राष्ट्रपति–राज्यपाल विवाद पर SC का फैसला, CM स्टालिन का तीखा बयान — क्या कहा?

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तमिलनाडु : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने राष्ट्रपति संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की राय को लेकर शुक्रवार को कहा कि राज्य के अधिकारों और वास्तविक संघीय ढांचे के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। स्टालिन का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद आया है जिसमें उसने कहा था कि अदालत राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर कोई समयसीमा नहीं थोप सकती, लेकिन राज्यपालों के पास विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखने की “असीम” शक्तियां भी नहीं हैं।
 
राष्ट्रपति द्वारा इस विषय पर सलाह मांगे जाने पर, सीजेआई बी. आर. गवई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपनी सर्वसम्मति वाली राय में कहा कि राज्यपालों द्वारा “अनिश्चितकालीन विलंब” की सीमित न्यायिक समीक्षा का विकल्प खुला रहेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि राज्यपालों के पास लंबित विधेयकों की मंजूरी के लिए समयसीमा तय करने के वास्ते संविधान में संशोधन होने तक उनका प्रयास जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की यह राय तमिलनाडु बनाम राज्यपाल मामले में अप्रैल 2025 में दिए गए फैसले को प्रभावित नहीं करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की राय इस बात की पुष्टि करती है कि राज्य में निर्वाचित सरकार ही मुख्य भूमिका में होनी चाहिए और सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि न्यायालय की राय स्पष्ट करती है कि राज्यपाल किसी विधेयक पर फैसला लेने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकते और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान की मर्यादाओं में रहकर ही काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यपाल के पास किसी विधेयक को रद्द करने या ‘पॉकेट वीटो’ लगाने जैसा कोई चौथा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अदालत का रुख कर सकती हैं और राज्यपाल की जानबूझकर की गई देरी या निर्णय न लेने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहरा सकती हैं। स्टालिन ने 1974 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह परामर्श उतना ही प्रभावी है जितनी कानून अधिकारियों की राय होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी लड़ाई के जरिए “हमने उन राज्यपालों को भी सरकार के अनुरूप काम करने पर मजबूर किया, जो निर्वााचित सरकारों से अलग कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा, “कोई भी संवैधानिक अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।” स्टालिन ने कहा, “जब कोई उच्च पद धारी संविधान का उल्लंघन करता है, तो संवैधानिक न्यायालय ही एकमात्र उपाय होते हैं। अदालतों के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सुनिश्चित करेंगे कि हर संवैधानिक संस्थान संविधान के अनुसार ही काम करे।” उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर राज्यपाल के ‘पॉकेट वीटो’ के सिद्धांत और यह दावा खारिज कर दिया है कि राजभवन किसी विधेयक को रोककर रद्द कर सकता है

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सैफ अली खान और अक्षय कुमार की जोड़ी आ रही Haiwaan में, अलीबाग में शूटिंग शुरू

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 बॉलीवुड | बॉलीवुड इंडस्ट्री के फेमस सैफ अली खान अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। सैफ अली खान के धांसू मूवी के लिए मशहूर डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ हाथ मिलाया है। इस मूवी की शूटिंग काफी महीनों से चल रही है। खास बात यह है कि साल 2008 में आई फिल्म ‘टशन’ के बाद सैफ अली खान लगभग 17 सालों के बाद अक्षय कुमार संग काम करने जा रहे हैं। अब जो ताजा जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक प्रियदर्शन की ‘हैवान’ के नेक्स्ट शेड्यूल को मुंबई के अलीबाग में सैफ अली खान (Saif Ali Khan) शूट कर रहे हैं।

अलीबाग में शूटिंग कर रहे हैं सैफ अली खान

सैफ अली खान को हाल ही में महाराष्ट्र के समुद्र तटीय शहर अलीबाग में स्पीडबोट से आते देखा गया। सैफ अली खान को देखने के बाद लोगों ने “हैवान” के शूटिंग शेड्यूल को लेकर अटकलें लगनी शुरू कर दी हैं। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने अब बॉलीवुड हंगामा के साथ पुष्टि की है कि सैफ अली खान, प्रियदर्शन के निर्देशन में बन रही इस मूवी के अहम सीन को शूट कर रहे हैं। अलीबाग का यह शेड्यूल इसी सीन को शूट करने के लिए था।

अलीबाग में सैफ के साथ कुछ हिस्सों की शूटिंग कर रहे हैं। ये सीक्वेंस फिल्म में उनके किरदार को गढ़ने में अहम हैं। बता दें ‘हैवान’ का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस ने थेस्पियन फिल्म्स के साथ मिलकर किया है। यह 2026 में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी को बड़े परदे पर देखने के लिए फैन्स भी बेताब हैं।

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बावुमा की भारत से बड़ी सीरीज की मांग, कहा– एशेज जैसी प्रतिद्वंद्विता हम भी डिजर्व करते हैं

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नई दिल्ली : भारत और साउथ अफ्रीका के बीच चल रही दो-टेस्ट की छोटी सीरीज ने प्रोटियाज कप्तान टेम्बा बावुमा की नाराजगी को खुलकर उजागर कर दिया है। WTC चैंपियन बनने के बावजूद साउथ अफ्रीका को भारत जैसे दिग्गज के खिलाफ सिर्फ दो टेस्ट खेलने पड़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इंग्लैंड–ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें एशेज़ में पाँच मैचों की लंबी भिड़ंत का आनंद ले रही हैं। बावुमा का मानना है कि दो सबसे मजबूत रेड-बॉल टीमों के बीच इतनी छोटी सीरीज़ न तो खिलाड़ियों के साथ न्याय है, न फैंस के साथ। यह मुद्दा फिर से क्रिकेट शेड्यूलिंग और कमर्शियल प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

एशेज देखकर बढ़ी ‘जलन’ : बावुमा की साफ टिप्पणी
गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान बावुमा ने बताया कि उन्होंने सुबह ऑस्ट्रेलिया में चल रहा एशेज़ टेस्ट देखा और इस दौरान “थोड़ी जलन” महसूस की। उन्होंने कहा, “आज सुबह उठकर एशेज देखा। पाँच टेस्ट खेलते देख थोड़ा जलन हुई। वे एक-दूसरे पर हावी होंगे, और हमें सिर्फ दो मैच मिले हैं।” यह बयान साफ दिखाता है कि कप्तान इस छोटी सीरीज से खुश नहीं हैं, खासकर तब जब उनकी टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन है।

“हम इंडिया के खिलाफ बड़ी सीरीज डिजर्व करते हैं” 
बावुमा ने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में साउथ अफ्रीका को भारत के खिलाफ चार या 5 टेस्ट की सीरीज मिलेगी। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि जल्द ही हम इंडिया के खिलाफ चार टेस्ट खेलने के लिए लौटेंगे।” बावुमा के अनुसार, मजबूत टीमों के बीच लंबी सीरीज ही फैन्स को असली रोमांच देती है और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका भी।

शेड्यूल खिलाड़ियों के हाथ में नहीं 
प्रोटियाज कप्तान ने स्पष्ट किया कि टेस्ट सीरीज़ के मैचों की संख्या खिलाड़ी तय नहीं करते। यह पूरा मामला बोर्ड्स की कमर्शियल प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। एशेज, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (भारत–ऑस्ट्रेलिया), एंडरसन–तेंदुलकर ट्रॉफी (भारत–इंग्लैंड) इन सीरीज को 5 टेस्ट इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे आर्थिक दृष्टि से सबसे ‘लाभकारी’ मानी जाती हैं। इसके विपरीत भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेस्ट इंडीज या बांग्लादेश अधिकतर सीरीज केवल दो टेस्ट की होती हैं।

दो-टेस्ट सीरीज क्यों “अधूरी” लगती है?
बावुमा ने तर्क दिया कि दो मैचों की सीरीज में अक्सर परिणाम अधूरा रह जाता है, ड्रॉ सीरीज होने के चांस बढ़ते हैं और एक टीम को जीतने का वास्तविक मौका कम मिलता है। उन्होंने कहा, “चाहे सीरीज 1-1 रहे, 2-0 या 0-2, तीन टेस्ट की सीरीज हमेशा बेहतर होती है। एक टीम हावी होती है, दूसरी वापसी करती है—फैंस को असली टेस्ट क्रिकेट मिलता है।”

“हम मैदान पर अच्छा खेलेंगे, तभी चीज़ें बदलेंगी”
बावुमा ने कहा कि साउथ अफ्रीका अपनी नाराज़गी दर्शा सकता है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब वे मैदान पर शीर्ष टीमों को लगातार चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “हम बस अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं। यही दूसरे देशों को हमारे साथ ज्यादा टेस्ट खेलने के लिए आकर्षित करेगा।”

बिहार के बाद बंगाल पर BJP की नज़र, ममता दीदी को टक्कर देने की रणनीति तैयार, जानिए क्या है पूरा प्लान?

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BJP: बीजेपी कैडर की जीत की भूख और हार से लड़ने का माद्दा देखना हो तो कोई दल इस पार्टी की पुरानी फ़ितरतों को सलीके से पढ़ ले, सारा डाउट क्लियर हो जाएगा. इससे पहले की बंगाल फ़तह करने की बीजेपी की जीत की रणनीति और टार्गेट का ज़िक्र किया जाए, आप असम को याद कर लीजिए. जनसंघ से लेकर बीजेपी तक के संपूर्ण अस्तित्व में पहली बार 2016 में आकर असम में कमल खिला. यानी दशकों के संघर्ष के बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी ने असम में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. जबकि, इसके पीछे कई पीढ़ियां जीत का ख़्वाब लिए मर-खप गईं. बीजेपी के संघर्ष और संघर्ष को अगली पीढ़ी में पास-ऑन करने के जज़्बे से अन्य दलों को भी सीख लेनी चाहिए.

नए दौर की बीजेपी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में अपनी राजनीतिक हैसियत का विस्तार कर रही है. लेकिन, दो बार से लगातार पश्चिम बंगाल के क़िले को ढहाने का पुरज़ोर प्रयास बीजेपी का विफल रहा है. लेकिन, सवाल फिर से आ खड़ा है, कि क्या बीजेपी पश्चिम बंगाल में दीदी का किला इस बार के विधानसभा चुनाव में ध्वस्त कर पाएगी? जीत की ज़िद लिए बीजेपी के महारथी लगातार पश्चिम बंगाल को टार्गेट पर लिए हुए हैं। बिहार के “जंगलराज” के बाद अब अगली रणनीति पश्चिम बंगाल के “जंगलराज” पर फ़ोकस करने का है.

बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी शानदार जीत के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि बिहार की सफलता बंगाल में ‘जंगल राज’ को खत्म करने का रास्ता साफ कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित पार्टी के मुख्यालय से 14 नवंबर को अपनी विजय संबोधन में स्पष्ट कहा था, “बिहार की जीत ने बंगाल में भाजपा की सफलता का मार्ग प्रशस्त किया है. मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करता हूं कि आपके समर्थन से हम राज्य में जंगल राज का अंत करेंगे.”

बिहार में भाजपा को मिली भारी सफलता ने न सिर्फ़ उसके गठबंधन सहयोगी नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) को मजबूत किया, बल्कि पूर्वी भारत में पार्टी की पकड़ को और गहरा किया। लेकिन अब फोकस 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों पर है, जो भाजपा की ‘इच्छा सूची’ में सबसे ऊपर है. 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ‘बंगाली अस्मिता’ की राजनीति ने बीजेपी को ‘बाहरी’ का ठप्पा देकर करारी शिकस्त दी थी. तब टीएमसी का नारा था- ‘बंगला निजेर मेये के चाहे’, यानी बंगाल अपनी बेटी (ममता बनर्जी) चाहता है. भाजपा के आंतरिक सूत्रों के अनुसार पार्टी की तरफ़ से यह गंभीर गलती थी कि उसने उस समय इस टैगलाइन को आक्रामक तरीके से काउंटर नहीं किया.

रणनीति: बीजेपी के डीएनए में बंगाल!
अब भाजपा अपनी जड़ों को याद दिलाने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी का दावा है कि वह पश्चिम बंगाल की ही संतान है, क्योंकि उसके संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसी राज्य से थे. भाजपा को भारतीय जन संघ का प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी बताते हुए, अभियान में बंगाली संस्कृति से विचारधारा को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. राज्य इकाई के फैसलों में बाहरी नेताओं पर कम निर्भरता रहेगी. उम्मीदवार चयन में युवा, स्वच्छ छवि वाले और शिक्षित चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी, ताकि पार्टी की इमेज मजबूत हो. चुनाव से ठीक पहले अन्य दलों से बड़े स्तर पर नेताओं को शामिल करने से भी परहेज होगा, जैसी पिछली गलतियां हुईं.

बंगाल अभियान के 10 पॉइंट तय
अभियान के 10 प्रमुख बिंदु तय हो चुके हैं. इनमें खराब कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र का ‘उपहास’ शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, जो बंगाल चुनाव प्रभारी हैं, वे लगातार मीडिया के लाइम-लाइट से दूर रहकर कोलकाता में साप्ताहिक बैठकें कर रहे हैं. 80,000 बूथों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. बंगाली पहचान को मजबूत करने के लिए ‘जय मां काली’ और ‘जय मां दुर्गा’ जैसे नारे इस्तेमाल हो रहे हैं. नए राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की नियुक्ति ऊपरी जाति और बंगाली भद्रलोक वर्ग तक पहुंच का संकेत है.

पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ेगी पार्टी
टीएमसी के पास ममता जैसी जननेत्री है, लेकिन भाजपा मुख्यमंत्री पद का चेहरा उतारने की बजाय सामूहिक नेतृत्व और मोदी पर दांव लगाएगी. महिलाओं की सुरक्षा और ‘मां-माटी-मानुष’ नारे पर टीएमसी की नाकामी उजागर होगी. अभी से स्थानीय कार्यकर्ता और नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में जनता की मदद कर रहे हैं. हेल्पडेस्क खोले गए हैं. भाजपा की यह तैयारी बंगाल में लंबे संघर्ष और राजनीतिक ज़िद की ओर इशारा करती है. बिहार की जीत ने आत्मविश्वास दिया, लेकिन ममता की मशीनरी को तोड़ना आसान नहीं. पार्टी का लक्ष्य साफ है कि अस्मिता की राजनीति को तोड़कर शासन की कमजोरियों पर हमला किया जाए.

जानिए किस सुपरस्टार ने पहले किया रिजेक्ट

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बॉलीवुड |  बॉलीवुड सुपरस्टार रणबीर कपूर अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर आज लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करते हैं. अभिनेता ने अपने 18 साल के एक्टिंग करियर में बड़ा और खास मुकाम हासिल किया है. रणबीर ने ऐसी फिल्मों में भी काम किया है जो दूसरे सुपरस्टार ने रिजेक्ट कर दी थी. आज हम आपको एक ऐसी ही फिल्म के बारे में बता रहे हैं जिसने रणबीर को उनका पहला बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया था|

यहां जिस फिल्म की बात हम आपसे कर रहे हैं वो है ‘रॉकस्टार’. ये पिक्चर 14 साल पहले सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. बॉक्स ऑफिस पर ये कोई ज्यादा बड़ी हिट तो साबित नहीं हुई थी, लेकिन फ्लॉप भी नहीं हुई थी. इसमें रणबीर के काम को काफी पसंद किया गया था. हालांकि वो इसके लिए पहली पसंद नहीं थे|

ये सुपरस्टार था ‘रॉकस्टार’ के लिए पहली पसंद 

2011 में रिलीज हुई रणबीर कपूर की रॉकस्टार का डायरेक्शन इम्तियाज अली ने किया था और उन्होंने ही इसकी कहानी भी लिखी थी. वहीं इसके प्रोड्यसूर सुनील लुल्ला और ढिल्लन मेहता थे. मेकर्स ने पहले इस पिक्चर के लिए ‘ग्रीक गॉड’ कहे जाने वाले सुपरस्टार ऋतिक रोशन को अप्रोच किया था. हालांकि रणबीर ने इस म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था. बताया जाता है कि ऋतिक को इसकी कहानी पसंद नहीं आई थी|

रणबीर ने जीते थे 2 फिल्मफेयर अवॉर्ड

ऋतिक रोशन की ना के बाद ‘रॉकस्टार’ रणबीर कपूर के पास पहुंची और उन्होंने इसके लिए हामी भर दी थी. रणबीर कपूर ने साल 2007 में ‘सांवरिया’ फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू बतौर एक्टर किया था. चार साल बाद ही उन्हें रॉकस्टार के लिए फिल्मफेयर के बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. इतना ही नहीं रणबीर ने इस पिक्चर के लिए फिल्म फेयर के बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) अवॉर्ड पर भी अपना नाम लिखाया था|

बनी थी 2011 की आठवीं सबसे कमाऊ फिल्म

रणबीर के साथ रॉकस्टार में लीड रोल में एक्ट्रेस नरगिस फाखरी नजर आई थीं. 60 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने भारत में 69 करोड़ रुपये कमाए थे और इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 109 करोड़ रुपए का रहा था. एवरेज साबित हुई रॉकस्टार 2011 की आठवीं सबसे कमाऊ बॉलीवुड फिल्म रही थी| 

गुवाहाटी टेस्ट से पहले शुभमन गिल बाहर, नंबर-4 पर बढ़ा चयन का सवाल

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क्रिकेट | साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। कप्तान शुभमन गिल गर्दन में इंजरी के चलते बाहर हो गए हैं। इसकी अधिकारिक पुष्टि भी बोर्ड की तरफ से कर दी गई है। पहले टेस्ट में बल्लेबाजी के दौरान उनकी गर्दन में जकड़न की समस्या हुई थी, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था। उम्मीद लगाई जा रही थी, कि वो गुवाहाटी टेस्ट में वापसी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। अब उनकी जगह टीम की कमान ऋषभ पंत संभालेंगे। इसकी ऑफिशियल पुष्टि भी कर दी गई है। गिल के जाने के बाद गौतम गंभीर की चिंताएं बढ़ने वाली हैं। हालांकि, उनके पास 2 और बल्लेबाजों के विकल्प हैं।

ऋषभ पंत बने भारत के 38वें कप्तान

शुभमन गिल की अनुपस्थिति में टीम इंडिया की जिम्मेदारी दूसरे टेस्ट में ऋषभ पंत संभालने वाले हैं। वो भारत के 38वें कप्तान बने हैं। गिल ने इसी साल तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी। पंत एक अहम मुकाबले में कैप्टेंसी का भार उठाने वाले हैं। पहले टेस्ट में भारत को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। साउथ अफ्रीका ने 30 रनों से हरा दिया था। अब उनके सामने सीरीज बचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस मैच में ड्रॉ होने पर भी अफ्रीका सीरीज जीत जाएगी। गिल के जाने से बल्लेबाजी भी डगमगा जाएगी।

गिल की जगह नंबर 4 पर कौन खेलेगा?

टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के सामने एक और बड़ी चुनौती है, कि शुभमन गिल के सामने नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने कौन आएगा? जवाब में हम आपको बता दें, कि टीम में साईं सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और नीतीश कुमार रेड्डी शामिल हैं। नीतीश का खेलना इस मुकाबले में लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन, वो 4 पर खेलेंगे या नहीं, यह सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि, पडिक्कल और सुदर्शन में से कोई एक इस नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। दोनों ही बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और पहले भारत के लिए टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

गुवाहाटी में बल्लेबाजों की होगी अग्निपरीक्षा

इसके अलावा गुवाहाटी की पिच पर बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा भी हो सकती है। टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक ने बताया कि गुवाहाटी की पिच से ऐसी बर्ताव की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया, कि पहले टेस्ट में पिच ने तीसरे दिन तक बल्लेबाजों की मुश्किलें बढ़ाई थीं। लेकिन, इसका जिम्मा किसी पर नहीं डाला जा सकता है। कोटक ने कहा है कि टीम इस नई पिच और परिस्थितियों के अनुसार तैयारी कर रही है।

ममता बनर्जी ने SIR को बताया ‘खतरनाक’, चुनाव आयोग को लिखा पत्र

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SIR In Bengal: पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) शुरू की गई है. बिहार के बाद अब बंगाल में भी यह अभियान तेज हुआ है, लेकिन इसके चलते राजनीतिक विवाद गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने की मांग की है.

CM ममता ने लगाए ये आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने तीन पन्नों के पत्र में आरोप लगाया कि बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) पर असहनीय कार्यभार डाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि BLO घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं और उन पर “अमानवीय दबाव” बनाया जा रहा है. ममता ने लिखा कि कर्मचारियों को सहायता देने, समय-सीमा बढ़ाने या खामियों को दूर करने के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग धमकी भरे रवैये के साथ काम कर रहा है.

जलपाईगुड़ी का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि जलपाईगुड़ी के मालबाजार में एक महिला BLO अपने घर में मृत मिली थीं. परिवार का आरोप है कि वह SIR के दबाव से तनाव में थीं. इससे पहले केरल और राजस्थान में भी BLO के आत्महत्या करने की खबरें आ चुकी हैं. ममता ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना पर दुख जताया और इसे प्रणालीगत विफलता बताया.

SIR प्रक्रिया को बताया खतरनाक

अपने पत्र में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से अपील की कि SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए, BLO को पर्याप्त प्रशिक्षण और सहायता दी जाए, और इस पूरी कवायद की समीक्षा की जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया अनियोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक है, जिससे अधिकारी और आम नागरिक दोनों परेशान हो रहे हैं. ममता ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में शुरुआत से ही यह अभियान लड़खड़ा गया है.

EC का आया जवाब

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया है कि BLO को दिल्ली में आयोग के ट्रेनिंग सेंटर और राज्य के CEO कार्यालय द्वारा पूरी ट्रेनिंग दी गई है. आयोग ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की चिट्ठी का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और जल्द विस्तृत जवाब देगा. साथ ही यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर BLO की मदद के लिए अतिरिक्त अधिकारी तैनात किए जा सकते हैं, जैसे बिहार में जीविका दीदी और वॉलंटियर्स को जोड़ा गया था.

दिव्या–मुकेश भट्ट विवाद सुर्खियों में, कॉल बातचीत लीक होने से बढ़ा मामला

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बॉलीवुड |  बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या खोसला कुमार अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं। उन्होंने कुछ समय पहले आलिया भट्ट की फिल्म ‘जिगरा’ को लेकर बयान दिया था कि वह उनकी फिल्म ‘सावी’ से मिलती-जुलती है। अब एक बार फिर वह चर्चा में आ गई हैं। अब दिव्या ने बात बढ़ने पर प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।

दिव्या ने आलिया की फिल्म ‘जिगरा’ को सावी की कॉपी बताया था। मुकेश भट्ट ने कहा कि यह उनका पब्लसिटी स्टंट था। आलिया को कॉपी करने की जरूरत नहीं है। मुकेश के इस बयान पर दिव्या खोसला भड़क गईं और उन्होंने प्रोड्यूसर संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो लीक कर दिया है।

दिव्या ने लीक किया मुकेश भट्ट संग कॉल रिकॉर्डिंग का ऑडियो 

ऑडियो में दिव्या मुकेश भट्ट से पूछती हैं कि सर आपने सावी और जिगरा विवाद पर मेरे खिलाफ बात क्यों की? क्या आपने ऐसा कहा कि मैंने कोई छिछोरी हरकत की। यह सब पब्लिसिटी स्टंट के लिए मैंने किया है? मुकेश ने कहा, ‘मैंने इस बारे में किसी से कोई बात नहीं की और ना ही किसी ने मुझसे कुछ पूछा। यह सब प्लानिंग की गई है। मैं ऐसी हरकत क्यों करूंगा। यह चीज तुम्हारे बर्थडे के दिन ही क्यों हुआ। इस चीज से मेरे और तुम्हारे रिलेशनशिप में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तुम तो मुझे जानते हो। तुम किसी की बातों में मत आना। आप मुझे जानते हैं मैं ऐसा क्यों करूंगा।

इस ऑडियो को शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, ‘मैं इस खुलासे से गहरे सदमे में हूं। मुझे जो पता चला है वह बहुत ही दिल दुखाने वाला है। भारी मन से मुझे लगता है कि इस सच्चाई को जनता के सामने लाना चाहिए। खासकर उन लोगों और फैंस के लिए जिन्होंने हमारी फिल्म इंडस्ट्री में लॉबिंग और गेटकीपिंग का दंश झेला है।’

दिव्या ने आगे लिखा, ‘बदकिस्मती से मेरे पास मुकेश भट्ट और मेरे बीच हुए ऑडियो को लीक करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है ताकि लोग खुद जान सकें कि कैसे कुछ ग्रुप के लोग करियर को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। यह बर्ताव मंजूर नहीं है और इसे नॉर्मल नहीं किया जा सकता है। अब समय आ गया है कि हम आवाज उठाएं और इंडस्ट्री माफिया को सामने लाएं।’

पहली बार इतिहास बदलेगा! टीम इंडिया की हार ने पाकिस्तान को दी रणनीति में बढ़त

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क्रिकेट |  भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला गुवाहाटी में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में हार से बचना चाहेगी, लेकिन वर्ल्ड चैंपियन साउथ अफ्रीका अपनी शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए क्लीन स्वीप करना चाहेगी। टीम इंडिया के रेगुलर कप्तान शुभमन गिल इस मुकाबले में चोट की वजह से नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला जीतना और भी मुश्किल लग रहा है। अगर भारतीय टीम यह मैच हार गई, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में पाकिस्तान से भी नीचे चली जाएगी।

टीम इंडिया की हार से पाक को फायदा

आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (ICC World Test Championship) की अंक तालिका में पाकिस्तान की टीम पांचवें स्थान पर है और टीम इंडिया चौथे स्थान पर है। पाकिस्तान ने दो मैच खेले हैं और एक में जीत हासिल की है, जबकि एक में उसे हार का सामना करना पड़ा है। प्वाइंट्स के मामले में टीम इंडिया से ग्रीन आर्मी काफी पीछे है, लेकिन विनिंग परसेंटेज के मामले में वो टीम इंडिया के करीब खड़ी है। उनका जीत प्रतिशत 50 है, जबकि टीम इंडिया का जीत प्रतिशत 54 है। गुवाहाटी में हार के बाद टीम इंडिया का जीत प्रतिशत 50 हो जाएगा।

WTC के इतिहास में पहली बार होगा ऐसा!

भारतीय टीम ने अब तक आठ मैच खेले हैं, जिनमें चार में जीत हासिल की है, तीन गंवा चुकी है और एक मैच ड्रॉ रहा है। इस तरह उनका जीत प्रतिशत 54.17 होता है, लेकिन गुवाहाटी टेस्ट हारने के बाद भारतीय टीम का जीत प्रतिशत 50 हो जाएगा। पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा मैच हारने की वजह से वह अंक तालिका में पांचवें स्थान पर खिसक जाएगी। अगर ऐसा हुआ, तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में पहली बार होगा जब टीम इंडिया पाकिस्तान से भी नीचे खिसक जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अब तक इस साइकल में कोई मैच नहीं गंवाया है और 100 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। वर्ल्ड चैंपियन साउथ अफ्रीका 3 में से 2 मैच जीतकर दूसरे स्थान पर है। उसका जीत प्रतिशत 66.67 है। श्रीलंका ने दो मैच में से एक में जीत हासिल की है और एक ड्रॉ रहा है। इस तरह उनका जीत प्रतिशत 66.67 है। इंग्लैंड की टीम ने पांच में से दो मैच जीते हैं और दो गंवाए हैं। उनका जीत प्रतिशत 43.33 है।

एक ही परिवार के 6 सदस्य BJP के टिकट पर चुनावी मैदान में, जानिए महाराष्ट्र निकाय चुनाव में क्या है बीजेपी की रणनीति?

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Maharashtra BJP Parivarvad: खानदानी राजनीति पर निशाना साधने वाली भाजपा ने महाराष्ट्र में सिद्ध कर दिया कि ;परिवारवाद’ सिर्फ चुनावी जुमला है. भाजपा से स्थानीय निकाय चुनाव में एक ही परिवार के 6 लोगों ने नॉमिनेट कर सबको हैरान कर दिया. भाजपा के इस परिवारवाद को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है. यहां सत्ता गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझते दिख रहे हैं.

कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माने जाने वाले नांदेड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के बीजेपी में शामिल होने के बाद चुनावी समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं. लोहा नगर परिषद में बीजेपी ने ऐसा दांव चला है जिसने इसकी चर्चा सिर्फ नांदेड़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हो रही है. क्योंकि परिवारवाद का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरने वाली भाजपा ने एक ही परिवार के 6 लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है.

एक ही परिवार में 6 लोगों को टिकट
लोहा में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए गजानन सूर्यवंशी को उम्मीदवार बनाया है. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने सूर्यवंशी परिवार के 5 और सदस्यों को भी अलग-अलग वार्डों से टिकट दे दिया. भाजपा की इस सूची में गजानन सूर्यवंशी की पत्नी, भाई, भाभी, जीजा और भतीजे की पत्नी शामिल हैं.

नॉमिनेशन वापस लेने की अंतिम डेट आज
गजानन सूर्यवंशी की पत्नी गोदावरी सूर्यवंशी ने वार्ड 7A, भाई सचिन सूर्यवंशी-वार्ड 1A, भाभी सुप्रिया सूर्यवंशी-वार्ड 8A, जीजा युवराज वाघमारे-वार्ड 7B और भतीजे की पत्नी रीना वयावरे ने वार्ड 3 से स्थानीय निकाय चुनाव में नॉमिनेशन किया है. आज 21 दिसंबर को नाम वापस लेने की अंतिम डेट है. स्थानीय निकाय के इन चुनावों के लिए 2 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे. 3 दिसंबर को वोटों की गिनती के साथ नतीजे आएंगे.

पूर्व सीएम अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर
बता दें, नांदेड़ में स्थानीय निकाय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा एमपी अशोक चव्हाण की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. परिणाम क्या होंगे यह तो नतीजे आने के बाद ही क्लियर हो पाएंगे. लेकिन इस चुनाव में 6 लोगों के एक ही परिवार से चुनाव लड़ने के बाद सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

विपक्ष ने साधा निशान
भाजपा द्वारा एक ही परिवार के 6 सदस्यों को टिकट दिए जाने के बाद विपक्षी दल एनसीपी अजित पवार गुट के विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधा है, उन्होंने भाजपा सांसद अशोक चव्हाण कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा को लोहा में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे, इसलिए एक घर के लोगों को प्रत्याशी बना दिया. इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है और इसका जिम्मेदार अशोक चव्हाण को जिम्मेदार ठहराया है.