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Friday, July 31, 2026
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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले बढ़ी हलचल, अलग प्रशासन की मांग पर अड़े कुकी संगठन

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नई दिल्ली: मणिपुर में सरकार गठन को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच, कुकी जो काउंसिल (KZC) और इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने बुधवार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239A के तहत ‘विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश’ के रूप में एक अलग प्रशासन की अपनी मांग को फिर से दोहराया है. कुकी-जो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट ने गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपा है.

ज्ञापन में कहा गया है- “भारत सरकार इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि कुकी-जो समुदाय के लोग न तो इंफाल वापस जा सकते हैं और न ही संघर्ष से पहले जैसी स्थिति को स्वीकार करेंगे. इसलिए, हम केंद्रीय गृह मंत्री से विनम्र अपील करते हैं कि वे इन शिकायतों का अत्यंत गंभीरता से संज्ञान लें. हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए हमारे अधिकृत प्रतिनिधियों (KNO और UPF) के साथ राजनीतिक बातचीत तेज करे, ताकि जल्द ही एक उचित और संवैधानिक राजनीतिक समाधान निकाला जा सके.”

थांगलेट ने गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में जिसकी एक प्रति ETV Bharat के पास उपलब्ध है, कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों से कुकी-जो लोग मैतई समुदाय के साथ हुए जातीय संघर्ष के कारण अत्यधिक कष्ट सह रहे हैं.

थांगलेट ने कहा, “250 से अधिक निर्दोष कुकी-जो लोगों की जान गई है. 7,000 से ज्यादा घर जला दिए गए. 360 पूजा स्थलों को अपवित्र या क्षतिग्रस्त किया गया, और 40,000 से अधिक लोगों को उनके घरों और संपत्तियों से जबरन बेदखल कर दिया गया. कुकी-जो आबादी को इंफाल घाटी से पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया है, जिससे कुकी-जो और मैतई लोगों के बीच शारीरिक, प्रशासनिक और मनोवैज्ञानिक रूप से पूर्ण अलगाव हो गया है. यह स्पष्ट रूप से देखा और दर्ज किया गया है कि राज्य सरकार की मशीनरी के कुछ हिस्से इन अत्याचारों में शामिल थे या इन्हें रोकने में विफल रहे. ऐसी परिस्थितियों में, कुकी-जो लोगों के लिए उसी प्रशासन के अधीन बने रहने की कोई गुंजाइश नहीं बची है.”

बफर ज़ोन क्षेत्रों में मैतई आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के पुनर्वास का विरोध करते हुए थांगलेट ने कहा, “ऐसी विश्वसनीय रिपोर्टें हैं कि मैतई विस्थापितों को चुराचांदपुर के तोरबुंग और सुगनु के सेरो इलाके में फिर से बसाया गया है, और डोइलाथाबी क्षेत्र में भी ऐसी ही कोशिशें की गई हैं. ये सभी इलाके बफर ज़ोन और कुकी-जो बस्तियों के भीतर या उनके बेहद करीब आते हैं. ऐसी कार्रवाइयों को सीधे उकसावे के रूप में देखा जा रहा है, जिससे फिर से संघर्ष शुरू होने की भारी आशंका है.”

उन्होंने कहा कि बफर ज़ोन की स्थापना विशेष रूप से आमना-सामना और खून-खराबे को रोकने के लिए की गई थी. थांगलेट ने चेतावनी दी, “इस व्यवस्था का कोई भी उल्लंघन, इसे कमजोर करना या इसे चुनिंदा तरीके से लागू करना जनता के विश्वास को कम करता है, कानून व्यवस्था को कमजोर करता है और इस नाजुक शांति के लिए खतरा पैदा करता है.”

इंफाल घाटी में कुकी-जो समुदाय की ज़मीन और संपत्तियों की सुरक्षा की मांग करते हुए थांगलेट ने कहा कि 3 मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद, हजारों कुकी-जो लोगों को इंफाल घाटी से जबरन बेदखल कर दिया गया, जिससे उन्हें अपनी ज़मीन, घर और संपत्तियां पीछे छोड़नी पड़ीं.

थांगलेट ने कहा, “ऐसी व्यापक रिपोर्टें हैं कि इनमें से कई संपत्तियों को जला दिया गया, लूटा गया, नष्ट कर दिया गया या उन पर अवैध कब्जा कर लिया गया, जबकि बची हुई संपत्तियों पर भी अवैध कब्जे और गैर-कानूनी हस्तांतरण का खतरा बना हुआ है. गृह मंत्री से विनम्र आग्रह करते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इंफाल घाटी में कुकी-जो समुदाय की सभी ज़मीनों और संपत्तियों को सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए, और किसी भी परिस्थिति में उनके हस्तांतरण या आवंटन की अनुमति न दी जाए.”

इस बीच, मणिपुर में लंबे समय तक चलने वाली शांति सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय में सलाहकार (उत्तर-पूर्व) ए.के. मिश्रा, राज्य के विभिन्न विद्रोही गुटों के ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समूहों के साथ अलग से बातचीत कर रहे हैं. यहां यह बताना जरूरी है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का वर्तमान चरण 13 फरवरी 2026 को समाप्त हो जाएगा. पिछले साल मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था.

 

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