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Wednesday, October 14, 2026
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कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप…ECI को पत्र लिखकर की जांच की मांग

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नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress- AICC) ने भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India- ECI) को पत्र लिखकर भाजपा (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि वर्तमान में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision of Electoral Rolls- SIR) के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि इससे संबंधित सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया रोकी जाए तथा स्वतंत्र जांच कराई जाए।

मुख्य आरोप: फॉर्म-7 का दुरुपयोग
पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। वेणुगोपाल ने पत्र में कहा- हम इस आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा एवं आपत्तियां दर्ज कराने के चरण में योग्य मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से हटाए जाने से संबंधित है।

फॉर्म-7 क्या है और कब और क्यों भरते हैं?
– फॉर्म-7 किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका नाम सूची से हटवाने या किसी नाम पर वैध आपत्ति दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
– कब और क्यों भरते हैं- यदि मतदाता सूची में किसी का नाम गलत तरीके से शामिल हो गया हो- जैसे मृत व्यक्ति का नाम अभी भी सूची में है, या कोई व्यक्ति उस क्षेत्र से स्थायी रूप से जा चुका है, या डुप्लिकेट एंट्री है)।
– अपना नाम हटवाने के लिए- यदि कोई व्यक्ति स्वयं अपना नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहता है (जैसे स्थान परिवर्तन या अन्य कारण से)।
– कांग्रेस का कहना है कि इस फॉर्म का इस्तेमाल जीवित और पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके।

हाशिए पर रहने वाले समुदायों को निशाना बनाने का दावा
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जो बात अत्यंत चिंताजनक है और जिस पर आयोग का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, वह यह है कि मीडिया की खबरों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जो भाजपा से जुड़े हैं और निर्वाचन आयोग के ही दस्तावेज़ ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन कार्रवाइयों को रोका नहीं गया और आयोग द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अनुचित चुनावी लाभ प्राप्त करने का दुस्साहस मिलेगा तथा लाखों मतदाता विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

उनका कहना है कि दावों एवं आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति पर ही होता है तथा झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला है और इस पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

वेणुगोपाल ने दावा किया- फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली से तैयार किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन फॉर्म को संगठित ढंग से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।

उनके अनुसार, इन फॉर्म में आपत्तिकर्ता की पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारियां नहीं होती। कांग्रेस नेता के अनुसार, कई मामलों में जिन लोगों के नाम से फॉर्म-7 भरे गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई फॉर्म भरा था। उनका कहना है कि राजस्थान और असम में यह दुरुपयोग स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा- बिना वैध पहचान व प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। बीएलओ एवं ईआरओ को निर्देश दिया जाए कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना कोई भी नाम न हटाया जाए। ऐसे सभी व्यक्तियों/संगठनों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए जो फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पूरे मामले की तत्काल और स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने आयोग से यह आग्रह भी किया- 12 राज्यों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।’

कांग्रेस का कहना है कि यदि चुनाव आयोग ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो लाखों मतदाता मताधिकार से वंचित हो जाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होगी।

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