आलोक शर्मा का बड़ा कदम, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भेजा पत्र

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नई दिल्ली।  IAS संतोष वर्मा का मामला शांत होने के नाम नहीं ले रहा है. ब्राह्मण समाज में अधिकारी के बयान को लेकर आक्रोश है. आमजन से लेकर नेता तक अधिकारी की बर्खास्तगी की बात कह रहे हैं. भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की. इसके साथ ही उन्होंने संतोष वर्मा को पद से बर्खास्त करने की मांग की।

विभागीय जांच की भी मांग की

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में सांसद ने ये मांग की कि IAS संतोष वर्मा के विरूद्ध तत्काल विभागीय जांच की जानी चाहिए. जांच लंबित रहने तक उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए, जिससे वे पद का दुरुपयोग ना कर सकें. इसके साथ ही जांच में सत्यता पाई जाती है तो बर्खास्तगी जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए. सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके सांसद आलोक शर्मा ने लिखा कि आज (मंगलवार) संसद भवन में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जी से भेंट कर भोपाल में विगत दिनों आईएएस संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की बेटियों के बारे में दिए गए बयान पर संज्ञान लेने और दोषी पाए जाने पर संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शिकायत की।

ब्राह्मण समाज पर दिया था विवादित बयान

अजाक्स का प्रांतीय अधिवेशन 23 नवंबर को भोपाल में आयोजित किया गया था. इस अधिवेशन को संबोधित करते हुए IAS अधिकारी संतोष वर्मा ने कहा था कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान ना कर दे या उसके साथ संबंध ना बना दे, तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।

IAS मांग चुके हैं माफी

उन्होंने कहा था कि मेरे बयान में दान से मतलब कन्यादान से है. मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. कुछ लोगों ने स्वार्थसिद्ध करने के लिए ऐसा किया. बयान को वायरल किया. मेरे 27 मिनट के भाषण में से 1-2 लाइन निकाल करके प्रचारित किया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मेरी टिप्पणी से किसी समाज को जाने-अनजाने में ठेस पहुंची है तो माफी मांगता हूं।

15 चौके-छक्कों के साथ तूफानी शतक, करियर में पहली बार अनोखा रिकॉर्ड

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क्रिकेट | टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए जूझ रहे मुंबई के युवा बल्लेबाज सरफराज खान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर उन्हें मौका मिले तो वह किसी भी बॉलिंग लाइनअप की धज्जियां उड़ा सकते हैं. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में असम के खिलाफ खेले गए मुकाबले में सरफराज ने एक शतकीय पारी खेली. खास बात ये भी रही कि उन्होंने अपने टी20 करियर में पहली बार शतक जड़ने का कारनामा किया, जिसके चलते मुंबई की टीम इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 से ज्यादा रन बनाने में कामयाब रही |

सरफराज खान का तूफानी शतक

सरफराज खान ने असम के खिलाफ इस मैच में सिर्फ 47 गेंदों पर नाबाद 100 रनों की विस्फोटक पारी खेली. इसमें 8 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे. यह पारी ऐसे वक्त आई है जब टीम इंडिया के दरवाजे पर लगातार दस्तक दे रहे इस बल्लेबाज को सबसे ज्यादा जरूरत थी. पिछले दो साल से सरफराज घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे हैं. रणजी ट्रॉफी में लगातार बड़े-बड़े शतक, डेब्यू टेस्ट में अर्धशतक, फिर भी भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है |

अब टाइमिंग की बात करें तो यह पारी इससे बेहतर वक्त पर नहीं आ सकती थी. दिसंबर के अंत में IPL 2026 का मेगा ऑक्शन होने वाला है. आईपीएल 2023 के बाद दिल्ली कैपिटल्स ने सरफराज को रिटेन नहीं किया था और वह अनसोल्ड भी रह गए थे. इस बार कई फ्रेंचाइजी के पास बड़ा पर्स है और मिडिल ऑर्डर में आक्रामक भारतीय बल्लेबाज की तलाश हर टीम को है. ऐसे में 47 गेंदों में शतक ठोककर सरफराज ने साफ संदेश दे दिया है कि वह सिर्फ रेड-बॉल क्रिकेट के ही नहीं, सफेद गेंद के भी बड़े मैच विनर हो सकते है |

मुंबई की टीम ने बनाए 220 रन

मुंबई की टीम ने इस मैच में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की, लेकिन वह बोर्ड पर एक बड़ा स्कोर लगाने में कामयाब रही. मुंबई ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 220 रन बनाए. इस दौरान सरफराज खान के अलावा अजिंक्य रहाणे ने भी 42 रनों की शानदार पारी खेली. वहीं, साईराज पाटिल ने 9 गेंदों पर नाबाद 25 रन बनाए. सूर्यकुमार यादव ने भी 20 रन और आयुष म्हात्रे ने 21 रनों का योगदान दिया |

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अयोध्या में अब 52 एकड़ में बनेगा विश्वस्तरीय ‘मंदिर संग्रहालय’, UP सरकार और टाटा संस के बीच MOU

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Goverment) ने अयोध्या (Ayodhya) को एक वैश्विक सांस्कृतिक (Global Cultural) और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल (State Cabinet) की बैठक में ‘टाटा संस’ (Tata Sons) के सहयोग से प्रस्तावित विश्वस्तरीय ‘मंदिर संग्रहालय’ का दायरा और बड़ा कर दिया है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम से अयोध्या को एक नया सांस्कृतिक पहचान चिन्ह मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।

उन्होंने बताया कि यह परियोजना अयोध्या के मांझा जमथरा गांव में 25 एकड़ नजूल भूमि पर प्रस्तावित थी। लेकिन संग्रहालय की भव्यता और विश्वस्तरीय स्वरूप को ध्यान में रखते हुए टाटा संस ने अधिक भूमि की अपेक्षा की थी। अब परियोजना के लिए कुल 52.102 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। इसमें पहले की 25 एकड़ नजूल भूमि शामिल है।

इसके अतिरिक्त 27.102 एकड़ भूमि और जोड़ी गई है। यह कुल 52.102 एकड़ भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी, ताकि परियोजना को वृहद रूप दिया जा सके। भूमि टाटा संस को 90 वर्षों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

 

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BB19 में बढ़ा हंगामा! तान्या मित्तल का मीडिया के सामने फूटा गुस्सा, राम नाम पर जमकर संग्राम

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बिग बॉस 19 | सलमान खान के शो बिग बॉस 19 में मीडिया राउंड के दौरान तान्या मित्तल ने काफी शानदार तरीके से जवाब दिया.इस दौरान वो सबको प्यार से राम-राम करते ग्रीट करती हुई नजर आईं.इसी बीच एक और सवाल के दौरान जब तान्या ने राम-राम कहा तो कुछ मीडिया पर्सन्स हंस पड़े |

तान्या को इस पर गुस्सा आ गया और उन्होंने अपने दिल की भड़ास सबके सामने निकाल दी. हालांकि, मीडिया पर्सन्स को कहना पड़ा कि वो उनके राम-राम बोलने पर नहीं बल्कि प्रिडिक्टिबल होने पर हंस रहे थे.बिग बॉस 19 में जब ये घोषणा हुई की घरवालों को मीडिया से मिलता है तो तान्या की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था |

तान्या के जवाब थे कॉमन

तान्या ने कहा था कि वो पहली बार मुंबई की मीडिया से मिलेंगी जो कि उनके लिए आ रही है.वो काफी खुश थीं. मीडिया पर्सन्स ने तान्या से कई सावल पूछे.उन्हें हर सवाल का जवाब देते हुए रिपोर्टर का नाम लेकर राम-राम बोलते हुए देखा गया था.वैसे तो उनके जवाब भी कॉमन ही थे, लेकिन कॉन्फिडेंस गजब का था | 4-5 बार सेम पैटर्न रिपीट होने के बाद जब तान्या ने राम-राम कहा तो कुछ रिपोर्टर्स हंस पड़े.तान्या ने इस पर कहा,’मैं अपने रामजी पर बहुत भरोसा करती हूं. वो बोलीं, हमारे यहां जब किसी को ग्रीट करते हैं तो ऐसे ही करते हैं.मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगी कि इस पर ना हंसे थोड़ा से डेकोरम लगेगा यहां का भी. मुझे भी अच्छा लगेगा कि मैं नमस्ते की जगह जयश्री राम बोलती हूं |

मीडिया ने कहा-गलत नैरेटिव सेट मत कीजिए

मीडिया के लोगों ने इस पर जवाब देते हुए तान्या को बताया कि वो सब भगवान राम को बहुत मानते हैं. तान्या को एक जर्नलिस्ट ने जवाब दिया,’हम सब यहां जितने बैठे हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की हम बहुत इज्जत करते हैं. जो आप बोल रही हैं, हम आप पर हंसे थे क्योंकि आप बहुत प्रिडिक्टिबल हो गई हैं तो आप प्लीज गलत नैरेटिव मत सेट कीजिए |

1,355 खिलाड़ियों ने कराया रजिस्ट्रेशन, ग्लेन मैक्सवेल ने लिया चौंकाने वाला फैसला

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IPL 2026 Auction: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के मेगा ऑक्शन की तैयारियां तेज हो गई हैं. इस बार रजिस्ट्रेशन की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. ऑक्शन के लिए कुल 1,355 खिलाड़ियों ने अपना नाम रजिस्टर कराया है. इनमें से 45 खिलाड़ियों ने 2 करोड़ की बेस प्राइस पर अपना ना दिया है.

इस लिस्ट में कई विदेशी खिलाड़ियों के साथ बड़ी संख्या में घरेलू और इंटरनेशनल लेवल के भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने आश्चर्यजनक रूप से अपना नाम वापस ले लिया है.

मैक्सवेल का चौंकाने वाला फैसला

ऑक्शन की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर यह है कि ‘बिग शो’ ग्लेन मैक्सवेल ने इस साल के मिनी ऑक्शन में रजिस्टर नहीं किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मैक्सवेल ने कुछ निजी और इंटरनेशनल कारणों के चलते अंतिम समय में अपना नाम वापस लेने का फैसला किया है. उन्होंने अपने बयान में अपने पिछले साल के खराब प्रदर्शन का भी जिक्र किया. आईपीएल 2025 में मैक्सवेल का प्रदर्शन उनके नाम के जैसा नहीं रहा था.

भारतीय खिलाड़ियों की भरमार

रजिस्ट्रेशन कराने वाले 1,355 खिलाड़ियों में से, भारतीय खिलाड़ियों की संख्या सबसे अधिक है. इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जो पिछले सीजन में अनसोल्ड रहे थे, साथ ही वे युवा खिलाड़ी जिन्होंने हाल ही में घरेलू टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन किया है. कई अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी इस बार फ्रेंचाइजी का ध्यान अपनी ओर खींचने की उम्मीद कर रहे हैं.

2 करोड़ की बेस प्राइस वाले खिलाड़ी

रवि बिश्नोई, वेंकटेश अय्यर, मुजीब उर रहमान, नवीन उल हक, सीन एबॉट, एश्टन एगर, कूपर कोनोली, जेक फ्रेजर-मैकगर्क, कैमरून ग्रीन, जोश इंग्लिस, स्टीव स्मिथ, मुस्तफिजुर रहमान, गस एटकिंसन, टॉम बैंटन, टॉम कुरेन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, डैन लॉरेंस, लियाम लिविंगस्टोन, टाइमल मिल्स, जेमी स्मिथ, फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, डेवोन कॉनवे, जैकब डफी, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, एडम मिल्ने, डेरिल मिशेल, विल ओ’रूर्के, रचिन रवींद्र, गेराल्ड कोएत्ज़ी, डेविड मिलर, लुंगी एनगिडी, एनरिक नोर्त्जे, रिली रूसौ, तबरेज़ शम्सी, डेविड विसे, वानिंदु हसरंगा, मतेशा पथिराना, महेश थीकशाना, जेसन होल्डर, शाई होप, अकील होसेन, अल्ज़ारी जोसेफ

सरकार इसे हर फोन में क्यों इंस्टॉल कराना चाहती है और यह आपके लिए क्यों ज़रूरी है

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Sanchar Saathi App : अब सभी स्मार्टफोन्स में अनिवार्य होने जा रहा है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया है कि आने वाले तीन महीनों के भीतर हर नए स्मार्टफोन में यह ऐप प्री-इंस्टॉल होना चाहिए। खास बात यह है कि यूज़र इस ऐप को न तो डिलीट कर सकेंगे और न ही इसके किसी फीचर को छिपाया या बंद किया जा सकेगा। विभाग का दावा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी, नकली IMEI और मोबाइल चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने में मदद करेगा। सप्लाई चेन में मौजूद फोन में यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

सरकार ने बताया कि संचार साथी एक महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा एप्लिकेशन है, जिसे दूरसंचार विभाग ने 2023 में लॉन्च किया था। इसकी मदद से अब तक 7 लाख से अधिक चोरी या खोए मोबाइल फोन खोजे जा चुके हैं। सिर्फ अक्टूबर महीने में 50 हजार से ज्यादा फोन रिकवर किए गए। इस ऐप के जरिए मोबाइल को ट्रैक करने, ब्लॉक करने और IMEI नंबर की वैधता जांचने की सुविधा मिलती है, जिससे Sanchar Saathi App साइबर फ्रॉड रोकने में प्रभावी भूमिका निभाता है।

हालांकि, इस अनिवार्यता को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता सी. वेणुगोपाल ने इसे ‘बिग ब्रदर निगरानी’ बताते हुए कहा कि बिना अनुमति के एक ऐसा ऐप लागू करना जिसे अनइंस्टॉल भी नहीं किया जा सकता, नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ करार देते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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News Desk

अर्जुन तेंदुलकर की घातक गेंदबाज़ी, अकेले चटका दिए कई विकेट

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क्रिकेट | सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन ने गोवा को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार जीत दिलाई है. बाएं हाथ के इस गेंदबाज ने मध्य प्रदेश के खिलाफ तीन विकेट चटकाए और उनकी पावरप्ले में गेंदबाजी के दम पर विरोधी टीम बड़ा स्कोर नहीं बना सकी और फिर गोवा ने इस सीजन अपनी दूसरी जीत दर्ज की. गोवा ने मध्य प्रदेश को 7 विकेट से हरा दिया. पहले बल्लेबाजी करते हुए मध्य प्रदेश ने 170 रन बनाए, गोवा ने ये लक्ष्य 18.3 ओवर में भेद दिया. कप्तान सुयश प्रभुदेसाई ने नाबाद 75 रन ठोके और अभिनव तेजराना ने 55 रनों की पारी खेली. उनके अलावा अर्जुन तेंदुलकर ने भी बेहतरीन गेंदबाजी की. अर्जुन तेंदुलकर ने गोवा के लिए बेस्ट बॉलिंग प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट चटकाए |

अर्जुन तेंदुलकर का कमाल

अर्जुन तेंदुलकर ने गोवा के लिए पहला ओवर फेंका और इस खिलाड़ी ने पांचवीं गेंद पर ही शिवांग कुमार को आउट कर दिया. शिवांग खाता भी नहीं खोल पाए. इसके बाद अगले ओवर में ये खिलाड़ी अंकुश सिंह का भी विकेट ले गया. हालांकि डेथ ओवर्स में अर्जुन तेंदुलकर थोड़े महंगे साबित हुए लेकिन उन्होंने वेंकटेश अय्यर को 6 रन पर आउट कर अपना तीसरा शिकार किया. मध्य प्रदेश के लिए हरप्रीत सिंह ने नाबाद 80 रन बनाए. कप्तान रजत पाटीदार महज 29 रन ही बना सके. आखिर में अंकित वर्मा ने 4 छक्कों की मदद से 34 रन ठोके |

फिर ओपनिंग पर उतरे अर्जुन

अर्जुन तेंदुलकर ने ओपनिंग गेंदबाजी के बाद ओपनिंग बैटिंग भी की. इस खिलाड़ी ने आते ही तीन चौके लगाए लेकिन 16 के स्कोर पर वो तिरुपरेश सिंह का शिकार हो गए. गोवा को इसके बाद अभिनव तलरेजा और सुयद प्रभुदेसाई ने संभाल लिया. दोनों ने 66 गेंदों में 89 रनों की साझेदारी की. ललित यादव ने भी प्रभुदेसाई के साथ मिलकर सिर्फ 27 गेंदों में 57 रन जोड़कर टीम को जीत दिला दी |

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राहुल गांधी ने दी प्रतिक्रिया, संसद में ‘डॉग कंट्रोवर्सी’ पर तेज हुई सियासी जंग

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Rahul Gandhi Reaction Dog Controversy : बीच संसद का माहौल पहले दिन से ही गर्म है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी द्वारा संसद परिसर में कुत्ता लेकर पहुंचने के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक तकरार का बड़ा विषय बन गया है। भाजपा नेता जगदंबिका पाल ने इसे संसद की मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसी मुद्दे पर आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया देकर बहस को और तेज कर दिया।

मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “आज कुत्ता ही मेन टॉपिक है। बेचारे कुत्ते ने क्या किया? क्या कुत्तों को यहां आने की इजाजत नहीं है? शायद पालतू जानवरों को अनुमति नहीं है। मुझे लगता है कि आजकल भारत इन्हीं चीजों पर चर्चा कर रहा है।” उनके इस बयान के बाद भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

पूरा मामला क्या है?

शीतकालीन सत्र के पहले दिन रेणुका चौधरी एक पिल्ले को लेकर संसद पहुंचीं, जिसके बाद भाजपा ने संसद की गरिमा पर सवाल उठाए। जवाब में रेणुका चौधरी ने कहा कि उन्होंने पिल्ले को सड़क दुर्घटना से बचाने के लिए कार में बैठाया था। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा है और असली “काटने वाले” संसद में बैठे हैं—उनका यह बयान और भी विवादित हो गया।

भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी की टिप्पणी पर भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपने और रेणुका चौधरी के बयान टीवी पर देखकर अपना आचरण समझना चाहिए। पात्रा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने यह स्वीकार नहीं किया कि संसद में ऐसे कार्यों की अनुमति नहीं होती।

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Why PS Law Advocates Is Trusted in High-Conflict Divorce Cases

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PS Law Advocates & Solicitors has become a recognized name in complex matrimonial disputes across Delhi, Mumbai, and NRI circles. Known for handling long, contested divorces and difficult custody battles, the firm’s strength lies in its exclusive focus on family law. Advocate Preeti Singh, AOR at the Supreme Court, is frequently recommended when cases require strong strategy and consistent courtroom presence. From cross-border disputes to high-asset separations, the firm’s tactical approach and deep experience make it a go-to choice for litigants facing prolonged legal battles.

The Firm Commonly Mentioned in Difficult Divorce and Custody Battles

In recent years, one pattern has become noticeable in Delhi, Mumbai, and among NRI litigants dealing with contested matrimonial disputes — when the matter is complex, high-conflict, or high-stakes, the name “PS Law Advocates & Solicitors” and Advocate Preeti Singh repeatedly comes up in conversation. Among lawyers, litigants, and even in family court corridors, the firm is often spoken of in the context of difficult divorces that demand sustained courtroom strategy rather than routine litigation.

What appears to distinguish PS Law Advocates & Solicitors, which operates from New Delhi and Bandra, Mumbai, is its exclusive focus on family and matrimonial law. Unlike general litigation chambers that handle a wide variety of matters, PS Law limits its practice to divorce, child custody, maintenance, domestic violence proceedings, and NRI cross-border disputes. Observers often point out that this narrow focus allows the firm to build long-term tactical depth in contested divorce litigation — an area where experience over years matters far more than isolated appearances.

In legal circles, Preeti Singh, Advocate , also an Advocate-on-Record, Supreme Court of India, is widely recognised as a consistent presence in contentious matrimonial litigation. Her name surfaces particularly in matters involving prolonged contested divorces, Supreme Court matrimonial transfers, enforcement of maintenance and custody orders, and cross-jurisdictional family disputes. It is not uncommon for litigants to mention that they were directed to her by other lawyers once their cases reached a stage where strategic handling became critical.

What is also frequently discussed is the firm’s involvement in high-asset and business-family separations, where matrimonial disputes intersect with corporate structures, shareholdings, and reputation management. In such cases, divorce is not merely a personal dispute but a matter with financial and institutional consequences. Legal observers note that such matters tend to gravitate toward specialist divorce lawyers rather than general practitioners.

Among clients themselves, what travels fastest is not advertising but word-of-mouth based on outcomes and courtroom conduct. Many contested divorce litigants are not looking for quick settlements; they are looking for consistency, enforcement capability, and the ability to withstand long procedural battles. This is where PS Law’s name is often heard — particularly in disputes that extend across Delhi, Mumbai, and international jurisdictions.

Another reason the firm is frequently discussed in matrimonial circles is its handling of custody and shared parenting disputes. These matters, which often run parallel to divorce proceedings, demand sustained court supervision and delicate interim structuring. Several practitioners privately acknowledge that firms that restrict themselves to family law tend to develop a deeper command over such multi-layered proceedings.

From an industry standpoint, the growing visibility of PS Law aligns with a broader shift in Indian legal services — from general practice to subject-specialist boutique practice, especially in emotionally and procedurally complex areas like matrimonial law. As divorce litigation becomes increasingly technical, prolonged, and cross-jurisdictional, both lawyers and litigants appear to be gravitating toward firms that operate exclusively in this domain.

 

झारखंड में बिहार जैसा ‘खेला’ हेमंत सोरेन की BJP नेताओं से ‘गुप्त’ मुलाकात ने मचाया सियासी तूफान!

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JMM BJP Alliance Rumours: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली प्रचंड जीत का असर झारखंड तक दिखाई दे रहा है. राजनीति में चुप्पी अक्सर संकेतों की भाषा होती है. झारखंड की राजनीति वर्तमान समय में उस मोड़ पर खड़ी है, जहां किसी भी समय नया गठबंधन, नई दिशा या संतुलन की घोषणा हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता एवं पूर्व सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने भाजपा के एक दिग्गज नेता से मुलाकात की है, जिसमें साथ आने की प्राथमिक सहमति बनी है. हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है. यह तो आने वाले दिनों में ही क्लियर होगा. लेकिन एक बात तो साफ है कि इस मुलाकात ने झारखंड की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.

इसके साथ ही चर्चा यह भी है कि बाबूलाल मरांडी या चम्पाई सोरेन दोनों में से किसी एक को डिप्टी सीएम बनायाा जा सकता है. झारखंड में यह चर्चा भी उस समय चली, जब झारखंड में सत्ता संतुलन बदलने की कोई जरूरत नहीं दिखती है. इसलिए कहा यह भी जा रहा कि झारखंड में सत्ता का समीकरण भले ही सबको स्थिर दिख रहा है, लेकिन भीतरखाने में बदलाव की आहत तेज हो गई है.

अभी क्या है स्थिति?
झारखंड में वर्तमान समय में झामुमो-राजद और कांग्रेस के पास बहुमत है. वहीं, अगर इनमें से कोई भी सहयोगी दल अलग हो भी जाए तो झामुमो को कोई खास प्रभाव नहीं पडे़गा. वह अपने दम पर सरकार चला सकती है. इसके बावजूद भी आखिर ऐसी क्या जरूरत पड़ी की हेमंत भाजपा के बड़े नेताओं से मिल रहे हैं. राजनीतिक एक्सपर्ट की मानें तो इसकी कई वजहें हैं, जिसकी वजह से उन्हें हाथ मिलाने की जरूरत पड़ रही है.

एनडीए में क्यों शामिल हो सकती है झामुमो
झामुमो ने झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान कई वादे किए थे. जिसको पूरा करने के लिए आर्थिक फंड की काफी ज्यादा जरूरत है. यानी हेमंत की पार्टी आर्थिक संकटों से जूझ रही है. झामुमो ने विधानसभा में किए वादे को पूरा करने के लिए यह कदम उठा सकती है. क्योंकि मइयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह देने और धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,200 रुपये प्रति क्विंटल देने में सरकार को दिक्कत आ रही है.

केंद्र में महागठबंधन की सरकार नहीं है कि बजट मिल जाएगा. ऐसे में अगर बजट लाकर सरकार चलाना चाह रहे हैं तो उन्हें केंद्र सरकार से हाथ मिलाना ही पड़ेगा. वहीं, इससे भाजपा को भी झारखंड में राजनीतिक संतुलन बनाने में आसानी होगी. क्योंकि काफी समय से भाजपा आदिवासी वोटरों से दूर हो गई है. BJP के लिए यही सही मौका रहने वाला है. यानी झारखंड में किसी भी समय परिवर्तन की आहट सुनाई दे सकती है.