किसानों, आवास योजनाओं और खेल अवसंरचना पर महत्वपूर्ण फैसले

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रायपुर। धान खरीदी शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई साय कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। बैठक में खरीफ और रबी विपणन मौसम के लिए दलहन-तिलहन फसलों के उपार्जन से लेकर शासन के ढांचे में सुधार और खेल अवसंरचना के विस्तार तक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिपरिषद ने पूर्व वर्ष की भांति ‘‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’’ (PSS) के तहत अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन सहित रबी मौसम की चना, सरसों और मसूर की खरीदी समर्थन मूल्य पर जारी रखने का फैसला लिया। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना और मंडी में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना है। शासन कार्य में सुशासन और दक्षता बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन करते हुए—सार्वजनिक उपक्रम विभाग को वाणिज्य एवं उद्योग विभाग में, बीस सूत्रीय कार्यक्रम विभाग को योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में
विलय करने का निर्णय लिया। इसे ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए वर्ष 2024-25 हेतु स्वीकृत 15,000 करोड़ रुपये की शासकीय प्रत्याभूति को 2025-26 के लिए पुनर्वेधित किया गया। इसके साथ विपणन संघ को 11,200 करोड़ रुपये अतिरिक्त सरकारी गारंटी देने पर भी सहमति बनी। दीनदयाल आवास योजना, अटल आवास योजना, अटल विहार व नवा रायपुर मुख्यमंत्री आवास योजना में नई पात्रता जोड़ते हुए कैबिनेट ने निर्णय लिया—EWS और LIG श्रेणी के अविक्रित मकान तीन बार विज्ञापन के बाद अन्य आय वर्गों को बेचे जा सकेंगे, लेकिन उन्हें कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। यदि किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा Bulk Purchase का प्रस्ताव आता है, तो एक से अधिक भवन भी बेचे जा सकेंगे, पर अनुदान केवल पात्र आय वर्ग के लिए ही रहेगा। शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को दीर्घकालीन संचालन और विकास के लिए अनुबंध के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ को लीज पर देने की स्वीकृति दी गई। इससे खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं और भविष्य में अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

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ट्रोल्स की आलोचना पर अक्षर पटेल ने दिया जवाब, कहा कप्तान की जिम्मेदारी है टीम पर ध्यान देना

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नई दिल्ली: भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने क्रिकेट में एक आम, लेकिन गलत धारणा पर खुलकर बात की है। यह धारणा है कि ‘क्या अंग्रेजी बोलने वाला खिलाड़ी ही कप्तान बनने के लायक होता है?’ द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अक्षर ने बताया कि यह सोच न केवल गलत है, बल्कि क्रिकेट की असली जरूरतों से बहुत दूर है। उनका मानना है कि कप्तान का मूल्यांकन भाषा नहीं, क्षमता और टीम मैनेजमेंट के आधार पर होना चाहिए।

‘कप्तान का काम खिलाड़ी को समझना है’
अक्षर ने साफ कहा कि लोगों के बीच एक अजीब सी धारणा है कि जो खिलाड़ी अच्छे से अंग्रेजी बोल लेता है, वही कप्तानी के काबिल माना जाता है। उन्होंने कहा, ‘लोग कहने लगते हैं- अरे, यह तो अंग्रेजी नहीं बोलता, यह कप्तानी कैसे करेगा? कप्तान का काम सिर्फ बोलना नहीं होता। उसका काम होता है खिलाड़ी को समझना, खिलाड़ी की ताकत और कमजोरी जानना और उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाना।’ अक्षर के मुताबिक, कप्तान का असली परीक्षण मैदान पर होता है, जब वह टीम के लिए सही फैसले लेता है, न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कितनी धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलता है।

‘भाषा कप्तानी का पैमाना नहीं’
अक्षर ने बताया कि यह पूरा मामला एक लोगों की धारणा बन चुकी है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम कहें अच्छी पर्सनैलिटी चाहिए, अच्छी अंग्रेजी आनी चाहिए, यह जनता की अपनी सोची हुई धारणा है। कप्तानी में भाषा की कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।’ उनके मुताबिक, क्रिकेट जैसे खेल में संवाद बहुत जरूरी है, लेकिन वह किसी भी भाषा में हो सकता है- हिंदी, गुजराती, मराठी या अंग्रेजी। मकसद सिर्फ इतना है कि खिलाड़ी को बात समझ आए।

सोशल मीडिया से बढ़ती है यह भाषा-आधारित बहस
अक्षर ने इस मुद्दे में सोशल मीडिया की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज हर किसी की एक ऑनलाइन छवि बन गई है- कैसे बोलता है, कितना एक्टिव है, क्या पोस्ट करता है, लोग उसी पर राय बनाने लगे हैं। अक्षर ने कहा, ‘सब सोशल मीडिया पर क्या दिखता है, उसी से लोग फैसले लेते हैं कौन काबिल है, कौन नहीं। हर कोई अपनी राय देता है- इसे कप्तान बनाओ, इसे मत बनाओ।’ अक्षर का मानना है कि मैदान के बाहर की छवि से ज्यादा जरूरी है मैदान पर की समझ और नेतृत्व क्षमता।

अक्षर का कप्तानी मंत्र
दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर चुके अक्षर ने बताया कि वह टीम में एक हल्का-फुल्का, दोस्ताना माहौल रखते हैं, लेकिन इसके साथ कड़े प्रोफेशनल मानक भी बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि माहौल फ्रेंडली हो, लेकिन कोई चीज़ को हल्के में न ले। जीत के लिए जो जरूरी है, वह पहले करना चाहिए। उसके बाद मज़ा भी होना चाहिए। अगर आप एंजॉय करते हैं, तो बेहतर खेलते हैं।’ उनका अनुशासन और मजेदार माहौल का यह संतुलन, उन्हें एक अलग तरह का कप्तान बनाता है।

रोजाना केला और काली मिर्च खाने से इतनी तेजी से बढ़ती है इम्युनिटी

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केला और मसालों के डिब्बे में रखी चुटकी भर काली मिर्च- जी हां, यह कॉम्बिनेशन भले ही आपको अजीब लग रहा हो, मगर इसके फायदे जानकर आप भी इसे खाने से पीछे नहीं हटेंगे। दरअसल, जब इन दोनों को सही मात्रा में मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण पाचन से लेकर मूड तक, कई समस्याओं पर जादू की तरह असर करता है। आइए, इस पुराने नुस्खे के पीछे की साइंस को समझते हैं और जानते हैं।

पाचन शक्ति में जबरदस्त सुधार
केला फाइबर का भंडार है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है। वहीं, काली मिर्च में ‘पाइपेरिन’ नामक एक तत्व होता है, जो पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। जब आप इन दोनों को साथ खाते हैं, तो यह मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज को दूर करता है और पेट फूलने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है।

इंस्टेंट एनर्जी का खजाना
केला नेचुरल शुगर जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। काली मिर्च इस एनर्जी को तेजी से अवशोषित करने में मदद करती है। रोजाना सुबह या वर्कआउट से पहले इस कॉम्बिनेशन को लेने से आपको लंबे समय तक ताकत महसूस होगी और थकान कम होगी।

वजन कंट्रोल करने में मददगार
केला पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बचते हैं। काली मिर्च थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया को बढ़ाती है, यानी यह आपके शरीर के तापमान को थोड़ा बढ़ाती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती हैं। इस प्रकार, यह मिश्रण एक हेल्दी वेट बनाए रखने में काफी मदद कर सकता है।

हड्डियों को बनाता है मजबूत
केला मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का एक अच्छा सोर्स है, जो बोन डेंसिटी को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। काली मिर्च में भी कुछ मात्रा में मैंगनीज होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा है। इन पोषक तत्वों का सही मिश्रण आपकी हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

बेहतर मूड और तनाव में कमी
केले में ट्रिप्टोफैन नामक एक अमीनो एसिड होता है, जिसे शरीर ‘सेरोटोनिन’ में बदलता है। सेरोटोनिन को ‘फील-गुड’ हार्मोन भी कहा जाता है, जो मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद करता है। काली मिर्च इन पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करती है, जिससे आपको मानसिक शांति मिलती है।

इम्यून सिस्टम को रखे स्ट्रॉन्ग
काली मिर्च एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। केला विटामिन C और B6 जैसे जरूरी विटामिन देता है। यह शक्तिशाली कॉम्बिनेशन आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करता है, जिससे आप मौसमी बीमारियों और इन्फेक्शन्स से बचे रहते हैं।

कैसे खाएं?
बस एक पका हुआ केला लें और उस पर एक चुटकी ताजी पिसी हुई काली मिर्च डालें और रोजाना खाएं।

तेज प्रताप यादव हारे चुनाव लेकिन जीत गई उनकी साली, तेजस्वी ने दिया था टिकट

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महुआ: बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) की जनशक्ति जनता दल खाता भी नहीं खोल पाई है. वह खुद महुआ विधानसभा सीट पर करीब 33 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं. लेकिन उनकी चचेरी साली डॉ करिश्मा राय (Karishma Roy) परसा विधानसभा सीट से जीत की ओर कदम बढ़ा रही हैं. तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की साली को RJD से उम्मीदवार बनाया था. जनशक्ति जनता दल ने 21 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे.

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जसप्रीत बुमराह ने किया टेंबा बावुमा पर गंदा कमेंट, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

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नई दिल्ली: साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में जसप्रीत बुमराह का गेंद से असरदार प्रदर्शन दिखा है. लेकिन, इस दमदार प्रदर्शन के बीच उनका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें साउथ अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा को लेकर गंदे कमेंट करते देखा जा सकता है. बुमराह ने जो कहा वो दरअसल बॉडी शेमिंग के अंतर्गत आता है. उन्होंने वैसा बोलकर टेंबा बावुमा के कद का मजाक उड़ाया है.

बुमराह ने बावुमा को ये क्या कह दिया?
अब सवाल है कि बुमराह ने बावुमा को कहा क्या? ऋषभ पंत के साथ उनका जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वो उन्हें बौना कहते दिख रहे हैं. अब बुमराह ने ऐसा जान-बूझकर कहा या जाने-अनजाने में उस बारे में दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता.

मैच के दौरान कब घटी ये घटना?
ये मामला कोलकाता टेस्ट में पहले दिन के खेल के साउथ अफ्रीका की इनिंग के 13वें ओवर का है. इस ओवर की आखिरी गेंद पर बुमराह ने बावुमा को चौंका दिया. गेंद बावुमा के पैड की ऊपर की साइड लगी थी. LBW की जोरदार अपील हुई, जिसे अंपायर ने नकार दिया. अंपायर के इस फैसले को चुनौती देने यानी DRS लेने को लेकर भारतीय खिलाड़ी जब आपस में विचार-विमर्श कर रहे थे, उसी दौरान बुमराह से बावुमा को बौना कहने की गलती हो गई.

ऋषभ पंत ने कहा कि गेंद में हाईट है. उसी के रिप्लाई में बुमराह नो बोला कि बौना भी तो है ये. फिर पंत ने कहा कि वो ठीक है, लेकिन गेंद पैड के ऊपर भी तो लगी है. आखिर में DRS लेने का ख्याल टाल दिया गया. बॉल ट्रैकिंग में भी बाद में देखा गया तो यही पता चला कि गेंद लेग स्टंप के ऊपर से जा रही थी.

पहले सेशन में बुमराह की घातक गेंदबाजी
कोलकाता टेस्ट के पहले सेशन में जसप्रीत बुमराह का घातक रुप देखने को मिला. उन्होंने अपनी गेंदबाजी के पहले स्पेल में 7 ओवर में 4 मेडन के साथ 9 रन देकर 2 विकेट लिए. ये दोनों विकेट साउथ अफ्रीकी ओपनर्स के रहे.

सर्दियों में इन 5 सब्जियों को बनाएं डाइट का हिस्सा, सुपरफूड जैसी जबरदस्त ताकत देती हैं

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ठंड की कड़कती हवाएं, दिन का छोटा होता समय और शरीर में एक अजीब-सी सुस्ती… सर्दी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आता है। लेकिन इस मौसम में कुछ ऐसी सब्जियां भी आती हैं, जो इन मुसीबतों से लड़ने में हमारी मदद कर सकती हैं। 

ये सब्जियां न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती हैं, बल्कि इनमें वो सारे पोषक तत्व भरे होते हैं जो हमें ठंड से लड़ने, इम्युनिटी बढ़ाने और सेहतमंद रहने की ताकत देते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 सब्जियों के बारे में जो सर्दियों में किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं।

पालक
सर्दियों में बाजार में दिखने वाली मुलायम और ताजी पालक स्वास्थ्य के लिए वरदान है। यह आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन-ए, सी और के जैसे जरूरी विटामिन्स से भरपूर होती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाव करते हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है। 

गाजर
ठंड के मौसम की सबसे चमकदार और मीठी सब्जी गाजर बेहद गुणकारी है। गाजर का नारंगी रंग उसमें बीटा-कैरोटीन की मौजूदगी की वजह से होता है, जो शरीर में जाकर विटामिन-ए में बदल जाता है। यह आंखों की रोशनी के लिए अमृत माना जाता है और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। गाजर में फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में सहायक है। 

मेथी
मेथी देखने में भले ही साधारण लगती है, लेकिन उसके गुण असाधारण हैं। स्वाद में थोड़ी कड़वी मेथी डाइजेस्टिव एंजाइम्स को एक्टिव करके पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। इसमें आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

चुकंदर
चुकंदर आयरन का एक शानदार सोर्स है और एनीमिया से लड़ने में बेहद कारगर है। इसके अलावा, चुकंदर में नाइट्रेट्स पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की इम्युनिटी बूस्ट करते हैं। 

शलजम
शलजम को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो सर्दी-खांसी से लड़ने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है। शलजम में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो कब्ज की समस्या को दूर करती है और पाचन को बेहतर बनाती है। 

क्रिकेट की दुनिया में बुमराह का कमाल, 7 साल बाद किसी ने नहीं तोड़ा यह रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: जसप्रीत बुमराह ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में अपनी गेंदबाजी की शुरुआत जोरदार की है. उसी दमदार प्रदर्शन का नतीजा है कि पहले दिन, पहले सेशन का खेल खत्म होते ही उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. और, उसी के साथ उन्होंने वो कर दिखाया जो पिछले 7 साल में कोई और गेंदबाज नहीं कर सका. बुमराह ने ये रिकॉर्ड विरोधी ओपनर्स को गुमराह कर बनाया है.

बुमराह ने तोड़ा रिकॉर्ड
सीधे शब्दों में कहें तो पिछले 7 सालों में जसप्रीत बुमराह दुनिया भर के ओपनर्स के लिए टेस्ट क्रिकेट में काल बनकर उभरे हैं. साल 2018 से अब तक उन्होंने इस फॉर्मेट में अब तक सबसे ज्यादा बार विरोधी ओपनर्स को आउट किया है. इस दौरान पहले ये रिकॉर्ड इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के नाम था, जिन्होंने 12 बार ओपनर्स को चलता किया था.

लेकिन, साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट के पहले दिन, पहली पारी के अपने पहले स्पेल में ही ना सिर्फ बुमराह ने दोनों विरोधी ओपनर्स के पांव क्रीज से उखाड़े बल्कि स्टुअर्ट ब्रॉड का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. टेस्ट में ये 13वीं बार था, जब बुमराह ने ओपनर को आउट किया था.

ऐसे किया दोनों ओपनर को शिकार
जसप्रीत बुमराह ने पहले रियान रिकल्टन को क्लीन बोल्ड किया. फिर एडन मार्करम को विकेट के पीछे लपकवाया. पहले विकेट के दौरान उनकी उस शानदार गेंद का जौहर देखने को मिला, जिसकी रफ्तार 140 किलोमीटर प्रतिघंटे से ज्यादा थी. तो दूसरे विकेट में ऋषभ पंत का इंजरी से वापसी करने के बाद पहला जबरदस्त कैच देखने को मिला. बुमराह ने साउथ अफ्रीकी ओपनर्स का शिकार अपने पहले स्पेल में 7 ओवर में 9 रन देकर किया. इस दौरान उन्होंने 4 ओवर मेडन फेंके.

बुमराह ने अश्विन को छोड़ा पीछे
रियान रिकल्टन को क्लीन बोल़्ड कर जसप्रीत बुमराह ने अश्विन को भी पीछे छोड़ दिया है. वो अब बोल्ड कर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे भारतीय बन गए हैं. ये 152वीं बार था, जब बुमराह ने बल्लेबाज को बोल्ड मारा था. इस मामले में उन्होंने अश्विन को पीछे छोड़ा है, जिन्होंने 151 बोल्ड भारत में मारे हैं. वहीं कुंबले ने 186 बार जबकि कपिल देव के नाम 167 क्लीन बोल्ड दर्ज है.

चुनावी मंच पर गूंजा मैथिली ठाकुर का सुर, कैसे बनी लोक गायिका से लोकप्रिय चेहरा

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मुंबई: प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर, जिनकी आवाज में एक अलग ही जादू है। अब वह राजनीति की दुनिया में कदम रख चुकी हैं। बिहार चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुईं। अलीनगर सीट से चुनाव लड़ा। आज चुनाव परिणाम आने पर उनके राजनीति सफर का भाग्य तय होगा। इससे पहले जानिए, मैथिली ठाकुर के जीवन और संगीत के सफर के बारे में। 

कौन हैं मैथिली ठाकुर?
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर और माता भारती ठाकुर दिल्ली में रहते हैं, जो शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। गायिक का बचपन से ही संगीत के प्रति रुझान था, उन्होंने चार साल की उम्र से ही अपने दादा से संगीत सीखना शुरू किया और दस साल की उम्र तक जागरणों और स्थानीय संगीत समारोहों में कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने लगीं। 

साल 2011 में हुआ संगीत का सफर 
मैथिली की संगीत यात्रा 2011 में शुरू हुई, जब वह जी टीवी में प्रसारित होने वाले लिटिल चैंप्स नामक एक रियलिटी शो में दिखाई दी थीं। इसके बाद साल 2017 में गायिका ने ‘राइजिंग स्टार’ के सीजन 1 में ‘ओम नम: शिवाय’ गाया, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने ‘होली रे रसिया’, ‘हरि नाम नहीं तो जीना क्या’, ‘महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम’ से लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गईं। आज गायिका अपने छोटे भाइयों ऋषभ और अयाची के साथ मिलकर भक्ति गानों के साथ बिहार की लोक संस्कृति को भी गानों के जरिए बयां करती हैं। 

कब से उठी राजनीति में शामिल होने की चर्चा?
संगीत जगत में नाम कमाने के बाद मैथिली ठाकुर ने राजनीति में आने का सोचा। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। कुछ वक्त बाद वह बिहार चुनाव में खड़ी हो गईं। इस वक्त भी जब वोटों की गिनती चल रही है तो वह अपनी सीट से आगे चल रही हैं। 

बावुमा का विकेट कुलदीप यादव के लिए बड़ा मोड़, जानें क्या है पीछे की खास वजह

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नई दिल्ली: कुलदीप यादव के लिए ना सिर्फ कोलकाता टेस्ट बल्कि उसकी पहली पारी में लिया साउथ अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा का विकेट भी खास बन गया है. और, इसी के साथ रेड बॉल क्रिकेट में कुलदीप यादव एक बार फिर से छाते हुए नजर आए. कुलदीप यादव के लिए कोलकाता टेस्ट के खास होने की वजह सिर्फ इतनी है कि ये उनका ईडन गार्डन्स पर पहला टेस्ट मैच है. इससे पहले करियर में उन्होंने जो भी 15 टेस्ट खेले, उसमें से कोई भी ईडन गार्डन्स पर नहीं खेले.

कुलदीप यादव के लिए बावुमा का विकेट खास क्यों?
अब सवाल है कि कुलदीप यादव के लिए टेंबा बावुमा का विकेट कैसे खास बन गया? साउथ अफ्रीका के कप्तान का विकेट लेकर भारत के चाइनामैन गेंदबाज ने दरअसल एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. ऐसा कर उन्होंने भारतीय सरजमीं पर अपने 150 विकेट पूरे कर लिए. मतलब, टेंबा बावुमा भारत में लिए इंटरेनशनल विकेटों में उनके 150वें शिकार रहे.

कुलदीप ने कैसे उखाड़े बावुमा के पांव?
कुलदीप यादव ने टेंबा बावुमा को लेग स्लिप पर खड़े ध्रुव जुरेल के हाथों कैच कराकर पवेलियन का रास्ता दिखाया. कप्तान बावुमा 11 गेंदों का सामना कर सिर्फ 3 रन ही बना सके.

भारत में ऐसा करने वाले कुलदीप 9वें गेंदबाज
कुलदीप यादव भारत में 150 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले 9वें गेंदबाज हैं. ये कारनामा उन्होंने 87 पारियों में कर दिखाया है. कुलदीप से पहले जिन 8 गेंदबाजों 150 या उससे ज्यादा विकेट झटके हैं, उनमें सबसे ऊपर 476 विकेटों के साथ अनिल कुंबले का नाम है. उनके बाद 193 पारियों में 475 विकेट लेकर अश्विन हैं. हरभजन ने 201 पारियों में 380 विकेट चटकाए हैं. रवींद्र जडेजा के भी फिलहाल 377 इंटरनेशनल विकेट भारत में हैं. कपिलदेव ने 202 पारियों में 319 विकेट लिए हैं. जबकि श्रीनाथ के 211, जहीर के 201 और मोहम्मद शमी के 168 विकेट हैं.

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बड़ी फिल्मों की वजह से ‘आगरा’ के शो घटे, टीम ने जताया विरोध, मनोज बाजपेयी भी आए साथ

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मुंबई: हर शुक्रवार की तरह इस बार भी कई फिल्में रिलीज हुई हैं। इन फिल्मों में एक नाम कनु बहल की फिल्म ‘आगरा’ का भी शामिल है। साल 2023 में कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई इस फिल्म को काफी सराहना भी मिली थी। अब 14 नवंबर को यह फिल्म भारत में रिलीज हुई है। यह एक स्वतंत्र फिल्ममेकर की फिल्म है, नतीजा फिल्म का उतना शोर-शराबा नहीं है। लेकिन अब फिल्म के निर्देशक कनु बहल ने ‘आगरा’ को पर्याप्त स्क्रीन न मिलने की बात कहते हुए बड़ी मल्टीप्लेक्स सिनेमा चेन्स पर तंज कसा है। इसके पीछे उन्होंने कथित बड़ी फिल्मों को कारण बताया है। अब दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कनु की इन बातों का समर्थन किया है।

कनु बहल ने ट्वीट कर जताई नाराजगी
निर्माता कनु बहल ने फिल्म ‘आगरा’ की रिलीज को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में कनु ने ‘आगरा’ पर अपडेट देते हुए लिखा, ‘हमें तथाकथित ‘बड़ी ब्लॉकबस्टर’ फिल्मों और छोटी फिल्मों के मल्टीप्लेक्स चेन प्रोग्रामिंग में फिट न होने के कारण शो देने से मना किया जा रहा है। अब यह आप दर्शकों पर निर्भर है। बोलिए और चेन को टैग कीजिए। कहिए कि आप फिल्म देखना चाहते हैं।’ अपने इस ट्वीट में कनु ने किसी फिल्म का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उनका इशारा उन कथित बड़े स्टार्स और बड़े बजट वाली कमर्शियल फिल्मों की ओर ही है। इस हफ्ते भी रिलीज हुई फिल्मों में अजय देवगन और आर माधवन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ इसी तरह की बड़े बजट और बड़ी स्टार वाली फिल्म है।

मनोज बाजपेयी ने किया समर्थन
कनु बहल की इन बातों का मनोज बाजपेयी ने समर्थ किया है। मनोज बाजपेयी ने कनु बहल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए एक्स पर लिखा, ‘इस लड़ाई को लड़ते हुए बहुत समय हो गया है। इंडी निर्माताओं और उनकी कला को अक्सर व्यापक सिनेमा जगत में नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगे रहो, कानू तुम्हारा प्रयास सचमुच मायने रखता है। सभी को आगे आकर छोटे और सार्थक सिनेमा का समर्थन करना चाहिए और अपने सिनेमाघरों से इन फिल्मों को उचित मौका देने का अनुरोध करना चाहिए।’

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