मुंडन की खुशियां मातम में बदलीं, कार नहर में गिरी, दो सगे भाइयों समेत तीन की मौत

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नई दिल्ली। यूपी के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) स्थित रसूलाबाद थाना क्षेत्र के हरि निवादा के पास एक कार बेकाबू होकर सड़क किनारे रामगंगा नहर में चली गई। कार डूबने से दो सगे भाइयों समेत तीन की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को मेडिकल कॉलेज कानपुर भेजा गया है।

मुंडन में शामिल होने आए थे सभी
बहराइच रोड कोतवाली नगर जनपद गोंडा निवासी राकेश श्रीवास्तव (54), बेटे अभिषेक (26) व भाई राधेश श्रीवास्तव (42), चालक करिया उर्फ मुन्नू के साथ रसूलाबाद थाना क्षेत्र के अकोढ़िया में रिश्तेदार दिलीप श्रीवास्तव के यहां उनके बेटे के मुंडन संस्कार में शामिल होने शुक्रवार सुबह आए थे। यहां दोपहर तीन बजे के करीब चारो कार से वापस एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कानपुर लौट रहे थे।

अभिषेक की हालत नाजुक, कानपुर रेफर
गांव से निकल कर हरि निवादा के पास पहुंचे, तभी चालक ने संतुलन खो दिया। कार बेकाबू होकर सड़क किनारे से निकली रामगंगा नहर में चली गई। इसी बीच पीछे से आ रहे खंड शिक्षा अधिकारी अजब सिंह हादसा देखकर रुक गए। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से कार व कार में फंसे लोगों को मशक्कत कर बाहर निकलवाया। चारों को पुलिस सीएचसी लेकर पहुंची। यहां डॉक्टर ने राजेश, राधेश, व चालक मुन्नू को मृत घोषित कर दिया। जबकि गंभीर हालत में अभिषेक को कानपुर हैलट रेफर किया है।

एचपीएससी ने आठ साल बाद परिणाम और केवल 39 का चयन कर युवाओं के साथ किया खिलवाड़ – कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा

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चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि आठ साल बाद परिणाम और केवल 39 का चयन कर (By declaring results after eight years and selecting only 39 Candidates) एचपीएससी ने युवाओं के साथ खिलवाड़ किया (HPSC has betrayed the Youth) ।

हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की भर्ती प्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2019 में निकली स्नातकोत्तर शिक्षक (कंप्यूटर साइंस) के 1711 पदों की भर्ती का परिणाम 2026 में आना और उसमें भी सिर्फ 39 अभ्यर्थियों का चयन होना हरियाणा के युवाओं के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है। उनहोंने कहा कि आठ वर्षों तक हज़ारों युवाओं को उम्मीद में बाँधे रखना और अंत में उन्हें अयोग्य घोषित कर देना, उनकी मेहनत, आत्मसम्मान और भविष्य, तीनों पर सीधा हमला है। इस दौरान भर्ती के नियम बार-बार बदले गए, मानदंडों में फेरबदल किया गया और परीक्षा पद्धति में लगातार बदलाव किए गए, जिससे अभ्यर्थी भ्रम में रहे। इसी बीच सैकड़ों युवा आयु सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने सवाल किया इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।

उन्होंने कहा कि हाल में घोषित असिस्टेंट प्रोफेसर की मुख्य परीक्षा के नतीजे भी भर्ती व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं। सामान्य वर्ग में केवल 336 अभ्यर्थियों को पास किया गया, जबकि नियमों के अनुसार 2020 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। आरक्षित वर्ग के साथ तो और भी बड़ा अन्याय हुआ जहाँ 1016 के स्थान पर मात्र 166 अभ्यर्थियों को ही पास किया गया। जिन अभ्यर्थियों को एसकेटी परीक्षा में पास किया गया उनमें से 80 प्रतिशत से भी अधिक अभ्यर्थी बाहर के यानी हरियाणा से दूसरे राज्यों के हैं।

कई सब्जेक्ट में तो हरियाणा के मात्र 8 प्रतिशत छात्र ही पास किए गए हैं। यह हरियाणा के युवाओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। अंग्रेज़ी विषय में स्थिति अत्यंत चौंकाने वाली है। आरक्षित वर्ग के लिए 301 पद थे, लेकिन केवल 16 अभ्यर्थियों को पास किया गया और 285 पद खाली छोड़ दिए गए। अनुसूचित जाति की ओएससी व डीएससी श्रेणियों के लिए 120 पदों में से केवल 3 अभ्यर्थी पास हुए। कुल 613 अंग्रेज़ी पदों के विरुद्ध मात्र 151 अभ्यर्थी ही योग्य घोषित किए गए। सामान्य वर्ग में भी 502 पदों के सामने केवल 336 अभ्यर्थियों को पास किया गया, जबकि 1004 अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए था।

कुमारी सैलजा ने कहा कि एएमओ और पीजीटी की भर्तियों में भी 35 प्रतिशत की कठोर सीमा लगाकर हजारों अभ्यर्थियों को साक्षात्कार से बाहर कर दिया गया, जिससे अधिकांश पद खाली रह गए। यह स्पष्ट करता है कि समस्या युवाओं की योग्यता में नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की खामियों और मनमानी में है। उन्होंने मांग की कि विषय ज्ञान परीक्षा में कुल पदों के कम से कम दो गुना अभ्यर्थियों को पास कर साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए, सभी विज्ञापित पद भरे जाएँ और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। चयन मानदंड सार्वजनिक किए जाएँ और हरियाणा लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर हरियाणा के ही किसी योग्य व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि एक दिन पूर्व ही पीजीटी कंप्यूटर साइंस का सात साल बाद परिणाम जारी कर कुछ ही घंटों बाद उसी पद के लिए नई भर्ती का विज्ञापन निकाल देना, युवाओं की आँखों में धूल झोंकने के बराबर है। जब 1711 पदों में से केवल 39 ही योग्य माने गए, तो उसी दिन नई भर्ती निकालना यह साबित करता है कि दोष युवाओं में नहीं, बल्कि अस्पष्ट और त्रुटिपूर्ण चयन प्रणाली में है।

रेलवे बोर्ड का आदेश… रिजर्वेशन में पहचान पत्र नहीं दिखाया तो बेटिकट माना जाएगा

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इंदौर। रेलवे (Railway) से यात्रा करने वाले यात्रियों (Passengers) के लिए पहचान सत्यापन को लेकर नियमों को एक बार फिर सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने सभी जोनल रेलवे के वाणिज्य विभाग को पत्र भेजकर कहा है कि आरक्षित टिकट पर यात्रा कर रहे यात्रियों में से कम से कम एक व्यक्ति के पास मूल पहचान पत्र ( identity card) होना जरूरी है। जांच के दौरान पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने की श्रेणी में रखा जा सकता है।

रेलवे बोर्ड द्वारा 4 फरवरी 2026 को जारी आदेश में पहले से लागू दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाए। बोर्ड ने टिकट जांच स्टाफ को निर्देश दिए हैं कि यात्रा के दौरान पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य गलत नाम और टिकट पर यात्रा को और एजेंटों द्वारा किसी भी नाम से टिकट बुक कर बाद में ज्यादा दाम पर दूसरे लोगों को बेचने को रोकना है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन यात्रियों ने विशेष श्रेणी या कोटा जैसे वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, छात्र या अन्य रियायती वर्ग के अंतर्गत टिकट बुक करवाया है, उन्हें अपनी पात्रता से संबंधित वैध दस्तावेज साथ रखने होंगे। अगर यात्री जांच के समय आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो उसे दी गई रियायत अमान्य मानी जाएगी और रेलवे नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

सीमावर्ती रेल मार्गों पर सतर्कता
रेलवे बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े रेल मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी के निर्देश भी दिए हैं। भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश जैसे रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों की पहचान जांच को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, ताकि नियमों का सख्ती से अनुपालन हो सके।

ध्यान रखने वाली बातें
आरक्षित टिकट पर सफर करते समय मूल फोटो पहचान पत्र जरूर साथ रखें।
समूह में यात्रा की स्थिति में कम से कम एक यात्री के पास पहचान पत्र अनिवार्य रूप से हो।
रियायती या विशेष कोटा पर टिकट होने पर पात्रता प्रमाण साथ रखना न भूलें।

 

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इतिहास का तो इतिहास ही गवाह है, लेकिन आज इसे बदलने की कोशिश की जा रही है – शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी

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नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Shiv Sena (UBT) MP Priyanka Chaturvedi) ने कहा कि इतिहास का तो इतिहास ही गवाह है (History is the witness of History), लेकिन आज इसे बदलने की कोशिश की जा रही है (But today efforts are being made to Change It) । दूसरे दलों के प्रधानमंत्रियों की उपलब्धियों को कम दिखाने और गलत दावे करने का काम हो रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जनता को प्रधानमंत्री से यह उम्मीद है कि वे ईमानदार और जवाबदेह रहें, न कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करें। उन्होंने संसद में महिलाओं के विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा को लेकर आई टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि कल स्पीकर का बयान शर्मनाक था, जिसमें महिलाओं को दोषी ठहराया गया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा खतरे में है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि महिलाओं के जरिए आरोप लगाए जा रहे हैं। संसद देश की सबसे सुरक्षित जगह है, और यहां पर हर सांसद की सुरक्षा का पूरा इंतजाम होता है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि यह कहना कि महिलाओं के विरोध के कारण प्रधानमंत्री की सुरक्षा खतरे में है, बिल्कुल गलत है। अगर संसद में 33 प्रतिशत महिलाएं आती हैं, जैसा कि 2029 में वादा किया गया है, और वे विरोध करें, तो क्या प्रधानमंत्री संसद में आएंगे या नहीं? महिलाओं को दोष देने से न केवल वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है, बल्कि लोकतंत्र की भावना को भी कमजोर किया जा रहा है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन और आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार हैं। उन्होंने इसे कमतर करने और महिलाओं को दोष देने के प्रयासों की निंदा की। उनका कहना है कि संसद और लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने पीएम मोदी को तीसरी बार सत्ता में भेजा है और इस तीसरे टर्म में उनसे यह अपेक्षा है कि देश की प्रगति और विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार भाषणों में यह दावा कर रहे हैं कि भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है, लेकिन अगर हम प्रति व्यक्ति आय देखें तो आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बेरोजगारी चरम सीमा पर है और किसानों की स्थिति चिंताजनक है। प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि कृषि क्षेत्र में हाल ही में अमेरिकी उत्पादों पर 0 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का आदेश आया है, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह के असमान व्यापारिक फैसले किसानों के हित के खिलाफ हैं। इसके साथ ही उन्होंने लगातार पड़ोसी देश बांग्लादेश की ओर भारत की बढ़ती तुलना और कूटनीतिक तनाव का जिक्र किया।

प्रियंका ने मणिपुर की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वहां सत्ता को लेकर जोड़-तोड़ और राजनीतिक चालबाजी के कारण हालात गंभीर हैं। राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद भी सरकार ने जोड़-तोड़ करके सत्ता में बने रहने की कोशिश की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के अधिकारों के खिलाफ बताया। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, व्यापारिक असमानताओं और बेरोजगारी की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में विकास के दावे तो बड़े जोर-शोर से किए जा रहे हैं, लेकिन आम जनता तक इसका लाभ नहीं पहुंच रहा। किसानों और मजदूरों की स्थिति गंभीर है और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के हित और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को हल किए बिना देश का संतुलित विकास संभव नहीं है। सिर्फ भाषणों और आंकड़ों से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जनता को वास्तविक बदलाव चाहिए और उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि सरकार उनके कल्याण के लिए काम कर रही है।

ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवर्स की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, जानिए उनकी प्रमुख मांगें

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नई दिल्ली। ऐप आधारित कैब सर्विस ओला, उबर और रैपिडो (Ola, Uber and Rapido) के ड्राइवर्स ने 7 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल (nationwide strike) का ऐलान किया है। इस हड़ताल को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन नाम दिया गया है। ड्राइवर यूनियन ने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि उनका कहना है कि कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ड्राइवर्स का शोषण हो रहा है।

हड़ताल की वजह

 

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “देश भर के ऐप आधारित परिवहन कर्मी 7 फरवरी को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन करेंगे। न न्यूनतम किराया है, न कोई नियमन — सिर्फ अंतहीन शोषण।”

यूनियन के अनुसार, ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसी प्लेटफॉर्म सेवाओं में किराया एकतरफा तय किया जाता है, जिससे ड्राइवरों की आय असुरक्षित, अस्थिर और असहनीय हो गई है।

प्रमुख मांगे

यूनियन ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2005 का हवाला देते हुए मांग की है:

प्लेटफॉर्मों पर नियामक निगरानी

किराए में पारदर्शिता

ड्राइवरों की आजीविका और सुरक्षा

केंद्र व राज्य सरकारें ऐप आधारित सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया तय करें, और इसे निर्धारित करने से पहले ड्राइवर यूनियनों से राय ली जाए

कैब सेवाओं में निजी वाहनों के उपयोग पर रोक

सरकार की नई पहल और हड़ताल का समय

ड्राइवरों की हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब गृहमंत्री अमित शाह ने भारत टैक्सी सेवा लॉन्च की है। यह सरकारी सेवा ओला और उबर जैसी सुविधाओं के साथ काम करेगी और ड्राइवर्स को कई प्रकार की सुविधा प्रदान करेगी। फिलहाल इसे ट्रायल फेस में लागू किया गया था, लेकिन अब इसे देशव्यापी रूप से लागू किया जा रहा है।

अजित पवार के निधन के चलते अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

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मुंबई । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde) ने कहा कि अजित पवार के निधन के चलते (Due to the demise of Ajit Pawar) अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे (Will not celebrate his Birthday) । महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद से पूरा प्रदेश शोक में डूबा है। इस दुखद माहौल को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 9 फरवरी को अपना जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय लिया है।

उन्होंने अपील की है कि उनके जन्मदिन के अवसर पर न तो कोई समारोह आयोजित किया जाए और न ही शुभकामनाओं के लिए होर्डिंग्स, गुलदस्ते या उपहार लाए जाएं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय ने बताया कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि अजित दादा के असामयिक निधन से महाराष्ट्र अभी उबर भी नहीं पाया है। यह क्षति न केवल राजनीतिक बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि मैंने अपना एक सहकर्मी और मित्र खो दिया है। दादा के जाने से जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। हम सभी पवार परिवार के इस गहरे दुख में सहभागी हैं।

एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि ऐसे शोकपूर्ण समय में जन्मदिन मनाना, कार्यक्रम या समारोह आयोजित करना उचित नहीं होगा। इसी भावना के तहत उन्होंने सभी समर्थकों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे स्थिति की गंभीरता को समझें और उनके जन्मदिन पर किसी भी प्रकार का आयोजन न करें। उन्होंने यह अपील की कि उनके जन्मदिन के मौके पर न तो फूलों के गुलदस्ते लाए जाएं, न शुभकामनाओं के होर्डिंग्स लगाए जाएं और न ही कोई सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम आयोजित किया जाए।

बता दें कि अजित पवार 28 जनवरी को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए प्रचार करने बारामती आ रहे थे, तभी उनका प्लेन क्रैश हो गया। प्लेन रनवे पर लैंड करते समय क्रैश हुआ। इस दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया। चार अन्य लोगों की भी इस दुर्घटना में मौत हो गई। 29 जनवरी को अजित पवार के पार्थिव शरीर का बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में अंतिम संस्कार किया गया। अजित पवार के निधन के बाद पत्नी सुनेत्रा पवार को उनकी जगह उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्हें आबकारी, खेल और अल्पसंख्यक विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

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भारत ने छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता

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हरारे। आईसीसी मेन्स अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में शुक्रवार (6 फरवरी) को भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से हुआ। हरारे के हरारे स्पोर्टस क्लब में हुए इस मुकाबले में टॉस भारतीय टीम ने 100 रनों से शानदार जीत हासिल की। वैभव सूर्यवंशी (175 रन) की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को 412 रनों का पहाड़ सा लक्ष्य दिया। टारगेट का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवरों में 311 रनों पर सिमट गई। भारतीय टीम ने इसके साथ ही रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीत लिया।
भारतीय टीम ने इससे पहले 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में अंडर-19 विश्व ,कप खिताब जीता था। भारतीय टीम का ये लगातार छठा और कुल 10वां फाइनल था। दूसरी ओर इंग्लैंड ने सिर्फ 1 बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता है। साल 1998 के फाइनल में उसने न्यूजीलैंड को पराजित किया था। रनचेज में इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जोसेफ मूर्स (17 रन) का विकेट सस्ते में गंवा दिया। इसके बाद बेन डॉकिन्स और बेन मेस ने दूसरे विकेट के लिए 74 रन जोड़े।  खिलान पटेल ने मेस को आउट करके इस पार्टनरशिप को तोड़ा। मेस ने 27 गेंदों पर 45 रन बनाए, जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल रहे। भारतीय टीम को तीसरी सफलता इंग्लिश कप्तान थॉमस रेव के रूप में मिली, जो 31 रन बनाकर आउट हुए। सलामी बल्लेबाज बेन डॉकिन्स ने अर्धशतक जड़ा, लेकिन वो उसके बाद ज्यादा देर टिक नहीं पाए। आयुष म्हात्रे ने डॉकिन्स का विकेट लिया। डॉकिन ने 7 चौके और 2 छक्के की मदद से 56 गेंदों पर 66 रनों का योगदान दिया। राल्फी अल्बर्ट (0 रन) और फरहान अहमद (1 रन) और सेबेस्टियन मॉर्गन (0 रन) कुछ खास नहीं कर पाए। मॉर्गन के आउट होने के समय इंग्लैंड का स्कोर 177-7 था।
फाल्कनर ने जड़ा इंग्लिश टीम के लिए शतक
यहां से कालेब फाल्कनर और जेम्स मिंटो ने आठवें विकेट के लिए 92 रन जोड़े। आरएस अम्बरीश ने मिंटो (28 रन) को आउट करके इस साझेदारी को तोड़ा। फिर अम्बरीश ने मैनी लम्सडेन (3 रन) को भी चलता किया। कालेब फाल्कनर ने अकेले संघर्ष किया और वो 115 रन बनाकर आउट हुए। फाल्कनर ने 67 गेंदों की पारी में 9 चौके और 7 छक्के जड़े। भारत की ओर से आरएस अम्बरीश ने तीन विकेट झटके। दीपेश देवेंद्रन को भी दो सफलताएं हासिल हुईं।
भारत की पारी  
मुकाबले में भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने टॉस जीता और पहले पहले बल्लेबाजी चुनी। भारत की तरफ से ओपनिंग करने वैभव सूर्यवंशी और आरोन जॉर्ज आए। वैभव और जॉर्ज की जोड़ी ज्यादा कुछ नहीं कर पाई। 20 के स्कोर पर जॉर्ज का विकेट गिरा। वह 9 रन बनाकर लौटे। प्वाइंट पर उनका कैच लपका गया। इसके बाद आयुष म्हात्रे ने वैभव के साथ टिककर बल्लेबाजी शुरू की। भाररतीय टीम ने 8 ओवर में 50 रनों का आंकड़ा पार किया। इसके बाद नौवें ओवर में वैभव ने 18 रन बनाए, जिससे भारतीय टीम का स्कोर 9 ओवर में 71 रन हो गया। इसी बीच भारतीय टीम के 100 रन 14वें ओवर में पूरे हुए। वैभव ने 17वें ओवर में स्पिनर फरहान अहमद की जमकर खबर ली और उनके ओवर में 22 रन जड़ दिए। दूसरी ओर आयुष म्हात्रे 19वें ओवर में 50 गेंदों पर 53 रन बनाकर एलेक्स ग्रीन की गेंद पर आउट हुए।  आयुष के आउट होने के बाद वैभव ने 55 गेंदों पर 8 छक्के और 8 चौकों की मदद से अपना शतक पूरा किया। इसके बाद वैभव की आंधी जारी रही। 71 गेंदों में 150 (13 छक्के, 13 चौके) रन पूरे किए। हालांकि इसके बाद वैभव की पारी का अंत 175 रनों पर हो गया। वैभव ने अपनी पारी में 80 गेंदों का सामना किया और कुल 15 चौके और 15 छक्के जड़े, उनको थॉमस रेव ने मैनी लम्सडेन की गेंद पर कैच पकड़ा।  विहान मल्होत्रा (30) के रूप में टीम का चौथा विकेट गिरा। उन्हें जेम्स मिंटो ने बेन डॉकिन्स के हाथों कैच कराया। 302 के स्कोर पर यह विकेट गिरा। इसके बाद ही 308 के स्कोर पर 5वां विकेट गिरा। वेदांत त्रिवेदी (32) को बेन मेस ने जेम्स मिंटो की गेंद पर कैच कर लिया। 45वें ओवर में अभिज्ञान कुंडू (40) आउट हुए। टीम को 359 रनों पर छठा झटका लगा। कुंडू को राल्फी अल्बर्ट ने सेबेस्टियन मॉर्गन की गेंद पर लपक लिया। 7वां विकेट 367 पर गिरा। आरएस अम्बरीष (18) को मिंटो ने बोल्ड किया। 47वें ओवर में  खिलान पेटल (3) 375 के स्कोर पर आउट हुए। टीम ने 8वां विकेट खोया। जोसेफ मूर्स ने कैच पकड़ा। सेबेस्टियन मॉर्गन को यह विकेट मिला। 49वें ओवर में हेनिल पेटल (5) रन आउट हो गए। 9वां विकेट 393 के स्कोर पर गिरा। आखिरकार भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 411/9 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। कनिष्क चौहान (37) और दीपेश देवेंद्रन।(0) नाबाद लौटे। 

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PM मोदी के भाषण पर कांग्रेस ने घेरा, राहुल गांधी ने कसा तंज; खरगे बोले-97 मिनट में कोई ठोस बात नहीं

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नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र जारी है। 4 फरवरी को लोकसभा में प्रधानमंत्री का भाषण रद्द किया गया। इसके बाद गुरुवार (05 फरवरी) शाम को पीएम मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया। प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा में करीब 97 मिनट बोले। इस दौरान राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों ने भाषण के समय वॉकआउट कर दिया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया आई है।

संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी के भाषण पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो उचित समझो वही करो। दरअसल, यह वही शब्द है, जिसका पूर्व सेना अध्यक्ष नरवणे ने अपनी अप्रकाशित किताब में जिक्र किया था।

खरगे ने पीएम मोदी को घेरा। अपने बयान में उन्होंने कहा, ‘झूठी बातों को दोहराना (प्रधानमंत्री) उनका हमेशा एक काम रहा है। 97 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कुछ नई बात नहीं कही और हमने जो राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विचार रखे थे, उन्होंने उसपर एक भी जवाब नहीं दिया। वो सिर्फ 100 साल, 75 साल की बात करते रहे। हमें जनरल नरवणे (रिटायर्ड) की पब्लिश हुई किताब मिल गई, लेकिन उन्हें यह कैसे नहीं मिली? रक्षा मंत्री यह कैसे कह सकते हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है?’

उन्होंने आगे कहा कि रक्षा मंत्री इसका बचाव करते रहे। जब विपक्ष के विपक्ष राहुल गांधी ने मुद्दा (2022 चीन मुद्दा) उठाया तो वे क्यों परेशान हुए? बाद में, वे केवल मुझे गाली देते रहे। उनके पास कोई तथ्य नहीं थे, जिनके आधार पर वे हमें जवाब दे सकें। उन्होंने हम पर सिखों का अपमान करने का भी आरोप लगाया। हम सिख समुदाय का सम्मान करते हैं। डॉ. मनमोहन सिंह, एक प्रख्यात अर्थशास्त्री, दो बार वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए। आप दलितों सहित किसी का सम्मान नहीं करते। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने कांग्रेस को गाली देने के अलावा क्या किया है?

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अब तेलंगाना में भी वोटर लिस्ट सुधार की कवायद, चुनाव आयोग बोला- अप्रैल-मई में हो सकता है SIR

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हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी सी. सुदर्शन रेड्डी ने एक अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में वोटर लिस्ट के विशेष सुधार का शेड्यूल अप्रैल-मई 2026 के दौरान घोषित होने की उम्मीद है। गुरुवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही।

मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि अभी देश के 12 राज्यों में यह सुधार कार्य चल रहा है। तेलंगाना और बाकी राज्यों के लिए इसे 2026 में शुरू किया जाएगा। सुधार के लिए समय कम है, इसलिए राज्य में तैयारी का काम अभी से शुरू कर दिया गया है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे हर पोलिंग स्टेशन के लिए कम से कम एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) जरूर नियुक्त करें।

रेड्डी ने सलाह दी कि ये एजेंट उसी इलाके के रहने वाले होने चाहिए। वे बूथ लेवल अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे। इससे वोटर लिस्ट ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनेगी और समस्याओं का समय पर समाधान होगा। इस अभियान के दौरान बीएलओ हर इलाके में तीन से चार बार जाएंगे। पहली बार में वे फॉर्म बांटेंगे और अगली बार उन घरों में जाएंगे जो पहले छूट गए थे।

उन्होंने साफ किया कि जो वोटर तैयारी के दौरान लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए, वे भी इस प्रक्रिया में अपनी जानकारी दे सकेंगे। रेड्डी ने जोर दिया कि एजेंटों की नियुक्ति जल्द पूरी होनी चाहिए। इससे आपसी तालमेल मजबूत होगा, शिकायतें कम होंगी और कोई भी योग्य वोटर लिस्ट से बाहर नहीं रहेगा। इस बैठक में अतिरिक्त सीईओ वासम वेंकटेश्वर रेड्डी, डिप्टी सीइओ हरि सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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News Desk

‘महिला को गर्भ पूरा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ-साफ कहा है कि किसी भी महिला (Women), खासकर नाबालिग लड़की (Girl) को, उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ (Pregnancy) पूरा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने 30 हफ्ते की गर्भावस्था को खत्म करने की अनुमति दी है। बता दें कि यह गर्भ एक ऐसी लड़की का था, जो गर्भ ठहरने के समय नाबालिग थी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस BV नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने सुनाया। अदालत ने आदेश दिया है कि मुंबई के जेजे हॉस्पिटल में सभी जरूरी मेडिकल सावधानियों के साथ गर्भपात की प्रक्रिया की जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में सबसे पहले नाबालिग लड़की के अधिकार को देखना जरूरी है। लड़की एक कठिन हालात से गुजर रही है और वह इस गर्भ को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। अदालत ने कहा कि यह सवाल अहम नहीं है कि संबंध सहमति से था या नहीं, बल्कि सच्चाई यह है कि लड़की नाबालिग है और वह मां बनना नहीं चाहती।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अगर मां के हित को देखा जाए, तो उसकी अपनी पसंद और फैसला लेने के अधिकार को पूरा महत्व देना होगा। अदालत किसी भी महिला को, और वह भी नाबालिग हो, जबरन मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह फैसला अदालत के लिए भी आसान नहीं है। एक तरफ अजन्मा बच्चा है, जो जन्म लेने पर एक जीवन होगा, और दूसरी तरफ लड़की की साफ इच्छा है कि वह गर्भ जारी नहीं रखना चाहती। उन्होंने कहा कि जब 24 हफ्ते तक गर्भपात की इजाजत दी जा सकती है, तो सिर्फ समय ज्यादा होने की वजह से 30 हफ्ते पर उसे क्यों रोका जाए, जबकि लड़की साफ तौर पर बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती।