बड़ी फिल्मों की वजह से ‘आगरा’ के शो घटे, टीम ने जताया विरोध, मनोज बाजपेयी भी आए साथ

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मुंबई: हर शुक्रवार की तरह इस बार भी कई फिल्में रिलीज हुई हैं। इन फिल्मों में एक नाम कनु बहल की फिल्म ‘आगरा’ का भी शामिल है। साल 2023 में कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई इस फिल्म को काफी सराहना भी मिली थी। अब 14 नवंबर को यह फिल्म भारत में रिलीज हुई है। यह एक स्वतंत्र फिल्ममेकर की फिल्म है, नतीजा फिल्म का उतना शोर-शराबा नहीं है। लेकिन अब फिल्म के निर्देशक कनु बहल ने ‘आगरा’ को पर्याप्त स्क्रीन न मिलने की बात कहते हुए बड़ी मल्टीप्लेक्स सिनेमा चेन्स पर तंज कसा है। इसके पीछे उन्होंने कथित बड़ी फिल्मों को कारण बताया है। अब दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कनु की इन बातों का समर्थन किया है।

कनु बहल ने ट्वीट कर जताई नाराजगी
निर्माता कनु बहल ने फिल्म ‘आगरा’ की रिलीज को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में कनु ने ‘आगरा’ पर अपडेट देते हुए लिखा, ‘हमें तथाकथित ‘बड़ी ब्लॉकबस्टर’ फिल्मों और छोटी फिल्मों के मल्टीप्लेक्स चेन प्रोग्रामिंग में फिट न होने के कारण शो देने से मना किया जा रहा है। अब यह आप दर्शकों पर निर्भर है। बोलिए और चेन को टैग कीजिए। कहिए कि आप फिल्म देखना चाहते हैं।’ अपने इस ट्वीट में कनु ने किसी फिल्म का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उनका इशारा उन कथित बड़े स्टार्स और बड़े बजट वाली कमर्शियल फिल्मों की ओर ही है। इस हफ्ते भी रिलीज हुई फिल्मों में अजय देवगन और आर माधवन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ इसी तरह की बड़े बजट और बड़ी स्टार वाली फिल्म है।

मनोज बाजपेयी ने किया समर्थन
कनु बहल की इन बातों का मनोज बाजपेयी ने समर्थ किया है। मनोज बाजपेयी ने कनु बहल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए एक्स पर लिखा, ‘इस लड़ाई को लड़ते हुए बहुत समय हो गया है। इंडी निर्माताओं और उनकी कला को अक्सर व्यापक सिनेमा जगत में नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगे रहो, कानू तुम्हारा प्रयास सचमुच मायने रखता है। सभी को आगे आकर छोटे और सार्थक सिनेमा का समर्थन करना चाहिए और अपने सिनेमाघरों से इन फिल्मों को उचित मौका देने का अनुरोध करना चाहिए।’

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कार्डी बी के घर गूंजी किलकारियां, स्टीफन डिग्स के साथ मनाया खुशियों का पल

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मुंबई: कार्डी बी ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया है, जिसमें संगीत, प्यार और अब परिवार में एक नन्हा मेहमान भी शामिल हो गया है। 33 साल की रैपर कार्डी बी चार बच्चों की मां बन गई हैं। उन्होंने अपने चौथे बच्चे, एक बेटे, को जन्म दिया है, जिसकी पुष्टि उनके प्रतिनिधि ने की। प्रतिनिधि ने बताया कि कार्डी स्वस्थ और खुश हैं। यह बच्चा उनके प्रेमी, एनएफएल स्टार स्टीफन डिग्स के साथ उनका पहला बच्चा है।

कार्डी बी ने शेयर किया वीडियो
कार्डी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर इस खुशखबरी की घोषणा की, जिसमें वह अपने नए एल्बम ‘एम आई द ड्रामा?’ के गाने ‘हैलो’ पर लिप-सिंक कर रही थीं। उन्होंने कैप्शन में लिखा कि यह नया दौर उनके लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन बहुत खास रहा। इसने उन्हें नया संगीत, नया एल्बम और अब एक नया बच्चा। कार्डी ने कहा कि यह सब उन्हें अपने बच्चों के लिए बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि अब वह खुद को और मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही हैं। वह टूर की तैयारी कर रही हैं, अपने शरीर और दिमाग को संतुलित कर रही हैं और पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। कार्डी ने कहा, ‘मैंने सीखा है, मैं ठीक हूं, और मैं उस महिला से प्यार करती हूं, जो मैं बन गई हूं।’

चार बच्चों की मां बन चुकी हैं कार्डी बी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्डी और डिग्स ने 2024 के आखिर में डेटिंग की अफवाहों को हवा दी और मई 2025 में सेल्टिक्स बनाम निक्स गेम में पहली बार एक साथ नजर आए। कार्डी ने गर्भावस्था को निजी रखा, क्योंकि वह इसे अपने समय पर साझा करना चाहती थीं। आखिर में, कार्डी ने कहा, ‘अब आप सब जान गए हैं, तो जाइए मेरे एल्बम को सपोर्ट करो। मैं अब चार बच्चों की मां हूं।’

कौन हैं कार्डी बी
कार्डी बी एक अमेरिकी रैपर, गीतकार और टेलीविजन व्यक्तित्व हैं, जिनका असली नाम बेल्कलिस मार्लेनिस अल्मांजर है। वे न्यूयॉर्क शहर में पैदा हुई और वहीं पली-बढ़ी हैं। वह अपनी बेबाक सार्वजनिक छवि, संगीत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए जानी जाती हैं। वह शुरुआत में वाइन (Vine) और इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट्स के कारण एक इंटरनेट सेलिब्रिटी बनीं। इसके बाद उन्होंने संगीत की दुनिया में पहचान बनाई।

हटा देंगे साले को…. CM मोहन यादव ने किसके लिए कही ये बात? कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिल गया मुद्दा

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भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में सरपंच महासम्मेलन (Sarpanch General Conference) का आयोजन हुआ, जिसे संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने ऐसा कुछ कह दिया कि जो ना केवल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि उसने विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) को भी बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। अपने संबोधन के दौरान सीएम ने सचिव और सहायक सचिवों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘कोई सचिव अगर काम नहीं करके दे रहा तो हटा देंगे साले को, चिंता क्यों कर रहे हो। जहां कोई तकलीफ देगा तो हटा देंगे। सचिव है, सहायक सचिव है, इनकी क्या औकात।’

मुख्यमंत्री ने आगे बोलते हुए कहा, ‘देखो अगर लगता है कि सरपंच के मामले में कोई दिक्कत आ रही, सरकार ने निर्णय लिया है, तो उसको ठीक करने का काम हमारा है। ये कोई चिंता की बात थोड़ी है। ताली-वाली बजाकर बताओ, अगर मैं आपके हित की बात कर रहा हूं तो।’

कांग्रेस ने लगाया पद की गरिमा गिराने का आरोप
सीएम यादव की इस भाषाशैली की आलोचना करते हुए प्रदेश कांग्रेस ने अपने एक्स अकाउंट पर इसका वीडियो भी शेयर किया और इसके साथ उसने लिखा, ‘हां, मोहन बाबू आपके राज में माफियाओं के अलावा और किसी की #औकात भी क्या है! गिरती भाषा और हल्के शब्दों का प्रयोग कर अपने पद की गरिमा को और कितना गिराएंगे मुख्यमंत्री जी!’

सरपंच करा सकेंगे 25 लाख रुपए तक का काम
सरपंच महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रुपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। साथ ही इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय‍ निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा।’

सीएम बोले- पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता
सीएम यादव ने सरपंचों की महत्ता बताते हुए कहा कि जो काम सरपंच कर सकता है, वो कोई नहीं कर सकता। जमीन पर काम सरपंच करता है, इसलिए पंचायतों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘प्रदेश सरकार हर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के साथ शांति धाम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। पंचायतों के माध्यम से रोजगार आधारित उद्योगों की स्थापना कर ग्राम स्वावलंबन को भी सशक्त बनाया जा रहा है।’

मुख्यमंत्री बोले- सरपंचों की मदद से ग्राम विकास का कारवां चल रहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है।’

मध्य प्रदेश में लंपी वायरस का अटैक, मवेशियों के लिए कितना खतरनाक है ये वायरस

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शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल में इन दिनों लंपी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. जगह-जगह आपको ऐसे मवेशी देखने को मिल जाएंगे, जो लंपी वायरस से प्रभावित हैं. लंपी वायरस इतना खतरनाक है कि ये मवेशियों को परेशान कर देता है, या यूं कहें की अगर ये अपने पूरे शबाब पर आ जाए, तो मवेशी दर्द से तड़पते हैं, क्योंकि ये पूरे शरीर में गांठे बना देता है. वो गांठ आगे चलकर घाव का रूप ले लेती है. मवेशी खाना छोड़ देते हैं. अब आप समझ सकते हैं कि जिन भी मवेशियों में ये वायरस होता है, उनके लिए कितना खतरनाक होता होगा.

लंपी वायरस का अटैक

शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर खम्हरिया कला ग्राम पंचायत के रहने वाले राजेंद्र गौतम अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से एक हैं, किसान और पशुपालक भी हैं. वो बताते हैं कि “पिछले कुछ दिनों से उनके पशुओं में लंपी वायरस का अटैक हुआ है. जिसमें उनकी एक छोटी बछिया काल के गाल में समा भी गई है. शुरुआत में तो वो इस वायरस के बारे में नहीं समझ पाए, लेकिन फिर जब उनके तीन और गौवंश में इस वायरस का अटैक हुआ था, तो उन्होंने तुरंत ही समय पर डॉक्टर से संपर्क किया. अपने मवेशियों का इलाज कराया, तो वो जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो गई.

इसके अलावा उन्होंने अपने मवेशियों को लंपी वायरस की वैक्सीन भी लगवाई है. राजेंद्र गौतम बताते हैं कि इस क्षेत्र के अधिकतर गांव के घरों के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. 3 साल पहले भी इस गांव में गौवंश में लंपी वायरस का अटैक हुआ था. ये इतना खतरनाक है कि अगर एक-दो मवेशियों में वायरस हुआ, तो धीरे-धीरे कई मवेशियों में ये फैल जाता है. राजेंद्र ने बताया कि इस वायरस के अटैक के बाद मवेशी चारा खाना छोड़ देता है. उसको बुखार हो जाता है, शरीर में फफोले टाइप में पड़ने लगते हैं.

गठानें बनने लगती है, जिसे फोड़ा भी कह सकते हैं. उसके अंदर मवाद भर जाता है. अगर उसका सही समय पर इलाज नहीं हुआ, तो वो फूटता भी है. शरीर में एक दो फोड़े हो तो बात अलग है, पूरे शरीर में अनगिनत फोड़े पड़ जाते हैं. तब आप समझ सकते हैं कि मवेशी को कितना कष्ट होता होगा. शहडोल के ऐसे कई गांवों और शहरी मुख्यालय के मवेशियों में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिला है. कई मवेशी इस वायरस से उबर भी चुके हैं और वे स्वस्थ हैं, लेकिन शरीर में जो गठान बने, फिर घाव बना, उसके निशान अब भी उनके शरीर पर दिखते हैं.

लंपी वायरस का शहडोल में कितना असर

मध्य प्रदेश के अंतिम छोर में बसा शहडोल संभाग, यह छत्तीसगढ़ से लगा हुआ इलाका है. इन दिनों शहडोल संभाग में लम्पी वायरस का अटैक देखने को मिल रहा है. शहडोल पशुपालन विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह बताते हैं की “लम्पी वायरस शहडोल में सितंबर और अक्टूबर में इसके ज्यादा केस देखने को मिल रहे थे, हालांकि नवंबर में कंट्रोल हो गया है. ये वायरस मवेशियों को तोड़ कर रख देता है, क्योंकि ये एक लम्पी स्किन डिजीज है.

लंपी वायरस के लक्षण और इलाज

लंबी वायरस के लक्षणों की बात करें तो पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉक्टर अशोक सिंह बताते हैं की लम्पी वायरस एक विषाणु जनित स्किन डिजीज है. इसमें त्वचा में गांठे बन जाती है और गोवंश में ये ज्यादातर होती है. मुंह से लार गिरने लगता है, फीवर आता है. पशु चारा खाना बंद कर देता है, ये प्रारंभिक लक्षण है. इसी दौरान अगर उपचार कर दिया जाए तो पशु जल्द ही स्वस्थ भी हो जाता है और कोई भी मृत्यु नहीं होती है.

इसका बहुत सस्ता इलाज है. इसमें एंटीबायोटिक और फीवर के लिए कुछ दवाइयां दी जाती है. जिससे पशु तीन से पांच दिन में जल्द स्वस्थ हो जाता है. इसमें खतरनाक ये होता है कि जब त्वचा में जो गांठे होती हैं, अगर ज्यादा संक्रामक हो गया, समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह गाठें फूटने लग जाती हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर तत्काल इलाज शुरू हो जाए, तो गांठे बिल्कुल दब जाती हैं.

लंपी कैसे फैलता है, क्या हैं बचाव के तरीके

अब सवाल उठता है की लम्पी वायरस फैलता कैसे है, क्योंकि ये वायरस है, तो आप समझ सकते हैं की ये एयर के माध्यम से भी फैलता है. एक संक्रामक पशु से दूसरे पशु के संपर्क में आने पर ये फैलता है. मच्छर से भी फैलता है, पशुओं में जो खून चूसने वाला कीड़ा होता है, जिसे किलनी भी कहा जाता है, उसके माध्यम से भी फैलता है. मुख्य रूप से ये वायरस जनित बीमारी है, तो इसमें कोशिश करना चाहिए कि जब भी आपका पशु बीमार हो या उसमें कोई लक्षण दिखे तो उसे अन्य पशुओं से गौशाला से अलग रखें. इस वायरस के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत ही इलाज करवाएं. जिससे ये गंभीर बीमारी ज्यादा गंभीर होने से पहले ही पशु आपका स्वस्थ हो जाए.

लंपी वायरस होने पर क्या करें ?

अगर आपका मवेशी को लम्पी वायरस होता है तो फिर क्या करें? पशुपालन विभाग के उपसंचालक बताते हैं कि पहले तो लम्पी वायरस होने का इंतजार ना करें. अगर आपके पास मवेशी हैं, तो लम्पी वायरस का पर्याप्त मात्रा में टीकाकरण उपलब्ध है. अभी तक हम 1 लाख के करीब टीकाकरण कर चुके हैं. टीकाकरण करवाएं. इसके अलावा अगर लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत ही हमारे नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें. पशुपालन उप संचालक कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि इसका निशुल्क उपचार किया जाता है. निशुल्क टीकाकरण किया जाता है. इसमें मृत्यु दर भी बहुत कम है.

 

 

किस वायरस के कारण होता है

एक्सपर्ट बताते हैं लम्पी वायरस जिसे गांठदार त्वचा रोग लम्पी स्किन डिजीज भी कहते हैं, ये पॉक्सविरिडे फैमिली के एक वायरस के कारण होता है. इसे नीथलिंग वायरस भी कहा जाता है. ये रोग त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली पर बुखार, लिंफ नोड्स, और कई नोड्यूल्स के रूप में हो सकता है.

सबसे पहले कहां मिला लम्पी वायरस

लम्पी वायरस जिसे लम्पी पॉक्स भी कहा जाता है. ये त्वचा जनित रोग है, जो गोवंश में ही फैलता है. इसमें चिकन पॉक्स की तरह गोवंश के शरीर में दाने आ जाते हैं. सबसे पहले ये वायरस 1929 में जांबिया में एक महामारी के रूप में पाया गया था, इंडिया में साल 2019 ओडिशा में इस वायरस का पहला केस मिला था.

बच्चों की दुनिया पर बनी फिल्मों का कमाल, ‘तारे ज़मीन पर’ और ‘चिल्लर पार्टी’ समेत कई हुईं अवॉर्डेड

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मुंबई: भारत में हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। यह इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती है। नेहरू जी बच्चों से प्यार करते थे और मानते थे कि बच्चे कल के भारत के निर्माता हैं। भारतीय सिनेमा ने बच्चों पर आधारित कई फिल्में बनाई हैं। इन में से कुछ ने अवॉर्ड जीते हैं। आइए इन फिल्मों के बारे में जान लेते हैं।

सुमी (2020)
यह मराठी भाषा की फिल्म है। इसमें एक ऐसी लड़की की कहानी दिखाई गई है जो गरीब है और पढ़ना चाहती है। उसका स्कूल बहुत दूर है इसलिए वह एक साइकिल लेना चाहती है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म और सबसे अच्छी अदाकारी के लिए इसे 68वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया। 

कस्तूरी (2019)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो अपने पिता की साफ-सफाई में मदद करता है। फिल्म में शिक्षा के लिए संघर्ष और जातिगत भेदभाव को दिखाया गया है। इस फिल्म को बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए 67वां नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया।

धनक (2016)
इस फिल्म में भाई-बहन के रिश्ते को दिखाया गया है। बड़ी बहन अपने छोटे भाई, जो कि नेत्रहीन है उसकी मदद के लिए शाहरुख खान से मिलना चाहती है। उसे लगता है कि वह उनकी मदद कर सकते हैं। फिल्म को 64वां नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।

बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन (2015)
यह फिल्म दुनिया के सबसे कम उम्र के मैराथन धावक बुधिया सिंह की सच्ची कहानी पर आधारित है। फिल्म में बुधिया और उसके कोच, बिरंची दास, के रिश्तों को दिखाया गया है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए इसे 63वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।

काका मुत्तई (2014)
यह तमिल फिल्म है, जिसमें झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की कहानी दिखाई गई है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे छोटी जगहों के बच्चे सपने देखने लगते हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश करते हैं। फिल्म को बेहतरीन फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

एलिजाबेथ एकादशी (2014)
मराठी भाषा की इस फिल्म को भी काफी सराहना मिली थी। बच्चों पर आधारित इस फिल्म में दिखाया गया है कि गरीबी की वजह से अगर किसी चीज को बेचना पड़ता है, तो बच्चों पर इसका क्या असर पड़ता है। इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।

कफल (2013)
बच्चों पर आधारित यह फिल्म उत्तराखंड के एक गांव की कहानी बताती है। इसमें पलायन और पिता-पुत्र के रिश्ते को दिखाया गया है। बतुल मुख्तियार के निर्देशन में बनी इस फिल्म को 62वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया। 

देख इंडियन सर्कस (2012)
बच्चों पर आधारित इस फिल्म में ग्रामीण भारत की कहानी दिखाई गई है। इसमें एक परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए संघर्ष करता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और तनिष्ठा चटर्जी ने इसमें अहम किरदार निभाया है। इसे 60वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।

चिल्लर पार्टी (2011)
‘चिल्लर पार्टी’ बच्चों पर आधारित कॉमेडी फिल्म है। इसमें दिखाया गया है कि बच्चे आपस में मिलकर योजना बना सकते हैं और एक मकसद के लिए काम कर सकते हैं। फिल्म को सबसे अच्छी फिल्म के लिए 59वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया। फिल्म को नौ बाल कलाकारों के लिए भी खास पुरस्कार भी मिला।

तारे जमीन पर (2007)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो डिस्लेक्सिया से पीड़ित होता है। उसके प्रति उसके पिता का व्यवहार काफी सख्त होता है। इसमें आमिर खान ने अहम किरदार निभाया है। फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।

पति ने तलाक मांगने की हैरान करने वाली वजह बताई, कहा- पत्नी घर में कुत्ते ले आई

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अहमदाबाद: देश में आज के समय में तलाक (Divorce) का मामला बिल्कुल आम सा हो गया है. हालांकि कुछ तलाक के मामले देशभर में चर्चा का विषय बने रहते हैं. इन दिनों गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) का एक मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां एक पति (Husband) ने पत्नी (Wife) पर क्रूरता का आरोप (Alleging Cruelty) लगाते हुए तलाक मांगा है. पति का कहना है कि पत्नी घर में आवारा कुत्ते (Dog) लाती थी और उसे अपमानित करने के लिए एक शरारती कॉल करती थी. इसी का हवाला देते हुए उसने कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई है.

फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पति ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की है. मामला आवारा कुत्तों, सार्वजनिक अपमान और पति के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ा है. यही वजह है कि इसकी चर्चा हो रही है. पति ने तलाक लेने के पीछे एक और वजह बताई है, उसने कहा कि तनाव से मेरी शारीरिक क्षमताएं कमजोर पड़ गईं .

पति की अपील के अनुसार, इस जोड़े की शादी 2006 में हुई थी और उसकी मुसीबतें तब शुरू हुई जब उसकी पत्नी एक ऐसे सोसाइटी में रहते हुए अपने फ्लैट में एक आवारा कुत्ता ले आई. जहां कुत्तों को पालतू जानवर के रूप में रखना प्रतिबंधित था. फिर वह और भी आवारा कुत्ते ले आई, उससे खाना बनाने, सफाई करने और उनकी देखभाल करने को कहा गया. उसने कहा कि एक कुत्ते ने उसे काट लिया जब उसने उनके बिस्तर पर सोने की ज़िद की.

पति के मुताबिक, कुत्तों की बढ़ती संख्या से पड़ोसी उनके खिलाफ हो गए, जिसके बाद 2008 में पुलिस शिकायत दर्ज हुई. उसने यह भी कहा कि पत्नी के एनिमल राइट्स ग्रुप से जुड़ने के बाद, उसने बार-बार दूसरों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की. पति पर थाने आने के लिए दबाव बनाया और मना करने पर गाली-गलौज कर उसका अपमान किया.

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कतर में सलमान खान का धमाकेदार जलवा, दबंग टूर में फैंस ने किया ग्रैंड वेलकम

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मुंबई: सलमान खान की फैन फॉलोइंग देश ही नहीं विदेशों में भी अच्छी-खासी है। वह जहां जाते हैं, फैंस की भीड़ उन्हें देखने के लिए जमा हो जाती है। हाल ही में सलमान खान कतर पहुंचे। वह अपने दबंग टूर के लिए कतर गए हैं। कतर पहुंचने पर फैंस ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। साथ ही भाईजान ने भी अपने फैंस को निराश नहीं किया, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके अलग अंदाज ने सबका दिल जीत लिया। 

हाथों में भारत का झड़ा और फूल लिए नजर आए फैंस
वायरल वीडियो में सलमान खान जब फैंस के बीच पहुंचे तो उनका शानदार स्वागत हुआ। कई फैंस के साथ हाथ में भारत का झड़ा था। साथ ही कई लोगों ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता भी दिया। सलमान खान भी इस स्वागत से काफी खुश नजर आए। इस पूरे इवेंट में उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं दिखी। हर पल  बॉडीगार्ड शेरा साथ में नजर आया। 

सलमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाया गाना 
बाद में दबंग टूर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें सिंगर स्टेबिन बेन ने गाया गया। उन्होंने सलमान की एक फिल्म का गाना ‘ओ जाने जाना’ गाया। सलमान भी सिंगर के साथ गाना गाते नजर आए। वह बहुत मगन होकर गाना गा रहे थे। सोशल मीडिया यूजर्स को भाईजान का यह अंदाज काफी पसंद आया। 
 
तैयारियों की फोटो भी शेयर की
सलमान खान ने दबंग टूर की तैयारियों से जुड़ी एक तस्वीर भी शेयर की। वह स्ट्रेचिंग करते हुए नजर आए। स्टेज परफाॅर्मेंस की तैयारी वह कर रहे हैं। सलमान खान के करियर फ्रंट की बात करें तो वह एक फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवां’ कर रहे हैं। इसमें आर्मी ऑफिसर का रोल करेंगे। 

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सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों पर नतीजों का ऐलान आज 

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नई दिल्ली। देश के सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आठ विधानसभा सीटों पर मंगलवार (11 नवंबर) को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। अब 14 नवंबर (शुक्रवार) को इन चुनावों के नतीजे घोषित होने है। जिन सीटों पर मतदान हुआ उसमें जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नगरोटा, झारखंड की घाटशिला, पंजाब की तरनतारन, राजस्थान की अंता, तेलंगाना की जुबली हिल्स, मिजोरम की डम्पा और ओडिशा की नुआपाड़ा विधानसभा सीट शामिल हैं। 
सीएम अब्दुल्ला ने बडगाम और गांदेरबल दो सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने बडगाम सीट से इस्तीफा दे दिया, इसके बाद सीट पर अब उपचुनाव कराया गया है। वहीं, नगरोटा सीट बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के कारण खाली हुई थी। 
राजस्थान की अंता सीट पर उपचुनाव इसलिए हुए हैं, क्योंकि बीजेपी नेता कंवर लाल मीणा को 2005 के एक पुराने मामले में दोषी ठहराने के बाद अयोग्य घोषित किया था। वहीं झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव हुआ था। सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएएम) के उम्मीदवार सोमेश सोरेन, जो पूर्व विधायक सोरेन के बेटे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के बीच सीधी टक्कर है। हैदराबाद की जुबली हिल्स विधानसभा सीट पर कांग्रेस, बीआरएस और बीजेपी के बीच महामुकाबला है। 

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी को झटका, AIU ने रद्द की सदस्यता, दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा है लिंक

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नई दिल्ली: दिल्ली में सोमवार शाम लाल किले के पास कार में धमाका हुआ था. इस घटना में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया है. अब खबर है कि इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी गई है. एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी है. इसके पीछे का कारण यूनिवर्सिटी की स्थिति अच्छी नहीं होना बताया गया है.

एआईयू ने बयान जारी कर कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संज्ञान में आया है कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थिति सही नहीं है. ऐसे में अल-फलाह यूनिवर्सिटी को दी गई एआईयू की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती है. यह सूचित किया जाता है कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब किसी भी गतिविधि में एआईयू का नाम और लोगो का इस्तेमाल नहीं कर सकता. एआईयू का लोगो भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट से हटाना होगा.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के धौज ग्राम में 70 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है. यह एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. इसकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा यह यूनिवर्सिटी संचालित होता है. इसकी वीसी का डॉ. भूपिंदर कौर आनंद हैं, जो एक एमबीबीएस डॉक्टर हैं. वहीं अल-फलाह यूनिवर्सिटी के रजिस्टार प्रो. मो. परवेज हैं.

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News Desk

माधवन ने अजय को दिया कड़ी टक्कर, लेकिन कहानी बीच में लड़खड़ाई; रकुल बनीं कमजोर पक्ष

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मुंबई: अजय देवगन दो नंबर के हीरो बन गए हैं। दरअसल, ऐसा उनकी फिल्मोग्राफी देखकर कहना पड़ रहा है। ‘रेड 2’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ के बाद अब अजय देवगन ‘दे दे प्यार दे 2’ लेकर आए हैं। ये साल 2019 में आई ‘दे दे प्यार दे’ का सीक्वल है। अब छह साल बाद आए सीक्वल में कुछ नए कलाकारों को जोड़ा गया है और फिल्म को पहली फिल्म से थोड़े बड़े स्तर पर बनाने का प्रयास किया गया है। लेकिन क्या इस प्रयास में मेकर्स सफल हुए हैं और क्या ‘दे दे प्यार दे 2’ अपनी पहली फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ से बेहतर है या नहीं? कैसी है यह फिल्म, जानने के लिए पढ़िए यह रिव्यू…

कहानी
फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर ‘दे दे प्यार दे’ खत्म हुई थी। आयशा (रकुल प्रीत सिंह) आशीष (अजय देवगन) के परिवार से मिल चुकी है। अब बारी है आशीष के आयशा के परिवार से मिलने की। आयशा की फैमिली चंडीगढ़ में रहती है। आयशा के परिवार में उसके पिता (आर माधवन), मां (गौतमी कपूर), भाभी (इशिता दत्ता) और भाई (तरुन गहलोत) हैं। आयशा की भाभी प्रेग्नेंट हैं और घर में इसको लेकर सब उत्साहित हैं। इस बीच आयशा अपनी फैमिली से आशीष को मिलवाना चाहती है। अब 28 साल की आयशा 52 साल के अपने बॉयफ्रेंड आशीष से कैसे अपने परिवार को मिलाती है? आशीष की उम्र और उसके बारे में जानने के बाद उसकी फैमिली क्या रिएक्शन देती है? क्या वो आशीष को स्वीकार करते हैं या फिर नहीं? यही फिल्म की कहानी है, जो आपको 2 घंटा 26 मिनट की फिल्म देखने पर पता चलेगी।

कैसी है फिल्म
फिल्म की कहानी कहीं न कहीं काफी प्रेडेक्टिबल है। क्योंकि सबको ही पता है कि अंत में कहानी में क्या होना है। फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहतर है। ये आपको पूरे टाइम हंसाता रहेगा और एक अच्छी रोमांटिक-कॉमेडी होने का भरोसा देगा। लेकिन जैसी ही फर्स्ट हाफ खत्म होता और सेकंड हाफ आगे बढ़ता है। आपका भरोसा टूटने लगता है। मेकर्स सेकंड हाफ में जबरन इमोशन घुसेड़ने के चक्कर में असल कहानी से भटक गए। जो कहानी आपको हंसाने से शुरू होती है, वो दूसरे हाफ में आपको थोड़ा उबाने लगती है। आप स्क्रीन से इतर इधर-उधर देखने लगते हैं और सोचते हैं कि अब फिल्म खत्म हो। फिल्म थोड़ी खिंची-खिंची सी लगती है। लेकिन आर माधवन की एक्टिंग आपको फिल्म से बांधे रखती है और लास्ट के 15 मिनट एक बार फिर आपको हंसाते हुए थिएटर से विदा करते हैं। हां, अगर मुकाबला ‘दे दे प्यार दे’ से किया जाए, तो वो इस दूसरे पार्ट से बेहतर है।

एक्टिंग
एक्टिंग के पहलू को देखने के बाद ये कहने में कोई दोराय नहीं कि आर माधवन अजय देवगन समेत फिल्म की पूरी कास्ट पर भारी पड़े हैं। कॉमेडी से लेकर सख्त पिता और इमोशनल सीन तक में आप उनसे जुड़ पाते हैं और हर इमोशन को फील कर पाते हैं। माधवन ने दिखाया है कि रोल चाहें जैसा भी हो वो अपनी एक्टिंग से उसे जानदार बना देते हैं। यहां पेपर सॉल्ट लुक में वो काफी कूल भी लगे हैं।

अजय देवगन जो फिल्म के लीड एक्टर हैं और कहने को ये उनकी ही फिल्म है। लेकिन पूरी फिल्म में अजय देवगन ने काफी कम डायलॉग्स बोले हैं। वो भी सबसे ज्यादा लास्ट के 15 मिनट में। बाकी पूरी फिल्म में वो सिर्फ एक्सप्रेशन देते नजर आए हैं, जो वो पिछले 34 साल से दे रहे हैं। हां, रोल के हिसाब से अजय देवगन फिल्म में फिट हैं।

फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं रकुल प्रीत सिंह। 2019 में जब ‘दे दे प्यार दे’ आई थी, तब रकुल की खूबसूरती के काफी चर्चे हुए थे और अपने रोल में वो फिट बैठी थीं। लेकिन इस बार जहां रकुल फीमेल लीड में अकेली ही थीं, उन्होंने पूरी तरह निराश किया है। हल्के-फुल्के सीन और मॉडर्न लड़की के रोल में तो वो जंचती हैं। लेकिन जहां बात इमोशनल सीन्स और भारी डायलॉग्स की आती है, वहां रकुल कमजोर पड़ जाती हैं। इमोशनल सीन में वो ओवर एक्टिंग करती दिखती हैं और उनको देखकर आपको हंसी आ जाएगी। कई दमदार डायलॉग्स उनकी फ्लैट डायलॉग डिलीवरी की वजह से फीके पड़ जाते हैं।

अपने डांस स्टेप से सुर्खियां बटोरने वाले मीजान जाफरी की एंट्री ही सेकंड हाफ की शुरुआत में होती है। फिल्म में उन्हें सिर्फ हीरोइन को इंप्रेस करके दिखाना था, वो उन्होंने बखूबी किया है। गिटार बजाना, अपनी बॉडी दिखाना, घुड़सवारी करना, सिर्फ टॉवेल पहनकर नहाना.. मीजान ने सबकुछ किया है। रकुल के साथ उनकी जोड़ी भी जची है और अंत में कॉमेडी सीन में भी उनके एक्सप्रेशन ठीक ही हैं। कुल मिलाकर उन्हें जैसा काम मिला था, उसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

इसके अलावा जावेद जाफरी, गौतमी कपूर और इशिता दत्ता ने अपने-अपने हिस्से का काम ईमानदारी से किया है।

निर्देशन
फिल्म का निर्देशन अंशुल शर्मा ने किया है, एक नए निर्देशक के तौर पर उनका काम ठीक-ठाक ही है। हां, कई मौकों पर आपको ऐसा लगेगा कि सबकुछ काफी जल्दी में करने का प्रयास हुआ। जबकि सेकंड हाफ में एडिटिंग की कैची और चल सकती थी। निर्देशक ने फिल्म में चंडीगढ़ और लंदन की दूरी ही खत्म कर दी है। एक सीन में इंसान लंदन में है और अगले ही पल वो चंडीगढ़ पहुंच जाता है। ऐसा एख नहीं कई मौकों पर होता है। वहीं कुछ एक सीन ऐसे हैं, जहां आपको कनेक्शन उतना बेहतर नही लगता। बाकी निर्देशन का काम ठीक है।

संगीत
‘दे दे प्यार दे’ का संगीत पसंद किया गया था। फिल्म के सैड सॉन्ग ‘चले आना’ से लेकर पार्टी सॉन्ग तक लोगों को याद रहे थे। यहां पर फिल्म के दो गाने एक ‘3 शौक’ और दूसरा ‘झूम बराबर’ ही ऐसे हैं, जो चर्चाओं में भी हैं और पार्टी में बजते भी सुनाई देंगे। हां, इस बार का सैड सॉन्ग आपको याद नहीं रहेगा। जबकि पिता और बेटी के रिश्ते को दिखाता गीत भी कुछ खास प्रभावित नहीं करता।

खूबियां
फिल्म की शुरुआत शानदार है। पहला पार्ट खूब हंसाता है और फनी लगता है। क्लाइमैक्स में एक ट्विस्ट है, जब वो आता है तो बेशक एक बार को आप भी हैरान रह जाते हो। अंत भी बेहतर ढंग से हुआ है। रकुल प्रीत को छोड़कर, बाकी सभी का काम भी अच्छा है।

कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी रकुल प्रीत की एक्टिंग है, जिससे उन्होंने इमोशनल सीन और कई अहम मौकों को बर्बाद किया है। सेकंड हाफ खिंचा-खिंचा सा लगता है, जो कई मौकों पर आपको बोर करता है। एडिटिंग टेबल पर काम हो सकता था।

देखें या न देखें
‘दे दे प्यार दे 2’ की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। ये एक फैमिली एंटरटेनर है। अगर वीकेंड पर आप खाली हैं, तो फिल्म को एंजॉय कर सकते हैं।