इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता

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इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) ने दी पूर्ण सदस्यता, बोर्ड बैठक में लिया ऐतिहासिक निर्णय:महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस रॉबर्ट्स

नई दिल्ली / लॉज़ेन।भारतीय मुक्केबाज़ी जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन (IABF) को अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी संघ (International Boxing Association – IBA) की पूर्ण सदस्यता प्रदान की गई है। यह महत्वपूर्ण निर्णय IBA के निदेशक मंडल द्वारा 6 फ़रवरी 2026 को लिया गया, जिसकी औपचारिक सूचना 9 फ़रवरी 2026 को स्विट्ज़रलैंड के लॉज़ेन से जारी पत्र के माध्यम से दी गई। IBA के अध्यक्ष उमर क्रेमलेव ने IABF के अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र को संबोधित पत्र में इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि मुक्केबाज़ी खेल के प्रति IABF की प्रतिबद्धता, पारदर्शी कार्यप्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालन के कारण यह मान्यता प्रदान की गई है।

IBA परिवार में IABF का स्वागत:उमर क्रीमलेव

IBA अध्यक्ष ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन का IBA परिवार में शामिल होना संगठन के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि IABF की सक्रिय भागीदारी से वैश्विक स्तर पर मुक्केबाज़ी खेल के विकास को नई दिशा और गति प्राप्त होगी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी का औपचारिक आमंत्रण:

IBA द्वारा IABF को आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों एवं प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। IBA ने आशा व्यक्त की है कि भारतीय मुक्केबाज़ों की सहभागिता से वैश्विक मुक्केबाज़ी समुदाय और अधिक सशक्त व ऊर्जावान बनेगा तथा भविष्य में दोनों संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक एवं सार्थक सहयोग स्थापित होगा।

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भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए स्वर्णिम अवसर:डॉ. राकेश मिश्र

IBA की पूर्ण सदस्यता मिलने से अब भारतीय एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक अधिकार, अवसर और पहचान प्राप्त होगी। इससे देश के उभरते मुक्केबाज़ों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, उन्नत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग तथा वैश्विक अनुभव प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

डॉ. राकेश मिश्र का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया: उमर क्रीमलेव

इस उपलब्धि को IABF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश मिश्र के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी सोच और संगठित प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। खेल जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह मान्यता भारतीय मुक्केबाज़ी के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। इस अवसर पर डॉ. राकेश मिश्र ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय बॉक्सिंग के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। राकेश ठाकरान जी ने इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन के निदेशक मंडल एवं सदस्य देशों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि यह सदस्यता हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मंतव्य के अनुरूप भारतीय मुक्केबाज़ों को ओलंपिक खेलों में अधिक अवसर उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि IABF अब जमीनी स्तर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान करेगा, ताकि आगामी ओलंपिक खेलों के लिए सक्षम और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी तैयार किए जा सकें। साथ ही, यह सदस्यता पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मुक्केबाज़ी की बिगड़ती स्थिति को सुधारने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करेगी। डॉ. मिश्र ने देशभर के खिलाड़ियों, कोचों, रेफ़रियों, तकनीकी अधिकारियों तथा मुक्केबाज़ी से जुड़े सभी लोगों से आह्वान किया कि वे आगे आएँ और भारतीय बॉक्सिंग के इस नए दौर में सक्रिय सहभागिता निभाएँ। वहीं, IABF के महासचिव श्री राकेश ठाकरान जी ने इस उपलब्धि पर देश की सभी राज्य स्तरीय बॉक्सिंग एसोसिएशनों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब हम सभी को भारत सरकार के माननीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के मार्गदर्शन में संगठित एवं प्रतिबद्ध होकर कार्य करना होगा, ताकि भारतीय मुक्केबाज़ों को अंतरराष्ट्रीय मंच, विशेषकर ओलंपिक खेलों में, बेहतर अवसर मिल सकें और देश में मुक्केबाज़ी खेल का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।

‘कांग्रेस आलाकमान का फैसला अंतिम’, सीएम बदलने की अटकलों पर सिद्धारमैया के बयान से मची हलचल

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बंगलूरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार (10 फरवरी) को जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री पद में बदलाव के मुद्दे पर कांग्रेस हाई कमान का जो भी फैसला होगा, वह अंतिम होगा और वह नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे। इसी के साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली नहीं जा रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वो सिर्फ तभी जाएंगे, जब उन्हें आलाकमान की तरफ से बुलाया जाएगा।

दरअसल, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की ओर से कई गई टिप्पणियों का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेतृत्व के मुद्दे पर उन्हें ‘कोई भ्रम नहीं है’, क्योंकि उन्होंने और सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान की उपस्थिति में इस मामले पर चर्चा की है।

बंगलूरू में मीडिया से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि मैं अभी इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। हाई कमान का फैसला अंतिम होगा। अनावश्यक प्रश्न पूछने का कोई फायदा नहीं है। वहीं डीके शिवकुमार के बयान पर उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने कुछ कहा है, तो आप उनसे पूछें। मुझे नहीं पता। मैं हाई कमान के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं, उन्होंने साफ कहा कि बिना बुलाए मैं क्यों जाऊं? मेरा यहां काम है, बजट तैयार करने का काम है। अगर मुझे बुलाया जाएगा तो मैं जाऊंगा।

दरअसल, बीते कुछ वक्त से जारी शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच का सत्ता संघर्ष उस वक्त फिर से सामने आ गया, जब सिद्धारमैया के बेटे और एमएलसी यतींद्र ने इस बात पर जोर दिया कि उनके पिता अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे, और पार्टी हाई कमान ने इस संबंध में संकेत दे दिए हैं। इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि सीएम बदलने का मुद्दा अब खत्म हो गया है।

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बारामती विमान हादसे के बाद केंद्र सख्त, 400 से अधिक अनियंत्रित हवाई पट्टियों की जांच के आदेश

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बारामती। बारामती में हुए विमान हादसे (Baramati plane crash) के बाद सरकार ऐक्शन मोड में आ गई है। देशभर की 400 से ज्यादा अनियंत्रित हवाई पट्टियों (Uncontrolled Airstrips) को लेकर व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य इन हवाई पट्टियों के लिए एकीकृत नियम बनाना है, जिसकी निगरानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और राज्य सरकारें मिलकर करेंगी। जांच के दौरान हवाई पट्टियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, संचार सुविधाओं, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि स्थानीय प्रशासन के साथ हवाई पट्टी का प्रबंधन करने वाले किस तरह का समन्वय बनाए रखते हैं। 28 जनवरी को बारामती में हुए प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद DGCA ने देशभर के एयरपोर्ट्स और हवाई पट्टियों पर सेफ्टी प्रोटोकॉल्स को सख्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन अनियंत्रित हवाई पट्टियों पर आमतौर पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल की सुविधा नहीं होती। ये हवाई पट्टियां या तो राज्य सरकारों के अधीन हैं या फ्लाइट ट्रेनिंग संस्थानों और निजी संचालकों द्वारा संचालित की जाती हैं। देश में मौजूद 400 से अधिक ऐसी हवाई पट्टियां फिलहाल DGCA के सीधे नियमन से बाहर हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से चार्टर विमानों, राजनीतिक दलों और फ्लाइंग स्कूलों द्वारा किया जाता है। हालांकि, इन पट्टियों पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी पाई जाती है।

 

10 से 15 दिन में ठीक होते

डॉक्टरों के अनुसार इन बीमारियों से ठीक होने में 10 से 15 दिन तक का समय लग रहा है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने लोगों को बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

 

अजित पवार की मौत को लेकर उठे सवाल
इस बीच, एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने अजित पवार की मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना को लेकर कई सवाल हैं और वह 10 फरवरी को मुंबई में एक विस्तृत प्रस्तुति देंगे। बारामती में जिला परिषद चुनाव के दौरान वोट डालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार ने कहा कि अजित पवार चाहते थे कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एकजुट हों और इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। रोहित पवार ने कहा, “हर किसी के मन में इस दुर्घटना को लेकर सवाल और संदेह हैं। दुर्घटना क्यों हुई और कैसे हुई, इन सभी पहलुओं को 10 फरवरी को सामने रखा जाएगा।”
 

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आज खत्म हो रही समयसीमा, 17 फरवरी को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

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डेस्क। तमिलनाडु के मतदाताओं के लिए राज्य की संशोधित मतदाता सूची से संबंधित सुधार के लिए मंगलवार अखिरी दिन हैं। मंगलवार शाम समय सीमा समाप्त होने के साथ ही अधिकारियों को उम्मीद है कि 17 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले सभी लंबित सत्यापन कार्य पूरे हो जाएंगे। एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद, अद्यतन मतदाता सूची में तमिलनाडु में लगभग 5.65 करोड़ पंजीकृत मतदाता दिखाए जाने की उम्मीद है।

बूथ स्तर के अधिकारियों की ओर से व्यापक जमीनी सत्यापन के बाद 19 दिसंबर को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने के साथ प्रक्रिया शुरू हुई। मसौदा सूची जारी होने के बाद नागरिकों को 30 जनवरी तक ऑनलाइन पोर्टल और जिलों में आयोजित विशेष शिविरों के माध्यम से आपत्तियां दर्ज करने, सुधारों का अनुरोध करने या अपना नाम शामिल करवाने के लिए आवेदन करने का समय दिया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 34 लाख लोगों ने अपने नाम में बदलाव, जोड़ या हटाव करने के लिए आवेदन जमा किए। इनमें पहली बार मतदान करने वाले, निवास स्थान बदलने वाले और नाम, पता या फोटो जैसी व्यक्तिगत जानकारी में सुधार चाहने वाले अन्य लोग शामिल थे। इसी दौरान, अधिकारियों ने कई प्रविष्टियों को गहन जांच के लिए चिह्नित किया।

मसौदा सूची में जिनके नाम थे लेकिन जिन्होंने आवश्यक सहायक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए थे, ऐसे लगभग 12 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। उनसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पहचान और पात्रता का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया। चुनाव अधिकारियों ने अब जमीनी जांच और दस्तावेज संग्रह को तेज कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आज की समय सीमा समाप्त होने से पहले ऐसे सभी मामलों का समाधान हो जाए। ईसीआई ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे जांच को शीघ्रता से पूरा करें ताकि अंतिम सूची में केवल पात्र मतदाताओं को ही शामिल किया जा सके।

नरवणे की किताब पर पेंगुइन इंडिया का नया बयान, प्री-ऑर्डर पर दी सफाई

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पूर्व थलसेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर चल रहे विवाद के बीच पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से एक और बयान जारी किया गया है। पब्लिशर ने मंगलवार को कहा कि किसी किताब या उसके प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होने की घोषणा को पब्लिकेशन नहीं माना जाना चाहिए। इसके साथ पब्लिकेशन हाउस ने कहा है कि प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और पब्लिश हुई किताब एक ही बात नहीं हैं। 

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औवेसी ने सीएम सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की

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हैदराबाद। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। औवेसी ने यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट हो चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिख रहे है। पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान दे रहे हैं, जिसमें से कई बयान अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
हाल के महीनों में मुख्यमंत्री सरमा ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज किया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ाना है। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया हालिया वीडियो, जिस वीडियो को एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और पॉइंट ब्लैंक शॉट और कोई दया नहीं जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।

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संसद में अखिलेश यादव बोले- लोहे पर पीतल चढ़ाकर भी बेटी की विदाई नहीं हो पाएगी

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में आम बजट पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए अमेरिका से डील, किसानों को राहत और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि सोने के भाव कहां पहुंच गए? अब तो चांदी तो दूर. यह सरकार चलती रही तो गरीब लोहे पर पीतल चढ़ाकर अपनी बेटी की विदाई नहीं कर पाएगा. उन्होंने कहा कि भाजपा के हर बजट एक बटा 20 मानते हैं और यह केवल पांच फीसदी लोगों के लिए है.

उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि पहले डील तय हुई या फिर बजट. उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि जीरो बड़ा है या अठारह. उन्होंने अमेरिका के साथ हुई डील पर सवाल करते हुए कहा कि क्या डील ने आत्मनिर्भरता की परिभाषा बदल दी है? उन्होंने कहा कि यह बजट दिशाहीन है. इस बजट में कोई विजन नहीं है कि 2047 भारत विकसित बन जाएगा. इस सरकार से पहले ही उम्मीद नहीं थी. इस बजट में पीडीए के लिए कुछ नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सरकार ने इनके बारे में सोचना छोड़ दिया है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए कोई खास योजना नहीं है, जिससे उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों को मुख्य धारा से जोड़ी जाए. उन्होंने कहा कि आज भी किसानों को जो कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए, अभी तक सरकार नहीं दे पाई है. उन्होंने कहा कि दूध के उत्पादन पर एमएसपी की गारंटी कैसे देंगे. भाजपाई किसानों को लाभ नहीं पहुंचाना चाहते हैं. कुछ अदृश्य लोगों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि बजट में आम जनता का न तो जिक्र है और न ही फ्रिक रहता है. यदि फिक्र रहता तो किसानों को खाद समय पर मिल जाते, बीज समय पर मिल जाते. सरकार ने किसानों को अपने हाल पर छोड़ दिया है. अखिलेश यादव ने मणिकर्णिका घाट में अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़े जाने की आलोचना की और गंगा की सफाई पर भी सवाल उठाए.

 

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पटना पहुंचे नितिन नवीन बोले— आज की पीढ़ी कल्पना भी नहीं कर सकती कि जंगलराज में काम करना कितना मुश्किल था

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पटना। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सोमवार 9 फरवरी को नितिन नवीन पहली बार पटना पहुंचे। इस अवसर पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बापू सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए नितिन नवीन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह किन शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त करें, यह समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जताए गए भरोसे के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि वह इस जिम्मेदारी पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेंगे। 
अपने संबोधन के दौरान नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जंगलराज के दौर में काम करना कितना मुश्किल था, यह आज की पीढ़ी शायद कल्पना भी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, उस समय कार्यकर्ता घर-घर चुपचाप पर्चियां पहुंचाते थे। डर और अराजकता का माहौल था। हम लोगों ने बिहार को उस जंगलराज से निकालकर यहां तक पहुंचाया है। नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा ने बिहार को विकास और सुशासन की राह पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में पिता के निधन के बाद वह राजनीति में आए थे और अब लगभग 20 साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता से मिले संस्कारों ने यहां तक पहुंचाया है और वह उन्हें नमन करते हैं। 
यहां नितिन नवीन ने कहा, कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अब सिर्फ यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि बिहार का लड़का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया है, बल्कि संगठन को और मजबूत करने के लिए जमीन पर काम करना होगा। कार्यक्रम में मौजूद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नितिन नवीन का इस पद पर पहुंचना बिहार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में 202 सीटों की जीत के बाद यह जिम्मेदारी मिलना पार्टी की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को और मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि अगला लक्ष्य पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और केरल में भाजपा की सरकार बनाना है। 
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो राष्ट्र के लिए काम करती है, जहां केवल सदस्यता नहीं बल्कि संबंध मायने रखते हैं। उन्होंने दोहरी इंजन सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने विकास के नए आयाम छुए हैं।
वहीं, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने नितिन नवीन को बिहार की धरती का सपूत बताते हुए कहा कि भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे पार्टी की संगठनात्मक ताकत का प्रतीक बताया। 

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विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव

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नई दिल्ली।   संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। मंगलवार को सचिवालय को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया गया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि स्पीकर को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत लोकसभा सचिवालय को नोटिस दिया गया है।   विपक्षी सांसदों के पत्र के जवाब में भाजपा की महिला सांसदों ने खोला मोर्चा, स्पीकर से की ये मांग संसद में आज भी टकराव टलना मुश्किल, कार्यवाही चलाने को लेकर शर्तों पर फंसा पेंच संसद में साजिश: पीएम मोदी को सदन न आने की सलाह क्यों? सुरक्षा को लेकर स्पीकर की चिंता जायज; कटघरे में विपक्ष ‘अगर संसद में चर्चा नहीं हुई, तो विपक्ष को होगा नुकसान’, रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया: विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव, जानें नियम; पहले कब हुआ ऐसा?

नोटिस पर 120 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष के करीब 120 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, डीएमके, सपा के सांसद शामिल हैं।

नोटिस में विपक्ष ने कहा है, लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं। नोटिस में बताया गया कि अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस दिया गया है क्योंकि स्पीकर खुलेआम पक्षपात कर रहे हैं। 

विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है; उन्हें केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है।

कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति ही नहीं दी गई, जबकि यह उनका मौलिक अधिकार है।

कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप के सुरेश ने कई विपक्षी पार्टियों की तरफ से लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस दिया।

गौरतलब है कि टीएमसी के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वे इस नोटिस का हिस्सा हैं। 

राहुल गांधी को न बोलने देने के मुद्दे पर संसद में हंगामा लोकसभा में राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्ष हंगामा कर रहा है।

दरअसल 2 फरवरी को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब में कथित तौर पर लिखी गई बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने दिया। 
इसके बाद 4 फरवरी को पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन इसे टाल दिया गया।

अगले दिन लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कई विपक्षी सांसदों का सदन में व्यवहार उग्र और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था। ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए उनका संबोधन रद्द कर दिया गया।

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के दावे को खारिज कर दिया और स्पीकर के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। 

विपक्षी सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर उन पर पक्षपाती व्यवहार करने का आरोप लगाया।

आईसीसी के सामने घुटने टेके, पर मंच से गीदड़भभकी जारी! नकवी ने आसिम मुनीर का नाम लेकर दिखाई झूठी अकड़

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भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच पर लंबे ड्रामे के बाद जब अंततः खेलने की सहमति बन गई, उसी समय पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने ऐसा बयान दे दिया जिसने नई बहस छेड़ दी। समझौते के कुछ घंटों पहले उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान पर किसी का दबाव नहीं है।उन्होंने कहा, ‘न मैं भारत और आईसीसी की धमकियों से डरता हूं, न पाकिस्तान की सरकार डरती है, और जहां तक फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर का सवाल है, आप उन्हें जानते ही हैं, वह कभी नहीं डरते।’ नकवी का यह बयान अब मजाक का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब अंत में मैदान में उतरना ही पड़ा, तब इस तरह की भाषा पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत नहीं बल्कि विरोधाभासी बनाती है।

ताकत का संदेश या सियासी मंच?

आसिम मुनीर का नाम पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से शक्ति और सैन्य प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में पेश किया जाता रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उन्हें फील्ड मार्शल बनाए जाने को वहां बड़े राजनीतिक संदेश की तरह प्रचारित किया गया, लेकिन खेल के विवाद में सेना के शीर्ष पद का उल्लेख करना कई विशेषज्ञों को असहज करने वाला कदम लगा। उनके मुताबिक, इससे यह संकेत गया कि क्रिकेट से ज्यादा यह घरेलू राजनीतिक दर्शकों को संदेश देने की कोशिश थी। पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देने के लिए जाना जाता है। अपने देश में मुनीर से आतंकवादी खत्म नहीं किए जा रहे और नकवी बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। इस्लामाबाद में हाल ही में विस्फोट में कई लोग मारे गए थे। मुनीर और नकवी (जो कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं) अपने लोगों की हिफाजत कर नहीं पा रहे और दुनिया भर की बातें करने चले हैं। 

पहले सख्ती, फिर यू-टर्न

हफ्तों तक बहिष्कार, शर्तें और बयानबाजी चलती रही। मगर आखिरकार बातचीत, राजनयिक संपर्क और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान को तय कार्यक्रम मानना पड़ा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुआई में चर्चा के बाद टीम को 15 फरवरी को खेलने की अनुमति दी गई। सरकार ने इसे बहुपक्षीय संवाद का नतीजा बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भावना को बनाए रखना जरूरी था, लेकिन सवाल यही उठा- अगर खेलना ही था, तो फिर इतनी तीखी बयानबाजी किसके लिए? इतना ड्रामा किसके लिए?
 
आईसीसी ने क्या कहा

आईसीसी ने अपने स्तर पर हुई बैठकों को सकारात्मक बताया। माहौल को रचनात्मक कहा गया और किसी सजा की बात नहीं की गई। यानी अंत में मामला बातचीत से सुलझा, न कि दहाड़ से। साफ हो गया कि गीदड़भभकियों से न तो समाधान निकलता है और न ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई प्रभावित होता है, उल्टा मजाक जरूर बनता है, आपका भी और आपके देश का भी। जिस बांग्लादेश के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सख्ती का रुख दिखाने की कोशिश की, वही आखिरकार मैच खेलने के पक्ष में नजर आया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी ऊंची आवाज किसके लिए थी।