भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की

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नई दिल्ली । भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस दौरे के समय मॉस्को में  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इसके बाद बुधवार को उन्होंने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले वार्षिक भारत-रूस लीडर्स समिट की तैयारियों की समीक्षा की।
दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर विदेश मंत्री जयशंकर ने लिखा, “आज सुबह मॉस्को में प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मिलकर खुशी हुई। अगस्त 2025 में 26वें आईआरआईजीसी-टीईसी के लिए हमारी पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति का जायजा लिया। अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले वार्षिक भारत-रूस लीडर्स समिट की तैयारियों की समीक्षा की।”
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिसंबर में भारत आने की उम्मीद है। इसे लेकर क्रेमलिन की ओर से तैयारी भी शुरू हो चुकी है। इसकी जानकारी खुद क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी। उन्होंने पिछली बार दिसंबर 2021 में इस शिखर सम्मेलन के 21वें संस्करण में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया था।
विदेश मंत्री जयशंकर ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। बैठक के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन को वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बारे में अपडेट दिया।

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आज 10वीं बार सीएम की शपथ लेंगे नीतीश

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पटना। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को वे 10वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे। शपथ समारोह सुबह 11.30 बजे गांधी मैदान में होगा। समारोह के लिए 2 मंच बनाए गए हैं। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी समेत 11 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही 150 मेहमानों को भी निमंत्रण भेजा गया।
इससे पहले बिहार विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, सुबह 11 बजे पटना के भाजपा ऑफिस में विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया है। विजय सिन्हा को विधानमंडल का उपनेता चुना गया है। मतलब सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा दोनों डिप्टी ष्टरू होंगे। जानकारी के मुताबिक, नीतीश के साथ-साथ सम्राट और विजय सिन्हा भी डिप्टी सीएम की शपथ ले सकते हैं। इधर, भाजपा के विधायक दल की बैठक से पहले जदयू के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें नीतीश कुमार को नेता चुना गया।
मुख्यमंत्री ही तय करेंगे कैबिनेट भी
वहीं  बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने सरकार गठन की प्रक्रिया पर जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट का गठन मुख्यमंत्री तय करेंगे। हम पहले राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसके बाद ही बाकी बातें स्पष्ट होंगी। जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बैठक के बाद कहा कि शपथ ग्रहण समारोह गुरूवार को होगा। एनडीए नेता का चयन हो चुका है। सभी एनडीए सहयोगियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता व सीवान सदर के विधायक मंगल पांडेय ने नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व व मार्गदर्शन में प्रदेश का समावेशी विकास हुआ है। उनके नेतृत्व में विकास व सुशासन का राज स्थापित हुआ है।

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बेंगलुरु में 7.11 करोड़ रुपये की लूट की वारदात

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बेंगलुरु। सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु में 7.11 करोड़ रुपये की लूट की वारदात ने शहर में सनसनी मचा दी। घटना साउथ एंड सर्कल के पास हुई, जहां इनोवा कार में सवार छह-सात अपराधियों ने एटीएम में पैसे डालने जा रही वाहन को रोका और 7.11 करोड़ रुपये लूटकर फरार हो गए। लूट की यह घटना जयदेरी डेयरी सर्कल के पास हुई।
जानकारी के अनुसार, लूट की वारदात का शिकार हुई गाड़ी का नंबर GJ 01 HT 9173 था। यह गाड़ी एटीएम में पैसे जमा करने के लिए जा रही थी। उसी दौरान, जयदेरी डेयरी सर्कल पर इनोवा कार में सवार अपराधियों ने गाड़ी को रोका और खुद को आरबीआई  अधिकारी बताकर चालक और गनमैन सहित सभी कर्मचारियों को धमकाया। आरोपियों ने गाड़ी को डेयरी सर्कल फ्लाईओवर पर खड़ा किया, पैसों से भरी सीएमएस गाड़ी से रकम अपने वाहन में लादकर फरार हो गए।
अपराधियों ने जयनगर थाना क्षेत्र के अशोक स्तंभ के पास गाड़ी को रोकते हुए दावा किया कि वे आरबीआई से हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गाड़ी नियमों का उल्लंघन कर रही है। इसके बाद उन्होंने गाड़ी को हाईजैक किया और थाने आने का निर्देश दिया। लूट की घटना के समय एटीएम वाहन में चार सीएमएसकर्मचारी सवार थे एक ड्राइवर, दो गनमैन और एक कैश डिपॉजिटर। इन कर्मचारियों से पूछताछ के लिए पुलिस उन्हें सिद्धपुर पुलिस स्टेशन ले गई है। 

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अब मायावती पर नहीं होंगे निजी हमले 

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लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए सपा ने अपने तेवर बदल लिए हैं। इसके चलते अब मायावती पर किसी भी तरह के निजी हमले नहीं करने के सख्त निर्देश अखिलेश यादव ने दिए हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह कदम भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है। 
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सभी मीडिया पैनलिस्टों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती पर किसी भी प्रकार के निजी हमले नहीं किए जाएं। यह फैसला बिहार चुनाव 2025 में विपक्षी महागठबंधन की करारी हार के बाद लिया गया बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सपा द्वारा मायावती और बसपा को लगातार भाजपा की बी टीम कहकर निशाने पर लिया जाता रहा है। लेकिन पार्टी के भीतर अब यह समझ बन रही है कि मायावती पर हमले दलित वोट बैंक पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में सपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि सपा के कई प्रवक्ताओं को अखिलेश यादव ने खुद यह निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सपा के लगभग 20 प्रवक्ता विभिन्न टीवी चैनलों पर पार्टी का पक्ष रखते हैं, इन्हीं में से कुछ ने पुष्टि की है कि बिहार चुनाव के बाद पार्टी हाईकमान की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है, कि मायावती पर निजी हमला नहीं करना है। 
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिहार चुनाव में महागठबंधन द्वारा बसपा और एआईएमआईएम को बी टीम कहकर खारिज करने की कोशिश उलटी पड़ गई। वहीं ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीतीं और 10 पर दूसरे स्थान पर रही, जबकि बसपा भी एक सीट जीतने में सफल रही। इसके उलट महागठबंधन की मुख्य पार्टियां खराब प्रदर्शन कर गईं। इससे स्पष्ट हुआ कि जिन दलों को बी टीम कहा जा रहा था, उन्होंने विपक्षी दलों से बेहतर प्रदर्शन कर लिया। जानकार कह रहे हैं कि सपा समझ रही है, कि यूपी का चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों पर लड़ा जाएगा। लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति ने भाजपा को कठिन चुनौती दी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में दलित वोटों का बिखराव सपा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। मायावती पर निजी हमले करने से दलित समाज खुद को निशाना बना हुआ महसूस करता है, जिससे दलित वोट भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के बजाय बसपा की ओर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी में दलित मतदाताओं की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव अब किसी भी परिस्थिति में इस वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहेंगे। इसलिए सपा की रणनीति में बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है—अब मायावती पर निजी हमले नहीं होंगे और दलित समाज को साधने की कोशिश तेज होगी।
राजनीतिक गलियारों में यह कदम सपा की 2027 की तैयारी का अहम संकेत माना जा रहा है।

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‘चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे राहुल गांधी’, जजों और ब्यूरोक्रेट्स समेत 272 हस्तियों ने लिखा लेटर

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नई दिल्ली: देश के 272 पूर्व शीर्ष अधिकारियों, जजों, राजनयिकों और सेना के अफसरों ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इन लोगों ने एक खुला पत्र जारी कर कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी ‘चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.’

‘Assault on National Constitutional Authorities’ नाम के टाइटल वाले पत्र में कहा गया कि कुछ विपक्षी नेता ‘जहरीली बयानबाजी’ और ‘बिना सबूत के आरोपों’ के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश की संस्थाएं ठीक तरह काम नहीं कर रहीं. साइन करने वालों ने आरोप लगाया कि सेना, न्यायपालिका और संसद के बाद अब कांग्रेस का निशाना चुनाव आयोग है.

पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी बार-बार वोट चोरी के आरोप लगाते रहे, लेकिन उन्होंने आज तक कोई आधिकारिक शिकायत या एफिडेविट जमा नहीं किया. उनके ‘100% प्रूफ’, ‘एटम बम’ और ‘देशद्रोह’ जैसे दावों को भी ‘बिना आधार’ बताया गया.

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस, विपक्ष और उससे जुड़े NGOs बार-बार चुनाव आयोग को ‘BJP की B-टीम’ बताकर बदनाम करते रहे, जबकि ECI लगातार अपने तरीके, डेटा और प्रक्रियाएं सार्वजनिक कर रही है. पत्र में लिखा गया कि अदालत की निगरानी में हुई जांच, प्रकाशित डेटा और हटाए गए अवैध नाम इस तरह के आरोपों को गलत साबित करते हैं.

साइन करने वालों ने इसे चुनावी नाकामी से उपजा हताशा भरा गुस्सा बताया. उन्होंने लिखा, ‘जब नेता जनता से दूर हो जाते हैं, तो वे अपनी कमजोरियों की जगह संस्थाओं पर हमला करने लगते हैं. विश्लेषण की जगह नाटकीयता आ जाती है. जनसेवा की जगह सार्वजनिक तमाशा ले लेता है.’ पत्र में कहा गया कि देश को आज भी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन सेशन और एन. गोपालस्वामी जैसी शख्सियतें याद हैं, जिन्होंने बिना लोकप्रियता की चाहत के निष्पक्ष और सख्त चुनाव कराए.

अंत में पत्र ने चुनाव आयोग से कहा कि वह डेटा सार्वजनिक करता रहे, जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़े और ‘पीड़ित बनने वाली राजनीति’ को दरकिनार करे. साथ ही राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे बिना सबूत के आरोप लगाने की जगह नीतियों पर प्रतिस्पर्धा करें और चुनाव परिणामों को शालीनता से स्वीकार करें.

‘जब से नतीजे आए हैं, तबसे…’, बिहार में करारी हार के बाद छलका प्रशांत किशोर का दर्द

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पटना: बिहार विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी को मिली करारी हार ने प्रशांत किशोर की नींद उड़ा दी है. प्रशांत किशोर ने खुद स्वीकार किया कि यह नतीजा उनके लिए बहुत बड़ा झटका है. उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद से उन्हें ठीक से नींद नहीं आई है क्योंकि जन सुराज ने अपेक्षा से कहीं कम प्रदर्शन किया.

पीके ने कहा कि मैं ईमानदारी से कहूं तो नतीजे आने के बाद मैं ठीक से सो नहीं पाया हूं, लेकिन जब तक आप हार नहीं मानते तब तक आप हारे नहीं हैं. चुनावी रणनीतिकार से राजनीति में एंट्री करने वाले प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी राजनीति किसी चुनावी जीत-हार से आगे की है. उन्होंने कहा कि अगर हम बिहार को बदलना चाहते हैं तो एक चुनाव से हारकर पीछे नहीं हट सकते. यह लंबी लड़ाई है और मैं इसे पूरी ताकत के साथ जारी रखूंगा.

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गले की खराश और खांसी में मुलेठी, जानिए इसे लेने का सही तरीका

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 मुलेठी | सर्दियों का मौसम आ चुका है और ठंड बढ़ने के साथ गले में खराश, लगातार खांसी, बलगम और आवाज बैठना एक आम समस्या बन चुकी है। आयुर्वेद में इन समस्याओं को दूर करने के लिए मुलेठी को काभी लाभदायक बताया जाता है।

औषधीय गुणों से भरपूर मुलेठी न केवल सूखी, बल्कि बलगम वाली खांसी की समस्या में भी राहत देती है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय सर्दियों में सबसे कारगर और सुरक्षित घरेलू नुस्खा मुलेठी को बताता है, जिसे आयुर्वेद में यष्टिमधु भी कहा जाता है। सदियों से आयुर्वेद में मुलेठी को ‘गले और फेफड़ों की सबसे अच्छी दोस्त’ माना जाता है।

मुलेठी कैसे फायदा देती है

मुलेठी में ग्लाइसिर्राइजिन नामक तत्व होता है, जो गले की सूजन कम करता है, बलगम को पतला करके बाहर निकालता है और खांसी में तुरंत राहत देता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने में सहायक है, जिससे अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं दूर रहती हैं। अच्छा पाचन होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और सर्दी-खांसी जल्दी ठीक होती है।

मुलेठी से लगातार आने वाली सूखी और बलगमी वाली खांसी में तुरंत राहत, गले की जलन, खराश और आवाज बैठना ठीक होती है। पेट की एसिडिटी, गैस, अपच और अल्सर में फायदा और इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है। यह मुंह के छालों को दूर करता है।

गले की समस्या में मुलेठी का सेवन कैसे करें

मुलेठी के इस्तेमाल करने का तरीका भी आसान है। मुलेठी की छोटी डंडी को रात में पानी में भिगो दें, सुबह चबाकर खाएं और पानी पी लें। मुलेठी पाउडर को शहद के साथ लें, इससे खांसी में तुरंत आराम मिलता है। मुलेठी, अदरक और तुलसी की चाय भी फायदेमंद होती है। मुलेठी की डंडी मुंह में रखकर चूसना भी खांसी में आराम मिलता है।

रोजाना थोड़ी मात्रा में मुलेठी का सेवन सर्दी-जुकाम, खांसी से बचाव का असरदार तरीका है। हालांकि, हाई ब्लड प्रेशर या किसी तरह की एलर्जी से परेशान लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है।

शताब्दी समारोह में PM मोदी बोले- ‘सत्य साईं बाबा आज भले हमारे बीच में नहीं लेकिन उनका प्रेम…’

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सत्यसाईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के श्री सत्यसाईं जिले में आयोजित कार्यक्रम में दिवंगत आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह के मौके पर उनकी स्मृति में एक सिक्का और डाक टिकटों का सेट भी जारी किया। पीएम मोदी ने आध्यात्मिक गुरु को याद करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं और सेवा संसार में उनके लाखों अनुयायियों का मार्गदर्शन हमेशा करती रहेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्री सत्य साईं बाबा का शताब्दी समारोह कार्यक्रम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक दिव्य वरदान है। भले ही साईं बाबा भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं, फिर भी उनका प्रेम और सेवा भावना करोड़ों लोगों के लिए मार्गदर्शक शक्ति है।” उन्होंने ये भी कहा कि 140 देशों में सत्य साईं बाबा के लाखों भक्तों को नई रोशनी और दिशा मिल रही है। उनके अनुयायी लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा ने सेवा को मानव जीवन के फोकस में रखा। हमारी अलग-अलग आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराएं एक ही विचार की तरफ ले जाती हैं, चाहे कोई भक्ति, ज्ञान या कर्म के रास्ते पर चले। गरीबों के कल्याण के लिए अपनी सरकारी योजनाओं को बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब उनपर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हो रही है।

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‘500-600 करोड़ की फिल्मों की बात अब नहीं’, दीपिका का बड़ा बयान

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साल 2025 की शुरुआत में दीपिका के पास 2 बड़ी फिल्में थीं, लेकिन साल के खत्म होने तक इन दोनों ही फिल्मों से दीपिका बाहर हो गईं. पहले एनिमल डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म स्पिरिट से उनका पत्ता साफ कर दिया गया. अब नाग आश्विन की फिल्म कल्कि 2 से भी उन्हें आउट कर दिया गया है.
दीपिका पादुकोण बीते कुछ समय से काम के 8 घंटों की बहस को लेकर भी सुर्खियों में थीं. अब एक्ट्रेस ने अपने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया है कि जिन फिल्मों से उन्हें बाहर किया गया है,वह उनके लिए एक्साइटेड नहीं थी. वह सिर्फ स्टोरीटेलिंग पर फोकस कर रही हैं.

500–600 करोड़ की फिल्मों से फर्क नहीं पड़ता

दीपिका ने बाजार इंडिया को दिए इंटरव्यू में अपने करियर को लेकर कहा कि अब उनका फोकस अब स्टोरी टेलिंग पर है. उन्होंने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो कितना और फेम, कितनी और सक्सेस, कितना और पैसा?अब इस स्टेज पर ये सब कुछ मायने नहीं रखता. अब बात 100 करोड़ी फिल्मों, या 500–600 करोड़ की फिल्मों का भी नहीं है. अब मुझे टैलेंट को एमपॉवर करने में अच्छा लगता है, मेरी टीम और मैं अब स्टोरीटेलिंग पर फोकस करना चाहते हैं. अब हम कुछ अलग क्रिएटिव लोगों, राइटर्स, डायरेक्टर्स और यहां तक कि नए प्रोड्यूसर्स को मौका देना चाहते हैं. अब मुझे ये चीजें ज्यादा मीनिंगफुल लगती हैं

खबरों की मानें तो दीपिका को उन दो फिल्मों से इसलिए आउट किया गया है क्योंकि वह 8 घंटे काम करने की डिमांड कर रही थीं और ये भी इसलिए क्योंकि वह हाल ही में मां बनी हैं. अब फिल्म में दीपिका की जगह तृप्ति डिमरी नजर आने वाली हैं. इसके बाद फिर खबर आई कि दीपिका अब कल्कि 2898 एडी के सीक्वल से भी बाहर हो गई हैं|

इन फिल्मों में आएंगी नजर

बात अगर दीपिका की आने वाली फिल्मों की करें तो दो बड़ी फिल्मों से बाहर होने के बाद भी उनके पास दो बड़ी फिल्मों के ऑफर और हैं. वह शाहरुख खान और सुहाना खान की फिल्म किंग में नजर आने वाली हैं. इसके अलावा उनके पास साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की एक फिल्म में भी काम कर रही हैं. जिसका टाइटल अभी जारी नहीं किया गया.

शशि थरुर की पोस्ट पर सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार, मुझे पीएम मोदी के भाषण में कुछ भी सराहनीय नहीं लगा 

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर सांसद शशि थरूर द्वारा की गई सकारात्मक समीक्षा को खारिज कर कहा कि उन्हें भाषण में सराहना लायक कुछ भी नहीं लगा। कांग्रेस सांसद थरूर के पोस्ट का जवाब देकर श्रीनेत ने कहा कि मुझे प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सराहना लायक कुछ भी नहीं लगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को कई बातों का जवाब देना चाहिए।
श्रीनेत ने कहा कि वे एक अखबार के कार्यक्रम में थे। उन्हें हमें बताना चाहिए था कि निष्पक्ष पत्रकारिता से उन्हें क्या दिक्कत है। उन्हें बताना चाहिए था कि वे सच दिखाने और बोलने वालों से खुश क्यों नहीं हैं। श्रीनेत ने कहा कि मुझे उनकी सराहना करने का कोई कारण नहीं दिखा। मुझे नहीं पता कि उन्हें (शशि थरूर) इसकी कोई वजह कैसे मिल गई। मुझे वहां एक तुच्छ भाषण लगा। उन्होंने वहाँ भी कांग्रेस की आलोचना की।
उनकी टिप्पणी थरूर की पोस्ट के माध्यम से की गई प्रतिक्रिया से बिल्कुल विपरीत थी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रकाश डाला था। थरूर ने लिखा कि उन्होंने व्याख्यान में भाग लिया था और उन्होंने देखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के लिए भारत की रचनात्मक अधीरता की बात की थी और उपनिवेशवाद-विरोधी मानसिकता पर ज़ोर दिया था। कांग्रेस नेता थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को उभरता हुआ बाज़ार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक उभरता हुआ मॉडल बताया, देश के आर्थिक लचीलेपन पर ज़ोर देकर कहा कि वह लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए चुनावी मूड में नहीं, बल्कि भावनात्मक मूड में हैं।
थरूर ने कहा कि भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैकाले की 200 साल पुरानी गुलामी मानसिकता की विरासत को पलटने और भारत की विरासत, भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों में गौरव बहाल करने के लिए 10 साल के राष्ट्रीय मिशन की अपील पर केंद्रित था। उन्होंने कहा, बुरी सर्दी और खांसी से जूझने के बावजूद दर्शकों के बीच उपस्थित रहकर खुशी हुई!

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