ममता बनर्जी ने SIR को बताया ‘खतरनाक’, चुनाव आयोग को लिखा पत्र

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SIR In Bengal: पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) शुरू की गई है. बिहार के बाद अब बंगाल में भी यह अभियान तेज हुआ है, लेकिन इसके चलते राजनीतिक विवाद गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने की मांग की है.

CM ममता ने लगाए ये आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने तीन पन्नों के पत्र में आरोप लगाया कि बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) पर असहनीय कार्यभार डाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि BLO घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं और उन पर “अमानवीय दबाव” बनाया जा रहा है. ममता ने लिखा कि कर्मचारियों को सहायता देने, समय-सीमा बढ़ाने या खामियों को दूर करने के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग धमकी भरे रवैये के साथ काम कर रहा है.

जलपाईगुड़ी का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि जलपाईगुड़ी के मालबाजार में एक महिला BLO अपने घर में मृत मिली थीं. परिवार का आरोप है कि वह SIR के दबाव से तनाव में थीं. इससे पहले केरल और राजस्थान में भी BLO के आत्महत्या करने की खबरें आ चुकी हैं. ममता ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना पर दुख जताया और इसे प्रणालीगत विफलता बताया.

SIR प्रक्रिया को बताया खतरनाक

अपने पत्र में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से अपील की कि SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए, BLO को पर्याप्त प्रशिक्षण और सहायता दी जाए, और इस पूरी कवायद की समीक्षा की जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया अनियोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक है, जिससे अधिकारी और आम नागरिक दोनों परेशान हो रहे हैं. ममता ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में शुरुआत से ही यह अभियान लड़खड़ा गया है.

EC का आया जवाब

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया है कि BLO को दिल्ली में आयोग के ट्रेनिंग सेंटर और राज्य के CEO कार्यालय द्वारा पूरी ट्रेनिंग दी गई है. आयोग ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की चिट्ठी का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और जल्द विस्तृत जवाब देगा. साथ ही यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर BLO की मदद के लिए अतिरिक्त अधिकारी तैनात किए जा सकते हैं, जैसे बिहार में जीविका दीदी और वॉलंटियर्स को जोड़ा गया था.

दिव्या–मुकेश भट्ट विवाद सुर्खियों में, कॉल बातचीत लीक होने से बढ़ा मामला

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बॉलीवुड |  बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या खोसला कुमार अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। उन्होंने कुछ समय पहले आलिया भट्ट की फिल्म ‘जिगरा’ को लेकर बयान दिया था कि वह उनकी फिल्म ‘सावी’ से मिलती-जुलती है। अब एक बार फिर वह चर्चा में आ गई हैं। अब दिव्या ने बात बढ़ने पर प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।

दिव्या ने आलिया की फिल्म ‘जिगरा’ को सावी की कॉपी बताया था। मुकेश भट्ट ने कहा कि यह उनका पब्लसिटी स्टंट था। आलिया को कॉपी करने की जरूरत नहीं है। मुकेश के इस बयान पर दिव्या खोसला भड़क गईं और उन्होंने प्रोड्यूसर संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो लीक कर दिया है।

दिव्या ने लीक किया मुकेश भट्ट संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो 

ऑडियो में दिव्या मुकेश भट्ट से पूछती हैं कि सर आपने सावी और जिगरा विवाद पर मेरे खिलाफ बात क्यों की? क्या आपने ऐसा कहा कि मैंने कोई छिछोरी हरकत की। यह सब पब्लिसिटी स्टंट के लिए मैंने किया है? मुकेश ने कहा, ‘मैंने इस बारे में किसी से कोई बात नहीं की और ना ही किसी ने मुझसे कुछ पूछा। यह सब प्लानिंग की गई है। मैं ऐसी हरकत क्यों करूंगा। यह चीज तुम्हारे बर्थडे के दिन ही क्यों हुआ। इस चीज से मेरे और तुम्हारे रिलेशनशिप में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तुम तो मुझे जानते हो। तुम किसी की बातों में मत आना। आप मुझे जानते हैं मैं ऐसा क्यों करूंगा।

इस ऑडियो को शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, ‘मैं इस खुलासे से गहरे सदमे में हूं। मुझे जो पता चला है वह बहुत ही दिल दुखाने वाला है। भारी मन से मुझे लगता है कि इस सच्चाई को जनता के सामने लाना चाहिए। खासकर उन लोगों और फैंस के लिए जिन्होंने हमारी फिल्म इंडस्ट्री में लॉबिंग और गेटकीपिंग का दंश झेला है।’

दिव्या ने आगे लिखा, ‘बदकिस्मती से मेरे पास मुकेश भट्ट और मेरे बीच हुए ऑडियो को लीक करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है ताकि लोग खुद जान सकें कि कैसे कुछ ग्रुप के लोग करियर को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। यह बर्ताव मंजूर नहीं है और इसे नॉर्मल नहीं किया जा सकता है। अब समय आ गया है कि हम आवाज उठाएं और इंडस्ट्री माफिया को सामने लाएं।’

पहली बार इतिहास बदलेगा! टीम इंडिया की हार ने पाकिस्तान को दी रणनीति में बढ़त

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क्रिकेट |  भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला गुवाहाटी में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में हार से बचना चाहेगी, लेकिन वर्ल्ड चैंपियन साउथ अफ्रीका अपनी शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए क्लीन स्वीप करना चाहेगी। टीम इंडिया के रेगुलर कप्तान शुभमन गिल इस मुकाबले में चोट की वजह से नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला जीतना और भी मुश्किल लग रहा है। अगर भारतीय टीम यह मैच हार गई, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में पाकिस्तान से भी नीचे चली जाएगी।

टीम इंडिया की हार से पाक को फायदा

आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (ICC World Test Championship) की अंक तालिका में पाकिस्तान की टीम पांचवें स्थान पर है और टीम इंडिया चौथे स्थान पर है। पाकिस्तान ने दो मैच खेले हैं और एक में जीत हासिल की है, जबकि एक में उसे हार का सामना करना पड़ा है। प्वाइंट्स के मामले में टीम इंडिया से ग्रीन आर्मी काफी पीछे है, लेकिन विनिंग परसेंटेज के मामले में वो टीम इंडिया के करीब खड़ी है। उनका जीत प्रतिशत 50 है, जबकि टीम इंडिया का जीत प्रतिशत 54 है। गुवाहाटी में हार के बाद टीम इंडिया का जीत प्रतिशत 50 हो जाएगा।

WTC के इतिहास में पहली बार होगा ऐसा!

भारतीय टीम ने अब तक आठ मैच खेले हैं, जिनमें चार में जीत हासिल की है, तीन गंवा चुकी है और एक मैच ड्रॉ रहा है। इस तरह उनका जीत प्रतिशत 54.17 होता है, लेकिन गुवाहाटी टेस्ट हारने के बाद भारतीय टीम का जीत प्रतिशत 50 हो जाएगा। पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा मैच हारने की वजह से वह अंक तालिका में पांचवें स्थान पर खिसक जाएगी। अगर ऐसा हुआ, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में पहली बार होगा जब टीम इंडिया पाकिस्तान से भी नीचे खिसक जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अब तक इस साइकल में कोई मैच नहीं गंवाया है और 100 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। वर्ल्ड चैंपियन साउथ अफ्रीका 3 में से 2 मैच जीतकर दूसरे स्थान पर है। उसका जीत प्रतिशत 66.67 है। श्रीलंका ने दो मैच में से एक में जीत हासिल की है और एक ड्रॉ रहा है। इस तरह उनका जीत प्रतिशत 66.67 है। इंग्लैंड की टीम ने पांच में से दो मैच जीते हैं और दो गंवाए हैं। उनका जीत प्रतिशत 43.33 है।

एक ही परिवार के 6 सदस्य BJP के टिकट पर चुनावी मैदान में, जानिए महाराष्ट्र निकाय चुनाव में क्या है बीजेपी की रणनीति?

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Maharashtra BJP Parivarvad: खानदानी राजनीति पर निशाना साधने वाली भाजपा ने महाराष्ट्र में सिद्ध कर दिया कि ;परिवारवाद’ सिर्फ चुनावी जुमला है. भाजपा से स्थानीय निकाय चुनाव में एक ही परिवार के 6 लोगों ने नॉमिनेट कर सबको हैरान कर दिया. भाजपा के इस परिवारवाद को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है. यहां सत्ता गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझते दिख रहे हैं.

कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माने जाने वाले नांदेड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के बीजेपी में शामिल होने के बाद चुनावी समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं. लोहा नगर परिषद में बीजेपी ने ऐसा दांव चला है जिसने इसकी चर्चा सिर्फ नांदेड़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हो रही है. क्योंकि परिवारवाद का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरने वाली भाजपा ने एक ही परिवार के 6 लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है.

एक ही परिवार में 6 लोगों को टिकट
लोहा में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए गजानन सूर्यवंशी को उम्मीदवार बनाया है. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने सूर्यवंशी परिवार के 5 और सदस्यों को भी अलग-अलग वार्डों से टिकट दे दिया. भाजपा की इस सूची में गजानन सूर्यवंशी की पत्नी, भाई, भाभी, जीजा और भतीजे की पत्नी शामिल हैं.

नॉमिनेशन वापस लेने की अंतिम डेट आज
गजानन सूर्यवंशी की पत्नी गोदावरी सूर्यवंशी ने वार्ड 7A, भाई सचिन सूर्यवंशी-वार्ड 1A, भाभी सुप्रिया सूर्यवंशी-वार्ड 8A, जीजा युवराज वाघमारे-वार्ड 7B और भतीजे की पत्नी रीना वयावरे ने वार्ड 3 से स्थानीय निकाय चुनाव में नॉमिनेशन किया है. आज 21 दिसंबर को नाम वापस लेने की अंतिम डेट है. स्थानीय निकाय के इन चुनावों के लिए 2 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे. 3 दिसंबर को वोटों की गिनती के साथ नतीजे आएंगे.

पूर्व सीएम अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर
बता दें, नांदेड़ में स्थानीय निकाय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा एमपी अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. परिणाम क्या होंगे यह तो नतीजे आने के बाद ही क्लियर हो पाएंगे. लेकिन इस चुनाव में 6 लोगों के एक ही परिवार से चुनाव लड़ने के बाद सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

विपक्ष ने साधा निशान
भाजपा द्वारा एक ही परिवार के 6 सदस्यों को टिकट दिए जाने के बाद विपक्षी दल एनसीपी अजित पवार गुट के विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधा है, उन्होंने भाजपा सांसद अशोक चव्हाण कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा को लोहा में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे, इसलिए एक घर के लोगों को प्रत्याशी बना दिया. इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है और इसका जिम्मेदार अशोक चव्हाण को जिम्मेदार ठहराया है.

ये बड़े बॉलीवुड स्टार्स थे एक्टर बनने से पहले असिस्टेंट डायरेक्टर

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बॉलीवुड | आपको हिंदी सिने जगत के कुछ ऐसे एक्टर्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय के दम पर देश-दुनिया के लोगों का दिल जीता है. लेकिन, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये एक्टर्स पहले असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं. इस लिस्ट में ऋतिक रोशन से लेकर रणबीर कपूर जैसे स्टार्स का नाम शामिल है| 

ऋतिक रोशन

‘ग्रीक गॉड’ के नाम से भी मशहूर ऋतिक रोशन ने साल 2000 की फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से ब्लॉकबस्टर डेब्यू किया था. इससे पहले ऋतिक ने ‘कोयला’ और ‘करण अर्जुन’ जैसी फिल्मों के लिए असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था. बता दें कि 90 के दशक की इन दोनों ही फिल्मों को ऋतिक के पिता और मशहूर एक्टर-डायरेक्टर राकेश रोशन ने डायरेक्ट किया था|

रणबीर कपूर

‘संजू’ और ‘एनिमल’ जैसी बेहतरीन फिल्में देने वाले रणबीर कपूर ने साल 2007 में आई फिल्म ‘सावरियां’ से अपना डेब्यू किया था. इसके डायरेक्टर संजय लीला भंसाली थे. एक्टिंग डेब्यू से पहले रणबीर ने साल 2005 की फिल्म ‘ब्लैक’ के लिए भंसाली को असिस्ट किया था. इससे पहले उन्होंने 1999 की फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ के लिए भी ये काम किया था. इसका डायरेक्शन उनके पिता और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने किया था|

वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा

वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा दोनों की ही गिनती बड़े स्टार्स में होती है. बता दें कि दोनों एक्टर ने अपना बॉलीवुड करियर बतौर एक्टर फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से किया था. ये पिक्चर साल 2012 में रिलीज हुई थी, जिसके डायरेक्टर करण जौहर थे. लेकिन, इससे पहले दोनों ने ही 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘माई नेम इज खान’ के लिए असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया था. इसका डायरेक्शन भी करण जौहर ने ही किया था|

सलमान खान

सलमान खान फिल्म ‘फलक’ के लिए बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुके हैं. 1988 की इस फिल्म में जैकी श्रॉफ लीड रोल में थे. सलमान ने फिर इसी साल ‘बीवी हो तो ऐसी’ से अपना एक्टिंग करियर शुरू किया था. वहीं 1989 की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से उन्होंने लीड एक्टर के रूप में अपनी शुरुआत की थी|

गुवाहाटी टेस्ट से बाहर हुआ साउथ अफ्रीका का तूफानी गेंदबाज, वनडे सीरीज से भी झटका

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भारत के खिलाफ गुवाहाटी टेस्ट मैच से पहले साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है. टीम के मुख्य तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा दो टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे. रबाडा को कोलकाता टेस्ट मैच से पहले ट्रेनिंग के दौरान रिब इंजरी हुई थी, जिससे वह पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं. इस वजह से मैनेजमेंट ने उन्हें दूसरे टेस्ट में नहीं खेलने की सलाह दी है. सिर्फ इतना नहीं, भारत के खिलाफ आगामी तीन वनडे मैचों की सीरीज में भी रबाडा नहीं खेल पाएंगे.

क्रिकेट साउथ अफ्रीरा ने शुक्रवार सुबह में मैच शुरू होने से एक दिन पहले रबाडा की चोट पर बयान जारी किया है. अपने इस बयान में मैनेजमेंट ने कहा, “प्रोटियाज मेडिकल टीम उनकी चोट पर कड़ी नजर रख रही है. रबाडा चोट के कारण लगातार तकलीफ में दिख रहेल थे, जिसके कारण उन्हें भारतीय दौरे से बाहर हना पड़ रहा है.”

कोलकाता टेस्ट में साउथ अफ्रीका को मिली थी जीत

बता दें कि साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम ने भारत के खिलाफ कोलकाता में जबरदस्त जीत हासिल की थी. पहले टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीका ने भारत को 30 रन से हराया था. साउथ अफ्रीका के लिए इस जीत में 8 विकेट लेने साइमन हार्मर हीरो रहे. इसके असाला मार्को यानसेन और केशव महराज ने भी अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया. वहीं पेस बॉलिंग में कॉर्बिन बॉस वियान मुल्डर ने भी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया.

 इसके अलावा गुवाहाटी में खेले जाने वाले टेस्ट मैच की बात करें तो रबाडा के बाहर होने के बाद उनके विकल्प के तौर स्क्वाड में लुंगी एनगिडी भी हैं. ऐसे में टीम इंडिया के लिए एनगिडी भी मुश्किल बन सकते हैं. क्योंकि उनके पास भी अच्छा पेस और सटीक लाइन लेंथ से वह कई बार साउथ अफ्रीकी टीम के लिए प्रभावी रहे हैं.

विदेशी हैंडलर हंजुल्लाह ने मुजम्मिल को भेजे थे बम बनाने के 42 वीडियो, जानिए क्या है पूरा मामला?

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Muzammil Foreign Handler Videos: दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, विदेशी हैंडलर आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल को बम बनाने के वीडियो भेजते थे. आतंकी मुजम्मिल वह शख्स है, जिसे विदेशी हैंडलर से एक-दो नहीं बल्कि पूरे 42 वीडियो मिले थे. मुजम्मिल पर आरोप है कि उसने आतंकी मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले एक्सप्लोसिव के स्टोरेज का इंतजाम किया था. फिलहाल, मुजम्मिल NIA की हिरासत में है, जिससे पूछताछ जारी है.

NIA अधिकारियों के अनुसार, विदेशी हैंडलर ने फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी से अरेस्ट किए गए आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई को बम बनाने की वीडियो भेजने के लिए एनक्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल किया था. जिसके जरिए कुल 42 वीडियो भेजे थे. मुजम्मिल, कार ब्लास्ट के मुख्य आरोपी आतंकी उमर का सहयोगी था. उमर ने अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक के साथ कार में खुद को उड़ा लिया था. वहीं, मुजम्मिल को NIA ने ब्लास्ट से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, जिसके पास से करीब 2900 किग्रा विस्फोटक सामग्री पकड़ी गई थी.

10 दिन की NIA हिरासत में सभी आतंकी
सूत्रों के अनुसार, तीन विदेशी हैंडलर के नाम सामने आए हैं, जिसकी पहचान ‘हंजुल्लाह’, ‘निसार’ और ‘उकासा’ के रूप में हुई है. जांच एजेंसियों को शक है कि ये उनके सही नाम नहीं है. हैंडलरों की भूमिका और पहचान के लिए जांच की जा रही है. हैंडलरों के भेजे गए वीडियो में बम बनाना सिखाया जाता था. वीडियो भेजने वाले विदेशी हैंडलर में सबसे ज्यादा नाम हंजुल्लाह का आ रहा है. हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो हंजुल्लाह ही भेज रहा था. दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को आतंकी उमर नबी के सभी सहयोगियों को 10 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है. जिसमें डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई, अदील अहमद राथर, शाहीन अंसारी और मुफ्ती इरफान शामिल है.

कमरा नंबर 13 पर रची गई थी साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 में दिल्ली धमाके की साजिश रची गई थी. यूनिवर्सिटी का कमरा नंबर 13 पुलवामा के डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई के नाम पर था. इसी कमरे में आतंकी डॉक्टर्स की मीटिंग हुआ करती थी. जबकि आतंकी उमर का अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस के अंदर कमरा नंबर 4 था.

शाहरुख–सलमान का फिर दिखा भाईचारा, साथ में घूमते दिखे, फैंस बोले: दोस्ती हो तो ऐसी!

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बॉलीवुड | एक्टर शाहरुख खान और सलमान खान इन दिनों दुनिया भर में साथ नजर आ रहे हैं। हाल ही में दोनों दिल्ली में एक शादी का हिस्सा बने थे और इससे पहले सऊदी अरब में हुए जॉय फोरम में भी साथ दिखे थे। अब उनकी नई तस्वीरें अबू धाबी के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम से सामने आई हैं, जहां दोनों सुपरस्टार्स एक साथ घूमते दिखाई दे रहे हैं और फैंस उनका यह बॉन्ड देखकर बेहद खुश हैं। इन ताजा तस्वीरों में दोनों खान अबू धाबी के म्यूजियम में डायनासोर फॉसिल्स की भव्य एग्जीबिशन के सामने पोज देते दिख रहे हैं। सलमान इस समय अपने दबंग टूर के लिए UAE में मौजूद हैं, जबकि शाहरुख म्यूजियम के विशेष VIP उद्घाटन में शामिल होने के लिए अबू धाबी पहुँचे थे। काले सूट में साथ खड़े दोनों सितारे बेहद स्टाइलिश और रिलैक्स्ड नजर आ रहे हैं।

वायरल हुईं तस्वीरें

तस्वीरें वायरल होने के साथ ही सोशल मीडिया पर फैंस की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। एक फैन ने मजाक में लिखा, ‘आजकल SRK को गौरी से ज़्यादा सलमान के साथ देख रहा हूं।’ वहीं दूसरे फैन ने शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी को याद दिलाते हुए कहा, ‘अगर SRK को सलमान के साथ पूजा से ज्यादा दिखोगे तो कुछ बात बनेगी!’ एक यूजर ने तो हंसते हुए यह भी कह दिया, ‘ये दोनों तो चिपक ही गए हैं।’ हालांकि ज्यादातर फैंस इस बात से खुश थे कि वर्षों के उतार–चढ़ाव और गलतफहमियों के बाद दोनों सुपरस्टार फिर से इतनी अच्छी बॉन्डिंग साझा कर रहे हैं।

शाहरुख–सलमान की फिल्मी दुनिया

दोनों कलाकारों ने 2023 में एक-दूसरे की फिल्मों में स्पेशल अपीरियंस दिया था। सलमान ने शाहरुख की ब्लॉकबस्टर ‘पठान’ में अपने मशहूर किरदार टाइगर के रूप में एंट्री मारी थी। उसी साल बाद में शाहरुख ने ‘टाइगर 3’ में पठान के रूप में आकर यह एहसान लौटाया। ये कैमियो YRF के स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा थे, जो भविष्य की क्रॉसओवर फिल्म ‘टाइगर vs पठान’ की नींव रखने के लिए बनाए गए थे। हालांकि, फिलहाल इस बड़े प्रोजेक्ट पर कोई नई जानकारी नहीं है।

इन फिल्मों में आएंगे नजर

आगे बात करें तो 2026 दोनों सुपरस्टार्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। सलमान अपनी अगली एक्शन फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ की शूटिंग पूरी कर चुके हैं, जिसे अपूर्व लाखिया निर्देशित कर रहे हैं और यह 2026 में रिलीज होगी। दूसरी तरफ शाहरुख खान सिद्धार्थ आनंद की ‘किंग’ में दिखाई देंगे, एक मल्टी-स्टारर प्रोजेक्ट जिसमें वह पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन साझा कर रहे हैं। यह फिल्म अप्रैल 2026 में रिलीज होने की उम्मीद है। सलमान और शाहरुख की हाल की मुलाकातों ने फैंस के लिए एक बार फिर से ‘खान ब्रदरहुड’ का जादू जगा दिया है और सभी को उनकी अगली ऑन-स्क्रीन यूनियन का बेसब्री से इंतजार है।

कप्तान शुभमन दूसरे टेस्ट से भी बाहर, मुंबई में कराएंगे इलाज—गुवाहाटी में पंत बने कप्तान

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क्रिकेट | भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली जा रही दो मैचों की टेस्ट सीरीज से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। कप्तान शुभमन गिल दूसरे टेस्ट से भी बाहर हो गए हैं। उन्हें पहले टेस्ट के दौरान बल्लेबाजी करते समय गर्दन में चोट लगी थी। इसके बाद वह पहली पारी में ठीक से बल्लेबाजी नहीं कर पाए थे और रिटायर्ड हर्ट हुए थे और फिर दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे थे। उन्हें तुरंत चेक अप के लिए ले जाया गया था। अब वह दूसरे टेस्ट से भी बाहर हो गए हैं।

बीसीसीआई सचिव ने दिया अपडेट

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने जानकारी देते हुए बताया कि, ‘टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल, जो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के दौरान गर्दन की चोट से जूझ रहे थे, वह गुवाहाटी में होने वाले दूसरे टेस्ट से बाहर हो गए हैं। गिल को कोलकाता टेस्ट के दूसरे दिन गर्दन में चोट लगी थी और दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया था। उन्हें निगरानी में रखा गया और अगले दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद 19 नवंबर 2025 को वे गुवाहाटी पहुंचे। हालांकि, वे पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं और इसी कारण वे दूसरे टेस्ट में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। आगे की जांच और इलाज के लिए अब वे मुंबई रवाना होंगे। उनकी गैरमौजूदगी में टीम की कप्तानी ऋषभ पंत करेंगे।’

भारत के लिए बड़ा झटका

भारत के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट हार गई थी। टीम 124 रन के लक्ष्य को भी नहीं हासिल कर सकी थी और 30 रन पीछे रह गई थी। तब गिल की कमी काफी खली थी। अब दूसरे टेस्ट में उनकी गैरमौजूदगी से नुकसान हो सकता है। भारत पहले ही 0-1 से पीछे है और क्लीन स्वीप का खतरा मंडरा रहा है। 

पंत पहली बार करेंगे टेस्ट में कप्तानी

पंत टेस्ट में पहली बार कप्तानी करते दिखेंगे। यह उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा मौका है। पंत पिछले टेस्ट में कुछ खास बल्लेबाजी नहीं कर सके थे। पहली पारी में वह 27 रन और दूसरी पारी में दो रन बनाकर आउट हुए थे। अब वह अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को जीत दिलाकर सीरीज में वापसी कराना चाहेंगे। यह भारत के लिए अहम मुकाबला है। गिल की जगह साई सुदर्शन को चौथे नंबर पर खेलने का मौका मिल सकता है। या फिर गंभीर की ऑलराउंडर वाली रणनीति के तहत नीतीश रेड्डी को भी मौका दिया जा सकता है।

केशव प्रसाद मौर्य को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी? बिहार फतह के बाद क्या होगा अगला कदम?

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Keshav Prasad Maurya: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव समय-समय पर टलता रहा है. पहले अलग-अलग प्रदेशों में प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा हुई, तो खबरें आने लगी थीं कि जल्दी ही अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. हालांकि, बिहार चुनावों तक ये प्रक्रिया टल गई. अब जबकि, बिहार चुनाव समाप्त हो गया है और एनडीए की सरकार भी बन गई है, ऐसे में बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर हलचल बढ़ने लगी है. इस रेस में एक चेहरा तेजी से उभर रहा है जो हाल में ही खत्म हुए बिहार चुनाव में बार-बार नजर आता रहा है.

यूपी के डिप्टी सीएम और बिहार में सह-प्रभारी की भूमिका में रहे केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने विधानमंडल का नेता चुनने के लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया था. बिहार चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद जिस तरह से केशव प्रसाद मौर्य ने सभी चीजों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया, उसके बाद हलचल बढ़ी हुई है. दरअसल, चुनाव बाद ऐसी खबरें आने लगी थीं कि बीजेपी अपना सीएम बना सकती है. उधर जेडीयू और अन्य सहयोगी दल नीतीश कुमार के नाम पर अड़े थे. ऐसे में बिना किसी टकराव के, बिना किसी हो-हल्ला के मौर्य ने जिस तरह से सारी चीजों को मैनेज किया, उसके बाद उनके कद में इजाफा होना लाजिमी था.

शाह के बेहद करीबी हैं मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी वर्ग के कद्दावर नेता हैं और गृह मंत्री अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं. एक कार्यक्रम में अमित शाह ने केशव प्रसाद मौर्य को अपना दोस्त भी बताया था. ऐसे में अब इस ‘दोस्त’ के राजनीतिक कद को लेकर कानाफुसी तेज हो गई है. सियासी गलियारों में तो इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि क्या केशव प्रसाद को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है? हालांकि, अभी ये बहुत शुरुआती चरण है लेकिन ऐसी चर्चाएं पहले भी हो चुकी हैं.

संघ से जुड़ाव और दिल्ली से नजदीकी

इस चर्चा के पीछे बड़ी वजह एक और है कि संघ से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है और वीएसपी से भी करीबी रही है. मौर्य का अक्सर-दिल्ली आना-जाना लगा रहता है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से टकराव की खबरों के बीच भी वे अक्सर दिल्ली में दिखाई देते थे और शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बने हुए थे. उस वक्त भी खबरें थीं कि क्या शीर्ष नेतृत्व टकराव रोकने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को दिल्ली बुला सकता है. हालांकि, टकराव की बातें केशव प्रसाद मौर्य ने कभी स्वीकार नहीं की हैं लेकिन, अलग-अलग समय पर उनका स्टैंड सीएम योगी से अलग रहा है.

बिहार चुनाव में निभाई बड़ी भूमिका

केशव प्रसाद मौर्य का नाम तेजी से उभरने के पीछे कुछ वजहें और भी हैं. बिहार के चुनावों में मिली प्रचंड में जीत में OBC-EBC वोटर्स की बड़ी भागीदारी रही. इस वर्ग के वोटर्स को एकजुट करने में केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ी भूमिका निभाई. कुर्मी वोटर्स सहित ओबीसी-ईबीसी वोट को एकजुट करने के लिए रणनीति बनाना, बिहार में दर्जनों चुनावी रैलियां करना और आखिर में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी बखूरी निभाना…ये ऐसे कुछ कारण हैं जिनके बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि केशव प्रसाद मौर्य के कद को बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, अब ये कद राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर होगा, या फिर कोई और बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी…या अभी जस की तस स्थिति बनी रहेगी, इसको लेकर आने वाले दिनों में तस्वीर कुछ और साफ हो सकती है.