक्टूबर में इसके ज्यादा केस देखने को मिल रहे थे, हालांकि नवंबर में कंट्रोल हो गया है. ये वायरस मवेशियों को तोड़ कर रख देता है, क्योंकि ये एक लम्पी स्किन डिजीज है.

लंपी वायरस के लक्षण और इलाज

लंबी वायरस के लक्षणों की बात करें तो पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉक्टर अशोक सिंह बताते हैं की लम्पी वायरस एक विषाणु जनित स्किन डिजीज है. इसमें त्वचा में गांठे बन जाती है और गोवंश में ये ज्यादातर होती है. मुंह से लार गिरने लगता है, फीवर आता है. पशु चारा खाना बंद कर देता है, ये प्रारंभिक लक्षण है. इसी दौरान अगर उपचार कर दिया जाए तो पशु जल्द ही स्वस्थ भी हो जाता है और कोई भी मृत्यु नहीं होती है.

इसका बहुत सस्ता इलाज है. इसमें एंटीबायोटिक और फीवर के लिए कुछ दवाइयां दी जाती है. जिससे पशु तीन से पांच दिन में जल्द स्वस्थ हो जाता है. इसमें खतरनाक ये होता है कि जब त्वचा में जो गांठे होती हैं, अगर ज्यादा संक्रामक हो गया, समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह गाठें फूटने लग जाती हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर तत्काल इलाज शुरू हो जाए, तो गांठे बिल्कुल दब जाती हैं.

लंपी कैसे फैलता है, क्या हैं बचाव के तरीके

अब सवाल उठता है की लम्पी वायरस फैलता कैसे है, क्योंकि ये वायरस है, तो आप समझ सकते हैं की ये एयर के माध्यम से भी फैलता है. एक संक्रामक पशु से दूसरे पशु के संपर्क में आने पर ये फैलता है. मच्छर से भी फैलता है, पशुओं में जो खून चूसने वाला कीड़ा होता है, जिसे किलनी भी कहा जाता है, उसके माध्यम से भी फैलता है. मुख्य रूप से ये वायरस जनित बीमारी है, तो इसमें कोशिश करना चाहिए कि जब भी आपका पशु बीमार हो या उसमें कोई लक्षण दिखे तो उसे अन्य पशुओं से गौशाला से अलग रखें. इस वायरस के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत ही इलाज करवाएं. जिससे ये गंभीर बीमारी ज्यादा गंभीर होने से पहले ही पशु आपका स्वस्थ हो जाए.

लंपी वायरस होने पर क्या करें ?

अगर आपका मवेशी को लम्पी वायरस होता है तो फिर क्या करें? पशुपालन विभाग के उपसंचालक बताते हैं कि पहले तो लम्पी वायरस होने का इंतजार ना करें. अगर आपके पास मवेशी हैं, तो लम्पी वायरस का पर्याप्त मात्रा में टीकाकरण उपलब्ध है. अभी तक हम 1 लाख के करीब टीकाकरण कर चुके हैं. टीकाकरण करवाएं. इसके अलावा अगर लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत ही हमारे नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें. पशुपालन उप संचालक कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि इसका निशुल्क उपचार किया जाता है. निशुल्क टीकाकरण किया जाता है. इसमें मृत्यु दर भी बहुत कम है.

 

 

किस वायरस के कारण होता है

एक्सपर्ट बताते हैं लम्पी वायरस जिसे गांठदार त्वचा रोग लम्पी स्किन डिजीज भी कहते हैं, ये पॉक्सविरिडे फैमिली के एक वायरस के कारण होता है. इसे नीथलिंग वायरस भी कहा जाता है. ये रोग त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली पर बुखार, लिंफ नोड्स, और कई नोड्यूल्स के रूप में हो सकता है.

सबसे पहले कहां मिला लम्पी वायरस

लम्पी वायरस जिसे लम्पी पॉक्स भी कहा जाता है. ये त्वचा जनित रोग है, जो गोवंश में ही फैलता है. इसमें चिकन पॉक्स की तरह गोवंश के शरीर में दाने आ जाते हैं. सबसे पहले ये वायरस 1929 में जांबिया में एक महामारी के रूप में पाया गया था, इंडिया में साल 2019 ओडिशा में इस वायरस का पहला केस मिला था.

बच्चों की दुनिया पर बनी फिल्मों का कमाल, ‘तारे ज़मीन पर’ और ‘चिल्लर पार्टी’ समेत कई हुईं अवॉर्डेड

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मुंबई: भारत में हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। यह इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती है। नेहरू जी बच्चों से प्यार करते थे और मानते थे कि बच्चे कल के भारत के निर्माता हैं। भारतीय सिनेमा ने बच्चों पर आधारित कई फिल्में बनाई हैं। इन में से कुछ ने अवॉर्ड जीते हैं। आइए इन फिल्मों के बारे में जान लेते हैं।

सुमी (2020)
यह मराठी भाषा की फिल्म है। इसमें एक ऐसी लड़की की कहानी दिखाई गई है जो गरीब है और पढ़ना चाहती है। उसका स्कूल बहुत दूर है इसलिए वह एक साइकिल लेना चाहती है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म और सबसे अच्छी अदाकारी के लिए इसे 68वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया। 

कस्तूरी (2019)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो अपने पिता की साफ-सफाई में मदद करता है। फिल्म में शिक्षा के लिए संघर्ष और जातिगत भेदभाव को दिखाया गया है। इस फिल्म को बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए 67वां नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया।

धनक (2016)
इस फिल्म में भाई-बहन के रिश्ते को दिखाया गया है। बड़ी बहन अपने छोटे भाई, जो कि नेत्रहीन है उसकी मदद के लिए शाहरुख खान से मिलना चाहती है। उसे लगता है कि वह उनकी मदद कर सकते हैं। फिल्म को 64वां नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।

बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन (2015)
यह फिल्म दुनिया के सबसे कम उम्र के मैराथन धावक बुधिया सिंह की सच्ची कहानी पर आधारित है। फिल्म में बुधिया और उसके कोच, बिरंची दास, के रिश्तों को दिखाया गया है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए इसे 63वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।

काका मुत्तई (2014)
यह तमिल फिल्म है, जिसमें झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की कहानी दिखाई गई है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे छोटी जगहों के बच्चे सपने देखने लगते हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश करते हैं। फिल्म को बेहतरीन फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

एलिजाबेथ एकादशी (2014)
मराठी भाषा की इस फिल्म को भी काफी सराहना मिली थी। बच्चों पर आधारित इस फिल्म में दिखाया गया है कि गरीबी की वजह से अगर किसी चीज को बेचना पड़ता है, तो बच्चों पर इसका क्या असर पड़ता है। इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।

कफल (2013)
बच्चों पर आधारित यह फिल्म उत्तराखंड के एक गांव की कहानी बताती है। इसमें पलायन और पिता-पुत्र के रिश्ते को दिखाया गया है। बतुल मुख्तियार के निर्देशन में बनी इस फिल्म को 62वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया। 

देख इंडियन सर्कस (2012)
बच्चों पर आधारित इस फिल्म में ग्रामीण भारत की कहानी दिखाई गई है। इसमें एक परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए संघर्ष करता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और तनिष्ठा चटर्जी ने इसमें अहम किरदार निभाया है। इसे 60वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।

चिल्लर पार्टी (2011)
‘चिल्लर पार्टी’ बच्चों पर आधारित कॉमेडी फिल्म है। इसमें दिखाया गया है कि बच्चे आपस में मिलकर योजना बना सकते हैं और एक मकसद के लिए काम कर सकते हैं। फिल्म को सबसे अच्छी फिल्म के लिए 59वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया। फिल्म को नौ बाल कलाकारों के लिए भी खास पुरस्कार भी मिला।

तारे जमीन पर (2007)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो डिस्लेक्सिया से पीड़ित होता है। उसके प्रति उसके पिता का व्यवहार काफी सख्त होता है। इसमें आमिर खान ने अहम किरदार निभाया है। फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।