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Sunday, July 19, 2026
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भारत-जापान के बीच बड़ा समझौता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर सहमति

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नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के लिए सासमोस एचईटी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बीईएल के अनुसार इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सिस्टम इंटीग्रेशन और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगी। इसका उद्देश्य रक्षा उपकरणों के महत्वपूर्ण पुर्जों का देश में ही निर्माण बढ़ाना, घरेलू उत्पादन को मजबूत करना और निर्यात को बढ़ावा देना है। इस साझेदारी के तहत फाइबर ऑप्टिक सिस्टम, एवियोनिक्स, मिशन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस स्तर के इंटरकनेक्ट समाधान जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा। 
 
सेमीकंडक्टर-एआई क्षेत्र में सहयोग करेंगे भारत-जापान

भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शुक्रवार को जापानी प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार सदामासा ओए के साथ रक्षा तकनीक और आर्थिक सुरक्षा के स्तंभों को और अधिक सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस मुलाकात के दौरान हुई बातचीत का मुख्य केंद्र भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल रहा, जिसकी नींव 2025 में रखी गई थी। इस पहल के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्युटिकल्स और क्लीन एनर्जी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इस सहयोग का उद्देश्य न केवल तकनीक साझा करना है, बल्कि आपूर्ति शृंखला को लचीला बनाना और बाजार विविधीकरण को बढ़ावा देना भी है। दोनों पक्षों ने भारत-जापान एआई सहयोग पहल (जेएआई) और बैटरी आपूर्ति शृंखला के विकास पर भी सहमति जताई। यह कदम एक सुरक्षित और भरोसेमंद एआई इकोसिस्टम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। ब्यूरो

पीएम मोदी के संयुक्त विजन का हिस्सा

दरअसल, द्विपक्षीय संबंधों की यह सक्रियता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली जापान यात्रा के दौरान तय किए गए अगले दशक के संयुक्त विजन का हिस्सा है। इसी क्रम में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के नेतृत्व में एक संसदीय दल ने भी जापानी विदेश राज्य मंत्री कुनिमित्सु अयानो से भेंट की, जहां दोनों देशों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठकें दर्शाती हैं कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की एकजुटता वैश्विक स्थिरता के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

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