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Sunday, July 19, 2026
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लालू, केजरीवाल, सोरेन के बाद अगला नंबर किसका? रडार पर ममता क्यों

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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी से टकराव भारतीय राजनीति में नया नहीं है। बीते वर्षों में लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे मुख्यमंत्री इस टकराव के चलते गिरफ्तारी और जेल तक जा चुके है। अब इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि क्या ममता भी उसी राह पर बढ़ रही हैं? दरअसल ममता बनर्जी ने 2011 में वामपंथियों के 35 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की और 2021 में लगातार तीसरी बार बंगाल में जीत दर्ज की। भाजपा तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें सत्ता से हटा नहीं सकी। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और भाजपा बंगाल में सत्ता पाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बंगाल दौरे इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इसतरह के माहौल में ममता का केंद्रीय एजेंसियों से खुला टकराव उन्हें राजनीतिक और कानूनी संकट में डालता दिख रहा है। इतिहास बताता है कि सीबीआई-ईडी से पंगा लेने का अंजाम क्या हो सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव पर पशुपालन घोटाले का आरोप लगा था। लेकिन समर्थकों के विरोध और राजनीतिक दबाव के बावजूद सीबीआई ने 1997 में लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। लेकिन गिरफ्तारी से पहले उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन सजा से नहीं बच सके। यह आजादी के बाद पहली बार था जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। वहीं हाल के सालों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में ईडी के नोटिसों को नजरअंदाज किया। नौ नोटिसों की अवहेलना के बाद मार्च 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वे मुख्यमंत्री रहते गिरफ्तार होने वाले भारत के इतिहास में पहले नेता बने। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया। करीब छह महीने तक उन्होंने जेल से सरकार चलाई, फिर मजबूर होकर उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। ईडी से टकराव केजरीवाल पर भी भारी पड़ा।  केजरीवाल के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। कई नोटिसों के बावजूद उन्होंने ईडी के सामने पेश होने से बचने की कोशिश की। अंततः जनवरी 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा देकर चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया। जमानत के बाद हेमंत फिर सत्ता में लौट आए, लेकिन वे भी ईडी से बच नहीं सके। अब ममता बनर्जी का मामला सामने है। हाल के महीनों में ईडी ने कोयला घोटाले से जुड़े मामले में आई-पैक से संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की। आरोप है कि ममता खुद वहां पहुंचीं, ईडी की कार्रवाई में बाधा डालकर दस्तावेज व मोबाइल अपने साथ ले गईं। जांच एजेंसी ईडी ने गंभीर मामला बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत की शुरुआती टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वह इस व्यवहार से नाराज है। पहले फरवरी 2019 में सीबीआई कोलकाता के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर सीबीआई के अधिकारी पूछताछ के लिए गए तो उन्हें न सिर्फ रोकने की कोशिश हुई थी, बल्कि राज्य पुलिस ने सीबीआई टीम को गिरफ्तार भी कर लिया था। ममता तब भी वहां पहुंची थीं। रात भर सीबीआई की इस गतिवधि के खिलाफ वहां उन्होंने धरना दिया। वहीं पर कैबिनेट बैठक भी की थी। ममता ने वर्ष 2018 में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।  इन घटनाओं ने यह आशंका बढ़ा दी है कि क्या ममता बनर्जी भी लालू, केजरीवाल और हेमंत सोरेन की तरह केंद्रीय एजेंसियों से टकराव के चलते कानूनी संकट में फंस सकती हैं। अंतिम फैसला अदालतों का होगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि सीबीआई-ईडी से सीधी टक्कर अक्सर नेताओं को भारी पड़ती है।

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News Desk

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