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Friday, August 7, 2026
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नीलामी में 14 पाकिस्तानी खिलाड़ी शामिल, क्या भारतीय फ्रेंचाइजी लगाएंगी बोली या फिर होगी किरकिरी?

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इंग्लैंड की प्रतिष्ठित लीग ‘द हंड्रेड’ की इस साल की नीलामी सूची में 14 पाकिस्तानी पुरुष खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। 247 खिलाड़ियों की लंबी सूची में पाकिस्तान की मजबूत मौजूदगी ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजियां इन खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी? या पिछले साल की तरह इस बार भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों की किरकिरी होगी। आइए पूरा मामला जानते हैं…

रिपोर्ट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर खुलासा

दरअसल, पिछले महीने द हंड्रेड को लेकर एक नई रिपोर्ट ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी थी। खबर थी कि जिन टीमों में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) फ्रेंचाइजियों की हिस्सेदारी है, वे अगले महीने होने वाली नीलामी में किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी पर बोली नहीं लगाएंगी। यह दावा बीबीसी की रिपोर्ट में किया गया थी, जिसमें एक खिलाड़ी एजेंट के हवाले से इसे ‘अलिखित नियम’ बताया गया। ‘अलिखित नियम’ वे प्रतिबंध या दिशा-निर्देश हैं, जो कहीं लिखे नहीं होते और न ही औपचारिक रूप से बताए जाते हैं, लेकिन लोग इन्हें मौन सहमति से स्वीकार करते हैं। इन्हें ‘अनकहे नियम’ भी कहते हैं। इसे ‘शैडो बैन’ भी कहा जा रहा है।

भारतीय निवेश और पाकिस्तानी खिलाड़ियों की स्थिति

दुनियाभर की टी20 लीगों में यह पहले भी देखा गया है कि जहां भारतीय निवेश या आईपीएल मालिकों की सीधी भागीदारी होती है, वहां पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एंट्री नहीं होती। उदाहरण के तौर पर आईपीएल में 2008 के पहले सीजन के बाद कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं खेला। दक्षिण अफ्रीका की एसए20 की सभी छह टीमें आईपीएल समूहों के स्वामित्व में हैं और वहां भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं दिखे। यूएई की आईएलटी20 में भी यही स्थिति रही है। अब द हंड्रेड की आठ में से चार टीमों में आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों की हिस्सेदारी आ चुकी है, जो एक अक्तूबर 2025 से प्रभावी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक ये टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाएंगी।

किन टीमों में है IPL मालिकों की हिस्सेदारी?

रिपोर्ट में जिन टीमों का नाम सामने आया है, उनमें शामिल हैं:

  • मैनचेस्टर सुपर जाएंट्स
  • साउदर्न ब्रेव
  • एमआई लंदन
  • सनराइजर्स लीड्स

‘शैडो बैन’ की चर्चा क्यों?

रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए शैडो बैन की आशंकाएं जताई गईं। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक एजेंट को संकेत दिया कि उसके पाकिस्तानी खिलाड़ियों में रुचि केवल उन टीमों तक सीमित हो सकती है, जिनका आईपीएल से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में गिने चुने खिलाड़ियों को ही जगह मिल सकती है। हालांकि इस पर इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड और द हंड्रेड टीमों ने संयुक्त बयान जारी किया। बयान में कहा गया, ‘किसी भी खिलाड़ी को उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर बाहर नहीं किया जाएगा।’ ईसीबी ने यह भी स्पष्ट किया कि चयन केवल प्रदर्शन, उपलब्धता और टीम की जरूरतों के आधार पर होगा। 
 
टॉप 50 में छह पाकिस्तानी खिलाड़ी

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ को ‘मार्की प्लेयर्स इंटरनेशनल’ श्रेणी में रखा गया है, जिनकी बेस प्राइस एक लाख पाउंड तय किया गया है। उनके साथ एडन मार्करम, डेविड मिलर, डेरिल मिचेल और सुनील नरेन जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इस बार टॉप 50 हीरो सूची में छह पाकिस्तानी खिलाड़ी शामिल हैं। रऊफ के अलावा शाहीन अफरीदी, शादाब खान और उस्मान तारिक टियर-1 में हैं। वहीं सैम अयूब और अबरार अहमद टियर-2 में रखे गए हैं, जिनमें अयूब ने सबसे ऊंची रिजर्व प्राइस चुनी है। टॉप 50 में किसी भी विदेशी देश से सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व पाकिस्तान का है, जो दक्षिण अफ्रीका से भी एक ज्यादा है।

पिछले साल क्या हुआ था?

पिछले साल द हंड्रेड में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की किरकिरी हुई थी। 2025 के ड्राफ्ट में एक भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला था। यह 2021 में प्रतियोगिता शुरू होने के बाद पहली बार हुआ था। उस समय 50 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने नाम दर्ज कराया था। हालांकि, 2024 सीजन में नसीम शाह, मोहम्मद आमिर, हारिस रऊफ और उसामा मीर जैसे खिलाड़ी खेले थे। 2023 में शादाब खान सहित छह पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।

उपलब्धता भी बड़ी चुनौती

इस साल द हंड्रेड का कार्यक्रम पाकिस्तान की टेस्ट सीरीज से टकरा रहा है। ऐसे में केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि फ्रेंचाइज़ियां बोली लगाने से पहले कार्यक्रम और उपलब्धता को ध्यान में रखेंगी।

क्या भारतीय मालिक बोली लगाएंगे?

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय मालिकाना हक वाली टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर दांव लगाती हैं या नहीं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चयन पूरी तरह क्रिकेटिंग कारणों से होगा, तो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। दूसरी ओर, राजनीतिक और कारोबारी समीकरण भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। नीलामी के दिन यह साफ हो जाएगा कि शैडो बैन की चर्चा महज अटकल थी या उसमें कुछ सच्चाई थी।

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