भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष से मिले सीएम

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डॉ. मोहन यादव ने नितिन नवीन को दी बधाई

भोपाल। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। साथ ही सीएम ने उन्हें यशस्वी कार्यकाल के लिए बधाई भी दी है। नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सीएम मोहन यादव की यह पहली मुलाकात है। इस मुलाकात को लेकर सीएम ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए जानकारी दी है।
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी में यह एक नए दौर की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने नई पीढ़ी को अवसर दिया है। भारत युवाओं का देश है और विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष यदि युवा बनता है, तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है और उसी दिशा में मध्यप्रदेश भी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं, केंद्रीय विधि एवं न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल से भी सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात की है।

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ओडिशा में क्रिसमस के बाद बढ़ेगी ठंड, चलेगी शीत लहर

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भुवनेश्वर। ओडिशा में क्रिसमस के बाद ठंड बढ़ने की संभावना है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 25 दिसंबर से राज्य में ठंड के एक नए दौर की शुरुआत होने का अनुमान लगाया है। क्षेत्र में शुष्क और ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं के तेज प्रवाह के कारण शीत लहर और प्रबल हो सकती है। तापमान में गिरावट का कारण पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के समाप्त होने को भी बताया है, जिससे प्रदेश में रात के तापमान में और कमी आ सकती है।
ओडिशा के कई हिस्सों में इस समय कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा छाया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि निचले वायुमंडलीय स्तरों पर नमी युक्त हवाओं के बढ़ते प्रवाह के कारण आने वाले दिनों में कोहरे की तीव्रता और बढ़ सकती है, जिससे कई इलाकों में दृश्यता प्रभावित होने की आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक इस मौसम में ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में तापमान कई बार रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है। 
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिसंबर की शुरुआत में देखी गई तेज तापमान गिरावट पहले से किए गए पूर्वानुमान के अनुरूप थी और 25 दिसंबर के बाद इसी तरह का रुझान फिर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक कुछ इलाकों में इस दौरान तापमान में अधिकतम सात डिग्री सेल्सियस तक की तेज गिरावट दर्ज की जा सकती है।

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बीजेपी सरकार ने अरावली पर्वतमाला के 100 मीटर फॉर्मूले को क्यों मान्यता दी

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पूर्व सीएम गहलोत ने उठाए सवाल, भविष्य को खतरे में डालने के लगाए आरोप 

जयपुर। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अरावली की परिको लेकर उपजे विवाद के बीच सवाल किया कि बीजेपी सरकार ने उस 100 मीटर फॉर्मूले को क्यों मान्यता दी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 2010 में ही खारिज कर दिया था। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर अरावली को खनन माफिया के हवाले करने की कोशिश कर राज्य के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
गहलोत का 100 मीटर फॉर्मूले से तात्पर्य केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक समिति की अरावली पर्वतमाला की परिसंबंधी हालिया सिफारिशों से था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 20 नवंबर को स्वीकार कर लिया था। अरावली पर्वतमाला निर्दिष्ट अरावली जिलों में स्थित ऐसी स्थलाकृति है जिसकी ऊंचाई स्थानीय भू-भाग से 100 मीटर या उससे ज्यादा हो और 500 मीटर की दूरी के अंदर स्थित दो या दो से अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह है।
गहलोत ने दोहराया कि नई परिसे राज्य की 90 फीसदी पर्वतमाला नष्ट हो जाएगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुमोदित परिसे अरावली क्षेत्र का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ‘संरक्षित क्षेत्र’ के अंतर्गत आ जाएगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौर ने भी दिन में गेहलोत के दावे को ‘बेबुनियाद और भ्रामक’ बताते हुए कहा था कि नया ढांचा ‘पहले से ज्यादा सख्त’ और ‘वैज्ञानिक’ है।
गहलोत ने राठौर के बयान के बाद कहा कि 2003 में एक विशेषज्ञ समिति ने आजीविका और रोजगार के परिप्रेक्ष्य से 100 मीटर की परिकी सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि इस सिफारिश पर अमल करते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2010 को कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। हालांकि कोर्ट ने केवल तीन दिनों के अंदर ही इस परिको खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी तत्कालीन सरकार ने न्यायपालिका के आदेश को स्वीकार किया और बाद में भारतीय वन सर्वेक्षण के जरिए अरावली क्षेत्र का मानचित्रण करवाया।
उन्होंने कहा कि हमारी कांग्रेस सरकार ने अरावली में अवैध खनन का पता लगाने के लिए रिमोट सेंसिंग के इस्तेमाल के निर्देश दिए थे। 15 जिलों में सर्वेक्षण के लिए सात करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। पूर्व सीएम ने साथ ही यह भी बताया कि पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को अवैध खनन पर अंकुश लगाने की सीधी जिम्मेदारी दी गई थी। गहलोत ने कहा कि अब सवाल यह है कि राजस्थान की वर्तमान सरकार ने केंद्र की एक समिति को उसी परिका समर्थन और सिफारिश क्यों की, जिसे कोर्ट ने 2010 में पहले ही खारिज कर दिया था। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे दबाव या कोई बड़ी साजिश रही होगी।

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बाथरूम में लड़के ने बनाए संबंध, अधिक खून बहने से गर्लफ्रेंड की मौत 

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महबूबनगर । यह एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। महबूबनगर जिले के मूसेपेट मंडल में हुई त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घटना में 22 वर्षीय युवती की मौत के मामले में उसके प्रेमी, 20 वर्षीय विवेक को गिरफ्तार किया गया है। 
घटना 17 दिसंबर की रात की है, जब आरोपी ने युवती को मिलने के लिए बुलाया था। पुलिस का कहना है कि दोनों के बीच पहले से जान-पहचान थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि यौन उत्पीड़न की घटना एक वॉशरूम में हुई। तभी युवती अचानक बेहोश हो गई और युवती को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। तभी स्थिति बिगड़ने पर आरोपी और अन्य लोगों ने युवती ने अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही युवती की मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने से पहले ही मृत घोषित किया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी विवेक के खिलाफ भारतीय कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। 
पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का किसी राजनीतिक दल या चुनावी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह से एक आपराधिक मामला है।
वर्तमान में पुलिस पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों और शारीरिक संघर्ष के निशानों की पुष्टि हो सके। आरोपी विवेक फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और पुलिस उससे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए पूछताछ कर रही है। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस ने लोगों से संयम बनाए रखने और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। यह घटना महिला सुरक्षा और समाज में संवेदनशीलता की आवश्यकता पर एक गंभीर सवाल उठाती है। कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच ही पीड़िता के परिवार को न्याय दिला सकती है।

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 भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश का पलटवार………..गृहमंत्री पटेल ने गुरु गोलवलकर से क्या कहा था? 

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और महासचिव जयराम रमेश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने आरएसएस के गठन के कारण और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा दिए गए निर्देशों पर सवाल उठाया था। कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। देश के पहले गृहमंत्री पटेल ने गुरु गोलवलकर से क्या कहा था? आप एक गुप्त संगठन हैं। एक संस्था बनिए। पारदर्शिता लाइए। गुप्त रूप से काम मत कीजिए। यह सरदार पटेल का आरएसएस को लिखा पत्र है।
कांग्रेस नेता रमेश ने आरएसएस की इस बात पर आलोचना की कि संगठन ने 50 वर्षों से अधिक समय तक अपने नागपुर मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया, ध्वज संहिता में बदलाव के बाद ही 2002 में फिर से शुरू किया। इसके अलावा, रमेश ने संघ की विचारधारा पर सवाल उठाकर 26 नवंबर, 1949 को भारत के संविधान को अपनाने के कुछ दिनों बाद रामलीला मैदान में अंबेडकर, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के पुतले जलाने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने पूछा, किस विचारधारा ने ऐसा माहौल बनाया, जिसके कारण महात्मा गांधी की हत्या हुई?
उन्होंने पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद और कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश का जिक्र किया, जिनसे जब पूछा गया कि गांधी या गोडसे? तब उन्होंने कहा, मुझे सोचना पड़ेगा, फिर भी उन्हें टिकट मिला और जिताया गया। उन्होंने कहा कि इसतरह के लोग राष्ट्रवाद के प्रमाण पत्र बांटने में व्यस्त हैं। उनकी ये टिप्पणियां आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान के बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरएसएस एक कट्टर राष्ट्रवादी संगठन है।
कोलकाता में आरएसएस 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम को संबोधित कर संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ हमेशा से यह तर्क देता आया है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है, क्योंकि यहां की संस्कृति और बहुसंख्यक लोगों का हिंदू धर्म से जुड़ाव है। हालांकि, धर्मनिरपेक्ष शब्द मूल रूप से संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा नहीं था, लेकिन इस तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल के दौरान संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा समाजवादी शब्द के साथ जोड़ा गया था। 

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रेलवे ने फिर बढ़ाया यात्री किराया, रायपुर से दिल्ली तक का सफर 28 रुपये तक हुआ महंगा

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Railway New Fare: रेल मंत्रालय ने एक बार फिर ट्रेनों का यात्री किराया बढ़ा दिया है. इसके तहत अब यात्रियों को हर एक किलोमीटर पर 1 से 2 पैसे अधिक देने होंगे. यानी दूरी के हिसाब से सफर किराया बढ़ता जाएगा. रेलवे के नई किराए दरें 26 दिसंबर से लागू होंगी.

हालांकि, सामान्य श्रेणी में 215 किमी तक यात्रा करने वालों पर नई दरें लागू नहीं होंगी, लेकिन यदि सफर 215 किमी से ज्यादा दूरी है तो सामान्य श्रेणी में हर एक किलोमीटर पर 1 पैसा किराया लगेगा. वहीं मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन एसी श्रेणी में 2 पैसा और एसी श्रेणी में भी किराया 2 पैसा प्रति किलोमीटर बढ़ेगा. बता दें, रेलवे ने बीते पांच साल में तीसरी बार दरों में बदलाव किया है.

रायपुर से दिल्ली का किराया 28 रुपये महंगा

उदाहरण के तौर पर रायपुर से नई दिल्ली की दूरी करीब 1388 किलोमीटर है. ऐसे में अगर आप किसी भी ट्रेन के एसी या नॉन एसी कोच से रायपुर से दिल्ली की दूरी तय करते हैं तो आपको किराए में करीब 28 रु. अतिरिक्त लगेंगे. यानी यदि टिकट अभी 2315 रु. का है तो वो 2343 रु. का हो जाएगा. हालांकि, उपनगरीय सेवाओं और मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) के सहारे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को राहत दी गई है और उनके कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है.

रेल मंत्रालय के अनुसार, यह बढ़ोतरी ऑपरेशनल खर्चों को संतुलित करने के लिए की गई है, लेकिन इसका असर यात्रियों पर कम से कम रखने की कोशिश की गई है. हालांकि, किराया बढ़ोतरी से साथ ही रेलवे ने क्रिसमस और नए साल के दौरान आठ जोन में 244 अतिरिक्त ट्रिप के साथ स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना बनाई है. वहीं यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रेलवे अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा कर सकता है.

क्यों बढ़ाया गया किराया?

रेलवे के अनुसार, देशभर में ट्रेनो का ऑपरेशन खर्च बढ़कर 2.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वहीं जिसमें से रेल सुरक्षा खर्च 1.15 लाख करोड़ है. किराए में की गई बढ़ोतरी से रेलवे को सालाना 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी.

नगर परिषद चुनावों में मिली करारी हार………वंचित बहुजन आघाड़ी से हाथ मिलने को बेकरार कांग्रेस  

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है। नगर परिषद चुनावों में महायुति (बीजेपी, शिंदे सेना, और अजीत पवार एनसीपी) की बड़ी जीत के बाद, विपक्षी दल अब बीएमसी (बीएमसी) चुनावों के लिए अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर हैं।
दरअसल नगर परिषद चुनाव में महायुति ने स्पष्ट बढ़त हासिल की हैं, जबकि महा विकास आघाड़ी काफी पीछे रह गई है। इस हार ने कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण और नए सहयोगियों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। वहीं शिवसेना-यूबीटी और मनसे (मनसे) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने कांग्रेस को असहज किया है, जिससे वह अब वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) की ओर हाथ बढ़ा रही है। पिछले 10 दिनों में 4 बैठकें हो चुकी हैं। रविवार की बैठक में मुंबई प्रभारी यूबी वेंकटेश, वर्षा गायकवाड़, असलम शेख और सचिन सावंत जैसे बड़े नेता शामिल थे। वहीं प्रकाश अंबेडकर की वीबीए का मुंबई के दलित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों में मजबूत जनाधार है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यह साथ मिलकर बीएमसी में सत्ताधारी गठबंधन को चुनौती दे पाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में सावंत और शेख भी शामिल थे। पुरानी पार्टी ने इसके लिए एक 3 सदस्यीय समिति भी बनाई है, जिसमें अमीन पटेल, मधु चव्हाण और सचिन सावंत शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अब तक सकारात्मक बातचीत हुई है और जल्द ही गठबंधन की घोषणा की जा सकती है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा ने कहा, इस बातचीत ने आने वाले दिनों में रचनात्मक बातचीत और लोकतांत्रिक जुड़ाव के महत्व को रेखांकित किया।
बीएमसी और अन्य 28 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है, जिसका अर्थ है कि गठबंधन पर अंतिम मुहर बहुत जल्द लगनी होगी। मुंबई की 227 सीटों पर कांग्रेस और वीबीए के बीच सम्मानजनक समझौता करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि कांग्रेस और उद्धव ठाकरे अलग-अलग सहयोगियों के साथ चुनाव लड़ते हैं, तब इसका सीधा फायदा महायुति को मिल सकता है।

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एनसीआर में ठंड का प्रकोप बढ़ा, बेसहारा लोग रैन बसेरो में ले रहे आश्रय

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प्रशासनिक अमला रैन बसेरों में पहुंचकर सुविधाओं की बारीकी से कर रहा जांच 

नोएडा। एनसीआर में ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है। जिला प्रशासन के आदेश पर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं ने जगह-जगह रैन बसेरा बना दिए हैं। ठंड बढ़ते ही राहगीरों के साथ बेसहारा लोगों ने भी रैन बसेरो में आश्रय लेना शुरू कर दिया है। पिछले तीन दिनों में रैन बसेरों में आश्रित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। रोजाना कई लोग रैन बसेरों में आकर अपनी रात गुजार रहे हैं। दरअसल शहर औद्योगिक इकाई के साथ शिक्षा का हब है। लोग रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों से भी यहां आते हैं। ऐसे लोग रैन बसेरा में रहकर अपनी रात काट रहे हैं। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन दिन पहले जिलाधिकारी ने शहर में बने रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें कुछ खामियां भी मिली। जिलाधिकारी के निर्देश पर रैन बसेरों में खामियों को दुरुस्त कर दिया है। दरअसल प्राधिकरण के जिम्मेदार कर्मचारियों ने रात्रि विश्राम करने वाले लोगों के लिए रैन बसेरों में बिस्तर जमीन पर ही बिछवा दिए थे, जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए तत्काल चारपाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद रैन बसेरों में चारपाई की व्यवस्था कर दी गई है।
 

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 चुनाव में पैसों की बारिश हुई, क्या यही हमारा लोकतंत्र है: संजय राउत

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मुंबई। शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत ने कहा कि भाजपा को 120-125 सीटें मिलीं, शिंदे ग्रुप को 54 मिलीं और अजित पवार को 40-42 सीटें मिलीं। ये नंबर असेंबली वाले ही हैं, है ना? वहीं मशीन, वहीं सेटिंग और वहीं पैसा। यही हमारा लोकतंत्र है। नंबरों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। भाजपा ने मशीनें उसी तरह सेट की हैं। इस कारण वहीं नंबर दिख रहे हैं। उन्हें कम से कम नंबर तब बदलने चाहिए थे। 
उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसों की बारिश हुई। उस बारिश से कौन बचेगा? हमारे उगाए और बोए हुए खेत भी उसके आगे झुक गए हैं। भाजपा और शिंदे ग्रुप 30 करोड़ के बजट वाली म्युनिसिपैलिटी पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अभी तक हमने म्युनिसिपल इलेक्शन में कैंपेनिंग के लिए हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया है। हमने ये इलेक्शन वर्कर्स पर छोड़ दिए थे। लेकिन यहां मुकाबला रूलिंग पार्टियों के अंदर था। मुकाबला हमारे साथ नहीं था। पावर में बैठी 3 पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खेलती रहीं। इससे बहुत सारा पैसा बना। इससे सचमुच पैसों की बारिश हुई। लोगों को भी पैसे से वोट देने की आदत हो गई है। 
वहीं भाजपा ने नागपुर में सबसे अधिक स्थानीय निकाय सीटें जीतीं, जिसमें 22 नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं। इसके बाद पुणे में राष्ट्रीय समिति ने 10 सीटें जीतीं। इन दोनों के अलावा, किसी भी अन्य पार्टी ने किसी जिले में सात से अधिक सीटें नहीं जीतीं। शिवसेना ने जलगांव जिले में सबसे अधिक (छह सीटें) जीतीं। चंद्रपुर जिले में कांग्रेस ने सबसे अधिक सीटें जीतीं, सात सीटों पर कब्जा जमाया। एमवीए पार्टियों में, कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने एक जिले में पांच से अधिक सीटें जीतीं। एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) एक जिले में दो से अधिक सीटें नहीं जीत पाईं, जिनमें से शिवसेना ने यवतमाल में दो सीटें जीतीं।

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एयरलाइंस को मिली बम से उड़ाने की धमकी, हैदराबाद एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप

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नई दिल्ली। हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सोमवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया जब एम्स्टर्डम से आ रही एयरलाइंस की फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी ईमेल के जरिए रविवार देर रात करीब 12 बजे मिली, जब विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था। धमकी की जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। फ्लाइट ने देर रात करीब 1 बजे सुरक्षित लैंडिंग की, जिसके बाद उसे मुख्य टर्मिनल से दूर एक आइसोलेटेड बे में ले जाया गया। 
सीआईएसएफ, बम निरोधक दस्ता और स्निफर डॉग स्क्वॉड ने विमान, यात्रियों के सामान और कार्गो होल्ड की बारीकी से जांच की। अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के बाद किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद बम की धमकी फर्जी निकली। यह घटना दिसंबर 2025 में हैदराबाद एयरपोर्ट पर मिली लगातार बम धमकियों की कड़ी का हिस्सा है। बीते एक महीने में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को इस तरह की धमकियों का सामना करना पड़ा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई।
जानकारी के मुताबिक दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की कुवैत और मदीना से हैदराबाद आ रही फ्लाइट्स को मुंबई और अहमदाबाद डायवर्ट करना पड़ा था। इसके अलावा एमिरेट्स, एयर इंडिया, ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा और कुवैत एयरवेज की उड़ानों को भी धमकियां मिली थीं। कई मामलों में विमानों को बीच रास्ते से वापस लौटाया गया या कड़ी निगरानी में लैंड कराया गया। 9 दिसंबर को तो एक अमेरिकी उड़ान को लेकर एक मिलियन डॉलर की मांग वाली धमकी भी मिली थी, जिसके बाद सभी इंटरनेशनल टर्मिनलों पर हाई अलर्ट जारी किया था। लगातार मिल रही इन फर्जी धमकियों ने एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

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