कर्नाटक में सीएम पद विवाद फिर गरमाया,यतींद्र के बयान से बढ़ी खींचतान

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बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर विवाद फिर उभर गया है। यह विवाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के बयान से शुरू हुआ। यतींद्र ने कहा कि हाई कमान ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने पहले भी कहा था कि जो लोग नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं, वे सपने देख रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व पहले ही इस मुद्दे को सुलझा चुका है। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने यतींद्र के बयान पर सीधे टिप्पणी नहीं की और कहा कि मुख्यमंत्री खुद ही इसका जवाब देंगे। हालांकि उनके समर्थक नाराज हो गए। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने यतींद्र की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और हाई कमान से ऊपर कोई नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने यतींद्र का समर्थन किया। शहरी विकास मंत्री बायरथी सुरेश ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन के बारे में हाई कमान का निर्देश स्पष्ट है और मुख्यमंत्री उसी का पालन करेंगे।

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देश की ‘स्वास्थ्य आपातकाल’ पर संसद में हड़कंप! राहुल गांधी ने मांगा एक्शन प्लान, जानें सरकार का जवाब और आगे क्या होगा?

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Parliament Winter Session Pollution Debate: दिल्ली में दमघोंटू हवा को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने सरकार से प्रदूषण करने को लेकर क्या प्लान है, इस पर सवाल किया और सरकार से चर्चा की मांग रखी. हालांकि सरकार ने राहुल गांधी की बातों को सुना और चर्चा के लिए राजी हो गई. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने पहले ही दिन स्पष्ट किया था कि विपक्ष के सुझावों को साथ लेकर सभी महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए तैयार हैं.

राहुल गांधी ने सदन में कहा कि वायु प्रदूषण के मुद्दे पर हमारी तरफ से कोई ब्लेम गेम नहीं होगा. इस गंभीर चुनौती के पार पाने के लिए हम सरकार के साथ सहयोग करेंगे. इससे लाखों बच्चे फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे हैं. उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है. इसका कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए. प्रदूषण को लेकर हमको एक-दूसरे पर ब्लेम की बजाय कोई रास्ता निकालना चाहिए. सरकार इसके लिए प्लान बनाए. ताकि देशहित में ठोस कदम उठाया जा सके.

क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी संसद में बोले, “हमारे अधिकांश बड़े शहर जहरीली हवा की चादर पर लिपटे हुए हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को सांस लेने में परेशानी हो रही है. यह एक गंभीर मुद्दा है. इस पर मुझे पूर्ण विश्वास भी है कि सरकार और हमारे बीच इस मुद्दे पर पूर्ण सहमति होगी. यह कोई वैचारिक मुद्दा नहीं है, सभी को इस पर सहयोग करने की जरूरत है. प्रदूषण का कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए. इसके लिए सरकार और विपक्ष दोनों लोग बैठकर चर्चा करें और प्रदूषण को लेकर अलग-अलग प्लान बनाएं.”

राहुल गांधी ने इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहल करने की अपील की है. राहुल गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में बहस होनी चाहिए. ताकि इसका निदान निकाला जा सके. यह आरोप न लगाएं कि यह आपने क्यों नहीं किया और न ही यह कहें कि हमने क्या नहीं किया. हमें इस पर ध्यान देना है कि भारत के लोगों के लिए क्या करने जा रहे हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए. एक-दूसरे पर दोषारोपण की बजाय भारत के भविष्य के बारे में बात करनी होगी.

सरकार चर्चा के लिए तैयार
राहुल गांधी के मुद्दे पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं. इस मुद्दे को बिजनेस एडवाइजरी कमिटी के संज्ञान में भी लाया गया है. सरकार ने पहले ही विपक्ष की बातों पर चर्चा करने की बात कह चुकी है. जल्द ही वायु प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा.

सीएम ममता बनर्जी ने नहीं भरा एसआईआर फॉर्म, बोलीं- इससे बेहतर है जमीन पर नाक रगड़ना 

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बंगाल की राजनीति अपने चरम पर है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान देते हुए खुलासा किया कि उन्होंने अब तक एसआईआर फॉर्म नहीं भरा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं है और ऐसा करना अपमानजनक है। बनर्जी ने कहा, मैंने अभी तक फॉर्म फिलअप नहीं किया है। क्यों करूं? मैं तीन बार की केंद्रीय मंत्री रही हूं, सात बार सांसद रही हूं और आपके आशीर्वाद से तीन बार मुख्यमंत्री बनी हूं। अब मुझे प्रमाणित करना होगा कि मैं नागरिक हूं या नहीं। इससे तो जमीन पर नाक रगड़ना बेहतर है। 
इससे पहले नादिया जिले के कृष्णनगर में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, अमित शाह सीधे तौर पर मतदाताओं की सूची से 1.5 करोड़ नाम हटाने की कोशिशों को गाइड कर रहे हैं। अगर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एक भी योग्य मतदाता को बाहर किया गया तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया कि जिन लोगों ने अपने दस्तावेज़ों के हिस्से के रूप में दादा-दादी के नाम जमा किए थे, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा और उनके नाम रोल से हटाए जाने का खतरा होगा। उन्होंने कहा, अब हम सुनते हैं कि जिन्होंने अपने दादा-दादी के नाम दिए हैं, उन्हें बुलाया जाएगा और योजना है कि इन सुनवाइयों से सीधे नाम हटा दिए जाएं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री सहित संवैधानिक पदाधिकारियों को ‘मार्क्ड इलेक्टर’ श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए उन्हें सामान्य नागरिकों की तरह फॉर्म भरने की बाध्यता नहीं है। इस श्रेणी में प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पद धारक शामिल हैं और कानूनी तौर पर उन्हें जनगणना फॉर्म जमा करने की आवश्यकता नहीं है। बंगाल में एसआईआर का पहला चरण आज गुरुवार को खत्म हो रहा है, जिसमें ड्राफ्ट रोल 16 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे और सुनवाई और सत्यापन दिसंबर और जनवरी के मध्य तक जारी रहेंगे। अंतिम मतदाता सूची फरवरी के मध्य में प्रकाशित होने वाली है।

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गोवा अग्निकांड के लूथरा ब्रदर्स को भारत लाने में पेंच, सवाल अब कैसे होगा प्रत्यर्पण? 

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नई दिल्ली। गोवा नाइट क्लब अग्निकांड में लूथरा ब्रदर्स पर शिकंजा कस चुका है। थाईलैंड में छिपे सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा पकड़े जा चुके हैं। लूथरा ब्रदर्स थाईलैंड के फुकेट में छिपे थे। अब लूथरा ब्रदर्स को भारत लाने में देरी की मुख्य वजह वीजा और पासपोर्ट हैं। सूत्रों का कहना है कि वीजा कैंसिल करने के बाद ही लूथरा ब्रदर्स के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज हो गई। पहले वीजा कैंसल होगा। उसके बाद थाईलैंड पुलिस सौरभ और गौरव लूथरा को फुकेट से बैंकॉक ले जाएगी। इसके बाद उन्हें बैंकॉक में थाई इमीग्रेशन के डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा।
 भारतीय जांच एजेंसियों ने गुरुवार को थाईलैंड पुलिस के साथ मिलकर दोनों भाई को पकड़ लिया। लूथरा ब्रदर्स ही बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब के मालिक हैं। आग लगने की घटना के बाद वे थाईलैंड भाग गए थे। शनिवार रात को लगी आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में ज्यादातर बर्च बाय रोमियो लेन के स्टाफ ही थे। अब सवाल है कि लूथरा ब्रदर्स पकड़े तो जा चुके हैं, मगर भारत लाने में देरी क्यों हो रही है? आखिर उनका प्रत्यर्पण कैसे होगा? क्या फुकेत से डायरेक्ट दिल्ली आएंगे या फिर उन्हें बैंकॉक ले जाया जाएगा?
सूत्रों का कहना है कि लूथरा ब्रदर्स यानी सौरभ और गौरव लूथरा के कुछ जरूरी दस्तावेज की क़ानूनी प्रक्रिया के बाद ही उन्हें इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। इसमें सोमवार या मंगलवार तक का वक्त लग सकता है। ‘इमरजेंसी सर्टिफिकेट’ जारी होने से वे पासपोर्ट निलंबित होने के बावजूद भारत की एक तरफा वापसी यात्रा कर सकेंगे। क्योंकि शनिवार और रविवार को छुट्टी होती है, ऐसे में सोमवार से पहले लूथरा ब्रदर्स का भारत आाना संभव नहीं दिख रहा है। शनिवार और रविवार छुट्टी होने के कारण सारी बची हुई फॉर्मेलिटी सोमवार से होगी। इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद उनकी टिकट्स बुक की जाएगी और उन्हें भारतीय अधिकारियों के साथ भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि मंगलवार तक दोनों आरोपी भाई भारत में होंगे। अब सवाल है कि भारत में लैंड करते ही क्या होगा?

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अमिताभ बच्चन के कारण हाथ से निकल गई फिल्म, अक्षय खन्ना को एक थप्पड़ पड़ा भारी

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एक ‘धुरंधर’ सबपर भारी… 7 दिनों में ही अक्षय खन्ना ने पूरा माहौल सेट कर दिया है | यूं तो अपने करियर में एक्टर ने कई फिल्मों में काम किया है. पर साल 2025 उनके लिए एकदम सॉलिड साबित हुआ. सबसे पहले तब जब ‘छावा’ में औरंगजेब बनकर एंट्री ली. और उसके बाद अब, जैसे ही रहमान डकैत बन गए हैं. लेकिन अक्षय खन्ना को करियर में ऐसे कई प्रोजेक्ट्स मिले हैं, जो उनके लिए सॉलिड साबित हो सकते थे |
पर एक्टर ने किसी न किसी वजह से फिल्म छोड़ दी या उन्हें हटा दिया गया. आज बताएंगे वो मौका, जब अमिताभ बच्चन के चक्कर में फिल्म छोड़नी पड़ गई थी |

बात है साल 2004 की. जब सिनेमाघरों में फिल्म ‘खाकी’ रिलीज हुई. इस एक्शन थ्रिलर-ड्रामा को राजकुमार संतोषी ने डायरेक्ट किया था. साथ ही पूरी फिल्म इंडियन पुलिस टीम के उस कैंपेन पर फोक्स्ड है, जिसमें एक आतंकवादी को मुंबई वापस लाना होता है. इस फिल्म में ही अक्षय खन्ना भी काम करने वाले थे. अगर वो पीछे न हटते, तो इस पूरी फिल्म में सारे ऐसे ही लीड एक्टर्स थे. जिनका नाम शब्द A से शुरू होता है. जैसे- अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, अक्षय कुमार, अतुल कुलकर्णी, ऐश्वर्या राय. पर फिर एक थप्पड़ के चलते अक्षय खन्ना ने क्यों फैसला बदल लिया.

अक्षय खन्ना ने थप्पड़ की वजह से छोड़ी फिल्म

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय कुमार को फिल्म ‘खाकी’ में एक रोल ऑफर हुआ था. जो बाद में उनके छोड़ने के बाद तुषार कपूर के पास चला गया था. पर अक्षय खन्ना का फिल्म छोड़ने के पीछे वजह बना एक सीन. जिससे वो सहमति नहीं रखते नहीं थे | दरअसल कहानी में अमिताभ बच्चन के किरदार को थप्पड़ मारने के लिए मजबूर किया जाता है, और उन्हें लगा कि यह बहुत बेइज्ज़ती वाली बात है. वो किसी भी सीनियर एक्टर को ऐसे डिसरिस्पेक्ट नहीं करना चाहते थे, न ही होते हुए देखना चाहते थे |

दरअसल उस साल की यह सबसे बड़ी मल्टीस्टार फिल्मों में से एक थी. जिसमें- अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, अक्षय कुमार, ऐश्वर्या राय जैसे कई बड़े स्टार्स थे. जबकि, तुषार कपूर, अतुल कुलकर्णी, तनुजा, जयाप्रदा, प्रकाश राज, सब्यसाची चक्रवर्ती और अश्विनी कालसेकर ने भी काम किया था |

फिल्म ने कितनी कमाई की थी?

‘खाकी’ बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रही थी, जिसका बजट लगभग 26 करोड़ रुपये बताया जाता है. इस पुलिस थ्रिलर ने 42-70 करोड़ वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. साथ ही उस साल की टॉप कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई थी |

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BJP UP Chief Announcement: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा, इसके लिए 14 दिसंबर को आधिकारिक रूप से ऐलान किया जाएगा. इसकी जानकारी गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और संगठन चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने दी. हालांकि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाती है, अभी तक इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. अंतिम मुहर के लिए 14 दिसंबर का इंतजार करना होगा.

पिछले 1 साल पहले ही भाजपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल खत्म हो चुका है. तब से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर संशय बना हुआ है. लेकिन अब जल्द ही प्रदेश को नया अध्यक्ष मिलने वाला है. यूपी भाजपा के संगठन चुनाव अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि 13 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दोपहर 1 से बजे तक पार्टी के लखनऊ मुख्यालय पर नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे. इस दौरान राष्ट्रीय महामंत्री एवं केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े द्वारा नामांकन पत्र जमा किया जाएगा. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल द्वारा 14 दिसंबर को चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण कराकर प्रदेश अध्यक्ष का निर्वाचन सम्मपन्न कराया जाएगा.

दौड़ में ये नाम शामिल
माना जा रहा है कि यूपी में भाजपा इस बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी ओबीसी नेता को सौंप सकती है. हालांकि पार्टी की ओर से चयन की पूरी तैयारियां संगठन स्तर पर कर ली गई हैं. अध्यक्ष पद की रेस में केंद्रीय मंत्री बी. एल. वर्मा और मंत्री धर्मपाल सिंह का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, पूर्व मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, के साथ ही स्वतंत्र देव सिंह, दिनेश शर्मा, रमाशंकर कठेरिया के नाम की भी चर्चा है. चर्चा है कि ओबीसी नेता में भी गैर-यादव को अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

14 दिसंबर को मिलेगा नया अध्यक्ष
भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष जो भी बने. यह 14 दिसंबर को तय हो जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव को देखते हुए बनाया जाएगा. ताकि अध्यक्ष के नेतृव्य में चुनाव लड़ा जा सके. अध्यक्ष के चुनाव में जातीय समीकरण से लेकर कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा.

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Tata की नई ‘कन्वर्टिबल’ कार ने मचाई खलबली! इतनी कम कीमत में कोई नहीं, जानें फीचर्स जो उड़ा देंगे होश

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Mini Cooper S Convertible: BMW ग्रुप की कंपनी मिनी ने भारतीय बाजार में एक बार फिर अपनी धाक जमाई है. कंपनी ने हाल ही में नई मिनी कूपर एस कन्वर्टिबल को लॉन्च कर दिया है, जिसे भारत की सबसे किफायती कन्वर्टिबल कार बताया जा रहा है. यह कार स्टाइलिश लुक, खुली छत की आजादी और दमदार परफॉर्मेंस का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है.

कितनी है कीमत?
मिनी कूपर एस कन्वर्टिबल को एक सिंगल, फुली-लोडेड वेरिएंट में लॉन्च किया गया है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 58.50 लाख रुपये तय की गई है. लांकि, मिनी कूपर के लाइनअप में सबसे किफायती मॉडल मिनी कूपर 3-डोर है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग 42.70 लाख रुपये से शुरू होती है. लेकिन कन्वर्टिबल सेगमेंट में, नया मॉडल सबसे सस्ती ओपन-टॉप ड्राइविंग का अनुभव प्रदान करता है.

स्टाइल और टेक्नोलॉजी का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
नई मिनी कूपर एस कन्वर्टिबल मिनी के क्लासिक डिजाइन को मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ती है. इसमें एक दमदार 2.0-लीटर, 4-सिलेंडर टर्बो-पेट्रोल इंजन दिया गया है. यह इंजन लगभग 204 हॉर्स पावर (hp) और 300 न्यूटन मीटर (Nm) का पीक टॉर्क जेनरेट करता है. समें 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स (DCT) मिलता है. यह कार 6.9 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार का दावा करती है.

डिज़ाइन की खास बातें
इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसकी इलेक्ट्रिक फैब्रिक सॉफ्ट-टॉप रूफ है, जो महज 18 सेकंड में खुल जाती है और 15 सेकंड में बंद हो जाती है. इसे 30 किमी/घंटा की रफ्तार तक चलाया जा सकता है. कार में सिग्नेचर राउंड LED हेडलाइट्स, DRLs और पीछे की तरफ यूनियन जैक-थीम वाली LED टेल-लाइट्स दी गई हैं. इसे 18-इंच के अलॉय व्हील्स के साथ पेश किया गया है.

शरद पवार ने मनाया 84वां जन्मदिन, कहलाते हैं राजनीति के भीष्म पितामह 

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मुंबई। महाराष्ट्र में एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को अपना 84वां जन्मदिन मनाया। उन्होंने 6 दशकों से ज्यादा महाराष्ट्र से लेकर केंद्र तक की राजनीतिक पारी खेली। शरद पवार ने कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वह चार बार महाराष्ट्र के सीएम बने। पवार ने लंबे सियासी करियर में महाराष्ट्र की कृषि नीतियों और सहकारी आंदोलनों को अहम रूप से आकार दिया है 
बता दें शरद पवार का जन्म 12 दिसंबर 1940 को हुआ था। इनके पिता का नाम गोविंद राव था। वह नीरा कैनाल कोऑपरेटिव सोसाइटी में एक वरिष्ठ अधिकारी थे। वहीं शरद पवार की मां का नाम शारदा बाई था, जोकि वामपंथी विचारों वाली तेज तर्रार राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। शारदा बाई पुणे लोकल बोर्ड में निर्वाचित होने वाली पहली महिला थीं। शरद पवार बचपन से ही राजनीति में सक्रिय थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में शरद पवार ने कई छोटे-मोटे आंदोलन में हिस्सा लिया। 1960 में पवार के भाई वसंतराव पवार ने किसान एवं मजदूर पार्टी से चुनाव लड़ा था। जबकि शरद पवार को कांग्रेस के लिए प्रचार करना पड़ा था। भले ही उनके भाई चुनाव में हार गए, लेकिन शरद पवार की छवि एक समर्पित और निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में स्थापित हुई थी।
1962 में शरद पवार पुणे जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वहीं 27 साल की उम्र में साल 1967 में शरद पवार ने बारामती से महाराष्ट्र विधानसभा की सीट पर जीत हासिल की। उस दौरान वह अविभाजित कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। शरद पवार ने 40 विधायकों के साथ मिलकर कांग्रेस का विभाजित करने का फैसला लिया। वहीं जनता पार्टी और किसान एवं मजदूर पार्टी के साथ गठबंधन करके प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा का गठन किया। 
यह घटना 1978 में घटी और इस दौरान शरद पवार की उम्र 38 साल थी। कांग्रेस सरकार के पतन के बाद शरद पवार महाराष्ट्र के सीएम बने। इस समय वह सीएम पद संभालने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे। शरद पवार का कार्यकाल अल्पकालिक रहा, क्योंकि फरवरी 1980 में पवार की सरकार को सत्ता से बर्खास्त कर दिया गया। फिर वह साल 1988, 1990 और 1993 में महाराष्ट्र के सीएम पद पर कार्यरत रहे।
साल 1999 में शरद पवार ने एनसीपी की स्थापना की। इस पार्टी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान करना था। हालांकि कांग्रेस के साथ इस पार्टी के कुछ वैचारिक संबंध भी रहे होंगे। महाराष्ट्र में यह नवगठित पार्टी काफी लोकप्रिय हुई। क्योंकि इस पार्टी ने स्थानीय शासन पर ध्यान केंद्रित किया और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया। हालांकि इसी साल एनसीपी और कांग्रेस ने गठबंधन की सरकार बनाई, क्योंकि दोनों में से कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी थीं। साल 2004 में पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में शरद पवार को कृषि मंत्री बनाया। वहीं साल 2009 के आम चुनावों में जीत हासिल कर वह केंद्रीय मंत्रिमंडल बने। 
साल 2023 आते-आते पवार के परिवार में विरासत की लड़ाई शुरू हो गई। इसी बीच उनके भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दी और वह कुछ विधायकों के साथ महायुति सरकार में शामिल हो गए। फिर शरद पवार से पार्टी का सिंबल और नाम भी छिन लिया और वह भतीजे अजित पवार गुट को मिल गया। चाचा-भतीजा दोनों एनसीपी के अलग-अलग गुटों का नेतृत्व कर एक-दूसरे के आमने-सामने हैं।

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साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया बिखरी, 9 गेंदों में 5 विकेट गिरने का शर्मनाक रिकॉर्ड

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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जारी 5 मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया | इस मुकाबले में टीम इंडिया को 51 रनों से करारी शिकस्त मिली. भारत का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला गलत साबित हुआ, क्योंकि पहले गेंदबाजों ने जमकर रन लुटाए, फिर बल्लेबाजों की भी असफलता देखने को मिली. वहीं, टीम के धुरंधर बल्लेबाज अभिषेक शर्मा, कप्तान सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल से भारत को उम्मीद थी कि 200+ रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम अच्छा मुकाबला करेगी, लेकिन ठीक उल्टा देखने को मिला. पहले ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों ने हाथ खड़े किए, फिर आखिरी 5 विकेट महज 5 रन बनाकर सिर्फ 9 गेंदों में गवां दिए |

आधी भारतीय टीम सिर्फ 9 गेंद में सिमटी

दक्षिण अफ्रीका के 214 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम की पारी के 18वें ओवर में तिलक वर्मा और जितेश शर्मा की जोड़ी खेल रही थी, तब भारत के विकेट गिर चुके थे और स्कोर 142 था. यहां से टीम इंडिया की हार लगभग तय लग रही थी, लेकिन उम्मीद थी कि मुकाबला आखिरी ओवर तक होगा और बल्लेबाज स्कोर को करीब लेकर जाएंगे, मगर बिल्कुल उल्टा देखने को मिला. जहां 18वें ओवर की 5वीं गेंद पर जितेश आउट हुए | इसके बाद, तो टीम इंडिया पलक झपकते ही सिमट गई और 19वें ओवर में शिवम दुबे, अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती भी चलते बने. वहीं, अंतिम ओवर की पहली गेंद पर तिलक वर्मा के विकेट के साथ भारत की पारी 162 रन ढेर हो गई. आखिरी 5 विकेट गिरने के दौरान भारत सिर्फ 5 रन ही बना पाई |

टीम इंडिया के नाम बना शर्मनाक रिकॉर्ड

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया की इस पारी में सभी बल्लेबाज तेज गेंदबाज का शिकार बने. इसी के साथ, भारत के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया. ऐसा पहली बार हुआ है कि टीम इंडिया किसी टी20 इंटरनेशनल मैच में सभी भारतीय बल्लेबाज तेज गेंदबाजों पर आउट हुए हों. वहीं, इस फॉर्मेट में दक्षिण अफ्रीका के लिए भी पहला मौका है, जब टी20 इंटरनेशनल मैच में उनके तेज गेंदबाजों ने दस विकेट चटकाए हों |

दक्षिण अफ्रीका ने सबसे ज्यादा जीत की दर्ज

टीम इंडिया के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका ने टी20 इंटरनेशनल में 13वीं जीत हासिल की. इसी के साथ, दक्षिण अफ्रीकी टीम ने इस फॉर्मेट में भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा मैच जीतने का रिकॉर्ड नाम कर लिया है | उसने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम 12-12 जीत दर्ज करने में सफल रही हैं. वहीं, न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ टी20 फॉर्मेट में 10-10 मुकाबले जीत चुकी है |

तेजस एमके1ए की डिलीवरी 2026 तक टली, 12 चाहिए थे सिर्फ 5 इंजन मिले

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नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए की पहली डिलीवरी अब 2026 तक खिसक गई है। वजह है अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक की इंजन सप्लाई में भारी देरी। पांचवां एफ-404 इंजन अब भारत पहुंचने वाला है, लेकिन इस साल दिसंबर तक 12 इंजन मिलने थे, जबकि सिर्फ 5 ही आए हैं। बाकी इंजन न आने से एचएएल के पास बने हुए 10 तैयार विमान खड़े हैं, डिलीवरी नहीं हो पा रही।
17 अक्टूबर 2025 को नासिक से तेजस एमके1ए की पहली उड़ान सफलतापूर्वक हो चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका शुभारंभ किया था। लेकिन अब हथियार एकीकरण, फ्लाइट ट्रायल और टेस्टिंग बाकी है, जिसके लिए सभी विमानों में इंजन लगना जरूरी है। 2021 में 99 एफ-404 इंजनों का ऑर्डर दिया गया था, जो 2029 तक आने थे। लेकिन कंपनी की प्रोडक्शन लाइन 5 साल बंद रहने से सप्लाई चेन पूरी तरह बिगड़ गई। अब नया प्लान है कि 2026 से हर महीने 2 इंजन मिलेंगे।
इस देरी से भारतीय वायुसेना को पुराने मिग-21 जैसे विमानों को और लंबे समय तक चलाना पड़ेगा। 83 तेजस एमके1ए का पूरा ऑर्डर अब 2029 तक खत्म होगा, यानी 4 साल लेट। फिर भी एचएएल ने प्रोडक्शन बढ़ा दिया है। नासिक में 8 और बेंगलुरु में 16 विमान सालाना बन रहे हैं। कुल 24 विमान प्रति वर्ष का लक्ष्य है।
नवंबर 2025 में 97 अतिरिक्त तेजस एमके1ए के लिए 113 इंजनों का नया सौदा भी हो चुका है, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी। आगे तेजस एमके2 का रोलआउट 2027 में होगा, जो और ताकतवर होगा। लंबे समय में कावेरी स्वदेशी इंजन पर भी काम चल रहा है, लेकिन अभी विदेशी इंजन पर ही निर्भरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देरी चिंताजनक है, लेकिन एचएएल की मेहनत से कार्यक्रम अब फिर पटरी पर लौट रहा है। 2026 में वायुसेना को पहला तेजस एमके1ए बैच मिलेगा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम होगा।

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News Desk