बिहार हार को लेकर पीके बोले- ईवीएम हेरफेर के प्रमाण नहीं पर कुछ तो गड़बड़ हुआ 

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जंगलराज लौट आएगा फैक्टर भी हार का एक बड़ा कारण 

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद जन सुराज के संस्थापक और चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनता में जंगल राज की वापसी को लेकर फैली आशंका और कुछ छिपे हुए कारक उनकी पार्टी की हार की बड़ी वजह बने। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उनके आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं हैं। 
एक इंटरव्यू के दौरान पीके ने कहा, कि चुनाव के अंतिम चरण में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मान लिया कि जन सुराज जीतने की स्थिति में नहीं है, और उन्हें डर था कि वोट बंटने से लालू यादव के पुराने जंगल राज की वापसी हो सकती है। पीके ने कहा, अगर लोग सोचते हैं कि हमारा वोट किसी तरह आरजेडी की वापसी का मार्ग खोल देगा, तो वे जोखिम नहीं लेना चाहते। यह डर हमारे खिलाफ गया। 

238 सीटों पर उतारे थे प्रत्याशी, जीता एक भी नहीं  
बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 238 पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद जन सुराज एक भी सीट नहीं जीत सकी। अनुमानित वोट शेयर 2–3 प्रतिशत के बीच रहा और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। ऐसे में पीके ने कहा, उनकी 18 महीने लंबी ‘जन सुराज यात्रा’ के दौरान मिला जनमत परिणामों से बिल्कुल मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा, कुछ ऐसा हुआ है जो समझ से परे है। जिन पार्टियों को लोग मुश्किल से जानते थे, उन्हें भी लाखों वोट मिले। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि यह संदेह मात्र है, सबूत नहीं। 

कुछ तो गलत हुआ 
प्रशांत किशोर ने कहा, कि कुछ लोग उन्हें ईवीएम में हेरफेर का आरोप लगाने को कह रहे, लेकिन वे ऐसा दावा बिना सबूत के तो नहीं कर सकते हैं। इसके मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन प्रथम दृष्टया कुछ तो गड़बड़ लगता है, पर क्या— यह नहीं पता। 

आरजीआई एयपोर्ट पर बम की धमकी निकली अफवाह   

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हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बम रखे होने धमकी जांच के बाद अफवाह निकली। दरअसल एयरपोर्ट पर बम रखे होने संबंधी एक ईमेल मिला था, जिसके बाद जांच की गई। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि हवाई अड्डे के ग्राहक सेवा विभाग को शुक्रवार को एक बम वाला ईमेल मिला था। इस ईमेल में कहा गया था, कि हवाई अड्डे के आगमन इलाके में बम फटेगा। इस ईमेल के माध्यम से संबंधित जगह की जांच करने और यात्रियों को हवाई अड्डा खाली करने का सुझाव देने को भी कहा गया था। पुलिस के अनुसार जांच करने के बाद  बम की धमकी अफवाह साबित हुई।   

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मौर्य बोले- अगला नंबर पश्चिम बंगाल में ममता दीदी और फिर यूपी में अखिलेश का 

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लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत से खासे खुश उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ऐसा कुछ कह दिया है, जिसकी चर्चा चारों ओर हो रही है। दरअसल मौर्य का कहना है, कि बिहार के बाद अब अगला नंबर ममता दीदी जी और फिर सपा बहादुर अखिलेश यादव का है। 
दरअसल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक दिन पहले ही भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग पर साजिश रचने का आरोप लगाया था, जिसके बाद रविवार को डिप्टी सीएम मौर्य ने संकेत दिया, कि अगले चुनावों में पश्चिम बंगाल और फिर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को पराजय का सामना करना पड़ेगा। मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेट्फार्म ‘एक्स’ में एक पोस्ट करते हुए कहा, कि बिहार चुनाव के दरम्यान खुद गोता लगाने के साथ राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव को लपेटे में लेकर महागठबंधन का भविष्य भी लिख दिया। अब अगला नंबर ममता दीदी जी (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) और फिर सपा बहादुर अखिलेश यादव का है। 
बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के सह प्रभारी रहे डिप्टी सीएम मौर्य की इस पोस्ट को लेकर अब राजनीतिक गलियारे में जोर-शोर से चर्चा शुरु हो गई है। इसके बहाने एक बार फिर केंद्र और चुनाव आयोग निशाने पर आ गए हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने दो तिहाई बहुमत से जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया। ऐसे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा, कि भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर साजिश के तहत उन विधानसभा क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बहाने 50 हजार से अधिक वोट काटने की तैयारी कर रहे हैं, जहां 2024 में लोकसभा चुनाव में सपा और इंडिया गठबंधन ने जीत हासिल की थी। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दावा किया कि उन्हें जानकारी हासिल हुई है कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जीत पक्की करने भाजपा ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर बड़ी तैयारी की हुई है। 

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चुनाव आयोग का कड़ा रुख, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समय सीमा में नहीं होगा कोई बदलाव; 25 नवंबर तक पूरा करना होगा काम

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एसआईआर पर बवाल, बीएलओ हलकान
एक-एक गणना प्रपत्र को डिजिटाइज्ड करने में लग रहा काफी समय
विवाहित महिलाओं के मायके के रिकॉर्ड बने एसआईआर अभियान में बाधा

नई दिल्ली/भोपाल, चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को फिर स्पष्ट कर दिया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया की अवधि बढ़ाई नहीं जाएगी। बीएलओ को आगामी 25 नवंबर तक भरे गए गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे बीएलओ परेशान हो गए हैं। इसकी वजह है कि एसआईआर के दौरान मतदाता का 2003 के वोटर लिस्ट से मिलान परेशानी का सबब बन गया है। एसआईआर को लेकर बीएलओ ही नहीं मतदाता भी परेशान हो रहे हैं।
आयोग का भी मानना है कि बीएलओ पर काम का काफी दबाव है, हालांकि इसके साथ यह भी कहा कि गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का काम समय पर समाप्त नहीं होने पर आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। मालूम हो कि काम के दबाव में कई बीएलओ के अस्वस्थ और हताहत होने की खबर भी है। बीएलओ का एक वर्ग इसे लेकर विरोध जता रहा है। उसका कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से आए दिन नए-नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। एक-एक गणना प्रपत्र को डिजिटाइज्ड करने में काफी समय लग रहा है। इतने कम समय में काम को पूरा करना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। जिला चुनाव अधिकारियों की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष ये सारी बातें रखी गई हैं लेकिन आयोग ने साफ कर दिया है कि समय सीमा बढ़ाना संभव नहीं है।
गणना प्रपत्र का एक ही भाग भर पा रहे मतदाता
 एसआईआर अभियान में मतदाता गणना प्रपत्र के तीन में से एक ही भाग को भर पा रहे हैं। मतदाताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि क्या जानकारी दें। बीएलओ भी उनकी इस दुविधा को दूर नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष 2003 की मतदाता सूची न मिल पाने से मतदाता परेशान हैं। बीएलओ से जो गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए हैं उसमें तीन भाग है। पहला भाग तो मतदाता आसानी से भर ले रहे है, लेकिन परेशानी दूसरे व तीसरे भाग को लेकर है। दूसरे भाग में वर्ष 2003 के हिसाब से जानकारी देनी है, जबकि तीसरे भाग में जिन मतदाताओं के नाम 2003 नहीं है उनको जानकारी देनी है। 2003 की मतदाता सूची न मिलने से मतदाता असमंजस में हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था और लगातार मतदान करते आ रहे हैं तो फिर प्रपत्र में इतनी ज्यादा जानकारी देने के लिए क्यों कहा जा रहा है।

नाम कटने का डर
लोगों को संदेह है कि प्रपत्र का सिर्फ एक भाग भरने से कहीं उनका नाम सूची से कट न जाए। बीएलओ से ही साल 2003 की मतदाता सूची मांगने पर बीएलओ सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध होने की बात कहते हैं। मतदाता हरिओम बताते हैं कि वह 20 साल से अधिक समय से वोट डाल रहे हैं। 2003 की मतदाता सूची नहीं है। इसलिए प्रपत्र भरने में दिक्कत आ रही है। एसआइआर फार्म में जन्मतिथि, आधार, मोबाइल, माता-पिता और पति-पत्नी का नाम भरना अनिवार्य है। लेकिन उन विवाहित महिलाओं के फार्म में सबसे अधिक दिक्कत आती है जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में मायके के पते पर दर्ज था। शादी के बाद वे ससुराल आ गईं, जबकि पुराने दस्तावेजों में उनकी जानकारी मायके के पते से जुड़ी हुई है। बीएलओ बताते हैं कि सत्यापन के लिए 2003 की वोटर लिस्ट में उनका बूथ नंबर, विधानसभा और क्रम संख्या खोजना पड़ता है, जो समय-साध्य प्रक्रिया है। कई बार रिकार्ड पुरानी फाइलों में होने के कारण मिलान में देरी होती है।

बार-बार बीएलओ एप में हो रहा संशोधन
बीएलओ एप में बार-बार हो रहे संशोधन से परेशान हैं। उन्हें रोजाना एप का नया वर्जन डाउनलोड करना पड़ रहा है। कुछ देर तो एप सही चलता है, लेकिन फिर इसकी स्पीड बहुत धीमी हो जाती है। एक-एक वोटर को वेरिफाई करने में बीएलओ को खूब पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। उधर, बार-बार अधिकारियों के फोन और ऑनलाइन फीडिंग की रिपोर्ट मांगी जा रही है।

अगर आपके पास वोट हैं, तो मेरे पास फंड, हमें रिजेक्ट करोगे तो हम भी…

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डिप्टी सीएम अजित पवार के पंचायत चुनाव में दिए बयान पर सियासत गरमाई  

पुणे। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के मालेगांव में पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान दिए बयान पर सियासत गरमा गई है। दरअसल अजित पवार ने एक रैली में वोटर्स से कहा था कि अगर आपके पास वोट है, तो मेरे पास फंड है। विपक्ष ने इसे लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछा है।
बता दें अजित पवार ने कहा था कि अगर जनता उनकी पार्टी के उम्मीदवार को चुनेंगे तो वे शहर में फंड की कोई कमी नहीं होने देंगे, लेकिन यदि वे उन्हें रिजेक्ट करते हैं, तो वे भी रिजेक्ट कर देंगे। आपके पास वोट हैं, मेरे पास फंड है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार शुक्रवार को बारामती तहसील में मालेगांव नगर पंचायत चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे। पवार महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्री भी हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने अजित पवार पर मतदाताओं को धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि फंड आम लोगों के टैक्स से आता हैं, न कि अजित पवार के घर से। अगर पवार जैसे नेता वोटर्स को धमका रहे हैं, तो चुनाव आयोग क्या कर रहा है?” नगर पंचायत चुनाव 2 दिसंबर को होना हैं। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और बीजेपी समर्थित पैनल ने मालेगांव में गठबंधन किया है। मालेगांव बारामती का वह इलाका है, जहां अजित पवार परिवार का राजनीतिक प्रभाव है।
बता दें इससे पहले भी 26 सितंबर को अजित पवार मराठवाड़ा के धाराशिव में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे थे। यहां पर उनका किसानों से बातचीत का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कर्ज माफी की मांग पर गुस्सा करते नजर आ रहे हैं। जब एक किसान ने कर्ज माफी की मांग की तो डिप्टी सीएम अजित पवार ने गुस्से में कहा था- इसे मुख्यमंत्री बना दो! क्या तुम्हें लगता है कि हम कंचे खेलने आए हैं?

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प्रदूषण के कारण बढ़ रही प्रीमेच्योर डिलीवरी

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रोहतक। हरियाणा में वायु प्रदूषण का असर अब गर्भवती व नवजात शिशुओं पर भी पडऩे लगा है। प्रीमेच्योर डिलीवरी की संख्या बढऩे लगी है। यह दावा पीजीआई रोहतक के गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने किया है। उन्होंने बताया कि यहां एक साल में 13,500 की डिलीवरी हुई। इनमें से 18 प्रतिशत यानि 2430 बच्चे प्रीमेच्योर हुए। इसका मुख्य कारण प्रदूषण भी है क्योंकि हवा में घुला जहर सांसों के जरिए शरीर में जा रहा है। यह खून में मिलकर गर्भस्थ शिशु तक पहुंच रहा है। हवा की खराब गुणवत्ता के कारण खांसी-जुकाम व अस्थमा की समस्या बढ़ गई हैं। यह स्थिति गर्भवती के लिए नुकसानदायक है। ज्यादा खांसी का भी गर्भ पर असर पड़ता है। ये सभी कारण बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का कारण बनते हैं। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मलेरिया, डेंगू होने पर भी समय से पहले बच्चे के जन्म लेने की संभावना रहती है।
डॉ. दहिया के मुताबिक 36 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को प्रीमेच्योर कहा जाता है। कई बच्चे 28 सप्ताह से पहले, 28 से 32 सप्ताह के बीच और 37 सप्ताह से पहले जन्म ले रहे हैं। इनमें से सिर्फ 34 से 36 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले बच्चों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। बच्चा जितना जल्दी पैदा होगा, जोखिम उतना ही अधिक होगा।

ऐसे सावधानी बरतें
डॉ. दहिया ने बताया कि नियमित जांच व डॉक्टर की सलाह से दवाई लेकर प्रीमेच्योर डिलीवरी को कम किया जा सकता है। एनिमिया ग्रस्त महिलाओं के जागरूक होने से प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचा जा सकता है। हरी सब्जियां, दूध, लस्सी के सेवन से पोषण की कमी पूरी की जा सकती है।

 बच्चों को आती हैं ये समस्याएं
समय पूर्व जन्मे बच्चे बाहरी तापमान सहन नहीं कर पाते हैं। उनमें हाइपोथेरेमिया, हाइपरग्लेसेमिया, पीलिया व इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है। इन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। कमजोर होने के कारण उनके रेटिना यानि देखने की शक्ति में भी कमी आ सकती है। इंफेक्शन जल्दी होने की आशंका रहती है। बाल्यावस्था में ध्यान न देने पर आईक्यू कम हो सकता है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर बोला हमला, कहा-एसआईआर कोई सुधार नहीं, थोपा गया जुल्म

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर एक बार फिर सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने एसआईआर के नाम पर देश भर में अफरा-तफरी मचा रखी। अब इसके नतीजे भी सामने आने लगे। एसआईआर की वजह से पिछले करीब 3 हफ्तों में 16 बूथ स्तर अधिकारियों की जान चली गई।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि इन बीएलओ में से किसी काम के दबाव के चलते आत्महत्या कर ली तो किसी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आज भी सैकड़ों बीएलओ भारी तनाव में एसआईआर का काम कर रहे हैं। देखा जाए तो एसआईआर कोई सुधार नहीं है, यह एक तरह से लोगों पर थोपा गया जुल्म है। राहुल ने आगे कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम बनाया है। अब आयोग के अधिकारी बीएलओ पर दबाव डाल रहे हैं। यही दबाव, तनाव, हार्टअटैक और आत्महत्या का कारण बन रहा है।

चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल लेकर खड़ा
राहुल गांधी ने आगे कहा कि चुनाव आयोग ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हजारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ रहे हैं। मकसद साफ है। सही मतदाता थककर हार जाए और वोट चोरी बिना रोक-टोक जारी रहे। राहुल गांधी ने तंज करते हुए कहा कि भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है।

विशेष गहन पुनरीक्षण एक सोची-समझी चाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर नीयत साफ होती तो लिस्ट डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती। चुनाव आयोग 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित समय ले कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता। राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर एक सोची-समझी चाल है, जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और बीएलओ की अनावश्यक दबाव से मौतों को कॉलैटरल डैमेज मान कर अनदेखा किया जा रहा है। यह नाकामी नहीं, षडय़ंत्र है और सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है।

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 “सीमाएं बदलती रहती हैं… संभव है सिंध एक दिन फिर भारत का हिस्सा बने”

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को दिल्ली में आयोजित सिंधी समाज सम्मेलन में संबोधित करते हुए कहा कि भले ही आज सिंध भौगोलिक रूप से भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सभ्यतागत रूप से वह हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सीमाएं बदल सकती हैं और “कौन जानता है, कल सिंध फिर भारत में वापस भी आ जाए।”
राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत–पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पाकिस्तान का सिंध प्रांत भारतीय उपमहाद्वीप में बसे सिंधी समुदाय का मूल स्थान है और सिंधु घाटी सभ्यता का उद्गम स्थल भी इसी क्षेत्र में है।

लाल कृष्ण आडवाणी का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने विभाजन के बाद भी सिंधी हिंदुओं के सिंध क्षेत्र से भावनात्मक जुड़ाव को सामने रखते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की पुस्तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी के शब्दों में, “कई सिंधी हिंदू आज भी सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि सिंध के कई मुसलमान भी सिंधु नदी को अत्यंत पवित्र मानते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “सिंध के लोग आज जहां भी हों, वे हमारे अपने हैं।”

सीएए का किया समर्थन 
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों पर लंबे समय से अत्याचार होते रहे हैं, उनके घर जलाए गए, परिवारों को सताया गया और जबरन धर्मांतरण तक करवाए गए।
उन्होंने पुराने शासनकाल की तुष्टिकरण राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि “वोट बैंक की राजनीति में असली पीड़ितों की उपेक्षा की गई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके दर्द को समझा और इसलिए सीएए लाया गया।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून उन लोगों के लिए है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए थे।

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जैश मॉड्यूल में गहरे वैचारिक और वित्तीय मतभेद हुए उजागर

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नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम विस्फोट की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद के इस आतंकी मॉड्यूल के भीतर विचारधारा, हमले की रणनीति और धन के उपयोग को लेकर गहरी फूट थी। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी और बाकी सदस्यों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि उमर ने अक्टूबर में अपने साथी अदील राथर की शादी में भी शामिल होने से इनकार कर दिया था।जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मुजम्मिल गनई, अदील राथर और मुफ्ती इरफान वागे अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित थे, जो पश्चिमी देशों और दूर के दुश्मनों पर हमले को प्राथमिकता देती है। वहीं डॉ. उमर उन नबी आईएसआईएस की कट्टर विचारधारा की ओर झुके हुए थे। उनका मानना था कि पहले करीबी दुश्मन (भारत) को निशाना बनाना चाहिए और खिलाफत स्थापित करना ही सर्वोच्च लक्ष्य है। 
उमर खुद को कश्मीर के कुख्यात आतंकियों बुरहान वानी और जाकिर मूसा की विरासत का उत्तराधिकारी मानता था। यही वैचारिक टकराव मॉड्यूल की एकता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया था। समूह के अधिकांश सदस्य (वागे को छोड़कर) पहले अफगानिस्तान जाकर प्रशिक्षण लेना चाहते थे, लेकिन असफल रहे। इसके बाद उन्होंने भारत में ही बड़ा हमला करने का फैसला किया। डॉ. उमर 2023 से ही इंटरनेट पर आईईडी बनाने की तकनीक पर गहन रिसर्च कर रहा था और फरीदाबाद में किराए के मकान में रसायनों के साथ प्रयोग करता था। मॉड्यूल को मिले फंड को लेकर भी तीखी नोंक-झोंक थी। उमर पर धन के दुरुपयोग का आरोप था। जांच में पता चला है कि मुख्य वित्तीय सहायता अल फलाह विश्वविद्यालय की छात्रा शाहीन शाहिद अंसारी ने की थी, जो मुजम्मिल गनई की सहपाठी थी। शाहीन ने कथित तौर पर संगठित क्राउडफंडिंग से करीब 20 लाख रुपये जुटाए थे। वह जैश की महिला भर्ती शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’से जुड़ी थी और फरीदाबाद ऑपरेशन के लिए धन व संसाधन जुटाने में अहम भूमिका निभा रही थी।
अक्टूबर में मुफ्ती इरफान वागे की गिरफ्तारी के बाद उमर ने 18 अक्टूबर को कश्मीर के काजीगुंड में बाकी सदस्यों से मुलाकात की। इस बैठक में उसने अपने साथियों को अपनी आईएसआईएस-प्रेरित रणनीति पर सहमत करने की कोशिश की और कथित तौर पर सफल भी रहा। ठीक तीन सप्ताह बाद दिल्ली में विस्फोट हो गया।वागे की गिरफ्तारी से पुलिस को पूरे मॉड्यूल तक पहुंच मिली। फरीदाबाद से 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जिसमें उच्च क्षमता वाले विस्फोटक, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, रिमोट कंट्रोल और प्रज्वलन उपकरण शामिल थे। उमर और गनई दोनों के पास उस कमरे की चाबियां थीं जहां यह सामग्री छिपाई गई थी। यह मामला दर्शाता है कि आतंकी संगठन कितने भी संगठित दिखें, उनके अंदर वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेद उन्हें कमजोर करते हैं। फिर भी, ये मतभेद आम नागरिकों की जान लेने से उन्हें नहीं रोक पाते।

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नए श्रम कानूनों को लेकर ट्रेड यूनियन ने किया विरोध, बुधवार को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

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नई दिल्ली। भारत के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी और कॉर्पोरेट हितैषी बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की है। इन यूनियनों ने आगामी बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है। ज्यादातर विपक्षी दलों से जुड़े ये यूनियन पिछले पांच साल से इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। चारों श्रम संहिताएँ (वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता) वर्ष 2019-20 में संसद से पारित हो चुकी थीं और अब धीरे-धीरे लागू हो रही हैं।
सरकार का दावा है कि इन संहिताओं से ब्रिटिश काल के 29 जटिल श्रम कानूनों को चार आसान कोड में समेटा गया है, जिससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार सृजन होगा और मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा बेहतर कार्य दशाएं मिलेंगी। लेकिन ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये कानून मजदूरों के साथ धोखा हैं। इनसे कंपनियों को कर्मचारियों को बिना वजह निकालने, शिफ्ट की अवधि बढ़ाने और ठेका मजदूरी को बढ़ावा देने की खुली छूट मिल गई है। मुख्य बदलावों में फैक्ट्रियों में कार्य दिवस 12 घंटे तक करने की अनुमति, महिलाओं के लिए रात्रि पाली की छूट, छंटनी के लिए सरकारी अनुमति की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी करना और छोटी-मझोली कंपनियों को पहले से ज्यादा छूट शामिल हैं। कारोबारी संगठन इन बदलावों से खुश हैं क्योंकि उनका मानना है कि पुराने कानून मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पीछे रखते थे। भारत की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा अभी भी 20 प्रतिशत से कम है।
हालांकि सब एक मत नहीं हैं। छोटे-मझोले उद्यमियों का संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन एंटरप्रेन्योर्स’ ने भी चिंता जताई है कि नए नियमों से उनका परिचालन खर्च बहुत बढ़ जाएगा और कई सेक्टर में कारोबार बाधित होगा। उन्होंने सरकार से ट्रांजिशन सपोर्ट और लचीला क्रियान्वयन मांगा है। दूसरी ओर, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इन संहिताओं का खुला समर्थन किया है और राज्यों से कुछ मामूली मुद्दों पर बातचीत के बाद इन्हें शीघ्र लागू करने को कहा है। श्रम मंत्रालय जून 2024 से अब तक यूनियनों से दर्जन भर बैठकें कर चुका है, पर कोई सहमति नहीं बनी। अब सभी राज्य अपने-अपने नियम बनाकर इन कोड को लागू करेंगे। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार नहीं झुकी तो बुधवार का विरोध प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत होगा।

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