U19 वर्ल्ड कप के सुपर 6 में पहुंचने वाली 4 टीमें फाइनल, भारत ने भी किया क्वालीफाई, मगर पाकिस्तान…

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ICC Under 19 World Cup 2026 के सुपर 6 में पहुंचने वाली चार टीमों का ऐलान हो गया है। इनमें एक टीम भारत की भी है, जबकि पाकिस्तान की टीम अभी भी सुपर सिक्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई है। अंडर 19 वर्ल्ड कप में सिर्फ 6 नहीं, बल्कि 12 टीमें सुपर 6 में पहुंचती हैं। एक तरह से ये डबल सुपर 6 कहा जा सकता है। इसका पूरा फॉर्मेट भी आपको इस स्टोरी में समझ में आजाएगा, इसके अलावा ये भी जानकारी आपको मिल जाएगी कि कौन-कौन सी टीम अब तक सुपर 6 स्टेज के लिए क्वालीफाई कर चुकी है।

ज़िम्बाब्वे को 37 गेंदों में 5.67 प्रति ओवर की औसत से 35 रन चाहिए

दरअसल, आईसीसी मेंस अंडर 19 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 में 16 टीमों के 4-4 के ग्रुप में बांटा गया है। इनमें से ग्रुप ए में श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जापान की टीम है। इस ग्रुप से श्रीलंका ने पहले दो मैच जीतकर सुपर 6 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। ग्रुप बी में टीम इंडिया, न्यूजीलैंड, यूएसए और बांग्लादेश की टीम है। इस ग्रुप से भारतीय टीम सुपर 6 में पहुंच गई है। ग्रुप सी की बात करें तो इसमें इंग्लैंड, पाकिस्तान, स्कॉटलैंड और जिम्बाब्वे की टीम है। इंग्लैंड की टीम इस ग्रुप से आगे बढ़ चुकी है। ग्रुप डी में अफगानिस्तान, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और तंजानिया की टीम है। इसमें से अफगानिस्तान की टीम सुपर 6 में पहुंच गई है।हर एक ग्रुप से टॉप 3-3 टीमें सुपर 6 में पहुंचेंगी, जहां दो ग्रुप बनाए जाएंगे। इनमें एक ग्रुप ए और डी ग्रुप का बनेगा, जबकि एक ग्रुप बी और सी टीमों का बनेगा। हर ग्रुप में चौथे नंबर पर रहने वाली टीमें टूर्नामेंट से बाहर होंगी, लेकिन उनको एक-एक मैच खेलने का मौका मिलेगा, जो उनकी पोजिशन डिसाइड करेगा कि वे किस नंबर पर रहेंगी।उदाहरण के तौर पर सुपर 6 स्टेज की बात करें ग्रुप ए में टॉप पर रहने वाली टीम को ग्रुप डी की दूसरे और तीसरे नंबर की टीम से भिड़ना होगा, जबकि ग्रुप ए में दूसरे नंबर पर रहने वाली टीम को ग्रुप डी की पहले और तीसरे नंबर की टीम से भिड़ना होगा। ग्रुप ए की तीसरे नंबर की टीम को ग्रुप डी की नंबर एक और नंबर दो टीम से भिड़ना होगा। यहां तक कि मैच जीत के पॉइंट्स और नेट रन रेट भी कैरी फॉरवर्ड होगा, जो आगे चलकर सेमीफाइनल के लिए अहम होगा। दोनों ग्रुप से टॉप की 2-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।

भारत आ रहे रूसी तेल टैंकर अचानक चीन की तरफ मुड़े, क्या अमेरिकी प्रतिबंधों का असर?

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नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन के मध्य जारी जंग के बीच पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का असर अब वैश्विक तेल व्यापार में साफ नजर आने लगा है। भारत और तुर्की की ओर जा रहे कई रूसी तेल टैंकर अब अपना रुख चीन की तरफ मोड़ते दिख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव अमेरिका और यूरोपीय संघ के सख्त प्रतिबंधों के डर और बढ़ती अनिश्चितता का नतीजा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में पश्चिमी तुर्की के इजमित बंदरगाह पर पनामा के झंडे वाले टैंकर बेला-6 ने करीब एक लाख टन रूसी कच्चा तेल उतारा। यह डिलीवरी तुर्की की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी तुप्रास के लिए अपवाद मानी जा रही है, क्योंकि उसने यूरोपीय संघ के 21 जनवरी से लागू नए प्रतिबंधों से पहले रूसी तेल आयात में करीब 69 प्रतिशत की कटौती कर दी थी। नए ईयू नियमों के तहत रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों का यूरोप में आयात प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे भारत और तुर्की जैसी रिफाइनरियों पर सीधा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों, ईरान और वेनेजुएला को लेकर अनिश्चितता तथा यूरोपीय संघ के नए फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को अस्थिर बना दिया है। लंदन स्थित जनरल इंडेक्स के विश्लेषक डेविड एडवर्ड का कहना है कि मौजूदा दौर असाधारण है, जहां भू-राजनीतिक उथल-पुथल सीधे ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही है।
इस बीच भारतीय रिफाइनरियों ने भी सतर्क रुख अपनाया है। केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, भारत की प्रमुख रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद कम कर ‘स्वैच्छिक पाबंदी’ लगा दी है। दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 29 प्रतिशत घटकर तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इसके पीछे रूस की दिग्गज कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध भी बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
भारत और तुर्की द्वारा छोड़े जा रहे इस अतिरिक्त रूसी तेल का एक हिस्सा चीन की ओर जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में रूस से चीन के समुद्री मार्ग से तेल आयात में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कई ऐसे टैंकर, जिन्हें भारत ने स्वीकार नहीं किया, चीनी बंदरगाहों के पास देखे गए। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की छोटी स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें ‘टी-पॉट्स’ कहा जाता है, सस्ते तेल की खरीद में माहिर हैं और जोखिम उठाने को तैयार रहती हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि चीन सभी छोड़े गए रूसी तेल को नहीं खपा पाएगा। फिर भी, बढ़ती छूट और सीमित जोखिम के चलते वह बड़ा खरीदार बना रह सकता है।

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अनुपमा को उसकी औकात याद दिलाएगी रजनी, मदद का हाथ बढ़ाएगा ये करोड़पति

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टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में मजेदार ट्विस्ट आने वाले हैं। अनुपमा, रजनी को समझाने की कोशिश करेगी। लेकिन रजनी, अनुपमा को उसकी औकात याद दिला देगी। जी हां! सामने आए प्रोमो के मुताबिक, अनुपमा, रजनी का हाथ पकड़ेगी और उसे चॉल वालों के पास ले जाने की कोशिश करेगी। रजनी डर जाएगी और अपने सिक्याेरिटी गार्ड को बुलाएगी। रजनी के हेल्पर और सिक्योरिटी गार्ड अनुपमा को पकड़कर घर से बाहर निकाल फेकेंगे।

अनुपमा मांगेगी कान्हा जी से मदद

अनुपमा टूट जाएगी। अनुपमा को समझ नहीं आएगा कि वो क्या करे। अपनी चॉल को टूटने से कैसे बचाए। अपनी गलती को कैसे सुधारे। अपने लोगों को इंसाफ कैसे दिलाए। ऐसे में अनुपमा, कान्हा जी के पास जाएगी। अनुपमा, कान्हा जी से मदद मांगेगी। अनुपमा कहेगी, ‘मेरी गलती की सजा उन चॉल वालों को मत दीजिए कान्हा जी। वो लोग बेघर हो जाएंगे। कान्हा जी, छोटे-छोटे बच्चे, बुजूर्ग कहां जाएंगे? वो लोग अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे?’

अनुपमा स्पॉयलर अलर्ट

कौन करेगा अनुपमा की मदद?

अनुपमा थक जाएगी। वह रोती करेगी और कान्हा जी के चरणों के पास बैठी रहेगी। तभी मंदिर में करोड़पति बिजनेसमैन की एंट्री होगी। ये करोड़पति बिजनेसमैन कोई और नहीं बल्कि पराग कोठारी होगा। अनुपमा, पराग की तरफ देखेगी। वहीं पराग, अनुपमा की तरफ मदद का हाथ बढ़ाएगा।

क्या कह रहे हैं लोग?

प्रोमो देखने के बाद लोगों का कहना है कि पराग, रजनी पर सामने से वार नहीं करेगा। पराग, अनुपमा की मदद करेगा, लेकिन सबको ये दिखाएगा कि वो रजनी की तरफ है। अब ऐसा होता है या नहीं, ये तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

के कविता ने पिता केसीआर से बगावत कर खेला बड़ा सियासी दांव?

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नई दिल्ली। तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी के. कविता नई राजनीतिक पार्टी के गठन की दिशा में कदम बढ़ाती दिख रही हैं। सूत्रों की मानें तो के. कविता ने देश के जाने-माने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर से इस सिलसिले में लंबी बातचीत की है। दावे किए जा रहे हैं कि के कविता ने पीके से करीब पांच दिनों तक विचार-विमर्श किया, जिसमें तेलंगाना के मौजूदा राजनीतिक हालात, जनभावनाएं और एक नए सियासी विकल्प की संभावनाओं पर चर्चा हुई। के. कविता, जो तेलंगाना जागृति नामक सांस्कृतिक संगठन की अध्यक्ष हैं, बीआरएस से निलंबन के बाद लगातार सक्रिय राजनीति में बनी हुई हैं। सितंबर 2025 में पार्टी से निलंबित किए जाने के तुरंत बाद उन्होंने विधान परिषद (एमएलसी) से भी इस्तीफा दे दिया था, जिसे हाल ही में परिषद के सभापति गुथा सुखेन्द्र रेड्डी ने स्वीकार कर लिया। बीआरएस नेतृत्व से टकराव के बाद कविता खुलकर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में जुट गई हैं। कविता का निलंबन उस समय हुआ था, जब उन्होंने अपने ही चचेरे भाई और वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव तथा जे. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं के चलते इन नेताओं ने उनके पिता केसीआर की छवि को नुकसान पहुंचाया। इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत के तौर पर देखा गया और इसके बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई। निलंबन के बाद से के. कविता न सिर्फ बीआरएस, बल्कि सत्ताधारी कांग्रेस पर भी हमलावर हैं। वे दोनों दलों पर भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगा चुकी हैं। तेलंगाना जागृति के मंच से वे लगातार महिलाओं, युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दे उठा रही हैं और खुद को एक वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर पेश कर रही हैं। दिसंबर 2025 में दिए गए एक बयान में के. कविता ने यहां तक कहा था कि वह एक दिन तेलंगाना की मुख्यमंत्री बनेंगी और राज्य गठन (2014) के बाद से हुए सभी “अन्यायों और कुकर्मों” की जांच कराएंगी। अब प्रशांत किशोर से हुई बातचीत के बाद यह कयास तेज हो गए हैं कि कविता जल्द ही नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ बीआरएस के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि तेलंगाना की राजनीति में एक नई धुरी भी बन सकती है।

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कहना आसान होता है मिस्टर एक्सपर्ट ऑफ क्रिकेट; विराट कोहली के भाई ने संजय मांजरेकर पर कसा तंज

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विराट कोहली के भाई विकास कोहली ने एक बार फिर पूर्व क्रिकेटर और जाने-माने कॉमेंटेटर संजय मांजरेकर को उनकी हालिया टिप्पणियों के लिए आड़े हाथ लिया है। मांजरेकर ने हाल में कहा था कि अच्छा होता कि कोहली हर फॉर्मेट से संन्यास ले लिए होते। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट के ऊपर ओडीआई को तरजीह देने को लेकर विराट कोहली की आलोचना की थी। मांजरेकर ने कहा था कि ‘अपनी कमियों पर काम’ करने के बजाय कोहली ने टेस्ट से संन्यास ले लिया और ‘सबसे आसान फॉर्मेट’ ओडीआई में खेलना जारी रखा। इसी कॉमेंट को लेकर विकास कोहली ने मांजरेकर पर तंज कसा है।

ज़िम्बाब्वे को 33 गेंदों में 6 प्रति ओवर की औसत से 33 रन चाहिए

जबरदस्त फॉर्म में विराट कोहली

विराट कोहली पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सिडनी में खेले गए तीसरे और आखिरी वनडे से ही लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। तब से लेकर अब तक 7 पारियों में से 6 में उन्होंने फिफ्टी प्लस स्कोर बनाया है। इनमें 3 शतक भी शामिल हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में खेले गए सीरीज के तीसरे और आखिरी वनडे मुकाबले में उन्होंने 124 रन की पारी खेली, हालांकि भारत मैच नहीं जीत पाया।

तब तो कोई भी रन बना लेता… कोहली पर मांजरेकर के बयान को भज्जी ने किया खारिज

‘मिस्टर एक्सपर्ट ऑफ क्रिकेट’ कहकर कसा तंज

विराट कोहली के जबरदस्त प्रदर्शन को देखते हुए उनके भाई विकास कोहली ने संजय मांजरेकर पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया साइट थ्रेड पर पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा, ‘मुझे हैरानी हो रही कि क्या मिस्टर एक्सपर्ट ऑफ क्रिकेट के पास क्रिकेट के सबसे आसान फॉर्मेट के लिए कुछ सुझाव हैं। आपको वो करने के लिए वहां रहने की जरूरत होती है। जो भी हो, जैसा कि मैंने कहा कि करने के मुकाबले कहना आसान होता है।’

विकास कोहली का थ्रेड पोस्ट

‘कहना आसान होता है…’

विकास कोहली ने कुछ दिन पहले भी संजय मांजरेकर की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, ‘कितना आसान फॉर्मेट है, है ना…किसी ने कुछ दिन पहले अपने ज्ञान दिया था…कहना बहुत आसान होता है, करना नहीं…।’

मांजरेकर ने कहा क्या था?

संजय मांजरेकर ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में कहा था कि विराट कोहली अपनी कमियों, समस्याओं पर काम करने के बजाय टेस्ट से ही भाग गए। उन्होंने कोहली के टेस्ट पर ओडीआई को तरजीह दिए जाने पर भी निराशा जताई।

टेस्ट से संन्यास और ODI को तरजीह; विराट कोहली पर संजय मांजरेकर ने दिया सख्त बयान

मांजरेकर ने कहा था, ‘जैसे जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाई हासिल कर रहे हैं, मेरा मन विराट कोहली पर जा रहा। वह टेस्ट क्रिकेट से किनारा कर गए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रिटायरमेंट से पहले संघर्ष वाले उन 5 वर्षों में वह समस्या ढूंढने में पूरे जी-जान से नहीं लगे कि वह 5 वर्षों तक टेस्ट में 31 की औसत से क्यों रन बना रहे हैं। लेकिन ये देखकर दुख होता है कि जो रूट और स्टीव स्मिथ, केन विलियम्सन जैसे लोग टेस्ट क्रिकेट में अपना नाम बना रहे हैं।’उन्होंने कहा, ‘तब ठीक होता अगर विराट कोहली क्रिकेट से ही दूर हो गए होते, हर तरह के क्रिकेट से दूर हो गए होते। लेकिन उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट खेलना चुना, ये मुझे और निराश करता है क्योंकि किसी टॉप ऑर्डर बैटर के लिए ये फॉर्मेट सबसे आसान होता है, जो मैं पहले भी कह चुका हूं।’

पीएम मोदी ने तोड़ा प्रोटोकॉल, एयरपोर्ट पर किया स्वागत

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UAE President India Visit :  संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत पहुंचे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और गहरी मित्रता साफ झलकी, जिसने भारत-यूएई संबंधों को एक बार फिर नई ऊर्जा दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे को बेहद खास बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वे “अपने भाई, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का हवाई अड्डे पर स्वागत करने गए।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-यूएई की मजबूत मित्रता और आपसी विश्वास को दर्शाती है। पीएम मोदी द्वारा ‘भाई’ शब्द का इस्तेमाल दोनों देशों के रिश्तों की निकटता को रेखांकित करता है।

करीब साढ़े तीन घंटे के इस संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण दौरे में दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। रक्षा साझेदारी, अंतरिक्ष बुनियादी ढांचा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसे छोटा लेकिन ठोस शिखर सम्मेलन बताया, जिसमें प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी शामिल रही।

इस दौरान पीएम मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ भी एक बार फिर चर्चा में आ गई। पीएम मोदी और यूएई राष्ट्रपति की कार में साथ बैठी तस्वीर सामने आने के बाद यह रणनीति फिर सुर्खियों में है। इससे पहले भी पीएम मोदी रूस, ब्रिटेन, जॉर्डन और जर्मनी के नेताओं के साथ इस तरह की अनौपचारिक कूटनीति करते नजर आ चुके हैं।

अंत में, UAE President India Visit के दौरान भारत-यूएई के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त पहल, परमाणु ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और तकनीक से जुड़े समझौते हुए। साथ ही, अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना पर भी सहमति बनी, जो दोनों देशों की साझा विरासत को प्रदर्शित करेगा।

जावेद अख्तर ने रिजेक्ट की ‘बॉर्डर 2’, बोले- नई फिल्म बना रहे हो तो नए गाने भी बनाओ या मान लो कि…

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Border 2: ‘बॉर्डर 2’ साल 2026 की मोस्ट अवेटेड फिल्म है। ये फिल्म 23 जनवरी के दिन थिएटर्स में दस्तक देने वाली है। जावेद अख्तर, जिन्होंने ‘बॉर्डर’ के कई सारे गाने लिखे थे, उन्होंने बताया कि ‘बॉर्डर 2’ के लिए भी मेकर्स ने उनके पास आए थे। हालांकि, उन्होंने ‘बॉर्डर 2’ का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। क्यों? इसका भी जवाब जावेद अख्तर ने अपने इंटरव्यू में दिया है। आइए बताते हैं।

क्या बोले जावेद अख्तर?

जावेद अख्तर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा, “मेकर्स आए थे मेरे पास, ‘बॉर्डर 2’ के लिए, लेकिन मैंने मना कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास एक पुराना गाना है, जो पहले से ही हिट है और वो उसमें थोड़ा-सा बदलाव करके उसे फिर से रिलीज करना चाहते हैं। ये कोई बात हुई? नए गाने बनाओ या फिर मान लो कि आप उस लेवल का काम नहीं कर सकते।”

बॉर्डर 2 ट्रेलर

जावेद अख्तर का फूटा गुस्सा

जावेद अख्तर ने आगे कहा, “जो बीत गया, उसे वैसा ही रहने दो। उसे रीक्रिएट करने की क्या जरूरत है? जब हम ‘बॉर्डर 1’ (1997) के लिए गाने लिख रहे थे तब हमारे सामने भी एक फिल्म थी, हकीकत (1964) और उसके गाने मामूली नहीं थे। चाहे वह ‘कर चले हम फिदा’ हो या ‘मैं यह सोचकर उसके दर से उठा था’। वे बहुत शानदार गाने थे। लेकिन हमने उनका इस्तेमाल नहीं किया। हमने नए गाने लिखे, हमने बिल्कुल अलग गाने बनाए और लोगों को वे पसंद भी आए। आप फिर से फिल्म बना रहे हैं, तो नए गाने बनाओ। आप अतीत पर क्यों निर्भर हैं? इसका मतलब ही यही है कि आपने मान लिया है कि हम नहीं कर सकते। हम पिछली शान के साथ जिएंगे।”

‘बॉर्डर 2’ की स्टार कास्ट

अनुराग सिंह के निर्देशन में बन रही इस आइकॉनिक फिल्म में सनी देओल की वापसी हो रही है। उनके साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी, दुश्मनों से लड़ते नजर आएंगे। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध से प्रेरित है

मोदी सरकार तमिलनाडू के महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को नजरअंदाज कर रही : सांसद टैगोर

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने केंद्र पर जमकर निशाना साधकर आरोप लगाया कि भारत के विकास में तमिलनाडु की अहम भूमिका होने के बावजूद, मोदी सरकार तमिलनाडू के महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में नजरअंदाज कर रही है। सांसद टैगोर ने कहा कि केंद्र सरकार ने मदुरै और कोयंबटूर मेट्रो परियोजनाओं के साथ-साथ होसुर हवाई अड्डे की परियोजना का अनदेखा किया है। उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु देश के विकास में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, इन परियोजनाओं सहित अपने हक के विकास कार्यों से वंचित है।
सांसद टैगोर ने लिखा कि मदुरै मेट्रो नहीं… कोयंबटूर मेट्रो नहीं… अब होसुर हवाई अड्डा भी नहीं… तमिलनाडु की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को एक-एक करके नकारा जा रहा है। यह अलग रवैया क्यों? जीडीपी, निर्यात, लघु एवं मध्यम उद्यम और रोजगार तमिलनाडु भारत के विकास में अहम भूमिका निभाता है। फिर भी, क्या केंद्र की योजनाओं में नजरअंदाज किया है? उन्होंने मदुरै और कोयंबटूर को देश के दक्षिणी क्षेत्र के प्रमुख विकास केंद्र बताकर होसुर को उद्योग, रसद और रोजगार की रीढ़ बताया। केंद्र पर तीखा प्रहार कर सांसद टैगोर ने जोर दिया कि इन परियोजनाओं को अस्वीकार करना लाखों लोगों के लिए मौकों की पहुंच में बाधा है।
उन्होंने कहा कि मदुरै, कोयंबटूर के प्रमुख विकास केंद्र। होसुर उद्योग, रसद और रोजगार की रीढ़। इन परियोजनाओं को अस्वीकार करना लाखों लोगों के लिए मौकों को अस्वीकार करना है सांसद टैगोर ने राजनीतिक सहयोग और संघवाद के रुख पर सवाल उठाकर पूछा कि क्या यह केवल भाषणों तक ही सीमित है और इसका कोई कार्य योजना बनाने का इरादा नहीं है? उन्होंने कहा कि राजनीतिक सहयोग के बिना विकास? क्या संघवाद सिर्फ भाषणों के लिए है, कार्यों के लिए नहीं? कांग्रेस सांसद ने स्थिति को भेदभावपूर्ण बताकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में राज्य की उपेक्षा के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु ने कोई एहसान नहीं मांगा है। वह सिर्फ अपना उचित हिस्सा मांग रहा है।

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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, पश्चिम बंगाल में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करें

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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल एसआईआर में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दे दिया है। ये वे लोग हैं, जिनके नाम थोड़ी गड़बड़ी वजह से मतदाता सूची से हट दिए गए। अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया, सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई की व्हाट्सएप कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन 1.25 करोड़ लोगों के खिलाफ तार्किक विसंगति की आपत्ति उठी है, उनके नाम प्रकाशित किए जाएं। ये नाम पंचायत और वार्ड कार्यालयों में प्रकाशित होने चाहिए हैं। शीर्ष अदालत ने गौर किया कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है पहला मैप किए गए, मैप नहीं किए गए और तार्किक विसंगति शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तार्किक विसंगति श्रेणी के अंतर्गत, अधिकारियों द्वारा पिता के नाम का मिलान न होना, माता-पिता की आयु का मिलान न होना और दादा-दादी की आयु में अंतर मिला है।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए करीब 2 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें से बड़ी संख्या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की सूची में डाले गए हैं, उनकी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि लोगों को परेशानी और तनाव न होने पाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करीब 1.25 करोड़ लोगों को नोटिस भेज दिए गए हैं। इन नोटिस में माता-पिता के नाम में फर्क, उम्र का अंतर कम होना, बच्चों की संख्या ज्यादा होना जैसी बातें कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को उन सभी लोगों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, जिन्हें लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर नोटिस दिया गया है।

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केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम को हरी झंडी दिखाई

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नागपुर । महाराष्ट्र के नागपुर में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) के प्लांट से ‘गाइडेड पिनाका’ रॉकेट सिस्टम को हरी झंडी दिखाई। इसी प्लांट से अब गाइडेड पिनाका का एक्सपोर्ट आर्मेनिया को होगा।
इस मौके पर उन्होंने एसडीएएल की मीडियम कैलिबर एम्युनिशन फैसिलिटी का भी उद्घाटन कर रॉकेट असेंबली क्षेत्र का निरीक्षण किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह ने डिफेंस प्रोडक्शन में निजी सेक्टर की तारी कर कहा कि निजी कंपनियां अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत योगदान दे रही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य गोला-बारूद उत्पादन का ग्लोबल हब बनना है। पहले गोला-बारूद की कमी की वजह से आधुनिक हथियारों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आज कई तरह का एम्युनिशन पूरी तरह भारत में बनाया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि नागपुर की इस फैसिलिटी से पिनाका मिसाइलों का एक्सपोर्ट शुरू होना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि इससे न सिर्फ देश की रक्षा उद्योग की ताकत दिखती है, बल्कि भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि कई अन्य देश भी पिनाका सिस्टम खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में रक्षा उत्पादन में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंचे और देश की रक्षा जरूरतों के लिए भारत को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

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