8.6 C
London
Friday, March 13, 2026
HomeLatest NewsNDPS मामले में सात साल बाद मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट की सख्त...

NDPS मामले में सात साल बाद मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि वह व्यक्ति पिछले सात साल से अधिक समय से जेल में बंद है और उसकी अपील पर फिलहाल जल्दी सुनवाई होने की संभावना नहीं है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने मनोज कुमार गुप्ता की अपील स्वीकार करते हुए पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पहले उनकी सजा को निलंबित करने और जमानत देने से इनकार किया गया था। मनोज कुमार गुप्ता ने मई 2025 में पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

एनडीपीएस एक्ट के तहत लगाए गए कई आरोप

यह मामला साल 2000 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें एनडीपीएस एक्ट की कई गंभीर धाराओं, 20(b)(ii)(C), 23(c), 24, 27A और 29, के तहत आरोप लगाए गए थे। ये धाराएं आमतौर पर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अपराधों से संबंधित होती हैं।

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने क्या की टिप्पणी?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भले ही आरोपी को व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया हो, लेकिन उसने पहले ही सात साल से ज्यादा समय जेल में बिताया है। साथ ही, पटना हाईकोर्ट में उसकी अपील की सुनवाई फिलहाल जल्दी होने की संभावना नहीं दिख रही है, इसलिए इस स्थिति में उसे जमानत देना उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी को जमानत मिलने से पहले स्पेशल कोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना जमा करना होगा। इसके अलावा, ट्रायल कोर्ट जो भी शर्तें तय करेगा, उनका पालन करना होगा। इन शर्तों के पूरा होने के बाद उसकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए उसे जमानत पर रिहा किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में रहना होगा मौजूद

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनोज कुमार गुप्ता को पटना हाईकोर्ट में अपनी अपील की सुनवाई के दौरान नियमित रूप से उपस्थित होना होगा या अपने वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व करना होगा। साथ ही, उसे बेवजह सुनवाई टालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश में कही गई बातें केवल जमानत देने के सीमित उद्देश्य के लिए हैं। अदालत ने मामले के मूल मुद्दों या अपील के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, इसलिए हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से करेगा।

काव्या मारन की टीम सनराइजर्स लीड्स ने खरीदा अबरार अहमद, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews इंग्लैंड की लोकप्रिय लीग 'द हंड्रेड' की नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को खरीदने के बाद हो रही आलोचन...

झाक मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ का शव पानी के कुंड में तैरता मिला

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews बाड़मेर। राजस्थान में अभी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी सुलझी भी नहीं थी कि अब झाक मठ के...