DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार

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चैन्‍नई। तमिलनाडु (Tamil Nadu) में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (Chief Minister M. K. Stalin) की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।

 

यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।

 

सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग

कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’

टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।
फैसला विजय करेंगे

इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।

500% टैरिफ वाला बिल लाएगा तनाव?

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India US Relations : के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिका की संसद में अगले सप्ताह एक ऐसा बिल पेश किया जाने वाला है, जिसके पारित होने की स्थिति में भारत और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ सकती है। इस प्रस्तावित बिल में रूस से तेल, यूरेनियम या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के अमेरिकी आयात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है। यदि यह बिल पास होता है, तो भारत भी इसकी जद में आ सकता है।

इस बिल को लाने के पीछे अमेरिका का तर्क है कि रूस–यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाए। अमेरिका चाहता है कि रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर सख्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाएं, ताकि रूस की आर्थिक क्षमता कमजोर हो। हालांकि, India US Relations के लिहाज से यह कदम संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई मौकों पर भारत को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं। ट्रंप यह कह चुके हैं कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका टैरिफ बढ़ाने जैसे कदम उठा सकता है। टैरिफ को लेकर वे कई बार सार्वजनिक रूप से चेतावनी भी दे चुके हैं। ऐसे में अब संसद में प्रस्तावित यह बिल उन चेतावनियों को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल पास होता है, तो India US Relations पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। 500 प्रतिशत टैरिफ से भारत के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। साथ ही यह फैसला रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और कूटनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें अमेरिकी संसद पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बिल केवल दबाव की रणनीति है या वास्तव में भारत–अमेरिका संबंधों के लिए एक नई चुनौती बनने वाला है।

जेएनयू में मोदी-शाह विरोधी नारों पर गुस्‍साए CM फडणवीस, बोले-शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे

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मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू (JNU) में पैदा हुईं शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचल दिया जाएगा। यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विरोध प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद के मद्देनजर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे, जिसमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हो गए। खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने के विरोध में जेएनयू में हुए प्रदर्शन ने विवाद को जन्म दिया, जहां कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे।

जेएनयू में नारों के संबंध में एक सवाल के जवाब में फडणवीस ने कहा- हम जेएनयू में पैदा शरजील इमाम की इन औलादों के इरादों को कुचल देंगे। हम ऐसे इरादों को कुचल देंगे।

जेएनयू में मोदी, शाह के खिलाफ विवादास्पद नारे लगाए गए, जांच शुरू
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने जोर देते हुए कहा कि “किसी भी गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” और सोमवार की घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जेएनयू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मंगलवार को किए गए सिलसिलेवार पोस्ट में कहा- विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें नफरत की प्रयोगशालाओं में परिवर्तित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है।

उसने कहा- लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना में शामिल छात्रों को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें तत्काल निलंबन, निष्कासन और विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना शामिल है।

विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच के आदेश भी दिए। वहीं केंद्रीय और दिल्ली के मंत्रियों सहित भाजपा नेताओं ने इस घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि नारे “शहरी नक्सलवादी मानसिकता को दर्शाते हैं जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है”।

 

 मॉल में बनाई जा रही थी  मेफेड्रोन ड्रग्स

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सूरत।गुजरात में सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक मॉल के अंदर चल रही ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा किया है। फैक्ट्री में क्रिस्टल मेफेड्रोन नाम की ड्रग्स तैयार की जा रही थी। टीम ने तीन युवकों को अरेस्ट किया है। जांच में पता चला है कि तीनों लंदन में बैठे आरोपियों के संपर्क में थे और उन्हीं के इशारे में ड्रग्स तैयार कर रहे थे। टीम ने 2.92 लाख रुपए कीमत की तैयार ड्रग्स के साथ भारी मात्रा में केमिकल जब्त किया है। फिलहाल मामले में जांच जारी है।

‘नौकरीपेशा पत्नी अगर खाना न बनाए तो इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता’: तेलंगाना हाई कोर्ट

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हैदराबाद: जब पति और पत्नी दोनों नौकरीपेशा हों, तो महिला के द्वारा खाना न बनाना या अपनी सास (पति की मां) की मदद न करना क्रूरता नहीं माना जा सकता, और इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता. तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया.

क्या है मामला

हैदराबाद के एलबी नगर के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए शादी रद्द करने की याचिका दायर की थी. निचली अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाई कोर्ट में अपील की. जस्टिस मौशमी भट्टाचार्य और जस्टिस नागेश भीमापका की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की और अपील को खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाया.

खाना नहीं बनाना ‘क्रूरता’ क्यों नहीं

अदालत ने कहा कि पति दोपहर 1 बजे से रात 10 बजे तक काम करता है, जबकि पत्नी सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक काम करती है. ऐसे में सुबह के समय खाना न बनाना क्रूरता नहीं माना जा सकता.

पति के इस दावे पर कि उसकी पत्नी अक्सर अपने मायके चली जाती है और उसके साथ नहीं रहती, अदालत ने गौर किया कि पति ने विरोधाभासी बयान दिए हैं. उसने एक जगह कहा कि वह 5 महीने साथ रही और दूसरी जगह कहा कि वह उनकी एक साल नौ महीने की शादी के दौरान केवल 3 महीने साथ रही. अदालत ने यह भी कहा कि गर्भपात (miscarriage) के बाद पत्नी का अपने माता-पिता के साथ रहना क्रूरता नहीं माना जा सकता.

अलग घर पर कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलग घर की मांग करना क्रूरता के दायरे में आता है, लेकिन हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह हर मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है. वर्तमान मामले में, अदालत ने कहा कि पत्नी ने खुद अलग होने का प्रस्ताव नहीं दिया था, बल्कि उसके वकील ने उसे ऐसा करने की सलाह दी थी, इसलिए इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने पति के आरोपों को क्रूरता मानने से इनकार कर दिया और उसकी अपील खारिज करते हुए तलाक देने से मना कर दिया.

कांग्रेस और AIMIM से कैसे हुआ गठबंधन? CM फडणवीस ने BJP नेताओं को लगाई फटकार

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मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस (Congress) और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन (Alliances) करने के आरोप में भाजपा (BJP) नेताओं की कड़ी आलोचना की और कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना किया गया था और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन था।

फडणवीस ने कहा, “मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने ऐसा निर्णय अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासन के विरुद्ध है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

बुधवार को खबरें आईं कि भाजपा ने महाराष्ट्र की कुछ नगर परिषदों में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ चुनावोत्तर गठबंधन किया है। पिछले महीने हुए नगर निगम चुनावों के बाद, कुछ भाजपा नेताओं ने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ के बैनर तले अंबरनाथ नगर परिषद का नेतृत्व गठित किया था।

 

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WC को लेकर नखरे, IPL ब्रॉडकास्ट पर बैन के बाद बांग्लादेश ने अब BPL से भारतीय प्रजेंटर को हटाया

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टी20 विश्व कप के लिए अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग करने, अपने यहां आईपीएल के ब्रॉडकास्ट पर रोक लगाने के बाद बांग्लादेश ने अब बीपीएल से भारतीय प्रजेंटर को बाहर कर दिया है। एएनआई के मुताबिक लोकल मीडिया में बुधवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से जुड़े सूत्रों के हवाले से इससे जुड़ी खबर आई है।टी20 विश्व कप के लिए अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग करने, अपने यहां आईपीएल के ब्रॉडकास्ट पर रोक लगाने के बाद बांग्लादेश ने अब बीपीएल से भारतीय प्रजेंटर को बाहर कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक लोकल मीडिया में बुधवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से जुड़े सूत्रों के हवाले से इससे जुड़ी खबर दी है। खबर के मुताबिक बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) के प्रजेंटेशन पैनल से भारतीय प्रजेंटर रिद्धिमा पाठक को ‘बाहर’ कर दिया गया है।

भारत अंडर-19

59/0
5.4 ov

दक्षिण अफ्रीका अंडर-19
स्टम्प्स

इंग्लैंड
302/8
384/10

ऑस्ट्रेलिया
567/10

इंग्लैंड को 119 रन की बढ़त

रिद्धिमा इस साल बीपीएल में बतौर होस्ट दिखने वाली थीं लेकिन उन्हें बांग्लादेश पहुंचने से पहले ही प्रजेंटेशन टीम से हटा दिया गया है। बीपीएल का मौजूदा सीजन सिलहट में शुरू हो चुका है। प्रजेंटर पैनल में पाकिस्तानी जैनब अब्बास को जगह मिली है और वह बांग्लादेश पहुंच भी चुकी है। इसके अलावा कॉमेंट्री पैनल में पाकिस्तानी कॉमेंटेटर्स हैं। इनमें वकार यूनुस और रमीज रजा शामिल हैं। इनके अलावा डारेन गॉग भी कॉमेंट्री पैनल में हैं। इससे पहले 5 जनवरी को बांग्लादेश सरकार ने आईपीएल 2026 के मैचों के अपने देश में प्रसारण को सस्पेंड कर दिया था। उसने ये फैसला बीसीसीआई द्वारा केकेआर को बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपने स्क्वाड से रिलीज करने के लिए कहने की प्रतिक्रिया में दी है। बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की कठपुतली मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर है। पिछले कुछ दिनों में ही कम से कम 6 हिंदुओं की कट्टरपंथियों ने बर्बर हत्या की है। इसके अलावा हिंदुओं के घरों में बाहर से ताला लगाकर आग लगाने की भी घटनाएं हुई हैं। इससे भारत में आक्रोश है। कई हिंदूवादी संगठनों ने आईपीएल से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को बाहर करने की मांग की थी। बाद में बीसीसीआई ने केकेआर को निर्देश दिया कि वो रहमान को स्क्वाड से बाहर करे। इसके बाद बांग्लादेश ने आईसीसी को खत लिखकर सुरक्षा कारणों से टी20 विश्व कप के अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग की। फिर उसने बांग्लादेश में आईपीएल के प्रसारण को सस्पेंड किया। हालांकि ईएसपीएनक्रिकइन्फो की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी ने बांग्लादेश को दो टूक कहा है कि भारत में वर्ल्ड कप मैच खेलना है तो खेलिए, नहीं तो पॉइंट्स गंवाने के लिए तैयार रहिए।

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‘सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में, यह किसी को पता नहीं होता’, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि, किसी को कुत्तों को भी यह सलाह देनी चाहिए कि वे लोगों को न काटें. अदालत ने कहा कि, कोई भी जानवर का मन नहीं पढ़ सकता कि कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं.

यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच के सामने आया. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते किसी को तब काट सकते हैं या उसका पीछा कर सकते हैं जब वह व्यक्ति टू-व्हीलर या साइकिल पर हो, और वह व्यक्ति गिर सकता है या एक्सीडेंट हो सकता है.

जस्टिस नाथ ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल से पूछा, “जबकि वे सड़क पर दौड़ते हैं, यह अपने आप में गुजरने वाली गाड़ियों, खासकर टू-व्हीलर और साइकिल सवारों के लिए खतरनाक है… क्या आप टू-व्हीलर पर रहे हैं या नहीं”, सिब्बल ने जवाब दिया कि वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में रहे थे.

जस्टिस नाथ ने कहा कि काटना ही अकेला मुद्दा नहीं है. कुत्ते साइकिल पर लोगों का पीछा करते हैं. इस पर सिब्बल, जो इस मामले में एक पार्टी की तरफ से पेश हुए थे, ने कहा कि हर कुत्ता ऐसा नहीं करता और इसकी पहचान करना जरूरी है.

जस्टिस नाथ ने कहा कि, आप कैसे पहचानेंगे कि सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, आपको नहीं पता. सिब्बल ने सवाल करते हुए कहा कि क्या इसका हल यह है कि सभी कुत्तों को शेल्टर दिया जाए. इस पर बेंच ने कहा कि यह पक्का करने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए कि सड़कें या गलियां कुत्तों से फ्री हों.

सिब्बल ने कहा कि कुत्ते कंपाउंड में रहते हैं और वे यूनिवर्सिटी में रहते हैं. जब वे यूनिवर्सिटी में थे तो वहां कुत्ते थे और किसी ने उन्हें नहीं काटा. सिब्बल ने कहा कि, JNU में कई कुत्ते हैं. इस पर जस्टिस मेहता ने पूछा कि क्या वे गंभीर हैं. जस्टिस मेहता ने कहा सिब्बल से कहा कि, उनकी जानकारी पुरानी हो चुकी है. एनएलएस बैंगलोर ने कई हमलों की रिपोर्ट की है.

जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि, कोई यह नहीं कह रहा है कि कुत्तों को हटाकर गोली मार दो, नहीं…सड़कों को कुत्तों से खाली करना होगा. सिब्बल ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए साइंटिफिक तरीका अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना इसका हल नहीं है.

सिब्बल ने कुत्तों के काटने और बेकाबू कुत्तों के रिहैबिलिटेशन से निपटने के लिए सुझाव दिए. जस्टिस मेहता ने कहा, “बस एक चीज जो छूट गई है, वह है कुत्ते को काउंसलिंग देना कि एक बार वापस छोड़े जाने के बाद कुत्ता काटे नहीं…” सिब्बल ने कहा कि यह शायद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया होगा और मुझे यकीन है कि आपका मतलब यह नहीं है.

जस्टिस मेहता ने सवाल करते हुए कहा कि जहां तक ​​इंस्टीट्यूशन की बात है, वे सड़कें नहीं हैं और पूछा, आपको कोर्ट परिसर, यूनिवर्सिटी में कुत्तों की जरूरत क्यों है. बेंच ने कहा कि नियम कहते हैं कि उन्हें (कुत्तों) उसी एरिया में वापस छोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने पूछा कि फिर इंस्टीट्यूशन कुत्तों से कैसे मुक्त होंगे. क्या उन्हें सड़कों पर छोड़ देना चाहिए. मामले पर सुनवाई जारी है.

पिछले साल 7 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे इंस्टीट्यूशनल एरिया में कुत्तों के काटने की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी को देखते हुए, पब्लिक सेफ्टी, हेल्थ और आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के हित में निर्देश जारी करना जरूरी है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को तय शेल्टर में ले जाया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान केस की सुनवाई कर रहा था, जो 28 जुलाई को दिल्ली में, खासकर बच्चों में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं से बाहर बढ़ा दिया था और निर्देश दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पार्टी बनाया जाए.

कर्नाटक में बीजेपी का आरोप, महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए  

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हुबली। कर्नाटक के हुबली में महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के दौरान हुए हंगामे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की और गिरफ्तारी के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए। वहीं, पुलिस ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दावा किया है कि महिला ने खुद अपने कपड़े उतारे और पुलिसकर्मियों पर हमला किया।
हुबली के चालुक्य नगर में सर्वे को लेकर लोगों और अधिकारियों के बीच विवाद शुरू हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि गाली-गलौज और मारपीट की नौबत तक आ गई। इस मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित तीन अलग-अलग केस दर्ज किए। इसी कड़ी में 5 जनवरी को पुलिस जब आरोपी महिला को हिरासत में लेने पहुंची, तब ये हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें महिला कार्यकर्ता बस के अंदर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों से घिरी दिख रही है। भाजपा का दावा है कि जब महिला ने गिरफ्तारी का विरोध किया, तब पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी कर मारपीट की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए।
हुबली के पुलिस कमिश्नर शशि कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने घटना का दूसरा पक्ष रखा। कमिश्नर के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान महिला ने जबरदस्त विरोध किया और एक सब-इंस्पेक्टर को दांत से काट लिया। साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई की। पुलिस का कहना है कि महिला ने पुलिस वाहन में ले जाते समय विरोध जताने के लिए खुद अपने कपड़े उतार दिए थे। कमिश्नर ने बताया कि हमारे महिला स्टाफ ने ही लोगों की मदद से कपड़े मंगवाए और उन्हें पहनाए

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ICC ने भरोसा दिया है…विश्व कप पर नखरे दिखा रहे बांग्लादेश को किस ‘समाधान’ की उम्मीद?

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बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को कहा कि ICC ने भारत में टी20 विश्व कप खेलने को लेकर उसकी चिंताओं को दूर करने के लिए उसके ‘साथ मिलकर काम करने को तैयार’ है। उसने कहा है कि विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी के लिए व्यावाहारिक समाधान तक पहुंचने के लिए वह ICC के साथ रचनात्मक बातचीत को जारी रखेगा।बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को कहा कि आईसीसी ने भारत में टी20 विश्व कप खेलने को लेकर उसकी चिंताओं को दूर करने के लिए उसके ‘साथ मिलकर काम करने को तैयार’ है। उसने कहा है कि विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी के लिए व्यावाहारिक समाधान तक पहुंचने के लिए वह आईसीसी के साथ रचनात्मक बातचीत को जारी रखेगा।

भारत अंडर-19
82/0
6.5 ov
दक्षिण अफ्रीका अंडर-19

स्टम्प्स
इंग्लैंड
302/8
384/10
ऑस्ट्रेलिया
567/10

इंग्लैंड को 119 रन की बढ़त

ये स्थिति तब पैदा हुई है जब बीसीसीआई के कहने पर आईपीएल फ्रेंचाइजी केकेआर ने बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को अपने स्क्वाड से रिलीज कर दिया। उसके बाद बांग्लादेश ने ‘सुरक्षा चिंताओं’ की बात कहकर भारत में टी20 विश्व कप के लिए नहीं आने का ऐलान किया। उसने आईसीसी से अपने विश्व कप मैचों को भारत से बाहर कराने की मांग की है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बीसीबी को कहा है कि उसे भारत में आकर विश्व कप खेलना होगा नहीं तो उसे मैच के अंक गंवाने पड़ेंगे। अब बीसीबी का दावा है कि विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर उसकी आईसीसी के साथ बातचीत जारी है।ये भी पढ़ें:बांग्लादेश ने अब BPL के प्रजेंटेशन पैनल से भारतीय प्रजेंटर को ऐन वक्त पर हटाया
बीसीबी ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, ‘बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम के भारत में आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप खेलने को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की चिंताओं और टीम के मैच दूसरी जगह कराने की गुजारिश पर बोर्ड को आईसीसी का जवाब मिला है। अपने जवाब में आईसीसी ने टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की पूर्ण और निर्बाध भागीदारी सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।’बयान में आगे कहा गया है, ‘आईसीसी ने बीसीबी की तरफ से उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करने की इच्छा का इजहार किया है। उसने भरोसा दिया है कि बोर्ड के इनपुट का स्वागत किया जाएगा और इवेंट की डीटेल्ड सिक्यॉरिटी प्लानिंग में उस पर विचार किया जाएगा।’
आईसीसी ने बीसीबी को इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है। टी20 विश्व कप 7 फरवरी से शुरू हो रहा है और बांग्लादेश को कोलकाता और मुंबई में 4 मैच खेलने हैं।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने यह भी कहा कि उसे पूरा भरोसा है कि टी20 विश्व कप में उसकी टीम की ‘सुचारू और सफल’ भागीदारी के लिए ‘सौहार्दपूर्ण और व्यावहारिक समाधान’ निकाला जाएगा।
ग्रुप सी में शामिल बांग्लादेश की टीम को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में अपने पहले मैच में वेस्टइंडीज का सामना करना है। उसके बाद वह इंग्लैंड, इटली और नेपाल के खिलाफ भारत में मैच खेलेगा।बीसीबी ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि आईसीसी ने उसे या तो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खेलने या भारत में होने वाले अपने मैचों के अंक गंवाने के लिए तैयार रहने को कहा है।बयान में कहा गया है, ‘‘बीसीबी ने मीडिया में प्रकाशित कुछ रिपोर्टों को भी संज्ञान में लिया है जिनमें कहा गया है कि इस संबंध में बोर्ड को अल्टीमेटम जारी किया गया है। बीसीबी स्पष्ट करता है कि ऐसे दावे पूरी तरह से असत्य और निराधार हैं।’’मुस्तफिजुर को पिछले साल अबूधाबी में हुई खिलाड़ियों की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने 9.2 करोड़ रुपये में खरीदा था।आईपीएल से बाहर होने के बाद मुस्तफिजुर को मंगलवार को पाकिस्तान सुपर लीग में शामिल कर लिया गया, हालांकि इस टूर्नामेंट के लिए अभी तक खिलाड़ियों का चयन नहीं हुआ है

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News Desk