अब अनजान नंबर से आए कॉल पर दिखेगा कॉलर का नाम

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CNAP क्या है—यह सवाल इन दिनों टेलीकॉम यूजर्स के बीच चर्चा में है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) भारत में Calling Name Presentation यानी CNAP तकनीक लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस नई सुविधा के जरिए अब किसी अनजान नंबर से आने वाले कॉल पर भी कॉल करने वाले व्यक्ति का वेरिफाइड नाम मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। यानी कॉलर का नाम देखने के लिए नंबर सेव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। CNAP को अक्तूबर 2025 में मंजूरी मिल चुकी है और अप्रैल 2026 तक इसके आम यूजर्स के लिए उपलब्ध होने की संभावना है।

मंजूरी मिलने के बाद नवंबर 2025 से CNAP की लाइव टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। फिलहाल इसे अलग-अलग नेटवर्क पर ट्रायल के तौर पर रोलआउट किया जा रहा है। टेलीकॉम कंपनियों ने 4G और 5G स्मार्टफोन यूजर्स के लिए सीमित नेटवर्क पर इसका परीक्षण शुरू किया है, ताकि असली परिस्थितियों में इसकी परफॉर्मेंस को परखा जा सके। अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो आगे चलकर पुराने नेटवर्क्स को भी इसमें शामिल किया जाएगा। TRAI ने स्मार्टफोन कंपनियों को नए डिवाइस में CNAP सपोर्ट देने के निर्देश भी दिए हैं।

CNAP क्या है और इसका सबसे बड़ा फायदा क्या होगा? दरअसल, बीते कुछ सालों में फर्जी कॉल, टेली-स्कैम और साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसी वजह से लोग अनजान नंबर से आए कॉल उठाने से बचते हैं। TRAI का मानना है कि अगर कॉल के साथ कॉलर का सही और वेरिफाइड नाम दिखेगा, तो ठगी के मामलों में काफी हद तक कमी आएगी।

CNAP की खास बात यह है कि इसका डेटा सोर्स पूरी तरह भरोसेमंद होगा। यह कॉलर का नाम सीधे टेलीकॉम कंपनियों के KYC-वेरिफाइड रिकॉर्ड से लेगा। सिम लेते समय आधार जैसे आधिकारिक दस्तावेजों पर जो नाम दर्ज होता है, कॉल के दौरान वही नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। कुल मिलाकर, CNAP क्या है का जवाब यही है कि यह तकनीक कॉलिंग को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कर्नाटक में CM पद के लिए खींचतान जारी… जानिए विवाद को लेकर क्या बोले खरगे

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बेंगलुरु। कर्नाटक (Karnataka) में मुख्यमंत्री पद (Chief Minister’s post) को लेकर चल रही टसल ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar) के बीच खुलेआम तो नहीं लेकिन एक खींचतान तो चलती आ रही है। नेता भले ही खुलेआम कुछ न बोलें, लेकिन समर्थक जरूर बात करते हैं। इस समस्या को लेकर कई लोगों का मानना है कि यह कांग्रेस हाई कमान की अस्पष्ट सोच के कारण हुआ है। इसका जवाब देते हुए खरगे ने रविवार को साफ किया कि कर्नाटक का सत्ता संघर्ष केवल स्थानीय स्तर पर है, इसका कांग्रेस हाई कमान से कोई लेना देना नहीं।

पत्रकारों से बात करते हुए खरगे ने इस बात से पूरी तरह से इनकार किया कि कांग्रेस हाई कमान की वजह से अनिश्चितता पैदा हुई है। उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय नेताओं को अपने आंतरिक मतभेदों की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हाईकमान ने कोई भ्रम की स्थिति पैदा नहीं की। यह सब स्थानीय स्तर की बात है। इसका दोष हाई कमान पर मढ़ना सही नहीं है।

पार्टी के कर्नाटक चुनाव जीतने को लेकर शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों पक्षों के बीच में चल रहे विवाद में जीत का श्रेय लेने की भी खूब होड़ लगी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने संगठन और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी की जीत सामूहिक प्रयास का नतीजा है, न कि किसी एक व्यक्ति कि महत्वाकांक्षा का।

खरगे का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य में मुख्यमंत्री विवाद चरम पर नजर आ रहा है। दोनों पक्ष के लोग एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और सार्वजनिक रूपसे अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। खरगे से जब पूछा गया कि क्या कर्नाटक की सत्ता को लेकर डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से मिलेंगे। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी भी यात्रा की जानकारी नहीं है।

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पूर्व IG ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में 8 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का किया जिक्र

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नई दिल्ली: पंजाब के पटियाला में पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल (IG) अमर सिंह चहल घर में गंभीर रूप से घायल हालत में मिले हैं. परिजनों ने तुरंत उन्हें इलाज के लिए पटियाला के पार्क हॉस्पिटल में पहुंचाया है. जहां डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में जुट गई है. उनकी स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है. परिजनों ने बताया कि अमर सिंह चहल ने खुद को गोली मारी है. जिसकी वजह से वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

पुलिस को घटनास्थल से एक 12 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें ऑनलाइन ठगी के कारण आर्थिक परेशानियों का उल्लेख होने की बात लिखी गई है. हालांकि पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पूरी तरह से जांच की जाएगी.

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने मौके पर जांच की और जरूरी सबूत इकट्ठा किए हैं. साथ ही परिजनों और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं. जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. फिलहाल पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है.

अमर सिंह चहल के परिजनों ने बताया कि उनके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की वारदात हुई थी जिसमें ठगों ने उनसे 8 करोड़ रुपये ठग लिए थे. इसी बात का जिक्र उन्होंने 12 पेज के सुसाइड नोट में किया है. उन्होंने पंजाब के डीजीपी के नाम यह लेटर लिखा है जिसमें इस मामले में तुरंत ध्यान देने की अपील की गई है.

बता दें कि अमर सिंह चहल 2015 के फरीदकोट फायरिंग मामले में आरोपी हैं. इस मामले में 24 फरवरी 2023 को एडीजीपी एलके यादव के नेतृत्व में पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम ने फरीदकोट की एक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें अरम सिंह चहल का नाम शामिल है. इस चार्जशीट में पंजाब के कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल किए गए हैं.

टीएमसी से निकाले गए हुमायूं ने भरी हुंकार……….2026 में ममता सत्ता में नहीं वापस आएगी 

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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने नया राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) होगा। इसकी राज्य समिति में 75 सदस्य हैं, जिसमें करीब 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हिंदू समुदाय का होगा। कबीर ने बताया कि पार्टी की औपचारिक शुरुआत मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में एक जनसभा के दौरान होगी। 
बात कि मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल जिला है। इस क्षेत्र में राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 30 सीटें हैं। वर्ष 2026 के मार्च-अप्रैल में बंगाल विधानसभा चुनाव होने हैं। श्री कबीर ने कहा कि इस दौरान वह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए करीब पांच संभावित उम्मीदवारों की भी घोषणा करने वाले है। 
उन्होंने कहा कि वे रेजीनगर और बेलडांगा दोनों सीटों से चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं और उन्हें 2026 में दोनों सीटें जीतने का भरोसा है। बेलडांगा मैदान में उनके सैकड़ों समर्थकों के बीच कुछ के हाथों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के झंडे भी लहरा रहे थे।
सुंदरबन उन्नयन शैक्षिक ट्रस्ट से जुड़े एक समर्थक ने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के लिए एक करोड़ की राशि देने की भी घोषणा की। कबीर ने कहा कि प्रस्तावित बाबरी मस्जिद परिसर के पास इस भविष्य में स्थापित किया जाएगा। कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी का झंडा जल्द ही पूरे राज्य में दिखेगा। पार्टी का झंडा तृणमूल कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज जैसा होगा। उन्होंने कहा कि वह पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काम करता रहूंगा। कबीर ने कहा, चुनाव आयोग की ओर से आवंटन के आधार पर पार्टी का चिह्न टेबल, जोड़ा गुलाब या नारियल पेड़ हो सकता है। मेरी पहली पसंद टेबल है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और मुर्शिदाबाद में जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) सीपीआई(एम), इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और कांग्रेस के साथ गठबंधन करेगी। कबीर ने कहा, हम मुर्शिदाबाद में नया इतिहास रचने जा रहे हैं। 2026 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस समाप्त हो जाएगी।

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राजस्थान में बवाल, राज्य की 90 फीसदी पहाड़ियों पर संकट, विधायक ने PM को लिखी चिट्ठी

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नई दिल्ली: राजस्थान के अरावली पहाड़ी को लेकर दिल्ली से लेकर राजस्थान तक सियासी घमासान मचा हुआ है. भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय संकट के मुहाने पर खड़ी है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली संरचनाओं को अरावली ने मानने की नई व्याख्या की बात सामने आते ही राजस्थान की सियासत गरमा गई है. पर्यावरण को लेकर तरह-तरह की चर्चा भी शुरू हो गई है.

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह परिभाषा अगर लागू हुई, तो अरावली का 90 फीसदी हिस्सा संरक्षण से बाहर हो जाएगा और इसके परिणाम विनाशकारी होंगे. दूसरी ओर राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस मुद्दे को लेकर मुहिम तेज कर दी है. भाटी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अरावली को बचाने के लिए नया मोर्चा खोल दिया है.

भाटी ने पत्र में आरोप लगाया है कि यह आदेश खनन माफियाओं के लिए रेड कार्पेट जैसा है. अरावली खत्म हुई तो पूरा उत्तर-पश्चिम भारत पर्यावरणीय आपदा झेलेगा. वही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस अभियान को खुला समर्थन दिया है और सोशल मीडिया के माध्यम से इसे जन आंदोलन बनाने की कोशिशों में जुटे हैं. मसला क्या है? 100 मीटर की परिभाषा और उसका खतरा.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सिफारिश को मानते हुए कहा था कि केवल वही पहाड़ी अरावली कही जाएगी जो आसपास की सतह से 100 मीटर ऊंची हो और 500 मीटर के दायरे में दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां हों तो उसे अरावली रेंज माना जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली की जो नई परिभाषा सामने आई है वो उसके वास्तविक भौगोलिक संरचना से बिल्कुल अलग है.

राजस्थान में कुल 12,081 अरावली पहाड़ियां हैं. इनमें से केवल 1,048 ही 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई की हैं. इसका मतलब यह हुआ है कि राज्य की करीब 90 फीसदी पहाड़ियां तय दायरे से बाहर हो जाएंगीं. इसे लेकर राज्य में विरोध शुरू हो गया है.

पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कानूनी परिभाषा नहीं है, पर्वतमाला को खत्म करने जैसा कदम है. लोगों का कहना है कि नए आदेश से अवैध खनन को वैधता मिलेगी, रियल एस्टेट, होटल, फार्महाउस प्रोजेक्ट बढ़ेंगे और मरुस्थल का विकास भी तेजी होगा जिसका सीधा असर मानसूनी गतिविधियों पर पड़ेगा. जिसकी वजह से कई तरह के संकट पैदा हो सकते हैं. स्थानीय स्तर पर कई क्षेत्रों में जल को लेकर संकट खड़ा हो सकता है.

अरावली को राजस्थान की जीवन रेखा भी करते हैं. यह करीब 692 किलोमीटर लंबी है और इसका 80 फीसदी हिस्सा राजस्थान के 15 जिलों से गुजरता है. राजस्थान में अरावली की वजह से तापमान में नियंत्रण, मानसून दिशा निर्धारण, दशा और दिशा भी बदल सकती है. साथ ही साथ धूल भरी आंधियों को लेकर संकट पैदा हो सकता है क्योंकि अरावली की वजह से समतल इलाकों में इसका असर कम होता है.

 केंद्र सरकार पर बरसीं सीएम ममता बनर्जी

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चुनाव आयोग केवल भाजपा के इशारे पर कर रहा काम

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोलकाता में आयोजित पार्टी बैठक में ममता ने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संस्था की तरह काम नहीं कर रहा, बल्कि भाजपा के निर्देशों पर चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची तैयार करने में भारी स्तर पर गलतियां हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया जानबूझकर की जा रही है ताकि खास समुदायों के वोट छीने जा सकें। उन्होंने ने साफ चेतावनी दी कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जो पार्षद और पार्टी कार्यकर्ता निष्क्रिय रहेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बूथ स्तर के एजेंटों को सतर्क रहने और मतदाताओं की रक्षा करने का निर्देश दिया।

मटुआ समुदाय को निशाना बनाने का दावा
ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि मटुआ समुदाय के मताधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए प्रशासनिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। ममता ने केंद्र से भेजे गए माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को स्थानीय भाषा और हालात की समझ नहीं है, जिससे आम मतदाताओं को परेशानी हो रही है।

लोकतंत्र बचाने की लड़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

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पति की गुमशुदगी और ‘वुड ग्राइंडर’ की गुत्थी, एक छोटी सी चूक ने खोला हत्या का राज

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संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक दिल दहला देने वाला हत्या का मामला सामने आया है. यहां पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस के अनुसार महिला ने पहले पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और फिर करीब एक महीने तक सच छिपाए रखा.

मृतक की पहचान 38 वर्षीय राहुल के रूप में हुई है. राहुल संभल के चंदौसी इलाके के मोहल्ला चुन्नी का रहने वाला था. उसकी पत्नी रूबी ने 18 नवंबर को थाने में शिकायत दी थी कि उसका पति घर से निकला था और वापस नहीं लौटा. 

कैसे हुआ शव बरामद?

15 दिसंबर को ईदगाह क्षेत्र के पास एक नाले से एक क्षत विक्षत शव बरामद हुआ. शव का सिर हाथ और पैर गायब थे. हालत देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया. जांच के दौरान शव पर राहुल नाम लिखा मिला. आसपास के थानों में पुलिस ने दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली. 

जांच में क्या आया सामने?

तकनीकी जांच में सामने आया कि राहुल का मोबाइल फोन 18 नवंबर से बंद था. इसके बाद पुलिस का शक रूबी पर गहराने लगा. सख्ती से पूछताछ करने पर रूबी टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस के अनुसार रूबी का गौरव नाम के युवक से प्रेम संबंध था. दोनों को राहुल ने आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था. इसी बात को लेकर रूबी और गौरव ने राहुल की हत्या की योजना बनाई. 

कैसे की राहुल की हत्या?

दोनों ने लोहे की रॉड और मूसल से राहुल पर हमला किया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने लकड़ी काटने वाली ग्राइंडर मशीन का इस्तेमाल किया. शव के टुकड़े कर एक हिस्सा नाले में फेंका गया जबकि बाकी हिस्सों को राजघाट ले जाकर गंगा नदी में डाल दिया गया.

पुलिस ने क्या लिया एक्शन?

पुलिस ने आरोपी महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है. हत्या में इस्तेमाल की गई ग्राइंडर हथौड़ा और अन्य औजार बरामद कर लिए गए हैं. मृतक की पहचान पुख्ता करने के लिए डीएनए नमूने सुरक्षित रखे गए हैं. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.

 

 

सोनिया बोलीं-मनरेगा खत्म होगा तो करोड़ों गरीब बेरोजगार होंगे, सालभर काम की गारंटी खत्म हो जाएगी

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मोदी मजदूरों का पैसा बढऩे नहीं देना चाहते

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा को खत्म करने से गांवों में रहने वाले करोड़ों लोगों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने मनरेगा के खत्म होने को सामूहिक नाकामी बताया और इसके खिलाफ सभी से एकजुट होने की अपील की है। सोनिया गांधी का यह बयान तब आया है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) बिल को मंजूरी दे दी है, जो मनरेगा की जगह लेगा। इस नए कानून में ग्रामीण मजदूरों को 125 दिन काम देने की गारंटी दी गई है। सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने कॉलम द बुलडोजर डिमॉलिश ऑफ मनरेगा में यह बात कही।
 सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा, महात्मा गांधी के सर्वोदय यानि ‘सबका कल्याण’ के विचार पर आधारित था। इसने काम के अधिकार को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, संकट से बचने के लिए ग्रामीणों के लिए बने इस रोजगार गारंटी कानून को बुलडोजर चलाकर खत्म कर दिया गया है। रूत्रहृक्रश्वत्र्र संविधान के अनुच्छेद 41 से प्रेरित था, जिसमें नागरिकों को काम का अधिकार देने की बात कही गई है। सोनिया ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना चर्चा, बिना सलाह और संसद की प्रक्रिया का सम्मान किए बिना योजना को खत्म कर दिया। जबकि महात्मा गांधी का नाम हटाना तो सिर्फ शुरुआत थी, असल में पूरी योजना को ही खत्म कर दिया गया है।

नया कानून अफसरशाही नियमों का ढांचा
 सोनिया ने नए कानून को अफसरशाही नियमों का ढांचा बताया। उन्होंने दावा किया कि इस योजना का दायरा अब केंद्र सरकार की मर्जी से होगा। पहले जहां बजट की कोई सीमा नहीं थी। अब तय बजट होगा, जिससे राज्यों में काम के दिनों की संख्या सीमित हो जाएगी। इससे सालभर रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी। सोनिया ने कहा की मनरेगा की सबसे बड़ी सफलता थी कि इससे ग्रामीण गरीबों, खासकर भूमिहीन मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत बढ़ी और मजदूरी में सुधार हुआ। नया कानून इस ताकत को कमजोर कर देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मजदूरों का पैसा बढऩे से रोकना चाहती है, जबकि आजादी के बाद पहली बार कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है।

रोजगार 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा झूठा
 उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून में खर्च का बड़ा बोझ राज्यों पर डालकर सरकार उन्हें इस योजना के तहत काम देने की राह में रुकावट डाल रही है। राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है, अब यह और बिगड़ेगी। सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार झूठा दावा कर रही है कि रोजगार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि, मोदी सरकार ने पिछले 10 सालों में बजट रोकी, तकनीकी मुश्किलें खड़ी की और मजदूरों को देर से पैसा देकर मनरेगा को कमजोर किया है।

मनरेगा खत्म करना, संविधान पर हो रहे हमलों का हिस्सा
सोनिया गांधी ने अपने लेख में लिखा, काम का अधिकार खत्म करना संविधान पर लगातार हो रहे हमलों का हिस्सा है। वोट देने का अधिकार, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, वन अधिकार कानून और भूमि अधिग्रहण कानून को भी कमजोर किया गया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, तीन कृषि कानूनों के जरिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि रूस्क्क का अधिकार छीना गया और अब नेशनल फूड सिक्योरिटी कानून भी खतरे में है।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, मात्र 9 महीने में फाइनल हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, खुलेंगे तरक्की के नए द्वार

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India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड ने व्यापारिक रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी है. सोमवार को पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) की घोषणा की है. दिलचस्प बात यह है कि यह समझौता किसी मैराथन की तरह नहीं, बल्कि एक स्प्रिंट की तरह पूरा किया गया. सिर्फ 9 महीने की बातचीत में इसे अंजाम तक पहुंचा दिया गया.

9 महीने की मेहनत लाई रंग
आमतौर पर दो देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) होने में सालों लग जाते हैं, लेकिन भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह समझौता रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ है. इसकी नींव मार्च 2025 में पड़ी थी जब पीएम लक्सन भारत दौरे पर आए थे. दोनों देशों के बीच व्यापार की इच्छाशक्ति इतनी मजबूत थी कि महज 9 महीनों के भीतर बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया.

क्या होगा सीधा फायदा?
इस समझौते से दोनों देशों के आम नागरिकों और व्यापारियों को बड़े फायदे होने वाले हैं.

सस्ता होगा सामान: समझौते के तहत न्यूजीलैंड से भारत आने वाली 95% वस्तुओं पर से टैरिफ या तो हटा दिया गया है या काफी कम कर दिया गया है.

व्यापार होगा दोगुना: दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करना है.

बड़ा निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में करीब 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगा.

किसानों और युवाओं के लिए मौके: समझौते से दोनों देशों के किसानों, छोटे उद्योगों (MSMEs), स्टार्टअप्स और छात्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे.

निर्यात में उछाल: न्यूजीलैंड का अनुमान है कि भारत को होने वाला उसका निर्यात अगले दो दशकों में 1.1 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1.3 बिलियन डॉलर सालाना हो जाएगा.

सिर्फ व्यापार ही नहीं, रिश्तों में भी मजबूती
पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने इस दौरान न केवल बिजनेस की बात की, बल्कि रक्षा, खेल, शिक्षा और आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर भी चर्चा की. पीएम लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यह समझौता कीवी बिजनेस के लिए 1.4 अरब भारतीय ग्राहकों के दरवाजे खोल देगा.

भारत की ‘FTA’ की लिस्ट में एक और उपलब्धि
भारत पिछले कुछ सालों से दुनिया के विकसित देशों के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी तेजी से बढ़ा रहा है. न्यूजीलैंड के साथ हुआ यह समझौता भारत का हालिया सातवां बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है. इससे पहले भारत ओमान, यूके, ईएफटीए (EFTA) देश, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस के साथ भी इसी तरह के समझौते कर चुका है.

मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट में तकनीकी खराबी, हवा में अटकी सैकड़ों यात्रियों की जान, दिल्ली एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

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Air India Emergency Landing: एअर इंडिया के एक विमान में दिल्ली से उड़ान भरने के बाद तकनीकी खामी सामने आई, जिसके बाद उसे इमरजेंसी लैंडिंग कराकर सुरक्षित दिल्ली हवाई अड्डे पर वापस उतार लिया गया है. एयर इंडिया ने सभी यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है. इसकी जानकारी एयर इंडिया के प्रवक्ता ने दी है.

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि 22 दिसंबर को दिल्ली से मुंबई जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI887 ने उड़ान भरने के बाद, मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली लौट आई. विमान दिल्ली में सुरक्षित रूप से उतर गया और यात्री एवं चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से उतर गए.

दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग
दरअसल, फ्लाइट AI 887 को दिल्ली से मुंबई जाना था. लेकिन उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद उसमें तकनीकी खराबी सामने आई. जिसके बाद फुल इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई. प्रोटोकॉल के तहत सभई जरूरी इंतजाम कर लिए गए. इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर सुरक्षित वापस उतार लिया गया. यात्रियों और क्रू मेंबरों को बाहर निकाल लिया गया.

इससे पहले भी एयर इंडिया के कई विमानों में तकनीकी समस्या आ चुकी है. जिस पर सुधार किया गया. इसी साल एयर इंडिया का विमान बड़े हादसे का शिकार हो चुका है. अहमदाबाद से लंदन से लिए जा रहा विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद क्रैश हो गया था, जिसमें सवार 1 यात्री को छोड़कर सभी की जान चली गई थी. इसके बाद से लगातार एयर इंडिया के विमानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.