कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर बोला हमला, कहा-एसआईआर कोई सुधार नहीं, थोपा गया जुल्म

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर एक बार फिर सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने एसआईआर के नाम पर देश भर में अफरा-तफरी मचा रखी। अब इसके नतीजे भी सामने आने लगे। एसआईआर की वजह से पिछले करीब 3 हफ्तों में 16 बूथ स्तर अधिकारियों की जान चली गई।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि इन बीएलओ में से किसी काम के दबाव के चलते आत्महत्या कर ली तो किसी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आज भी सैकड़ों बीएलओ भारी तनाव में एसआईआर का काम कर रहे हैं। देखा जाए तो एसआईआर कोई सुधार नहीं है, यह एक तरह से लोगों पर थोपा गया जुल्म है। राहुल ने आगे कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम बनाया है। अब आयोग के अधिकारी बीएलओ पर दबाव डाल रहे हैं। यही दबाव, तनाव, हार्टअटैक और आत्महत्या का कारण बन रहा है।

चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल लेकर खड़ा
राहुल गांधी ने आगे कहा कि चुनाव आयोग ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हजारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ रहे हैं। मकसद साफ है। सही मतदाता थककर हार जाए और वोट चोरी बिना रोक-टोक जारी रहे। राहुल गांधी ने तंज करते हुए कहा कि भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है।

विशेष गहन पुनरीक्षण एक सोची-समझी चाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर नीयत साफ होती तो लिस्ट डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती। चुनाव आयोग 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित समय ले कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता। राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर एक सोची-समझी चाल है, जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और बीएलओ की अनावश्यक दबाव से मौतों को कॉलैटरल डैमेज मान कर अनदेखा किया जा रहा है। यह नाकामी नहीं, षडय़ंत्र है और सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है।

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 “सीमाएं बदलती रहती हैं… संभव है सिंध एक दिन फिर भारत का हिस्सा बने”

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को दिल्ली में आयोजित सिंधी समाज सम्मेलन में संबोधित करते हुए कहा कि भले ही आज सिंध भौगोलिक रूप से भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सभ्यतागत रूप से वह हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सीमाएं बदल सकती हैं और “कौन जानता है, कल सिंध फिर भारत में वापस भी आ जाए।”
राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत–पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पाकिस्तान का सिंध प्रांत भारतीय उपमहाद्वीप में बसे सिंधी समुदाय का मूल स्थान है और सिंधु घाटी सभ्यता का उद्गम स्थल भी इसी क्षेत्र में है।

लाल कृष्ण आडवाणी का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने विभाजन के बाद भी सिंधी हिंदुओं के सिंध क्षेत्र से भावनात्मक जुड़ाव को सामने रखते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की पुस्तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी के शब्दों में, “कई सिंधी हिंदू आज भी सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि सिंध के कई मुसलमान भी सिंधु नदी को अत्यंत पवित्र मानते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “सिंध के लोग आज जहां भी हों, वे हमारे अपने हैं।”

सीएए का किया समर्थन 
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों पर लंबे समय से अत्याचार होते रहे हैं, उनके घर जलाए गए, परिवारों को सताया गया और जबरन धर्मांतरण तक करवाए गए।
उन्होंने पुराने शासनकाल की तुष्टिकरण राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि “वोट बैंक की राजनीति में असली पीड़ितों की उपेक्षा की गई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके दर्द को समझा और इसलिए सीएए लाया गया।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून उन लोगों के लिए है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए थे।

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जैश मॉड्यूल में गहरे वैचारिक और वित्तीय मतभेद हुए उजागर

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नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम विस्फोट की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद के इस आतंकी मॉड्यूल के भीतर विचारधारा, हमले की रणनीति और धन के उपयोग को लेकर गहरी फूट थी। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी और बाकी सदस्यों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि उमर ने अक्टूबर में अपने साथी अदील राथर की शादी में भी शामिल होने से इनकार कर दिया था।जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मुजम्मिल गनई, अदील राथर और मुफ्ती इरफान वागे अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित थे, जो पश्चिमी देशों और दूर के दुश्मनों पर हमले को प्राथमिकता देती है। वहीं डॉ. उमर उन नबी आईएसआईएस की कट्टर विचारधारा की ओर झुके हुए थे। उनका मानना था कि पहले करीबी दुश्मन (भारत) को निशाना बनाना चाहिए और खिलाफत स्थापित करना ही सर्वोच्च लक्ष्य है। 
उमर खुद को कश्मीर के कुख्यात आतंकियों बुरहान वानी और जाकिर मूसा की विरासत का उत्तराधिकारी मानता था। यही वैचारिक टकराव मॉड्यूल की एकता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया था। समूह के अधिकांश सदस्य (वागे को छोड़कर) पहले अफगानिस्तान जाकर प्रशिक्षण लेना चाहते थे, लेकिन असफल रहे। इसके बाद उन्होंने भारत में ही बड़ा हमला करने का फैसला किया। डॉ. उमर 2023 से ही इंटरनेट पर आईईडी बनाने की तकनीक पर गहन रिसर्च कर रहा था और फरीदाबाद में किराए के मकान में रसायनों के साथ प्रयोग करता था। मॉड्यूल को मिले फंड को लेकर भी तीखी नोंक-झोंक थी। उमर पर धन के दुरुपयोग का आरोप था। जांच में पता चला है कि मुख्य वित्तीय सहायता अल फलाह विश्वविद्यालय की छात्रा शाहीन शाहिद अंसारी ने की थी, जो मुजम्मिल गनई की सहपाठी थी। शाहीन ने कथित तौर पर संगठित क्राउडफंडिंग से करीब 20 लाख रुपये जुटाए थे। वह जैश की महिला भर्ती शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’से जुड़ी थी और फरीदाबाद ऑपरेशन के लिए धन व संसाधन जुटाने में अहम भूमिका निभा रही थी।
अक्टूबर में मुफ्ती इरफान वागे की गिरफ्तारी के बाद उमर ने 18 अक्टूबर को कश्मीर के काजीगुंड में बाकी सदस्यों से मुलाकात की। इस बैठक में उसने अपने साथियों को अपनी आईएसआईएस-प्रेरित रणनीति पर सहमत करने की कोशिश की और कथित तौर पर सफल भी रहा। ठीक तीन सप्ताह बाद दिल्ली में विस्फोट हो गया।वागे की गिरफ्तारी से पुलिस को पूरे मॉड्यूल तक पहुंच मिली। फरीदाबाद से 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जिसमें उच्च क्षमता वाले विस्फोटक, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, रिमोट कंट्रोल और प्रज्वलन उपकरण शामिल थे। उमर और गनई दोनों के पास उस कमरे की चाबियां थीं जहां यह सामग्री छिपाई गई थी। यह मामला दर्शाता है कि आतंकी संगठन कितने भी संगठित दिखें, उनके अंदर वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेद उन्हें कमजोर करते हैं। फिर भी, ये मतभेद आम नागरिकों की जान लेने से उन्हें नहीं रोक पाते।

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नए श्रम कानूनों को लेकर ट्रेड यूनियन ने किया विरोध, बुधवार को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

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नई दिल्ली। भारत के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी और कॉर्पोरेट हितैषी बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की है। इन यूनियनों ने आगामी बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है। ज्यादातर विपक्षी दलों से जुड़े ये यूनियन पिछले पांच साल से इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। चारों श्रम संहिताएँ (वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता) वर्ष 2019-20 में संसद से पारित हो चुकी थीं और अब धीरे-धीरे लागू हो रही हैं।
सरकार का दावा है कि इन संहिताओं से ब्रिटिश काल के 29 जटिल श्रम कानूनों को चार आसान कोड में समेटा गया है, जिससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार सृजन होगा और मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा बेहतर कार्य दशाएं मिलेंगी। लेकिन ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये कानून मजदूरों के साथ धोखा हैं। इनसे कंपनियों को कर्मचारियों को बिना वजह निकालने, शिफ्ट की अवधि बढ़ाने और ठेका मजदूरी को बढ़ावा देने की खुली छूट मिल गई है। मुख्य बदलावों में फैक्ट्रियों में कार्य दिवस 12 घंटे तक करने की अनुमति, महिलाओं के लिए रात्रि पाली की छूट, छंटनी के लिए सरकारी अनुमति की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी करना और छोटी-मझोली कंपनियों को पहले से ज्यादा छूट शामिल हैं। कारोबारी संगठन इन बदलावों से खुश हैं क्योंकि उनका मानना है कि पुराने कानून मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पीछे रखते थे। भारत की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा अभी भी 20 प्रतिशत से कम है।
हालांकि सब एक मत नहीं हैं। छोटे-मझोले उद्यमियों का संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन एंटरप्रेन्योर्स’ ने भी चिंता जताई है कि नए नियमों से उनका परिचालन खर्च बहुत बढ़ जाएगा और कई सेक्टर में कारोबार बाधित होगा। उन्होंने सरकार से ट्रांजिशन सपोर्ट और लचीला क्रियान्वयन मांगा है। दूसरी ओर, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इन संहिताओं का खुला समर्थन किया है और राज्यों से कुछ मामूली मुद्दों पर बातचीत के बाद इन्हें शीघ्र लागू करने को कहा है। श्रम मंत्रालय जून 2024 से अब तक यूनियनों से दर्जन भर बैठकें कर चुका है, पर कोई सहमति नहीं बनी। अब सभी राज्य अपने-अपने नियम बनाकर इन कोड को लागू करेंगे। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार नहीं झुकी तो बुधवार का विरोध प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत होगा।

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कोयंबटूर लाया गया दुर्घटनाग्रस्त तेजस के पायलट का पार्थिव शरीर, एयरफोर्स कर्मियों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि 

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चेन्नई। दुबई में हुए एयर शो में करतब दिखाने के दौरान तेजस फाइटर जेट क्रेश हुआ और पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई। स्याल का पार्थिव शरीर रविवार को कोयंबटूर के सुलूर एयर फोर्स स्टेशन लाया गया, जहां उनके साथियों और अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कोयंबटूर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पवन कुमार और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस कार्तिकेयन ने डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से श्रद्धांजलि दी, जबकि आईएएफ ने पूरे मिलिट्री ऑनर के साथ श्रद्धांजलि दी। 
दस साल से ज्यादा समय तक स्याल ने एयर फोर्स में काम किया और उन्हें एक डिसिप्लिन्ड ऑफिसर माना जाता था। वह अपनी पत्नी, जो खुद भी एयर फोर्स ऑफिसर थीं, और अपनी सात साल की बेटी के साथ सुलूर एयर फोर्स क्वार्टर में रहते थे। इस क्रैश की खबर से पूरा परिवार टूट गया। साथ काम करने वालों ने उन्हें एक कमिटेड प्रोफेशनल और प्यार करने वाले पिता के तौर पर याद किया। वे अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए एविएशन और डिफेंस सिस्टम से जुड़ी एडवांस्ड पढ़ाई भी कर रहे थे। विंग कमांडर स्याल (37) हिमाचल प्रदेश के रहने वाले थे और सुलूर बेस पर सीनियर ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने मशहूर एविएशन प्रदर्शनी में भारत के एरोबैटिक डिस्प्ले के लिए सुलूर से दुबई तक तेजस एमके-1 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट उड़ाया था, जिसमें दुनिया भर की बड़ी एयरोस्पेस कंपनियों और डेलीगेशन ने हिस्सा लिया था। सुलूर में उन्हें श्रद्धांजलि के बाद, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए हिमाचल प्रदेश में उनके पैतृक गांव ले जाया गया। आईएएफ के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना का सही कारण पता लगाने के लिए डिटेल्ड जांच के आदेश दे दिए गए हैं। विंग कमांडर नमन स्याल की दुखद मौत से एयर फोर्स कम्युनिटी और उससे भी आगे दुख की लहर है, क्योंकि पूरा देश एक ऐसे बहादुर ऑफिसर के जाने का शोक मना रहा है। भारतीय वायु सेना को स्वदेशी तेजस फाइटर की क्षमताओं को दिखाने के लिए कई हवाई प्रदर्शन करने थे।

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चंडीगढ़ पर अभी अंतिम फैसला नहीं…बिल पर पंजाब में सियासी बवाल के बाद केंद्र सरकार का आया जवाब

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चंडीगढ़: चंडीगढ़ (Chandigarh) को आर्टिकल 240 (Article 240) के दायरे में लाने की खबरों के बीच राजनीति गरमा गई है लेकिन अब गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने आधिकारिक बयान जारी कर इस विवाद पर रोक लगाने की कोशिश की है. मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि केंद्र केवल चंडीगढ़ के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है. यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.

गृह मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि इस प्रस्ताव से चंडीगढ़ की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा और न ही पंजाब या हरियाणा के पारंपरिक संबंधों पर कोई असर पड़ेगा. मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा. साथ ही, यह भी बताया कि आने वाले शीतकालीन सत्र में इस विषय पर कोई बिल लाने की सरकार की मंशा नहीं है.

दरअसल, विवाद तब बढ़ा जब संसद की बुलेटिन में “संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025” का जिक्र सामने आया. इस बिल में चंडीगढ़ को आर्टिकल 240 में शामिल करने का प्रस्ताव था, जिससे राष्ट्रपति को चंडीगढ़ के लिए सीधे नियम बनाने का अधिकार मिल जाता. कई राजनीतिक दलों ने आशंका जताई कि इससे चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के हाथों से निकलकर एक स्वतंत्र प्रशासक के हाथों में चला जाएगा.

इस प्रस्ताव पर पंजाब में कड़ा विरोध देखने को मिला. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पंजाब के साथ “अन्याय” बताया और कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है. कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने चेतावनी दी कि चंडीगढ़ को “छीनने” की किसी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे. अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने इसे पंजाब के अधिकारों पर “हमला” बताया. AAP सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने सभी पंजाब सांसदों से गृह मंत्री से मिलने की अपील की. वहीं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कथित प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी.

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कांचीपुरम में विजय का बड़ा वादा

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चेन्नई: अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम के प्रमुख विजय ने रविवार को लगभग 2 महीने के ब्रेक के बाद 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए अपना अभियान फिर से शुरू किया. सत्तारूढ़ DMK पर निशाना साधते हुए विजय ने कहा कि पार्टी अब अन्ना (सी. एन. अन्नादुरई) को भूल गई है. उन्होंने, डीएमके पर वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया.

30 मिनट तक भाषण दियाः

TVK लीडर विजय ने आज सुबह कांचीपुरम ज़िले के लोगों से मुलाकात की. सुंगुवरछत्रम के पास जेप्पियार इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कैंपस में हुई मीटिंग में कांचीपुरम ज़िले से कुल 2,000 लोग आए थे. विजय ने उन्हें करीब 30 मिनट तक एड्रेस किया. उन्होंने बताया कि अगर TVK पावर में आती है तो वह लोगों के लिए क्या प्लान लागू करेगी.

अपने भाषण में विजय ने कहा, “कांचीपुरम वह ज़िला है जहां अरिग्नार अन्ना का जन्म हुआ था. MGR ने अरिग्नार अन्ना को अपनी पार्टी के बैनर तले रखा क्योंकि वह उनके गाइड थे. लेकिन मुझे आपको यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि अन्ना की शुरू की गई पार्टी को अभी जो लोग कंट्रोल कर रहे हैं, उन्होंने क्या किया है. लोग यह अच्छी तरह जानते हैं. पर्सनली, हमें उनसे (DMK) कोई प्रॉब्लम नहीं है. पर्सनली, वे चाहें तो बुरा बर्ताव कर सकते हैं. लेकिन मैं लोगों को धोखा देकर वोट पाने के ड्रामा को माफ़ नहीं करूंगा.”

विजय के प्लानः

“अगर TVK सत्ता में आई, तो हम सबके लिए पक्के घर बनाएंगे. हर घर में मोटरसाइकिल ज़रूर होगी. हमारा लक्ष्य कार है. इकॉनमी को उसी हिसाब से डेवलप किया जाएगा. हम ऐसी स्थिति बनाएंगे जहां हर किसी के पास कम से कम डिग्री हो. हम यह पक्का करेंगे कि परिवार में एक व्यक्ति की पक्की इनकम हो. हम सरकारी अस्पतालों को भरोसेमंद बनाएंगे. सबसे बढ़कर, हम कानून और व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देंगे.”

वंशवाद पर हमलाः

विजय ने DMK पर वंशवाद की राजनीति को लेकर उस पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला किया. विजय ने DMK का मज़ाक उड़ाया और उस पर दिखावा करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि TVK ने DMK की तरह NEET खत्म करने के “खोखले दावे” नहीं किए, बल्कि उसने शिक्षा को संविधान की समवर्ती सूची से राज्य सूची में शिफ्ट करने की मांग की.

रैली से क्यों दूर थेः

दरअसल, 27 सितंबर को करूर में विजय की रैली के दौरान भगदड़ हुई थी. इस हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ की घटना की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. सीबीआई जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति करेगी. उसके बाद, यह पहली बार है जब विजय ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और लोगों को संबोधित किया.

कर्नाटक कांग्रेस कलह, सिद्धारमैया बोले- हाईकमान का फैसला हर कोई मानेगा

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बेंगलुरु: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक के बाद राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि लीडरशिप में बदलाव सिर्फ कयास है. ये कयास मीडिया ने लगाया है.

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार रात मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके सदाशिवनगर स्थित घर पर मुलाकात कर और दोनों नेताओं ने करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा की. सत्ता के बंटवारे पर बहस के बीच दोनों नेताओं की लंबी बैठक ने काफी उत्सुकता पैदा कर दी.

बैठक के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक के दौरान हमने पार्टी संगठन के बारे में बात की. स्थानीय निकाय चुनाव आ रहे हैं. तालुक पंचायत चुनाव, जिला पंचायत चुनाव, और जीबीए एरिया में नगर पालिका चुनाव पर बात हुई. उन्होंने कहा कि यह बस एक मैत्रीपूर्ण बैठक थी.

मंत्रिमंडल में फेरबदल के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई. लीडरशिप में बदलाव के बारे में सिर्फ अंदाजे लगाए जा रहे थे. उन्होंने कहा कि आपने ही वो अंदाजा लगाया है. हालांकि मुख्यमंत्री ने सत्ता हस्तांतरण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खड़गे से दिल्ली में कुछ विधायकों के साथ अपनी बैठक के बारे में पूछा था, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, मैंने उनसे इस बारे में नहीं पूछा है. मुझे यह जानकारी इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट से मिली है. मैंने खड़गे से इस बारे में बात नहीं की है. यह बस एक फ्रेंडली मीटिंग थी.’

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कुंठित हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मैं कुंठित नहीं हूं. मैं कभी कुंठित नहीं रहा. आप मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं कुंठित हूं. मेरे हमेशा कुंठित होने का कोई सवाल ही नहीं है. मैं बहुत ज्यादा खुश भी नहीं हूं. सिद्धारमैया ने साफ किया.

हाईकमान का फैसला मानना ​​होगा

नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कांग्रेस विधायकों के दिल्ली जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘उन्हें दिल्ली जाने दें. आखिर में हाईकमान जो भी फैसला लेगा उसे सभी को मानना ​​होगा. सभी मंत्रियों को सहमत होना होगा. मुझे भी सहमत होना होगा और डीके शिवकुमार को भी सहमत होना होगा. नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे को कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है.’

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. इसमें मौजूदा तेजी से हो रहे राजनीतिक घटनाक्रम, कैबिनेट में फेरबदल और सत्ता हस्तांतरण के मुद्दों पर चर्चा हुई.

क्या जानलेवा बन रहा एसआईआर? अब तक कई राज्यों के करीब 15 बीएलओ की मौत

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नई दिल्ली। देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) अभियान के बीच बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) की मौतें चिंता का कारण बन रहीं हैं। सवाल ये है कि अब 6 राज्यों में 15 बीएलओ की मौत हो गई है। कारण जो भी रहे हों लेकिन मौत तो हुई है। इन काम का दबाव और कर्मचारियों का टोटा जैसे दिक्कतों से इनकार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि निर्वाचन आयोग की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार बड़े राज्यों में राजस्थान में सर्वाधिक 60.54 प्रतिशत फॉर्म डिजिटलाइज हुए हैं। वहीं, केरल में सबसे कम 10.58 प्रतिशत फॉर्म डिजिटल हो पाए हैं। कुल 98.98 प्रतिशत फॉर्म बंट चुके हैं।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के नदिया में बीएलओ रिंकू का शव घर की छत से लटका मिला। सुसाइड नोट भी मिला। राज्य में एसआईआर से जुड़ा दूसरा सुसाइड, तीसरी मौत है। राजस्थान के जयपुर में रविवार को बीएलओ मुकेश जांगिड़ (48) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी। करौली में बीएलओ की मौत। सवाई माधोपुर में एक बीएलओ को हार्ट अटैक। गुजरात में 4 दिन 4 बीएलओ की मौत अहमदाबाद में फारूक और दाहोद में बचूभाई बीमार, भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं। भोपाल में दो बीएलओ को हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। पश्चिम बंगाल में एक महिला बीएलओ ने भी आत्महत्या कर ली। मृतकों के परिजनों ने ज्यादा काम और लक्ष्य पूरा करने के दबाव को मौत का कारण बताया है।मप्र के रायसेन में शनिवार को बीएलओ रमाकांत पांडे की मौत हुई। परिजनों ने बताया कि योगेश चार रातों से नहीं सोया था। ऑनलाइन मीटिंग के बाद बेहोश होकर गिरा था। फिर बचाया नहीं जा सका। दमोह के सीताराम गोंड (50) भी फॉर्म भरते समय बीमार। इलाज के दौरान मौत। रायसेन के बीएलओ नारायण सोनी छह दिन से लापता हैं। परिजनों ने कहा, टारगेट, देर रात मीटिंग और निलंबन की चेतावनी से परेशान थे। भोपाल में शनिवार को काम कर रहीं बीएलओ कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया। दोनों भर्ती हैं। 6 नवंबर को दमोह में सड़क हादसे में श्याम शर्मा (45) की मौत। दतिया के उदयभान सिहारे (50) ने 11 नवंबर को खुदकुशी की।

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Khyati Infra Mart Expands with 12 Experience Centres and Launches FOCO Franchise Model in Delhi NCR

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New Delhi, 23 November 2025:
Khyati Infra Mart, a rapidly growing construction materials marketplace, has strengthened its presence in Delhi NCR with the establishment of 12 Company-Owned Experience Centres across Delhi, Noida, Greater Noida, Ghaziabad, Faridabad, and Gurugram. Alongside this expansion, the company has introduced its Franchise-Owned, Company-Operated (FOCO) Model, aimed at offering secure business opportunities to new entrepreneurs while enhancing the buying experience for customers.

According to the company, the dual move—expanding company-owned touchpoints and launching a franchise model—marks a significant step in modernising the region’s construction material supply chain.

12 Company-Owned Experience Centres Across NCR

Khyati Infra Mart’s Experience Centres serve as physical hubs for buyers, contractors and builders to understand products, compare prices, and explore brand options before placing orders. The company states that these centres are designed to simplify the purchasing journey for construction materials through expert guidance and real-time support.

  • Each Experience Centre provides:
  • Product information and material recommendations
  • Live price checking for TMT, cement, bricks, aggregates, RMC and more
  • Assistance with order booking through the company’s digital platform
  • On-site support from trained construction material experts
  • Instant access to multiple brand options and price comparisons
  • Seamless link to company-operated logistics for fast delivery

The centres are strategically located to cover all major construction hubs within Delhi NCR, enabling both walk-in customers and contractors to get reliable assistance without delays.

FOCO Model: Franchise-Owned, Company-Operated

Along with the expansion of retail presence, Khyati Infra Mart has rolled out its FOCO franchise model. Under this system, franchise units are owned by entrepreneurs, while all day-to-day operations are managed directly by the company.

  • The company handles:
  • Sourcing from verified manufacturers
  • Operations, delivery and logistics
  • Digital platform management
  • Marketing and brand promotions
  • Customer service and complaint resolution
  • Quality checks and material verification

Officials say this structure ensures operational consistency and reduces risks for investors.

Opportunity for New Entrepreneurs

The FOCO model is positioned as a low-risk, steady-income opportunity for new and young entrepreneurs in Delhi NCR. Franchise owners invest in the unit, while all business activities—sales, service, staffing, supply chain and deliveries—are run entirely by Khyati Infra Mart.

The company’s revenue-sharing structure enables entrepreneurs to earn without managing operational complexities.

Benefits for Buyers Across Delhi NCR

With Experience Centres and a FOCO model operating together, buyers benefit through:

  • Best market prices on all major construction materials
  • Multiple brand options under one roof
  • Free and timely doorstep delivery
  • Quality assurance and verified products
  • Expert guidance from trained staff
  • Simplified purchase process via app + physical touchpoints

Founder’s Vision

Speaking on the expansion, Avinash Kumar Bhatt, Founder of Khyati Infra Mart, said:

 “Our goal is to build India’s most organised, transparent, and technology-driven construction material supply network, starting with Delhi NCR. The 12 Experience Centres and our FOCO franchise model are steps toward creating a seamless ecosystem for buyers as well as entrepreneurs.”

He added that the company aims to bring reliability, competitive pricing and professional service to a sector traditionally dominated by fragmented supply channels.

Strengthening the Construction Supply Chain

Industry watchers believe that the Experience Centres, combined with the FOCO model, position Khyati Infra Mart as a strong emerging player in the NCR construction market. The company’s hybrid strategy—physical presence + digital platform + centralised operations—is expected to drive its next phase of growth.

 

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