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Tuesday, August 11, 2026
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राज्य का दर्जा बहाल करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर NC के सांसदों ने गृह मंत्री से मुलाकात की

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श्रीनगर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के नए चुने गए राज्यसभा सदस्यों ने राज्य से जुड़ी अपनी मांगों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाया. इनके प्रमुख मांगों में राज्य का दर्जा बहाल करने, बाहरी जेलों से कैदियों को शिफ्ट करने और बिजनेस नियम शामिल हैं. उन्होंने इन्हें जम्मू-कश्मीर में भरोसा और सामान्य लोकतांत्रिक हालात बहाल करने के लिए जरूरी बताया.

चौधरी मोहम्मद रमजान के नेतृत्व में तीन सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और लोगों के मानवीय, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर सामूहिक चिंताओं का एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा. सांसदों ने तीनों मांगों को जम्मू-कश्मीर में भरोसा, सम्मान और सामान्य लोकतांत्रिक स्थिति बहाल करने के लिए जरूरी बताया.

चौधरी ने मीडिया को जारी दो पेज के पत्र में कहा, ‘यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, संघवाद और इंसानी दया के प्रति हमारे सामूहिक प्रतिबद्धता की कसौटी है.’ सज्जाद किचलू और गुरविंदर सिंह ओबेरॉय के साथ उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार देरी से लोकतांत्रिक, प्रशासनिक और भावनात्मक परेशानी हो रही है और इसे संवैधानिक गरिमा के हनन के तौर पर महसूस किया जा रहा है.’

चौधरी ने लिखा, ‘हम केंद्र सरकार से विनम्रतापूर्वक आग्रह करते हैं कि वह संवैधानिक सिद्धांतों, न्यायिक टिप्पणियों और सबसे ऊंचे लेवल पर पहले से दिए गए आश्वासनों के अनुसार जम्मू-कश्मीर को पूरा राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए साफ, ठोस और समय पर कदम उठाए.’ उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने के बारे में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री के वादे को याद किया.

अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर से चुने गए बीजेपी सांसद सत शर्मा के साथ ये तीनों संसद में अपने पहले चल रहे सत्र में शामिल हुए. चौधरी ने जम्मू-कश्मीर से कैदियों को इलाके के बाहर की जेलों में शिफ्ट करने और उन कैदियों को रिहा करने की नीति की समीक्षा की मांग की. इनके खिलाफ गंभीर आरोप साबित नहीं हो सके. उन्होंने मौजूदा तरीके को ‘गरीबी की सजाट बताया. उन्होंने बताया कि हजारों परिवारों को पैसे की तंगी और बाहर कैदियों से मिलने की कोशिश में बेइज़्जती वाले तरीकों का सामना करना पड़ता है.

पत्र में आगे कहा गया, ‘इनमें से कई परिवारों के पास इतनी पैसे की व्यवस्था नहीं है कि वे लंबी दूरी तय कर सकें, कानूनी सलाह ले सकें या अपने परिवार वालों से एक बार भी मिल सके. हम ऐसी माताओं से मिले हैं जो मरने से पहले अपने बेटों को सिर्फ एक बार देखना चाहती हैं और ऐसे बच्चे जो अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में देखकर बड़े हुए हैं. कई मामलों में गंभीर आरोप साबित न होने के बावजूद कैदी जेल में ही रहते हैं.’

सांसद और सीनियर एनसी नेता ने कहा कि कश्मीरी न तो पैदाइशी क्रिमिनल हैं और न ही कोई खतरा, बल्कि वे भी एक इंसान हैं और एक भारतीय नागरिक हैं जो इज्जत, इंसाफ और दया के हकदार हैं. चौधरी ने कहा, ‘कैदियों को उनके घरों से दूर लगातार रखने से न केवल कैदियों को बल्कि बेगुनाह परिवारों को भी तकलीफ होती है, जो गुनाह की नहीं बल्कि गरीबी की सजा है.’

प्रतिनिधिमंडल ने चुनी हुई सरकार और लोक भवन के बीच अधिकारों के बंटवारे के लिए ‘बिजनेस रूल्स’ का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, ‘हम आदरपूर्वक अनुरोध करते हैं कि बिजनेस रूल्स को जल्द से जल्द नोटिफाई किया जाए ताकि गवर्नेंस आसानी से पारदर्शी तरीके से और लोकतांत्रिक नियमों और संवैधानिक मर्यादा के अनुसार चले.’

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