23.1 C
London
Thursday, August 6, 2026
HomeLatest Newsक्यों जसप्रीत बुमराह को कहा जा रहा गेंदबाजी का सचिन तेंदुलकर?

क्यों जसप्रीत बुमराह को कहा जा रहा गेंदबाजी का सचिन तेंदुलकर?

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

भारतीय क्रिकेट में जब महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है तो सबसे पहले नाम सचिन तेंदुलकर का लिया जाता है। उन्होंने बल्लेबाजी को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया, वह आज भी बेमिसाल है, लेकिन अगर गेंदबाजी की बात की जाए तो आज के दौर में एक ऐसा खिलाड़ी है जिसकी तुलना सचिन के प्रभाव से की जा सकती है, और वह खिलाड़ी हैं जसप्रीत बुमराह।कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बुमराह भारतीय गेंदबाजी के ‘सचिन तेंदुलकर’ हैं। दोनों की कला अलग है, एक बल्ले से जादू करता था, दूसरा गेंद से, लेकिन प्रभाव, क्रिकेटिंग समझ और बड़े मौकों पर प्रदर्शन की क्षमता के मामले में दोनों में अद्भुत समानता दिखती है।

प्रैक्टिस का अनोखा तरीका

सचिन तेंदुलकर के शुरुआती दिनों को देखने वाले लोगों को याद होगा कि उन्होंने अपने करियर के एक दौर के बाद भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ नेट्स में बल्लेबाजी करना लगभग बंद कर दिया था। वे अक्सर कोच या सहयोगियों से थ्रोडाउन लेकर अभ्यास करते थे। बुमराह का तरीका भी कुछ हद तक ऐसा ही है। वह नेट्स में बल्लेबाजों को कुछ गेंदें जरूर डालते हैं, लेकिन उनका अधिकांश अभ्यास अपने गेंदबाजी प्लान पर केंद्रित होता है कि किस बल्लेबाज को क्या गेंद डालनी है, किस लंबाई पर गेंद फेंकनी है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से पहले मोटेरा स्टेडियम में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला। जब बाकी बल्लेबाज सेंटर विकेट पर अभ्यास कर रहे थे, तब बुमराह मुख्य मैदान से बाहर नेट्स में अपनी ब्लॉकहोल डिलीवरी पर काम कर रहे थे। उनके सामने स्टंप के पास गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोर्केल के जूते रखे गए थे ताकि वह उसी जगह गेंद डालने का अभ्यास कर सकें।

सिराज की मजेदार टिप्पणी

जब बुमराह लगातार उसी जगह गेंद डाल रहे थे, तब उनके टेस्ट मैचों के नए गेंद साझेदार मोहम्मद सिराज ने मजाक में कहा ‘जस्सी भाई, आपको अगर रात के दो बजे भी नींद से जगाया जाए तो भी आप गेंद इसी जगह डालेंगे।’ यह एक हल्की-फुल्की टिप्पणी थी, लेकिन इससे टीम के भीतर बुमराह के प्रति सम्मान साफ झलकता है। बुमराह बस मुस्कुराए और अभ्यास जारी रखा। आखिरकार उन्होंने इतनी बार उसी जगह गेंद डाली कि मोर्केल का जूता ही खराब हो गया।

मैच जिताने वाले गेंदबाज

बुमराह हर मैच में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ नहीं बनते, लेकिन अगर भारत के बड़े मुकाबलों के स्कोरकार्ड देखें तो अक्सर जीत की नींव उन्होंने ही रखी होती है। कई बार उनके साथी खिलाड़ियों ने उस प्रदर्शन को आगे बढ़ाया, और कई बार नहीं भी, लेकिन हाल ही में हुए टी20 विश्व कप में टीम इंडिया के किसी अन्य खिलाड़ी ने वैसी जादुई झलकियां नहीं दिखाई हैं जैसी बुमराह ने दिखाई हैं।

जादुई गेंदें और बड़े विकेट

टी20 विश्व कप 2026 के दौरान बुमराह ने कई यादगार गेंदें डाली हैं। आइए जानते हैं-पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने सैम अयूब को ऐसी यॉर्कर डाली जो सीधे पैर पर लगी और बल्लेबाज पूरी तरह चकित रह गया।दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज रेयान रिकेलटन के खिलाफ उन्होंने एक शानदार इनस्विंग डिलीवरी डाली जो बल्ले के किनारे से बाल-बाल बचती हुई निकल गई। इसके बाद उन्होंने धीमी गेंद डाली जिससे बल्लेबाज क्रीज पर ही जड़ हो गया और आसान कैच दे बैठा।वेस्टइंडीज के खिलाफ ईडन गार्डन्स में खेले गए मैच में भी बुमराह का प्रभाव देखने को मिला। उन्होंने रोस्टन चेज को एक ही मैच में दो बार आउट करने का मौका बनाया। पहली बार चेज ने जल्दबाजी में हवाई शॉट खेला, लेकिन अभिषेक शर्मा ने कैच छोड़ दिया। दूसरी बार बुमराह ने बिना हाथ की गति बदले ऑफ-ब्रेक जैसी पकड़ से गेंद फेंकी और चेज को चलता कर दिया।इंग्लैंड के खिलाफ 16वें और 18वें ओवर में बुमराह ने यॉर्कर और स्लोअर वन की बौछार कर दी। भारत की जीत में उनका अहम योगदान रहा। वहीं, हैरी ब्रूक को उन्होंने अपनी चतुराई भरी गेंद से पवेलियन भेजा। आमतौर पर जब बुमराह गेंदबाजी के लिए आते हैं, तो बल्लेबाज सोचता है कि वह तेज गेंद डालेंगे, लेकिन बुमराह ने स्लोअर वन फेंकी और ब्रूक हवा में गेंद खेल बैठे और अक्षर ने शानदार कैच लपका।फाइनल में रचिन रवींद्र को भी उन्होंने स्लोअर वन फेंकी और कैच आउट कराया। फिर नीशम और मैट हेनरी को उन्होंने स्लो यॉर्कर फेंकी और बल्लेबाज को बिल्कुल अंदाजा नहीं लगा।

डॉट गेंदों का दबदबा

नीदरलैंड्स और नामीबिया को छोड़ दें तो टेस्ट खेलने वाली टीमों के खिलाफ बुमराह ने छह मैचों में कुल 52 डॉट गेंदें डाली हैं। यानी औसतन हर मैच में आठ से ज्यादा डॉट गेंदें। टी20 क्रिकेट में यह आंकड़ा किसी भी गेंदबाज के लिए बेहद प्रभावशाली माना जाता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे बुमराह किसी कठपुतली के उस्ताद की तरह बल्लेबाजों को नचा रहे हों। मानो उनके हाथ में अदृश्य धागा हो और बल्लेबाज उसी के इशारों पर खेल रहे हों। बुमराह टी20 विश्वकप 2026 में आठ मैचों में 14 विकेट के साथ सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उनका 6.21 का इकोनॉमी रेट भी सबसे शानदार रहा।

आलोचना भी झेलनी पड़ी

हालांकि कुछ महीने पहले तक बुमराह आलोचनाओं के घेरे में भी थे। 2025 में इंग्लैंड दौरे के दौरान उन्होंने केवल तीन टेस्ट मैच खेले थे। तब कुछ लोगों ने उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए थे। असल में बुमराह ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनका शरीर इंग्लैंड की परिस्थितियों में तीन मैचों से ज्यादा का दबाव नहीं झेल पाएगा, लेकिन इसके बावजूद उनकी आलोचना हुई। इसके बाद जब वह चैंपियंस ट्रॉफी नहीं खेल पाए और आईपीएल में उतरे तो आलोचकों ने कहा कि खिलाड़ी आईपीएल छोड़ना नहीं चाहते। हालांकि यही लोग शायद ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस के बारे में ऐसा नहीं कहते, जो चोट के कारण टी20 विश्व कप नहीं खेल पाए लेकिन आईपीएल में उपलब्ध हो सकते हैं।

2022 में कहा गया था करियर खत्म हो गया

सचिन के साथ भी एक दौर ऐसा आया था (2005 के आसपास), जब कहा गया था कि सचिन का बल्ला नहीं चल रहा, वो नहीं खेल पा रहे। सवाल उठने लगे थे, लेकिन इसके बाद सचिन ने आलोचकों के मुंह पर ऐसा तमाचा जड़ा कि वह फिर कभी कुछ बोल नहीं पाए। 2006 से 2011 तक, उन्होंने हर साल 40 से ज्यादा की औसत से रन बनाए। वैसे ही, 2022 में जब बुमराह को बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ था, तो सबने कहा था कि उनका करियर खत्म, वगैरह और पता नहीं क्या-क्या, लेकिन बुमराह ने वापसी की और क्या जबरदस्त वापसी की।2023 में भारत उनके दम पर फाइनल में पहुंचा। 2024 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे बुमराह के योगदान को कौन भूल सकता है। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उन्होंने टीम इंडिया की जबरदस्त वापसी कराई और भारत ने 119 रन का बचाव किया था। वहीं, फाइनल में बुमराह के यॉर्कर ने भारत को जीत दिलाई थी। अब 2026 में वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट तो नहीं, बने लेकिन प्लेयर ऑफ द फाइनल रहे। एक और बड़ा टूर्नामेंट और एक बार और बुमराह की शानदार गेंदबाजी। कहानी कुछ वैसी ही रही है।

अंदर से बेहद मजबूत इंसान

जो लोग बुमराह को करीब से जानते हैं, उनका कहना है कि वह बेहद आत्मविश्वासी और शांत स्वभाव के इंसान हैं। उन्हें इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। उनके आसपास मानो एक अदृश्य घेरा है जिसमें बहुत कम लोग ही प्रवेश कर पाते हैं। जैसे वह गेंदबाजी में एक इंच भी ढील नहीं देते, वैसे ही अपने निजी जीवन में भी सीमाएं तय रखते हैं।

अहमदाबाद से खास लगाव

बुमराह को दुनिया की कोई भी जगह मिल जाए, लेकिन वह अहमदाबाद छोड़ना नहीं चाहते। मुंबई का अपना आकर्षण है, लेकिन अहमदाबाद उनके लिए शांति का घर है। यहीं वह अपने छोटे बेटे को प्ले-स्कूल छोड़ सकते हैं, बिना कैमरों की भीड़ के। रात के समय दोस्तों के साथ पिकलबॉल खेल सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं।

टीम के भीतर लीडर

चोटों के कारण चयनकर्ता उन्हें लंबे समय के लिए कप्तान नहीं बना सके, लेकिन टीम के अंदर वह एक ऐसे लीडर हैं जो अपने प्रदर्शन से रास्ता दिखाते हैं। वह बताते हैं कि मैच कैसे जीता जाता है। जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी एक जटिल कला है। उनकी एक्शन, उनकी गति, उनकी यॉर्कर, सब कुछ अलग है, लेकिन दिल से वह बेहद सरल इंसान हैं। क्रिकेट की दुनिया में वह सचमुच अपनी तरह के अकेले खिलाड़ी हैं। इसलिए उन्हें सूर्यकुमार यादव और विराट कोहली ‘राष्ट्रीय धरोहर’ बता चुके हैं। 

Raahi Global Guides Indian Nurses Through Every Stage of Their Germany Career Journey

Bengaluru, Karnataka | August 2026 – Pursuing a nursing career in Germany is a life-changing opportunity for many healthcare professionals, but the journey requires...

Corporate Gift Items Mumbai to Strengthen Business Relationships

Strong business relationships are built on trust, communication, and appreciation. While excellent products and services are essential, thoughtful corporate gifts add a personal touch...