असम में सुबह-सुबह डोली धरती, मोरीगांव में 5.1 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे, जानें अपडेट

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गुवाहाटी: असम के मोरीगांव में सोमवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. ताजा जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र असम का मोरीगांव जिला था. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता करीब 5.1 मापी गई है. यह भूकंप तड़के करीब 4 बजकर 17 मिनट पर आया.

असम के साथ-साथ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में भूंकप आने की खबर मिली है. लोग गहरी नींद में थे, झटका महसूस होते ही लोग घबरा गए और घरों से बाहर निकल आए. इस संबंध में अधिकारियों ने कहा कि अभी तक किसी के घायल होने या किसी नुकसान होने की कोई खबर नहीं है. भूकंप ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मोरीगांव जिले में 50 किमी. की गहराई पर महसूस किया गया. उन्होंने बताया कि भूकंप का केंद्र मध्य असम में था.

 

 

असम के पड़ोसी जिलों कामरूप मेट्रोपॉलिटन, नागांव, ईस्ट कार्बी आंगलोंग, वेस्ट कार्बी आंगलोंग, होजई, दीमा हसाओ, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराईदेव, कछार, करीमगंज, हैलाकांडी, धुबरी, साउथ सलमारा-मनकाचर और गोलपारा में भी लोगों ने झटके महसूस किया. ब्रह्मपुत्र के उत्तरी किनारे पर बसे दरांग, तामुलपुर, सोनितपुर, कामरूप, विश्वनाथ, उदलगुरी, नलबाड़ी, बाजाली, बारपेटा, बक्सा, चिरांग, कोकराझार, बोंगाईगांव और लखीमपुर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.

भूकंप का असर मध्य-पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों, पूरे मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में महसूस किया गया. रिपोर्ट में बताया गया कि मध्य-पूर्वी भूटान, चीन के कुछ हिस्से और बांग्लादेश भी हिल गए हैं. उत्तर-पूर्वी इलाका हाई सिस्मिक जोन में आता है, जिससे यहां भूकंप का डर हमेशा बना रहता है.

त्रिपुरा में भी लगे झटके
वहीं, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, सोमवार सुबह त्रिपुरा में 3.9 तीव्रता के भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. जानकारी के मुताबिक यह झटके सोमवार सुबह करीब 3 बजकर 33 मिनट पर 54 किलोमीटर की गहराई पर आया.

‘बांग्लादेश को पाकिस्तान न समझें’, मुस्तफिजुर रहमान पर फैसले से हिल गई राजनीति

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Shashi Tharoor Interview: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से बांग्लादेशी खिलाड़ी को बाहर करने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने इसे नासमझी भरा फैसला बताते हुए कहा कि बांग्लादेश पाकिस्तान नहीं है. वह आतंकवादी नहीं भेजता. खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि मैं इस मुद्दे पर पहले से ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका हूं.

क्या बोले शशि थरूर?
BCCI द्वारा KKR से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज़ किए जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से यह तर्क दे रहा हूं कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए, या यूं कहें कि राजनीतिक नाकामियों का मुख्य बोझ खेल पर नहीं डालना चाहिए. असल बात यह है कि हम बांग्लादेश के साथ कई दूसरे तरीकों से भी निपट रहे हैं, क्योंकि हमें ऐसा करना ही है. हमारे विदेश मंत्री कुछ दिन पहले ही वहां थे और उनसे मिले जिनके बारे में व्यापक रूप से उम्मीद है कि वे अगले चुनाव के संभावित विजेता होंगे और इसलिए संभावित प्रधानमंत्री होंगे.”

खेल को राजनीति से अलग रखें
उन्होंने आगे कहा कि हम बांग्लादेश के लोगों के साथ जुड़ाव के कई पहलुओं पर काम कर रहे हैं. अल्पसंख्यकों के खिलाफ हाल की ज्यादतियों पर, जिनके बारे में मैंने खुद आवाज उठाई है, हम पहले ही सरकार से सड़कों पर इन कानून तोड़ने वाले तत्वों पर कानून-व्यवस्था लागू करने का आग्रह कर रहे हैं. शशि थरूर बोले कि विशुद्ध रूप से क्रिकेट के लिहाज से अगर देखें तो इस निर्णय का कोई मतलब ही नहीं निकलता, क्योंकि टीमों को बीसीसीआ द्वारा चयनित रजिस्टर्ड खिलाड़ियों के समूह से चयन करने के लिए आमंत्रित किया गया था. ऐसे में केकेआर को चुनने के लिए दोषी क्यों ठहराया गया?

बांग्लादेश पर बोले शशि थरूर?
शशि थरूर ने बांग्लादेश को लेकर कहा कि बांग्लादेश के साथ हमारा बेहद नाजुक राजनयिक और राजनीतिक संबंध है. वहां पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. इसके परिणामस्वरूप अल्पसंख्यकों के ऊपर हमले हुए, जिसकी वजह से भारत में भी तनाव बढ़ गया. हम स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन सीधे-सीधे कहना कि हम सभी बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करेंगे. इससे बहुत गलत संदेश जाता है.

बांग्लादेश कोई पाकिस्तान नहीं
उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश कोई पाकिस्तान नहीं है. वह सीमा पार आतंकवादियों को नहीं भेज रहा. ऐसे में दोनों देशों की तुलना करना बिल्कुल भी संभव नहीं है. दोनों देशों के साथ भारत के संबंध अलग हैं. बांग्लादेश के साथ हमारी बातचीत या कूटनीति का स्तर पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों से बिल्कुल अलग है.

उमर खालिद को जमानत नहीं, 5 आरोपियों को राहत

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SC On Omar Khalid : मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े केस में अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं, इसी मामले में नामजद पांच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई है। उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं। इस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका की तुलना अन्य आरोपियों से नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, दोनों की भूमिका “गुणात्मक रूप से अलग” है और वे अलग फुटिंग पर खड़े हैं। इसी आधार पर उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

इन पांच आरोपियों को मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद को जमानत दी है। कोर्ट ने इन सभी को सख्त नियम और शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

SC On Omar Khalid फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 संविधान का मूल आधार है और विचाराधीन कैद को सजा के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, UAPA एक विशेष कानून है, जो ट्रायल से पहले जमानत की शर्तों को कड़ा बनाता है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में त्वरित सुनवाई बेहद जरूरी है।

गुल्फिशा फातिमा के मामले में कोर्ट ने समानता के अधिकार को ध्यान में रखा, क्योंकि वह लंबे समय से जेल में बंद एकमात्र महिला आरोपी थीं। इस फैसले ने एक बार फिर UAPA मामलों में जमानत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर बहस को तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने पत्र लिखकर दी बड़ी चेतावनी, इस एक गलती से मच सकता है हड़कंप

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CM Yogi letter: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेश की जनता के नाम ‘योगी की पाती’ पत्र शेयर किया है. उन्होंने पत्र में लगातार बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्‍ट जैसी ठगी’ से प्रदेशवासियों को आगाह किया है. इसके साथ ही सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने पत्र के माध्यम के बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर ने जीवन को सुगम तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं. ऐसे में सब जागरुक रहकर ही बच सकते हैं.

योगी की पाती’ में क्या लिखा?
सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘योगी की पाती’ नाम का एक पत्र लिखा, “मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, मोबाइल और कंप्यूटर ने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, परंतु इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं. आपकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है.”

कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं
2017 से पूर्व प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे. आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील है. साथ ही सभी जनपदीय थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है. साइबर ठगों के विरुद्ध सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र है. यह अपराधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे झूठे और भ्रामक शब्दों का प्रयोग कर निर्दोष नागरिकों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं. देश के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, वॉट्सऐप, या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है.

साइबर अपराध होने पर क्या करें?
सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सावधान रहना होगा. आप जो तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उसके माध्यम से अपराधी पहले आपके बारे में सूचनाएं जुटाते हैं और इन्हीं सूचनाओं को आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं. अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें. सावधानी के पश्चात भी यदि आपके साथ साइबर अपराध हो जाता है, तो सर्वप्रथम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें. जितना शीघ्र आप पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी. जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को. आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें.

पहले भी लिख चुके हैं पाती?
बता दें, इससे पहले भी नए साल के अवसर पर सीएम योगी ने एक पत्र लिखकर लखनऊ और नोएडा को ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित करने करने की बात कही थी. इसके साथ ही जेवर में सेमीकंडक्टर यूनिट जैसी भविष्योन्मुखी परियोजनाओं के माध्यम से यूपी को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प दोहराया था. पिछले कई महीनों से सीएम योगी साइबर क्राइम को लेकर काफी एक्टिव हैं. इससे पहले भी एक बार साइबर क्राइम को लेकर अपनी पाती लिख चुके हैं.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली झलक आई सामने, जानें किन शहरों के बीच शुरू होगी यह हाई-टेक सेवा

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Vande Bharat Sleeper: भारतीय रेलवे एक और बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। Vande Bharat Sleeper Train को हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर चलाने की योजना बनाई गई है। इस आधुनिक स्लीपर ट्रेन का निर्माण सरकारी कंपनी BEML द्वारा किया गया है, जबकि इसकी मूल तकनीक ICF (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) ने विकसित की है। ट्रेन को नए नारंगी और ग्रे रंग के आकर्षक लुक में तैयार किया गया है, जिसका बाहरी डिजाइन पूरी तरह एरोडायनामिक है।

रेलवे के अनुसार, हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की औसत गति करीब 66 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। हालांकि, ट्रैक अपग्रेडेशन का काम जारी है और भविष्य में इसकी रफ्तार और बढ़ाई जा सकती है। इस ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 kmph है, जिसके कारण इसे सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की श्रेणी में रखा गया है। फिलहाल ट्रैक सीमाओं के कारण इतनी तेज गति संभव नहीं है।

Vande Bharat Sleeper Train में कुल 16 कोच होंगे। इनमें 11 कोच AC 3-टियर, 4 कोच AC 2-टियर और 1 कोच फर्स्ट AC का होगा। ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी। AC 3-टियर में 611, AC 2-टियर में 188 और फर्स्ट AC में 24 यात्रियों के लिए व्यवस्था की गई है।

यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में ऑटोमेटिक दरवाजे, आधुनिक वेस्टिब्यूल और बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ लगाई गई हैं। नया सस्पेंशन सिस्टम झटकों और शोर को कम करेगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी। साफ-सफाई के लिए विशेष डिसइंफेक्टेंट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में ‘कवच’ सिस्टम और इमरजेंसी टॉक-बैक सुविधा होगी, जिससे जरूरत पड़ने पर यात्री सीधे ड्राइवर से संपर्क कर सकेंगे। रेल मंत्रालय की योजना 2026 तक 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को देश के अलग-अलग रूटों पर चलाने की है, जिससे लंबी दूरी की रेल यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

T20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश बाहर हुआ तो क्या करेगा ICC? जानिए 3 बड़े विकल्प

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T20 World Cup 2026: को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की ओर से भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2026 से हटने के संकेत दिए गए हैं। अगर मुस्तफिजुर रहमान विवाद या किसी कूटनीतिक कारण से बांग्लादेश वास्तव में टूर्नामेंट से नाम वापस लेता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में एक असाधारण स्थिति होगी। चूंकि यह मेगा टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है, इसलिए ICC ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से विकल्प तैयार रखता है।

रिजर्व टीम को मिल सकता है मौका

अगर T20 World Cup 2026 शुरू होने से पहले बांग्लादेश हटता है, तो ICC क्वालीफिकेशन नियमों के तहत किसी दूसरी टीम को मौका दे सकता है। ग्लोबल क्वालीफायर में जो टीम बहुत करीब से क्वालीफाई करने से चूकी थी, उसे मुख्य ड्रॉ में शामिल किया जा सकता है। जिम्बाब्वे, यूएई और स्कॉटलैंड जैसी टीमें इस दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं।

वॉकओवर और फ्री पॉइंट्स का विकल्प

यदि बांग्लादेश टूर्नामेंट शुरू होने के बेहद करीब हटता है और नई टीम को बुलाने का समय नहीं बचता, तो ICC वॉकओवर का रास्ता अपना सकता है। ऐसे में ग्रुप की बाकी टीमों को बांग्लादेश के खिलाफ मैच के लिए सीधे 2 अंक और नेट रन रेट का लाभ मिल जाएगा। हालांकि, इससे टूर्नामेंट का रोमांच और ब्रॉडकास्ट वैल्यू प्रभावित होगी।

ग्रुप और शेड्यूल में बदलाव

ICC तीसरे विकल्प के रूप में ग्रुप फॉर्मेट और शेड्यूल में बदलाव कर सकता है। लेकिन टिकटिंग, वेन्यू और लॉजिस्टिक्स पहले से तय होने के कारण यह विकल्प सबसे जटिल माना जाता है।

नियमों के मुताबिक, T20 World Cup 2026 जैसे बड़े टूर्नामेंट से बिना ठोस सुरक्षा कारण हटने पर बांग्लादेश पर भारी जुर्माना, रैंकिंग नुकसान या भविष्य के टूर्नामेंट्स से प्रतिबंध भी लग सकता है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि बांग्लादेश के लिए वर्ल्ड कप छोड़ना आसान फैसला नहीं होगा।

भारत पर टैरिफ वॉर की तैयारी…रूसी तेल को लेकर ट्रंप के तेवर कड़े, जानें आपकी जेब पर इसका क्या होगा असर

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Trump Tariff: भारत के रूसी तेल आयात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे. प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. वे नेक इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं. मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था. वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बात एक पब्लिक एड्रेस में कही है. जिसमें उन्होंने भारत को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि हम चाहते हैं भारत, रूस से तेल की खरीद बंद कर दे. ट्रंप ने इस चेतावनी को भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत से जोड़ते हुए कही. हालांकि इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की.

रूसी तेल को लेकर कई बार दी चेतावनी
बता दें, कुछ महीने पहले ही ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा. हालांकि भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा था कि ट्रंप और मोदी के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है. रूसी तेल को लेकर अमेरिका कई बार भारत को चेतावनी दे चुका है.

50 प्रतिशत बढ़ा चुके हैं टैरिफ
अमेरिका ने इससे पहले भी रूसी तेल की भारी खरीदारी के लिए सजा के तौर पर भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर टैरिफ को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया था. हालांकि दोनों देश अभी एक ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई फाइनल समाधान नहीं निकल पाया है. अब देखना यह होगा कि ट्रंप इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाते हैं.

’25 हजार में बिहार की लड़कियां… गिरधारी साहू के बयान का कड़ा विरोध… पार्टी ने दी ये हिदायत

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देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य (Cabinet Minister Rekha Arya) के पति गिरधारी साहू के बयान को लेकर उत्तराखंड से बिहार तक माहौल गर्मा गया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें वह यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि बिहार की लड़कियां (Bihar Girls) 20-25 हजार में शादी के लिए मिल जाती हैं। उनके बयान पर उत्तराखंड भाजपा (Uttarakhand BJP) ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बिहार की महिलाओं को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति को हिदायत दी है।

उन्होंने मंत्री के पति को भविष्य में इस तरह की बयानबाजी न करने और सोच समझकर बयान देने की नसीहत दी। उनके बयान की कड़ी निंदा हो रही है और बिहार महिला आयोग ने भी इसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा है। संभव है कि सीएम द्वारा जल्द ऐक्शन लिया जाएगा।

इस तरह के बयान अति निंदनीय
इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी कैबिनेट मंत्री के पति को हिदायद दी। महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री के पति को इस तरह की बयानबाजी न करने को कहा गया है। हालांकि भट्ट ने कहा कि मंत्री के पति अपने बयान के लिए माफी भी मांग चुके हैं।

भाजपा का बयान देने वाले से संबंध नहीं: मनवीर
देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने वाले नेता का भाजपा से कोई संबंध नही है और पार्टी बयान की कड़ी निंदा करती है। शनिवार को बलवीर रोड स्थित प्रदेश मुख्यालय में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए चौहान ने कहा कि महिलाओं के बारे में अनर्गल बयानबाजी करने वाले कथित नेता न भाजपा संगठन में पदाधिकारी है और न ही उनका पार्टी से संबंध है। महिलाओं के संबंध मे ऐसी संयमित टिप्पणी की कड़ी निंदा करती है।

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News Desk

पिता ने छुट्टी पर घर आई बेटी की हत्या की, पढ़ाई जारी रखने से था नाराज

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श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब): जिले में रविवार सुबह एक पिता ने अपनी बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी. बेटी की उम्र सिर्फ 18 साल थी. यह घटना श्री मुक्तसर साहिब जिले के कबरवाला पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले गांव मिड्डा में हुई.

जानकारी के मुताबिक, मिड्डा गांव के रहने वाले हरपाल सिंह ने रविवार सुबह करीब 7 बजे सो रही बेटी पर धारदार चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. मृतक लड़की की पहचान चमनदीप कौर के रूप में हुई है. वहीं, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है.

कबरवाला पुलिस थाने की एसएचओ हरप्रीत कौर ने जानकारी देते हुए कहा कि “उन्हें इस घटना की जानकारी मिली और वे तुरंत मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है.”

एसएचओ ने बताया कि हत्या का कारण यह बताया जा रहा है कि मृतक लड़की का पिता नहीं चाहता था कि उसकी बेटी आगे पढ़े. जिसके चलते पिता ने यह कदम उठाया. पुलिस ने मृतक लड़की की मां जसविंदर कौर के बयानों पर केस दर्ज कर लिया है.

एसएचओ हरप्रीत कौर ने कहा कि “मृत लड़की पहले मोहाली में रहकर पढ़ाई कर रही थी. उसकी बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए मलोट के सिविल हॉस्पिटल भेज दिया गया है.”

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक लड़की चमनदीप कौर स्पोर्ट्स और पढ़ाई में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही थी. उसने पावर लिफ्टिंग में गोल्ड मेडल भी जीता था. लड़की मोहाली से पढ़ाई पूरी करने के बाद फिरोजपुर में अपने रिश्तेदारों के यहां रहकर आगे की पढ़ाई कर रही थी. वह छुट्टियों के कारण घर आई हुई थी.
 

BJP में अनुशासन का संदेश…. वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष पद की गरिमा को बनाए रखने की नसीहत..

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party – BJP) के सांगठनिक ढांचे में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी के भीतर एक नई कार्यशैली और कड़े अनुशासन का संदेश दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर जहां नए कार्यकारी अध्यक्ष के पद की गरिमा को लेकर कड़े निर्देश जारी हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में नए प्रदेश अध्यक्ष ने पदभार संभालते ही बागी और गुटबाज तेवर रखने वालों को आईना दिखाना शुरू कर दिया है।

भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (National Executive President Nitin Naveen) के मनोनयन के बाद पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में पद सर्वोपरि है। चूंकि नए अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए अक्सर आपसी चर्चाओं में वरिष्ठ नेता उन्हें नाम से संबोधित कर देते थे। पार्टी ने अब सभी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि बातचीत के दौरान ‘प्रोटोकॉल’ का पूरा ध्यान रखा जाए।

निर्देश दिया गया है कि पुराने निजी संबंध चाहे जो भी रहे हों, लेकिन चर्चा के दौरान पद की गरिमा के अनुरूप ही सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि कार्यकारी अध्यक्ष के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। हालांकि, स्वयं नितिन नबीन की सादगी चर्चा का विषय है। वे आज भी अपने वरिष्ठों से उसी पुराने सम्मान और सहजता के साथ मिल रहे हैं।

खेमेबाजी पर पंकज चौधरी का कड़ा प्रहार
वहीं, उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कमान संभालते ही यह साफ कर दिया है कि वे अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे। हाल ही में एक खास जाति से जुड़े विधायकों की अलग बैठक और खेमेबाजी की खबरों पर अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसी गतिविधियां पार्टी के संविधान और आदर्शों के खिलाफ हैं। सियासी गलियारों में इस सख्ती के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘मिशन-2027’ के लिए टिकट पक्का करने की होड़ मान रहे हैं, तो कुछ इसे नए अध्यक्ष की पहली बड़ी परीक्षा।

अध्यक्ष के इस कड़े रुख से उन लोगों के पसीने छूट रहे हैं जो अब तक गुट बनाकर काम कर रहे थे। उन्हें डर है कि उनकी पिछली कारगुजारियां और जातिगत राजनीति की जानकारी नए अध्यक्ष तक पहुंच गई, तो उनके राजनीतिक भविष्य पर संकट आ सकता है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग अध्यक्ष के इस अनुशासन की सराहना कर रहा है, उनका मानना है कि चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाना जरूरी था। वहीं, कुछ लोग इसे अतिरेक मान रहे हैं। फिलहाल, भाजपा मुख्यालय से लेकर जिलों तक में इस नए अनुशासन की चर्चा जोरों पर है।