प्रशांत किशोर के दावे पर लगी लगाम, राजनीति छोड़ने के सवाल पर जन सुराज का जवाब

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नई दिल्ली। पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपना खाता भी नहीं खोल पाई। शनिवार (15 ननंबर, 2025) को पार्टी की ओर से चुनावी हार पर प्रतिक्रिया आई।

जन सुराज का कहना है कि एनडीए की जीत में महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की गई रकम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा, “हम विधानसभा चुनाव के नतीजों से निराश हैं, लेकिन परेशान नहीं हैं। हालांकि हमें एक भी सीट नहीं मिली है, फिर भी हम सत्तारूढ़ एनडीए का विरोध करते रहेंगे।”

‘राजद की वापसी नहीं चाहते थे बिहार के लोग’
उन्होंने कहा कि पार्टी बिहार में मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने में कामयाब नहीं हो पाई। उदय सिंह ने कहा, “जनादेश यह भी साबित करता है कि लोग राजद की वापसी नहीं चाहते थे।” उन्होंने दावा किया कि बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार की ओर से महिलाओं के खातों में 40,000 करोड़ रुपये के नकद हस्तांतरण ने उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘चुनाव से पहले रिश्वत देने की कोशिश की गई’
जुन सुराज के अध्यक्ष यहां पर बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का जिक्र कर रहे थे, जिसके तहत राज्य की महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए। उन्होंने आरोप लगाया, “यह सरकार की ओर से चुनाव से पहले लोगों को रिश्वत देने की एक कोशिश थी। वोट खरीदे गए। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी नकद लाभ हस्तांतरित किए गए।”

जन सुराज नेता ने कहा, “अब हम यह देखना चाहते हैं कि सरकार राज्य की महिलाओं के खातों में शेष 2 लाख रुपये कैसे हस्तांतरित करती है।”

प्रशांत किशोर के राजनीति छोड़ने पर क्या बोली पार्टी?
यह पूछे जाने पर कि क्या प्रशांत किशोर राजनीति में सक्रिय रहेंगे, जबकि जदयू ने 25 से अधिक सीटें जीती हैं। इसके जवाब में जन सुराज नेता ने कहा, “आपको यह सवाल किशोर से ही पूछना चाहिए।” किशोर ने पहले दावा किया था कि अगर नीतीश कुमार की जदयू 25 से अधिक सीटें जीतती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। विधानसभा चुनाव में जदयू को 85 सीटें मिलीं।

शतक के साथ गुरु के अंदाज को किया गलत साबित

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नई दिल्ली: राइजिंग स्टार्स एशिया कप में वैभव सूर्यवंशी शतक जमाएंगे, इस बात पर तो उनके गुरु को पूरा भरोसा था. उन्होंने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले इसे लेकर TV9 हिंदी से बातचीत में बताया भी था. यहां तक कि उन्होंने अनुमान भी लगाया था कि वैभव सूर्यवंशी कितनी जल्दी शतक लगा देंगे? लेकिन, क्या पता था कि वैभव सूर्यवंशी अपने गुरु के लगाए अनुमान से भी तेज निकलेंगे? उनके आगे गुरु का लगाया कयास भी फेल हो जाएगा. गुरु यानी कोच मनीष ओझा. वैभव जब 8 साल के थे, तभी से मनीष ओझा से क्रिकेट की कोचिंग ले रहे हैं.

वैभव सूर्यवंशी के शतक को लेकर गुरु का अनुमान
राइजिंग स्टार्स एशिया कप के शुरू होने से पहले TV9 हिंदी ने मनीष ओझा से बात की. जब हमने उनसे पूछा कि क्या वो इस टूर्नामेंट में वैभव के बल्ले से शतक देखते हैं? तो उनका जवाब था हां. मगर सिर्फ हामी भरकर ही मनीष ओझा नहीं रुके. उन्होंने अपने भरोसेमंद शिष्य यानी वैभव सूर्यवंशी को लेकर कहा 100 रन क्या, वो 100 से ज्यादा भी बनाएंगे. और, जिस मैच में वो ऐसा करेंगे, उसमें 12 से 13 ओवर तक ये काम कर देंगे.

इंडिया की जर्सी में पहला T20 खेलते हुए छाए वैभव
अपने गुरु और कोच मनीष ओझा की बातों को वैभव सूर्यवंशी ने जैसे सुन ही लिया था, तभी तो उन्होंने बिना इंतजार कराए राइजिंग स्टार्स एशिया कप के पहले ही मैच में शतक जड़ दिया. और, सिर्फ शतक जड़ा नहीं बल्कि अपने कोच की कही कुछ बातों को सच कर दिखाया तो कुछ मामले में उनके लगाए अनुमान भी फेल कर दिए.

वैभव सूर्यवंशी ने UAE के खिलाफ खेले पहले मैच में 15 छक्के और 11 चौके के साथ 42 गेंदों पर 144 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने अपना शतक 32 गेंदों में पूरा किया था. किसी भी लेवल पर इंडिया की जर्सी में वैभव सूर्यवंशी का ये ना सिर्फ पहला T20 मैच था. बल्कि, उसमें लगाया पहला शतक भी था. सीधे शब्दों में कहें तो उन्होंने नीली जर्सी में अपनी डेब्यू T20 इनिंग में ही शतक जड़ा था.

वैभव सूर्यवंशी ने गुरु के लगाए अनुमान को किया फेल
अब ऐसा कर वैभव सूर्यवंशी ने अपने गुरु यानी मनीष ओझा की किन बातों को सच और किस अनुमान को गलत साबित किया, आइए जानते हैं? कोच मनीष ओझा ने जो कहा कि वैभव 100 नहीं 100 से ज्यादा रन मारेंगे, वो बात तो 16 आने सही साबित हुई. लेकिन, 12 से 13 ओवर में वैभव के शतक लगाने को लेकर लगाया उनका अनुमान फेल हो गया. क्योंकि, वैभव सूर्यवंशी गुरु के लगाए अनुमान से भी तेज निकले. उन्होंने 10वें ओवर में ही अपना शतक पूरा कर लिया था.

आदिवासियों के ‘धरती आबा’ जिनकी दहाड़ से अंग्रेज भी खाते थे खौफ, जानिए उनका शौर्य गाथा!

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Birsa Munda 150th Birth Anniversary: 15 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसे महानायक के नाम दर्ज है, जिसने महज़ 25 साल की छोटी उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी. हम बात कर रहे हैं आदिवासियों के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा की, जिनकी आज 150वीं जयंती है.

इस विशेष अवसर पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी गुजरात के नर्मदा जिले में याहामोगी देवमोगरा धाम में कुलदेवी पंडोरी माता की पूजा करने पहुंचे हैं. यह वही क्षेत्र है जहां जनजातीय समुदाय बिरसा मुंडा को अपनी आस्था और संघर्ष का प्रतीक मानता है.

केंद्र सरकार ने बिरसा मुंडा के सम्मान में 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है. इस साल राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में आयोजित किया जा रहा है. नर्मदा जिले का यह क्षेत्र, जहां पीएम पूजा-अर्चना कर रहे हैं, स्वयंभू याहा पंडोरी देवमोगरा माता का धाम है. यह देवी गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी समुदायों के लिए कुलदेवी हैं.

क्यों हुआ था पहला महासंग्राम?
बिरसा मुंडा की कहानी 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों के पहले बड़े महासंग्राम यानी ‘उलगुलान’ से शुरू होती है. 1789 से 1820 के बीच, छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा आदिवासियों में विद्रोह की आग सुलग रही थी, जिसका मुख्य कारण था ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर अंग्रेजों की चोट.

खुंटकट्टी व्यवस्था मुंडाओं की वह पारंपरिक संस्था थी, जिसके तहत एक ही किल्ली यानी कुल के सभी परिवार मिलकर जंगल साफ करके जमीन को खेती योग्य बनाते थे और उस पर सामूहिक अधिकार रखते थे. अंग्रेजों ने इस पारंपरिक स्वामित्व को खत्म करने की दमनकारी नीतियां लागू कीं. उनकी ‘बांटो और राज करो’ की नीति ने आदिवासियों को ज़मीन और जंगल से बेदखल करना शुरू कर दिया, जिससे नफरत और आक्रोश बढ़ता गया.

स्कूल से निकाले गए बिरसा
1875 में उलिहातू गांव में सुगना मुंडा और कर्मी मुंडा के घर जन्मे बिरसा का बचपन संघर्षों में बीता. शुरुआती दौर में उनके परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने मिशनरी स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उनका मोहभंग हो गया.

बिरसा ने पहचान लिया कि ईसाई मिशनरियां भी आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा करने की साज़िश में शामिल हैं. मिशनरियों की आलोचना करने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. युवा बिरसा ने इसके बाद सरदार आंदोलन में हिस्सा लिया और नारा दिया, “साहब-साहब एक टोपी है.” इसका अर्थ था कि सभी गोरे एक जैसे हैं और सब सत्ता की टोपी पहने हुए हैं.

जब बिरसा बन गए ‘धरती आबा’
साल 1891 से 1896 के बीच बिरसा ने ईसाई धर्म छोड़कर, धर्म, दर्शन और नीति का गहन ज्ञान प्राप्त किया. उन्होंने आंदोलन के साथ-साथ उपदेश देना भी शुरू किया, जिससे बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयायी बन गए. उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग उन्हें ईश्वर का दूत और भगवान मानने लगे. उनके अनुयायी ‘बिरसाइत’ कहलाए. इस तरह, बिरसा मुंडा आदिवासियों के बीच ‘धरती आबा’ के रूप में पूजे जाने लगे.

महाविद्रोह की घोषणा
अगस्त 1895 में वन संबंधी बकाये की माफी के लिए बिरसा ने चाईबासा तक यात्रा की, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी मांग ठुकरा दी. इस अपमान के बाद बिरसा ने वह ऐतिहासिक ऐलान किया जिसने क्रांति की शुरुआत की, “सरकार खत्म. अब जंगल-जमीन पर आदिवासियों का राज होगा.” उन्होंने बुलंद आवाज़ में नारा दिया, “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” जिसका मतलब है, “हमारे देश पर हमारा राज होगा.” यह नारा अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया.

गिरफ्तारी और जेल से रिहाई
बिरसा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार करने की कई बार कोशिश की. आखिरकार, 24 अगस्त 1895 को पुलिस अधीक्षक मेयर्स के नेतृत्व में पुलिस ने रात में बिरसा को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें रांची जेल ले जाया गया और बाद में हजारीबाग जेल भेजा गया. उन पर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोगों को भड़काने का आरोप लगा और उन्हें 2 साल की सज़ा सुनाई गई.

1897 में झारखंड में भयानक अकाल और चेचक की महामारी फैली. इसी दौरान, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की डायमंड जुबिली के समारोहों का आयोजन हो रहा था. इस अवसर पर देश के कई आंदोलनकारियों के साथ बिरसा मुंडा को भी रिहा कर दिया गया.

30 नवंबर, 1897 को जेल से छूटने के बाद बिरसा सीधे चलकद लौटे. उन्होंने सबसे पहले अकाल और महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा शुरू की. इसके साथ ही, वह गुप्त रूप से राजनीतिक सभाएं करने लगे, जिससे एक नए और बड़े आंदोलन की जमीन तैयार होने लगी.

जब बिरसा ने छेड़ा हथियारबंद संघर्ष
अंग्रेज़ सरकार समझ चुकी थी कि बिरसा मुंडा को रोकना आसान नहीं है. जनवरी 1900 में, पुलिस और सेना ने बिरसा की तलाश में पोड़ाहाट के जंगलों तक को छान मारा. सरकार ने बिरसा की सूचना देने वाले के लिए इनाम घोषित कर दिया, लेकिन आदिवासियों ने अपने ‘भगवान’ के बारे में एक शब्द भी नहीं बताया.

इसके बाद बिरसा ने सीधे हथियारबंद संघर्ष का ऐलान कर दिया. यह इतिहास में उलगुलान के नाम से दर्ज हुआ. बिरसा की अगुवाई में लगभग 60 जत्थों ने एकसाथ हुकूमत के ठिकानों, सरकारी कार्यालयों और गिरजाघरों पर धावा बोल दिया. चक्रधरपुर और पोड़ाहाट जैसे इलाकों में अंग्रेज़ों के आवासों में आग लगा दी गई.

इस महासंग्राम का सबसे भीषण रूप 8 जनवरी, 1900 को डोम्बारी पहाड़ियों पर दिखा. सेना ने बिरसाइत जत्थों को चारों ओर से घेर लिया. विद्रोहियों ने ज़ोरदार दहाड़ लगाई, “गोरो, अपने देश वापस जाओ.” फौज और विद्रोहियों के बीच हुई इस खूनी जंग में लगभग 200 मुंडा शहीद हो गए, लेकिन बिरसा अंग्रेजों के हाथ नहीं आए.

जेल में रहस्यमयी मौत
अंग्रेज़ी हुकूमत के लिए बिरसा मुंडा को पकड़ना इज़्ज़त का सवाल बन गया था. आखिरकार, 3 फरवरी, 1900 को एक जंगल में बने शिविर में सोते वक्त अंग्रेज़ों ने बिरसा को पकड़ लिया. उन्हें तत्काल खूंटी के रास्ते रांची कारागार में बंद कर दिया गया. बिरसा के साथ ही करीब 500 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया.

मुकदमे की सुनवाई चल रही थी. 20 मई, 1900 को बिरसा को कोर्ट ले जाया गया, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. अगले 10 दिन तक यही खबर आती रही कि बिरसा बीमार हैं. और फिर, 9 जून, 1900 की सुबह अचानक यह खबर आई कि हैजे की वजह से बिरसा मुंडा की मौत हो गई.

हालांकि, कई इतिहासकारों और आदिवासियों का मानना है कि अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें जेल में धीमा जहर दिया था, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती गई और उनकी मृत्यु हो गई.

25 की उम्र में अमर हुए ‘भगवान’ बिरसा
महज 25 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले बिरसा मुंडा अपनी छोटी सी ज़िंदगी में इतना बड़ा संघर्ष करके गए कि आज भी वह भारत के जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं. उनका नारा ‘अबुआ दिसुम, अबुआ राज’ आज भी जंगल-ज़मीन के अधिकार की लड़ाई में एक मशाल की तरह जलता है. बिरसा मुंडा सही मायने में आदिवासियों के ‘भगवान’ और भारत के सच्चे ‘धरती आबा’ हैं.

दबंग टूर से पहले सलमान खान का वर्कआउट वीडियो वायरल, बच्चों ने घेरे रखा सुपरस्टार को

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मुंबई: सलमान खान ‘बिग बॉस 19’ की होस्टिंग को ब्रेक देकर दबंग टूर पर निकल पड़े हैं। उनकी जगह शो को अब रोहित शेट्टी होस्ट कर रहे हैं। दबंग टूर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इन वीडियो में उनके लिए फैंस की दीवानी साफ नजर आ रही है। साथ ही दबंग टूर की तैयारियों सलमान खान भी खूब पसीना बहा रहे हैं। जानिए, इन वायरल वीडियो में क्या खास दिखा। 

बच्चे हाथ मिलाने को बेताब दिखे
सोशल मीडिया पर सलमान खान का एक वीडियो वायरल है, जिसमें बच्चों की भीड़ एक्टर को देखकर एक्साइटेड नजर आई। बच्चे सलमान का नाम पुकारते दिखे, साथ ही भाईजान से हाथ मिलाने को भी बेताब नजर आए। सलमान ने भी बच्चों को निराश नहीं किया और सबसे हाथ मिलाने की कोशिश की। सलमान ने बच्चों को ‘हैप्पी चिल्ड्रेंस डे’ भी कहा। 

सलमान ने डांस रिहर्सल का वीडियो पोस्ट किया 
सलमान खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह दबंग टूर के लिए डांस रिहर्सल कर रहे हैं। इस डांस रिहर्सल में तमन्ना भाटिया, जैकलीन फर्नांडिस भी दिखीं, दोनों एक्ट्रेस अपनी स्टेज परफॉर्मेंस की तैयारियां कर रही हैं। मनीष पॉल को भी स्टेज पर देखा गया, वह दबंग टूर के प्रोग्राम को होस्ट करेंगे। 
 
सलमान खान का करियर फ्रंट 
सलमान खान के करियर फ्रंट की बात करें वह एक फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवां’ कर रहे हैं। इस फिल्म में वह एक आर्मी ऑफिसर के रोल में नजर आएंगे। फिल्म की काफी शूटिंग सलमान खान कर चुके हैं।

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पंत का स्टाइल स्टेटमेंट और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, वीरू का रिकॉर्ड हुआ पीछे

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नई दिल्ली: साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ऋषभ पंत की टीम इंडिया में फिर से वापसी हुई है. इससे पहले वो पैर की इंजरी को लेकर बाहर थे. टीम में वापसी के बाद ऋषभ पंत जब अपनी पहली इनिंग खेलने कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर उतरे तो दो डिजाइन के जूते पहने नजर आए. दोनों पैरों में अलग-अलग डिजाइन के जूते वाली ऋषभ पंत की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर छा चुकी है. दो डिजाइन के जूते पहनकर छाए पंत ने ईडन गार्डन्स पर अपनी पहली इनिंग के दौरान वीरेंद्र सहवाग का बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ा.

ऋषभ पंत का जूता बना चर्चा का विषय
शुभमन गिल के रिटायर्ड हर्ट होने के बाद ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे थे. उनके मैदान पर उतरते ही उनका जूता चर्चा का विषय बन गया. ऋषभ पंत का एक जूता आगे से काले रंग का था. वहीं दूसरे जूते में ऐसा नहीं था. वो सफेद ही था. पंत ने काले रंग का जूता अपने उसी पैर पहन रखा था, जिसकी इंजरी से उबरकर वो लौटे थे. हो सकता है वो जूता पंत के उस पैर को ही ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

दो डिजाइन के जूते में बनाया भारतीय रिकॉर्ड
दो डिजाइन के जूते पहनकर ईडन गार्डन्स पर खेलने उतरने वाले ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ा है. ऋषभ पंत ने कोलकाता टेस्ट की पहली पारी में 24 गेंदों का सामना कर 27 रन बनाए, जिसमें 2 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. इसी इनिंग के दौरान ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग को पीछे छोड़कर भारतीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

पंत ने सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ा
ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग का कायम किया जो रिकॉर्ड तोड़ा है, वो टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्कों का है. वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट में 90 छक्के लगाए थे. ऋषभ पंत भी कोलकाता टेस्ट से पहले तक 90 छक्कों के साथ सहवाग की बराबरी पर थे. ऐसे में ईडन गार्डन्स पर अपनी इनिंग का पहला छक्का लगाते ही पंत ने सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ दिया. उनके नाम अब कुल 92 छक्के टेस्ट में दर्ज हैं, जो कि एक नया भारतीय रिकॉर्ड है.

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बागेश्वर बाबा की पदयात्रा में जया किशोरी हुईं शामिल, 9वें दिन मथुरा में पड़ा पड़ाव

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मथुरा।   बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 10 दिवसीय पदयात्रा जारी है. इस पदयात्रा में कथावाचक जया किशोरी भी शामिल होने के लिए पहुंची. मथुरा में पहुंची सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 में जया किशोरी के अलावा कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, चिन्मयानंद बापू समेत कई कथावाचक और साधु-संत भी शामिल होने के लिए पहुंचे.

बाबा बागेश्वर की पदयात्रा का 9वां दिन आज

बाबा बागेश्वर की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0 का आज 9वां दिन है.  दिल्ली के छतरपुर स्थित कात्यायनी माता मंदिर से शुरू हुई यह पदयात्रा अब अंतिम पड़ाव की ओर है. 16 नवंबर को यह यात्रा वृंदावन में समाप्त हो जाएगी. आज 9वें दिन यह यात्रा मथुरा के अखबरपुर स्थित एस के एस कॉलेज के सामने रुकेगी. इसके बाद राधा गोविंद जी मंदिर, जैंत में रात्रि विश्राम के लिए यात्रा ठहरेगी.

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कामिनी कौशल को दी अंतिम विदाई, सोशल मीडिया पर अंतिम संस्कार का वीडियो बना चर्चा का विषय

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मुंबई: कामिनी कौशल हिंदी सिनेमा की सबसे जानी-मानी अभिनेत्रियों में से एक थीं। शुक्रवार को 98 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है। आज यानी शनिवार को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार हो गया। लेकिन अंतिम संस्कार से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर यूजर्स कुछ नाराज दिखे। आखिर ऐसा क्या हुआ, अंतिम संस्कार में? जानिए। 

परिवार ने दी अंतिम विदाई 
कामिनी कौशल का अंतिम संस्कार 15 नवंबर 2025 यानी आज मुंबई के डॉ. मोसेस रोड के वर्ली शमशान घाट में 10.30 बजे हुआ। उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा परिवार साथ नजर आया। साथ ही कामिनी कौशल के पेट डॉग्स काे भी उनके अंतिम दर्शन परिवार वालों ने कराए। उनका अंतिम संस्कार विद्युत (इलेक्ट्रिक) शवदाह में किया गया है। 

वायरल वीडियो देखकर यूजर्स ने किए सवाल? 
सोशल मीडिया पर कामिनी कौशन के अंतिम संस्कार से जुड़े कुछ वीडियो मौजूद हैं। जिन्हें देखकर यूजर्स एक बड़ा सवाल कर दिया। बताते चलें कि वीडियो में कामिनी कौशल के परिवार से जुड़े सदस्य अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे थे, एक-दूसरे के गले भी मिल रहे थे। इस पर कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि ये लोग मुस्कुरा क्यों रहे हैं? एक यूजर ने लिखा, ‘ऐसे वक्त पर हंसी आ रही है इन्हें।’ इसी तरह के कमेंट्स कई यूजर्स ने किए हैं। लोगों को हैरानी हो रही है कि अपने प्रियजन के निधन पर कोई मुस्कुरा कैसे सकता है।  

लंबे वक्त तक अभिनय में रहीं सक्रिय
कामिनी कौशल ने साल 1946 में फिल्म ‘नीचा नगर’ नगर से करियर की शुरुआत की थी। फिल्म ‘नीचा नगर’ का पहला प्रदर्शन 29 सितंबर 1946 को फ्रांस के कान अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में हुआ। वहां इस फिल्म को ‘गोल्डन पाम’ पुरस्कार मिला। यह चेतन आदर्श के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। 20 साल की उम्र में वे स्टारडम के शिखर पर पहुंच गई थीं। करियर की दूसरी पारी में वे अभिनेता मनोज कुमार की ऑन स्क्रीन मां के रूप में चर्चित रहीं। उन्होंने शहीद (1948), नदिया के पार (1948), आग (1948), जिद्दी (1948),  शबनम (1949), आरजू (1950) और बिराज बहू (1954) जैसी हिट फिल्में की थीं। ‘बिराज बहू’ के लिए उन्हें 1954 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। कामिनी कौशल ने हर दौर के सितारों के साथ काम किया है। फिल्म ‘कबीर सिंह’ में वे शाहिद कपूर की दादी के रूप में नजर आईं। वहीं, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में उन्हें शाहरुख खान की दादी के रोल में देखा गया। साथ ही कामिनी कौशल ने आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में भी अभिनय किया था।

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कौन हैं CM मोहन यादव की छोटी बहू? अभिमन्यु यादव लेंगे सामूहिक विवाह में 7 फेरे

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भोपाल।  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे अभिमन्यु नवंबर के महीने में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. वह इशिता यादव के साथ 30 नवंबर को सामूहिक विवाह सम्मेलन में सात फेरे लेंगे. जानिए कौन हैं CM डॉ. मोहन यादव की छोटी बहू इशिता यादव.

CM मोहन यादव के बेटे की शादी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु 30 नवंबर को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. अभिमन्यु उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में इशिता यादव के साथ 7 फेरे लेंगे. दोनों की सगाई इसी साल जून के महीने में हुई थी.

कौन हैं CM मोहन यादव की छोटी बहू?

CM मोहन यादव की छोटी बहू इशिता यादव खरगोन जिले के सेल्दा गांव की रहने वाली हैं. वह किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इशिता यादव भी पेशे से डॉक्टर हैं. साथ ही PG की पढ़ाई भी कर रही हैं. उन्होंंने MBBS की पढ़ाई पूरी कर ली है. उनके पिता दिनेश यादव इलाके के बड़े किसान माने जाते हैं.

क्या हैं अभिमन्यु?

बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तीन संतानें हैं. उनके दो बेटे और एक बेटी हैं. बेटी डॉ. आकांक्षा और बड़े बेटे की शादी हो चुकी है. वहीं. उनके छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु एक कुशल सर्जन हैं और समाजसेवा में भी सक्रिय रहते हैं.

इशिता से CM मोहन यादव की बेटी का खास रिश्ता

CM मोहन यादव की होने वाली छोटी बहू इशिता से उनकी बेटी डॉ. आकांक्षा का खास रिश्ता है. दरअसल, आकांक्षा की शादी दिनेश यादव के बेटे डॉ. आयुष से हुई है. यानी इशिता उनकी ननद भी हैं. बता दें कि CM मोहन यादव की बेटी डॉ. आकांक्षा गायनोकॉलॉजिस्ट डॉक्टर हैं.

9,700 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास आज

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार यानी 15 नवंबर को गुजरात का दौरा करेंगे.पीएम मोदी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे. वह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे. इसके लिए पीएम मोदी नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा भी जाएंगे. इस यात्रा के दौरान वो 9,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. ये परियोजनाएं आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत से जुड़ी हुई रहेंगी.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, पीएम मोदी सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा करेंगे. साथ ही वो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे. यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है. इसमें देश की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की दिशा में आगे बढ़ाने के लिहाज से काफी अहम है.

यहां एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है. इसमें 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है. यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा. ये भारत के परिवहन बुनियादी ढांचे में एक बड़े बदलाव का कदम होगा.

85 प्रतिशत पुलों का इस्तेमाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में 85% रास्ता (465 किमी) पुलों पर बनाया जा रहा है. इससे जमीन कम इस्तेमाल होगी और सुरक्षा ज्यादा रहेगी. इस प्रोजेक्स के 326 किमी पुल बन चुके हैं, 25 में से 17 नदी पुल तैयार हो गए हैं. एक बार चालू हो जाने पर, बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे तक कम कर देगी, जिससे शहर-शहर के बीच सफर आसान और ज्यादा आरामदायक रहेगा. इस परियोजना से कॉरिडोर पर व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है.

ये लगभग 47 किलोमीटर लंबा सूरत-बिलिमोरा खंड, निर्माण के अंतिम चरण में है. यहां सिविल कार्य और ट्रैक बिछाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सूरत स्टेशन का डिजाइन शहर के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग से प्रेरित है. ये इसकी भव्यता और कार्यक्षमता दोनों को दर्शाता है. स्टेशन में विशाल प्रतीक्षालय, शौचालय, खुदरा दुकानें हैं और यह सूरत मेट्रो, सिटी बसों और भारतीय रेलवे के साथ निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करता है.

दोपहर बाद, प्रधानमंत्री नर्मदा जिले के देवमोगरा मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे. फिर वो बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम के लिए डेडियापाड़ा जाएंगे. इस कार्यक्रम के दौरान, वे आदिवासी समुदायों के उत्थान और ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार के उद्देश्य से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे.

‘कांग्रेस मुट्ठीभर लोगों के हाथों में कैद’ — मुमताज पटेल का बड़ा हमला

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नई दिल्ली।  बिहार में महागठबंधन की करारी हार के बाद जहां राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवा उठाए, तो वहीं कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कांग्रेस मुट्ठीभर लोगों के हाथों में कैद है. शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाया है. उन्होंने पूछा कि कब तक कांग्रेस का वफादार कार्यकर्ता इंतजार करे? इसके अलावा बिहार कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह और शकील अहमद ने भी हार के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने कहा, “जब हमें पता है कि हम एक ऐसी व्यवस्था से लड़ रहे हैं जो इतनी शक्तिशाली है, जिसका पूरा नियंत्रण है, तो जाहिर है कांग्रेस पार्टी को सतर्क रहना होगा. जमीन से वाकिफ लोगों को मौका ही नहीं दिया जाता. फैसले लेने का काम चंद लोगों के हाथों में सिमट जाता है. कांग्रेस पार्टी के देश भर में ऐसे कार्यकर्ता हैं, जो जीत हो या हार, मैं हमेशा कहती हूं कि दिल से कांग्रेसी हैं. लेकिन उन्हें कोई पूछता नहीं, कोई मानता नहीं, और उन्हें कोई पद या अधिकार नहीं दिया जाता. हमारी पार्टी में भी, अगर हम लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं, अगर हम लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं, अगर हम चुनावी प्रक्रिया बचाने की बात करते हैं, तो हमारी अपनी पार्टी में भी सत्ता चंद लोगों के हाथों में सिमट जाती है, और उन्हीं लोगों को बार-बार इनाम मिलता है.“किसी भी तरह की कोई जवाबदेही नहीं है, और आप असली कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल नहीं करते, आप उनसे पूछते भी नहीं, आप उन्हें पहचानते भी नहीं और मैं यह भी कहना चाहूंगी कि अगर चुनावी प्रक्रिया भ्रष्ट है, तो या तो पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए और कहते हैं कि हम चुनावों का बहिष्कार करेंगे. कांग्रेस पार्टी को लोगों का दिल और विश्वास फिर से जीतना होगा. राहुल गांधी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि हमारी पार्टी के भीतर सत्ता का दुरुपयोग करने वाले कुछ लोग जो सत्ता का दुरुपयोग करते हैं, वही हमारी पार्टी को बार-बार हार का सामना करवा रहे हैं.”

राहुल गांधी ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल

वहीं, बिहार में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कहा, “बिहार का यह परिणाम वाकई चौंकाने वाला है. हम एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था. यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है. कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन इस परिणाम की गहराई से समीक्षा करेंगे और लोकतंत्र को बचाने के अपने प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे.”

अखिलेश प्रताप ने ‘फ्रेंडली फाइट’ को बताया नुकसान

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने ‘महागठबंधन’ की हार के लिए RJD के रणनीतिकार संजय यादव और कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को जिम्मेदार ठहरा दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सीट शेयरिंग में देरी और कई जगहों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ ने महागठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया है. वहीं शकील अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फलां व्यक्ति ने गलत कारणों से टिकट बांटे हैं. हालांकि उन्होंने उसका नाम नहीं लिया.