पीएम मोदी ने फिर रचा इतिहास…इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने, भारत का बजा डंका

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PM Modi in Ethiopia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इथियोपिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान वहां पर न सिर्फ उनका भव्य स्वागत किया गया बल्कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार यह दर्शाता है कि भारत उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है. पीएम मोदी का यह 28वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है.

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने अदीस अबाबा हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. इसके बाद उन्होंने PM मोदी को होटल तक अपनी गाड़ी से पहुंचाया. रास्ते में, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को विज्ञान संग्रहालय और मैत्री पार्क ले घुमाया, जो उनके कार्यक्रम में शामिल नहीं था. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता इथियोपियाई प्रधानमंत्री के इस विशेष भाव से प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उनका गहरा सम्मान झलकता है.

पीएम मोदी ने इथियोपिया में मिले सम्मान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आभार जताते हुए लिखा, “कल शाम मुझे इथियोपिया के ‘निशान’ से सम्मानित करने के लिए मैं इथियोपिया की जनता और सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री अबी अहमद अली का आभारी हूं. दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक द्वारा सम्मानित होना मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है. यह सम्मान उन असंख्य भारतीयों का है जिन्होंने वर्षों से हमारी साझेदारी को आकार दिया है और मजबूत किया है. भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और नए अवसर सृजित करने के लिए इथियोपिया के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

संसद को संबोधित करेंगे PM मोदी
PM मोदी आज गुरुवार को इथियोपिया की संसद के जॉइंट सेशन को भी संबोधित करेंगे. इस दौरान पीएम कई मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे. वे ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत की यात्रा और ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए भारत-इथियोपिया साझेदारी के मायनों पर भी बात करेंगे.

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प्रियंका गांधी से मिले प्रशांत किशोर? दोनों के बीच घंटों चली मुलाकात

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नई दिल्ली। बिहार चुनाव में मनमाफिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) इन दिनों क्या कर रहे हैं? इसकी सार्वजनिक जानकारी बहुत कम सामने आई है. चुनाव परिणाम के बाद पीके प्रेस कॉफ्रेंस कर अपनी बातें रखी थी, फिर उन्होंने एक दिन का उपवास रखा और कहा कि अब वो फिर से बिहार के गांव-गांव का दौरा करेंगे. हालांकि इसके बाद से पीके लगभग गायब हो गए. इस बीच अब पीके को लेकर एक बड़ी खबर दिल्ली से सामने आई है. जानकारी यह है कि दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के बीच अहम मुलाकात हुई है. कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात घंटों चली.

प्रशांत किशोर के गांधी परिवार से रिश्ते पुराने हैं. 2021 में JDU से मोहभंग के बाद प्रशांत किशोर कांग्रेस से जुड़े थे. 2022 में कांग्रेस में जान फूंकने के लिए प्रशांत किशोर ने एक ब्लू प्रिंट भी तैयार किया था. लेकिन वो कांग्रेस में अपने रोल को लेकर मन नहीं बना पाए और यह साथ भी छूट गया. फिर प्रशांत किशोर बिहार चले गए जन सुराज बनाई और बिहार में अपनी जमीन तलाशने लगे.

बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर को नहीं मिली सफलता
पीके ने बिहार चुनाव में सभी सीटों पर लड़ने का फैसला किया, खूब मेहनत भी किया. नए तरह के उम्मीदवार उतारे और राजनीति की नई इबादत लिखने की कोशिश की, मगर सफलता हाथ नहीं लगी. दूसरी तरफ कांग्रेस भी महागठबंधन के साथ रही. राहुल गांधी ने वोट अधिकार यात्रा की, खूब प्रचार हुआ लेकिन नतीजा कुछ और ही निकला.

कांग्रेस का भी बिहार चुनाव में हुआ खस्ता हाल
कांग्रेस बिहार में 61 सीटों पर चुनाव लड़ी, मगर 6 ही जीत पाई. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता तक अपना चुनाव हार गए. अब खबर ये आई कि दिल्ली में प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की मुलाकात 10 जनपथ पर हुई है. आधिकारिक तौर पर जब इस मुलाकात के बारे में प्रियंका गांधी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं किससे मिलती हूं, किससे नहीं? इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए.

संसद में जब पत्रकारों ने प्रियंका गांधी से पीके से मुलाकात को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा ये कोई न्यूज है? देश में इतनी समस्याएं हैं, वायु प्रदूषण पर हम चर्चा की मांग कर रहे हैं और आप इस तरह के सवाल पूछ रहे हैं.

प्रियंका गांधी ने आगे कहा- आप ये सवाल क्यों नहीं पूछते कि मौजूदा मंत्री संसद की कार्यवाही में बाधा बन रहे हैं. आप इसको लेकर सवाल नहीं पूछेंगे कि संसद के अंदर क्या हो रहा है?

 

IPL इतिहास के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी का फ्लॉप शो, 1 रन बनाना भी हुआ मुश्किल

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आईपीएल ऑक्शन 2026 में जिस पर करोड़ों की बारिश हुई. इतना पैसा मिला कि वो IPL इतिहास का ही सबसे महंगा विदेशी प्लेयर बन गया. उसके लिए अब एक रन भी बनाना मुश्किल हो गया | हम बात कर रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज कैमरन ग्रीन की, जिन्हें अबू धाबी में 16 दिसंबर को हुए ऑक्शन में 25.20 करोड़ रुपये की मुंहमांगी रकम तो मिली | मगर उसके बाद उनका खेल बुरी तरह फेल हो गया. ऑक्शन के अगले दिन यानी 17 दिसंबर से शुरू हुए एडिलेड टेस्ट में जब वो खेलने उतरे तो पहली पारी में उनसे एक रन भी नहीं बने और बिना खाता खोले ही आउट हो गए |

आर्चर ने 25.20 करोड़ के खिलाड़ी को ऐसा छकाया

कैमरन ग्रीन ने अपनी इनिंंग के दौरान 2 गेंदों का सामना किया और फिर बिना कोई रन बना जीरो पर ही आर्चर का शिकार बन गए |पहले दिन के खेल में लंच के बाद आर्चर की 138 KMPH की रफ्तार से डाली गेंद पर ग्रीन चकमा खा गए और मिडविकेट पर खड़े कार्स को कैच थमा बैठे |

आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी का बुरा हाल

कैमरन ग्रीन को आईपीएल ऑक्शन 2026 में KKR ने 25.20 करोड़ रुपये में खरीदा था | इस रकम के साथ ग्रीन ने IPL में मिचेल स्टार्क के नाम दर्ज सबसे महंगे विदेशी प्लेयर होने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. मिचेल स्टार्क को भी KKR ने ही 24.75 करोड़ में खरीदा था |

एडिलेड टेस्ट में ग्रीन के आउट होने वाली तस्वीर जाहिर सी बात है कि KKR के लिए अच्छी नहीं होगी |इससे पहले भी इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट की 2 पारियों में खुद को मिले स्टार्ट को बड़े स्कोर में बदलने में ग्रीन नाकाम रहे थे. उन्होंने पर्थ में खेली एक पारी में 24 रन बनाए थे. जबकि ब्रिसबेन में उन्होंने 45 रन की पारी खेली थी |

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज का तीसरा टेस्ट एडिलेड में खेला जा रहा है | इससे पहले खेले दो टेस्ट का नतीजा ऑस्ट्रेलिया के फेवर में रहा है. मतलब वो 2-0 से 5 टेस्ट की सीरीज में आगे है |

इतना बड़ा घर होगा, तभी पाल सकेंगे पिटबुल-रोटवीलर और… देहरादून में नए बायलॉज लागू

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देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में लगातार कुत्तों का हमला (Dog Attack) के केस (Case) बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुए नगर निगम (Municipal Council) देहरादून ने पालतू और आवारा कुत्तों को लेकर नए सख्त बायलॉज लागू कर दिए हैं. ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य शहर में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कुत्तों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना है.

नए नियमों के तहत अब देहरादून में कुत्ता पालने के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. तीन महीने या उससे अधिक आयु के प्रत्येक पालतू कुत्ते का पंजीकरण जरूरी किया गया है, जिसकी वैधता एक वर्ष तक होगी. बिना रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यदि लाइसेंस अवधि के दौरान एंटी-रेबीज टीकाकरण की वैधता समाप्त हो जाती है, तो लाइसेंस स्वतः निरस्त माना जाएगा.

देहरादून नगर निगम ने खूंखार और आक्रामक नस्लों को लेकर विशेष सख्ती बरती है. पिटबुल, रोटवीलर, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग समेत अन्य अति आक्रामक नस्लों के लिए 2000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क तय किया गया है. ऐसे कुत्तों को पालने के लिए न्यूनतम 300 वर्ग गज क्षेत्रफल वाले घर की अनिवार्यता रखी गई है.

इसके अलावा, एक वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इन कुत्तों की नसबंदी अनिवार्य होगी और उसका प्रमाण पत्र नगर निगम में जमा करना होगा. इन नस्लों की ब्रीडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. पहले से मौजूद कुत्तों के स्वामियों को तीन माह के भीतर खरीद और नसबंदी प्रमाण पत्र जमा करना होगा.

नए बायलॉज के अनुसार, पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर बिना पट्टा, मुंहबंद और निगरानी के ले जाना प्रतिबंधित रहेगा. खुले में शौच कराने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी. कुत्ते के काटने की स्थिति में घायल की गंभीरता के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में कुत्ते के स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कुत्ते की जब्ती भी की जा सकती है. अत्यधिक भौंकने की शिकायत पर नोटिस और चालान का प्रावधान भी किया गया है.

पांच या उससे अधिक कुत्ते पालने वालों के लिए निजी श्वान पशु शेल्टर अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड की अनुमति, नगर निगम को सूचना और 1000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। यदि शेल्टर आवासीय क्षेत्र के पास है, तो पड़ोसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा।

आवारा कुत्तों के लिए नगर निगम कॉलोनियों और रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी में निर्धारित फीडिंग प्वाइंट बनाएगा. स्कूलों, धार्मिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और कॉलोनियों के प्रवेश-निकास बिंदुओं पर कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नगर निगम जल्द ही जागरूकता अभियान भी चलाएगा.

महाराष्ट्र सरकार के खेल मंत्री पर गिरफ्तारी का खतरा, मंत्री पद भी खतरे में

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नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) के खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे (Sports Minister Manikrao Kokate) को तगड़ा झटका लगा है. जिला सत्र न्यायालय के ताजा फैसले के बाद उनपर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है. उनका मंत्री पद भी खतरे में है. सरकारी कोटे के 10 प्रतिशत फ्लैट्स के गबन के मामले में दो साल की जेल और 10,000 रुपये का जुर्माने की सजा को जिला सत्र न्यायालय ने बरकरार रखा है.

गौरतलब है कि इसी साल अगस्त में विधानसभा में रमी खेलते हुए वीडियो वायरल होने के बाद माणिकराव कोकाटे का विभाग बदला गया था. पहले माणिकराव कोकाटे के पास कृषि विभाग था, जिसे बदलकर खेल मंत्रालय दिया गया था. देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार की मुलाकात के बाद मंत्री माणिकराव कोकाटे का विभाग बदलने का फैसला लिया गया है.

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हैदराबाद का रहने वाला था शूटर साजिद अकरम, तेलंगाना पुलिस ने की पुष्टि

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हैदराबाद: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर फायरिंग करने वाला शूटर साजिद अकरम मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद का रहने वाला था. तेलंगाना पुलिस ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की. पुलिस ने एक बयान में कहा कि साजिद अकरम 1998 में ऑस्ट्रेलिया चला गया था.

तेलंगाना के DGP की तरफ से एक प्रेस नोट में कहा गया कि साजिद और उसका बेटा नवीद अकरम के कट्टरपंथी बनने के पीछे जो कारण थे, उनका भारत या तेलंगाना में किसी स्थानीय प्रभाव से कोई लेना-देना नहीं लगता है. पुलिस ने कहा कि 1998 में ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले भारत में रहने के दौरान साजिद अकरम के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. पुलिस ने बताया कि वह 27 वर्षों में सिर्फ छह बार भारत आया था.

तेलंगाना पुलिस का बयान

  1. रविवार, 14 दिसंबर, 2025 को सिडनी के बॉन्डी बीच पर, दो हमलावरों द्वारा हनुक्का उत्सव के दौरान की गई गोलीबारी में कथित तौर पर 15 पीड़ितों और दो हमलावरों में से एक की मौत हो गई. ऑस्ट्रेलियाई पुलिस/सरकार इस घटना को आतंकवादी हमला मान रही है. हमलावरों की पहचान साजिद अकरम (50 साल) और उसके बेटे नवीद अकरम (24 साल) के रूप में हुई है. रिपोर्टों से पता चलता है कि दोनों ISIS की विचारधारा से प्रेरित थे. इस संबंध में ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी आगे की जांच कर रहे हैं.
  2. साजिद अकरम मूल रूप से भारत के हैदराबाद के रहने वाला था. उसने हैदराबाद से B.Com की डिग्री पूरी की और लगभग 27 साल पहले, नवंबर 1998 में रोजगार की तलाश में ऑस्ट्रेलिया चला गया. बाद में उसने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी रूप से बसने से पहले यूरोपीय मूल की महिला वेनेरा ग्रोसो से शादी कर ली. उनका एक बेटा नवीद (दो हमलावरों में से एक) और एक बेटी है. साजिद अकरम के पास आज भी भारतीय पासपोर्ट है और उसके बेटे नवीद अकरम और बेटी का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और वे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं.
  3. भारत में उनके रिश्तेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 27 सालों में साजिद अकरम का हैदराबाद में अपने परिवार से बहुत कम संपर्क था. ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद वह छह बार भारत आया, मुख्य रूप से पारिवारिक कारणों से जैसे संपत्ति के मामले और अपने बुजुर्ग माता-पिता से मिलने. ऐसा समझा जाता है कि वह अपने पिता की मृत्यु के समय भी भारत नहीं आया था.
  4. परिवार के सदस्यों ने उसकी कट्टरपंथी सोच या गतिविधियों, या उन परिस्थितियों के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया है जिनके कारण वह कट्टरपंथी बना.
  5. साजिद अकरम और उसके बेटे नवीद के कट्टरपंथी बनने के कारणों का भारत या तेलंगाना में किसी स्थानीय प्रभाव से कोई संबंध नहीं लगता है.
  6. साल 1998 में भारत छोड़ने से पहले भारत में रहने के दौरान साजिद अकरम के खिलाफ तेलंगाना पुलिस के पास कोई गलत रिकॉर्ड नहीं है.

बयान में कहा गया है कि तेलंगाना पुलिस केंद्रीय एजेंसियों और अन्य समकक्षों के साथ, जब भी जरूरत होगी, सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही जनता और मीडिया से सत्यापित तथ्यों के बिना अटकलें लगाने या आरोप लगाने से बचने का आग्रह करती है.

साजिद अकरम ने अपने बेटे नवीद के साथ 14 दिसंबर को सिडनी के बॉन्डी बीच पर निर्दोष लोगों पर फायरिंग की थी, जब यहूदी समुदाय के लोग त्योहार मनाने के जमा हुए थे. इस आतंकवादी कृत्य में 15 लोग मारे गए. पुलिस की क्रॉसफायरिंग में साजिद मारा गया. गोली लगने से घायल नवीद अस्पताल में भर्ती है. साजिद के पास भारतीय पासपोर्ट था, जबकि उसका बेटा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है.

ऑस्ट्रेलिया में स्थाई रूप से बसने से पहले साजिद ने यूरोपीय मूल की एक ईसाई महिला वेनेरा ग्रोसो से शादी की थी. नवीद के अलावा, उसकी एक बेटी भी है. बेटा और बेटी ऑस्ट्रेलियन नागरिक हैं.

साजिद अकरम के परिवार वालों ने मीडिया को बताया कि उन्होंने वर्षों पहले उससे रिश्ते तोड़ लिए थे “क्योंकि उसने एक ईसाई महिला से शादी की थी”. साजिद पुराने हैदराबाद शहर का रहने वाला था. परिवारिक सूत्रों ने मीडिया को बताया कि साजिद पिछले 27 वर्षों में कम से कम तीन बार भारत आया था, आखिरी बार वह 2022 में आया था.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साजिद ने बॉन्डी बीच पर आतंकी हमले से कुछ हफ्ते पहले फिलीपींस जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. उसके नवीद ने विदेश यात्रा के ऑस्ट्रेलियाई यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था.

महात्मा गांधी के विचारों से मोदी जी को नफरत है…मनरेगा पर बोले राहुल गांधी, प्रधानमंत्री पर साधा निशाना

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नई दिल्ली: मनरेगा (MANREGA) का नाम बदलने को लेकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार (Modi government) पर हमलावर है. कांग्रेस इसे महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का अपमान बता रही है. मगर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने VB-G RAM-G बिल पर कैबिनेट में कहा था कि नाम को लेकर कोई विवाद नहीं है. समय के अनुसार सब कुछ बदलता है. महात्मा और राम—दोनों की भावना का सम्मान किया जाता है और दोनों ही पूजनीय हैं.

वहीं, अब लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress MP Rahul Gandhi) ने इसको लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि मोदी जी को महात्मा गांधी के विचारों से और गरीबों के अधिकारों से बड़ी दिक्कत है.

राहुल ने आगे कहा कि मनरेगा, महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत रूप है. करोड़ों ग्रामीणों की जिंदगी का सहारा है, जो कोविड काल में उनका आर्थिक सुरक्षा कवच भी साबित हुआ. मगर, प्रधानमंत्री मोदी को यह योजना हमेशा खटकती रही और पिछले 10 साल से इसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं. आज वो मनरेगा का नामो-निशान मिटाने पर आमादा है.

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मनरेगा की बुनियाद इन तीन मूल विचारों पर थी.
रोजगार का अधिकार- जो भी काम मांगेगा, उसे काम मिलेगा
गांव को प्रगति कार्य खुद तय करने की स्वतंत्रता.
केंद्र सरकार मजदूरी का पूरा खर्च और समान की लागत का 75% देगी

अब प्रधानमंत्री मोदी इसी मनरेगा को बदलकर सारी ताकत सिर्फ अपने हाथों में केंद्रित करना चाहते हैं. बजट, योजनाएं और नियम केंद्र तय करेगा. राज्यों को 40% खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा. बजट खत्म होते ही या फसल कटाई के मौसम में दो महीने तक किसी को काम नहीं मिलेगा. राहुल ने कहा कि यह नया बिल महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पहले ही भयंकर बेरोज़गारी से भारत के युवाओं का भविष्य तबाह कर दिया है, और अब ये बिल ग्रामीण गरीबों की सुरक्षित रोजी-रोटी को भी खत्म करने का जरिया है. हम इस जनविरोधी बिल का गांव की गलियों से संसद तक विरोध करेंगे.

इससे पहले पीएम मोदी ने कैबिनेट में कहा था कि नाम को लेकर कोई विवाद नहीं है. समय के अनुसार सब कुछ बदलता है. महात्मा और राम दोनों ही पूजनीय हैं. दोनों की भावना का सम्मान किया जाता है. इस दौरान पीएम ने राज्यों की अधिक जवाबदेही पर जोर दिया, ताकि धन का विवेकपूर्ण उपयोग हो सके और यह भी समझा जा सके कि जवाबदेही केवल केंद्र की ही नहीं, बल्कि राज्यों की भी है. प्रौद्योगिकी के उपयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पारदर्शिता लाई जाए और राज्य बनाम केंद्र को लेकर किए जाने वाले किसी भी दावे पर रोक लगे.

यूपी के कौशांबी से शौर्य मिश्रा गिरफ्तार, फेक पोस्ट शेयर करने पर गुरुग्राम पुलिस ने पकड़ा, भाजपा युवा मोर्चे का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा

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गुरुग्राम : हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी और भड़काऊ पोस्ट डालकर सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले एक वकील को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर झूठी पोस्ट शेयर की थी, जिसमें एक लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या का मनगढ़ंत दावा किया गया था.

फर्जी पोस्ट करने पर शौर्य मिश्रा अरेस्ट : आरोपी शौर्य मिश्रा ने पोस्ट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए युवक और युवती की फर्जी तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया था. गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप ने बताया कि “तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान कर उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 25 वर्षीय हरिओम मिश्रा उर्फ शौर्य मिश्रा के रूप में हुई है, जो कौशांबी जिले के चरवा गांव का निवासी है और एलएलबी की पढ़ाई कर चुका है”.

भाजपा युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा : वहीं आरोपी शौर्य मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म(X) अकाउंट पर खुद को भाजपा युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष होने का दावा कर रखा है. शौर्य मिश्रा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म(X) अकाउंट पर करीब 1 लाख फॉलोअर्स हैं. गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ संदीप ने बताया कि “पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने सोशल मीडिया पर देखी गई एक आपत्तिजनक पोस्ट को उठाकर अपने अकाउंट से साझा किया था. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से उसका मोबाइल भी बरामद कर लिया है. उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा. फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है.”

 

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बांके बिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर प्रतिवादियों को नोटिस जारी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार समिति से मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के समय में परिवर्तन और देहरी पूजा बंद किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें 7 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह याचिका मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी के जरिए दायर की गई थी।
याचिका में समिति द्वारा लिए गए उन फैसलों को चुनौती दी गई है, जिनमें मंदिर के दर्शन के समय में बदलाव किया गया है और पारंपरिक देहरी पूजा को बंद कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट के 8 अगस्त के पूर्व आदेश के विरुद्ध है, जिसमें साफ कहा गया था कि समिति को मंदिर की आंतरिक धार्मिक प्रथाओं, जिनमें पूजा, सेवा और प्रसाद शामिल हैं, उनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
याचिका के मुताबिक देहरी पूजा एक पवित्र अनुष्ठान है जो मंदिर के आम जनता के लिए बंद रहने के दौरान किया जाता है। भक्तों का मानना ​​है कि देहरी देवता के चरणों का प्रतीक है, और इस दौरान सुगंध, फूल और प्रार्थना जैसी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। याचिका में कहा गया है कि इस अनुष्ठान को रोकना अन्यायपूर्ण है और संविधान के तहत गोस्वामी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
मंदिर समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि एचपीसी ने सदियों से चले आ रहे मंदिर के खुलने के समय में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि नए कार्यक्रम से देवता के सोने और आराम करने का समय प्रभावित होता है, जिसे पारंपरिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा माना जाता है। इन बदलावों से अहम आंतरिक अनुष्ठानों के समय में भी परिवर्तन आया है, जिसमें देवता के जागने और सोने का समय भी शामिल है। सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देवता को एक मिनट के लिए भी आराम नहीं करने देते। इसी वक्त देवता का सबसे ज्यादा शोषण होता है। जो लोग मोटी रकम चुका सकते हैं, उन्हीं को विशेष पूजा की अनुमति दी जाती है।

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Corporate Packers and Movers in Mumbai for IT Office and Equipment Shifting

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With nearly two decades of industry expertise, Indeed Packers & Movers has built a strong reputation as one of the most reliable packers and movers in Mumbai and Navi Mumbai. The company specializes in household shifting, office relocation, car and bike transport, packing and unpacking, and secure warehousing solutions. Backed by a professional team, modern equipment, and a customer-first approach, Indeed Packers & Movers ensures that every item is handled with the highest level of care and precision.

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To support customers who need temporary space, Indeed Packers & Movers provides secure warehousing and storage services with well-maintained facilities, flexible short-term and long-term options, and round-the-clock CCTV surveillance.

The company serves all major areas of Mumbai including Andheri, Bandra, Borivali, Dadar, Powai, Mulund, and Chembur, along with key locations in Navi Mumbai such as Kharghar, Vashi, Nerul, Panvel, CBD Belapur, Airoli, and Ghansoli. Its strong PAN India network extends to cities like Delhi, Bangalore, Pune, Hyderabad, Kolkata, Chennai, Ahmedabad, Surat, and many more.

 

What sets Indeed Packers & Movers apart is its commitment to transparent pricing, timely delivery, and customer satisfaction. With no hidden charges, a strong nationwide network, and experience dating back to 2006, the company has become a preferred choice for thousands of successful relocations.

As demand for dependable moving services continues to grow, Indeed Packers & Movers remains focused on delivering quality, safety, and trust with every move — locally and across India.

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