महाराष्ट्र में दिखने लगा कांग्रेस की बिहार में हार का परिणाम, दुत्कारने लगे उद्धव ठाकरे

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मुंबई। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बहुत बुरी हार हुई है। इसका असर महाराष्ट्र में अभी से दिखाई देने लगा है।शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे अब कांग्रेस को आंख दिखाने लगे हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि कांग्रेस अपने निर्णय खुद लेने के लिए स्वतंत्र है और उनकी पार्टी भी अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेती है। दरअसल कांग्रेस ने ही ऐलान किया था कि वह बीएमसी चुनाव अकेले लड़ेगी। इसके एक दिन बाद यानी रविवार को आया उद्धव का यह बयान इस बात का संकेत है कि वह कांग्रेस को मनाने की कोई कोशिश नहीं करने वाले हैं।
उद्धव ठाकरे ने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली भारी जीत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि राजद नेता तेजस्वी यादव को मिले विशाल समर्थन को लेकर यह जांच होनी चाहिए कि यह समर्थन वास्तविक था या फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के ज़रिये ‘तैयार’ किया गया।महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला और मुंबई कांग्रेस प्रमुख वरखा गायकवाड़ ने शनिवार को कहा था कि पार्टी स्थानीय इकाई की सलाह के अनुसार 227 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारेगी। चेन्निथला ने कहा, ‘स्थानीय निकाय चुनाव होने के कारण हमने मुंबई इकाई की राय को प्राथमिकता दी है।’ कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई मनसे चीफ राज ठाकरे की हालिया नज़दीकियों से पार्टी में असहजता बढ़ी है। दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बातचीत को कांग्रेस अपने लिए राजनीतिक जोखिम के रूप में देख रही है। वहीं बीएमसी चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने ‘बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक ट्रस्ट’ का पुनर्गठन कर उद्धव ठाकरे को दोबारा इसके अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है। उन्होंने यह पद 2019 में मुख्यमंत्री बनने के बाद छोड़ दिया था। नए गठन में बीजेपी का प्रतिनिधि भी वापस शामिल किया गया है, जिसे एमवीए सरकार ने 2020 में ट्रस्ट से हटा दिया था। अब बीजेपी विधायक पराग अलवानी, उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) नेता शिशिर शिंदे इस ट्रस्ट के सदस्य होंगे। 

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गरुड़ 25 में फ्रांस के आसमान में उड़ रहे सुखोई-30एमकेआई और राफेल विमान 

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नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना (आईएफए) फ्रांस के आसमान में फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल (एफएएसएफ) के साथ द्विपक्षीय वायु अभ्यास गरुड़ 25 को अंजाम दे रही है। संयुक्त वायु अभ्यास गरुड़ 25 फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन में 16 से 27 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों वायुसेनाओं के बीच पारस्परिक अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है। एक वास्तविक युद्ध जैसे वातावरण में विभिन्न युद्ध रणनीति और प्रक्रियाओं को परखना। दोनों देशों के पायलटों और टीमों के बीच प्रोफेशनल बातचीत, प्रचालनगत ज्ञान और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान फ्रांस के बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल) के साथ जटिल हवाई युद्ध परिदृश्यों पर फोकस करेगा। हवा से हवा में युद्ध, एयर डिफेंस, और संयुक्त हमला करने के अभियान शामिल है। 
फाइटर जेट की रेंज बढ़ाने के लिए आईएल-78 हवा से हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों का उपयोग करके हवा में ही ईंधन भरने का अभ्यास भी किया जा रहा है। अभ्यास के लिए टुकड़ी और भारी उपकरणों को लाने-ले जाने के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमानों का उपयोग किया जा रहा है। यह अभ्यास भारत और फ्रांस के बीच मजबूत रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

ड्रोन रोधी अभियानों पर भी किया गया संयुक्त प्रशिक्षण
इसके अलावा, ड्रोन रोधी अभियानों जैसे विषयों पर संयुक्त प्रशिक्षण किया। यह पूरा अभ्यास भी फ्रांस में आयोजित किया गया। अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं ने कंबैट शूटिंग, अर्बन वारफेयर, और अवरोध पार प्रशिक्षण भी किया। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली व ड्रोन रोधी क्षमता युद्धों का रुख निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वहीं, भारत और फ्रांस के बीच राफेल मरीन लड़ाकू विमानों का सौदा भी हो चुका है। राफेल मरीन विमानों की खरीद के लिए यह सरकार-से-सरकार की डील है। इस डील के तहत फ्रांस द्वारा भारतीय नौसेना को मरीन (एम) श्रेणी के 26 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की जाएगी। तय सौदे के मुताबिक भारतीय नौसेना को फ्रांस द्वारा 26 राफेल मरीन फाइटर जेट की डिलीवरी दी जाएगी। 

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सर्दियों में इम्यूनिटी बूस्टर है काली हल्दी, जानें सही इस्तेमाल

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काली हल्दी | हल्दी का नाम लेते ही हमारे जहन में पीली हल्दी आ जाती है. पीली हल्दी किचन में सब्जियों से लेकर मंदिर में पूजा करने तक में इस्तेमाल होती है. हल्दी को खाने पर इसमें कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है. हल्दी को एंटीबायोटिक  भी मना जाता है. लेकिन, पीली हल्दी के अलावा काली हल्दी भी होती है, जो जड़ीबूटी की तरह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होती है. खासकर इम्यूनिटी बढ़ाने में, वायरल संक्रमण की रोकथाम में, जोड़ों के दर्द से आराम दिलाने में ये मददगार होती है. काली हल्दी सर्दियों के सीजन में इंसानों के लिए कितनी फायदेमंद हैं एक्सपर्ट से जानें…

सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में माइक्रो वायरोलॉजी विभाग के प्रभारी डॉ. सुमित रावत बताते हैं कि काली हल्दी में पीली हल्दी से अधिक ऑक्सीडेंट होते हैं. ऑक्सीडेंट वह चीज होती है, जब हमारे शरीर में टूट-फूट होती है तो उनको जोड़ती है या जो लोग कहते हैं कि उन्हें जोड़ों में दर्द हो रहा या दर्द रहता है तो टूट होने की वजह से ऐसा होता है, इसलिए काली हल्दी जो इस्तेमाल करता है, उसको जोड़ों की दर्द की समस्या से राहत होती है. आजकल पीठ दर्द की समस्या भी बहुत तेजी से बढ़ रही है, बच्चों में भी ये दर्द आम होता जा रहा है. काली हल्दी का उपयोग करने पर इससे बचे रहेंगे.

पीली हल्दी से इतनी महंगी

आगे बताया, इसके अलावा काली हल्दी सूजन दूर करने और जो बार-बार संक्रमण की बीमारी सताती है, उसमें भी यह इम्यूनिटी बूस्ट कर ऐसे बचाने में मदद करती है. काली हल्दी नीले रंग की होती है और इसमें कपूर जैसी सुगंध आती है. यह बाजार में कम मिलती है, इसके रेट पीली हल्दी से डेढ़ से 2 गुना तक अधिक होते हैं. 

ऐसे करें उपयोग

काली हल्दी का उपयोग अलग-अलग तरीके से अलग-अलग उपयोग में कर सकते हैं. जैसे अगर आपको वायरल इंफेक्शन की समस्या है तो इसके लिए आप काली हल्दी को रोजाना गुनगुने दूध में डालकर सोने से पहले पी ले तो इससे धीरे-धीरे आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होगी. अगर दूध पीना पसंद नहीं है तो काली हल्दी की चाय भी सुबह खाली पेट पीने से फायदा मिलता है.

जोड़ों के दर्द में ऐसे मिलेगा आराम

आपके जोड़ों में दर्द है तो काली हल्दी को पीने से तो फायदा मिलता ही है, लेकिन काली हल्दी का लेप बनाकर जोड़ों में लगाने से दर्द में फायदा मिलेगा. सूजन है तो वह भी कम होगी. इसके अलावा काली हल्दी को सरसों के तेल में भी मिक्स करके जोड़ों के दर्द में लगा सक

 गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक 

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फरीदाबाद में जुटे कई प्रदेश के मुख्यमंत्री  

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हरियाणा के फरीदाबाद में उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ उत्तरी क्षेत्र के प्रमुख राजनेता शामिल हुए। इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुए। 
उत्तर क्षेत्रीय परिषद में निम्नलिखित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब राजस्थान, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र), जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, चंडीगढ़ शामिल है। 
बैठक की शुरुआत में, दिल्ली लाल किला विस्फोट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा गया। बैठक के दौरान जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है, वे हैं राज्य सरकारों के बीच समन्वय, जल बंटवारे से संबंधित मुद्दे और विकास कार्यों की प्रगति।
क्षेत्रीय परिषदों का महत्व 
क्षेत्रीय परिषदें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीम भारत के दृष्टिकोण को पूरा करती हैं। ये इस विश्वास के साथ महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं कि सशक्त राज्य एक मजबूत राष्ट्र बनाते हैं। ये दो या दो से अधिक राज्यों या केंद्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर संवाद के लिए एक संरचित तंत्र प्रदान करती हैं। ये पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के स्वस्थ संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।
ये महिलाओं, बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों की त्वरित जांच और उनके शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के कार्यान्वयन जैसे राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं।

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राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ में बड़े बदलाव, राठौड़ को प्रमोशन

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जयपुर : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए मिनी नीलामी 16 दिसंबर को अबूधाबी में होनी है. ऑक्शन से पहले सभी 10 फ्रेंचाइजी टीमों ने खिलाड़ियों की रिटेंशन लिस्ट जारी कर दी है. राजस्थान रॉयल्स (RR) ने तो बड़ा फैसला लिया और कप्तान संजू सैमसन को ट्रेड कर दिया. इसके लिए रॉयल्स की चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से ट्रेड डील हुई. सैमसन के बदले में सीएसके से रवींद्र जडेजा और सैम करन राजस्थान रॉयल्स के स्क्वॉड में शामिल कर लिए गए हैं.

राजस्थान रॉयल्स ने सोमवार (17 नवंबर) को एक और बड़ी घोषणा की है. श्रीलंकाई दिग्गज कुमार संगकारा को आईपीएल के अगले सीजन के लिए इस टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया है. यह फैसला राहुल द्रविड़ के पद छोड़ने के बाद लिया गया. द्रविड़ ने अगस्त 2025 में राजस्थान रॉयल्स से अलग होने का फैसला किया था. संगकारा 2021 से राजस्थान रॉयल्स के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट हैं. वो 2021-2024 तक इस टीम के हेड कोच भी रह चुके हैं. संगकारा की कोचिंग में टीम आईपीएल 2022 में फाइनल तक पहुंची थी और 2024 के सीजन के दौरान प्लेऑफ में पहुंचने में कामयाब रही थी.

राजस्थान रॉयल्स ने कुमार संगकारा के फिर से हेड कोच बनने की पुष्टि कर दी है. बता दें कि राहुल द्रविड़ मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट के साथ राजस्थान रॉयल्स टीम के साथ जुड़े थे. द्रविड़ की कोचिंग में राजस्थान रॉयल्स ने बेहद खराब प्रदर्शन करते हुए 14 में से केवल 4 मैच जीते और यह टीम अंकतलिका में नौवें स्थान पर रही.

राजस्थान रॉयल्स के लीड ऑनर मनोज बडाले कहा, ‘टीम को इस समय जो जरूरत है, उसके हिसाब से कुमार संगकारा का स्क्वॉड से जुड़ाव, उनकी नेतृत्व क्षमता और रॉयल्स की संस्कृति को समझने की उनकी गहरी पकड़ टीम को निरंतरता और स्थिरता देगी. कुमार पर हमारा हमेशा पूरा भरोसा रहा है. उनकी स्पष्टता, शांत स्वभाव और क्रिकेटिंग समझ टीम को अगले फेज में ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी.’

कोचिंग स्टाफ में और कौन-कौन?
राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ में और भी बदलाव देखने को मिले हैं. विक्रम राठौड़ का प्रमोशन हुआ है और वो मुख्य असिस्टेंट कोच बने हैं. न्यूजीलैंड के दिग्गज गेंदबाज शेन बॉन्ड बॉलिंग कोच की भूमिका निभाते रहेंगे. उधर ट्रेवर पेनी असिस्टेंट कोच की भूमिका में वापस आए हैं. जबकि सिद्धार्थ लाहिड़ी  परफॉर्मेंस कोच का रोल निभाएंगे.

रास्थान रॉयल्स में रवींद्र जडेजा की एंट्री के बाद कप्तानी की होड़ काफी रोमांचक हो गई है. उनकी मौजूदगी टीम की लीडरशिप इक्वेशन को पूरी तरह बदल सकती है. मिनी ऑक्शन से पहले राजस्थान रॉयल्स ने कई खिलाड़ियों को रिलीज भी किया है. रिलीज होने वाले विदेशी खिलाड़ियों में फजलहक फारूकी, वानिंदु हसारंगा और महीश तीक्ष्णा शामिल हैं. वहीं आकाश मधवाल, अशोक शर्मा, कुणाल सिंह राठौड़ और कुमार कार्तिकेय को भी टीम से बाहर कर दिया गया है.

राजस्थान रॉयल्स का मौजूदा स्क्वॉड: यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, शुभम दुबे, युद्धवीर सिंह, संदीप शर्मा, तुषार देशपांडे, शिमरॉन हेटमायर, जोफ्रा आर्चर, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, क्वेना मफाका, नांद्रे बर्गर, रवींद्र जडेजा (चेन्नई से ट्रेड), सैम करन (चेन्नई से ट्रेड), डोनोवन फरेरा (दिल्ली से ट्रेड).

जिम कॉर्बेट पर सुनवाई कर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, सरकार को 3 माह का समय

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट बाघ अभयारण्य के संरक्षण को लेकर सोमवार को कई अहम निर्देश दिए। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को अवैध पेड़ कटाई की भरपाई के लिए सुधार के आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि यदि राज्य पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है, तब राज्य सरकार को इको-टूरिज्म की दिशा में काम करना होगा। सीजेआई गवई ने निर्देश दिया कि कोर क्षेत्र में अपने परिवारों से दूर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए विशेष व्यवस्था करे। 
अदालत ने मुख्य वन्यजीव वार्डन को आदेश दिया कि जिम कॉर्बेट में बनी सभी अनधिकृत संरचनाओं को तीन महीने के भीतर करे। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल को राज्य सरकार की पारिस्थितिक बहाली योजना की निगरानी करने का निर्देश दिया है। अदालत के ये निर्देश जिम कॉर्बेट क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों को सख्ती से लागू कराने और पर्यावरणीय क्षति को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इसके पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले पांच वर्षों में राज्य में हुए सभी शिकार मामलों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य वन विभाग के अधिकारियों की सहभागिता, संलिप्तता या मिलीभगत का पता लगाना था। अदालत को बताया गया था कि पिछले ढाई वर्षों में 40 बाघों और 272 तेंदुओं की मौत हुई थी। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। यह रोक रिटायर्ड प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डी.एस. खाती की अपील पर एकपक्षीय रूप से पारित की गई थी। उत्तराखंड के एक पर्यावरणविद् अतुल सती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें सीबीआई को अपनी जांच पूरी करने की अनुमति देने के लिए इस रोक को हटाने की मांग की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने भी इस स्थगन आदेश को रद्द करने के लिए एक आवेदन दायर किया है। सीबीआई ने अपने आवेदन में अपनी प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों का उल्लेख किया है, जिसमें उसे कई अनियमितताएं मिलीं, जैसे कि वन अधिकारियों द्वारा एक बाघ की मौत को छिपाने का जानबूझकर किया गया प्रयास। पर्यावरणविद् के वकील गोविंद जी की दलील से सहमत होते हुए, सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई 17 नवंबर के लिए स्थगित कर दी।

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पत्नी पूनम संग हेमा मालिनी से मिलने पहुंचे शत्रुघ्न सिन्हा, जताई संवेदनाएं

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दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की तबीयत में सुधार हो रहा है। अपने जुहू स्थित आवास पर ही-मैन का उपचार चल रहा है, जहां उनके लिए घर पर ही आईसीयू वॉर्ड तैयार किया गया है। इंडस्ट्री के तमाम सितारे उनकी सेहत का हाल जानने व उनसे मिलने पहुंच रहे हैं। इस बीच शत्रुघ्न सिन्हा अपनी पत्नी के साथ अभिनेत्री हेमा मालिनी से मिलने पहुंचे।

लिखा- ‘परिवार के कुशलक्षेम की जानकारी ली’

शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने एक्स अकाउंट से तस्वीरें शेयर की हैं। इनमें वे, उनकी पत्नी पूनम सिन्हा व अभिनेत्री-सांसद हेमा मालिनी नजर आ रहे हैं। इसके साथ शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है, ‘अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के साथ हमारी बेहद प्यारी पारिवारिक मित्र, बेहतरीन इंसानों में से एक, अदाकारा, शानदार कलाकार और एक योग्य सांसद हेमा मालिनी से मुलाकात की। हमारी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। हमने अपने बड़े भाई और उनके परिवार के कुशलक्षेम के बारे में भी जानकारी ली’।

नेटिजन्स ने दिया रिएक्शन

एक्टर के पोस्ट पर नेटिजन्स के रिएक्शन आ रहे हैं। अधिकांश यूजर्स धर्मेंद्र की सेहत का हाल जानना चाह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘शानदार मुलाकात’। एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘हेमा मालिनी की तारीफ में कही एक-एक बात सच है’। एक यूजर ने लिखा, ‘हम भी धर्मेंद्र की जल्द रिकवरी और पूरे परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना कर रहे हैं’।

मथुरा से सांसद हैं हेमा मालिन

बता दें कि हेमा मालिनी उत्तर प्रदेश के मथुरा से भाजपा सांसद हैं। वे इस क्षेत्र से लगातार तीन बार से बतौर सांसद कार्य संभाल रही हैं। धर्मेंद्र की बात करें तो उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 12 नवंबर को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। फिलहाल एक्टर अपने जुहू स्थित आवास पर हैं, जहां घर पर ही चार नर्स और एक डॉक्टर की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।

 

सर्दियों में रोजाना इस सीड्स को गुनगुने पानी में मिलाकर पिएं, बीमारियां रहेंगी दूर

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चिया सीड्स | सर्दियों का मौसम आ गया है और लोग बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं. अगर आप भी अपने शरीर को हमेशा फिट और एक्टिव रखना चाहती हैं, तो आप चिया सीड्स का सेवन कर सकते हैं. ये आपकी हेल्थ और शरीर को फिट रखने के लिए काफी ज्यादा मददगार साबित होते हैं. चिया सीड्स फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और भी कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होती है. आइए आपको बताते हैं ठंड के मौसम में रोजाना गुनगुने पानी में एक चम्मच चिया सीड्स को मिलाकर पीने से क्या होता है, आइए आप भी कर लें नोट.

चिया सीड्स के फायदे

1. बढ़ते वजन को कम

अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं और आपका वजन कम होने का नाम नहीं ले रहा है, तो आप रोजाना गुनगुने पानी में एक चम्मच चिया सीड्स को मिलाकर पी सकते हैं इसको पीने के बाद आपका शरीर एकदम फिट रहता है.
 

2. मेटाबॉलिज्म बूस्ट

चिया सीड्स का अगर आप रोजाना सेवन करते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और आपका शरीर हमेशा फिट रहता है कई बीमारियों से हमेशा दूर रहता है.
 

3. त्वचा में निखार

अगर आप अपनी त्वचा को खिला-खिला और ग्लोइंग रखना चाहते हैं, तो आप  एक चम्मच चिया सीड्स को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ में पी सकते हैं. आप एक कटोरी में चिया सीड्स के साथ में कच्चा दूध को मिलाकर भी अपने चेहरे पर लगा सकते हैं. इसका मास्क भी आपकी स्किन को निखारने में काफी ज्यादा मददगार होगा.
 

4. बालों मजबूत

चिया सीड्स आपकी फिटनेट के लिए काफी ज्यादा मददगार साबित होती है. अगर आप अपने बालों को लंबा-घना बनाना चाहते हैं, तो भी चिया सीड्स मददगार साबित होगा. आप चाहे तो चिया सीड्स को अपने बालों में भी लगा सकते हैं. 
 

कागज पर खदान का मालिक एक, जांच में निकले 9 लोग… सोनभद्र हादसे के बाद खनन का खेल उजागर

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सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र स्थित कृष्णा माइनिंग खदान हादसे में मजदूरों की मौत की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. अब तक 6 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इस भीषण हादसे ने न सिर्फ जिले को हिलाकर रख दिया, बल्कि सालों से चले आ रहे खनन माफिया और खनन विभाग की सांठगांठ की परतें भी खोल दीं. जांच में सामने आया है कि कागज पर भले ही खदान एक व्यक्ति के नाम थी, लेकिन असल में इसे 9 प्रभावशाली लोगों की अवैध हिस्सेदारी में नियमों के विपरीत संचालित किया जा रहा था.

यह खदान साल 2016 से सक्रिय थी और लगातार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संचालन जारी था. खनन विभाग की अनदेखी और खनन माफिया के संरक्षण ने इस अवैध तंत्र को मजबूत बना दिया. खदान कुछ समय बाद एक स्थानीय ठेकेदार को दे दी गई, जिसके बाद पैसे, हिस्सेदारी और गैरकानूनी खनन का खेल और गहरा होता चला गया. हादसे के बाद तीन विशेष जांच टीमें बनाई गई हैं.

शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि सालों से इस खदान का संचालन स्थानीय सफेदपोश, ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से होता रहा है. खनन विभाग ने अब पट्टाधारकों के खिलाफ रिपोर्ट तैयार की है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 52 घंटे पहले जब मजदूर जिंदा दबे थे, तब विभाग की यह सक्रियता कहां गई थी. लगातार 52 घंटे के रेस्क्यू में अब तक 6 शव बरामद किए जा चुके हैं.

जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही अंतिम शव भी निकाल लिया जाएगा. इस मामले में माइंस संचालक समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है. यह त्रासदी सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सोनभद्र में सैकड़ों करोड़ के अवैध खनन नेटवर्क और सिस्टम की घोर विफलता का प्रमाण है, जिसमें माफिया और विभाग की चुप्पी ने छह मजदूरों की जान ले ली.

कैसे विवादों ने पार्टियों को कमजोर किया?

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Vanshvad Family Politics एक बार फिर चर्चा में है, खासकर तब जब बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की बड़ी हार के बाद लालू परिवार का विवाद खुलकर सामने आ गया। नतीजों के तुरंत बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने घर और पार्टी दोनों छोड़ दिए, जिससे RJD की आंतरिक खींचतान उजागर हो गई। चुनावी दौर से ही शुरू हुआ यह विवाद पार्टी की छवि और संगठन पर भारी पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां परिवार टूटता है, वहां पार्टी की मजबूती, वोटरों का भरोसा और चुनावी परिणाम सीधे प्रभावित होते हैं—और यही विपक्ष के लिए फायदा का मौका बन जाता है।

भारत की राजनीति में Vanshvad Family Politics कोई नई बात नहीं है। कई बड़े राजनीतिक घरानों में पार्टी और वोट बैंक को संपत्ति की तरह बांटने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। इसी वजह से पारिवारिक तनाव बढ़ता है, जिसका असर सीधे सियासत और चुनावों में दिखता है।

उदाहरण के तौर पर, बिहार में पासवान परिवार का विवाद चाचा-भतीजे की लड़ाई में बदल गया और लोजपा दो गुटों में टूट गई। यूपी में मुलायम सिंह यादव परिवार का विवाद भी वर्षों तक चला, जिससे समाजवादी पार्टी को 2017 और 2022 के चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा।

महाराष्ट्र में भी पवार और ठाकरे परिवारों की अंदरूनी खींचतान ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। एक तरफ शरद और अजीत पवार के बीच दरार पड़ी, तो दूसरी तरफ उद्धव और राज ठाकरे की दूरी ने शिवसेना की ताकत कमजोर कर दी।

दक्षिण भारत भी इससे अछूता नहीं है। आंध्र प्रदेश में जगन और शर्मिला की खींचतान वाईएसआर कांग्रेस को कमजोर कर गई। वहीं तेलंगाना में KCR के परिवार में उत्तराधिकार को लेकर हुए विवाद ने बीआरएस को सत्ता से बाहर कर दिया।