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Thursday, October 15, 2026
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असम मॉडल के सहारे बंगाल में बढ़त बनाने की कोशिश में भाजपा

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भाजपा पश्चिम बंगाल में ‘असम मॉडल’ के सहारे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि हेमन्त बिस्वा सरमा ने जिस तरह असम में घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की है, उसे उसका लाभ पश्चिम बंगाल चुनाव में भी मिल सकता है। मार्च-अप्रैल में होने जा रहे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले ममता बनर्जी एसआईआर को लेकर आक्रामक हैं। वे इसे आम बांग्लाभाषी के खिलाफ बताकर खुद को बांग्लाभाषी जनता और बांग्ला अस्मिता के सबसे बड़े ‘रक्षक’ के तौर पर पेश कर रही हैं। ममता बनर्जी का यह कार्ड ध्वस्त करने के लिए भाजपा ‘असम मॉडल’ को मजबूती से उठा रही है। भाजपा बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण पश्चिम बंगाल की आम जनता के रोजगार के अवसरों में कमी के मुद्दे को लगातार हवा दे रही है। पार्टी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में होने वाले अपराधों में भी बड़ी भागीदारी बांग्लादेशी घुसपैठियों की है। लव जिहाद और लैंड जिहाद के सहारे आम लोगों के अधिकारों को छीना जा रहा है। एसआईआर को इन कमियों को दूर करने की एक कारगर दवा के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि एसआईआर का विरोध करने के कारण ममता बनर्जी की छवि बांग्लादेश के घुसपैठिये मुसलमानों को बचाने वाले नेता के तौर पर उभर रही है। पार्टी का मानना है कि यह बदलाव बंगाल में सत्ता परिवर्तन में कारगर भूमिका निभा सकता है।

पश्चिम बंगाल में एक मॉडल बनकर उभर रहा असम

पश्चिम बंगाल में ‘असम मॉडल’ इस समय खूब चर्चा में है। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने जिस तरह अपने राज्य में घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, भाजपा को उसका लाभ पश्चिम बंगाल में भी मिलता दिख रहा है। भाजपा के आम कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के बाद राज्य में असम मॉडल से घुसपैठिये मुसलमानों को बाहर निकालने की बात कर रहे हैं। भाजपा का मानना है कि यह मॉडल लोगों के बीच, विशेषकर युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन रहा है।  
 
ममता दीदी को पता, उनकी जमीन खिसक गई- सुकांत मजूमदार  

केंद्रीय राज्य शिक्षा मंत्री सुकांत मजूमदार ने अमर उजाला से कहा कि देश के लगभग एक दर्जन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन किसी भी राज्य ने एसआईआर को लेकर इस तरह का रुख नहीं अपनाया है। लेकिन ममता बनर्जी एसआईआर के बहाने अपनी नाकामियों को छिपाने और घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि एसआईआर कराने वाली संस्था चुनाव आयोग अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र और सक्षम है, लेकिन एक चुनी हुई मुख्यमंत्री के द्वारा एक संवैधानिक संस्था के कार्यों के बीच इस तरह दखल देना लोकतंत्र को कमजोर करता है।  

घुसपैठियों को बचाने की ममता बनर्जी की कोशिश होगी असफल- भाजपा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने अमर उजाला से कहा कि ममता बनर्जी एसआईआर का केवल इसलिए विरोध कर रही हैं जिससे घुसपैठियों को बचाया जा सके। घुसपैठिये टीएमसी के वोटर हैं और उन्हें बचाकर ममता बनर्जी अपनी कुर्सी बचाना चाहती हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी को हटाने का निर्णय ले लिया है, इसलिए अब ममता दीदी की कोई भी चाल सफल नहीं होने वाली है। तुहिन सिन्हा ने कहा कि कोई भी संवैधानिक संस्था यह नहीं कह सकती कि घुसपैठियों को भारत में रहने और वोट करने का अधिकार होना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने देश के घुसपैठियों को लेकर कई बार अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, और इस बार भी वह घुसपैठियों पर सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों के कारण पश्चिम बंगाल की जनता के रोजी-रोटी का अधिकार छीना जा रहा है, और भाजपा यह कतई नहीं होने देगी।   

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