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Saturday, October 10, 2026
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CAPF करेगी फ्लैग मार्च, मतदाताओं में भरोसा बढ़ाने की कोशिश

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कोलकाता|पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द संवेदनशील इलाकों की पहचान करे। आयोग चाहता है कि यह काम मार्च के दूसरे सप्ताह तक पूरा हो जाए। इन इलाकों की पहचान के आधार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की योजना बनाई जाएगी। चुनाव से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदान तिथियों की घोषणा और आचार संहिता लागू होने से पहले ही सीएपीएफ की तैनाती कर दी जाएगी। आयोग ने 480 कंपनियां भेजने का फैसला किया है। इनमें से 240 कंपनियां एक मार्च को और बाकी 240 कंपनियां 10 मार्च को तैनात की जाएंगी। इन बलों का उपयोग केवल बैठकर इंतजार करने के लिए नहीं, बल्कि इलाके में शुरुआती दबदबा बनाने के लिए किया जाएगा।

संवेदनशील इलाकों की पहचान पर जोर

आयोग ने राज्य पुलिस से कहा है कि वह संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों की सूची जल्द तैयार करे। इन इलाकों में पिछले चुनावों में हिंसा या तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। इन्हीं क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की अधिक तैनाती की जाएगी। केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी का जिम्मा दिया गया है। उन्हें रोजाना रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजनी होगी।

दो चरणों में होगी तैनाती

पहले चरण में एक मार्च को 240 कंपनियां तैनात होंगी। इनमें 110 कंपनियां सीआरपीएफ की, 55 BSF की, 21 सीआईएसएफ की, 27 आईटीबीपी की और 27 एसएसबी की होंगी। दूसरे चरण में 10 मार्च को 240 और कंपनियां भेजी जाएंगी। इनमें 120 कंपनियां सीआरपीएफ, 65 बीएसएफ, 16 सीआईएसएफ, 20 आईटीबीपी और 19 एसएसबी की होंगी। कुल मिलाकर 480 कंपनियां राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तैनात रहेंगी।

समन्वय की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को

आयोग ने स्पष्ट किया है कि बलों की आवाजाही और तैनाती का समन्वय सीआरपीएफ करेगी। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह केंद्रीय बलों और उनके समन्वय अधिकारियों के साथ मिलकर विस्तृत योजना तैयार करे। यह भी तय किया गया है कि बलों को खाली नहीं बैठाया जाएगा, बल्कि क्षेत्र में फ्लैग मार्च और एरिया डोमिनेशन कराया जाएगा।

चुनाव से पहले सख्त सुरक्षा रणनीति

चुनाव आयोग का मानना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पहले से सुरक्षा तंत्र मजबूत होना जरूरी है। इसलिए मतदान की घोषणा से पहले ही केंद्रीय बलों को मैदान में उतारा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर इन कंपनियों की वापसी की सूचना बाद में दी जाएगी। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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