मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 33 घंटे बाद बहाल हुआ यातायात, गैस टैंकर हादसे से लगा था महाजाम

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मुंबई। मुंबई और पुणे को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर पिछले दो दिनों से जारी भीषण यातायात संकट का गुरुवार सुबह खत्म हो गया। खंडाला घाट क्षेत्र में एक गैस टैंकर के पलटने से करीब 33 घंटे तक चले महाजाम के बाद मार्ग पर यातायात पूरी तरह सामान्य हो गया है। इस दौरान हजारों वाहन चालक और यात्री घंटों तक सड़क पर फंसे रहे, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
यह हादसा मंगलवार शाम करीब पांच बजे हुआ, जब मुंबई की ओर जा रहा एक टैंकर खंडाला घाट के पहाड़ी और संकरे हिस्से में अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर में अत्यंत ज्वलनशील प्रोपलीन गैस भरी होने के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका को देखकर प्रशासन ने तुरंत दोनों दिशाओं में यातायात रोक दिया। सुरक्षा कारणों से टैंकर से गैस निकालना और हटाना एक जटिल और समय-साध्य प्रक्रिया साबित हुई। महाजाम के कारण एक्सप्रेसवे पर करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बिना भोजन, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के घंटों फंसे रहे। हालात की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने अस्थायी रूप से टोल वसूली भी निलंबित कर दी। एमएसआरडीसी अधिकारियों के अनुसार, बुधवार देर रात तक टैंकर से गैस को सुरक्षित रूप से अन्य टैंकरों में स्थानांतरित कर दिया गया और क्रेनों की मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाया गया। इसके बाद देर रात 1 बजकर 46 मिनट पर मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात बहाल किया गया। हालांकि, फंसे भारी वाहनों के कारण कुछ समय तक धीमी गति से आवाजाही होती रही। इस पूरे अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीपीसीएल, राजमार्ग पुलिस और एमएसआरडीसी की टीमें मौके पर तैनात रहीं। हादसे का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ा और एमएसआरटीसी की कई बस सेवाएं रद्द करनी पड़ीं। इसके अलावा दूध, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। गुरुवार सुबह तक हालात पूरी तरह सामान्य हो गए और यात्रियों ने राहत की सांस ली।
इस भीषण स्थिति से निपटने, पलटे हुए टैंकर से अन्य टैंकरों में गैस स्थानांतरित करने और टैंकर को सुरक्षित रूप से हटाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड (बीपीसीएल), राजमार्ग पुलिस और एमएसआरडीसी की टीम को घटनास्थल पर तैनात किया गया था।
इस लंबे व्यवधान से सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ, जिसके चलते महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की कई बसें एक्सप्रेसवे पर फंस गईं और बड़ी संख्या में नियमित सेवाएं रद्द कर दी गईं। इस घटना से दूध और सब्जियों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हुई, क्योंकि कई मालवाहक वाहन घंटों तक फंसे रहे।

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‘आजादी से काम नहीं कर सकती…’ क्रिस्टिन स्टीवर्ट ने अमेरिका छोड़ने का बनाया मन, ट्रंप शासन पर कसा तंज

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फिल्म ‘ट्विलाइट’ फेम एक्ट्रेस क्रिस्टिन स्टीवर्ट हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि वह बतौर फिल्ममेकर, एक्ट्रेस अमेरिका में सहज महसूस नहीं करती हैं। साथ ही अमेरिका का राजनीतिक माहौल भी उनको पसंद नहीं है। वह ट्रंप प्रशासन और उसकी नीतियों पर भी खुलकर बात कर चुकी हैं। 

अमेरिका में आजादी से काम नहीं कर पा रहीं क्रिस्टिन 

‘द टाइम्स ऑफ लंदन’ से हालिया बातचीत में क्रिस्टिन स्टीवर्ट ने कहा कि वह अब अमेरिका में क्रिएटिव तौर पर सुरक्षित महसूस नहीं करती है। साथ ही वह अब यहां सहज महसूस नहीं करती हैं। जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या वह खुद को अमेरिका में रहते हुए आगे देखती हैं। इस पर उनका जवाब था, ‘शायद नहीं।’ वह आगे कहती हैं, ‘मैं यहां आजादी से काम नहीं कर सकती हूं।’ 

ट्रंप की नीतियों से नाराज एक्ट्रेस

अपने इंटरव्यू में क्रिस्टिन स्टीवर्ट ने ट्रंप की नीतियों को लेकर नाराजगी जाहिर की। वह कहती हैं, ‘ट्रंप के राज में सच्चाई पूरी तरह से टूट रही है।’ इसी इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने कहा कि अब अमेरिका में क्रिएटिव फ्रीडम खत्म हो रही है। इस बात का उन्हें दुख है। जहां तक अमेरिका छोड़कर दूसरी जगह बसने का सवाल है तो वह यूरोप जाना का मन बना रही हैं। दरअसल, जिस तरह की क्रिएटिव फ्रीडम क्रिस्टिन को चाहिए, वह उन्हें यूरोप में मिल सकती है। साथ ही वह काफी समय से इंडिपेंडेंट सिनेमा और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की चेतावनी 

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नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि अगर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 2020 में चीन के साथ हुए गतिरोध पर अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई, तब सदन चलने की संभावना कम बचेगी। कांग्रेस सांसद रमेश ने कहा कि संसद में केवल एक ही मुद्दा है जो विपक्ष को परेशान कर रहा है, और वहां हैं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने से रोका गया है। 
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि सभी विपक्षी दल इस बात पर एकराय हैं कि अगर लोकसभा सांसद को बोलने नहीं दिया गया, तब सदन के चलने की संभावना कम है। कांग्रेस ने संसद में कई मुद्दे उठाए हैं, जिनमें से एक प्रमुख मुद्दा पूर्वी लद्दाख में चीन गतिरोध पर एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा सांसद राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (सेवानिवृत्त) के उद्धरण देने से कई बार रोका गया। भाजपा नेताओं ने बचाव में कहा कि यह सदन के नियमों का उल्लंघन है और इससे सशस्त्र बलों का मनोबल गिरने का खतरा हो सकता है।
संसद में लगातार हो रही बाधाओं के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में भाग न लेने का फैसला किया। कांग्रेस नेता रमेश ने याद दिलाया कि जून 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव में इसलिए भाग नहीं लिया था क्योंकि उन्हें जवाब देने से रोका गया था। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने 2005 में राष्ट्रपति को दो बार धन्यवाद दिया था।
उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को याद दिलाना चाहता हूं कि जून 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब इसलिए नहीं दिया था क्योंकि उन्हें जवाब देने से रोका गया था। 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री सिंह ने राष्ट्रपति को दो बार धन्यवाद दिया था, क्योंकि वे 2004 में धन्यवाद नहीं दे पाए थे।

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यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब खाड़ी देश भी भारत के साथ व्यापार समझौता करने को तैयार

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नई दिल्ली। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में तेजी दिखाने के बाद अब खाड़ी देश भी भारत के साथ हाथ मिलाने को बेकरार दिख रहे हैं। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को दिखाता है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब भारत को बाजार भर नहीं, बल्कि साझेदार शक्ति के रूप में देख रही हैं। बता दें कि भारत और खाड़ी क्षेत्र के छह देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में दोनों पक्ष वार्ता की रूपरेखा पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह रूपरेखा आने वाली बातचीत का दायरा, तरीका और प्राथमिकताएं तय करेगी। इस तरह करीब दो दशक से अटकी प्रक्रिया अब फिर गति पकड़ती दिख रही है। खाड़ी सहयोग परिषद में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर चुका है और ओमान के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके बाद अब पूरे समूह के साथ व्यापक समझौता भारत की व्यापार नीति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार का आधार अभी तक ऊर्जा रहा है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस का बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से मंगाता रहा है। सऊदी अरब और कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं। दूसरी ओर भारत इन देशों को मोती, कीमती और अर्ध कीमती पत्थर, धातु, कृत्रिम आभूषण, बिजली उपकरण, लोहा, इस्पात और रसायन भेजता है। आंकड़े बताते हैं कि दोनों पक्षों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्ष में भारत का निर्यात करीब 57 अरब डॉलर के आसपास रहा, जबकि आयात 121 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। कुल द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। यह स्तर अपने आप में इस संबंध की गहराई बताता है।
खाड़ी देश भारतीय प्रवासी श्रमिकों के लिए भी बड़ा केंद्र हैं। करीब तीन करोड़ से अधिक भारतीय जो विदेश में रहते हैं, उनमें से बड़ी संख्या इसी क्षेत्र में काम करती है। वह हर वर्ष भारी धनराशि भारत भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण सहारा है। पहले भी भारत और समूह के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी थी, पर 2008 के बाद प्रक्रिया रुक गई। शुल्क में कटौती, निवेश सुरक्षा और समूह की आंतरिक प्राथमिकताओं पर मतभेद के कारण बातचीत ठंडी पड़ गई थी। अब निवेश संधि और व्यापार समझौते को अलग अलग रास्ते पर रखकर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की गई है।
भारत ने हाल में यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में प्रगति दिखाई है। इसतरह के माहौल में खाड़ी क्षेत्र के साथ नई पहल यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब व्यापार समझौतों को केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक साधन के रूप में भी देख रही है।
खाड़ी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ता कदम केवल बदलती विश्व राजनीति का संकेत भी है। दुनिया की ताकत अब केवल हथियार से नहीं, बाजार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा मार्गों से तय हो रही है। जो देश अपने लिए स्थिर ऊर्जा स्रोत और खुले बाजार सुरक्षित कर लेगा, वही आने वाले दशकों में मजबूती से खड़ा रहेगा। भारत लंबे समय तक सतर्क और कभी कभी संकोची व्यापार नीति अपनाता रहा। पर अब हालात बदल रहे हैं। वैश्विक शक्ति बनने के लिए भारत को अपने बड़े बाजारों को खोलना ही होगा। खाड़ी क्षेत्र इसमें स्वाभाविक साथी है, क्योंकि यहां ऊर्जा है, धन है, निवेश की क्षमता है और भारत के लिए काम करने वाली विशाल जनशक्ति भी यहीं मौजूद है।
बहरहाल, पर इस उत्साह में आंख मूंद लेना भी ठीक नहीं होगा। मुक्त व्यापार समझौते का अर्थ है अपने बाजार को खोलना। यदि घरेलू उद्योग तैयार नहीं हुए तो सस्ता आयात कई क्षेत्रों पर चोट कर सकता है। इसलिए सरकार को केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने की जल्दी नहीं, बल्कि घरेलू उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को मजबूत करने की भी उतनी ही चिंता करनी होगी। 

पीएम मोदी ने राज्यसभा में संबोधन के दौरान ली चुटकी और बोले- खड़गे जी बैठकर करें नारेबाजी, उनकी उम्र का ख्याल… 

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में माहौल काफी गरम रहा। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही संबोधन शुरू किया विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसी हंगामे के बीच पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी ली, जिस पर सत्ता पक्ष में ठहाके गूंज उठे। जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सांसदों ने सदन से वाकआउट किया, जिस पर पीएम मोदी ने फिर चुटकी ली।   
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आदरणीय सभापति जी, मेरी एक प्रार्थना है। आदरणीय खड़गे जी की उम्र को देखते हुए मेरा अनुरोध है कि वे बैठकर नारेबाजी करें। खड़े होकर नारे लगाने का काम नौजवानों के लिए छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा कि बैठ कर नारे लगाने से खड़गे जी को कष्ट नहीं होगा और विपक्ष के युवा सदस्य खड़े होकर नारे लगा सकते हैं। 
पीएम मोदी के इस बयान के बाद सदन में शोर और बढ़ गया। विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे, जबकि प्रधानमंत्री बिना रुके अपना जवाब देते रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साफ है— हमें न रुकना है, न पीछे मुड़कर देखना है, हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक छवि का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया का भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है और आज वैश्विक मंच पर भारत को गंभीरता से सुना जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश तेज विकास दर और कम महंगाई के साथ आगे बढ़ रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम देखने को मिलता है। 
पीएम मोदी ने कहा, कि हमें फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी के रूप में छोड़ा गया था, लेकिन आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं और बहुत जल्द तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति बना दी गई थी कि दुनिया का कोई देश भारत से डील करने को तैयार नहीं होता था। 

विपक्ष ने सदन से किया वाकआउट 
हंगामे के बीच विपक्षी सांसदों ने सदन से वाकआउट कर दिया। इस पर भी पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, जो लोग थक गए, बिचारे चले गए, लेकिन कभी न कभी उन्हें जवाब देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष के सांसद मेज थपथपाते रहे, जबकि विपक्ष की नारेबाजी और वाकआउट ने सदन की कार्यवाही को और तनावपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद पीएम मोदी ने बिना व्यवधान के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का अपना जवाब पूरा किया।

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खराब मौसम और तकनीकी गड़बड़ी बनी हादसे की वजह!

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मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में अहम शुरुआती निष्कर्ष सामने आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में दो प्रमुख कारक सामने आए हैं जो घटना के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। विस्तृत विश्लेषण अभी जारी है। सूत्रों के अनुसार, रनवे पर कम दृश्यता के बावजूद विमान ने लैंडिंग का प्रयास किया। 
दृश्यता की समस्या के साथ-साथ, प्रारंभिक जांच के दौरान संदिग्ध तकनीकी खराबी सामने आई है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या किसी सिस्टम की खराबी के कारण विमान के उतरने और लैंडिंग के दौरान उसके प्रदर्शन पर असर हुआ। अधिकारियों ने विमान के ब्लैक बॉक्स से डेटा रिकवर करना शुरू किया है। पूरा डेटा प्राप्त और विश्लेषण हो जाने के बाद, पूरी जांच रिपोर्ट जारी की जाएगी। अधिकारियों ने जोर दिया कि अंतिम निष्कर्ष इस महत्वपूर्ण उड़ान डेटा पर निर्भर करेगा। 
बारामती हवाई पट्टी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए ब्लैक बॉक्स को घटना के एक दिन बाद बरामद किया गया था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) बारामती टेबलटॉप हवाई पट्टी पर विमान के दूसरे लैंडिंग प्रयास के दौरान हुई दुर्घटना की जांच कर रहा है। बता दें कि एनसीपी प्रमुख का बुधवार सुबह (28 जनवरी) मुंबई से ब्रह्मंती जाते समय एक चार्टर विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 

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डीएमके और डीएमडीके के बीच चुनवी गठबंधन की कवायद तेज

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चेन्नई । डीएमके और डीएमडीके के बीच (Between DMK and DMDK) चुनवी गठबंधन की कवायद (Efforts for Electoral Alliance) तेज हो गई (Have Intensified) । द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की शुरुआती तैयारियों में देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) को एक अहम सहयोगी के तौर पर पाया है।

दोनों पार्टियां सीट-शेयरिंग और लंबे समय के राजनीतिक सहयोग को लेकर बातचीत कर रही हैं। डीएमके, जो चुनाव से काफी पहले ही अपनी चुनावी गणित को मजबूत करना चाहती है, उसने कथित तौर पर डीएमडीके को सात विधानसभा सीटों के साथ-साथ एक राज्यसभा सीट की पेशकश की है, जो अप्रैल में खाली होने वाली है। इस प्रस्ताव को सत्ताधारी पार्टी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद अपने गठबंधन के आधार को मजबूत करना और अपने लिए ज्यादा सीटों पर कब्जा बनाए रखना है।

हालांकि, डीएमडीके ने कथित तौर पर ज्यादा सीटों की मांग की है। पार्टी ने 14 विधानसभा सीटों तक की मांग की है, साथ ही, पार्टी ने एनडीए के साथ समानांतर बातचीत करके अपने विकल्प खुले रखे हैं, जिससे बातचीत में सस्पेंस का माहौल बन गया है। इसके बावजूद, डीएमके नेताओं को उम्मीद है कि जल्द ही कोई समझौता हो जाएगा।
सत्ताधारी पार्टी गठबंधन की व्यवस्था को जल्दी से अंतिम रूप देना चाहती है ताकि वह अपनी संगठनात्मक तैयारियों के साथ आगे बढ़ सके। उसने अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे को औपचारिक रूप से अंतिम रूप देने से पहले चुनावी सूचियों का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पूरा करने की योजना बनाई है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि डीएमके का इरादा 234 विधानसभा सीटों में से कम से कम 170 सीटों पर चुनाव लड़ने का है, जो 2021 के चुनावों में लड़ी गई 173 सीटों से थोड़ी ही कम हैं। यह मौजूदा सत्ता को बनाए रखने में उसके आत्मविश्वास को दिखाता है। जहां डीएमडीके के साथ बातचीत मुख्य केंद्र में है, वहीं डीएमके ने अपने गठबंधन को बड़ा करने के लिए चुपचाप दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया है।

इनमें अन्नाद्रमुक से निकाले गए नेता ओ. पन्नीरसेल्वम भी शामिल हैं। शुरुआती बातचीत में यह देखा गया कि क्या वह कोई अलग पार्टी बना सकते हैं या सीधे डीएमके के साथ गठबंधन कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर के आकलन से पता चला कि वोटों को ट्रांसफर करने की उनकी क्षमता सीमित हो सकती है, जिससे ऐसे किसी समझौते की जरूरत कम हो गई है। फिर भी, बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। कई बातचीत चल रही हैं, डीएमके नेतृत्व प्रतीकात्मक साझेदारियों के बजाय एक व्यावहारिक और संख्यात्मक रूप से मजबूत गठबंधन बनाने पर ध्यान केंद्रित करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होने की उम्मीद है कि डीएमडीके सत्ताधारी मोर्चे का एक मुख्य स्तंभ बनेगा या कोई अलग राजनीतिक रास्ता अपनाएगा।

यूपीएससी सेवा में रहते हुए नहीं दे सकेंगे अब बार-बार परीक्षा, रैंक सुधारने का सिर्फ एक अवसर मिलेगा 

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नई दिल्ली। संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा-2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार कुल 933 पदों के लिए भर्ती की जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 24 फरवरी तय की गई है। नोटिफिकेशन के साथ ही आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया और सेवा नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं, जिनका असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर अब फेस ऑथेंटिकेशन के बाद ही प्रवेश मिलेगा। इसके साथ ही सबसे बड़ा बदलाव चयन के बाद दोबारा परीक्षा देने से जुड़े नियमों में किया गया है। अब सेवा में रहते हुए बार-बार सिविल सेवा परीक्षा देने की सुविधा पहले जैसी नहीं रहेगी। यह नए नियम 2026 से लागू होंगे। 
आयोग के अनुसार, आईएएस और आईएफएस से जुड़े पुराने नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अन्य सेवाओं, खासकर ग्रुप-ए और आईपीएस के लिए रैंक सुधारने का मौका सीमित कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत चयनित अधिकारी को सिर्फ एक बार परफॉर्मेंस बेहतर करने का अवसर मिलेगा। 
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी अभ्यर्थी का 2026 में आईपीएस में चयन होता है, तो वह 2027 में रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दे सकता है। हालांकि इसके बाद अगर वह फिर से परीक्षा देना चाहता है, तो उसे सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। यानी सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 
इसके अलावा, जो उम्मीदवार पहले से आईपीएस में चयनित या नियुक्त हैं, वे सीएसई-2026 से दोबारा आईपीएस नहीं पा सकेंगे। वहीं, प्रीलिम्स के बाद लेकिन मेन्स से पहले यदि किसी अभ्यर्थी का आईएएस या आईएफएस में चयन हो जाता है, तो उसे मेन्स परीक्षा लिखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 
यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीएसई-2026 में चयनित उम्मीदवार अगर सीएसई-2027 में रैंक सुधारना चाहते हैं, तो इसके लिए अनुमति लेनी होगी। यह छूट केवल फाउंडेशन कोर्स तक सीमित रहेगी और इसे “वन-टाइम एक्जेम्पशन” माना जाएगा। यदि उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग जॉइन करता है और न ही यह छूट लेता है, तो सीएसई-2026 और सीएसई-2027 दोनों के आधार पर मिली सेवा स्वतः रद्द हो जाएगी। सीएसई-2028 या उसके बाद परीक्षा देने के लिए इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। 
गौरतलब है कि हर साल 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होते हैं। 2025 में करीब 10 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 14,161 अभ्यर्थी मेन्स तक पहुंचे और 979 पदों पर अंतिम चयन हुआ। 2024 और 2023 में भी करीब 13 लाख आवेदन आए थे। नए नियमों के बाद सिविल सेवा परीक्षा की रणनीति और करियर प्लानिंग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

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‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में प्रति लाभार्थी 500 रुपए की वृद्धि की पश्चिम बंगाल सरकार ने

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कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) ने ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में प्रति लाभार्थी 500 रुपए (‘Lakshmi Bhandar’ scheme by Rs. 500 per Beneficiary) की वृद्धि की (Increased) ।

पश्चिम बंगाल सरकार की मासिक सहायता योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ के तहत मिलने वाली रकम में हर लाभार्थी के लिए 500 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। यह प्रस्ताव गुरुवार को पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सदन में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतरिम (वोट-ऑन-अकाउंट) बजट में रखा। फिलहाल, जनरल कैटेगरी की महिलाओं को हर महीने 1 हजार रुपए मिलते हैं, जबकि शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब कैटेगरी की महिलाओं को 1,200 रुपए मिलते हैं। अंतरिम बजट प्रस्ताव के अनुसार, जनरल कैटेगरी की महिलाओं को अब से हर महीने 1,500 रुपए मिलेंगे, जबकि शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब कैटेगरी की महिलाओं को 1,700 रुपए मिलेंगे। अंतरिम बजट प्रस्तावों में ‘लक्ष्मी भंडार’ प्रोजेक्ट के तहत 15 हजार करोड़ रुपए का बजट अलॉट किया गया था।

भट्टाचार्य ने गुरुवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में भी चार प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी की। राज्य के अंतरिम बजट प्रस्ताव में एक नए प्रोजेक्ट की घोषणा की गई। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘बांग्लार युवा साथी’ है। भट्टाचार्य ने अंतरिम बजट प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा, “अगर हम इस साल विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में वापस आते हैं, तो यह प्रोजेक्ट इस साल 15 अगस्त से शुरू किया जाएगा। 21 से 40 साल की उम्र के सेकेंडरी परीक्षा पास युवाओं को हर महीने 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा।”

उन्होंने सिविक वॉलंटियर्स और ग्रीन पुलिसकर्मियों के पेमेंट में हर महीने 1 हजार रुपए की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। इसके लिए 150 करोड़ रुपए का बजट अलॉट किया गया। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) स्कीम में ग्रास-रूट लेवल पर काम करने वाले ‘शिक्षा बंधुओं’ के लिए भी 1 हजार रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने राज्य के लिए सातवें वेतन आयोग की भी घोषणा की। अंतरिम बजट का आकार 4,600 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का पूरा बजट इस साल के आखिर में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के बाद नई कैबिनेट पेश करेगी।

शादी का झांसा और दुष्कर्म…सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, केस रद्द

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Supreme Court Rape Case : गुरुवार को शीर्ष अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मानना मुश्किल है कि एक विवाहित महिला को शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में दर्ज एक मुकदमे को रद्द कर दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा कर सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत अपराध तभी बनता है, जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही शादी न करने की मंशा रखते हुए केवल यौन संबंध बनाने के उद्देश्य से सहमति प्राप्त की हो।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने पहले आरोपी वकील के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे को रद्द करने से इनकार कर दिया था। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले में कहा कि कथित संबंध की पूरी अवधि के दौरान शिकायतकर्ता महिला कानूनी रूप से विवाहित थी, क्योंकि उसका तलाक का मामला अदालत में लंबित था।

पीठ ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं एक वकील हैं और कानून की इस स्थिति से अनजान नहीं हो सकती थीं। दोनों पक्षों को महिला की वैवाहिक स्थिति की जानकारी थी, ऐसे में शादी के वादे के आधार पर दुष्कर्म का आरोप टिकाऊ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता 33 वर्षीय वकील, एक बच्चे की मां हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सितंबर 2022 से जनवरी 2025 तक संबंध रहे, इस दौरान गर्भावस्था और जबरन गर्भपात की स्थिति बनी। हालांकि, Supreme Court Rape Case में सभी तथ्यों को देखते हुए शीर्ष अदालत ने आरोपी वकील के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द कर दिया।