‘धुरंधर’ ने ‘आरआरआर’ को भी चटाई धूल, वर्ल्डवाइड कलेक्शन में मारी बाजी; जानें कितना रहा कमाई का अंतर?

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‘धुरंधर’ को बॉक्स ऑफिस पर 32 दिन हो चुके हैं। फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 800 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन में इस फिल्म ने हाल ही में ‘आरआरआर’ जैसी सुपरहिट फिल्म को पीछे छोड़ दिया है। जानिए, ‘धुरंधर’ ने अब तक वर्ल्डवाइड कितनी कमाई कर ली है, ‘आरआरआर’ से कितना अधिक कलेक्शन यह कर चुकी है।

धुरंधर’ ने वर्ल्डवाइड पार किया 1200 करोड़ का आंकड़ा

फिल्म ‘धुरंधर’ के मेकर्स ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किए, जिसमें बताया कि फिल्म ने वर्ल्डवाइड 1,240 करोड़ रुपये कलेक्शन कर लिया है। साथ ही मेकर्स ने यह जानकारी भी साझा की कि भारतीय बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म 820.30 करोड़ रुपये कमा चुकी है। 

‘आरआरआर’ की कमाई से आगे निकली ‘धुरंधर’

फिल्म ‘धुरंधर’ ने वर्ल्डवाइड कलेक्शन के मामले में ‘आरआरआर’ को भी पीछे छोड़ दिया है। सैकनिल्क के अनुसार एसएस राजामौली निर्देशित की फिल्म ‘आरआरआर’ ने वर्ल्डवाइड 1230 करोड़ रुपये की कमाई थी। यह फिल्म साल 2022 की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी। इस फिल्म ने आस्कर अवॉर्ड में भी अपना जलवा चलाया था, इस फिल्म के गाने ‘नाटू नाटू’ को बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग का अवॉर्ड मिला। 

इस साल रिलीज फिल्मों से वर्ल्डवाइड कमाई में भी आगे निकली ‘धुरंधर’ 

फिल्म ‘धुरंधर’ इस साल रिलीज हुई फिल्मों से भी वर्ल्डवाइड कलेक्शन के मामले में आगे निकल चुकी है। फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ और ‘छावा’ को भी इसने पछाड़ दिया है।  ‘कांतारा चैप्टर 1’  ने वर्ल्डवाइड सिर्फ 900 करोड़ रुपये कमाए, वहीं ‘छावा’ने वर्ल्डवाइड 809 करोड़ रुपये की कमाई थी। 

अब ‘पुष्पा 2’ के कलेक्शन को पार करने पर निगाहें 

फिल्म ‘धुरंधर’ अब वर्ल्डवाइड ‘पुष्पा 2’ के कलेक्शन को पार करने पर अपनी नजर टिकाए है। अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ साल 2024 में रिलीज हुई थी। इसने वर्ल्डवाइड 1742 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। अगर फिल्म ‘धुरंधर’ 500 करोड़ रुपये की कमाए और करती है तो शायद फिल्म ‘पुष्पा 2’ के वर्ल्डवाइड कलेक्शन को पार सके। 

बीजेपी नेता का आरोप, उद्धव ठाकरे ने किया 3 लाख करोड़ का घोटाला

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uddhav thakreyनई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अमित साटम ने रविवार को शिवसेना (Ubatha) अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही साटम ने कहा कि उन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ‘मराठी समुदाय का अपमान’ किया है।

साटम के सहयोगी और राज्य मंत्री आशीष शेलार ने भी ठाकरे पर उस मांग के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने 68 नगरमहापालिका वार्डों के नतीजों को रद्द करने की मांग की, जहां सत्तारूढ़ ‘महायुति’ पार्टी के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया है। शेलार ने कहा कि शिवसेना (उबाठा)अध्यक्ष 2020 में बिना किसी विरोध के विधान परिषद के सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री बने थे।

 

साटम की ये टिप्पणियां ठाकरे के इस दावे के बीच आई हैं कि अगर बृहन्मुंबई महानगरपालिका का व्यय बजट 15,000 करोड़ रुपये था, तो विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों को पेशगी के रूप में दी जाने वाली राशि तीन लाख करोड़ रुपये है, जो एक ‘घोटाला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनावों के लिए रिश्वत की रकम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष साटम ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ठाकरे तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार थे। साटम ने ठाकरे के एक हालिया तंज की भी कड़ी निंदा की और कहा कि यह टिप्पणी व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि हर मराठी व्यक्ति का अपमान है। साटम ने कहा, ‘उन्होंने (ठाकरे ने) सिर्फ मुझे ही गाली नहीं दी है। उन्होंने हर मराठी व्यक्ति को गाली दी है। उन्होंने मराठी मानुष का अपमान किया है।’’ उन्होंने कहा कि वह एक साधारण परिवार से आते हैं और किसी के संरक्षण के कारण राजनीति में ऊपर नहीं पहुंचे हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ठाकरे के कार्यकाल के दौरान भारी खर्च के बावजूद मुंबई के बुनियादी ढांचे की स्थिति खराब हो गई थी। साटम ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सड़कों पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की हालत ऐसी थी कि ‘यह बताना मुश्किल था कि सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्ढों के अंदर सड़कें हैं’। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर कोविड-19 महामारी के दौरान अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और कहा कि महालक्ष्मी में कोविड-19 देखभाल केंद्र बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थापित किया गया था।
कोरोना के दौरान जमकर हुई घोटालेबाजी- साटम

साटम ने आरोप लगाया, ‘हर चीज में भ्रष्टाचार था – शवों को ले जाने वाले बैग से लेकर पीपीई किट तक – किसी भी चीज को बख्शा नहीं गया। भाजपा नेता ने दावा किया कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए लगभग 1,700 बार और रेस्तरां मालिकों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने तटीय सड़क परियोजना के बारे में ठाकरे के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई थी।

साटम ने जोर देकर कहा,‘तटीय सड़क परियोजना का सारा श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जाता है।’ उन्होंने ठाकरे पर तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के अपने आरोप को दोहराया। उन्होंने ठाकरे से पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण कार्य को दिखाने को कहा। यह उस अवधि का जिक्र करते हुए कहा जब अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर नियंत्रण था। उन्होंने बीएमसी पर ठाकरे की पार्टी के शासन का संदर्भ देते हुए उन्हें पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण काम को दिखाने की चुनौती दी।

साटम ने कहा कि भाजपा बीडीडी चॉल के निवासियों को घर उपलब्ध कराने सहित कम से कम 10 प्रमुख कार्यों की सूची दे सकती है, लेकिन ठाकरे परिवार ने इसके बजाय कई ‘मातोश्री’ आवासों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया। इस बीच, मंत्री शेलार ने 68 नगर निगम वार्डों के परिणामों को लेकर ठाकरे की शिकायत को खारिज कर दिया, जहां भाजपा के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई, 2020 को निर्विरोध विधान परिषद के सदस्य बन गए। उन्होंने इस पर कोई शिकायत नहीं की।’ शेलार ने कहा, ‘अगर ठाकरे को नगर निकाय चुनावों में कुछ उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर टिप्पणी करनी है, तो उन्हें पहले विधान परिषद सदस्य(एमएलसी) पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर आलोचना करनी चाहिए।’

ओवैसी का अजित पवार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला…नांदेड़ में भरे मंच से धर्म को लेकर कही ये बात

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Asaduddin Owaisi On Ajit Pawar: महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मियों के बीच सियासी मंच से जुबानी जंग जारी है. महानगरपालिका चुनाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल जमकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने NCP चीफ अजित पवार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने चाचा का नहीं हुआ, वो नांदेड़ का क्या होगा? जनता का क्या होगा?

ओवैसी का पवार पर तीखा हमला
दरअसल, महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव को लेकर प्रचार जारी है. इसी सिलसिले में असदुद्दीन ओवैसी नांदेड़ पहुंचे. यहां उन्होंने अपनी पार्टी उम्मीदवार के लिए चुनावी सभा की. इसी सभा में ओवैसी ने उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) चीफ अजित पवार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अजित पवार तुम शरद पवार के नहीं हुए तो तुम नांदेड़ के क्या हो सकते हो? जो आदमी तुमको पाल-पोसकर बड़ा किया, तुमको मुकाम दिया, तुमको इज्जत दिया, तुम उसी को घर में बैठाकर आगे बढ़ गए. ये अजित पवार की पहचान है.

‘मुसलमान होते तो 75 साल जेल में होते’
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि अजित पवार खुद खड़े होकर बोलते हैं कि मुझ पर 75 हजार करोड़ के गबन का इल्जाम है, क्या हुआ? उन्होंने आगे कहा कि हां अजित पवार, तुम्हारा नाम अजित पवार है, अगर तुम्हारा मुसलमान नाम होता तो तुम 75 साल तक जेल में रहते. ये फर्क है जो सत्ता में रहता है और जो मुसलमान होता है.

अशोक चव्हाण पर साधा निशाना
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे अशोक चव्हाण पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि मेरे अजीज दोस्तों और बुजुर्गों, तीसरी बात कहना चाहता हूं कि अशोक चव्हाण नहीं सुधरना चाहते हैं. वे संभलना नहीं चाहते हैं. अशोक राव आपको PM मोदी ने एक मंत्री पद भी नहीं दिया, कम से कम आपको राज्यमंत्री ही बना देते. आप तो महाराष्ट्र के सीएम थे. हां, ये बात और है कि आदर्श घोटाले में आपको इस्तीफा देना पड़ा था.

CM ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेटर, कहा- तुरंत रोको SIR

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रोकने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंचा सकती है। तीन जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में बनर्जी ने राज्य में एसआईआर में कथित अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक खामियों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई और कहा कि यह प्रक्रिया ‘अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी और आननफानन में’ की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यह हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अत्यधिक जल्दबाजी’ और ‘पर्याप्त तैयारी की कमी’ के कारण गंभीर खामियां उत्पन्न हुई हैं, जिनमें दोषपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली, असंगत निर्देश और इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण शामिल है।

 

‘लोकतंत्र की नींव पर हमला’

ममता ने पत्र में लिखा, ‘‘यदि इसे वर्तमान स्वरूप में जारी रहने दिया गया, तो एसआईआर से अपूरणीय क्षति होगी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन होगा और लोकतंत्र की नींव पर हमला होगा।’’ मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा न करने पर ‘मनमानी और अनियोजित प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए’। ममता ने सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को कथित रूप से नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे एसआईआर की ‘निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं’।

निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को उसकी देखरेख या निर्देश के तहत की गई किसी भी अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

भारत ने देश में ही बना जहाज़ समुद्र में उतारा है,  काम समुद्र को साफ-सुथरा प्रदूषण मुक्त रखना  

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नई दिल्ली। भारत ने देश में ही बना एक ऐसा जहाज़ समुद्र में उतारा है, जिसका काम समुद्र को साफ-सुथरा प्रदूषण मुक्त रखना है। ये पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप है। इस पोत को  भारतीय तटरक्षक में शामिल कर लिया गया है। इस जहाज को कमीशन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, खोज और बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाएगा। इसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है। यह गोवा शिपयार्ड द्वारा बनाए गए दो प्रदूषण नियंत्रक जहाजों में से पहला है। देखा जाए तो यह कदम जहाज निर्माण और समुद्री क्षमता में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
समुद्र प्रताप का अर्थ है- समुद्रों की शक्ति। यह जहाज समुद्र को सुरक्षित, संरक्षित और स्वच्छ रखने के साथ-साथ देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के भारतीय तटरक्षक बल के संकल्प को दर्शाता है। यह पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। जहाज की लंबाई 114।5 मीटर और चौड़ाई 16।5 मीटर है। यह 40 किलोमीटर से अधिक की गति से चल सकता है। इसमें आधुनिक ऑटोमेशन व कंप्यूटर नियंत्रित सिस्टम लगे हैं। करीब 4,200 टन वजन वाला यह जहाज दो 7,500 किलोवाट डीजल इंजन से चलता है। इसमें स्वदेशी तकनीक से बने कंट्रोल पिच प्रोपेलर और गियर बॉक्स लगे हैं, जिससे जहाज को बेहतर नियंत्रण और लंबी दूरी तय करने की क्षमता मिलती है। यह जहाज 6,000 समुद्री मील तक बिना रुके चल सकता है। इसका मुख्य काम समुद्र में तेल रिसाव और प्रदूषण से निपटना है। इसके लिए इसमें आधुनिक उपकरण जैसे साइड स्वीपिंग आर्म्स, फ्लोटिंग बूम, हाई कैपेसिटी स्किमर, पोर्टेबल बार्ज और प्रदूषण जांच प्रयोगशाला मौजूद हैं।

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महाराष्ट्र में महायुति में बढ़ने लगी दरार, भाजपा मंत्री ने अजित पवार को दी ‘सावधानी बरतने’ की नसीहत

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जालना । महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) और सहयोगियों के बीच दरार बढ़ती नजर आ रही है। खासतौर पर भाजपा और अजित पवार (Ajit Pawar) की एनसीपी (NCP) के बीच मतभेद दिखाई दे रहा है। बीते दिनों अजित पवार ने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के स्थानीय निकायों में अनियमितताओं को लेकर हमला बोला था। इसे अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा पर हमला माना गया था। वजह, दोनों जगहों पर 2017 से 2022 तक भाजपा का शासन रहा है। अब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने अजित पवार को सलाह दी है कि वह सहयोगियों पर निशाना न साधें।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में भाजपा, अजित पवार की एनसीपी और शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन वाली महायुति सरकार है। हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव में 29 नगर निगम चुनाव में तीनों अलग-अलग मैदान में उतरे हैं। वोटिंग 15 जनवरी को होने वाली है।

अजित पवार ने क्या कहा था
पिछले हफ्ते शुक्रवार और शनिवार को अपनी प्रेस कांफ्रेंस में शरद पवार ने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ स्थानीय निकायों में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने स्थानीय निकायों पर आरोप लगाया, जिनके चलते पुणे में विकास कार्य पटरी से उतर गया। इसके अलावा उन्होंने पिंपरी चिंचवाड़ के कर्ज में फंसने को लेकर भी हमला बोला। यह सारी बातें भाजपा के खिलाफ जा रही हैं।

बावनकुले ने क्या कहा
इस बीच जालना नगर निगम चुनाव में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे चंद्रशेखर बावनकुले ने अजित पवार को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि एक संयुक्त बैठक के दौरान यह तय किया गया था कि गठबंधन के साथी दल प्रचार के दौरान एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे। इसके बावजूद अजित पवार ने समझौता तोड़ा है। भविष्य में उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए।

बावनकुले ने इस दौरान महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा पवार को लेकर दिए गए बयान का भी बचाव किया। चव्हाण ने कहा था कि अगर भाजपा आरोप लगाना शुरू कर देगी तो फिर पवार के लिए काफी मुश्किल हो जाएगी। उन्होंने पवार से कहा कि कुछ भी आरोप लगाने से पहले अपनी तरफ देख लें।

 

ओएनजीसी के तेल कुएं से गैस रिसाव

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कोनसीमा। आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के राजोले इलाके में सोमवार को ओएनजीसी के एक चालू तेल कुएं से भारी गैस रिसाव हुआ है। घटना उस वक्त हुई, जब कुएं में मरम्मत का काम चल रहा था। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तीन आसपास के गांवों को एहतियातन खाली करा लिया। जानकारी के मुताबिक, तेल कुएं से उत्पादन अस्थायी रूप से रोका गया था और वर्कओवर रिग के जरिए मरम्मत की जा रही थी। इसी दौरान अचानक तेज ब्लोआउट हुआ और गैस व कच्चा तेल जोरदार तरीके से ऊपर की ओर निकलने लगा। कुछ ही देर में रिसी हुई गैस में आग लग गई और कुएं के पास ऊंची लपटें उठने लगीं।
अधिकारियों के अनुसार, गैस और धुएं के घने बादल इरुसुमंदा और आसपास के इलाकों में फैल गए, जिससे पूरे क्षेत्र में धुंध जैसा माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से बिजली के स्विच बंद रखने, गैस चूल्हा न जलाने और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल न करने की अपील की। घटना की सूचना मिलते ही ओएनजीसी की टीमें मौके पर पहुंचीं और गैस रिसाव व आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की। पूरे इलाके को घेराबंदी कर सील कर दिया गया है। वरिष्ठ जिला अधिकारी और ओएनजीसी के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ

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raghavनई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने नए लेबर कोड के तहत गिग वर्कर्स (Gig workers) और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह गिग वर्कर्स की कड़ी मेहनत को “मान्यता, सुरक्षा और सम्मान” देने की दिशा में पहला कदम है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025’ नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं।

राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई

राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।”

 

राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यहां तक ​​कि कई बार संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है।

 

केंद्र सरकार के कदम का भी किया स्वागत

‘आप’ सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।”

राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के ‘दुख-दर्द” के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं।

राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था।

उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लैटफॉर्म वर्कर्स’ की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है।
क्या होंगे फायदे

यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है।

इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।

भारत और कंबोडिया के बीच फैले अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट का सनसनीखेज खुलासा 

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मुंबई।  भारत और कंबोडिया के बीच फैले एक अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसकी शुरुआत एक किसान के सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो से हुई। महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की सतर्कता ने एक ऐसे डेथ नेटवर्क को बेनकाब किया है, जिसकी कड़ियां अब दिल्ली से लेकर तमिलनाडु के त्रिची तक जुड़ चुकी हैं। इस काले कारोबार में न केवल शातिर बिचौलिए, बल्कि प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर भी शामिल पाए गए हैं। गिरोह का मुख्य सरगना, कृष्णा, देश के बड़े अस्पतालों में जाकर उन अमीर मरीजों की पहचान करता था जिन्हें किडनी की तत्काल आवश्यकता होती थी, जबकि सोशल मीडिया के जरिए वह आर्थिक रूप से कमजोर और मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया है कि इस रैकेट में कुछ डॉक्टर भी शामिल थे। इन पर आरोप है कि ये पेशेवर डॉक्टर इस मानवीय त्रासदी का हिस्सा बनकर जरूरतमंद मरीजों से एक किडनी के बदले 50 से 80 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे। वहीं, अपनी मजबूरी के कारण अंग दान करने वाले गरीब दाताओं को महज 5 से 8 लाख रुपये थमा दिए जाते थे। बीच का बड़ा हिस्सा सरगना कृष्णा और इन भ्रष्ट डॉक्टरों की जेब में जाता था। चंद्रपुर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि भारत और कंबोडिया के बीच यह नेटवर्क कितने सालों से सक्रिय था और अब तक कितने बेगुनाह लोग इस रसूख और लालच की भेंट चढ़ चुके हैं।

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10 साल का सूखा खत्म कर पाएंगी प्रियंका गांधी? असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस

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नई दिल्‍ली। देशभर में कई चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद अब कांग्रेस किसी तरह से यह सूखा खत्म करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी ने केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुच्चेरी (Kerala, Tamil Nadu, West Bengal, Puducherry) के लिए शनिवार को स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है। प्रियंका गांधी को असम में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह केरल में दिग्गज नेता मधुसूदन मिस्त्री को, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी का जिम्मा छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव को दिया गया है। पश्चिम बंगाल के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बीके हरिप्रसाद को बनाया गया है।

पश्चिम बंगाल में यही उम्मीद है कि मुख्य लड़ाई ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच होगी। वहीं तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमे के बीच लड़ाई होगी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन में सहयोगी हैं। अब कांग्रेस की मुख्य लड़ाई असम में होनी है। इसीलिए असम की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी गई है।

 

असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस

कांग्रेस चाहती है कि इस बार असम की सत्ता बीजेपी से छीन ली जाए। बीजेपी असम में 2016 से ही सत्तासीन है। ऐसे में कांग्रेस एंटीइनकंबेंसी का भी फायदा उठाना चाहती है। असम में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री तरुण गोगोई थे और अब उनके बेटे गौरव गोगोई कांग्रेस की तरफ से आगे किए जा सकते हैं। फिलहाल वह लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं।

प्रियंका गांधी के लिए क्यों अहम है असम

असम में पहली बार गांधी परिवार को कोई सदस्य इतनी बड़ी जिम्मेदारी ले रहा है। इसलिए प्रियंका गांधी का स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया जाना बेहद अहम माना जा रहा है। स्क्रीनिंग कमेटी का काम होता है कि वह प्रत्याशियों की संभावित लिस्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजता है और वहां इनपर मुहर लगाई जाती है। गांधी के करीबी माने जाने वाले इमरान मसूद और सप्तगिरि शंकर को असम स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गाय है।

बता दें कि 2019में प्रियंका गांधी ने राजनीति में कदम रखा था और फिर 2022 में ही कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की देखरेख में ही लड़ा था। बीते कुछ समय से प्रियंका गांधी केंद्र की नीतियों के खिलाफ झंडा बुलंद कर रही हैं। जी राम जी विधेयक को लेकर भी उन्होंने संसद के बाहर और अंदर केंद्र सरकार का जमकर विरोध किया।

असम के पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 126 सीटों वाले राज्य में एनडीए ने 75 और कांग्रेस के गठबंधन ने 50 सीटें जीती थीं। ऐसे में दोनों के बीच सीटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। दोनों गठबंधनों के बीच वोट शेयर का केवल 1.6 फीसदी का अंतर था।