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Sunday, June 21, 2026
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मध्य प्रदेश में लंपी वायरस का अटैक, मवेशियों के लिए कितना खतरनाक है ये वायरस

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शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल में इन दिनों लंपी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. जगह-जगह आपको ऐसे मवेशी देखने को मिल जाएंगे, जो लंपी वायरस से प्रभावित हैं. लंपी वायरस इतना खतरनाक है कि ये मवेशियों को परेशान कर देता है, या यूं कहें की अगर ये अपने पूरे शबाब पर आ जाए, तो मवेशी दर्द से तड़पते हैं, क्योंकि ये पूरे शरीर में गांठे बना देता है. वो गांठ आगे चलकर घाव का रूप ले लेती है. मवेशी खाना छोड़ देते हैं. अब आप समझ सकते हैं कि जिन भी मवेशियों में ये वायरस होता है, उनके लिए कितना खतरनाक होता होगा.

लंपी वायरस का अटैक

शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर खम्हरिया कला ग्राम पंचायत के रहने वाले राजेंद्र गौतम अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से एक हैं, किसान और पशुपालक भी हैं. वो बताते हैं कि “पिछले कुछ दिनों से उनके पशुओं में लंपी वायरस का अटैक हुआ है. जिसमें उनकी एक छोटी बछिया काल के गाल में समा भी गई है. शुरुआत में तो वो इस वायरस के बारे में नहीं समझ पाए, लेकिन फिर जब उनके तीन और गौवंश में इस वायरस का अटैक हुआ था, तो उन्होंने तुरंत ही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया. अपने मवेशियों का इलाज कराया, तो वो जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो गई.

इसके अलावा उन्होंने अपने मवेशियों को लंपी वायरस की वैक्सीन भी लगवाई है. राजेंद्र गौतम बताते हैं कि इस क्षेत्र के अधिकतर गांव के घरों के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. 3 साल पहले भी इस गांव में गौवंश में लंपी वायरस का अटैक हुआ था. ये इतना खतरनाक है कि अगर एक-दो मवेशियों में वायरस हुआ, तो धीरे-धीरे कई मवेशियों में ये फैल जाता है. राजेंद्र ने बताया कि इस वायरस के अटैक के बाद मवेशी चारा खाना छोड़ देता है. उसको बुखार हो जाता है, शरीर में फफोले टाइप में पड़ने लगते हैं.

गठानें बनने लगती है, जिसे फोड़ा भी कह सकते हैं. उसके अंदर मवाद भर जाता है. अगर उसका सही समय पर इलाज नहीं हुआ, तो वो फूटता भी है. शरीर में एक दो फोड़े हो तो बात अलग है, पूरे शरीर में अनगिनत फोड़े पड़ जाते हैं. तब आप समझ सकते हैं कि मवेशी को कितना कष्ट होता होगा. शहडोल के ऐसे कई गांवों और शहरी मुख्यालय के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. कई मवेशी इस वायरस से उबर भी चुके हैं और वे स्वस्थ हैं, लेकिन शरीर में जो गठान बने, फिर घाव बना, उसके निशान अब भी उनके शरीर पर दिखते हैं.

लंपी वायरस का शहडोल में कितना असर

मध्य प्रदेश के अंतिम छोर में बसा शहडोल संभाग, यह छत्तीसगढ़ से लगा हुआ इलाका है. इन दिनों शहडोल संभाग में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. शहडोल पशुपालन विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह बताते हैं की “लम्पी वायरस शहडोल में सितंबर और अक्टूबर में इसके ज्यादा केस देखने को मिल रहे थे, हालांकि नवंबर में कंट्रोल हो गया है. ये वायरस मवेशियों को तोड़ कर रख देता है, क्योंकि ये एक लम्पी स्किन डिजीज है.

लंपी वायरस के लक्षण और इलाज

लंबी वायरस के लक्षणों की बात करें तो पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉक्टर अशोक सिंह बताते हैं की लम्पी वायरस एक विषाणु जनित स्किन डिजीज है. इसमें त्वचा में गांठे बन जाती है और गोवंश में ये ज्यादातर होती है. मुंह से लार गिरने लगता है, फीवर आता है. पशु चारा खाना बंद कर देता है, ये प्रारंभिक लक्षण है. इसी दौरान अगर उपचार कर दिया जाए तो पशु जल्द ही स्वस्थ भी हो जाता है और कोई भी मृत्यु नहीं होती है.

इसका बहुत सस्ता इलाज है. इसमें एंटीबायोटिक और फीवर के लिए कुछ दवाइयां दी जाती है. जिससे पशु तीन से पांच दिन में जल्द स्वस्थ हो जाता है. इसमें खतरनाक ये होता है कि जब त्वचा में जो गांठे होती हैं, अगर ज्यादा संक्रामक हो गया, समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह गाठें फूटने लग जाती हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर तत्काल इलाज शुरू हो जाए, तो गांठे बिल्कुल दब जाती हैं.

लंपी कैसे फैलता है, क्या हैं बचाव के तरीके

अब सवाल उठता है की लम्पी वायरस फैलता कैसे है, क्योंकि ये वायरस है, तो आप समझ सकते हैं की ये एयर के माध्यम से भी फैलता है. एक संक्रामक पशु से दूसरे पशु के संपर्क में आने पर ये फैलता है. मच्छर से भी फैलता है, पशुओं में जो खून चूसने वाला कीड़ा होता है, जिसे किलनी भी कहा जाता है, उसके माध्यम से भी फैलता है. मुख्य रूप से ये वायरस जनित बीमारी है, तो इसमें कोशिश करना चाहिए कि जब भी आपका पशु बीमार हो या उसमें कोई लक्षण दिखे तो उसे अन्य पशुओं से गौशाला से अलग रखें. इस वायरस के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत ही इलाज करवाएं. जिससे ये गंभीर बीमारी ज्यादा गंभीर होने से पहले ही पशु आपका स्वस्थ हो जाए.

लंपी वायरस होने पर क्या करें ?

अगर आपका मवेशी को लम्पी वायरस होता है तो फिर क्या करें? पशुपालन विभाग के उपसंचालक बताते हैं कि पहले तो लम्पी वायरस होने का इंतजार ना करें. अगर आपके पास मवेशी हैं, तो लम्पी वायरस का पर्याप्त मात्रा में टीकाकरण उपलब्ध है. अभी तक हम 1 लाख के करीब टीकाकरण कर चुके हैं. टीकाकरण करवाएं. इसके अलावा अगर लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत ही हमारे नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें. पशुपालन उप संचालक कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि इसका निशुल्क उपचार किया जाता है. निशुल्क टीकाकरण किया जाता है. इसमें मृत्यु दर भी बहुत कम है.

 

 

किस वायरस के कारण होता है

एक्सपर्ट बताते हैं लम्पी वायरस जिसे गांठदार त्वचा रोग लम्पी स्किन डिजीज भी कहते हैं, ये पॉक्सविरिडे फैमिली के एक वायरस के कारण होता है. इसे नीथलिंग वायरस भी कहा जाता है. ये रोग त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली पर बुखार, लिंफ नोड्स, और कई नोड्यूल्स के रूप में हो सकता है.

सबसे पहले कहां मिला लम्पी वायरस

लम्पी वायरस जिसे लम्पी पॉक्स भी कहा जाता है. ये त्वचा जनित रोग है, जो गोवंश में ही फैलता है. इसमें चिकन पॉक्स की तरह गोवंश के शरीर में दाने आ जाते हैं. सबसे पहले ये वायरस 1929 में जांबिया में एक महामारी के रूप में पाया गया था, इंडिया में साल 2019 ओडिशा में इस वायरस का पहला केस मिला था.

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