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Tuesday, September 29, 2026
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धीरेंद्र शास्त्री पर भड़के पूर्व सीएम बघेल, बोले- वे ‘भाजपा के एजेंट, केवल पैसा बटोरने आते हैं’

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bhupeshरायपुर। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) उर्फ बागेश्वर बाबा (Bageshwar Baba) इन दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में हैं। वे यहां पर पांच दिवसीय हनुमंत कथा (Hanumant Katha) कहने के लिए गुरुवार को पहुंचे। इस बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उन पर बुरी तरह भड़क गए हैं। बघेल ने उन्हें ढोंगी बताते हुए भाजपा का एजेंट कहा है। धीरेंद्र शास्त्री पर भड़कते हुए बघेल ने कहा कि जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हम हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं और वह हमें हनुमान चालीसा और सनातन धर्म के बारे में बताएंगे।

बघेल ने यह भी कहा कि सच्चे कथावाचक अपना घर और आश्रम मुश्किलों से चला पाते हैं, दूसरी तरफ ये लोग करोड़ों अरबों के मालिक बन बैठे हैं। इसके अलावा बघेल ने कहा कि ये लोग छत्तीसगढ़ में सिर्फ पैसा बटोरने आते हैं और ऐसा कहते हुए उन्होंने शास्त्री को छत्तीसगढ़ के किसी भी संत महात्मा के साथ शास्त्रार्थ करने की चुनौती भी दी। बघेल ने ये सारी बातें शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहीं।

 

‘वह भाजपा के एजेंट, केवल पैसा बटोरने आते हैं’
इस बारे में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भूपेश बघेल के कुछ वीडियो शेयर किए, जिनमें प्रदेश के पूर्व सीएम बागेश्वर बाबा पर अपना गुस्सा निकालते दिखे। इनमें से एक वीडियो में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा, ‘सीधी सी बात है ये उनका धंधा है, भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में काम करते हैं, यही उनका धंधा है, इसके अलावा है क्या उनके पास, इसके अलावा क्या गाते हैं। कौन से दर्शन की बात करते हैं, कौन से अध्यात्म की बात करते हैं। मैं चुनौती देता हूं, हमारे छत्तीसगढ़ में इतने महापुरुष हैं, इतने दर्शन शास्त्री हैं, आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं, हमारे मठ-मंदिरों में बैठे हुए किसी भी साधु-महात्माओं के साथ शास्त्रार्थ कर के दिखाएं। मैं चुनौती देता हूं। मैं तो इस क्षेत्र का नहीं हूं, लेकिन ऐसे बहुत मिलेंगे हमारे छत्तीसगढ़ में उनके शास्त्रार्थ कर लें। ये छत्तीसगढ़ में केवल पैसा बटोरने आते हैं।’

 

‘संत ऐसे होते हैं क्या, उम्र क्या है उसकी?’

इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के दिए बयान पर नाराजगी जताते हुए बघेल ने कहा, ‘ये छत्तीसगढ़ है, यहां कबीरदासजी और गुरु घासीदासजी जैसे संत-महात्माओं की वाणी गूंजती है। उसी हिसाब से यहां छत्तीसगढ़ के लोग शांतिप्रिय हैं और यह शांति का टापू है। उन्होंने कहा था कि भूपेश बघेल को विदेश चले जाना चाहिए। यह धीरेंद्र के शब्द हैं ना और क्या यही संत-महात्माओं के शब्द होते हैं, ऐसे ही होते हैं संत।’

‘जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हनुमान चालीसा पढ़ रहा’

इसके बाद शास्त्री पर भड़कते हुए बघेल बोले, ‘अरे जब उसका जन्म नहीं हुआ था, तब से हम हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं। कल का बच्चा है, क्या उम्र है उसकी, मेरा बेटा भी उससे 10-12 साल बड़ा है, उसके बाप भी शायद मेरी उम्र से छोटे होंगे। वह मुझे हनुमान चालीसा के बारे में बताएंगे। उसका जन्म नहीं हुआ तब से हनुमान चालीसा, हनुमान बाण पढ़ रहे हैं। वह हमको सिखाएंगे सनातन धर्म क्या है। मेरे ससुराल में पांच-पांच साधु हैं, लेकिन इसके जैसे ढोंगी नहीं है। सारे संत महात्मा हुए हैं मेरे परिवार में। वो हमको सीख दे रहे हैं और वो कहते हैं कि भूपेश बघेल को विदेश चला जाना चाहिए, देश छोड़ देना चाहिए। यही बात दूसरे प्रदेश में जाकर किसी पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में नहीं बोल पाएंगे, यह तो छत्तीसगढ़ है, इसलिए उसने बोल दिया और सुन लिए हम लोग।’

‘सरकारी जहाज में घूम रहे, बड़े-बड़े अस्पताल खोल रहे’

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम ने इसके आगे कहा, ‘हमारे छत्तीसगढ़ में बहुत से कथावाचक हैं, वे लोग बहुत मुश्किल से अपना आश्रम या घर चला पा रहे हैं, भगवत भजन करते हैं और भक्ति-ज्ञान के बारे में बताते हैं। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कथावाचक पवन दीवान जी रहे हैं, उनके आश्रम के हालात देख लीजिए। जिंदगी भर उनसे ज्यादा कथा वाचक नहीं हुआ। वो मंत्री रहे, सांसद रहे, विधायक रहे, जिंदगी भर कथावाचन किए, लेकिन उनकी स्थिति देख लो और दूसरी तरफ इन धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा की स्थिति देख लो। सरकारी जहाज में घूम रहे हैं, बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोल रहे हैं, मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, करोड़ों-अरबों के मालिक बन गए हैं।’

‘मरीजों को दिव्य दरबार लगाकर ठीक क्यों नहीं कर देते’

आगे बघेल ने कहा, ‘ये ना हिंदू धर्म के हिसाब से और ना दर्शन के हिसाब से सही हैं। यदि हिंदू धर्म या सनातन धर्म आज टिका हुआ है तो अपने दर्शन और आध्यात्मिकता के कारण से टिका हुआ है। जब इनके झाड़-फूंक से, दिव्य दरबार से लोग ठीक हो रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल क्यों खोल रहे हैं? जरूरत ही क्या है, कैंसर तो ऐसे ही फूंक मार के ठीक हो जाता है, मतलब अपनी ही बात का खुद खंडन कर रहे हैं। बैठ जाते, कैंसर अस्पताल खोलने की जरूरत क्या, दिव्य दरबार में सबको बुलाते, सब वहीं ठीक हो जाते।’

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