चोटों के बीच श्रेयस अय्यर की वापसी, टीम इंडिया में बदलाव

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IND vs NZ T20 Series : शुरू होने से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट टीम को बड़े झटके लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज से पहले चोटों के कारण टीम में अहम बदलाव करने पड़े हैं। चयनकर्ताओं ने अनुभवी बल्लेबाज श्रेयस अय्यर और युवा लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को टीम में शामिल किया है, जिससे संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह वॉशिंगटन सुंदर और तिलक वर्मा की चोट है। सुंदर को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच के दौरान गेंदबाजी करते समय पसलियों में खिंचाव (साइड स्ट्रेन) आ गया था। मेडिकल रिपोर्ट के बाद उन्हें पूरी टी20 सीरीज से बाहर कर दिया गया। वहीं, युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के बाद सर्जरी करानी पड़ी है। वह शुरुआती तीन टी20 मुकाबलों के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे।

IND vs NZ T20 Series में श्रेयस अय्यर की वापसी सबसे ज्यादा चर्चा में है। अय्यर ने आखिरी बार दिसंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच खेला था। इसके बाद उन्होंने IPL 2025 में पंजाब किंग्स की कप्तानी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। अय्यर ने 17 मैचों में 175 के स्ट्राइक रेट से 604 रन बनाकर चयनकर्ताओं का भरोसा जीता। उन्हें तिलक वर्मा के स्थान पर पहले तीन टी20 मैचों के लिए टीम में शामिल किया गया है, जिससे मध्यक्रम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा रवि बिश्नोई की एंट्री से गेंदबाजी आक्रमण को धार मिलेगी। तेज विकेटों पर उनकी लेग स्पिन टीम के लिए अहम साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, IND vs NZ T20 Series से पहले किए गए ये बदलाव टीम इंडिया को चुनौतीपूर्ण हालात में मजबूती देने की कोशिश माने जा रहे हैं।

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छत्रपति संभाजीनगर में मोहन भागवत का संदेश, हिंदू एकता पर दिया ज़ोर

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RSS News : के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत शुक्रवार को मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान वे गंगापुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए, जहां उन्होंने हिंदू समाज की भूमिका, एकता और भारत के चरित्र पर अपने विचार रखे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत में यदि कोई अच्छा या बुरा घटित होता है, तो उसके लिए हिंदुओं से पूछा जाएगा, क्योंकि भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यता और चरित्र है।

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज हमेशा से समावेशी रहा है। हिंदू परंपरा ने रीति-रिवाज, पहनावा, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति की विविधताओं को खुले दिल से स्वीकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज की यही विशेषता उसे मजबूत बनाती है और सदियों से आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद यह परंपरा सुरक्षित रही है।

अपने भाषण में मोहन भागवत ने कहा कि जो लोग एकीकरण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, वही हिंदू समाज और भारत के वास्तविक स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग ही सच्चे अर्थों में हिंदू कहलाते हैं और उनकी भूमि भारत कहलाती है।

हिंदू एकता पर ज़ोर देते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि यह केवल संघ का उद्देश्य नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज को जाति, संप्रदाय, भाषा या पेशे से ऊपर उठकर आपसी मित्रता बढ़ानी चाहिए। संघ इस दिशा में पहल करेगा, लेकिन नेतृत्व समाज को ही करना होगा।

युवाओं को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वे ज्ञान और कौशल हासिल करने के लिए विदेश जाएं, लेकिन उस अनुभव का उपयोग भारत के विकास में करें। उन्होंने अन्याय के खिलाफ संगठित और चरणबद्ध संघर्ष की भी बात कही, जिससे समाज और राष्ट्र दोनों सशक्त बन सकें।

‘छावा’ पर एआर रहमान का बयान, कहा– फिल्म ने किया ध्रुवीकरण

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AR Rahman Chhaava Controversy : इन दिनों चर्चा में है। मशहूर संगीतकार एआर रहमान का फिल्म ‘छावा’ को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि यह फिल्म लोगों के बीच ध्रुवीकरण पैदा करती है, हालांकि उनका मानना है कि फिल्म का मूल उद्देश्य बहादुरी और इतिहास को दिखाना था।

बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में एआर रहमान ने बॉलीवुड फिल्मों और ‘छावा’ पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि ‘छावा’ एक ऐसी फिल्म है, जिसने समाज में बंटवारे का फायदा उठाया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिल्म का मकसद साहस और शौर्य को सामने लाना था। रहमान ने बताया कि उन्होंने निर्देशक से यह भी पूछा था कि उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए क्यों चुना गया। इसके जवाब में निर्देशक ने कहा कि उन्हें सिर्फ एआर रहमान की ही जरूरत थी।

AR Rahman Chhaava Controversy पर बात करते हुए संगीतकार ने कहा कि फिल्म मनोरंजक है, लेकिन आज के दर्शक पहले से कहीं ज्यादा समझदार हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्मों से लोग प्रभावित होते हैं, तो उन्होंने कहा कि लोगों के भीतर एक आंतरिक चेतना होती है, जिससे वे सच और हेर-फेर के बीच फर्क कर सकते हैं।

इसके साथ ही एआर रहमान ने फिल्म के म्यूजिक को लेकर गर्व भी जताया। उन्होंने एक भावुक पोस्ट में कहा कि छावा मराठा इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों में से एक हैं। फिल्म के अंत में गाई गई कविता हर मराठा की धड़कन और आत्मा को दर्शाती है।

गौरतलब है कि फिल्म ‘छावा’ में विक्की कौशल ने छत्रपति संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है। साल 2025 में रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला और इसने 716.91 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म का संगीत एआर रहमान ने ही तैयार किया है, जो AR Rahman Chhaava Controversy के बीच भी सराहना बटोर रहा है।

“अगर शिंदे शिवसेना के लिए जयचंद न होते तो…”, संजय राउत का डिप्टी CM पर तीखा हमला

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मुंबई. बीएमसी (BMC) सहित महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के नतीजे अब साफ हो चुके हैं. यहां बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) (एकनाथ शिंदे) की महायुती ने राज्य की 29 में 23 नगर पालिकाओं में प्रचंड जीत हासिल की है. वहीं बीएमसी चुनाव में महायुति ने कुल 227 में से 118 सीटें अपने नाम कर लिए हैं. मुंबई महानगर निगम में भाजपा और शिवसेना की बढ़त ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, जहां 28 साल से चली रही ठाकरे परिवार की धाक पर गहरा धक्का लगा. हालांकि शाम होते-होते चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल गए. जहां पहले यह माना जा रहा था कि बीएमसी में बीजेपी के नेतृत्व में महायुति प्रचंड जीत हासिल कर लेगी, लेकिन अंतिम नतीजों में उसे बहुमत से केवल 4 सीटें ज्यादा मिली हैं. इसमें बीजेपी ने 89, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें मिलीं.

 

मुंबई नगर निगम चुनाव में कई सीटों पर कांग्रेस ने शिंदे सेना को करारा झटका दिया है. यहां 24 सीटें जीतकर कांग्रेस चौथी बड़ी पार्टी बनी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर उद्धव ठाकरे ने भाई राज के साथ हाथ मिलाने की जगह कांग्रेस के साथ ही मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ा होता तो नतीजे कुछ और होते. उद्धव की शिवसेना बीएमसी में 65 सीटें मिली हैं और वह बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना महज 6 सीटों पर सिमट गई. बीएमसी चुनाव में एआईएमआईएम ने भी 6 सीटें अपने नाम की है.

 

इस तरह मुंबई के मेयर पद के चुनाव में अब शिंदे सेना की भूमिका भी अहम हो गई है. खबर है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मेयर पद पर दावा ठोंक दिया है. वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि मुंबई का मेयर मराठी, हिंदू और महायुति से होगा. ऐसे में बीएमसी चुनाव के फाइनल नतीजे साफ होने के बाद अब सबकी नजरें इसी सवाल पर आ टिकी हैं कि मुंबई का मेयर कौन होगा.

 

 

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3 कारण क्यों श्रेयस अय्यर को अचानक क्यों मिली टी20 टीम में जगह? 2023 में खेला था आखिरी मैच

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने शुक्रवार, 16 जनवरी को इंडिया वर्सेस न्यूजीलैंड टी20 सीरीज के स्क्वॉड में कुछ बदलाव की घोषणा की। वॉशिंगटन सुंदर चोट के चलते पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं, जिसकी वजह से रवि बिश्नोई को चुना गया है। वहीं तिलक वर्मा सर्जरी के चलते 5 मैच की इस सीरीज के पहले तीन मैचों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी जगह न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले तीन मुकाबलों के लिए श्रेयस अय्यर को चुना गया है। श्रेयस अय्यर का नाम थोड़ा हैरान कर देने वाला है क्योंकि उन्होंने भारत के लिए आखिरी टी20 मैच 2023 में खेला था। ऐसे में अचानक उनकी टीम इंडिया में एंट्री कैसे हुई।

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पहला कारण- चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट ने श्रेयस अय्यर को एक लीडर के रूप में देखना शुरू कर दिया है। उन्हें वनडे टीम का उप-कप्तान बनाया गया है। अय्यर का आईपीएल और डोमेस्टिक क्रिकेट में बतौर कप्तान रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है। ऐसे में अगर अय्यर टी20 सेटअप में भी अपनी जगह बना लेते हैं तो टीम को इससे फायदा मिलेगा। फिलहाल टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव और उप-कप्तान अक्षर पटेल हैं। सूर्या 35 साल के हैं और इस टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारत नए लीडर की तरफ अपने कदम बढ़ा सकता है। ऐसे में अय्यर एक बेहतरीन विकल्प हैं।दूसरा कारण- तिलक वर्मा की गैरमौजूदगी का असर भारत के मिडिल ऑर्डर पर पड़ता। ऐसे में श्रेयस अय्यर उनके लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट साबित हो सकते हैं। अय्यर मिडिल ऑर्डर में ही बल्लेबाजी करते हैं, उन्हें नंबर-3 और 4 पर बैटिंग करने का अच्छा खासा अनुभव है। तिलक वर्मा के बैकअप के रूप में भी भारत श्रेयस अय्यर को तैयार कर सकता है। अगर किसी कारण की वजह से तिलक वर्मा टी20 वर्ल्ड कप तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाते तो बीसीसीआई श्रेयस अय्यर को उनकी जगह स्क्वॉड में चुन सकता है।

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तीसरा कारण- श्रेयस अय्यर इस समय गजब की फॉर्म में हैं, चाहे फॉर्मेट वनडे का हो या टी20 का। डोमेस्टिक से लेकर नेशनल लेवल तक वह लगातार रन बना रहे हैं। आईपीएल 2025 में भी उनकी फॉर्म गजब की रही थी। उनकी अगुवाई में पंजाब किंग्स फाइनल तक पहुंचा था। श्रेयस अय्यर ने पिछले आईपीएल सीजन में 50 से अधिक की औसत से 604 रन बनाए थे।न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टी20 टीम- सूर्यकुमार यादव (C), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (WK), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल (VC), रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, इशान किशन (WK), रवि बिश्नोई, श्रेयस अय्यर (पहले तीन T20I)

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में तापमान माइनस 4.6 डिग्री

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नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार रात इस सीजन की सबसे ठंडी रही। यहां का तापमान माइनस 4.6 डिग्री रहा। वहीं, हरियाणा के हिसार में सर्दी से पिछले दो साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां का तापमान 0.2 डिग्री दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के 35 जिलों में घना कोहरा छाया रहा। कोहरे की वजह से 24 घंटे में पूरे यूपी में 8 हादसे हुए। इन हादसों में 24 गाडिय़ां टकराईं। हादसे में 1 व्यक्ति की मौत हुई वहीं 40 लोग हायल हो गए।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश के साथ बर्फबारी होने की संभावना है। उत्तरकाशी में गंगोत्री नेशनल पार्क, भागीरथी नदी और जाड गंगा झरना जम चुका है। उधर, दिल्ली में पांच दिन की शीतलहर के बाद सर्दी से थोड़ी राहत मिली। शहर का न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले के मुकाबले लगभग दो डिग्री ज्यादा था।

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मृणाल ठाकुर और धनुष नहीं कर रहे वैलेंटाइन्स डे पर शादी, सामने आई ये डिटेल्स

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मृणाल ठाकुर और धनुष को लेकर शुक्रवार को एक ऐसी खबर वायरल हुई कि सभी हैरान हो गए। ऐसा कहा जा रहा था कि दोनों फरवरी में शादी करने वाले हैं। लेकिन अब सच सामने आया है वो कुछ और है। फरवरी में कोई शादी नहीं है, मृणाल की तो जबकि उसी दौरान फिल्म रिलीज होने वाली है।हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मृणाल की अगले महीने शादी नहीं है। ये सिर्फ एक अफवाह है जो फैली है।

मूवी होगी उसी महीने रिलीज

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मृणाल की फिल्म दो दीवाने शहर में जिसमें उनके साथ सिद्धांत चतुर्वेदी हैं, वो फरवरी में रिलीज होने वाली है तो ऐसे में शादी कैसे होगी। वहीं फिर मार्च में उनकी तेलुगु फिल्म रिलीज होने वाली है।

कबसे आ रही डेटिंग की खबरें

बता दें कि काफी समय से मृणाल और धनुष के डेटिंग की खबरें आ रही हैं। खासकर जब धनुष, मृणाल की फिल्म सन ऑफ सरदार 2 की स्क्रीनिंग के लिए मुंबई आए थे। धनुष ने तो इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन मृणाल ने जरूर उन्हें सिर्फ अपना दोस्त बताया है।

मृणाल ने धनुष को बताया दोस्त

एक इंटरव्यू के दौरान मृणाल ने कहा था कि धनुष सिर्फ मेरे अच्छे दोस्त हैं। वहीं उनके स्क्रीनिंग में आने को लेकर मृणाल ने कहा था कि उन्हें तो अजय देवगन ने इन्वाइट किया था। मृणाल ठाकुर ने धनुष के साथ अफेयर की खबर को बताया झूठ

प्रोफेशनल लाइफ

मृणाल की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो अभी उनकी 2 फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं। एक है 2 दीवाने शहर में जिसमें उनके साथ सिद्धांत चतुर्वेदी हैं। इसके अलावा वह फिल्म डकैत में भी नजर आएंगी जिसमें वह और अदिवी शेष लीड रोल में हैं।वहीं धनुष फिल्म कारा में नजर आएंगे जो सस्पेंस थ्रिलर मूवी होने वाली है।

BMC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत, मुंबई को पहली बार मिलेगा BJP का मेयर

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मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के निकाय चुनाव (Local Body Elections.) में शुक्रवार को भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) को बड़ी जीत मिली। बीएमसी में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने मिलकर ठाकरे बंधुओं की शिवसेना यूबीटी और एमएनएस को हरा दिया। शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे तक के आंकड़े के अनुसार, भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 65, एमएनएस 6, कांग्रेस 24 वार्डों में या तो जीत चुकी है या फिर बढ़त बनाए हुए है। बीएमसी में भाजपा का पहली बार मेयर बनने जा रहा है, जोकि भगवा दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले तीन दशक से बीएमसी की कमान ठाकरे परिवार के पास ही रही है। ऐसे में अब इसमें बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भाजपा की इस जीत के पीछे 5 बड़ी वजहे हैं।

पीएम मोदी पर जनता का भरोसा
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भाजपा पीएम मोदी के नेतृत्व में विभिन्न चुनावों में जीत दर्ज करती आई है। लोकसभा में लगातार तीन बार से सत्ता में आ रही भाजपा पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बंपर सीटों से जीती। एक दशक में विपक्ष को भाजपा ने बुरी तरह से उन राज्यों में भी पराजित किया है, जहां कुछ दशक पहले कोई सोच नहीं सकता था। मुंबई में मिली इस जीत के पीछे भी पीएम मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के विजन के साथ भाजपा ने चुनाव लड़ा और जीत मिली। फिलहाल, विपक्ष के पास पीएम मोदी का तोड़ ढूंढ पाना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।

शिवसेना में टूट
साल 2019 में शिवसेना और भाजपा की राह तब अलग हो गई, जब विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने ढाई साल के लिए सीएम पद की मांग कर दी। इसके बाद, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने साथ मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 2022 में शिवसेना टूट गई और एकनाथ शिंदे कई विधायकों और सांसदों को अपने साथ ले गए। भाजपा ने शिंदे को सीएम बना दिया। बाद में शिंदे की पार्टी को शिवसेना नाम से जाना गया और उद्धव ठाकरे को शिवसेना यूबीटी। इसके बाद से उद्धव ठाकरे की ताकत लगातार कमजोर होती चली गई। इस बीएमसी चुनाव में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 28 वार्ड्स में जीत हासिल की और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के वोट काटे, जिसका सीधा लाभ भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को मिला।

मनसे के साथ आने पर उत्तर भारतीय शिवसेना यूबीटी से नाराज?
साल 2006 में अलग पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए उद्धव के साथ गठबंधन किया था। मुंबई में रहने वाले मराठी वोटर्स का मनसे को काफी सपोर्ट मिलता रहा है और इस चुनाव में भी शिवसेना और मनसे के गठबंधन को मराठी मतदाताओं के जमकर वोट पड़े। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो उत्तर भारतीयों का समर्थन भाजपा को ज्यादा मिला। दरअसल, राज ठाकरे की मनसे उत्तर भारतीयों के खिलाफ लंबे समय से हिंसा करती आई है और यही वजह है कि इसका फायदा भाजपा गठबंधन को सीधे तौर पर मिला। मनसे और शिवसेना के गठबंधन ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया और महायुति के सामने हार गया।

भाजपा ने लगा दी पूरी ताकत, खुद फडणवीस ने संभाली कमान
बीएमसी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी कमान संभाली और जमकर प्रचार किया। भाजपा के तमाम महाराष्ट्र के मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया और जनता का समर्थन हासिल किया। उद्धव और राज ठाकरे ने भी चुनावी रैलियां कीं और भीड़ भी इकट्ठी हुई, लेकिन वोटों में यह तब्दील नहीं हो सकी। शिवसेना यूबीटी और मनसे के मुकाबले भाजपा और शिवसेना का चुनाव प्रचार ज्यादा मजबूत रहा और यही नतीजों में भी दिखाई दिया।

उद्धव के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का भाजपा को फायदा
देश के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी पर पिछले लगभग तीन दशकों से ठाकरे परिवार का कब्जा रहा है। पहली बार भाजपा को जीत मिली है। शिवसेना (अविभाजति) को पिछले बार तक भाजपा से ज्यादा वार्ड पर जीत मिली, जिससे उसका लंबे समय तक मेयर रहा। लंबे समय तक राज करने की वजह से शिवसेना यूबीटी के खिलाफ एक एंटी इनकमबेंसी भी बनी और जिसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला। साथ ही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना का साथ होने के कारण भाजपा का पलड़ा भारी रहा।

गणतंत्र दिवस पर वीआईपी कल्चर होगा खत्म

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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में केंद्र सरकार सालों से चले आ रहे वीआईपी कल्चर को खत्म करने जा रही है। परेड देखने के लिए आए मेहमानों की कुर्सियों पर अब वीवीआईपी, वीआईपी और डिग्निटी नहीं लिखा होगा। इसकी जगह नदियों के नामों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए गैलरी का नाम संगीत वाद्ययंत्रों के नाम पर रखा है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आम आदमी और वीआईपी के बीच अंतर कम होगा। भारतीय संस्कृति, विरासत और समानता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हर नागरिक खुद को बराबर महसूस कर सकेगा। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट, उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है। ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-श्व शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे।

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महाराष्ट्र चुनाव में BJP की हार के बाद अजीत पवार के इस्तीफे पर सस्पेंस, क्या फडणवीस सरकार में होगा बड़ा बदलाव?

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मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) के सभी नगर निकाय चुनावों (municipal elections) के परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी ने पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) में अपना दबदबा न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसे और मजबूत किया है। अजीत पवार (Ajit Pawar) और शरद पवार (Sharad Pawar) की एकजुटता का दांव भाजपा (BJP) के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहा। भाजपा ने दोनों नगर निगमों में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है।

पुणे में भाजपा को 165 में से 110 सीटें मिली हैं। वहीं, एनसीपी और शरद पवार कैंप को मात्र 2 सीटें मिली हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) की 128 सीटों में से भाजपा को 81 और अजीत गुट को सिर्फ 36 सीटें मिली हैं। भाजपा ने पहली बार इन दोनों नगर निगमों में अपने दम पर सत्ता हासिल की है। इससे पहले वह गठबंधन का हिस्सा रही थी।

 

पवार फैमिली का भविष्य क्या है?
अजीत पवार और शरद पवार के फिर से साथ आने के बावजूद मिली इस करारी हार ने दोनों गुटों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। महायुति सरकार में रहते हुए भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उनके लिए उल्टा पड़ गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने यहां तक कह दिया कि पार्टी को अजीत पवार को साथ लेने पर पछतावा है। अब अजीत पवार को या तो भाजपा के सामने झुककर रहना होगा या फिर पूरी तरह अपने चाचा के साथ विलय की संभावना तलाशनी होगी।

शरद पवार की पार्टी 24 नगर निकायों में अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। पुणे जैसे अपने गढ़ में मात्र 2 सीटें जीतना पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के चरमराने का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दोनों NCP गुटों का स्थायी रूप से मिल जाना ही उनके बचने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। कार्यकर्ताओं में भी अब स्थिरता की मांग बढ़ रही है।

भाजपा की जीत के 4 कारण
1. परिवारवाद पर प्रहार: भाजपा ने नीति बनाई कि किसी भी मौजूदा विधायक या सांसद के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इससे मुरलीधर मोहोल और मेधा कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को भी टिकट नहीं मिला, जिससे आम कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया।

2. नए चेहरों को मौका: पुणे में भाजपा ने अपने 97 में से 30 मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए और जमीनी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा।

3. विपक्ष के मजबूत चेहरों को तोड़ा: चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बापू पठारे के परिवार (NCP-SP) और अभिजीत शिवरकर (कांग्रेस) जैसे प्रभावी स्थानीय नेताओं को अपने पाले में कर लिया।

4. इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: मेट्रो विस्तार, रिंग रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने शहरी मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित किया।

इस जीत के साथ देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। अब सबकी नजरें जिला परिषद चुनावों पर हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजीत पवार और शरद पवार का गठबंधन जारी रहता है या हार के बाद वे फिर से अलग रास्ते चुनते हैं।