पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री मुरुगन के घर पहुंच की पूजा-अर्चना और बोले, पोंगल अब ग्लोबल त्योहार

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोंगल के पावन अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने तमिल परंपराओं के अनुसार पोंगल उत्सव में भाग लिया और देशवासियों सहित दुनिया भर में रह रहे तमिल समुदाय को इस पर्व की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा, कि पोंगल अब केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ग्लोबल त्योहार बन चुका है, जो प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल त्योहार पर पारंपरिक तमिल रीति-रिवाजों के साथ पूजा की। उन्होंने गाय और उसके बछड़े को चारा खिलाया, उन्हें माला पहनाई और उनकी पूजा-अर्चना की। इस दृश्य ने भारतीय संस्कृति में कृषि, पशुधन और प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल केवल फसल कटाई का पर्व नहीं है, बल्कि यह कृतज्ञता, सामूहिकता और जीवन मूल्यों का उत्सव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, यह त्योहार प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग दिखाता है। इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू जैसे पर्व भी मनाए जा रहे हैं। ये सभी त्योहार भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाते हैं। उन्होंने भारत और विश्वभर में रह रहे तमिल भाइयों और बहनों को पोंगल और अन्य पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
तमिल संस्कृति की महत्ता पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि पिछले वर्ष उन्हें तमिल संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला। उन्होंने तमिलनाडु के लगभग एक हजार वर्ष पुराने गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में पूजा-अर्चना का उल्लेख किया और वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगम के अनुभव को भी साझा किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन आयोजनों के दौरान उन्होंने सांस्कृतिक एकता की जीवंत ऊर्जा को महसूस किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि रामेश्वरम में पंबन पुल के उद्घाटन के दौरान उन्होंने तमिल इतिहास और विरासत की महानता को नजदीक से देखा। उन्होंने कहा, तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है। इतना ही नहीं, यह पूरी मानवता की साझा विरासत है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना पोंगल जैसे त्योहारों से और अधिक सशक्त होती है, जो देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधते हैं।

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एशेज सीरीज में इंग्लैंड की टीम नहीं खेलेगी पिंक बॉल टेस्ट, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को दिया साफ संदेश

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इंग्लैंड की टीम को ऑस्ट्रेलिया में 5 मैचों की एशेज सीरीज में 4-1 से शर्मनाक हार मिली। एक मैच जैसे-तैसे इंग्लैंड ने जीता था। इस सीरीज में एक मुकाबला पिंक बॉल से भी खेला गया था, लेकिन आने वाली एशेज सीरीजों में शायद हमें पिंक बॉल टेस्ट देखने को ना मिले। इसके पीछे का कारण ये है कि एशेज सीरीज में डे-नाइट टेस्ट के कॉन्सेप्ट को इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड रिजेक्ट करने जा रहा है।

नेपाल को 96 गेंदों में 11.81 प्रति ओवर की औसत से 189 रन चाहिए

इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में अगली एशेज सीरीज में पिंक बॉल से फ्लडलाइट में डे-नाइट टेस्ट खेलने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज करने का प्लान बनाया है। बीबीसी स्पोर्ट की रिपोर्ट की मानें तो इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ECB ने सीनियर अधिकारियों के बीच एशेज के बाद हुई बातचीत के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया यानी CA को 2029-30 सीरीज के लिए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।इंग्लैंड की टीम ब्रिसबेन के गाबा में खेले गए एशेज सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के बाद 0-2 से पिछड़ गई थी। ये मुकाबला डे-नाइट टेस्ट था, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने एकतरफा अंदाज में जीता था। ECB और CA ने जो बातचीत की, उसमें एशेज को एक टॉप सीरीज बनाए रखने पर फोकस किया गया। टेस्ट क्रिकेट अपना चार्म खो रहा है। अगर ऐसे टेस्ट मैच होते रहे तो ये चिंता का विषय होगा।इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया मार्च 2027 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड यानी एमसीजी पर एशेज के पहले टेस्ट की 150वीं सालगिरह मनाने के लिए एक डे-नाइट टेस्ट खेलने वाले हैं। ये प्लान असल में अगस्त 2024 में ही फाइनल हो गया था। ऐसा माना जा रहा है कि इंग्लैंड को MCG के इस खास मैच से पहले एक वार्मअप मैच खेलने का मौका मिलेगा।पिंक बॉल टेस्ट से जरूर ब्रॉडकास्टर को फायदा हो सकता है, लेकिन गेम को ज्यादा फायदा नहीं पहुंच रहा है। बीबीसी को पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने भी यही बताया है, जिन्होंने पिंक बॉल से रेड बॉल पर मैच को स्विच करने की बात कही थी। डे-नाइट टेस्ट को आईसीसी ने 2015 में अप्रूव किया था, जिसको लेकर उम्मीद की जा रही थी कि फैंस इससे जुड़ेंगे, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आया है।ऑस्ट्रेलिया ने पिंक बॉल टेस्ट पर जरूर जोर दिया है और अब तक खेले गए 25 डे-नाइट टेस्ट मैचों में से 14 मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में खेले गए हैं। 15 में से 14 मुकाबले भी पिंक बॉल से ऑस्ट्रेलिया ने जीते हैं। जो रूट ने ब्रिसबेन में पिंक बॉल टेस्ट के बाद सवाल भी उठाए थे और पूछा था कि क्या इसकी जरूरत एशेज में है? इंग्लैंड को अगली बार एशेज से पहले खूब वार्मअप मैच मिलने वाले हैं।

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वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टली, अब 29 को होगा फैसला

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायालय ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी है, जिसमें उन्होंने अपने पति के खिलाफ लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली तारीख तय की है।
गीतांजलि ने अपनी याचिका में दलील दी है कि उनके पति की हिरासत पूरी तरह से अवैध और मनमानी है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि अधिकारियों ने हिरासत का आदेश जारी करते समय अपने विवेक का सही इस्तेमाल नहीं किया और केवल अप्रासंगिक सामग्री को आधार बनाया। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि लेह में वांगचुक द्वारा दिए गए भाषणों का उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं, बल्कि लोगों को शांत करना था। गीतांजलि का आरोप है कि प्रशासन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है ताकि एक सामाजिक कार्यकर्ता को अपराधी के रूप में चित्रित किया जा सके। सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी। उस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और लगभग 90 लोग घायल हुए थे। सरकार और लेह के जिलाधिकारी का दावा है कि वांगचुक ने हिंसा को भड़काने में मुख्य भूमिका निभाई थी और उनकी गतिविधियां राज्य की सुरक्षा व सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक थीं। वहीं, गीतांजलि ने अदालत में कहा कि वांगचुक को उनकी हिरासत के पूर्ण आधार की जानकारी नहीं दी गई और न ही उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का मौका मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि 24 सितंबर को लेह में हुई दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा के लिए उनके पति के बयानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर, जिलाधिकारी ने हलफनामे के जरिए इन आरोपों का खंडन किया है कि वांगचुक के साथ कोई अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस संवेदनशील मामले पर विस्तार से विचार करेगी।

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8.8 है साउथ की इस रोमांटिक फिल्म की IMDb रेटिंग, अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं आप

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साउथ की एक फिल्म है। साल 2018 में रिलीज हुई थी। इसमें कोई बहुत बड़ा सुपरस्टार नहीं था, न ही बड़े बजट की फिल्म थी, लेकिन कहानी जोरदार थी। यही कारण है कि इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग आज भी 8.8 है। आपको ये फिल्म देखनी चाहिए। ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम कर रही है। आइए आपको इस फिल्म का नाम बताते हैं।

फिल्म का नाम और कहानी

फिल्म का नाम ‘केयर ऑफ कंचारपालेम’ है। इस फिल्म में विशाखापत्तनम के एक छोटे से इलाके ‘कंचारपालेम’ की गलियों में बसी कहानी दिखाई गई है। खास बात ये है कि इस फिल्म में एक नहीं चार कहानियां हैं। जी हां, ये एक एंथोलॉजी है, जिसमें चार अलग-अलग उम्र और पड़ावों की प्रेम कहानियों को दिखाया गया है जैसे ‘लाइफ इन अ मेट्रो 2’ में दिखाया गया है।साउथ की क्राइम कॉमेडी फिल्म, IMDb रेटिंग 9.6, इस OTT प्लेटफॉर्म पर होगी रिलीजये भी पढ़ें:ओटीटी पर इस हफ्ते रिलीज होंगी ये फिल्में और सीरीज, एक की IMDb रेटिंग 9.6

कहानियां

पहली कहानी एक स्कूल जाने वाले लड़के की है जिसे अपनी क्लासमेट से प्यार हो गया है। दूसरी कहानी एक स्थानीय कार्यकर्ता और एक मध्यमवर्गीय लड़की के बीच चल रही जद्दोजहद की। तीसरी कहानी एक शराब की दुकान पर काम करने वाले व्यक्ति और एक सेक्स वर्कर के बीच के लगाव की है। चौथी कहानी एक 49 साल के कुंवारे सरकारी कर्मचारी (राजू) और एक 42 साल की विधवा महिला (सलीमा) के बीच पनपते सम्मान और प्यार की है।

फिल्म की खास बात

इस फिल्म की सबसे खास बात ये है कि इसमें कंचरपालम के स्थानीय लोगों को कास्ट किया गया है। फिल्म सिर्फ रोमांस नहीं दिखाया गया है, बल्कि ये दिखाया गया है कि कैसे एक समाज प्यार से ज्यादा ‘लोक-लाज’ को अहमियत देता है। फिल्म के अंत में जो ‘ट्विस्ट’ आता है, वह दर्शकों को दंग कर देता है।

नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राहुल गांधी से मिले सिद्धरमैया और डी.के. शिवकुमार

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मैसूरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मैसूरु के मंडकल्ली हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से संक्षिप्त मुलाकात की। हालांकि यह मुलाकात काफी छोटी थी, लेकिन राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसने सत्ता गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौट रहे थे। इसी दौरान हवाई अड्डे पर ट्रांजिट के वक्त उन्होंने दोनों दिग्गज नेताओं से अलग-अलग और फिर एक साथ चर्चा की। दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी मंगलवार को दो बार मैसूरु हवाई अड्डे से गुजरे और दोनों ही मौकों पर सिद्धरमैया और शिवकुमार वहां मौजूद थे। यद्यपि नेताओं के बीच हुई बातचीत का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी आंतरिक प्रतिद्वंद्विता और संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल पर अनौपचारिक चर्चा हुई है। इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार की रणनीति पर भी बात होने की खबर है। सिद्धरमैया और शिवकुमार लंबे समय से राहुल गांधी के साथ एक औपचारिक और विस्तृत बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ऐसे में इस संक्षिप्त मुलाकात को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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टी20 विश्व कप से पहले पाकिस्तान में तीन मैच खेलेगा ऑस्ट्रेलिया

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने बुधवार को बताया कि भारत और श्रीलंका में होने वाले आईसीसी टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया लाहौर में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगा।

यूएसए को 18 गेंदों में 6.66 प्रति ओवर की औसत से 20 रन चाहिए

पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया विश्व कप से पहले 29 जनवरी, 31 जनवरी और एक फरवरी को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में दिन रात्रि टी20 मैच खेलेंगे।ऑस्ट्रेलिया विश्व कप के ग्रुप मैच भारत में खेलेगा, जबकि पाकिस्तान को अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने हैं।यह अप्रैल 2022 के बाद पहला अवसर होगा जबकि ऑस्ट्रेलिया टी20 श्रृंखला के लिए पाकिस्तान का दौरा करेगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम 28 जनवरी को लाहौर पहुंचेगी। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफी के कुछ मैच पाकिस्तान में खेले थे।पाकिस्तान के चयनकर्ता इस सप्ताह के आखिर में मुख्य कोच माइक हेसन और कप्तान सलमान अली आगा के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला और विश्व कप के लिए टीम को अंतिम रूप देंगे। पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी की मंजूरी के बाद अगले सप्ताह टीम की घोषणा की जाएगी।

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Sagar Solar Launch Event Delayed, Sustainability Goals Face Setback

Sagar’s scheduled solar energy launch under the Saugor Sustainable Living City project has been delayed. UNACCC planned the initiative to promote renewable energy, empower women, and reduce environmental impact. The program was expected to save BPL families significant annual costs while lowering carbon emissions. However, administrative lapses by the Mayor’s office resulted in the postponement, temporarily halting progress toward local sustainability goals.

Saugor Program Cancel Due to Local Administrative and Political Negligence, 250 extremely poor women left out from Benefits: who is responsible

To , @PMOIndia , @SrikantaPanigrahi @NarendraModi ji
Breaking News

Solar Energy Program Postponed Due to Mayor Office’s Neglect and Administrative Lapses

Sagar, Madhya Pradesh – The Saugor Sustainable Living City and PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana program, launched by UNACCC to promote solar energy and sustainable living, has been postponed.

Program Details:

– Green Revolution: UNACCC’s solar housing program was scheduled to launch on January 22, 2026, at the Municipal City Centre Hall in Sagar city.
– Women Empowerment: The program aimed to provide solar cooking stoves to over 250 women, promoting sustainable living and reducing carbon footprint.
– Economic Empowerment: Women would be able to pursue other activities, increasing household income.
– Solar Awareness Program: UNACCC was set to launch a solar awareness program in small cities of Madhya Pradesh to promote PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana.

Program Benefits:

– Carbon Footprint Reduction: The program was expected to reduce carbon footprint by approximately 127,800 kg CO2e per year.
– Cost Savings for BPL Women: BPL women were expected to save ₹12,000 annually.

Reason for Postponement:

The program has been postponed due to administrative lapses and neglect by the Mayor’s office in organizing the event. Further information will be provided soon.

विधवा बहू को है अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का हक

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए विधवा बहू को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि मनुस्मृति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी नहीं छोड़ना चाहिए और ऐसा करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जाना चाहिए। इसी सिद्धांत के आधार पर कोर्ट ने माना कि विधवा बहू को अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का हक है। मामला यह था कि यदि बहू ससुर के जीवनकाल में ही विधवा हो जाती है तो उसे भरण-पोषण मिल सकता है, लेकिन यदि ससुर की मृत्यु के बाद वह विधवा होती है तो क्या उसे यह अधिकार मिलेगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि ससुर की मृत्यु के बाद विधवा बहू को भरण-पोषण का कोई हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के समय के आधार पर विधवा बहुओं के बीच भेदभाव करना पूरी तरह से तर्कहीन और असंवैधानिक है। दोनों ही परिस्थितियों में चाहे बहू ससुर के जीवन में विधवा हुई हो या उनकी मृत्यु के बाद उसे भरण-पोषण का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान मृतक हिंदू के निर्भर व्यक्तियों के भरण-पोषण की व्यवस्था करता है। मृतक की संपत्ति से उसके सभी वारिसों पर यह दायित्व बनता है कि वे निर्भर व्यक्तियों, जिनमें विधवा बहू भी शामिल है उसका भरण-पोषण करें। पीठ ने कहा कि पुत्र या कानूनी वारिस मृतक द्वारा कानूनी एवं नैतिक रूप से भरण-पोषण की जिम्मेदारी वाले सभी निर्भर व्यक्तियों को संपत्ति से सहायता देने के लिए बाध्य हैं इसलिए पुत्र की मृत्यु पर ससुर की धार्मिक एवं नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी विधवा बहू का भरण-पोषण करे। बशर्ते विधवा बहू स्वयं या मृत पुत्र द्वारा छोड़ी गई संपत्ति से अपना गुजारा नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा कि अधिनियम इस जिम्मेदारी को किसी भी तरह से सीमित या समाप्त नहीं करता, चाहे बहू ससुर के जीवनकाल में विधवा हुई हो या उनकी मृत्यु के बाद। विधवा बहू को भरण-पोषण से वंचित करना, कानून की संकीर्ण या तकनीकी व्याख्या के आधार पर उसे गरीबी, असहायता और सामाजिक हाशिए पर धकेल देगा। इससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को गंभीर खतरा होगा। यह फैसला हिंदू परिवारों में विधवा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इससे अब विधवा बहुओं को ससुर की विरासत वाली संपत्ति से भरण-पोषण का स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिल गया है।

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‘द 50’ में साथ नजर आएंगे युजवेंद्र चहल और एक्स वाइफ धनश्री वर्मा? क्रिकेटर ने शेयर की पोस्ट

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रिएलिटी शो ‘द 50’ ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार पर 1 फरवरी से शुरू होने वाला है। इस शो में 50 कंटेस्टेंट्स हिस्सा लेंगे और 50 दिनों तक साथ रहेंगे। बीच में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें इस बात का दावा किया गया था कि ‘द 50’ में इंडियन क्रिकेटर युजवेंद्र चहल हिस्सा लेने वाले हैं। इतना ही नहीं, उनके साथ उनकी एक्स वाइफ धनश्री वर्मा भी पार्टिसिपेट करेंगी। वहीं अब इन रिपोर्ट्स पर युजवेंद्र चहल का रिएक्शन आया है।

‘ये दावे गलत हैं’

युजवेंद्र चहल ने पोस्ट शेयर कर इन रिपोर्ट्स को गलत बताया है। उन्होंने साफ कहा कि वह इस रिएलिटी शो में हिस्सा नहीं लेने वाले हैं। उनके बयान में कहा गया है, “युजवेंद्र चहल के रिएलिटी शो में हिस्सा लेने के बारे में जो रिपोर्ट्स आ रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। ये दावे गलत हैं।”

अभी तक नहीं आया है धनश्री का कोई रिएक्शन

नोट में आगे लिखा है, “युजवेंद्र का हाल की रिपोर्ट्स में बताए गए शो से कोई संबंध नहीं है और इस तरह की कोई बातचीत या कमिटमेंट नहीं हुई है। हम मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया यूजर्स से अनुरोध करते हैं कि वे बिना वेरिफाई की हुई जानकारी न फैलाएं।” इस बीच, धनश्री ने अभी तक शो का हिस्सा होने की अफवाहों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

कौन कर रहा है इसे होस्ट?

यह आने वाला रिएलिटी शो 1 फरवरी से लाइव होगा। इसे फिल्ममेकर फराह खान होस्ट करेंगी। फराह खान का कहना है कि भारत में रिएलिटी शोज सालों से एक ही पैटर्न फॉलो कर रहे हैं और आखिरकार ‘द 50’ इस पैटर्न को बदलने आ गया है।

दिग्विजय सिंह नहीं जाएंगे राज्यसभा, कई नेता दौड़ में, कमलनाथ को मिलेगा मौका

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की सियासत के ‘चाणक्य’ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अचानक ऐलान किया कि वह राज्यसभा नहीं जाएंगे इससे सियासी हलकों में हलचल मच गई है। बता दें दिग्विजय सिंह कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, लेकिन इससे पहले ही राज्यसभा नहीं जाने उनकी घोषणा से दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि दिग्विजय सिंह का अचानक राज्यसभा से मोहभंग क्यों हो गया? वहीं यह सवाल भी उठने लगा कि सिंह की जगह अब मप्र से कांग्रेस किसे राज्यसभा भेजेगी।
मीडिया रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिग्विजय सिंह का यह फैसला कोई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीतिक सोच का हिस्सा है। यह कदम कांग्रेस के उस नए राजनीतिक रोडमैप से जुड़ा है, जिसे राहुल गांधी पिछले कुछ सालों से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व का फोकस अब केवल संसद के अंदर आक्रामक विपक्षी भूमिका निभाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना प्राथमिकता बन चुका है।
इसी सोच के तहत वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लगाने और युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को भी इसी रणनीति के तहत राज्यसभा की भूमिका से मुक्त कर दोबारा मैदान में उतारने की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो पार्टी दिग्विजय को एक बार फिर मध्य प्रदेश में बड़े संगठनात्मक मिशन की जिम्मेदारी सौंप सकती है। 2017-18 में की गई उनकी 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा आज भी कांग्रेस के लिए एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक मानी जाती है। उस परिक्रमा ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जान फूंकी थी, बल्कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को वैचारिक और भावनात्मक बढ़त भी दिलाई थी।
अब चर्चा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और नर्मदा परिक्रमा या इसी तरह का कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कराया जा सकता है, ताकि बिखरे संगठन को जोड़ा जा सके और युवा कार्यकर्ताओं को दिशा दी जा सके। इस बीच दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस में सामाजिक संतुलन की बहस भी तेज हो गई है। अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग रखी है कि राज्यसभा में इस बार दलित समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश की करीब 17 फीसदी अनुसूचित जाति आबादी की यह लंबे समय से अपेक्षा रही है। हालांकि इस मांग पर दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि टिकट का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन यह जरूर तय है कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं।
कमलनाथ कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। चर्चा है कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका चाहते हैं। यदि उन्होंने दावेदारी ठोकी, तो बाकी नामों की राह मुश्किल हो सकती है। जीतू पटवारी मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। आक्रामक तेवर, विधानसभा में सक्रिय भूमिका और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। वहीं अरुण यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ रह चुके हैं। संगठन और दिल्ली दोनों में उनकी स्वीकार्यता है। अजय सिंह (राहुल भैया) पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, जो लंबे समय से किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में हैं।
दिग्विजय सिंह के हटने के साथ ही कांग्रेस की एकमात्र सुरक्षित मानी जा रही राज्यसभा सीट अब सियासी मुकाबले का केंद्र बन गई है। पार्टी में कई बड़े नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में लॉबिंग और समीकरण तेज होंगे। सबसे चर्चित नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। समय-समय पर यह संकेत मिलते रहे हैं कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। अगर कमलनाथ राज्यसभा की दौड़ में उतरते हैं, तो उनके राजनीतिक कद और अनुभव के चलते बाकी दावेदारों की राह आसान नहीं रहेगी।
राज्यसभा की मध्य प्रदेश में कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से आठ पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। 2026 में तीन सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए फिलहाल सिर्फ एक सीट ही सुरक्षित मानी जा रही है। ऐसे में दावेदारी की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि हर बड़ा नेता जानता है कि मौका एक ही है और दावेदार कई। कुल मिलाकर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना कांग्रेस की बदलती रणनीति, पीढ़ीगत बदलाव और मध्य प्रदेश में संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस खाली होने वाली सीट पर किसे मौका देता है और क्या यह फैसला पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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