दुबई एयर शो में बड़ा हादसा…भारत का तेजस फाइटर जेट क्रैश, पायलट की मौत, जानिए क्या है पूरा मामला?

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Tejas Fighter Jet Crashes: दुबई में एयर शो के दौरान शुक्रवार को बड़ा विमान हादसा हो गया. डेमो फ्लाइट के दौरान भारतीय फाइटर जेट क्रैश हो गया. तेजस के क्रैश होने का वीडियो भी सामने आया है. जिसमें साफ देखा जा सकता है कि विमान के गिरते ही आग लग गई और काले धुंए का गुबार दिखाई दिया. हादसे में पायलट की मौत हो गई.

भीड़ के सामने क्रैश हुआ तेजस

दुबई में शुक्रवार को भारतीय फाइटर जेट तेजस डेमोंस्ट्रेशन फ्लाइट के दौरान क्रैश हो गया. जानकारी के मुताबिक जब तेजस एयर शो में परफॉर्म कर रहा था, तभी दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर क्रैश हुआ. विमान हादसे के वक्त बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. एयर शो को देखने वालों में बच्चे भी शामिल थे. जिन्हें हादसे के तुरंत बाद पीछे किया गया.

इंडियन एयरफोर्स ने गहरा दुख व्यक्त किया

भारतीय वायुसेना ने तेजस क्रैश हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है. भारतीय वायुसेना ने जानकारी देते हुए बताया, ‘आज आज दुबई एयर शो में हवाई प्रदर्शन के दौरान भारतीय वायुसेना का एक तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. भारतीय वायुसेना इस दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुःख व्यक्त करती है और इस दुःख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है. दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की जा रही है.’

कई खास वजहों के कारण जाना जाता है तेजस

तेजस अपनी कई खास वजहों के कारण जाना जाता है. तेजस एक लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, और 4.5 पीढ़ी का विमान है. इसकी कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये है. ये फाइटर जेट लगभग 3000 किलोमीटर की उड़ान एक बार में भर सकता है. 1983 में तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की शुरुआत हुई थी और 2001 में तेजस ने पहली उड़ान भरी थी.

बता दें तेजस क्रैश की ये दूसरी घटना है. इसके पहले 2024 में भी घटना सामने आई थी. राजस्थान के पोकरण में युद्धाभ्यास के दौरान इंजन फेल होने के कारण तेजस क्रैश हो गया था.

मेक्सिको की फातिमा बॉश ने जीता मिस यूनिवर्स 2025 का ताज, भारत की मनिका विश्वकर्मा टॉप 30 में रह गईं”

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Miss Universe 2025: दुनिया की सबसे पॉपुलर सुंदरता प्रतियोगिता ‘मिस यूनिवर्स 2025’ का ग्रैंड फिनाले शुक्रवार को थाईलैंड में हुआ. 74वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में दुनिया भर की कई महिलाओं को पीछे छोड़ते हुए मैक्सिको की फातिमा बॉश ने मिस यूनिवर्स 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया है. इस प्रतियोगिता में भारत की युवा मनिका विश्वकर्मा ने टॉप-30 में जगह बनाई.

मैक्सिको के चौथी बार जीता ताज

मैक्सिको की फातिमा बॉश ने अपना चौथा मिस यूनिवर्स खिताब जीता है. 25 वर्षीय फातिमा ने अपनी स्मार्टनस, सुंदरता और कॉन्फीडेंस से जूरी का दिल जीत लिया. फातिमा पेशे से एक आर्किटेक्ट और मॉडल हैं. इस प्रतियोगिता में फातिमा मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोडायवर्जेंस के लिए विचारों को लेकर भी चर्चा का हिस्सा रहीं. फातिमा बॉश की यह जीत खास मानी जा रही है क्योंकि प्रतियोगिता में वे एक विवाद का हिस्सा रहीं थी. मिस यूनिवर्स के एक अधिकारी के साथ उनकी बहस हो गई थी. जिसके बाद माना जा रहा था कि उनके अंकों में कटौती की जाएगी.

मनिका विश्वकर्मा ने टॉप 30 में बनाई जगह

74वीं मिस यूनिवर्स में भारत की ओर से मनिका विश्वकर्मा ने हिस्सा लिया. युवा मनिका ने प्रतियोगिता की शानदार शुरुआत की और दुनिया भर की 100 से अधिक सुंदरियों के बीच टॉप 30 में जगह बनाने में कामयाब रहीं. हालांकि, मनिका का सफर टॉप 12 के आगे नहीं बढ़ सकीं. स्विमसूट राउंड के बाद हुए एलिमिनेशन में भारत की मनिका बाहर हो गई हैं. मनिका ने ‘नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड’ में अपने सुनहरे परिधान और भारतीय संस्कृति के शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

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News Desk

क्या डायबिटीज में गुड़ और शहद खाना सही? आयुर्वेद ने बताई सच्चाई

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हेल्थ | देश में डायबिटीज से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. इसीलिए भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाता है. अगर आप डायबिटीज से परेशान हैं, तो यह सवाल बार-बार मन में आता है कि क्या गुड़ और शहद ले सकते हैं या नहीं? बहुत लोग कहते हैं कि ये नेचुरल हैं, इसलिए चीनी से ज्यादा सुरक्षित हैं. लेकिन, सच यह है कि गुड़ और शहद भी शुगर ही हैं, बस उनका रूप और स्वाद अलग है. दोनों में ग्लूकोज और फ्रक्टोज भरपूर होता है, इसलिए ये ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं. इसी वजह से डायबिटीज वाले लोगों के लिए यह सुरक्षित नहीं माने जाते. अब सवाल है कि, क्या डायबिटीज में गुड़ और शहद लेना है सुरक्षित? आइए जानते हैं कि इस पर क्या कहता है आयुर्वेद-

गुड़ और शहद खाने से शुगर लेवल पर क्या होगा असर

डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या इंसुलिन सही से काम नहीं करता. ऐसे में जब आप गुड़ या शहद खाते हैं, तो उनका ग्लूकोज तेजी से ब्लड में घुल जाता है और शुगर लेवल बढ़ा देता है. इससे थकान, चक्कर, सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं और लंबे समय में हार्ट, किडनी और नसों पर असर पड़ सकता है. इसलिए डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि किसी भी तरह के मीठे, चाहे वह प्राकृतिक ही क्यों न हो, डायबिटीज के मरीजों को उनका सेवन नहीं करना चाहिए|

गुड़ और शहद पर क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद भी कहता है कि मीठे का सेवन संयम से करना चाहिए. शहद को योगवाहि माना गया है. यह दवाओं की ताकत बढ़ाता है, लेकिन तभी जब शरीर का पाचन ठीक हो. गुड़ को ऊर्जा देने वाला माना जाता है, लेकिन यह कफ बढ़ाता है, जो मधुमेह में अनुकूल नहीं है. इसलिए आयुर्वेद भी यही कहता है कि डायबिटीज में मीठे का सेवन करने से बचना चाहिए|

साथ में हल्की वॉक करना भी जरूरी है, ताकि ब्लड शुगर अचानक न बढ़े. अगर शहद लें तो उसे गर्म पानी, चाय या दूध में न मिलाएं, क्योंकि तेज गर्मी से इसके गुण कम हो जाते हैं. बेहतर है कि डायबिटिक-फ्रेंडली गुड़ या स्टेविया जैसे नेचुरल स्वीटनर का उपयोग करें, जो शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाते.अगर आपको मीठा खाने की इच्छा हो, तो मेथी दाना पानी, दालचीनी और तुलसी-नीम का मिश्रण ले सकते हैं. इससे आपकी क्रेविंग कंट्रोल होगी| 

SRH की नजर स्पिनर और ऑलराउंडर पर, ऑक्शन में होगी बड़ी खरीदारी

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इंडियन प्रीमियर लीग | इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए प्लेयर ऑक्शन 16 दिसंबर को होना है। अबू धाबी में आयोजित हो रहे इस ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स (64.30 करोड़) और चेन्नई सुपर किंग्स (43.40 करोड़) के बाद सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की टीम तीसरे सबसे बड़े पर्स के साथ उतरेगी। 16 खिलाड़ियों को रिटेन करने के बाद उसके पास 25.50 करोड़ रुपये बचे हुए हैं। इन पैसों में उसे 10 स्लॉट भरने हैं, जिसमें 2 स्लॉट विदेशी खिलाड़ियों के लिए है।

SRH ने किन्हें किया रिलीज?

सनराइजर्स हैदराबाद ने कप्तान पैट कमिंस, हेनरिक क्लासेन, अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों को रिटेन कर अपने कोर के बरकरार रखा है। फ्रेंचाइजी ने सीनियर तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को फुल कैश डील में लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ ट्रेड किया। वहीं लेग स्पिन जोड़ी एडम जाम्पा और राहुल चाहर को रिलीज कर दिया है। SRH ने साउथ अफ्रीका के स्टार ऑलराउंडर वियान मुल्डर का भी साथ छोड़ दिया है।

SRH किन खिलाड़ियों के पीछे भागेगी?

ऑक्शन में SRH की पहली तलाश स्पिनर्स होंगे। एडम जाम्पा और राहुल चाहर को रिलीज करने के बाद उसकी नजरें रवि बिश्नोई, वनिंदु हसरंगा और महीश थीक्षणा पर होंगी। SRH के स्क्वॉड में लेफ्ट आर्म स्पिनर हर्ष दुबे हैं। उसे कलाई के स्पिनर चाहिए। IPL 2016 की विजेता टीम को एक बेहतरीन ऑलराउंडर की भी जरूरत है।

आंद्रे रसेल, कैमरन ग्रीन और वेंकटेश अय्यर ऑक्शन में उतरने वाले हैं। SRH इन तीनों में से किसी एक को टारगेट करना चाहेगी। हालांकि इसके लिए उन्हें 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा उन्हें एक भारतीय तेज गेंदबाज खरीदना होगा। साथ ही उसे एक भरोसेमंद बल्लेबाज को अपने स्क्वॉड में जोड़ना होगा, जिसके इर्द-गिर्द सभी विस्फोटक बल्लेबाज बैटिंग कर सकें।

पिछले सीजन कैसा रहा था प्रदर्शन?

IPL 2024 का रनर-अप रहने के बाद सनराइजर्स हैदराबाद से अगले सीजन में इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी लेकिन उसने निराश किया। SRH ने अपने पहले ही मैच में 286 रन ठोककर IPL 2025 का धमाकेदार आगाज किया था। मगर इसके बाद उसकी विध्वंसक बल्लेबाजी बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई।

SRH को लगातार 4 हार का सामना करना पड़ा। आधा सीजन बीतने के बाद उसके खाते में महज 4 पॉइंट्स ही थे, जिससे उसकी प्लेऑफ की राह मुश्किल हो गई। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी और बाहर हो गई। काव्या मारन की टीम ने लगातार तीन जीत के साथ सीजन का सुखद अंत किया। वह 14 मैचों में 13 पॉइंट्स के साथ टेबल में छठे पायदान पर रही। इस बार वह पिछली गलतियों को सुधार कर ट्रॉफी का सूखा खत्म करना चाहेगी, जिसके लिए उसे ऑक्शन में सही खिलाड़ियों को पिक कर अपने स्क्वॉड को सेटल करना होगा।

IPL 2026 ऑक्शन से पहले SRH का स्क्वॉड

पैट कमिंस (कप्तान), अभिषेक शर्मा, अनिकेत वर्मा, ब्राइडन कार्स, ईशान मलिंगा, हर्ष दुबे, हर्षल पटेल, हेनरिक क्लासेन, ईशान किशन, जयदेव उनादकट, कामिंदु मेंडिस, नीतीश कुमार रेड्डी, पैट कमिंस, आर स्मरण, ट्रेविस हेड, जीशान अंसारी

राष्ट्रपति–राज्यपाल विवाद पर SC का फैसला, CM स्टालिन का तीखा बयान — क्या कहा?

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तमिलनाडु : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय को लेकर शुक्रवार को कहा कि राज्य के अधिकारों और वास्तविक संघीय ढांचे के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। स्टालिन का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आया है जिसमें उसने कहा था कि अदालत राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर कोई समयसीमा नहीं थोप सकती, लेकिन राज्यपालों के पास विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखने की “असीम” शक्तियां भी नहीं हैं।
 
राष्ट्रपति द्वारा इस विषय पर सलाह मांगे जाने पर, सीजेआई बी. आर. गवई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपनी सर्वसम्मति वाली राय में कहा कि राज्यपालों द्वारा “अनिश्चितकालीन विलंब” की सीमित न्यायिक समीक्षा का विकल्प खुला रहेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि राज्यपालों के पास लंबित विधेयकों की मंजूरी के लिए समयसीमा तय करने के वास्ते संविधान में संशोधन होने तक उनका प्रयास जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की यह राय तमिलनाडु बनाम राज्यपाल मामले में अप्रैल 2025 में दिए गए फैसले को प्रभावित नहीं करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की राय इस बात की पुष्टि करती है कि राज्य में निर्वाचित सरकार ही मुख्य भूमिका में होनी चाहिए और सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि न्यायालय की राय स्पष्ट करती है कि राज्यपाल किसी विधेयक पर फैसला लेने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकते और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान की मर्यादाओं में रहकर ही काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यपाल के पास किसी विधेयक को रद्द करने या ‘पॉकेट वीटो’ लगाने जैसा कोई चौथा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अदालत का रुख कर सकती हैं और राज्यपाल की जानबूझकर की गई देरी या निर्णय न लेने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहरा सकती हैं। स्टालिन ने 1974 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह परामर्श उतना ही प्रभावी है जितनी कानून अधिकारियों की राय होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी लड़ाई के जरिए “हमने उन राज्यपालों को भी सरकार के अनुरूप काम करने पर मजबूर किया, जो निर्वााचित सरकारों से अलग कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा, “कोई भी संवैधानिक अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।” स्टालिन ने कहा, “जब कोई उच्च पद धारी संविधान का उल्लंघन करता है, तो संवैधानिक न्यायालय ही एकमात्र उपाय होते हैं। अदालतों के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सुनिश्चित करेंगे कि हर संवैधानिक संस्थान संविधान के अनुसार ही काम करे।” उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर राज्यपाल के ‘पॉकेट वीटो’ के सिद्धांत और यह दावा खारिज कर दिया है कि राजभवन किसी विधेयक को रोककर रद्द कर सकता है

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सैफ अली खान और अक्षय कुमार की जोड़ी आ रही Haiwaan में, अलीबाग में शूटिंग शुरू

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 बॉलीवुड | बॉलीवुड इंडस्ट्री के फेमस सैफ अली खान अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। सैफ अली खान के धांसू मूवी के लिए मशहूर डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ हाथ मिलाया है। इस मूवी की शूटिंग काफी महीनों से चल रही है। खास बात यह है कि साल 2008 में आई फिल्म ‘टशन’ के बाद सैफ अली खान लगभग 17 सालों के बाद अक्षय कुमार संग काम करने जा रहे हैं। अब जो ताजा जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक प्रियदर्शन की ‘हैवान’ के नेक्स्ट शेड्यूल को मुंबई के अलीबाग में सैफ अली खान (Saif Ali Khan) शूट कर रहे हैं।

अलीबाग में शूटिंग कर रहे हैं सैफ अली खान

सैफ अली खान को हाल ही में महाराष्ट्र के समुद्र तटीय शहर अलीबाग में स्पीडबोट से आते देखा गया। सैफ अली खान को देखने के बाद लोगों ने “हैवान” के शूटिंग शेड्यूल को लेकर अटकलें लगनी शुरू कर दी हैं। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने अब बॉलीवुड हंगामा के साथ पुष्टि की है कि सैफ अली खान, प्रियदर्शन के निर्देशन में बन रही इस मूवी के अहम सीन को शूट कर रहे हैं। अलीबाग का यह शेड्यूल इसी सीन को शूट करने के लिए था।

अलीबाग में सैफ के साथ कुछ हिस्सों की शूटिंग कर रहे हैं। ये सीक्वेंस फिल्म में उनके किरदार को गढ़ने में अहम हैं। बता दें ‘हैवान’ का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस ने थेस्पियन फिल्म्स के साथ मिलकर किया है। यह 2026 में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी को बड़े परदे पर देखने के लिए फैन्स भी बेताब हैं।

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News Desk

बावुमा की भारत से बड़ी सीरीज की मांग, कहा– एशेज जैसी प्रतिद्वंद्विता हम भी डिजर्व करते हैं

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नई दिल्ली : भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चल रही दो-टेस्ट की छोटी सीरीज ने प्रोटियाज कप्तान टेम्बा बावुमा की नाराजगी को खुलकर उजागर कर दिया है। WTC चैंपियन बनने के बावजूद साउथ अफ्रीका को भारत जैसे दिग्गज के खिलाफ सिर्फ दो टेस्ट खेलने पड़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इंग्लैंड–ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें एशेज़ में पाँच मैचों की लंबी भिड़ंत का आनंद ले रही हैं। बावुमा का मानना है कि दो सबसे मजबूत रेड-बॉल टीमों के बीच इतनी छोटी सीरीज़ न तो खिलाड़ियों के साथ न्याय है, न फैंस के साथ। यह मुद्दा फिर से क्रिकेट शेड्यूलिंग और कमर्शियल प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

एशेज देखकर बढ़ी ‘जलन’ : बावुमा की साफ टिप्पणी
गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान बावुमा ने बताया कि उन्होंने सुबह ऑस्ट्रेलिया में चल रहा एशेज़ टेस्ट देखा और इस दौरान “थोड़ी जलन” महसूस की। उन्होंने कहा, “आज सुबह उठकर एशेज देखा। पाँच टेस्ट खेलते देख थोड़ा जलन हुई। वे एक-दूसरे पर हावी होंगे, और हमें सिर्फ दो मैच मिले हैं।” यह बयान साफ दिखाता है कि कप्तान इस छोटी सीरीज से खुश नहीं हैं, खासकर तब जब उनकी टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन है।

“हम इंडिया के खिलाफ बड़ी सीरीज डिजर्व करते हैं” 
बावुमा ने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में साउथ अफ्रीका को भारत के खिलाफ चार या 5 टेस्ट की सीरीज मिलेगी। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि जल्द ही हम इंडिया के खिलाफ चार टेस्ट खेलने के लिए लौटेंगे।” बावुमा के अनुसार, मजबूत टीमों के बीच लंबी सीरीज ही फैन्स को असली रोमांच देती है और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका भी।

शेड्यूल खिलाड़ियों के हाथ में नहीं 
प्रोटियाज कप्तान ने स्पष्ट किया कि टेस्ट सीरीज़ के मैचों की संख्या खिलाड़ी तय नहीं करते। यह पूरा मामला बोर्ड्स की कमर्शियल प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। एशेज, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (भारत–ऑस्ट्रेलिया), एंडरसन–तेंदुलकर ट्रॉफी (भारत–इंग्लैंड) इन सीरीज को 5 टेस्ट इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे आर्थिक दृष्टि से सबसे ‘लाभकारी’ मानी जाती हैं। इसके विपरीत भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेस्ट इंडीज या बांग्लादेश अधिकतर सीरीज केवल दो टेस्ट की होती हैं।

दो-टेस्ट सीरीज क्यों “अधूरी” लगती है?
बावुमा ने तर्क दिया कि दो मैचों की सीरीज में अक्सर परिणाम अधूरा रह जाता है, ड्रॉ सीरीज होने के चांस बढ़ते हैं और एक टीम को जीतने का वास्तविक मौका कम मिलता है। उन्होंने कहा, “चाहे सीरीज 1-1 रहे, 2-0 या 0-2, तीन टेस्ट की सीरीज हमेशा बेहतर होती है। एक टीम हावी होती है, दूसरी वापसी करती है—फैंस को असली टेस्ट क्रिकेट मिलता है।”

“हम मैदान पर अच्छा खेलेंगे, तभी चीज़ें बदलेंगी”
बावुमा ने कहा कि साउथ अफ्रीका अपनी नाराज़गी दर्शा सकता है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब वे मैदान पर शीर्ष टीमों को लगातार चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “हम बस अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं। यही दूसरे देशों को हमारे साथ ज्यादा टेस्ट खेलने के लिए आकर्षित करेगा।”

बिहार के बाद बंगाल पर BJP की नज़र, ममता दीदी को टक्कर देने की रणनीति तैयार, जानिए क्या है पूरा प्लान?

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BJP: बीजेपी कैडर की जीत की भूख और हार से लड़ने का माद्दा देखना हो तो कोई दल इस पार्टी की पुरानी फ़ितरतों को सलीके से पढ़ ले, सारा डाउट क्लियर हो जाएगा. इससे पहले की बंगाल फ़तह करने की बीजेपी की जीत की रणनीति और टार्गेट का ज़िक्र किया जाए, आप असम को याद कर लीजिए. जनसंघ से लेकर बीजेपी तक के संपूर्ण अस्तित्व में पहली बार 2016 में आकर असम में कमल खिला. यानी दशकों के संघर्ष के बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी ने असम में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. जबकि, इसके पीछे कई पीढ़ियां जीत का ख़्वाब लिए मर-खप गईं. बीजेपी के संघर्ष और संघर्ष को अगली पीढ़ी में पास-ऑन करने के जज़्बे से अन्य दलों को भी सीख लेनी चाहिए.

नए दौर की बीजेपी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में अपनी राजनीतिक हैसियत का विस्तार कर रही है. लेकिन, दो बार से लगातार पश्चिम बंगाल के क़िले को ढहाने का पुरज़ोर प्रयास बीजेपी का विफल रहा है. लेकिन, सवाल फिर से आ खड़ा है, कि क्या बीजेपी पश्चिम बंगाल में दीदी का किला इस बार के विधानसभा चुनाव में ध्वस्त कर पाएगी? जीत की ज़िद लिए बीजेपी के महारथी लगातार पश्चिम बंगाल को टार्गेट पर लिए हुए हैं। बिहार के “जंगलराज” के बाद अब अगली रणनीति पश्चिम बंगाल के “जंगलराज” पर फ़ोकस करने का है.

बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी शानदार जीत के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि बिहार की सफलता बंगाल में ‘जंगल राज’ को खत्म करने का रास्ता साफ कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी के मुख्यालय से 14 नवंबर को अपनी विजय संबोधन में स्पष्ट कहा था, “बिहार की जीत ने बंगाल में भाजपा की सफलता का मार्ग प्रशस्त किया है. मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करता हूं कि आपके समर्थन से हम राज्य में जंगल राज का अंत करेंगे.”

बिहार में भाजपा को मिली भारी सफलता ने न सिर्फ़ उसके गठबंधन सहयोगी नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) को मजबूत किया, बल्कि पूर्वी भारत में पार्टी की पकड़ को और गहरा किया। लेकिन अब फोकस 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों पर है, जो भाजपा की ‘इच्छा सूची’ में सबसे ऊपर है. 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ‘बंगाली अस्मिता’ की राजनीति ने बीजेपी को ‘बाहरी’ का ठप्पा देकर करारी शिकस्त दी थी. तब टीएमसी का नारा था- ‘बंगला निजेर मेये के चाहे’, यानी बंगाल अपनी बेटी (ममता बनर्जी) चाहता है. भाजपा के आंतरिक सूत्रों के अनुसार पार्टी की तरफ़ से यह गंभीर गलती थी कि उसने उस समय इस टैगलाइन को आक्रामक तरीके से काउंटर नहीं किया.

रणनीति: बीजेपी के डीएनए में बंगाल!
अब भाजपा अपनी जड़ों को याद दिलाने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी का दावा है कि वह पश्चिम बंगाल की ही संतान है, क्योंकि उसके संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसी राज्य से थे. भाजपा को भारतीय जन संघ का प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी बताते हुए, अभियान में बंगाली संस्कृति से विचारधारा को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. राज्य इकाई के फैसलों में बाहरी नेताओं पर कम निर्भरता रहेगी. उम्मीदवार चयन में युवा, स्वच्छ छवि वाले और शिक्षित चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी, ताकि पार्टी की इमेज मजबूत हो. चुनाव से ठीक पहले अन्य दलों से बड़े स्तर पर नेताओं को शामिल करने से भी परहेज होगा, जैसी पिछली गलतियां हुईं.

बंगाल अभियान के 10 पॉइंट तय
अभियान के 10 प्रमुख बिंदु तय हो चुके हैं. इनमें खराब कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र का ‘उपहास’ शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, जो बंगाल चुनाव प्रभारी हैं, वे लगातार मीडिया के लाइम-लाइट से दूर रहकर कोलकाता में साप्ताहिक बैठकें कर रहे हैं. 80,000 बूथों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. बंगाली पहचान को मजबूत करने के लिए ‘जय मां काली’ और ‘जय मां दुर्गा’ जैसे नारे इस्तेमाल हो रहे हैं. नए राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की नियुक्ति ऊपरी जाति और बंगाली भद्रलोक वर्ग तक पहुंच का संकेत है.

पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ेगी पार्टी
टीएमसी के पास ममता जैसी जननेत्री है, लेकिन भाजपा मुख्यमंत्री पद का चेहरा उतारने की बजाय सामूहिक नेतृत्व और मोदी पर दांव लगाएगी. महिलाओं की सुरक्षा और ‘मां-माटी-मानुष’ नारे पर टीएमसी की नाकामी उजागर होगी. अभी से स्थानीय कार्यकर्ता और नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में जनता की मदद कर रहे हैं. हेल्पडेस्क खोले गए हैं. भाजपा की यह तैयारी बंगाल में लंबे संघर्ष और राजनीतिक ज़िद की ओर इशारा करती है. बिहार की जीत ने आत्मविश्वास दिया, लेकिन ममता की मशीनरी को तोड़ना आसान नहीं. पार्टी का लक्ष्य साफ है कि अस्मिता की राजनीति को तोड़कर शासन की कमजोरियों पर हमला किया जाए.

जानिए किस सुपरस्टार ने पहले किया रिजेक्ट

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बॉलीवुड |  बॉलीवुड सुपरस्टार रणबीर कपूर अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर आज लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करते हैं. अभिनेता ने अपने 18 साल के एक्टिंग करियर में बड़ा और खास मुकाम हासिल किया है. रणबीर ने ऐसी फिल्मों में भी काम किया है जो दूसरे सुपरस्टार ने रिजेक्ट कर दी थी. आज हम आपको एक ऐसी ही फिल्म के बारे में बता रहे हैं जिसने रणबीर को उनका पहला बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया था|

यहां जिस फिल्म की बात हम आपसे कर रहे हैं वो है ‘रॉकस्टार’. ये पिक्चर 14 साल पहले सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. बॉक्स ऑफिस पर ये कोई ज्यादा बड़ी हिट तो साबित नहीं हुई थी, लेकिन फ्लॉप भी नहीं हुई थी. इसमें रणबीर के काम को काफी पसंद किया गया था. हालांकि वो इसके लिए पहली पसंद नहीं थे|

ये सुपरस्टार था ‘रॉकस्टार’ के लिए पहली पसंद 

2011 में रिलीज हुई रणबीर कपूर की रॉकस्टार का डायरेक्शन इम्तियाज अली ने किया था और उन्होंने ही इसकी कहानी भी लिखी थी. वहीं इसके प्रोड्यसूर सुनील लुल्ला और ढिल्लन मेहता थे. मेकर्स ने पहले इस पिक्चर के लिए ‘ग्रीक गॉड’ कहे जाने वाले सुपरस्टार ऋतिक रोशन को अप्रोच किया था. हालांकि रणबीर ने इस म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था. बताया जाता है कि ऋतिक को इसकी कहानी पसंद नहीं आई थी|

रणबीर ने जीते थे 2 फिल्मफेयर अवॉर्ड

ऋतिक रोशन की ना के बाद ‘रॉकस्टार’ रणबीर कपूर के पास पहुंची और उन्होंने इसके लिए हामी भर दी थी. रणबीर कपूर ने साल 2007 में ‘सांवरिया’ फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू बतौर एक्टर किया था. चार साल बाद ही उन्हें रॉकस्टार के लिए फिल्मफेयर के बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. इतना ही नहीं रणबीर ने इस पिक्चर के लिए फिल्म फेयर के बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) अवॉर्ड पर भी अपना नाम लिखाया था|

बनी थी 2011 की आठवीं सबसे कमाऊ फिल्म

रणबीर के साथ रॉकस्टार में लीड रोल में एक्ट्रेस नरगिस फाखरी नजर आई थीं. 60 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने भारत में 69 करोड़ रुपये कमाए थे और इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 109 करोड़ रुपए का रहा था. एवरेज साबित हुई रॉकस्टार 2011 की आठवीं सबसे कमाऊ बॉलीवुड फिल्म रही थी| 

गुवाहाटी टेस्ट से पहले शुभमन गिल बाहर, नंबर-4 पर बढ़ा चयन का सवाल

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क्रिकेट | साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। कप्तान शुभमन गिल गर्दन में इंजरी के चलते बाहर हो गए हैं। इसकी अधिकारिक पुष्टि भी बोर्ड की तरफ से कर दी गई है। पहले टेस्ट में बल्लेबाजी के दौरान उनकी गर्दन में जकड़न की समस्या हुई थी, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था। उम्मीद लगाई जा रही थी, कि वो गुवाहाटी टेस्ट में वापसी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। अब उनकी जगह टीम की कमान ऋषभ पंत संभालेंगे। इसकी ऑफिशियल पुष्टि भी कर दी गई है। गिल के जाने के बाद गौतम गंभीर की चिंताएं बढ़ने वाली हैं। हालांकि, उनके पास 2 और बल्लेबाजों के विकल्प हैं।

ऋषभ पंत बने भारत के 38वें कप्तान

शुभमन गिल की अनुपस्थिति में टीम इंडिया की जिम्मेदारी दूसरे टेस्ट में ऋषभ पंत संभालने वाले हैं। वो भारत के 38वें कप्तान बने हैं। गिल ने इसी साल तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी। पंत एक अहम मुकाबले में कैप्टेंसी का भार उठाने वाले हैं। पहले टेस्ट में भारत को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। साउथ अफ्रीका ने 30 रनों से हरा दिया था। अब उनके सामने सीरीज बचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस मैच में ड्रॉ होने पर भी अफ्रीका सीरीज जीत जाएगी। गिल के जाने से बल्लेबाजी भी डगमगा जाएगी।

गिल की जगह नंबर 4 पर कौन खेलेगा?

टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के सामने एक और बड़ी चुनौती है, कि शुभमन गिल के सामने नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने कौन आएगा? जवाब में हम आपको बता दें, कि टीम में साईं सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और नीतीश कुमार रेड्डी शामिल हैं। नीतीश का खेलना इस मुकाबले में लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन, वो 4 पर खेलेंगे या नहीं, यह सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि, पडिक्कल और सुदर्शन में से कोई एक इस नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। दोनों ही बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और पहले भारत के लिए टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

गुवाहाटी में बल्लेबाजों की होगी अग्निपरीक्षा

इसके अलावा गुवाहाटी की पिच पर बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा भी हो सकती है। टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक ने बताया कि गुवाहाटी की पिच से ऐसी बर्ताव की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया, कि पहले टेस्ट में पिच ने तीसरे दिन तक बल्लेबाजों की मुश्किलें बढ़ाई थीं। लेकिन, इसका जिम्मा किसी पर नहीं डाला जा सकता है। कोटक ने कहा है कि टीम इस नई पिच और परिस्थितियों के अनुसार तैयारी कर रही है।