अब बिना सिम के नहीं चलेगा WhatsApp-Telegram…सरकार क्यों ला रही यह नया कानून?

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SIM Binding Rule: भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. अब देश में WhatsApp, Telegram, Signal और Snapchat जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स को एक्टिव सिम कार्ड के बिना इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. DoT ने इन ऐप्स के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है, जिससे करोड़ों भारतीय यूजर्स की डिजिटल आदतों में बड़ा बदलाव आने वाला है.

क्या है नया ‘SIM-बाइंडिंग’ नियम?
SIM-बाइंडिंग, दूरसंचार विभाग के नए नियम ‘Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025’ का हिस्सा हैं. इन नियमों के तहत, मैसेजिंग ऐप्स को TIUEs की कैटेगरी में डाला गया है. अब इन ऐप्स को लगातार यह पक्का करना होगा कि यूजर का मैसेजिंग अकाउंट हमेशा उस सिम कार्ड से जुड़ा रहे, जिसका इस्तेमाल वेरिफिकेशन के लिए किया गया था, और वह सिम कार्ड डिवाइस में सक्रिय स्थिति में मौजूद हो.

नए नियम के बाद अगर सिम कार्ड हटाया जाता है या फिर इनएक्टिव हो जाता है, या फोन में मौजूद नहीं होता है, तो ऐप तुरंत काम करना बंद कर देगा. इस नियम को लागू करने के लिए सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को 90 दिनों का विंडो दिया है. व्हाट्सएप वेब या टेलीग्राम वेब जैसे वेब/डेस्कटॉप वर्जन अब हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएंगे.

साइबर फ्रॉड पर लगाम
सरकार का कहना है कि यह कदम देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और साइबर अपराधों को कम करने के लिए उठाया गया है. अभी तक, ज्यादातर मैसेजिंग ऐप्स केवल इंस्टॉलेशन के समय मोबाइल नंबर को एक बार OTP के जरिए वेरिफाई करते हैं. इसके बाद, अगर यूजर बिना सिम के भी साइट को इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन अब नए नियम के तहत ऐसा नहीं हो सकेगा. ‘सिम-बाइंडिंग’ के तहत अकाउंट को सिम कार्ड के साथ जोड़ दिया जाएगा. इससे साइबर फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी.

इंटरनेशनल टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, ISI कनेक्शन वाले 3 आतंकी गिरफ्तार

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उत्तर भारत के तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, ये आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े आतंकवादी शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। गिरफ्तारियां मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश से की गई हैं।

आरोपियों का प्रोफाइल

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आतंकवादी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल सभी से गहन पूछताछ जारी है ताकि उनके आतंकवादी नेटवर्क और योजनाओं का खुलासा किया जा सके।

दिल्ली ब्लास्ट से संभावित कनेक्शन

माना जा रहा है कि ये आरोपी दिल्ली ब्लास्ट से भी जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले के सभी विवरण सामने आने की उम्मीद है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस और आगे की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। इसमें पुलिस कई अहम खुलासे कर सकती है, जिसमें आतंकवादियों के नेटवर्क, हथियारों और संभावित हमलों की जानकारी शामिल हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित तारों का स्पष्ट विवरण मिलेगा।

70 बम किसने रखे? पुलिस के उड़े होश, जानिए क्या है पूरा मामला

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WB Police Bomb Recovery की बड़ी खबर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आई है, जहां पुलिस ने तीन प्लास्टिक बैग से 70 सॉकेट बम बरामद किए। दिल्ली कार ब्लास्ट कांड के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, ऐसे में भारी मात्रा में बम मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने तुरंत रानीनगर थाना क्षेत्र के कुपिला बिस्वास पाड़ा इलाके को सील कर दिया और सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी।

घटना शुक्रवार सुबह सामने आई जब पुलिस नियमित गश्त के दौरान संदिग्ध प्लास्टिक बैगों पर पहुंची। बैग खोलने पर अंदर भारी मात्रा में सॉकेट बम पाए गए। बरामदगी के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई अनहोनी न हो।

न्यूज़ एजेंसी AINS के मुताबिक, “रानीनगर (डोमकल) थाना अंतर्गत कुपिला बिस्वास पाड़ा के पास तीन प्लास्टिक जार से कुल 70 सॉकेट बम जब्त किए गए हैं। डोमकल पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और मामले की जानकारी जिला बम निरोधक दस्ते व पश्चिम बंगाल CID को दे दी गई है।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले भी मुर्शिदाबाद में 85 बम बरामद किए जा चुके हैं, जो जिले में अवैध विस्फोटक गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाते हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि इन बमों को कहां रखा गया था, किसने लाया और इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था।

फिलहाल, बम निरोधक दस्ते ने बरामद सामग्री को सुरक्षित तरीके से निष्प्रभावी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। WB Police Bomb Recovery के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और पुलिस सभी संभावित लिंक की जांच में जुटी हुई है।

स्वाद के साथ सेहत भी! नाश्ते में बनाएं ये गुजराती हांडवो, परिवार में सब मांगेंगे बार-बार…नोट करें विधि

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Handvo Recipe गुजरात की उन पारंपरिक डिशों में से एक है, जो स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखती है। दाल, चावल और ताज़ी सब्ज़ियों से बना यह नमकीन केक प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है। इसकी खासियत यह है कि आप इसे गैस, ओवन या अप्पे पैन—कहीं भी आसानी से बना सकते हैं। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से बेहद सॉफ्ट टेक्सचर के कारण Handvo Recipe हर उम्र के लोगों की पसंद बन जाती है।

हांडवो की हल्की खटास, तिल और सरसों के तड़के की खुशबू और सब्जियों का स्वाद इसे और भी खास बनाता है। इसे बनाने के लिए चावल और तीनों दालों को चार घंटे भिगोकर दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद इसमें दही मिलाकर रातभर के लिए फर्मेंट होने दिया जाता है। हल्की खटास आने के बाद बैटर में कद्दूकस लौकी, अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर मीडियम कंसिस्टेंसी तैयार की जाती है।

अब एक पैन में तेल गर्म करके राई, तिल और करी पत्ते का तड़का लगाया जाता है। यह तड़का बैटर में मिलाने के बाद पकाने के ठीक पहले ईनो डालकर तुरंत मिक्स किया जाता है, जिससे हांडवो अच्छी तरह फूलेगा। एक मोटे तले की कढ़ाही या पैन को चिकना करके बैटर डालें और धीमी आंच पर 12–15 मिनट पकाएं। नीचे की सतह सुनहरी होने पर हांडवो पलटें और दूसरी तरफ भी पकाएं। चाहें तो इसे ओवन में भी बेक किया जा सकता है।

हांडवो हल्का ठंडा होने पर टुकड़ों में काट लें और हरी चटनी या इमली की मीठी-तीखी चटनी के साथ परोसें। पौष्टिक, स्वादिष्ट और आसानी से बनने वाली यह Handvo Recipe शाम की चाय के लिए एक परफेक्ट स्नैक है।

SIR’ अपडेट की समय सीमा बढ़ी, अब इस तारीख तक जोड़ सकेंगे नाम, जानें नया मौका

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SIR Update: चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया की समय सीमा 11 दिसंबर तक बढ़ा दी है. वहीं, ड्राफ्ट रोल की तिथि 1 जनवरी 2026 रखी गई है. पहले चुनाव आयोग ने इसके लिए 4 दिसंबर तक की समय सीमा तय की थी.

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पीएम मोदी ने कृषि, खेल, विज्ञान और संस्कृति पर रखे विचार, जानें बड़ी बातें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 30 नवंबर 2025 को मन की बात का 128वां एपिसोड देश को संबोधित किया। इस प्रसारण को कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और विभिन्न नेताओं ने सुना। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कृषि, खेल, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विज्ञान-तकनीक के महत्वपूर्ण मुद्दों को विस्तार से रखा।

पीएम मोदी ने कहा कि नवंबर का महीना देश के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आशाओं से भरा रहा। 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। वहीं वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरुआत की गई। 25 नवंबर को अयोध्या के राम मंदिर में धर्म ध्वजा फहराई गई। उसी दिन कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पांचजन्य स्मारक का लोकार्पण भी हुआ।

कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले 10 वर्षों की तुलना में 100 मिलियन टन अधिक है। उन्होंने इसे किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों का परिणाम बताया।

खेल और विज्ञान में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

पीएम मोदी ने कहा कि भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। विमानन क्षेत्र में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) सेक्टर में बड़ी प्रगति हुई है। पिछले सप्ताह INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल हुआ। इसके साथ ही स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस ने देश के अंतरिक्ष इकोसिस्टम को नई गति दी है। खेल जगत में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब भारत राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा, जो देश की बड़ी उपलब्धि है।

काशी तमिल संगमम का उल्लेख

पीएम मोदी ने बताया कि चौथा काशी तमिल संगमम 2 दिसंबर से वाराणसी के नमो घाट पर शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष का थीम ‘तमिल करकलम’ यानी तमिल सीखें रखा गया है। उन्होंने तमिल भाषा और संस्कृति को भारत की प्राचीन धरोहर बताते हुए इसकी विशेषता पर प्रकाश डाला।

इसरो की ड्रोन प्रतियोगिता पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने हाल ही में वायरल हुए इसरो की ड्रोन प्रतियोगिता के एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें युवाओं ने मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में बिना GPS सपोर्ट के ड्रोन उड़ाने की चुनौती स्वीकार की। पुणे की टीम ने कई बार असफल होने के बाद अंततः सफलता हासिल की। पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं का यही जज़्बा और दृढ़ संकल्प भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगा। उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलताओं को पार कर आगे बढ़ना ही भारत की असली ताकत है।

बिहार में अगले महीने हो सकता है नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार, JDU के 6 और बीजेपी के 3 विधायक बनेंगे मंत्री

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नई दिल्ली: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार (NDA government) का मंत्रिमंडल विस्तार अगले महीने होने की संभावना है. सूत्रों की मानें तो जेडीयू मंत्रिमंडल (JDU cabinet) में अपने कोटे के 6 खाली पदों को भरने की तैयारी में है, जिसके जरिए पार्टी राज्य में सामाजिक और जातीय समीकरण साधेगी. सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में अभी 9 मंत्री पद खाली हैं, इनमें जेडीयू कोटे के 6 और बीजेपी कोटे के 3 पद शामिल हैं.

बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को लेकर अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं. एनडीए के सहयोगी दलों के बीच मंत्रिमंडल में मंत्री पद के बंटवारे के फार्मूले के अनुसार बीजेपी के हिस्से में 17, जेडीयू के हिस्से में 15 (सीएम मिलाकर), एलजेपी के हिस्से में 2, एचएएम और आरएलपी के हिस्से में एक-एक मंत्री पद आए थे. इस हिसाब से बीजेपी के खाते से 3 और जेडीयू के खाते से 6 और मंत्री नीतीश कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं.

सूत्रों के अनुसार जेडीयू कुशवाह और अति पिछड़े वर्ग के विधायकों को मंत्री बनाएगी. अभी जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास पांच, विजय चौधरी के पास चार और श्रवण कुमार एवं सुनील कुमार के पास दो-दो विभाग हैं. वहीं भाजपा कोटे के मंत्री विजय सिंह, मंगल पांडेय, नितिन नवीन और अरुण शंकर प्रसाद के पास भी दो-दो विभाग हैं. ऐसे में नए मंत्रियों के पास इनमें से कुछ विभाग जा सकते हैं.

जेडीयू के पास नए चेहरों को मौका देने की गुंजाइश है. हालांकि जेडीयू सूत्रों ने इस बात से इनकार किया कि पार्टी की नजरें दूसरे दलों के विधायकों पर हैं और उन्हें तोड़ कर जेडीयू में मिलाने की कोशिश हो रही है और उन्हें मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है. जेडीयू सूत्रों के अनुसार इसकी कोई आवश्यकता भी नहीं है और पार्टी ऐसा करना भी नहीं चाहती. बिहार में राज्य सभा चुनाव में अभी 6 महीने का समय है और मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए सभी पांच सीटें जीतने की स्थिति में है, लिहाजा दूसरे दलों के समर्थन की फिलहाल आवश्यकता नहीं है.

उत्तराखंड आने वाले बाहरी वाहनों का एक दिसंबर से नहीं कटेगा ग्रीन सेस, जानिए कारण

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देहरादून: उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया अभी धरातल पर उतरने में समय लग सकता है. दरअसल, परिवहन विभाग ने एक दिसंबर से ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया को शुरू करने की बात कही थी. लेकिन ग्रीन सेस कलेक्शन के लिए तैयार सॉफ्टवेयर का अभी तक एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) और भारत सरकार की वाहन डेटा बेस से इंटीग्रेशन नहीं हो पाया है. ऐसे में उत्तराखंड राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से एक दिसंबर से ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी. हालांकि, संभावना जताई जा रही है कि दिसंबर महीने के दूसरे हफ्ते से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

उत्तराखंड राज्य में हर साल लाखों की संख्या में वाहन अन्य राज्यों से आते हैं. जिससे प्रदेश के पर्यावरण पर अतिरिक्त पॉल्यूशन का भार पड़ता है. साथ ही सड़क पर भी दबाव पड़ता है. जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने का निर्णय लिया है.

दरअसल, साल 2024 की शुरुआत में ही उत्तराखंड सरकार ने अन्य राज्यों की गाड़ियों से ग्रीन सेस वसूलने संबंधित अधिसूचना जारी कर दी थी. लेकिन अभी तक ये प्रक्रिया, प्रदेश में लागू नहीं हो पाई है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इसी महीने ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

वहीं, परिवहन विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने कहा कि ग्रीन सेस कलेक्शन एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) के जरिए किया जाएगा. पहली बार उत्तराखंड में एएनपीआर के जरिए कलेक्शन करने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, क्योंकि कहीं भी वर्तमान समय में एएनपीआर के जरिए टैक्स या फिर सेस एकत्र नहीं लिया जा रहा है, बल्कि फास्ट टैग के जरिए कलेक्शन किया जा रहा है. हालांकि, परिवहन विभाग ने जो ये व्यवस्था की है, उसके तहत एएनपीआर के जरिए फास्ट टैग वॉलेट से पैसा कटेगा. प्रदेश भर के 37 जगह पर 150 एनपीआर कैमरे लगाए जा चुके हैं. ऐसे में एनपीआर कैमरे के जरिए ग्रीन सेस कलेक्शन के लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जा चुका है.

साथ ही कहा कि ऐसे में सॉफ्टवेयर का, भारत सरकार के वाहनों के डाटाबेस और एनपीसीआई से इंटीग्रेशन किया जाना है, जिसका काम वर्तमान समय में चल रहा है. हालांकि, लक्ष्य रखा गया था कि दिसंबर महीने में इस काम को पूरा कर लिया जाएगा और ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. साथ ही बताया कि परिवहन विभाग ने पहले एक दिसंबर से ही ग्रीन सेस कलेक्शन के लिए रणनीतियां तैयार की थी. लेकिन, वर्तमान समय में लगभग 10 से 12 दिन का समय और लगने की संभावना है. लिहाजा, इसी महीने ही ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इंटीग्रेशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरी की जाने को लेकर परिवहन विभाग की टीम भी दिल्ली भेजी गई थी.
 

कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता हस्तांतरण को लेकर तनाव जारी, डीके शिवकुमार याद दिला रहे ढाई-ढाई साल का वादा

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नई दिल्‍ली । कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस (Congress) के लिए संकट अभी टला नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार (Deputy DK Shivakumar) के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर दबाव की राजनीति जारी है। इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और शिवकुमार को नई दिल्ली तलब किया है। यह कदम राज्य में गहराते नेतृत्व संकट को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सूत्रों के कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच एक डील हुई थी। डील में ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला दिया गया है। अब जब सिद्धारमैया की मियाद पूरी हो चुकी है तो वह कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इसे देखते हुए शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान को उनको दिया गया वादा याद दिलाया है।

कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच एक मौखिक सहमति बनी थी जिसके तहत सिद्धारमैया ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे और शेष अवधि के लिए शिवकुमार बागडोर संभालेंगे। हालांकि इस व्यवस्था को आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन शिवकुमार द्वारा हाल ही में यह खुलासा किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया कि 5-6 शीर्ष नेताओं के बीच एक समझ बनी थी।

घटनाक्रम से परिचित एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “यह आपसी एक समझ थी। कोर कमेटी में हर कोई जानता था कि सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले पर चर्चा हुई थी। हाईकमान को अब यह स्पष्ट करना होगा कि क्या इसे औपचारिक रूप दिया गया था या यह एक मौखिक वादे के रूप में छोड़ दिया गया था।” इस मुद्दे को जल्दी न सुलझा पाने के कारण संदेह और दबाव की रणनीति के लिए जगह बन गई है।

डीके शिवकुमार ने दबाव की राजनीति तेज कर दी है। उन्होंने हाल ही में एक पोस्ट के जरिए सिद्धारमैया और कांग्रेस आलाकमान को परोक्ष रूप से वचन निभाने की बात याद दिलाई। शिवकुमार यह चाहते हैं कि इस मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान कोई न कोई जवाब दे।

शिवकुमार के प्रति सहानुभूति रखने वाले नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से परे है। एक वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी ने कहा, “यदि पार्टी कोई वचन देती है, तो उसे उस पर कायम रहना चाहिए। यह केवल एक नेता या एक पद की बात नहीं है। यह विश्वसनीयता की बात है।” वहीं, सिद्धारमैया खेमे के एक पदाधिकारी ने अभी भी यही रुख बनाए रखा है कि कोई बाध्यकारी व्यवस्था नहीं थी।

इस सबके बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस संकट को सुलझाने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इसकी कोशिशें तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व के मुद्दे को सुलझाने के लिए 29 या 30 नवंबर को नई दिल्ली में एक बैठक होने की संभावना है, जिसमें सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों को बुलाया गया है। एक नेता ने कहा कि उनका उद्देश्य गुस्सा शांत करना और राजनीतिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था खोजना है, क्योंकि अब शिवकुमार की उपेक्षा करना कोई विकल्प नहीं रहा।

हाईकमान ने पहले दोनों नेताओं को आपस में मिलकर बात करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद दिल्ली में अंतिम फैसला होगा। इसके अनुसार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नाश्ते पर आमंत्रित किया है।

पंजाब के लुधियाना में साइकिल फैक्ट्री में बॉयलर फटा, मजदूर की मौत, कई घायल

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लुधियाना (पंजाब): लुधियाना जिले में शनिवार को साइकिल पार्ट्स बनाने वाली एक फैक्ट्री में बॉयलर विस्फोट होने से एक मजदूर की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए. यह बड़ा हादसा गिल रोड पर स्थित यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के पीछे अजीत साइकिल पार्ट्स फैक्ट्री में बॉयलर फटने के कारण हुआ.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फैक्ट्री में साइकिल के फ्रेम पेंट किए जाते हैं. हादसे के समय फैक्ट्री में मजदूर काम कर रहे थे. 60 साल के एक मजदूर की मौत हो गई.

फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि “जब यह हादसा हुआ, तब वे फैक्ट्री में काम कर रहे थे, तभी अचानक धमाका हुआ. हादसे में दो लोग बच गए, लेकिन एक की आग में जलने से मौत हो गई.”

मजदूरों ने बताया कि पेंटिंग फैक्ट्री है, जहां साइकिल के पार्ट्स भी बनते हैं. उन्होंने बताया कि पेंट गर्म करने वाली भट्टी के फटने से यह हादसा हुआ. जब हादसा हुआ, तब भट्टी के पास 10 से 12 मजदूर काम कर रहे थे और इसकी चपेट में आ गए. कई मजदूरों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.

हालांकि, आग पर काबू पा लिया गया है. भट्टी में आग कैसे लगी और धमाका कैसे हुआ, इसका पता नहीं चल पाया है. सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) शिमलापुरी ने बताया कि हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिनकी गिनती की जा रही है. उन्होंने बताया कि मौके पर फायर ब्रिगेड की 2 गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया है.

एसीपी ने कहा कि आग शाम करीब 7 बजे लगी थी और उसके बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन हादसे में एक मौत जरूर हुई है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मरने वाले की पहचान हो गई है और उसके परिवार वालों को भी बता दिया गया है.