मदरहुड ने बदली दीपिका की सोच, बोलीं—अब दिन में सिर्फ 8 घंटे काम ही सही

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मुंबई: अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के आठ घंटे काम की मांग करने के बाद इंडस्ट्री में एक बहस लगातार छिड़ी है। हालांकि, इसके बाद दीपिका के हाथ से ‘स्पिरिट’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल जैसी बड़ी फिल्में भी चली गईं। लेकिन दीपिका अपनी अपनी मांग पर कायम हैं और उन्हें इंडस्ट्री के भी कई लोगों का समर्थन मिला है। दीपिका ने ये फैसला अपनी बेटी दुआ के होने के बाद लिया है।

जरूरत से ज्यादा काम करने को हमने सामान्य बना दिया
दीपिका का कहना है कि नई मांओं को काम पर लौटने के लिए सहयोग की जरूरत होती है। इसी वजह से उन्होंने ऐसा फैसला लिया है। हार्पर बाजार इंडिया के साथ बातचीत में अपने रुख को स्पष्ट करते हुए दीपिका ने कहा कि हमने जरूरत से ज्यादा काम करना सामान्य मान लिया है। हम थकान को प्रतिबद्धता समझने की भूल करते हैं। इंसान के शरीर और दिमाग के लिए दिन में आठ घंटे काम करना काफी है। मैं इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं। सिर्फ स्वस्थ रहने पर ही आप अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं। एक थके हुए व्यक्ति को वापस काम पर लाने से किसी को कोई फायदा नहीं होता। मेरे अपने ऑफिस में हम सोमवार से शुक्रवार तक दिन में आठ घंटे काम करते हैं। हमारे यहां मैटरनिटी और पेटरनिटी को लेकर नीतियां हैं। हमें बच्चों को काम पर लाना सामान्य बनाना चाहिए।

मां बनने के बाद बदलीं प्राथमिकताएं
बातचीत के दौरान अभिनेत्री ने बताया कि कैसे मां बनने के बाद उनकी प्राथमिकता बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि आज मेरे लिए सफलता शारीरिक और इमोशनल रूप से फिट रहना है। समय हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। मैं इसे कैसे खर्च करती हूं, किसके साथ खर्च करती हूं। यह तय करने की आजादी होना ही मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है।

‘किंग’ में शाहरुख के साथ नजर आएंगी दीपिका
वर्कफ्रंट की बात करें तो दीपिका इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग कर रही हैं। इस फिल्म में वो शाहरुख खान के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा उनके पास एटली और अल्लू अर्जुन की आगामी फिल्म ‘AA22xA6’ भी है। यह एक बड़े बजट की फिल्म है। फिल्म को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

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News Desk

बिहार की सियासत में JDU का दावा— सिर्फ नीतीश कुमार ही बनेंगे मुख्यमंत्री

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं, जिसमें एनडीए ने बंपर जीत अपने नाम की है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि सीएम कौन बनेगा? चुनाव के पहले और परिणाम आने के बाद भी चर्चा है सीएम नीतीश कुमार ही बनेंगे लेकिन अभी तक आधिकारिक रूप से किसी के नाम की घोषणा नहीं की गई है. हालांकि (जनता दल यूनाइटेड) जदयू नेता श्याम रजक ने सीएम फेस को लेकर बड़ा बयान दिया है.

फुलवारी विधानसभा सीट से JDU के विजयी उम्मीदवार श्याम रजक ने कहा, “यह बिहार की जनता की जीत है जिसने हमारे नेता नीतीश कुमार पर भरोसा जताया और उनके काम के आधार पर उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाया. हम बिहार के मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हैं. यहां (मुख्यमंत्री पद के लिए) कोई जगह खाली नहीं है. नीतीश कुमार ने अपने काम के दम पर जनता का दिल जीता है.”

सबसे ज्यादा सीटों पर BJP का कब्जा
इस बार के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें भाजपा को मिली हैं. चर्चा यह भी है कि भाजपा अपना सीएम बना सकती है, लेकिन अभी तक बीजेपी हाई कमान ने कोई टिप्पणी नहीं की है. इस बीच जदयू की तरफ से सीएम पद को लेकर बयान आने लगे हैं.

नीतीश कुमार ही बनेंगे सीएम: संतोष सुमन
जदयू ही नहीं, एनडीए के घटक दल हम (HAM) के नेता संतोष सुमन ने भी सीएम पद को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ही सीएम होंगे”. एलजेपी-आर प्रमुख चिराग पासवान भी नीतीश को सीएम के तौर पर देखना चाहते हैं. ऐसे में नीतीश कुमार की 10वीं बार ताजपोशी में कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए. हालांकि भाजपा नेता विनोद तावड़े ने कहा था कि चुनाव परिणाम के बाद हम बैठक करेंगे और तय करेंगे कि बिहार का सीएम कौन होगा. इस बयान के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया था.

BJP को पहली बार मिलीं 89 सीटें
बिहार में भाजपा पहली बार इतनी ज्यादा सीटों के साथ चुनाव जीती है. इस चुनाव में भाजपा को 89 तो वहीं जदयू को 85 सीटें मिली हैं. जबकि पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा सीट पाने वाली आरजेडी सिर्फ 25 सीटों पर आकर टिक गई है. बिहार में भाजपा की इतनी सीट आने के बाद सीएम फेस को लेकर काफी चर्चा हो रही है. बात करें सीएम की दौड़ की तो, नीतीश कुमार के अलावा नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी, राजीव प्रताप रूडी और रेणु देवी का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है.

10वीं बार बनेंगे सीएम
बता दें, नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को 7 दिनों के लिए सीएम बने थे. पहली बार साल 1985 में लोकदल के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे. नीतीश कुमार 2023 में 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं. वे बिहार के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में अगर उन्हें इस बार सीएम बनाया जाएगा, तो नीतीश कुमार 10वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे.

हेजलवुड नहीं खेलेंगे पहला टेस्ट, 11 साल में तीसरी बार हुआ बाहर

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नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जॉश हेजलवुड भी एशेज सीरीज के पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं. हेजलवुड को हैमस्ट्रिंग इंजरी के चलते बाहर होना पड़ा है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज की शुरुआत 21 नवंबर से हो रही है. हेजलवुड के बाहर होने से ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें थोड़ी बढ़ गई हैं, क्योंकि पहले टेस्ट में उनके अलावा पैट कमिंस और शॉन एबट की भी सेवाएं मिलती नहीं दिखेंगी.

ऑस्ट्रेलिया को लगा तीसरा ऐसा झटका
हेजलवुड की तरह पैट कमिंस और शॉन एबट को भी इंजरी के चलते बाहर होना पड़ा है. कमिंस अपनी बैक इंजरी को लेकर पहले एशेज टेस्ट से बाहर हैं तो वहीं शॉन एबट को हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई है. सीधे शब्दों में कहें तो ऑस्ट्रेलिया के तीन पेसर इंजरी की चपेट में आकर एशेज के ओपनर से बाहर हो गए हैं.

हेजलवुड बाहर, इस खिलाड़ी को मौका
हैमस्ट्रिंग इंजरी को लेकर ही हेजलवुड, विक्टोरिया के खिलाफ शेफील्ड शील्ड का मुकाबला भी नहीं खेले थे. उसके बाद अब वो टीम के साथ पर्थ भी नहीं गए, जहां पहला एशेज टेस्ट खेला जाना है. हेजलवुड की जगह टीम में माइकल नेसर को शामिल किया गया है.

ब्रेंडन डोगेट के डेब्यू का बन रहा मौका
इंजरी के चलते ऑस्ट्रेलिया के तीसरे पेसर के बाहर होने से ब्रेंडन डोगेट का पर्थ टेस्ट में डेब्यू होते दिख रहा है. इस बात की संभावना जताई जा रही है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम मिचेल स्टार्क और स्कॉट बोलैंड के साथ तीसरे पेसर के तौर पर ब्रेंडन डोगेट के डेब्यू करा सकती है.

11 साल में तीसरी बार होगा ऐसा
साल 2014 के बाद से ये तीसरी बार होगा जब ऑस्ट्रेलिया की टीम बिना कमिंस और हेजलवुड के घर में कोई टेस्ट खेलती दिखेगी. इससे पहले 2021 में उसने इंग्लैंड के खिलाफ और 2022 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन दो खिलाड़ियों के बगैर घरेलू टेस्ट खेला था. अच्छी बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया को उन दोनों टेस्ट में जीत मिली थी.

स्टाइलिश बैक कवर से हो सकता है बड़ा नुकसान! मोबाइल ब्लास्ट का खतरा, जानिए क्यों जरूरी है सावधानी?”

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Mobile cover impact: आज के डेट में मोबाइल इंसानों के लिए सबसे उपयोगी वस्तुओं में से एक है. बहुत से लोग महंगी-महंगी मोबाइल खरीदते हैं. वहीं भीड़-भाड़ में मोबाइल सबसे अलग और सुंदर दिखे उसके लिए लोग अट्रैक्टिव कवर का इस्तेमाल करते हैं. ये मोबाइल कवर दिखने में स्टाइलिश जरूर होते हैं, लेकिन कई बार ये फोन की गर्मी और बैटरी लाइफ पर बुरा असर डाल देते हैं. जिससे मोबाइल ब्लास्ट होने की संभावना बढ़ जाती है.

मोबाइल कब हीट होता है
बता दें कि मोबाइल में कुछ ऐसे टेक्निकल पार्ट्स इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन्हे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी होता है. जिसमें मोबाइल के अंदर बैटरी, चिपसेट, एंटीना, डिस्प्ले और बहुत से हार्डवेयर पार्ट्स होते हैं. जब मोबाइल कोई हैवी टास्क करता है, तो उसके पार्ट्स जैसे-प्रोसेसर, रैम (RAM), ग्राफिक्स प्रोसेसर, और बैटरी, पूरी क्षमता से काम करते हैं. इसी वजह से मोबाइल से हीट प्रडूस होने लगते हैं.

स्टाइलिश कवर लगाने का इम्पैक्ट
स्मार्टफोन में जो स्टाइलिश कवर इस्तेमाल किए जाते हैं, वो फोन के कूलिंग सिस्टम को रोक सकते हैं. इसके अलावा फोन के होल को भी बंद कर सकते हैं. ज्यादातर लोग अपने मोबाइल को ड्यूरेबिलिटी देने के लिए मोटे और रग्ड कवर का यूज करते हैं. जिसकी वजह से हीट ट्रैप हो जाती है. वहीं हीट ट्रैप होने से बैटरी पर कई निगेटिव इफेक्ट्स पड़ते हैं, जिसमें बैटरी ब्लास्ट हो सकता है.

इन कारणों की वजहों से भी फोन होता है हीट
इसके अलावा अगर मोबाइल ज्यादा हीट करता है, तो इसके कई कारण भी हो सकते है. जैसें-मोबाइल प्रोसेसर पर ज्यादा लोड पड़ना, फास्ट चार्जिंग या लंबे समय तक चार्जिंग पर लगाए रखना, लगातार डेटा ट्रांसफर या प्रोसेस होने की स्थिति में भी मोबाइल गर्म हो जाता है. हाई ब्राइटनेस की वजह से भी मोबाइल का स्क्रीन तेज गर्म हो जाती है. 

हल्के कवर का करें इस्तेमाल
अगर आप चाहते हैं कि आपका स्मार्टफोन हीट न हो और अच्छे से काम करे तो, उसके लिए आपको हल्का कवर का यूज करना चाहिए. इससे आपके फोन की हीट बाहर निकलती रहेगी और मोबाइल का तापमान भी नॉर्मल रहेगा.

राजकुमार राव–पत्रलेखा बने पैरेंट्स, बॉलीवुड सितारों ने यूं लुटाया प्यार

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मुंबई: अभिनेता राजकुमार राव और उनकी पत्नी-एक्ट्रेस पत्रलेखा हाल ही में माता-पिता बन गए हैं। इस जोड़े ने बेबी गर्ल के रूप में अपने पहले बच्चे का स्वागत किया। इस खुशखबरी के आते ही तमाम सितारे उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। फिल्म निर्माता-कोरियोग्राफर फराह खान ने प्यारी तस्वीर साझा करते हुए दोनों को खास अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। इसके अलावा अन्य एक्टर्स भी बधाई संदेश लिख रहे हैं। 

फराह खान ने कहा-  ‘मैं हूं ना’
फिल्म निर्माता-कोरियोग्राफर फराह खान ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें साझा की हैं। ये तस्वीरें पत्रलेखा की बेबी शावर के दौरान की हैं, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार के लोग शामिल हुए। इसमें राजकुमार राव-पत्रलेखा यलो कलर की ड्रेस पहने नजर आ रहे हैं। फराह खान ने कैप्शन में लिखा, ‘दोनों को हार्दिक बधाई। जीवन के इस खूबसूरत चरण का आनंद लें और किसी भी बच्चे से जुड़ी सलाह के लिए याद रखें। मैं हूं ना।’

इन सितारों ने दी बधाई
राजकुमार राव और पत्रलेखा के पोस्ट पर कई सितारे बधाई दे रहे हैं। विक्की कौशल ने लिखा, ‘बधाई हो, इश्वर भला करें।’ कृति सेनन ने कमेंट सेक्शन में कहा- ‘बधाई हो आप दोनों को।’ अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने बोला- ‘शुभकामनाएं।’ इसके अलावा सुनील ग्रोवर ने लिखा, बधाई हो, ‘राजुकमारी आयी हो।’ इन सितारों के अलावा कई यूजर्स ने भी दोनों को बधाइयां और प्यार दिया है।

चार साल बने माता-पिता
राजकुमार राव और पत्रलेखा15 नवंबर 2021 को शादी के बंधन में बंधे थे। यानी को दोनों ने शादी के चार साल बाद अपने पहले बच्चे का स्वागत किया है, जो बेबी गर्ल है। आपको बताते चलें कि दोनों ने लव मैरिज किया था।

प्रशांत किशोर के दावे पर लगी लगाम, राजनीति छोड़ने के सवाल पर जन सुराज का जवाब

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नई दिल्ली। पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपना खाता भी नहीं खोल पाई। शनिवार (15 ननंबर, 2025) को पार्टी की ओर से चुनावी हार पर प्रतिक्रिया आई।

जन सुराज का कहना है कि एनडीए की जीत में महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की गई रकम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा, “हम विधानसभा चुनाव के नतीजों से निराश हैं, लेकिन परेशान नहीं हैं। हालांकि हमें एक भी सीट नहीं मिली है, फिर भी हम सत्तारूढ़ एनडीए का विरोध करते रहेंगे।”

‘राजद की वापसी नहीं चाहते थे बिहार के लोग’
उन्होंने कहा कि पार्टी बिहार में मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने में कामयाब नहीं हो पाई। उदय सिंह ने कहा, “जनादेश यह भी साबित करता है कि लोग राजद की वापसी नहीं चाहते थे।” उन्होंने दावा किया कि बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार की ओर से महिलाओं के खातों में 40,000 करोड़ रुपये के नकद हस्तांतरण ने उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘चुनाव से पहले रिश्वत देने की कोशिश की गई’
जुन सुराज के अध्यक्ष यहां पर बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का जिक्र कर रहे थे, जिसके तहत राज्य की महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए। उन्होंने आरोप लगाया, “यह सरकार की ओर से चुनाव से पहले लोगों को रिश्वत देने की एक कोशिश थी। वोट खरीदे गए। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी नकद लाभ हस्तांतरित किए गए।”

जन सुराज नेता ने कहा, “अब हम यह देखना चाहते हैं कि सरकार राज्य की महिलाओं के खातों में शेष 2 लाख रुपये कैसे हस्तांतरित करती है।”

प्रशांत किशोर के राजनीति छोड़ने पर क्या बोली पार्टी?
यह पूछे जाने पर कि क्या प्रशांत किशोर राजनीति में सक्रिय रहेंगे, जबकि जदयू ने 25 से अधिक सीटें जीती हैं। इसके जवाब में जन सुराज नेता ने कहा, “आपको यह सवाल किशोर से ही पूछना चाहिए।” किशोर ने पहले दावा किया था कि अगर नीतीश कुमार की जदयू 25 से अधिक सीटें जीतती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। विधानसभा चुनाव में जदयू को 85 सीटें मिलीं।

शतक के साथ गुरु के अंदाज को किया गलत साबित

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नई दिल्ली: राइजिंग स्टार्स एशिया कप में वैभव सूर्यवंशी शतक जमाएंगे, इस बात पर तो उनके गुरु को पूरा भरोसा था. उन्होंने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले इसे लेकर TV9 हिंदी से बातचीत में बताया भी था. यहां तक कि उन्होंने अनुमान भी लगाया था कि वैभव सूर्यवंशी कितनी जल्दी शतक लगा देंगे? लेकिन, क्या पता था कि वैभव सूर्यवंशी अपने गुरु के लगाए अनुमान से भी तेज निकलेंगे? उनके आगे गुरु का लगाया कयास भी फेल हो जाएगा. गुरु यानी कोच मनीष ओझा. वैभव जब 8 साल के थे, तभी से मनीष ओझा से क्रिकेट की कोचिंग ले रहे हैं.

वैभव सूर्यवंशी के शतक को लेकर गुरु का अनुमान
राइजिंग स्टार्स एशिया कप के शुरू होने से पहले TV9 हिंदी ने मनीष ओझा से बात की. जब हमने उनसे पूछा कि क्या वो इस टूर्नामेंट में वैभव के बल्ले से शतक देखते हैं? तो उनका जवाब था हां. मगर सिर्फ हामी भरकर ही मनीष ओझा नहीं रुके. उन्होंने अपने भरोसेमंद शिष्य यानी वैभव सूर्यवंशी को लेकर कहा 100 रन क्या, वो 100 से ज्यादा भी बनाएंगे. और, जिस मैच में वो ऐसा करेंगे, उसमें 12 से 13 ओवर तक ये काम कर देंगे.

इंडिया की जर्सी में पहला T20 खेलते हुए छाए वैभव
अपने गुरु और कोच मनीष ओझा की बातों को वैभव सूर्यवंशी ने जैसे सुन ही लिया था, तभी तो उन्होंने बिना इंतजार कराए राइजिंग स्टार्स एशिया कप के पहले ही मैच में शतक जड़ दिया. और, सिर्फ शतक जड़ा नहीं बल्कि अपने कोच की कही कुछ बातों को सच कर दिखाया तो कुछ मामले में उनके लगाए अनुमान भी फेल कर दिए.

वैभव सूर्यवंशी ने UAE के खिलाफ खेले पहले मैच में 15 छक्के और 11 चौके के साथ 42 गेंदों पर 144 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने अपना शतक 32 गेंदों में पूरा किया था. किसी भी लेवल पर इंडिया की जर्सी में वैभव सूर्यवंशी का ये ना सिर्फ पहला T20 मैच था. बल्कि, उसमें लगाया पहला शतक भी था. सीधे शब्दों में कहें तो उन्होंने नीली जर्सी में अपनी डेब्यू T20 इनिंग में ही शतक जड़ा था.

वैभव सूर्यवंशी ने गुरु के लगाए अनुमान को किया फेल
अब ऐसा कर वैभव सूर्यवंशी ने अपने गुरु यानी मनीष ओझा की किन बातों को सच और किस अनुमान को गलत साबित किया, आइए जानते हैं? कोच मनीष ओझा ने जो कहा कि वैभव 100 नहीं 100 से ज्यादा रन मारेंगे, वो बात तो 16 आने सही साबित हुई. लेकिन, 12 से 13 ओवर में वैभव के शतक लगाने को लेकर लगाया उनका अनुमान फेल हो गया. क्योंकि, वैभव सूर्यवंशी गुरु के लगाए अनुमान से भी तेज निकले. उन्होंने 10वें ओवर में ही अपना शतक पूरा कर लिया था.

आदिवासियों के ‘धरती आबा’ जिनकी दहाड़ से अंग्रेज भी खाते थे खौफ, जानिए उनका शौर्य गाथा!

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Birsa Munda 150th Birth Anniversary: 15 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसे महानायक के नाम दर्ज है, जिसने महज़ 25 साल की छोटी उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी. हम बात कर रहे हैं आदिवासियों के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा की, जिनकी आज 150वीं जयंती है.

इस विशेष अवसर पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी गुजरात के नर्मदा जिले में याहामोगी देवमोगरा धाम में कुलदेवी पंडोरी माता की पूजा करने पहुंचे हैं. यह वही क्षेत्र है जहां जनजातीय समुदाय बिरसा मुंडा को अपनी आस्था और संघर्ष का प्रतीक मानता है.

केंद्र सरकार ने बिरसा मुंडा के सम्मान में 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है. इस साल राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में आयोजित किया जा रहा है. नर्मदा जिले का यह क्षेत्र, जहां पीएम पूजा-अर्चना कर रहे हैं, स्वयंभू याहा पंडोरी देवमोगरा माता का धाम है. यह देवी गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी समुदायों के लिए कुलदेवी हैं.

क्यों हुआ था पहला महासंग्राम?
बिरसा मुंडा की कहानी 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों के पहले बड़े महासंग्राम यानी ‘उलगुलान’ से शुरू होती है. 1789 से 1820 के बीच, छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा आदिवासियों में विद्रोह की आग सुलग रही थी, जिसका मुख्य कारण था ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर अंग्रेजों की चोट.

खुंटकट्टी व्यवस्था मुंडाओं की वह पारंपरिक संस्था थी, जिसके तहत एक ही किल्ली यानी कुल के सभी परिवार मिलकर जंगल साफ करके जमीन को खेती योग्य बनाते थे और उस पर सामूहिक अधिकार रखते थे. अंग्रेजों ने इस पारंपरिक स्वामित्व को खत्म करने की दमनकारी नीतियां लागू कीं. उनकी ‘बांटो और राज करो’ की नीति ने आदिवासियों को ज़मीन और जंगल से बेदखल करना शुरू कर दिया, जिससे नफरत और आक्रोश बढ़ता गया.

स्कूल से निकाले गए बिरसा
1875 में उलिहातू गांव में सुगना मुंडा और कर्मी मुंडा के घर जन्मे बिरसा का बचपन संघर्षों में बीता. शुरुआती दौर में उनके परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने मिशनरी स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उनका मोहभंग हो गया.

बिरसा ने पहचान लिया कि ईसाई मिशनरियां भी आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा करने की साज़िश में शामिल हैं. मिशनरियों की आलोचना करने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. युवा बिरसा ने इसके बाद सरदार आंदोलन में हिस्सा लिया और नारा दिया, “साहब-साहब एक टोपी है.” इसका अर्थ था कि सभी गोरे एक जैसे हैं और सब सत्ता की टोपी पहने हुए हैं.

जब बिरसा बन गए ‘धरती आबा’
साल 1891 से 1896 के बीच बिरसा ने ईसाई धर्म छोड़कर, धर्म, दर्शन और नीति का गहन ज्ञान प्राप्त किया. उन्होंने आंदोलन के साथ-साथ उपदेश देना भी शुरू किया, जिससे बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयायी बन गए. उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग उन्हें ईश्वर का दूत और भगवान मानने लगे. उनके अनुयायी ‘बिरसाइत’ कहलाए. इस तरह, बिरसा मुंडा आदिवासियों के बीच ‘धरती आबा’ के रूप में पूजे जाने लगे.

महाविद्रोह की घोषणा
अगस्त 1895 में वन संबंधी बकाये की माफी के लिए बिरसा ने चाईबासा तक यात्रा की, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी मांग ठुकरा दी. इस अपमान के बाद बिरसा ने वह ऐतिहासिक ऐलान किया जिसने क्रांति की शुरुआत की, “सरकार खत्म. अब जंगल-जमीन पर आदिवासियों का राज होगा.” उन्होंने बुलंद आवाज़ में नारा दिया, “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” जिसका मतलब है, “हमारे देश पर हमारा राज होगा.” यह नारा अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया.

गिरफ्तारी और जेल से रिहाई
बिरसा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार करने की कई बार कोशिश की. आखिरकार, 24 अगस्त 1895 को पुलिस अधीक्षक मेयर्स के नेतृत्व में पुलिस ने रात में बिरसा को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें रांची जेल ले जाया गया और बाद में हजारीबाग जेल भेजा गया. उन पर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोगों को भड़काने का आरोप लगा और उन्हें 2 साल की सज़ा सुनाई गई.

1897 में झारखंड में भयानक अकाल और चेचक की महामारी फैली. इसी दौरान, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की डायमंड जुबिली के समारोहों का आयोजन हो रहा था. इस अवसर पर देश के कई आंदोलनकारियों के साथ बिरसा मुंडा को भी रिहा कर दिया गया.

30 नवंबर, 1897 को जेल से छूटने के बाद बिरसा सीधे चलकद लौटे. उन्होंने सबसे पहले अकाल और महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा शुरू की. इसके साथ ही, वह गुप्त रूप से राजनीतिक सभाएं करने लगे, जिससे एक नए और बड़े आंदोलन की जमीन तैयार होने लगी.

जब बिरसा ने छेड़ा हथियारबंद संघर्ष
अंग्रेज़ सरकार समझ चुकी थी कि बिरसा मुंडा को रोकना आसान नहीं है. जनवरी 1900 में, पुलिस और सेना ने बिरसा की तलाश में पोड़ाहाट के जंगलों तक को छान मारा. सरकार ने बिरसा की सूचना देने वाले के लिए इनाम घोषित कर दिया, लेकिन आदिवासियों ने अपने ‘भगवान’ के बारे में एक शब्द भी नहीं बताया.

इसके बाद बिरसा ने सीधे हथियारबंद संघर्ष का ऐलान कर दिया. यह इतिहास में उलगुलान के नाम से दर्ज हुआ. बिरसा की अगुवाई में लगभग 60 जत्थों ने एकसाथ हुकूमत के ठिकानों, सरकारी कार्यालयों और गिरजाघरों पर धावा बोल दिया. चक्रधरपुर और पोड़ाहाट जैसे इलाकों में अंग्रेज़ों के आवासों में आग लगा दी गई.

इस महासंग्राम का सबसे भीषण रूप 8 जनवरी, 1900 को डोम्बारी पहाड़ियों पर दिखा. सेना ने बिरसाइत जत्थों को चारों ओर से घेर लिया. विद्रोहियों ने ज़ोरदार दहाड़ लगाई, “गोरो, अपने देश वापस जाओ.” फौज और विद्रोहियों के बीच हुई इस खूनी जंग में लगभग 200 मुंडा शहीद हो गए, लेकिन बिरसा अंग्रेजों के हाथ नहीं आए.

जेल में रहस्यमयी मौत
अंग्रेज़ी हुकूमत के लिए बिरसा मुंडा को पकड़ना इज़्ज़त का सवाल बन गया था. आखिरकार, 3 फरवरी, 1900 को एक जंगल में बने शिविर में सोते वक्त अंग्रेज़ों ने बिरसा को पकड़ लिया. उन्हें तत्काल खूंटी के रास्ते रांची कारागार में बंद कर दिया गया. बिरसा के साथ ही करीब 500 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया.

मुकदमे की सुनवाई चल रही थी. 20 मई, 1900 को बिरसा को कोर्ट ले जाया गया, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. अगले 10 दिन तक यही खबर आती रही कि बिरसा बीमार हैं. और फिर, 9 जून, 1900 की सुबह अचानक यह खबर आई कि हैजे की वजह से बिरसा मुंडा की मौत हो गई.

हालांकि, कई इतिहासकारों और आदिवासियों का मानना है कि अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें जेल में धीमा जहर दिया था, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती गई और उनकी मृत्यु हो गई.

25 की उम्र में अमर हुए ‘भगवान’ बिरसा
महज 25 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले बिरसा मुंडा अपनी छोटी सी ज़िंदगी में इतना बड़ा संघर्ष करके गए कि आज भी वह भारत के जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं. उनका नारा ‘अबुआ दिसुम, अबुआ राज’ आज भी जंगल-ज़मीन के अधिकार की लड़ाई में एक मशाल की तरह जलता है. बिरसा मुंडा सही मायने में आदिवासियों के ‘भगवान’ और भारत के सच्चे ‘धरती आबा’ हैं.

दबंग टूर से पहले सलमान खान का वर्कआउट वीडियो वायरल, बच्चों ने घेरे रखा सुपरस्टार को

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मुंबई: सलमान खान ‘बिग बॉस 19’ की होस्टिंग को ब्रेक देकर दबंग टूर पर निकल पड़े हैं। उनकी जगह शो को अब रोहित शेट्टी होस्ट कर रहे हैं। दबंग टूर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इन वीडियो में उनके लिए फैंस की दीवानी साफ नजर आ रही है। साथ ही दबंग टूर की तैयारियों सलमान खान भी खूब पसीना बहा रहे हैं। जानिए, इन वायरल वीडियो में क्या खास दिखा। 

बच्चे हाथ मिलाने को बेताब दिखे
सोशल मीडिया पर सलमान खान का एक वीडियो वायरल है, जिसमें बच्चों की भीड़ एक्टर को देखकर एक्साइटेड नजर आई। बच्चे सलमान का नाम पुकारते दिखे, साथ ही भाईजान से हाथ मिलाने को भी बेताब नजर आए। सलमान ने भी बच्चों को निराश नहीं किया और सबसे हाथ मिलाने की कोशिश की। सलमान ने बच्चों को ‘हैप्पी चिल्ड्रेंस डे’ भी कहा। 

सलमान ने डांस रिहर्सल का वीडियो पोस्ट किया 
सलमान खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह दबंग टूर के लिए डांस रिहर्सल कर रहे हैं। इस डांस रिहर्सल में तमन्ना भाटिया, जैकलीन फर्नांडिस भी दिखीं, दोनों एक्ट्रेस अपनी स्टेज परफॉर्मेंस की तैयारियां कर रही हैं। मनीष पॉल को भी स्टेज पर देखा गया, वह दबंग टूर के प्रोग्राम को होस्ट करेंगे। 
 
सलमान खान का करियर फ्रंट 
सलमान खान के करियर फ्रंट की बात करें वह एक फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवां’ कर रहे हैं। इस फिल्म में वह एक आर्मी ऑफिसर के रोल में नजर आएंगे। फिल्म की काफी शूटिंग सलमान खान कर चुके हैं।

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News Desk

पंत का स्टाइल स्टेटमेंट और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, वीरू का रिकॉर्ड हुआ पीछे

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नई दिल्ली: साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ऋषभ पंत की टीम इंडिया में फिर से वापसी हुई है. इससे पहले वो पैर की इंजरी को लेकर बाहर थे. टीम में वापसी के बाद ऋषभ पंत जब अपनी पहली इनिंग खेलने कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर उतरे तो दो डिजाइन के जूते पहने नजर आए. दोनों पैरों में अलग-अलग डिजाइन के जूते वाली ऋषभ पंत की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर छा चुकी है. दो डिजाइन के जूते पहनकर छाए पंत ने ईडन गार्डन्स पर अपनी पहली इनिंग के दौरान वीरेंद्र सहवाग का बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ा.

ऋषभ पंत का जूता बना चर्चा का विषय
शुभमन गिल के रिटायर्ड हर्ट होने के बाद ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे थे. उनके मैदान पर उतरते ही उनका जूता चर्चा का विषय बन गया. ऋषभ पंत का एक जूता आगे से काले रंग का था. वहीं दूसरे जूते में ऐसा नहीं था. वो सफेद ही था. पंत ने काले रंग का जूता अपने उसी पैर पहन रखा था, जिसकी इंजरी से उबरकर वो लौटे थे. हो सकता है वो जूता पंत के उस पैर को ही ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

दो डिजाइन के जूते में बनाया भारतीय रिकॉर्ड
दो डिजाइन के जूते पहनकर ईडन गार्डन्स पर खेलने उतरने वाले ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ा है. ऋषभ पंत ने कोलकाता टेस्ट की पहली पारी में 24 गेंदों का सामना कर 27 रन बनाए, जिसमें 2 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. इसी इनिंग के दौरान ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग को पीछे छोड़कर भारतीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

पंत ने सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ा
ऋषभ पंत ने वीरेंद्र सहवाग का कायम किया जो रिकॉर्ड तोड़ा है, वो टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्कों का है. वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट में 90 छक्के लगाए थे. ऋषभ पंत भी कोलकाता टेस्ट से पहले तक 90 छक्कों के साथ सहवाग की बराबरी पर थे. ऐसे में ईडन गार्डन्स पर अपनी इनिंग का पहला छक्का लगाते ही पंत ने सहवाग का रिकॉर्ड तोड़ दिया. उनके नाम अब कुल 92 छक्के टेस्ट में दर्ज हैं, जो कि एक नया भारतीय रिकॉर्ड है.

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