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Thursday, October 15, 2026
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अजित पवार की भूमिका से बढ़ी राजनीतिक अटकलें

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मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक नई असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावना को लेकर विरोधाभासी दावे सामने ला दिए हैं। शरद पवार (Sharad Pawar) ने यह संकेत दिया कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेता इस दावे से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।

एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।

शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत
इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह
सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।

वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।

एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता
इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।

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